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ये मेरे करियर का आखिरी मैच… ‘अनेकहस्त’ PR श्रीजेश की बदौलत पेरिस ओलंपिक के सेमीफइनल में भारतीय टीम, कप्तान हरमनप्रीत सिंह के टूर्नामेंट में 7 गोल

पेरिस ओलंपिक 2024 में भारतीय हॉकी टीम सेमीफाइनल में पहुँच गई है। ये कमाल गोलकीपर PR श्रीजेश के कारण संभव हुआ, जिन्हें लेकर सोशल मीडिया में अलग-अलग मीम्स शेयर हो रहे हैं। इन तस्वीरों में उनकी क्षमता को प्रदर्शित करते हुए उन्हें कई हाथों वाला दिखाया जा रहा है। भारत ने रविवार (4 अगस्त, 2024) को ग्रेट ब्रिटेन को हरा कर सेमीफाइनल का टिकट कटाया। भारतीय टीम पेनल्टी शूटआउट के जरिए सेमीफाइनल में पहुँची। इसके बाद देश के खेल समर्थकों में जश्न का माहौल है।

क्वार्टरफाइनल का ये मैच माफ़ी मजेदार रहा, क्योंकि दोनों टीमें आक्रामक रुख के साथ खेल रही थीं। कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने पेनल्टी कॉर्नर कन्वर्जन के जरिए भारत के लिए 22वें मिनट में खाता खोला। इस तरह इस ओलंपिक में ये उनके लिए 7वाँ गोल रहा। इस गोल से कुछ ही देर पहले अमित रोहिदास को रेड कार्ड दिखाया गया था और भारत 10 खिलाड़ियों के साथ ही खेल रहा था। 27वें मिनट में ग्रेट ब्रिटेन ने भी ली मोर्टन के गोल के जरिए बराबरी हासिल की।

जब फर्स्ट हाफ खत्म हुआ, तब तक भारत और ग्रेट ब्रिटेन 1-1 के स्कोर के साथ बराबरी पर था। इसके बाद तीसरे और चौथे क्वार्टर में ग्रेट ब्रिटेन ने अटैकिंग गेम खेला। लेकिन, 11 हर गोल के लिए हिट करने के बावजूद एक को भी वो कन्वर्ट नहीं कर पाए। भारत का डिफेन्स एकदम झकास रहा और इस तरह गेम पेनल्टी शूटआउट में चला गया। PR श्रीजेश ने एक बार फिर से साबित किया कि वो भारतीय हॉकी टीम की ‘दीवार’ हैं, वो तमगा जो क्रिकेट में कभी राहुल द्रविड़ को मिला था।

इस गेम में भारत लगभग 43 मिनट तक 10 खिलाड़ियों के साथ ही खेला। PR श्रीजेश ने जीत के बाद कहा, “मैंने खुद से कहा कि ये मेरा अंतिम मैच हो सकता है, या फिर अगर मैंने गोल बचा लिया तो मुझे 2 गेम और खेलने को मिलेंगे।” श्रीजेश संन्यास का ऐलान कर चुके हैं, ऐसे में ये उनके लिए आखिरी ओलंपिक गेम है। भारत ने पेनल्टी शूटआउट में 4-2 से ये गेम अपने नाम किया। पिछले टोक्यो ओलंपिक में हॉकी टीम ने 41 वर्षों बाद पदक अपने नाम किया था।

माथे पर तिलक और हाथ में कलावा… Instagram पर ‘राजू’ बन ड्राइवर मुश्ताक ने 8वीं की हिन्दू छात्रा को फाँसा, फिर भगा ले गया: घर के गहने भी गायब

उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में ‘लव जिहाद’ का मामला सामने आया है। यहाँ एक मुस्लिम युवक पर नाबालिग हिन्दू लड़की से इंस्टाग्राम पर नाम बदल कर दोस्ती करने और बाद में बहला-फुसला कर भगा ले जाने का आरोप लगा है। आरोपित का नाम मुश्ताक है जो राजू बन कर माथे पर तिलक लगाता था और हाथ में कलावा बाँधा करता था। हिन्दू संगठनों ने इस घटना पर नाराज़गी जताई है और पुलिस को अल्टीमेटम देते हुए पीड़िता को जल्द से जल्द बरामद करने को कहा है। घटना मंगलवार (30 जुलाई, 2024) की है।

यह मामला आगरा के थाना क्षेत्र सदर का है। यहाँ 30 जुलाई को 14 साल की नाबालिग हिन्दू लड़की के पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में उन्होंने बताया कि कक्षा 8 में पढ़ने वाली उनकी बेटी मंगलवार की सुबह 7 बजे हर दिन की तरह स्कूल गई थी। आरोप है कि रास्ते में उसे फर्रुखाबाद का रहने वाला राजू उर्फ़ मुश्ताक मिला। मुश्ताक ने पीड़िता को बहलाया-फुसलाया और अपने बाद में अपने साथ ले गया। पीड़िता के पिता ने आरोपित पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

इस शिकायत पर आगरा पुलिस ने मुश्ताक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 137(2) और 87 के तहत केस दर्ज कर लिया है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। फरार आरोपित के साथ पीड़िता की भी तलाश के लिए पुलिस की टीमों का गठन कर दिया गया है। फिलहाल अभी तक आरोपित पकड़ से बाहर है। पुलिस ने मुश्ताक को जल्द गिरफ्तार करने और पीड़िता को सही सलामत बरामद कर लेने का भरोसा दिया है।

