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समझिए भारत में क्यों नहीं आ सकती बांग्लादेश जैसी स्थिति: कभी ‘हैप्पीनेस इंडेक्स’ पर चिढ़ाने वाला गिरोह आज देख रहा देश में अराजकता के ख्वाब, अंतर समझो और पीट लो माथा

बांग्लादेश में अराजकता का माहौल है। प्रधानमंत्री शेख हसीना को मुल्क छोड़ना पड़ा। उनका विमान भारत के गाजियाबाद स्थित हिंडन एयरपोर्ट पर लैंड हुआ। उन्होंने अपना इस्तीफा भी दे दिया है। अब बांग्लादेश में फौज ये तय कर रही है कि आगे क्या होगा। बांग्लादेश के सेनाध्यक्ष वकार-उज-जमान का कहना है कि वो विपक्षी पार्टियों से बात कर के नई अंतरिम सरकार के गठन के लिए पहल करेंगे। दो-तिहाई बहुमत से हाल ही में सत्ता में लौटी शेख हसीना की ‘आवामी लीग’ को इन चर्चाओं से पूरी तरह अलग रखा जाएगा।

बांग्लादेश में कोटा का मुद्दा, भारत में आरक्षण पर राजनीति

आगे बढ़ने से पहले जान लेते हैं कि बांग्लादेश में ऐसी स्थिति आई ही क्यों है। असल में ये पूरा का पूरा मामला आरक्षण से जुड़ा है। बड़ा ही जाना-पहचाना शब्द लग रहा है न? 1990 के दशक की शुरुआत में प्रधानमंत्री रहे VP सिंह OBC समाज के लिए 27% आरक्षण का फैसला लेकर आए थे, तभी से भारत में भी आरक्षण को लेकर लेकर हिंसा होती रही है। इसके पक्ष-विपक्ष में सोशल मीडिया में दलीलें दी जाती रही हैं। अब सुप्रीम कोर्ट ने SC/ST समाज में उपवर्गीकरण का आदेश दिया है, ताकि जो पिछड़ गए हैं उन्हें भी फायदा मिले। इसके खिलाफ कुछ जातियों ने ‘भारत बंद’ बुला रखा है।

कॉन्ग्रेस पार्टी की तो आजकल की पूरी की पूरी राजनीति ही आरक्षण और जाति के इर्दगिर्द घूमती है। राहुल गाँधी संसद में हर सवाल के जवाब में जातिगत जनगणना कराने की बातें करते हैं। ये बिहार में हो चुका है, लेकिन कोई नहीं बता रहा कि इससे फायदा क्या हुआ। राम मंदिर को लेकर एक हुए हिन्दुओं को जातियों में बाँटने के लिए ‘मंडल पॉलिटिक्स’ फिर शुरू है। बांग्लादेश में जिस आरक्षण को लेकर विवाद हुआ, वो जाति वाला नहीं बल्कि मुल्क की आज़ादी की लड़ाई लड़ने वाले परिवारों से जुड़ा हुआ था। साथ ही इसके तहत पाकिस्तान द्वारा प्रताड़ित की गई महिलाओं, कुछ क्षेत्रों और कुछ जनजातियों को प्राथमिकता दी गई थी। ये फैसला खुद बंग-बंधु शेख मुजीबुर रहमान का था

बांग्लादेश के स्वतंत्रता सेनानियों को ‘मुक्ति योद्धा’ कहा जाता है। तर्क ये था कि ये ‘मुक्ति योद्धा’ जब युवा थे जब उन्हें आरक्षण देने का तुक बनता था क्योंकि तब वो नौकरी खोज रहे थे। हालाँकि, बाद में ये आरक्षण उनके बेटे-बेटियों और फिर पोते-पोती-नाती-नातिन तक पहुँच गया। फिर आरोप लगा कि ‘आवामी लीग’ के कार्यकर्ता इसका फायदा उठा रहे हैं। 2018 में भी इसके खिलाफ प्रदर्शन हुआ था, तब हाईकोर्ट ने आरक्षण खत्म करने की माँग ठुकरा दी थी। फिर शेख हसीना ने सारा आरक्षण खत्म करने का निर्णय किया, इसका भी विरोध हुआ क्योंकि छात्र इसे खत्म करने की जगह सुधार की माँग कर रहे थे।

सरकारी नौकरियों में ‘मुक्ति योद्धाओं’ और उनके वंशजों के लिए 30% आरक्षण की व्यवस्था थी। ‘मुक्ति योद्धाओं’ के परिजन सुप्रीम कोर्ट पहुँचे और सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण की व्यवस्था फिर से बहाल कर दी। इससे 56% सरकारी नौकरियाँ आरक्षित हो गईं। सुप्रीम कोर्ट ने 93-7 की व्यवस्था दी थी, यानी 93% नौकरियाँ मेरिट के आधार पर और 7% आरक्षण के आधार पर। इसके बाद छात्रों ने सरकार के साथ असहयोग का आंदोलन चलाया। शेख हसीना ने प्रदर्शनकारियों को ‘रज़ाकार’ (पाकिस्तानी अत्याचारी) कह कर संबोधित किया और उनके दमन का प्रयास किया।

बांग्लादेश का ‘हैप्पीनेस इंडेक्स’ बताने वाले कहाँ गए?

खैर, ये था पूरा मामला। अब शेख हसीना जैसे ही बांग्लादेश छोड़ कर भारत आई हैं, उनके इस्तीफे के बाद भारत के एक वामपंथी गिरोह की बाँछें खिल गई हैं। कोई इसे ‘युवा शक्ति की जीत’ बता रहा तो कोई ‘लोकतंत्र की विजय’ करार दे रहा। इसमें विनोद कापड़ी और अभिनव पांडेय जैसे पत्रकार शामिल हैं। RJ सायमा और अरफ़ा खानम शेरवानी जैसी सोशल मीडिया में प्रभाव रखने वाली मुस्लिम महिलाएँ भी जश्न मना रहीं। इनकी शह पर कुछ सोशल मीडिया हैंडल लिख रहे कि PM नरेंद्र मोदी के साथ ऐसा होगा तो वो किस देश में लैंड करेंगे?

