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गुजरने वाली होती है ट्रेन, रेल की पटरियों पर साइकिल- सिलेंडर-मुर्गा-पत्थर… रख देता है गुलजार शेख: Video वायरल होने के बाद यूट्यूबर पर एक्शन की माँग

बीते कुछ दिनों में देश में रेल हादसों में बढ़ोतरी आई है। इन रेल हादसों के पीछे के कारण जाँच के बाद स्पष्ट होंगे लेकिन ट्रेनों को खतरे में डालने के कुछ वीडियो वायरल हो रहे हैं। गुलजार शेख नाम का एक शख्स ‘एक्सपेरिमेंट’ के नाम पर ट्रेन की पटरियों पर सिलेंडर और साइकिल जैसी चीजें रख रहा है।

गुलजार शेख यूट्यूब पर व्यूज बढ़ाने के लिए लगातार वन्दे भारत जैसी ट्रेनों के आगे भी ऐसे सामान रख रहा है, जिससे रेल यात्रियों का जीवन खतरे में पड़ सकता है। उसके रेल पटरी पर साइकिल, सिलेंडर, मोटर और ऐसी ही केई वस्तुएँ रखते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुई हैं।

गुलजार शेख ने यूट्यूब पर खुद को ‘हैकर’ और ‘एक्सपेरिमेंट’ करने वाला बता रखा है। उसका यूट्यूब पर गुलजार इंडियन हैकर नाम से चैनल है, इस पर 2.35 लाख सब्सक्राइबर हैं। वह इसी पर वीडियो डालने के लिए ट्रेनों के आगे सामान रखता है और फिर उनसे सोशल मीडिया पर व्यूज बटोरता है।

गुलजार शेख की ऐसी ही एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। इसमें वह ट्रेन आने के पहले पटरी के बीचोंबीच एक बड़ी साइकिल डाल देता है। जब ट्रेन पूरी गुजर जाती है तो वह साइकिल दिखाता है। हालाँकि, इस मामले में कोई टक्कर नहीं हुई लेकिन यदि ऐसा होता तो ट्रेन सवार यात्रियों की जान को खतरा हो सकता था।

ऐसी ही एक और वीडियो में और ट्रेन की पटरी पर गैस सिलेंडर रखते हुए देखा जा सकता है। एक अन्य वीडियो में वह लोहे का मोटर पटरियों पर रखता है। एक और वीडियो में वह पटरी पर बाल्टी रखता है। इन सब वीडियो के बाद वह दिखाता है कि क्या नुकसान उस वस्तु को हुआ है।

उसके कुछ वीडियो काफी वायरल हुए हैं। अब उसके खिलाफ एक्शन की माँग हो रही है। उसके अधिकांश वीडियो प्रयागराज जिले के लालगोपालगंज इलाके के हैं। एक्स (पहले ट्विटर) पर भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला से लेकर तमाम लोगो उसके खिलाफ रेलवे और पुलिस से कार्रवाई करने को कह रहे हैं।

दलित बच्ची के मुँह में कपड़ा ठूँस कर गैंगरेप: महफूज, राजा (जाने का बेटा), इजरायल और रिजवान को 25-25 साल की सज़ा, पुलिस पर भी हुई थी गोलीबारी

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले की एक अदालत ने दलित समुदाय की नाबालिग लड़की से गैंगरेप के आरोप में मुस्लिम समुदाय के 4 युवकों को 25-25 साल की सजा सुनाई है। इन सभी पर 30-30 हजार रुपए का जुर्माना भी ठोंका गया है। चारों आरोपितों के नाम राजा, रिज़वान, इजरायल और महफूज़ हैं। घटना 10 फरवरी 2022 की थी। तब इन चारों ने कक्षा 8 में पढ़ने वाली एक मासूम लड़की को अपनी हवस का शिकार बनाया था। सजा का एलान मंगलवार (30 जुलाई, 2024) को हुआ है। चारों आरोपितों को जेल भेज दिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामले की सुनवाई अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेश नारायण मणि त्रिपाठी की अदालत में हुई। लगभग ढाई साल चले इस मुकदमे में पुलिस ने अपनी तरफ से आरोपितों को सजा दिलाने की भरसक कोशिश की थी। समय पर आरोपितों को गिरफ्तार करने के साथ उनके खिलाफ चार्जशीट भी कोर्ट में दाखिल की गई। इसके बाद अभियोजक पक्ष ने इस केस की लगातार पैरवी की। बचाव पक्ष ने भी खुद की बेगुनाही में तमाम दलीलें दीं। हालाँकि अंत में कोर्ट ने अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए सबूतों को सजा के लिए पर्याप्त माना।