लगाता था तिलक, बांधता था कलावा

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नाबालिग पीड़िता को बहला-फुसला कर ले जाने वाले मुश्ताक ने इंस्टाग्राम पर राजू नाम से ID बना रखी है। वह खुद को हिन्दू बताया करता था और माथे पर तिलक लगाने के साथ हाथ में कलावा भी बाँधता था। आगरा में वह एक डॉक्टर की कार चलाता था। पीड़िता के परिजनों का यह भी आरोप है कि उनकी बेटी घर से जाते समय सोने और चाँदी के गहने भी अपने साथ ले कर गई है। इस बीच हिन्दू संगठनों ने इस मामले में पुलिस से पीड़िता को जल्द बरामद करने और आरोपित पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

MP के सागर में दीवार गिरने से 9 बच्चों की मौत, 4 गंभीर रूप से घायल: CM मोहन यादव ने की ₹4-4 लाख मुआवजे की घोषणा

मध्य प्रदेश के सागर जिले में एक दिल को दहलाने वाली खबर सामने आई है। शाहपुर में स्थित हरदौल मंदिर के पास एक दीवार अचानक भरभरा कर गिर गई। इसमें 9 बच्चों की दबकर मौत हो गई है। वहीं, कुछ बच्चों के घायल हो गए हैं, जिनमें चार की हालत गंभीर बताई जा रही है। दीवार 50 वर्ष पुरानी है। सीएम मोहन यादव ने मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपए देने की घोषणा की है।

बताया जा रहा है कि सानौधा थाना क्षेत्र के शाहपुरा के हरदौल मंदिर में शिवलिंग निर्माण और भागवत कथा का आयोजन हो रहा था। मृतक बच्चे वहाँ शिवलिंग बना रहे थे। इस दौरान दीवार भरभरा कर गिर गई और ये बच्चे मलबे में दब गए। जेसीबी मँगवाकर को मलबा हटाया गया और मृतक एवं घायल बच्चों को निकाला गया। मृतक बच्चों की उम्र 9 से लेकर 17 साल तक बताई जा रही है।

रविवार (3 अगस्त 2024) को स्कूलों में छुट्टी होने के कारण मंदिर में आयोजित शिवलिंग निर्माण और भागवत कथा में बड़ी संख्या में बच्चे भी शामिल हुए थे। घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासन मौके पर पहुँचा। वहीं, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने घटना पर गहरा दुख जताया है और मृतक बच्चों के परिजनों के लिए 4-4 लाख रुपए मुआवजा देने की घोषणा की है। वहीं, घायलों का इलाज कराया जा रहा है।

सीएम मोहन ने सोशल मीडिया साइट X पर लिखा, “आज सागर जिले के शाहपुर में हुई अतिवृष्टि के कारण जर्जर मकान की दीवार गिरने से 9 मासूम बच्चों के काल कवलित होने की खबर सुनकर मन व्यथित है। घायल बच्चों के उचित इलाज के लिए जिला प्रशासन को निर्देशित किया है। भगवान से करबद्ध प्रार्थना है कि दिवंगत बच्चों की आत्मा को शांति प्रदान करें।”

मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों के लिए मुआवजे की घोषणा करते हुए आगे लिखा, “हादसे में घायल अन्य बच्चों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करता हूँ। जिन परिवारों ने मासूम बच्चों को खोया है, उनके प्रति मेरी गहरी संवेदनाएँ हैं। मृतक बच्चों के परिजनों को शासन की तरफ से 4-4 लाख रुपए की सहायता राशि दी जाएगी।”

कुछ रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि जो दीवार गिरी है वह मंदिर की है। वहीं, कुछ रिपोर्ट में मंदिर से सटे मुलू कुशवाहा नाम के एक व्यक्ति के मकान की दीवार बताई जा रही है। कहा जा रहा है कि पिछले 24 घंटे से बारिश होने के कारण यह दीवार खड़ी ना रह सकी और गिर गई। इसकी हालत पहले से जर्जर बनी हुई थी।

‘जो किताब बाजार में उपलब्ध, उस पर चर्चा मानहानि नहीं’: माँ अमृतानंदमयी के खिलाफ शो को हाईकोर्ट ने नहीं माना आपत्तिजनक, कहा – ये अभिव्यक्ति की आज़ादी

केरल उच्च न्यायालय ने ‘अम्मा’ के नाम से लोकप्रिय आध्यात्मिक साध्वी माता अमृतानंदमयी से जुड़ी पुस्तक पर टिप्पणी को मानहानि नहीं माना है, साथ ही एक मीडिया चैनल के खिलाफ दायर केस को भी रद्द कर दिया है। उक्त चैनल ने ‘बिग स्टोरी’ शो के माध्यम से ‘अम्मा’ अमृतानंदमयी और उनके मठ पर टिप्पणी की थी। उच्च न्यायालय ने कहा कि मीडिया सार्वजनिक क्षेत्र में उपलब्ध पुस्तकों पर चर्चा कर सकता है और ऐसा करने को निष्पक्ष टिप्पणी या आलोचना के अंतर्गत ही माना जाएगा।