ये अलग बात है कि कुछ दिनों पहले तक यही गिरोह बांग्लादेश का ‘हैप्पीनेस इंडेक्स’ दिखा कर मोदी सरकार के समर्थकों को चिढ़ा रहा था। YouTuber ध्रुव राठी भाजपा समर्थकों को ‘अंधभक्त’ कहते हुए ऐसे समझा रहे थे जैसे कि बांग्लादेश ही दुनिया की नई महाशक्ति बन गया हो। वो कह रहे थे कि वास्तविक विकास कैसे होता है, इसमें बांग्लादेश अपने पड़ोसी देशों के लिए उदाहरण सेट कर रहा है। वहीं ‘वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट’ में भी बांग्लादेश को 125वीं रैंक दी गई थी, जबकि भारत को 140वें स्थान पर रखा गया था। इसे लेकर भारत को यहीं के वामपंथियों ने खूब चिढ़ाया था और जैसा कि वो करते रहे हैं, ‘विश्वगुरु’ वाला तंज कसा था।

अब देखिए, जो गिरोह कल तक बांग्लादेश की तारीफ़ में कसीदे पढ़ रहा था अब वही गिरोह बांग्लादेश की अराजकता को ‘तानाशाही का अंत’ बता रहा है। स्थिति ऐसी है कि सरकारी इमारतें जलाई जा रही हैं, ISKCON के मंदिर और माँ काली के मंदिर जलाए जा रहे हैं। हिन्दू नेताओं और पत्रकारों की हत्याएँ हुई हैं। भीड़ PM आवास में घुस गई। वहाँ से महिलाओं के प्राइवेट कपड़ों को लूट कर लहराया जा रहा है। जो हिन्दू पहले से ही डरे हुए थे, उनके लिए मोदी सरकार से हस्तक्षेप की माँग की जा रही है। 2021 के दशहरा में कुरान के अपमान की अफवाह फैला कर कई मंदिरों और पूजा पंडालों को जलाया गया था।

इन सबको नज़रअंदाज़ कर भारत का वामपंथी गिरोह बांग्लादेश की अराजक भीड़ का महिमामंडन कर रहा है। शायद इन्हें पता नहीं है कि भारत में ऐसी स्थिति नहीं चलती। जहाँ तक तानाशाही की बात है, 1975 में इंदिरा गाँधी ने यहाँ ‘आपातकाल’ लगा कर विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार करवाया था और उनके बेटे संजय गाँधी ने कइयों की जबरन नसबंदी कराई थी। आखिरकार उन्हें चुनाव कराना पड़ा और उसमें उनकी बुरी हार हुई। जन-आंदोलन से निकली ‘जनता पार्टी’ जब ठीक से शासन नहीं कर पाई तो 1980 में उसकी भी बुरी हार हुई।

मजबूत है भारत का लोकतंत्र, यहाँ चुनाव मतलब उत्सव

जो लोग ये दिवास्वप्न देख रहे हैं कि भारत में बांग्लादेश जैसी स्थिति आ जाएगी, उन्हें ये देखना चाहिए कि यहाँ जनता सामूहिक नाराज़गी का जवाब चुनावों में देती है। भले ही लोकसभा चुनावों के लिए 5 साल इंतज़ार करना पड़े, लेकिन बीच में अलग-अलग राज्यों के चुनाव आते हैं और जनता के पास जवाब देने के कई मौके होते हैं। सत्ताधारी पार्टी राज्यों के चुनाव में हारती है तो वो जनता की भावनाओं को समझ कर उस अनुरूप काम करती है। नहीं करेगी, तो सत्ता किसी और को मिल जाएगी। भाजपा भले केंद्र में 10 वर्षों से सत्ता में है, बीच में उसने बिहार और हिमाचल प्रदेश से लेकर कई चुनाव हारे।

दूसरी बात, भारत में विकास कार्य काफी तेज़ी से हो रहा है। कोरोना के दौरान 100 से अधिक देशों को भारत ने वैश्विक महामारी से निपटने के लिए वैक्सीन भेजी। देश सड़कों के निर्माण के मामले में रिकॉर्ड बना रहा है, यहाँ रेल नेटवर्क को दुरुस्त किया जा रहा है, अब महिलाएँ मिट्टी के चूल्हे पर भोजन नहीं पकातीं क्यों ‘उज्ज्वला’ के तहत उन्हें गैस सिलिंडर मिलता है, शत-प्रतिशत गाँवों में बिजली पहुँची है, हर घर नल से स्वच्छ जल पहुँच रहा है, करोड़ों घर बन रहे हैं ग़रीबों के, व्यवसाय करने के लिए ऋण दिए जा रहे हैं, यहाँ कई शैक्षिक संस्थान हैं अव्वल दर्जे के, जिनसे निकले युवा बड़ी नौकरियाँ पाते हैं।

बांग्लादेश में ये सब नहीं था। दूसरा बड़ा कारण है, भारत की अर्थव्यवस्था बड़ी विविधता वाली है। कृषि पर आधी से अधिक जनसंख्या निर्भर है, लेकिन यहाँ की उपजाऊ भूमि और किसानों को मिलने वाली सरकारी सहूलियतों ने कृषकों का जीवन आसान किया है। IT सेक्टर में भारत एक हब है। यहाँ NCR, पुणे, हैदराबाद और चेन्नई जैसे कई शहर सॉफ्टवेयर कंपनियों की पसंद बन रहे हैं। बांग्लादेश में IT सेक्टर फल-फूल रहा था लेकिन सस्ते वर्कफोर्स के कारण। बांग्लादेश टेक्सटाइल-गारमेंट्स उद्योग पर निर्भर है, कोरोना के दौरान इस इंडस्ट्री को भी मार पड़ी।

बांग्लादेश और भारत के लोगों में भी फर्क है। बांग्लादेश एक इस्लामी मुल्क है, भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है जहाँ हिन्दू बहुलता में हैं लेकिन हर धर्म-पंथ-मजहब के लोग यहाँ खुल कर जीते हैं, अपनी परंपराओं का पालन करते हैं। भारत कई भाषाओं वाला देश है। हमने विविधता को आत्मसात किया है। हम इसके साथ ही जीते हैं। ऐसे में एक भारतीय खुद को समय एवं स्थान के हिसाब से अनुकूलित करने की क्षमता रखता है, वो समझौता कर के भी रह सकता है। क्योंकि, उसे पता है कि कठिन समय लंबे नहीं चलते। यही कारण है कि भारत में क्रूर शासकों को हमेशा सत्ता से बेदखल होना पड़ा, या उनका प्रभाव घट गया। हालाँकि, कभी लाख-करोड़ लोग एक साथ अराजक नहीं हुए।