अदालत ने राजा, महफ़ूज़, रिज़वान और इजरायल को पीड़िता से हुए गैंगरेप का दोषी पाया। इन सभी को 25-25 साल कैद के साथ 30-30 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई। सजा के बाद चारों आरोपितों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

गुप्तांग से आ गया था खून

यह मामला गोंडा जिले के थानाक्षेत्र कोतवाली नगर का है। यहाँ 29 मार्च 2022 को एक दलित महिला ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत में पीड़िता ने बताया कि 10 फरवरी 2022 को उनकी कक्षा 8 में पढ़ने वाली बेटी सुबह लगभग 8:30 पर एक सरकारी स्कूल में एक्जाम देने गई थी। रास्ते में स्कूल से लगभग 11:30 बजे दोपहर को लौटने के दौरान पीड़िता को जाने का बेटा राजा मिला। उसने लड़की का हाथ पकड़ा और जबरन शालीमार मैरिज हाल के पास एक सुनसान जगह पर ले गया। यहाँ उसने पीड़िता के मुँह में कपड़ा ठूस दिया और अपने 3 अन्य दोस्तों को बुला लिया।

इन तीन अन्य आरोपितों के नाम महफूज़, रिज़वान और इजरायल बताए जा रहे हैं। इन सभी ने बारी-बारी पीड़िता से गैंगरेप किया। पीड़िता रो कर रहम की भीख माँगती रही पर आरोपितों पर इसका कोई असर नहीं पड़ा। सामूहिक दुष्कर्म की वजह से पीड़िता के गुप्तांगों से खून निकलने लगा था। पीड़िता मानसिक रूप से पीड़ित भी बताई गई थी। तब उसका इलाज भी एक स्थानीय डॉक्टर इरशाद आलम के यहाँ चल रहा था। पीड़िता की माँ ने सभी 4 आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की थी। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है।

पुलिस पर भी बरसाईं थीं गोलियाँ

पुलिस ने यह FIR गैंगरेप की धाराओं के साथ पॉक्सो और SC/ST एक्ट के तहत दर्ज की थी। FIR दर्ज कर के आरोपित राजा की तलाश शुरू कर दी गई थी। 31 मार्च को पुलिस को मुख्य आरोपित राजा की लोकेशन गोंडा के उतरौला रोड पर मिली थी। तब पुलिस ने दबिश दे कर राजा की घेराबंदी की थी। खुद को घिरता देख कर राजा ने पुलिस टीम पर गोलियाँ बरसानी शुरू कर दी थीं। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी गोली चलाई थी। एक गोली राजा के पैर में लगी थी और उसे गिरफ्तार कर लिया गया था।

उगल दिए थे साथियों के भी नाम

राजा की तलाशी के दौरान उसके पास से बाइक, तमंचा और कारतूस बरामद हुआ था। उसका अस्पताल में इलाज करवाया गया था और बाद में उस से पूछताछ की गई थी। पूछताछ में उसने गैंगरेप में शामिल अपने अन्य साथियों के नाम महफूज़, रिज़वान और इजरायल के तौर पर बताए थे। पुलिस ने बारी-बारी दबिश दे कर इन तीन अन्य आरोपितों को भी गिरफ्तार कर लिया था। मुठभेड़ में राजा को गिरफ्तार करने वाली टीम को तब जिले के SP की तरफ से 25 हजार रुपए का इनाम भी दिया गया था।

राम मंदिर के खिलाफ झूठा वीडियो शेयर कर दलितों को भड़काया, हिन्दू युवक को हत्या की धमकी: ‘फूट डालो’ की मंशा वाले शान-ए-आलम को यूपी पुलिस ने दबोचा

उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले में पुलिस ने भगवान राम के मंदिर के बारे में भ्रामक खबर फैला रहे एक मुस्लिम युवक को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपित का नाम शान ए आलम है। शान ए आलम ने एक वीडियो वायरल की थी जिसमें बताया जा रहा था कि भगवान राम के मन्दिर में दलित समुदाय के लोगों को घुसने नहीं दिया जा रहा है। पुलिस की जाँच में ये आरोप निराधार और वीडियो में कही गई बातें झूठी पाई गईं थीं। बाद में शान ए आलम ने खिलाफ शिकायत करने वाले व्यक्ति को भी जान से मारने की धमकी दी। पुलिस ने बुधवार (31 जुलाई 2024) को शान ए आलम को गिरफ्तार कर लिया है।

यह मामला अयोध्या जिले के थानाक्षेत्र रामजन्मभूमि का है। यहाँ 9 जून 2024 को एक हिन्दू युवक ने पुलिस में तहरीर दी है। शिकायतकर्ता ने बताया कि 9 जून 2024 को वह अपनी फेसबुक प्रोफ़ाइल देख रहा था। तभी उसे शान ए आलम नाम के युवक की ID दिखी। अपनी ID से शान ए आलम ने 6 जून 2024 को एक वीडियो शेयर कर रखी थी। इस वीडियो में यह झूठा फैलाया गया था कि रामजन्मभूमि मंदिर में अनुसूचित जाति के लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है।

शान ए आलम द्वारा शेयर हुई इस वीडियो में SC वर्ग की कई जातियों के नाम भी लिए गए थे। तब शिकायतकर्ता ने बताया था कि वो अयोध्या में साधु-संतों की सेवा में लगा रहता है इसलिए उन्हें काफी तकलीफ हुई। पुलिस ने इस तहरीर पर 9 जून को शान ए आलम के खिलाफ IPC की धारा 505 और 505 (2) के तहत FIR दर्ज कर ली थी। अपने खिलाफ हिन्दू शिकायतकर्ता द्वारा दर्ज करवाई गई FIR की जानकारी मिलते ही शान ए आलम आग बबूला हो उठा था।

आरोप है कि मंलगवार (30 जुलाई) को शान ए आलम शिकायतकर्ता के घर 2 साथियों को ले कर पहुँच गया। उसने शिकायतकर्ता से कहा, “मेरे खिलाफ तुम्ही नेता बन कर मेरी पोस्ट पर मुकदमा लिखवाए हो। तुम अपना मुकदमा वापस ले लो नहीं हो जान से हाथ धो बैठोगे।” इतना कह कर शान ए आलम ने पीड़ित को गंदी-गंदी गालियाँ भी दीं। शिकायतकर्ता ने आरोपित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की। पुलिस ने शान ए आलम के खिलाफ इस मामले में भी भारतीय न्याय संहिता की धारा 352 के साथ आईटी एक्ट में केस दर्ज कर लिया।

ऑपइंडिया के पास दोनों FIR कॉपी मौजूद हैं। पुलिस ने आरोपित की तलाश शुरू कर दी और बुधवार (31 जुलाई) को शान ए आलम को गिरफ्तार कर लिया। अयोध्या के एसएसपी राज कुमार नैय्यर ने बताया कि शान ए आलम द्वारा की गई भ्रामक और आधारहीन पोस्ट से न सिर्फ अयोध्या और आसपास रहने वाले निवासियों की धार्मिक भावनाएँ आहत हुईं हैं बल्कि इस से सामाजिक विद्वेष फैलने की भी आशंका हो गई थी। उन्होंने बताया कि गिरफ्तार आरोपित के खिलाफ जाँच व अन्य कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

ये 1990 नहीं, 2024 है… धू-धू कर जले कश्मीरी पंडितों के 5 घर, जाँच के लिए पुलिस ने बनाई टीम: घाटी लौट रहे हिन्दुओं को डराने की साजिश?