केरल हाईकोर्ट ने ये भी कहा कि ये अभिव्यक्ति की आज़ादी (FoE) के तहत आता है। चैनल के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर प्रकाश और डायरेक्टर एवं चीफ एडिटर MV नीकेश कुमार ने याचिका दायर की थी। इन्होंने गेल ट्रेडवेलकी किताब ‘Holy Hell’ पर अपना एक शो बनाया था। आरोप है कि इसमें माता अमृतानंदमयी और उनके आश्रम का अपमान किया गया है। ऐसे में 2014 में IPC की धारा 499 और 500 के तहत मामला दर्ज कराया गया था।

जस्टिस PV कुन्हीकृष्णन ने कहा कि उक्त किताब Amazon सहित अन्य सार्वजनिक मंचों पर उपलब्ध है और मलयालम में भी इसका अनुवाद हुआ है। साथ ही कहा कि मीडियाकर्मियों को इस पर चुप रहने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता, माता अमृतानंदमयी या उनके शिष्यों ने किताब या उसके लेखक के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है। उन्होंने कहा कि ये मीडियाकर्मियों का कर्तव्य है कि ऐसे मुद्दों को जनता तक लेकर जाएँ, इस पर रोक लगाया जाना FoE को भंग करने जैसा होगा।

माता अमृतानंदमयी के एक अनुयायी ने इस संबंध में केस दायर किया था। वही याचिकाकर्ताओं ने कहा कि शिकायतकर्ता को इससे कोई क्षति नहीं पहुँची है, ऐसे में वो मानहानि का मामला दायर नहीं करवा सकता। कोर्ट ने उक्त अनुयायी को ‘शो से प्रभावित होने वालों’ की सूची में नहीं माना। हालाँकि, हाईकोर्ट ने कहा कि उसे ये पता नहीं है कि किताब के विरुद्ध माता अमृतानंदमयी या उनके मठ ने कोई शिकायत दायर की है या नहीं, वो ऐसा करने को स्वतंत्र हैं।

माता अमृतानंदमयी के बारे में बता दें कि दुनिया भर में उन्हें कई मंचों पर सम्मानित किया जा चुका है। 71 वर्षीय महिला साध्वी कई सामाजिक कार्यों के लिए भी जानी जाती हैं। वो ‘अमृता विश्व विद्यापीठम’ की कुलपति भी हैं। ‘हिन्दू पार्लियामेंट’ उन्हें ‘विश्व रत्न’ से सम्मानित कर चुका है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उन्हें ‘स्वच्छ भारत’ में योगदान के लिए सम्मानित कर चुके हैं। कोच्चि में वो ‘अमृता इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज’ का भी संचालन करती हैं।

राज नाम रख हिंदू लड़की को फाँसा सिपाही चाँद खाँ ने, 2 साल तक सेक्स-संबंध… 2 बार गर्भपात, अब धर्म बदल निकाह का दबाव: इससे पहले 2 बार कर चुका है निकाह

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में चाँद खाँ नाम के सिपाही ने ‘राज’ बनकर हिंदू लड़की को प्रेम जाल में फंसा लिया। उसने उसे पुलिस लाइन के अपने सरकारी क्वॉर्टर पर बुलाया और नशीला पदार्थ खिलाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। उसने इसका वीडियो भी बना लिया और ब्लैकमेल कर पैसे ऐंठने लगा। बाद में लड़की को पता चला कि उसका ‘राज’ कोई चाँद खाँ है, तो पैरों तले जमीन खिसक गई।

इसके बाद पता चला कि चाँद खाँ 2 निकाह पहले भी कर चुका है और दूसरी बीवी गुलशन आरा उर्फ जेबा उसके साथ रहती है, वो भी इस साजिश में शामिल थी। दोनों हिंदू लड़की पर धर्म परिवर्तन कर निकाह का दबाव डाल रहे थे, यही नहीं, करीब 6 माह पहले दोनों अपने कारनामों को अंजाम देने के बिल्कुल करीब भी पहुँच गए थे, और उसने मौलवी को भी बुला लिया था। फिलहाल इस मामले में पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है और जाँच शुरू कर दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हिंदू लड़की पीलीभीत कोतवाली क्षेत्र की रहने वाली है। 2 साल पहले वो कोचिंग में पढ़ती थी, वहीं पर एक लड़के की छेड़छाड़ का विरोध करते हुए उसने पुलिस से सहायता माँगी थी। उसकी सहायता के लिए पहुँचे चाँद खाँ ने अपना परिचय राज के रूप में दिया और लड़की का नंबर ले लिया। इसके बाद चाँद खाँ ने लड़की को शादी के जाल में फंसाया और 2 साल से उसका यौन उत्पीड़न करता रहा। हिंदू लड़की गर्भवती हो गई, तो 2 बार उसने दवाइयों की सहायता से उसका गर्भपात भी करा दिया।