भारत की लोकतांत्रिक संस्थाएँ स्वायत्त हैं। सबसे पहले यहाँ की न्यायपालिका की बात कर लीजिए, कई फैसले आपको सरकार के खिलाफ जाते हुए दिखेंगे। यहाँ की बहुमत वाली आबादी को भी अपने आराध्य देवता के जन्मस्थान पर मंदिर के लिए 500 वर्ष संघर्ष करना पड़ा। ED, CBI और IT जैसी संस्थाओं पर पक्षपात के आरोप ज़रूर लगते हैं लेकिन ये कोरी राजनीति का हिस्सा होते हैं और अंतिम फैसला अदालत में ही होना होता है। यहाँ की सेना एक पदक्रम वाले अनुशासन का पालन करती है, उनका प्रशिक्षण ऐसा होता है कि वो देशहित में कार्य करते हैं, तख्तापलट जैसी चीजें यहाँ की विचारधारा में ही नहीं है।

भारत में चुनाव निष्पक्ष होते हैं, इसके लिए चुनाव आयोग जैसी संस्था है। यहाँ गाँवों में वार्ड से लेकर राजधानी में राष्ट्रपति तक के चुनाव बड़े ही पारदर्शी और निष्पक्ष प्रक्रिया के तहत होते हैं। चुनाव भारत में एक उत्सव है, भले ही ये पंचायत का हो या प्रधानमंत्री का। हर कोई हिस्सा लेता है। बांग्लादेश में चुनावी प्रक्रिया ही सवालों के घेरे में थी, लोगों में वोट डालने का उत्साह भी नहीं था। स्थानीय चुनावों में तो वहाँ 35% मतदाता भी नहीं निकले। भारत में सहकारी संस्थाओं से लेकर वकील संघों तक में, हर जगह चुनाव होते हैं। भारत लोकतंत्र को जीता है। बांग्लादेश जैसे मुल्कों में ये नहीं होता।

नहीं, भारत नहीं बन सकता पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका या म्यांमार

भारत की संसद में किसी भी मुद्दे पर लंबी बहस होती है और जनता इसका लाइव प्रसारण देखती है। संसद में दो सदन हैं, ऐसे में हर बिल को पारित कराना एक बड़ी चुनौती होती है। पूरी की पूरी स्क्रूटनी से सब कुछ गुजरता है। मीडिया की वजह से जनता की नज़र हर एक चीज पर होती है। यहाँ प्रमुख सोशल मीडिया मंच प्रतिबंधित नहीं हैं, हर कोई अपनी राय रखता है। बांग्लादेश में समय-समय पर फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म्स बैन किए जाते रहे हैं। भारत में समाचारपत्रों के कॉलमों से लेकर टीवी की बहस और सोशल मीडिया के ट्वीट्स तक, पक्ष-विपक्ष में रोज लाखों लोग अपनी राय रखते हैं।

1991 हो या फिर 2008, ऐसा नहीं है कि भारत पर वैश्विक आर्थिक तंगी का प्रभाव नहीं पड़ा लेकिन कभी उदारीकरण तो कभी वित्तीय पैकेजों के माध्यम से हमेशा इसे नियंत्रित किया गया। यहाँ हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश की अलग-अलग अर्थव्यवस्था है, अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियाँ हैं, अलग-अलग उद्योग-धंधे हैं और यहाँ तक कि खेती की मिट्टी भी अलग-अलग है। इस कारण कोई एक समस्या पूरे देश को बुरी तरह प्रभावित नहीं करती। 1980 के दशक में पंजाब में खालिस्तानी आतंकद हो या फिर जम्मू कश्मीर में इस्लामी आतंकवाद, हमारे सुरक्षा बल उससे निपटने में सक्षम होते हैं

हम श्रीलंका की तरह कर्ज में डूबे हुए नहीं हैं, न ही पाकिस्तान की तरह महँगाई हमें मार रही है और हमें कटोरा लेकर भीख के लिए घूमना पड़ रहा है। म्यांमार की तरह यहाँ सेना चुनी हुई सरकार को अपदस्थ नहीं करती। बांग्लादेश के हालात आप देख ही रहे हैं। हाँ, भारत में ‘किसान आंदोलन’ हुए, अब जातियों के जरिए लड़ाई की साजिश रची जा रही है, लेकिन हमेशा भारत की राजनीति और यहाँ की सुरक्षा एजेंसियों के पास इन सबसे निपटने के तरीके होते हैं। भारत, बांग्लादेश नहीं है। ये पाकिस्तान नहीं है, अरब नहीं है, म्यांमार नहीं है, पाकिस्तान नहीं है।

हाँ, पाकिस्तान और बांग्लादेश ज़रूर कभी भारत हुआ करते थे। भारत में हजारों वर्ष पूर्व भी गुरुकुलों में अनुशासन सिखाया जाता था, राजा-महाराजा भी ऋषि-मुनियों के सामने अपना मुकुट उतार कर सिर झुकाते थे। पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों ने उस संस्कृति को छोड़ कर बाहरी इस्लामी संस्कृति को आत्मसात किया, इस कारण वो अनुशासन भूल गए। हर देश में सत्ताधीश मलाई चाटते हैं, लेकिन पाकिस्तान-बांग्लादेश जैसे देशों में जनता को लूट कर यूरोप में संपत्ति जुटाने का चलन है। भारत की महान संस्कृति के अंश यहाँ की मिट्टी में रचे-बसे हैं, वो हमेशा हमें सही राह दिखाते हैं।

जहाँ तक गिरोह विशेष की बात है, जब 2011 में ‘अरब स्प्रिंग’ आया था तब भी वो भारत में अराजकता के सपने देख रहे थे। आज क्या स्थिति है? सीरिया ISIS का गढ़ बन गया, यमन में हूती और सरकार लड़ रहे, ट्यूनीशिया में PM को बरख़ास्त कर के संसद भंग कर दी गई, मिस्र में राष्ट्रपति मोहम्मद मोर्सी को फ़ौज ने भगा दिया, बहरीन में अल-खलीफा परिवार के खिलाफ बोलना अपराध है और लीबिया में कई इस्लामी गुट आपस में लड़ रहे हैं। अराजकता से ये कैसा प्रेम है इस गिरोह को? वैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ हिंसा भड़काने में ये कई दिनों से लगे हुए हैं।

मुस्लिम बहुल गाँव में काँवड़ यात्रियों का रास्ता रोक कर हमला, शिवभक्तों को दी गईं गंदी-गंदी गालियाँ: तैमूर और उसके साथियों की गिरफ्तारी न होने पर भड़के ग्रामीण