जम्मू कश्मीर के अनंतनाग में 5 कश्मीरी पंडितों के घर धू-धू कर जल उठे। जी हाँ, आप 1990 के दशक की नहीं, बल्कि 2024 की खबर पढ़ रहे हैं। इस घटना की जाँच का आदेश दिया गया है, क्योंकि जम्मू कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में अनायास ऐसा होना काफी संदेह पैदा करता है। आशंका जताई जा रही है कि घाटी लौट रहे उन कश्मीरी पंडितों को डराने के लिए ऐसा किया गया है, जिन्हें कभी यहाँ से पलायन करना पड़ा था। उनका नरसंहार हुआ था, उनकी महिलाओं के साथ बलात्कार हुआ था।

ये घटना मट्टन स्थित लोन मोहल्ला का है। जम्मू कश्मीर पुलिस ने एक टीम गठित की है, जो इस आग का कारण पता लगाएगी। कश्मीरी पंडितों के एक खाली घर में आग लगी, फिर ये अगल-बगल फैल गई। घटना सोमवार (29 जुलाई, 2024) को रात 1 बजे की है। स्थानीय लोगों ने अग्निशमन विभाग को सूचित किया, जो पौने 2 बजे मौके पर 5 ट्रकों के साथ पहुँचा। एक मकान तो पूरी तरह जमींदोज हो गया। आग बुझाने में कर्मचारियों को 5 घंटे लग गए।

फायर ब्रिगेड ऑफिसर निस्सार अहमद ने बताया कि जैसे ही विभाग को सुचना मिली, दमकल की गाड़ियाँ वहाँ के लिए निकल गईं। कश्मीरी पंडितों का आरोप है कि ये जानबूझकर किया गया है। फारूक अब्दुल्लाह की पार्टी ‘नेशनल कॉन्फ्रेंस’ ने इस घटना पर दुःख जताते हुए कहा कि तबाह हुए घरों में से एक उसके अतिरिक्त प्रवक्ता रहे उमेश ताशी के ननिहाल का घर है। साथ ही पार्टी ने जाँच की माँग करते हुए न्याय सुनिश्चित करने की अपील पुलिस से की।

‘द कश्मीर फाइल्स’ के निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “इस वीडियो को सेव कर लें। कश्मीरी हिंदुओं की विरासतों को जलाया जा रहा है। ये 1990 नहीं है, बल्कि 29 जुलाई 2024 है। इसे सेव करके हर रविवार को देखें और विश्लेषण करें कि जब धार्मिक आतंकवाद को राजनीतिक और बौद्धिक संरक्षण दिया जाता है तो क्या हो सकता है।” ‘ऑल टेम्पल्स एन्ड श्राइन साउथ कश्मीर’ के अध्यक्ष अशोक कुमार ने कहा कि हम डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने पीड़ितों के लिए प्रशासन से मुआवजे की माँग की।

कॉन्ग्रेस नेता ने वोहरा समुदाय की लड़की को चाकुओं से गोदा, MP पुलिस ने दबोचा: कहा – ‘प्यार कर के धोखा देती है, लड़कियाँ पैसे खाती हैं’

मध्य प्रदेश के नीमच में एक लड़की को बीच सड़क पर चाकुओं से गोद डाला गया है। चाकूबाजी का आरोप कॉन्ग्रेस पार्टी से जुड़े एक नेता पर लगा है। आरोपित का नाम कुलदीप वर्मा बताया जा रहा है जिसकी उम्र 23 साल है। कॉन्ग्रेस नेता के हमले में 20 वर्षीया पीड़िता बुरी तरह से घायल हो गई है। आरोपित ने पीड़िता पर खुद को प्यार में धोखा दिए जाने का आरोप लगाया है। कुलदीप को गिरफ्तार कर लिया गया है। घटना बुधवार (31 जुलाई 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना नीमच जिले के थानाक्षेत्र कैंट की है। यहाँ के गाँधी वाटिका क्षेत्र में बुधवार की दोपहर वोहरा बाजार की रहने वाली लड़की कुछ काम से जा रही थी। तभी केसपुरा का निवासी कुलदीप वर्मा वहाँ पहुँच गया। उसके हाथ में चाकू था। कुलदीप ने सबके आगे ही पीड़िता से चीख-चीख कर बहस शुरू कर दी। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि कुलदीप पीड़िता से बोला, “प्यार करके धोखा देती है। ये लड़कियाँ पैसा खाती हैं। तुमने मुझे छोड़ा। कितने बॉयफ्रेंड हैं तेरे। अयान, रियान, आजाद, हर्षित।”