यही नहीं, अब चाँद खाँ और उसकी दूसरी बीवी गुलशन आरा उस पर धर्म परिवर्तन कर चाँद खाँ से निकाह करने का दवाब डाल रहे हैं, जबकि चाँद खाँ दो निकाह पहले ही कर चुका है। इस मामले में पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। इंस्पेक्टर नरेश त्यागी ने कहा कि शनिवार (3 जुलाई 2024) को कोतवाली में चाँद खाँ और बीवी गुलशन आरा उर्फ जेबा के खिलाफ दुष्कर्म, विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन संप्रेषण अधिनियम, षड्यंत्र रचने एवं ब्लैकमेलिंग की धारा में प्राथमिकी पंजीकृत की गई है।

बताया जा रहा है कि आरोपित चाँद खाँ का तबादला मुरादाबाद जीआरपी में हो चुका है। इसके बावजूद वो वीडियो वायरल करने की धमकी देकर पैसे की उगाही करता रहता है। हाल ही में उसने पीड़ित लड़की से एक लाख रुपए लिए थे और 50 हजार की माँग अलग से कर रहा था। फिलहाल पुलिस ने जाँच के लिए मुरादाबाद एक टीम भेजने वाली है।

ब्रिटेन में 3 बच्चियों की चाकू से हत्या के बाद 9 शहरों में हिंसा, दुकानों में तोड़फोड़-आगजनी: प्रवासी लोग, फिलिस्तीनी झंडे और पलायन का जानिए कनेक्शन

ब्रिटेन में तीन बच्चियों की हत्या के बाद कई शहर हिंसा से झुलस रहे हैं। स्थानीय समय के अनुसार, शनिवार (3 अगस्त) की रात को कुछ उपद्रवियों ने कई शहरों में सड़कों पर दुकानों को आग लगा दी। यह देश में 13 साल में सबसे बड़ा दंगा बताया जा रहा है। दरअसल, हिंसा की यह आग तब भड़की जब उत्तर-पश्चिमी इंग्लैंड में तीन बच्चियों की चाकू घोंपकर हत्या कर दी गई। इसके कई वीडियो सामने आए हैं।

साउथपोर्ट में सोमवार (29 जुलाई 2024) को टेलर स्विफ्ट थीम वाली डांस क्लास में तीन लड़कियों- 6 वर्षीय बेबे किंग, 7 वर्षीय एल्सी डॉट स्टैनकॉम्ब और 9 वर्षीय एलिस डेसिल्वा अगुइआर की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। इसके 6 दिन के बाद ब्रिटेन के कम-से-कम नौ शहरों में हिंसा शुरू हो गई है। शुरू में अफवाह फैली की कि इस घटना को प्रवासी लोगों ने अंजाम दिया है।

बच्चियों की हत्या के विरोध में 22 प्रमुख कस्बों और शहरों में ‘एनफ इज एनफ’ यानी ‘बस बहुत हो गया’ का प्रदर्शन निकाला गया। प्रदर्शन के दौरान हजारों पुलिसकर्मी तैनात रहे। लोगों में अंदर ही अंदर गुस्सा पनपता रहा और आखिरकार शनिवार को ब्रिटेन के लिवरपूल, मैनचेस्टर, सुंदरलैंड, पोर्ट्समाउथ, हल, ब्लैकपूल, ब्रिस्टल, बेलफास्ट स्टोक, नॉटिंघम और लीड्स में दंगा भड़क उठा।

इस दौरान दंगाइयों दुकानों में जमकर लूटपाट और तोड़फोड़ की। सामानों को सड़कों पर फेंक दिया और दुकानों में आग लगा दी। दंगाइयों ने जूते की दुकानों से लेकर शराब की दुकानों तक, किसी को भी नहीं छोड़ा। सड़कों पर लगी हुई स्ट्रीट लाइटों में भी तोड़फोड़ की। खंभों को उखाड़ने की कोशिश की और बैरिकेटिंड को ध्वस्त कर दिया। पुलिस ने लगभग 200 दंगाइयों को गिरफ्तार किया है।

उत्तरी आयरलैंड के बेलफ़ास्ट में जारी प्रदर्शनों के बीच पागलपन भरे दृश्य भी देखने को मिले। सामने आए वीडियो में साफ दिख रहा है कि प्रदर्शन के दौरान एक तरफ़ ब्रिटिश और आयरिश राष्ट्रवादी ब्रिटिश और आयरिश झंडे लेकर खड़े दिखाई दिए तो दूसरी तरफ़ फ़िलिस्तीनी और एंटीफ़ा झंडे लिए प्रदर्शनकारी दिखाई दिए। इस वीडियो को लोग सोशल मीडिया पर जमकर शेयर कर रहे हैं।

हिंसा को देखते हुए ब्रिटेन की सरकार ने आपातकालीन बैठक बुलाई है और हिंसा को नियंत्रित करने पर चर्चा की। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठी चार्ज किया है। इसमें कई लोग घायल हो गए हैं। भीड़ में 18 से लेकर 58 साल तक के लोग शामिल हैं। हत्या को लेकर विरोध मार्च आगे भी प्रस्तावित है, जिसको लेकर पुलिस प्रशासन सतर्क है।

दरअसल, इस सप्ताह सबसे पहला दंगे साउथपोर्ट में हमलावर की पहचान की अफवाह को लेकर भड़का था। यह अफवाह फैलाई गई कि हमलावर एक प्रवासी था। हालाँकि, पुलिस ने बताया कि संदिग्ध व्यक्ति कार्डिफ़ में पैदा हुआ था। इसके बाद हिंसा को शांत करने के प्रयास में जज ने 17 वर्षीय संदिग्ध की पहचान उजागर करने का फ़ैसला सुनाया।