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में पड़ने वाले एक मुस्लिम बाहुल्य गाँव में काँवड़ यात्रियों का रास्ता रोक लिया गया। यहाँ शुक्रवार (2 अगस्त, 2024) को शिवभक्तों से गाली-गलौज और मारपीट भी की गई। कांवड़ यात्रियों ने इसे सोची समझी साजिश बताते हुए पुलिस में शिकायत दी है। शिकायत में यामीन के बेटे बिल्लू, शाहिद, माज़िद, गुलबहार, तैमूर, फारुख, महरूफ, कामिल, शाकिर, शाहरुख़ व कुछ अन्य लोगों को नामजद किया गया है। पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ FIR दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। आरोपितों की गिरफ्तारी न होने से नाराज हिन्दू संगठन सोमवार (5 अगस्त, 2024) को थाने पर एकजुट हुए।

यह घटना सहारनपुर जिले के थाना क्षेत्र सरसावा की है। शनिवार (4 अगस्त) को यहाँ ढिक्काकला गाँव के सुधीर कुमार शर्मा ने पुलिस में तहरीर दी है। तहरीर में उन्होंने बताया कि उनके गाँव के बगल मुस्लिम बाहुल्य इलाका है जिसे टबरा गाँव बोलते हैं। शुक्रवार (2 अगस्त) की शाम लगभग 3:40 पर इस गाँव के आगे काँवड़ यात्री पहुँचे। इनके साथ DJ भी था जिस पर धार्मिक गाने बज रहे थे। आरोप है कि इस गाँव के कुछ मुस्लिमों ने पहले से ही काँवड़ियों को न निकलने देने की साजिश रच रखी थी।

शिकायत के मुताबिक, यामीन के बेटे बिल्लू, शाहिद, माज़िद, गुलबहार, तैमूर, फारुख, महरूफ, कामिल, शाकिर, शाहरुख़ व कुछ अन्य लोगों ने काँवड़ यात्रियों को रोक कर घेर लिया। इन सभी के हाथों में लाठी-डंडे और सरिया आदि होने का दावा किया गया है। आरोप है कि इन सभी ने पहले शिवभक्तों को गंदी-गंदी गालियाँ दीं, फिर उनके साथ मारपीट की गई। शिकायतकर्ता का बेटा भी उन पीड़ित कांवड़ियों में से एक था। उसने अपने घर पर इस विवाद की सूचना दी। आखिरकार मामले की सूचना पुलिस तक भी पहुँची।

पुलिस ने फ़ौरन मौके पर पहुँच कर हालात को काबू किया। दोनों पक्षों को समझा कर शांत करवाया गया। पीड़ित काँवड़ियों की तरफ से सुधीर कुमार ने आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। पुलिस ने इस मामले में मुस्लिम समुदाय के 12 आरोपितों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज कर ली है। इन सभी पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 126 (2), 191 (2), 115 (2), 352 और 300 के तहत कार्रवाई की है। इस बीच 24 घंटे बीत जाने पर भी आरोपितों की गिरफ्तारी न होने पर हिन्दू संगठनों ने नाराजगी जताई है।

ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। सोमवार (5 अगस्त) को सरसावा थाने पर ग्रामीणों और हिन्दू संगठन से जुड़े लोगों का जमावड़ा हुआ। इन सभी ने पुलिस पर आरोप लगाया कि वो आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई में हीलाहवाली कर रही है। सरसावा के डॉक्टर सुभाष चौहान ने कहा कि काँवड़ियों के DJ के भी बंद करने की कोशिश की गई। उन्होंने बताया कि पुलिस के आने से काँवड़ियों की जान बच पाई थी। कुछ ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि हमलावरों ने पुलिस की मौजूदगी में कांवड़ियों के साथ अभद्रता की है।

‘किस आधार पर 77 मुस्लिम जातियों को दे दिया OBC का दर्जा?’: सुप्रीम कोर्ट का TMC सरकार से सवाल, कोलकाता हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से किया इनकार

मुस्लिम समुदाय की 77 जातियों को OBC समुदाय का दर्जा और आरक्षण देने के मामले में ममता सरकार सुप्रीम कोर्ट में भी घिर गई है। सुप्रीम कोर्ट ने इन 77 जातियों के OBC कोटे को खत्म करने वाले कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से फिलहाल इनकार कर दिया है। कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई थी। अब सोमवार (5 अगस्त, 2024) को उच्चतम न्यायालय ने ममता बनर्जी सरकार को नोटिस जारी करते हुए उन 77 जातियों को OBC वर्ग में शामिल करने का आधार पूछा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ममता सरकार ने OBC समुदाय में मुस्लिम समाज की 77 जातियों को शामिल किया था। इस फैसले का काफी विरोध हुआ था और इसे कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। कलकत्ता हाईकोर्ट ने ममता सरकार के इस फैसले को रद्द कर दिया था। हाईकोर्ट के इसी फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया था। इस मामले में सोमवार (5 अगस्त) को सुनवाई हुई। सोमवार को यह सुनवाई प्रधान न्यायाधीश जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़, जस्टिस जे बी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच में हुई।

पश्चिम बंगाल सरकार की तरफ से सरकारी वकील इंदिरा जयसिंह पेश हुईं। पश्चिम बंगाल सरकार के खिलाफ प्रतिवादी के तौर पर सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने बहस की। पश्चिम बंगाल सरकार ने उच्चतम न्यायालय में यहाँ तक कह डाला कि कलकत्ता हाईकोर्ट ही प्रदेश में सरकार चलाना चाह रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस आदेश का विरोध इसलिए हो रहा है क्योंकि आरक्षण पाने वाली जातियाँ मुस्लिम समुदाय की हैं। इंदिरा जयसिंह ने इसे मंडल आयोग के निर्देशों पर उठाया गया सही कदम ठहराया।

वहीं प्रतिवादी अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने इंदिरा जयसिंह के तर्कों का विरोध किया। दोनों पक्षों के सुनने के बाद तीनों जजों की बेंच ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से फिलहाल इंकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को नोटिस जारी करते हुए सवाल किया है कि किस आधार पर उन्होंने मुस्लिम समाज की 77 जातियों को OBC वर्ग में शामिल किया है ? सुप्रीम कोर्ट ने उन दो निजी वादियों को भी नोटिस जारी किया है जिन्होंने ममता सरकार के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की थी।