बताया जा रहा कि कुछ ही देर बाद कुलदीप वर्मा ने पीड़िता पर चाकुओं से वार शुरू कर दिया। लगभग 7 चाकुओं के वार से पीड़िता बुरी तरह से घायल हो गई। हमले से घटनास्थल पर अफरातरफरी का माहौल हो गया। लोगों को जुटता देख कर कुलदीप मौके से फरार हो गया। लोगों ने पीड़िता को अस्पताल में भर्ती करवाया। पीड़िता की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। डॉक्टर उसे बचाने की जीतोड़ कोशिश कर रहे हैं। एडिशनल एसपी नवल सिंह सिसोदिया के मुताबिक कुलदीप को गिरफ्तार कर लिया गया है।

पीड़िता वोहरा समुदाय की बताई जा रही है जबकि आरोपित कुलदीप वर्मा कॉन्ग्रेस पार्टी से जुड़ा बताया जा रहा है। कॉन्ग्रेस पार्टी के जिलाध्यक्ष भानु प्रताप सिंह राठौर के मुताबिक हमलावर NSUI से ज्ञानोदय महाविद्यालय में कॉलेज का अध्यक्ष रह चुका है। इसके अलावा कुछ अन्य कॉन्ग्रेसियों के अनुसार कुलदीप को हाल ही में यूथ कांग्रेस की जिला कार्यकारिणी में शामिल किया गया था।

मुस्लिमों पर एकतरफा कार्रवाई नहीं, हिन्दुओं के ढाबों की भी जाँच कर रही यूपी पुलिस: टूलकिट गैंग की पोल खोलते हुए दुकानदारों ने बताया – नहीं पूछा गया जाति या धर्म

पश्चिम उत्तर प्रदेश के लिए काँवड़ यात्रा सबसे बड़े सामूहिक पर्व के समान है। इस दौरान खासकर पूरे उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली और पंजाब तक के हिन्दुओं का जमावड़ा हरिद्वार को केंद्र बिंदु मान कर होता है। सदियों से चले आ रहे इस त्यौहार से अनगिनत लोगों को रोजगार मिलता है। इसमें बोल-बम के कपड़े, काँवड़, बर्तन आदि बेचने वालों के साथ ढाबे वाले भी शामिल हैं। इस बार सुरक्षा की दृष्टि से UP के प्रशासन ने सभी दुकानदारों से अपने असली नामों से व्यापार करने को कहा जो कुछ कट्टरपंथियों को नागवार गुजरा है।

उन्होंने प्रशासन पर कई तरह के आरोप मढ़ने शुरू कर दिए। इन्हीं आरोपों में एक यह भी है कि पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी जाँच के नाम पर सिर्फ मुस्लिम दुकानदारों के यहाँ जा रहे हैं।

पुलिस की कार्रवाई को एकतरफा और एक ही वर्ग पर बताने की साजिश रचने वालों में मोहमद जुबैर, अरफ़ा खानम, मिल्लत टाइम्स जैसे इस्लामी हैंडल सबसे आगे रहे। इसके अलावा अजीत अंजुम जैसे वामपंथी पत्रकारों ने भी इस मामले में अपनी दस्तक दी। उन्होंने कई मुस्लिम होटल ढाबों पर बने खाने के चटकारे लिए और यह नैरेटिव गढ़ने की कोशिश की है कि प्रशासनिक अधिकारियों ने निशाने पर महज उन होटल-ढाबों को लिया है जिसके मालिक मुस्लिम हैं।

बीच में कुछ ऐसी खबरें भी आईं जिसमें बताया गया कि प्रशासन की सख्ती से कुछ मुस्लिम कारीगरों को निकाल दिया गया। ऑपइंडिया ने इन आरोपों की जमीनी स्तर पर पड़ताल की।