इसके बाद बुधवार (31 जुलाई) को मर्सीसाइड शहर में चाकू से हमला करने वाले किशोर के रूप में एक्सेल मुगनवा रुदाकुबाना का नाम सामने आया। दरअसल, न्यायाधीश ने उसके 18वें जन्मदिन से कुछ दिन पहले उसकी रिपोर्टिंग पर से प्रतिबंध हटा दिए थे। बता दें कि 18 वर्ष से कम आयु के लोगों के नाम का खुलासा करने की इजाजत नहीं है।

गुजरात कॉन्ग्रेस का नेता गिरफ्तार, दलित महिला IB अधिकारी को जमीन पर गिरा कर कहा था – ‘तुम कुर्सी के लायक नहीं’

गुजरात के भुज शहर में कॉन्ग्रेस विधायक एवं कथित दलित नेता जिग्नेश मेवाणी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक महिला खुफिया अधिकारी को कुर्सी से हटाकर जमीन पर गिरा दिया गया। इस मामले में कॉन्ग्रेस नेता एचएस अहीर को गिरफ्तार कर लिया गया है। अहीर वहीं व्यक्ति हैं, जिन्होंने कंगना रनौत को मंडी से भाजपा का टिकट मिलने पर उनके खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की थी।

महिला अधिकारी के साथ इस हरकत का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में कॉन्ग्रेस नेता एचएस अहीर को दलित खुफिया अधिकारी रीना चौहान की कुर्सी खींचते हुए देखा जा सकता है। इससे महिला अधिकारी जमीन पर गिर गई और घायल हो गई। इस दौरान अहीर ने महिला अधिकारी का मजाक उड़ाया और अपमानित करते हुए कहा कि वह कुर्सी पर बैठने के लायक नहीं है।

भुज शहर के सर्किट हाउस उम्मेद भवन के कॉन्फ्रेंस हॉल में विधायक जिग्नेश मेवाणी कच्छ में दलितों को आवंटित भूमि पर कब्जा देने के बारे में मीडिया से बात कर रहे थे। उसी दौरान 34 साल की महिला IB अधिकारी मोबाइल में मेवाणी की तस्वीर खींचने के लिए खड़ी हुईं। इस बीच अहीर ने उनकी कुर्सी खींच ली। इससे अनजान महिला अधिकारी कुर्सी पर बैठने की कोशिश की तो वह जमीन पर गिर गईं।

दलित महिला अधिकारी रीना इस घटना के संबंध में भुज शहर के ए डिवीजन पुलिस स्टेशन में दर्ज प्राथमिकी दर्ज कराई है। इसकी कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है। दर्ज कराई गई FIR की कॉपी में कहा गया है कि इस हरकत में सहायक खुफिया अधिकारी रीना चौहान की रीढ़ की हड्डी में मामूली चोटें आईं और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।

पुलिस को दी गई अपनी शिकायत में रीना चौहान ने आगे कहा कि जब वह नीचे गिरीं तो अहीर जोर से हँसे और कहा कि वह कुर्सी के लायक नहीं हैं और उनके लिए कोई कुर्सी नहीं हो सकती। रीना चौहान ने कहा कि कॉग्रेस किसान सेल के समन्वयक एचएस अहीर (हरेश शिवजीभाई अहीर) उन्हें पहले से जानते थे और वह यह भी जानते थे कि वह दलित हैं।

जिस समय यह घटना हुई, उस समय महिला अधिकारी अपनी ड्यूटी पर थीं। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि कॉन्ग्रेस नेता अहीर महिला अधिकारी को अच्छी तरह से जानते थे। उन्हें पता था कि वह अनुसूचित जाति से आती हैं और फिलहाल वह ड्यूटी पर हैं। इसके बावजूद कॉन्ग्रेस नेता ने महिला अधिकारी का अपमान करने की इरादे से ऐसी हरकत की।

पुलिस अधिकारी ने कहा कि महिला खुफिया अधिकारी फिलहाल मानसिक आघात, सदमे और अवसाद से गुजर रही हैं। कॉन्ग्रेस नेता के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। भारतीय न्याय संहिता की धारा 121(1), 221 और 133 तथा एससी/एसटी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। वहीं, भाजपा ने इसे कॉन्ग्रेस की दलित विरोधी मानसिकता बताया है।

बताते चलें कि अहीर ने कंगना रनौत के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी सोशल मीडिया पर पोस्ट की थी। साल 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान हिमाचल प्रदेश के मंडी लोकसभा सीट के लिए भाजपा द्वारा कंगना को टिकट दिए जाने पर अहीर ने सोशल मीडिया पर लिखा था, “मंडी से र*डी।” वहीं, कॉन्ग्रेस के मुखपत्र नेशनल हेराल्ड की संपादक मृणाल पांडे ने भी यही टिप्पणी की थी।