बताते चलें कि कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा 77 मुस्लिम जातियों को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के रूप में वर्गीकृत करने को रद्द कर दिया था और 2010 के बाद पश्चिम बंगाल में जारी सभी अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) प्रमाण पत्र रद्द कर दिए थे।

मुस्लिम लड़की से शादी करने वाले हिंदू युवक की हत्या, रिश्ते नॉर्मल करने की बात कह बुलाया और कुल्हाड़ी-चाकू-रॉड से किया हमला: नाबालिग सहित 7 गिरफ्तार

गुजरात के द्वारका जिले में मुस्लिम लड़की से शादी करने की वजह से एक हिन्दू युवक की बेरहमी से हत्या कर दी गई है। मृतक का नाम याग्निक लाक्षीदास दूधरेजिया है। याग्निक ने डेढ़ साल पहले अपनी ही गाँव की मुस्लिम लड़की रज़मा से लव मैरिज की थी। रज़मा के घर वालों को यह रिश्ता मंजूर नहीं था। सुरक्षा के डर से पत्नी सहित गाँव छोड़ चुके याग्निक को धोखे में रख कर पहले बुलाया गया, फिर शनिवार (3 अगस्त, 2024) को उन्हें कुल्हाड़ी से काट डाला गया।

इस केस में एक नाबालिग सहित रजमा के भाई साजिद, उसके चाचा सलीम, आमेद मूसा, जुमा, उस्मान और कासम को नामजद किया गया है। सभी आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना द्वारका जिले के भनवाद तालुका की है। यहाँ के शेधाखाई गाँव के रहने वाले याग्निक ने लम्बे समय तक चले प्रेम प्रसंग के बाद डेढ़ साल पहले पड़ोस में रहने वाली मुस्लिम लड़की ईशा से शादी कर ली थी। दोनों एक-दूसरे के साथ बेहद खुश थे लेकिन ईशा के घर वाले इस रिश्ते से नाराज थे। याग्निक को जान से मार डालने की धमकियाँ मिलने लगीं थीं जिस वजह से उसने अपनी पत्नी सहित गाँव छोड़ दिया। डेढ़ महीने पहले याग्निक एक बच्ची का पिता बना।

इस बीच रज़मा के घर वाले याग्निक से अपने रिश्ते सामान्य होने का दिखावा करने लगे। इसी दिखावे के जाल में फँस कर याग्निक अपनी पत्नी और बेटी के साथ गाँव लौट आया। हालाँकि रजमा के परिजन अंदर ही अंदर गुस्से से भरे हुए थे। वो याग्निक को ठिकाने लगाने के लिए सही समय की तलाश में थे। शनिवार की दोपहर लगभग 3 बजे याग्निक अपने एक दोस्त के साथ घर से निकल कर गाँव के बस अड्डे तक गया। इसी दौरान रज़मा के परिजनों ने उसका पीछा किया। इन परिजनों में एक नाबालिग के साथ साजिद, सलीम, आमेद, जुमा, उस्मान, होती कासम शामिल थे।

बताया जा रहा है कि इन सभी के हाथों में कुल्हाड़ी, चाकू और लोहे के पाइप जैसे घातक हथियार थे। इन्होने याग्निक को चारों तरफ से घेर लिया और अंधाधुंध वार शुरू कर दिए। याग्निक सम्भल या कुछ समझ पाता उस से पहले उसके पेट में कई चाकू और सिर में लोहे की रॉड लग गईं। हमले के दौरान आरोपित शोर मचा रहे थे कि इसने हमारी लड़की से शादी कर ली है, इसे ज़िंदा नहीं छोड़ना है। याग्निक के दोस्त ने हमलावरों के आगे हाथ जोड़े और रहम की अपील की। हालाँकि, इस अपील का हमलावरों पर कोई फर्क नहीं पड़ा।

याग्निक के साथी ने उसके परिजनों को फोन पर सूचना दी। फ़ौरन ही उसकी माँ और बीवी घटनास्थल पर पहुँचीं। तब तक हमलावर फरार हो चुके थे। मामले की सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस और परिजनों ने गंभीर रूप से घायल याग्निक को अस्पताल पहुँचाया। हालत गंभीर देख कर याग्निक को जामनगर रेफर कर दिया गया। जामनगर ले जाने के दौरान रास्ते में याग्निक की मौत हो गई। मृतक की माँ ने सभी हमलावरों के खिलाफ भानवड थाने में तहरीर दी। तहरीर के आधार पर पुलिस ने 1 नाबालिग सहित 7 हमलावरों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली।

पुलिस ने मृतक की माँ की तहरीर पर सभी आरोपितों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(2), 189(2), 189(4), 1991(2), 191(3), 190 और जीपी एक्ट धारा 135(1) के तहत कार्रवाई की है। नाबालिग सहित सभी अन्य आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है। याग्निक की पत्नी रजमा खुल कर मीडिया के सामने आईं और अपने भाइयों और चाचा के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की। रजमा ने बताया कि आरोपितों ने उनकी और डेढ़ माह की बच्ची की जिंदगी को बर्बाद कर दिया। पुलिस मामले की जाँच और अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई कर रही है।

पत्रकार-नेताओं की हत्या, मंदिर पर हमले… बांग्लादेश में हिंदू बने आसान शिकार: शेख हसीना को छोड़ना पड़ा देश, अल्पसंख्यकों को बचाने के लिए भारत से दखल की गुहार

बांग्लादेश में अराजक माहौल पैदा होने के बाद वहाँ की प्रधानमंत्री शेख हसीना को मुल्क छोड़ कर भागना पड़ा है, उन्होंने इस्तीफा दे दिया है। उनका विमान सोमवार (5 अगस्त, 2024) की शाम को गाजियाबाद स्थित हिंडन एयरपोर्ट पर लैंड हुआ। बता दें कि यहाँ भारतीय वायुसेना का बेस है। बता दें कि AJAX1431 कॉल साइन वाला C-130 एयरक्राफ्ट जैसे ही भारतीय सीमा की तरफ बढ़ा था, भारतीय सुरक्षा एजेंसियाँ इसे ट्रैक कर रही थीं। विमान पटना के ऊपर से होकर उत्तर प्रदेश में दाखिल हुआ।

शेख हसीना के मुल्क छोड़ने के कुछ ही देर बाद वहाँ के सेनाध्यक्ष वकार-उज-जमान ने घोषणा की कि विपक्षी दलों के साथ सलाह-मशविरा कर नई अंतरिम सरकार का गठन किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने बांग्लादेश की राजधानी ढाका के धानमंडी स्थित ‘सुधा सदन’ को आग के हवाले कर दिया है। उससे पहले यहाँ लूटपाट मचाई गई। प्रदर्शनकारियों ने PM आवास ‘गण भवन’ में घुस कर भी लूटपाट की और के सामान तहस-नहस कर दिए।

ढाका स्थित शाहजमाल इंटरनेशनल एयरपोर्ट को अस्थायी तौर पर बंद कर दिया गया है। वहीं इसी प्रदर्शन की आड़ में बांग्लादेश में हिन्दुओं को भी निशाना बनाया जा रहा है। हरधन रॉय नामक हिन्दू पार्षद को रंगपुर में मार डाले जाने की खबर है। साथ ही ISKCON के मंदिरों में भी तोड़फोड़ मचाई गई है। काली मंदिरों में घुस कर भी प्रदर्शनकारियों ने तोड़फोड़ की। बांग्लादेश में पहले से ही हिन्दू डरे हुए हैं। 2021 के दशहरा के दौरान ईशनिंदा का झूठा आरोप लगा कर कई पूजा पंडालों और मंदिरों को ध्वस्त कर दिया गया था।

हिन्दू पत्रकार की भी हत्या हुई है। रायगंज प्रेस क्लब को घेर कर प्रदर्शनकारियों ने पत्रकार प्रदीप कुमार भौमिक को मार डाला। इन सबके बीच भारत सरकार से भी हस्तक्षेप की माँग की जा रही है। हिन्दू संगठनों का कहना है कि मोदी सरकार को बांग्लादेश की नई व्यवस्था और फ़ौज के समक्ष ये स्पष्ट कर देना चाहिए कि वहाँ अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। भारत में कई वामपंथी इस अराजकता को ‘युवा शक्ति व लोकतंत्र की जीत’ बता कर इसका महिमामंडन कर रहे हैं। जबकि मुल्क के संस्थापक शेख मुजीबुर रहमान की मूर्ति ही तोड़ डाली गई है।

‘मुस्लिम एक हो गए तो…’: भड़काऊ पोस्ट करने वाला मौलाना हसीब अंसारी गिरफ्तार, लिखा था – शुक्र मनाओ मुस्लिम फिरके में बँटे हुए हैं, वरना…

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में शनिवार (3 अगस्त, 2024) को हसीब अंसारी नाम के युवक ने भड़काऊ पोस्ट डाली थी। इस पोस्ट में उसने एक हो जाने के बाद मुस्लिमों के पूरी फ़ोर्स लगाने के बावजूद काबू में न आने का चैलेन्ज दिया था। हिन्दू संगठनों ने तब हसीब अंसारी के खिलाफ ‘X’ हैंडल से शिकायत दर्ज करवाई थी। आखिरकार पुलिस हसीब अंसारी पर FIR दर्ज कर के उसे गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई सोमवार (5 अगस्त, 2024) को की गई है।

ऑपइंडिया ने हसीब अंसारी की इस करतूत को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। तब बरेली पुलिस ने इस मामले में जाँच कर के कार्रवाई की बात कही थी। सोमवार को हसीब अंसारी को दबोच लिया गया है। हसीब अंसारी के खिलाफ खुद पुलिस ने वादी बन कर 4 अगस्त (रविवार) को थाना नवाबगंज में केस दर्ज करवाया था। इस शिकायत में पुलिस ने हसीब अंसारी की पोस्ट को गैरकानूनी और सामाजिक ताने-बाने के खिलाफ पाया था। यह FIR ‘भारतीय न्याय संहिता’ (BNS) की धारा 353(2) के तहत दर्ज हुई थी।

पुलिस के अपनी FIR में हसीब अंसारी लिखी गई लाइन ‘मुस्लिम एक हो गया तो पूरी फ़ोर्स लगाने के बाद भी रोक नहीं मिलेगा। शुक्र मनाओ मुसलमान फिरके में पड़ा है’ का जिक्र किया है। बकौल पुलिस यह हरकत समाज में एक वर्ग के लोगों की भावनाओं को भड़काने वाली है। आरोपित को आखिरकार गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले में जाँच और अन्य जरूरी कार्रवाई की जा रही है। हसीब के अब्बा का नाम वहीद है। वह बरेली के नवाबगंज थाना क्षेत्र में आने वाले प्रभात नगर इलाके का निवासी है।

बताते चलें कि हसीब अंसारी ने यह आपत्तिजनक पोस्ट अपने व्हाट्सएप स्टेट्स पर डाली थी। तब उसने लिखा, “मुस्लिम एक हो गए तो पूरी फ़ोर्स लगाने के बाद भी रोक नहीं मिलेगा। शुक्र मनाओ कि मुसलमान फिरके-फिरके में पड़े हुए हैं और ये मौलवी इन्हें एक नहीं होने दे रहे हैं।” हसीब अंसारी ने इस स्टेट्स के ऊपर बड़े-बड़े शब्दों में लिख कर लोगों से इसे हर हाल में शेयर करने की गुजारिश भी की थी। हसीब अंसारी को बरेली के लोग मौलाना बताते हैं। उसने मदरसे से दीनी तालीम हासिल कर रखी है।

बरेली के ‘विश्व हिन्दू परिषद’ पदाधिकारी हिमांशु पटेल ने ऑपइंडिया से बात की। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई का स्वागत किया और हसीब अंसारी को गिरफ्तार करने वाले पुलिसकर्मियों की तारीफ की। हिमांशु पटेल ने बताया कि हसीब अंसारी निठल्लों की तरफ इधर-उधर घूमता है। आरोप है कि वो सोशल मीडिया पर कट्टरपंथी मौलवियों और मौलानाओं की भड़काऊ पोस्ट अक्सर शेयर करता है और बाकी लोगों को भड़काया करता है।

नाबालिग हिंदू लड़की को अगवा कर कई बार किया रेप, इस्लाम भी कबूल करवाया: ढाई महीने से फरार सलमान को बरेली पुलिस ने पकड़ा

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में एक नाबालिग हिन्दू लड़की के अपहरण और रेप का मामला सामने आया है। लगभग ढाई महीने पहले पीड़िता को अगवा करके हरियाणा और हिमाचल प्रदेश ले जाया गया था। यहाँ उस पर इस्लाम कबूल करने का दबाव बनाया गया। इस मामले में आरोपित का नाम सलमान बताया जा रहा है जिसे पुलिस ने 5 अगस्त 2024 को गिरफ्तार किया और पीड़िता को भी बरामद किया।