हालाँकि, विवाद बढ़ने के बाद मृणाल पांडे सहित अहीर ने भी अपनी पोस्ट डिलीट कर दी थी। साथ ही इसका दोष अपनी सोशल मीडिया टीम पर मढ़ दिया था। हालाँकि, बाद में एचएस अहीर ने पोस्ट को डिलीट कर दिया था और कहा था, “मेरे एक्स खाते तक पहुँच रखने वाले किसी व्यक्ति ने बिल्कुल घृणित और आपत्तिजनक पोस्ट की थी, जिसे हटा दिया गया है।” अहीर गुजरात कॉन्ग्रेस में किसान मोर्चा के राज्य सह-संयोजक पद पर हैं।

पड़ोसी हिंदू लड़की को लेकर भाग गया सद्दाम अली, भड़के लोगों ने उसके घर-दुकान में लगाई आग: बरेली में 3 पुलिसकर्मी निलंबित

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के एक गाँव में मुस्लिम शख्स द्वारा हिंदू लड़की को लेकर भागने के बाद शुक्रवार (2 अगस्त 2024) की रात को हिंसा भड़क उठी। लड़की पक्ष वालों के साथ गाँव वालों ने आरोपित मुस्लिम व्यक्ति के घर और किराने की दुकान में तोड़फोड़ की और उसमें आग लगा दी। दरअसल, पिछले सप्ताह जिस हिंदू महिला को लेकर सद्दाम अली लेकर भागा है, वह उसकी पड़ोसी थी।

अधिकारियों कहना है कि गुस्साए लोगों ने आरोपित मुस्लिम व्यक्ति की गिरफ्तारी में देरी करने के कारण पुलिस की जीप पर भी हमला किया। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि इस मामले में उन्होंने पुलिस में शिकायत की, लेकिन पुलिस ने शिकायत दर्ज नहीं की। इसके बाद जिला प्रशासन ने तीन पुलिसकर्मियों को भी निलंबित कर दिया है। आखिरक सद्दाम को गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस ने बताया कि यह घटना हिंदू बहुल गाँव शिवनगर की है। कहा जा रहा है कि 24 साल के सद्दाम अली का 20 साल की पड़ोसी हिंदू लड़की के साथ प्रेम संबंध थे। वह पिछले सप्ताह महिला को लेकर भाग गया। इसको लेकर गाँव के लोग भड़क गए। महिला के परिजनों ने 29 जुलाई को सिरौली थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें सद्दाम अली पर महिला के अपहरण का आरोप लगाया गया था।

एक अधिकारी ने बताया, “गाँव में करीब 10 फीसदी अल्पसंख्यक आबादी है। यहाँ का मुख्य व्यवसाय खेती है। हिंदू लड़की और सद्दाम ने साथ में स्कूल की पढ़ाई की है और दो साल पहले दोनों एक-दूसरे से प्यार करने लगे थे। 29 जुलाई को वे दोनों एक साथ भाग गए और महिला के पिता ने गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई।” इसके बाद पुलिस ने जाँच शुरू कर दी।

पुलिस को पता चला कि दोनों सिरौली में छिपे हुए हैं। इसके बाद पुलिस 1 अगस्त 2024 को भागने के 6 दिन बाद दोनों को वापस लेकर आई। लड़की को पुलिस ने उनके रिश्तेदारों एवं ग्रामीणों की उपस्थिति में परिवार को सौंप दिया। वहीं, सद्दाम अली को पूछताछ के लिए अपने साथ लेकर सिरौली थाने लेकर चली गई। इस घटना से गुस्साए लोगों ने अली के घर में तोड़फोड़ की और उसे आग के हवाले कर दिया।

बरेली पुलिस ने बताया कि इस मामले में लड़की के परिवार के सदस्यों समेत 62 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। वहीं, सद्दाम अली के घर में आगजनी के आरोप में एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया है। वहीं, अन्य आरोपितों को पकड़ने के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। लोगों के गुस्सा को देखते हुए गाँव में भारी संख्या में पुलिस बल को तैनात किया गया है।

बरेली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) अनुराग आर्य ने कहा कि भागने की घटना के बाद दो समुदायों के बीच तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए बरेली मुख्यालय से लगभग 55 किलोमीटर दूर स्थित गाँव में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। उन्होंने कहा कि थाने के स्टेशन हाउस ऑफिसर लव सिरोही, SI सतवीर सिंह और एक कॉन्स्टेबल को निलंबित कर दिया गया है।

एसएसपी आर्य ने कहा, “सद्दाम अली पुलिस की हिरासत में था, लेकिन अफ़वाहें फैलीं कि पुलिस उसे बचा रही है। इसके बाद ग्रामीणों ने उसकी घर और दुकान जला दी और पुलिसकर्मियों पर भी हमला किया। पुलिस अधिकारियों पर हमले और घर में आग लगाने के मामले में सिरौली पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है।”

वक्फ बोर्ड पर मोदी सरकार की कैंची, अब नहीं हड़प पाएगा दूसरों की संपत्ति: कभी हिंदुओं के पूरे गाँव, तो कभी फाइव स्टार होटल को बताया अपनी जायदाद