यह मामला बरेली के थानाक्षेत्र सुभाषनगर का है। यहाँ 9 मई 2024 को एक हिन्दू महिला ने अपनी नाबालिग बेटी के अपहरण की रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। इस शिकायत में पीड़िता ने बताया था कि 9 मई को वो सपरिवार घर में सो रही थीं। जब वो सुबह सोकर उठी तो उनकी 17 वर्षीया बेटी घर में मौजूद नहीं मिली।

लड़की के परिजनों ने जान-पहचान और रिश्तेदारी में काफी खोजबीन की पर कुछ पता नहीं चला। इस तहरीर पर पुलिस ने 11 मई को अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ IPC की धारा 363 के तहत केस दर्ज कर के कार्रवाई शुरू कर दी थी। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

पुलिस ने जाँच-पड़ताल शुरू की तो मामले में 21 वर्षीय सलमान का नाम आया। सलमान के अब्बा का नाम नबी अहमद है। वह बरेली के ही थानाक्षेत्र सीबीगंज का रहने वाला है। पुलिस को पता चला कि सलमान इससे पहले भी पीड़िता को भगा कर ले जा चुका है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सलमान ने पीड़िता को इस्लाम कबूल करवा दिया था। मुस्लिम बनाने के बाद आरोपित लड़की को मरियम नाम से बुलाने लगा था। पुलिस से बचने के लिए सलमान लड़की को लेकर अपनी लोकेशन लगातार बदलता रहा। वह कभी हरियाणा गया तो कभी हिमाचल प्रदेश में कुछ दिनों तक रहा, मगर ढाई महीने तक छिप कर रहने के बाद सलमान पुलिस की तरफ से बेपरवाह हो गया। वह लड़की के साथ बरेली आ गया और यहीं पर रहने लगा।

इस दौरान सलमान हिन्दू संगठन के सदस्यों की नजर में आ गया। हिन्दू संगठनों ने सलमान की बरेली में मौजूदगी की सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने दबिश देकर सलमान को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने पीड़िता को बरामद करके अदालत में पेश किया। पुलिस को दिए गए बयान में पीड़िता ने बताया कि बहला-फुसला कर अपने साथ ले जाने के बाद सलमान ने उसे किराए के मकान में रखा और कई बार रेप किया। अपने धर्मान्तरण के आरोपों की भी पीड़िता ने पुष्टि की।

पुलिस ने सलमान के खिलाफ पहले से दर्ज IPC की धारा 363 वाली FIR में 366, 376 (2)n के साथ पॉक्सो एक्ट व उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम की बढ़ोत्तरी की है। मामले में जाँच और अन्य जरूरी कार्रवाई की जा रही है। आरोपित को कानूनी कार्रवाई के बाद अदालत में पेश किया गया जहाँ से उसे जेल भेज दिया गया है।

बांग्लादेश में फौज ने सँभाली कमान, बोले जनरल वकार जमान- जल्द बनेगी अंतरिम सरकार: दावा- इस्तीफे के बाद भारत आईं शेख हसीना, लंदन जाएँगी

बांग्लादेश में आरक्षण विरोधी प्रदर्शन के हिंसक होने के बाद प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। ये ऐलान बांग्लादेश के सेना प्रमुख जनरल वकार-उज-जमान ने मीडिया के आगे किया है। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि शेख हसीना के बाद अब सेना मुल्क में अंतरिम सरकार बनाएगी।

इस संबंध में आर्मी ने देश की प्रमुख पार्टियों के साथ मिलकर बैठक की है। अब 18 सदस्यीय अंतरिम सरकार प्रस्तावित की गई है। सेना इस सरकार को बनाएगी। सेना प्रमुख जनरल वकार-उज-जमान ने कहा कि जो हत्या हुई उस पर न्याय होगा। हमने सभी दलों से बात की। हमारे बीच एक अच्छी बातचीत हुई है।

उन्होंने बताया, “पीएम शेख हसीना ने इस्तीफा दे दिया है। हम अंतरिम सरकार का गठन करके शासन करेंगे। हमारे देश का नुकसान हो रहा है। संपत्ति का नुकसान हो रहा है। मुझे दायित्व दीजिए, मैं सब संभाल लूँगा।” सेना प्रमुख ने जमान ने कहा, “आपकी जो माँग है उसे हम पूरा करेंगे। देश में शांति वापस लाएँगे। तोड़फोड़-आगजनी मारपीट से दूर रहिए। आप लोग हमारे साथ मिलकर चलेंगे तो हालात सुधरेंगे। मारपीट हिंसा से कुछ नहीं मिलेगा। संघर्ष और अराजकता से दूर रहिए।”

बता दें कि मीडिया में सुबह से बांग्लादेश में हो रही हिंसा की खबरों के बीच आज दोपहर बताया गया कि पीएम शेख हसीना ने मिलिट्री हेलीकॉप्टर से उड़ान भर ली है। वह मुल्क छोड़ने से पहले अपना एक भाषण रिकॉर्ड करना चाहती थीं, हालाँकि उनको इसका मौका नहीं मिला। इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ उनकी ओर बढ़ने लगी और उन्हें न चाहते हुए भी मुल्क को छोड़ना पड़ा। अब वह भारत के उत्तरपूर्वी इलाके अगरतला में उतरी हैं। सूत्रों से दी जा रही खबर के अनुसार भारत ने उनकी सेफ पैसेज की व्यवस्था की है। आगे वह लंदन जाएँगी।

शेख हसीना ने छोड़ा बांग्लादेश

आरक्षण के नाम पर मुल्क की सड़कों पर उतरी 4 लाख के करीब भीड़ के हिंसक होने से 100 के करीबन लोगों की मौत हो गई है। वहीं सैंकड़ों लोग घायल हैं। रविवार को इस्लामी कट्टरपंथियों की हिंसा के कारण एक ही थाने में 13 पुलिसकर्मियों की मॉब लिंचिंग हुई थी। वहीं अब तक 10 बिलियन डॉलर इकोनॉमी का नुकसान हो गया है। शेख हसीना के इस्तीफे तक पूरे बांग्लादेश में कर्फ्यू लगा था। अब सेना की जब अंतरिम सरकार बनने जा रही है तो सेना प्रमुख ने कहा कि कर्फ्यू की कोई जरूरत नहीं, वो खुद सब संभाल लेंगे।

SC/ST आरक्षण तले कितना अँधेरा, जीतन राम माँझी ने चिराग पासवान को बताया: बोले – सारा लाभ पासवानों को ही मिलेगा, डोम-मुसहर-नट-मेहतर-भुइयाँ को भी तो आगे बढ़ाओ

सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण में SC/ST के उपवर्गीकरण का आदेश दिया है, ताकि अंतिम पायदान पर खड़े ग़रीबों तक भी सरकारी लाभ पहुँचे। अब इसके समर्थन और विरोध में पक्ष-विपक्ष दोनों बँटा हुआ है। यहाँ तक कि मोदी सरकार के 2 मंत्री HAM(S) के जीतन राम माँझी और LJP(R) के चिराग पासवान आपस में भिड़ गए हैं। जीतन राम माँझी जहाँ केंद्रीय माध्यम, लघु एवं सूक्ष्म उद्योग मंत्री हैं, वहीं चिराग पासवान के पास खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय है। चिराग जहाँ इस फैसले के विरोध में हैं और समीक्षा याचिका तक दायर करने की बात कर रहे, माँझी ने खुल कर इसका समर्थन किया है।

जीतन राम माँझी ने कहा कि समाज नहीं बल्कि स्वार्थ के लिए सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले 74 वर्षों से केवल 4 जातियाँ ही आरक्षण का सारा लाभ ले रही हैं। उन्होंने याद दिलाया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 2011-12 के दौरान ही ये व्यवस्था कर दी थी कि और महादलित वर्ग तैयार किया था। उन्होंने याद किया कि कैसे तब उस वर्गीकरण को भी न्यायालय में चुनौती दी गई थी लेकिन न्यायपालिका ने इस फैसले को सही माना। उन्होंने कहा कि समाज में और भी जातियाँ हैं, सिर्फ पासवानों को आरक्षण नहीं मिलेगा।

जीतन राम माँझी ने कहा कि सिर्फ एक पीढ़ी को आरक्षण दिए जाने का फैसला सिर्फ एक जज की राय है और 7 जजों की पीठ में सामान्य राय नहीं है। उन्होंने याद किया कि बाबासाहब डॉ भीमराव आंबेडकर ने भी प्रत्येक 10 वर्ष में आरक्षण की समीक्षा की बात कही थी। बकौल जीतन राम माँझी, सुप्रीम कोर्ट ने इसी पर अमल किया है। उन्होंने कहा कि जो आगे बढ़ गए हैं उन्हें मत दबाइए, लेकिन जो पीछे रह गए हैं उन्हें आगे बढ़ाना ज़रूरी है। उन्होंने पूछा कि भुइयाँ, मेहतर, डोम और मुसहर समाज के कितने IAS-IPS हैं?

जीतन राम माँझी की मानें तो ये फैसला 10 साल पहले ही आ जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि जिनकी साक्षरता दर काफी कम है उनकी अधिक सुविधाएँ मिलनी चाहिए। बता दें कि चिराग पासवान सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में हैं। तेलंगाना और कर्नाटक के अलावा तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश की सरकारें भी इस फैसले का समर्थन कर चुकी हैं। हालाँकि, मायावती ने इसका विरोध किया है और आंदोलन की चेतावनी दी है। खासकर वाल्मीकि समाज में इस फैसले को लेकर जश्न का माहौल है।

दिल्ली शराब घोटाले में CM केजरीवाल को हाई कोर्ट ने नहीं दी जमानत, कहा- CBI की गिरफ्तारी अवैध नहीं: ट्रायल कोर्ट जाने को कहा

दिल्ली हाई कोर्ट से मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को बड़ा झटका लगा है। हाई कोर्ट ने केन्द्रीय जाँच एजेंसी (CBI) द्वारा केजरीवाल गिरफ्तारी को गलत नहीं माना है। कोर्ट ने केजरीवाल को झटका देते हुए उनकी जमानत याचिका भी ख़ारिज कर दी है।

सोमवार (5 अगस्त, 2024) को दिल्ली हाई कोर्ट की नीना बंसल कृष्णा ने इस मामले में अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा, “यह नहीं कहा जा सकता कि गिरफ्तारी बिना किसी न्यायोचित कारण के की गई।” कोर्ट ने इसी के साथ CBI गिरफ्तारी को रद्द करने की याचिका ठुकरा दी।

दिल्ली हाई कोर्ट ने इसी के साथ CM केजरीवाल को जमानत देने से इनकार कर दिया है। हाई कोर्ट ने कहा है कि केजरीवाल जमानत के लिए निचली अदालत का रुख कर सकते हैं। कोर्ट ने यह निर्णय 17 जुलाई, 2024 को रिजर्व कर लिया था।

केजरीवाल ने कोर्ट के सामने याचिका लगाई थी कि CBI द्वारा उनकी गिरफ्तारी को रद्द किया जाए क्योंकि यह उन्हें जेल में रखने की योजना है। केजरीवाल ने कोर्ट में दावा किया कि यदि उन्हें ED मामले में जमानत के बाद वह बाहर ना निकल पाएँ, इसलिए उन्हें CBI ने गिरफ्तार कर लिया। केजरीवाल की इस दलील को कोर्ट ने नहीं माना।

दिल्ली CM केजरीवाल के पास अब सुप्रीम कोर्ट जाने के कयास हैं। केजरीवाल को CBI ने दिल्ली शराब घोटाले का सूत्रधार बताया था। उन्हें CBI ने तिहाड़ जेल से ही गिरफ्तार किया था। वर्तमान में वह तिहाड़ जेल में ही बंद हैं, उन्हें न्यायिक हिरासत में रहे हैं। CM केजरीवाल को इससे पहले 12 जुलाई, 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने ED की गिरफ्तारी से जमानत दी थी। हालाँकि, CBI मामले के कारण वह जेल से बाहर नहीं आ सके थे।

गौरलतब है कि दिल्ली CM अरविन्द केजरीवाल को फरवरी, 2024 में ED ने शराब घोटाला मामले में गिरफ्तार किया था। ED का है कि आम आदमी पार्टी सरकार ने दिल्ली में नई शराब नीति के जरिए शराब डीलरों को फायदा पहुँचाया और उनके से पैसे लिए। इसके बाद उस पैसे का इस्तेमाल गोवा चुनाव में हुआ।