कुछ समय पहले खबर आई थी कि वक्फ बोर्ड ने पूरे गाँव को ही अपनी संपत्ति होने का दावा दिया। सरकारी जमीनों पर दावा करने के तो मामले अक्सर आते ही रहते हैं। वक्फ बोर्ड के ऐसे दावों को नियंत्रित करने के लिए सरकार उसकी शक्तियों को पर अंकुश लगाने की तैयारी कर रही है। मोदी सरकार संसद के जारी मानसून सत्र में सोमवार (5 अगस्त 2024) को वक्फ एक्ट में संशोधन बिल पेश कर सकती है।

सूत्रों के हवाले से मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि 2 अगस्त को कैबिनेट ने वक्फ़ अधिनियम में लगभग 40 संशोधन को मंजूरी दे दी। इन संशोधनों का मुख्य उद्देश्य वक्फ़ बोर्ड की किसी भी संपत्ति को ‘वक्फ संपत्ति’ बनाने की शक्तियों पर अंकुश लगाना है। वक्फ के इन दावों के कारण अक्सर विवाद और समानांतर कानून-व्यवस्था चलाने की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। केंद्र इस निरंकुशता को खत्म करना चाहता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली वर्तमान एनडीए सरकार इस संशोधन को 5 अगस्त 2024 को संसद में रख सकती है। बता दें कि 5 अगस्त का दिन विशेष महत्व रखता है। मोदी सरकार ने 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का बिल संसद में पेश किया था। इसके बाद पीएम मोदी द्वारा 5 अगस्त 2020 को अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन किया गया था।

प्रस्तावित संशोधनों के अनुसार, वक्फ़ बोर्डों द्वारा संपत्तियों पर किए गए या किए जाने वाले दावों का सत्यापन अनिवार्य किया जाएगा। वक्फ़ बोर्ड की विवादित संपत्तियों के लिए भी सत्यापन करना अनिवार्य होगा। इससे विभिन्न राज्यों के वक्फ बोर्डों द्वारा जमीनों एवं अन्य संपत्तियों को किए जाने वाले दावों पर अंकुश लगेगी। इससे विवादों को रोकने में भी मदद मिलेगी।

वक्फ के पास 9.4 लाख एकड़ संपत्ति

सूत्रों ने बताया कि मुस्लिम बुद्धिजीवियों, महिलाओं और शिया एवं बोहरा जैसे विभिन्न फिरकों की ओर से मौजूदा कानून में बदलाव की माँग की गई थी। संशोधन लाने की तैयारी 2024 के लोकसभा चुनावों से काफी पहले ही शुरू हो गई थी। सूत्र ने यह भी कहा कि ओमान, सऊदी अरब जैसे किसी भी इस्लामी देश में इस तरह की इकाई को इतने अधिकार नहीं दिए गए हैं।

मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि विभिन्न राज्यों के वक्फ़ बोर्डों के पास इस समय करीब 8.7 लाख संपत्तियाँ हैं। इन संपत्तियों का क्षेत्रफल करीब 9.4 लाख एकड़ है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले केंद्र सरकार ने राज्य में वक्फ बोर्डों की इस शक्ति के दुरुपयोग का संज्ञान लिया था। वक्फ बोर्डों द्वारा किसी भी संपत्ति पर दावा करने पर अधिकांश राज्यों में इन संपत्ति के सर्वे में देरी होती थी।

इसके बाद केंद्र सरकार ने वक्फ संपत्तियों की निगरानी में जिला मजिस्ट्रेटों को शामिल करने की संभावना पर भी विचार किया था। वक्फ बोर्ड के किसी भी फैसले के खिलाफ अपील सिर्फ कोर्ट के पास हो सकती है। ऐसी अपीलों पर फैसले के लिए कोई समय-सीमा नहीं होती है। कोर्ट का निर्णय अंतिम होता है। वहीं हाईकोर्ट में PIL के अलावा अपील का कोई प्रावधान नहीं है।

कॉन्ग्रेस ने वक्फ को दिए असीमित अधिकार

यहाँ बताना जरूरी है कि साल 1954 में पंडित जवाहरलाल नेहरू की सरकार के समय वक्फ अधिनियम पारित किया गया। इसके बाद इसका केंद्रीकरण हुआ। वक्फ एक्ट 1954 वक्फ की संपत्तियों के रखरखाव का काम करता था। इसके बाद से इसमें कई बार संशोधन हुआ। साल 2013 में कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली UPA सरकार ने बेसिक वक्फ़ एक्ट में संशोधन करके वक्फ बोर्डों को और अधिकार दिए थे।

दरअसल, वक्फ अरबी भाषा का शब्द है और इसका अर्थ संपत्ति को जन-कल्याण के लिए समर्पित करना है। इस्लाम में में वक्फ उस संपत्ति को कहते हैं, जो इस्लाम को मानने वाले लोगों द्वारा जकात के रूप में दान की जाती है। ये धन-संपत्ति सिर्फ मुस्लिमों के हित या इस्लाम के प्रसार-प्रसार के लिए काम में लाया जा सकता है। ये दौलत वक्फ बोर्ड के तहत आती है।

हिंदुओं के पूरे गाँव को ही वक्फ संपत्ति घोषित कर दिया था

बता दें कि सितंबर 2022 में तमिलनाडु से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया था, जहाँ वक्फ बोर्ड ने हिंदुओं के पूरे गाँव 1100 साल पुराने मंदिर पर दावा ठोक दिया था। तमिलनाडु में वक्फ बोर्ड ने त्रिची के नजदीक स्थित तिरुचेंथुरई गाँव को वक्फ संपत्ति घोषित कर दिया था। जब राजगोपाल नाम के व्यक्ति ने अपनी जमीन बेचने का प्रयास किया तो यह मामला समाने आया था।

राजगोपाल जब अपनी जमीन बेचने के लिए रजिस्ट्रार ऑफिस पहुँचे तो उन्हें पता चला कि जिस जमीन को बेचने के बारे में वह सोच रहे हैं वह उनकी है ही नहीं बल्कि, जमीन वक्फ हो चुकी है और अब उसका मालिक वक्फ बोर्ड है। इतना ही नहीं, सारे गाँव वालों की जमीन ही वक्फ संपत्ति घोषित हो चुकी थी। इसके बाद यह मामला राष्ट्रीय सुर्खी बनी थी।

वक्फ बोर्ड ने 5 स्टार होटल पर ठोक दिया दावा

इसी तरह अप्रैल 2024 में हैदराबाद से आया था। तेलंगाना वक्फ बोर्ड ने राजधानी के एक नामी 5 स्टार होटल मैरियट को ही अपनी जागीर घोषित कर दिया था। हालाँकि, हाई कोर्ट ने उसके इस मंसूबे को धाराशायी कर दिया था। दरअसल, साल 1964 में अब्दुल गफूर नाम के एक व्यक्ति ने तब वायसराय नाम से चर्चित इस होटल पर अपना हक जताते हुए मुकदमा कर दिया था।

मुकदमे में वक्फ अधिनियम 1954 का हवाला दिया गया था, जिसकी वजह से होटल मैरियट की सम्पत्ति विवादित घोषित हो गई थी। लगभग 50 वर्षों तक वक्फ बोर्ड ने यह मामला कानूनी पेचीदगियों में उलझाए रखा। साल 2014 में एक बार फिर से तेलंगाना राज्य वक्फ बोर्ड होटल मैरियट के खिलाफ सक्रिय हुआ। मामला हाईकोर्ट में पहुँचा तो अंतिम फैसला होटल मैरियट के पक्ष में आया।

‘मुस्लिम एक हो गए तो पूरी फ़ोर्स लगाने के बाद भी…’: बरेली के हसीब अंसारी ने WhatsApp स्टेट्स लगा कर किया मौलवियों और फिरकों का जिक्र, जाँच शुरू

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में भड़काऊ व्हाट्सएप्प स्टेट्स लगा कर माहौल खराब करने का मामला सामने आया है। यहाँ हिन्दू संगठनों ने हसीब अंसारी नाम के एक युवक की शिकायत पुलिस से की है। स्टेट्स में हसीब ने मुस्लिमों के एकजुट हो जाने के बाद सभी के काबू से बाहर हो जाने जैसी बातें लिखी हुई हैं। हसीब के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग उठ रही है। शनिवार (3 अगस्त, 2024) को पुलिस ने मामले का संज्ञान ले कर जाँच शुरू कर दी है।

यह मामला बरेली के थाना क्षेत्र नवाबगंज का है। यहाँ के रहने वाले हसीब अंसारी ने शनिवार को अपने व्हाट्सएप्प पर भड़काऊ स्टेटस लगाया। इस में हसीब ने लिखा, “मुस्लिम एक हो गए तो पूरी फ़ोर्स लगाने के बाद भी रोक नहीं मिलेगा। शुक्र मनाओ कि मुसलमान फिरके-फिरके में पड़े हुए हैं और ये मौलवी इन्हें एक नहीं होने दे रहे हैं।” हसीब अंसारी ने इस स्टेट्स के ऊपर बड़े-बड़े शब्दों में लिख कर लोगों से इसे हर हाल में शेयर करने की गुजारिश भी की है।

हसीब अंसारी की इस हरकत को ‘कट्टर हिन्दू गौ सेवक बरेली उत्तर प्रदेश’ नाम के हैंडल ने अपने X प्रोफ़ाइल @Surenda83898725 से शेयर किया है। उन्होंने इस हरकत को माहौल को खराब करने वाली बताया और बरेली पुलिस को टैग करते हुए हसीब अंसारी पर कड़ी कार्रवाई की माँग उठाई है। बरेली पुलिस ने इस शिकायत का संज्ञान लिया है। पुलिस ने बताया कि मामले की जाँच व अन्य जरूरी कार्रवाई के लिए थाना प्रभारी नवाबगंज को निर्देशित किया जा चुका है।

जिस स्टेट्स को हसीब अंसारी ने अपने व्हाट्सएप पर लगाया है उसके बैकग्राउंड में किसी मज़हबी इबादतगाह के आगे कुछ लोग खड़े दिख रहे हैं। एक लाल रंग का झंडा भी दिखाई दे रहा है। बैकग्राउंड में दिख रहा दृश्य कहाँ और कब की घटना है इस बारे में अभी तक कोई ठोस जानकारी नहीं मिल पाई है। बरेली के VHP कार्यकर्ता हिमांशु पटेल ने जानकारी दी कि हसीब अंसारी ने मौलाना वाली पढ़ाई कर रखी थी, और पूर्व में मौलाना वाला कार्य भी कर चुका है।