हिन्दू दुकानदारों को भी जाँच रही है पुलिस

ऑपइंडिया की टीम ने पश्चिम उत्तर प्रदेश के कई जिलों में काँवड़ मार्ग का निरीक्षण किया। इस दौरान हमें गाजियाबाद के पहलवान ढाबा और देसी ठाठ भोजनालय जैसे खाने के ठिकाने मिले जिसके मालिक हिन्दू हैं। इन दोनों ने हमें बताया कि उनकी दुकानों पर पुलिस स्टाफ ने आ कर बाकायदा सारी व्यवस्थाओं को चेक किया और जरूरी दिशा निर्देश दिए। हमें यह भी बताया गया कि पुलिसकर्मियों का व्यवहार उनके प्रति सहयोगात्मक और अपनेपन जैसा रहा।

दोनों दुकानदारों ने हमें बताया कि वो प्रशासन के व्यवहार से पूरी तरह से संतुष्ट हैं।

न किसी की जाति पूछी और न ही किसी का धर्म

सहारनपुर जिले में हमें अम्बाला-देहरादून हाईवे पर बाबे का ढाबा और श्याम होटल और रेस्टोरेंट के मालिक मिले। ये दोनों हिन्दू हैं। इन दोनों ने हमें बताया कि न सिर्फ सावन माह में बल्कि पुलिस तो उनके ढाबों पर नियमित तलाशी और सुरक्षा के मद्देनजर पूरे साल समय-समय पर आती रहती है। इन दोनों ने हमें बताया कि पुलिस ने कभी भी यह नहीं पूछा कि उनके होटल-ढाबों पर काम करने वाले कारीगर किस जाति या धर्म से हैं। हाँ, पुलिस ने इन होटल मालिकों को यह निर्देश बार-बार दिए कि उनके यहाँ काम करने वालों का वेरिफिकेशन करवा लिया जाए।

इस आदेश को ढाबा मालिक अपने साथ समाज की सुरक्षा के लिए भी सही मानते हैं।

प्रशासन तो दूर साथी हिन्दू कारीगरों ने कभी नहीं किया भेद

मेरठ मार्ग पर मुख्य कांवड़ मार्ग पर मौजूद एक ढाबा मालिक ने नाम न छापने की शर्त पर हमसे बातचीत की। इस हिन्दू मालिक ने हमें अपना ढाबा दिखाया जिसमें लगभग 1 दर्जन कारीगर काम कर रहे थे। इन कारीगरों में उन्होंने तंदूर पर रोटी बना रहे व्यक्ति की तरफ इशारा किया। वह इत्मीनान से रोटियाँ बना रहा था। हमें बताया गया कि लगभग 1 दर्जन कारीगरों में रोटी बना रहा व्यक्ति मुस्लिम है। ढाबा मालिक ने कहा कि इस कारीगर का रहना और खाना-पीना भी बाकी हिन्दू कारीगरों के साथ ही होता है।

उन्होंने दावा किया कि किसी प्रशासनिक अधिकारी, किसी कारीगर या खुद उनकी तरफ से भी कभी भी धर्म या जाति के नाम पर उस मुस्लिम कारीगर से कोई भी भेदभाव नहीं हुआ।

प्रशासन पर लग रहे आरोप बेबुनियाद

मुज़फ्फरनगर के कांवड़ मार्ग पर स्थित वंश जूस और भोजनालय के मालिक ने हमें बताया कि प्रशासन पर जो भी एकतरफा कार्रवाई के आरोप लग रहे है वो बेबुनियाद हैं। उन्होंने दावा किया कि असली नाम लिखने के आदेश का अधिकतर दुकानदारों ने समर्थन किया था। हालाँकि उन्होंने कहा कि अंतिम निर्णय के तौर पर सुप्रीम कोर्ट से जो भी निर्देश मिलेंगे वो उनका पालन करेंगे। इसी के साथ मुज़फ्फरनगर के ही देव पंजाबी भोजनालय, सुधीर फ्रोजेन स्टॉल आदि दुकानों के हिन्दू मालिकों ने भी प्रशासन के खिलाफ फैलाए गए प्रोपोगेंडा को झूठा करार दिया है। उन्होंने कहा कि प्रशासन का कार्य भेदभाव से रहित और सबके लिए एक जैसा है।

5 जूतों की सज़ा और ₹15000 जुर्माना… आगरा के मौलवी ने कुछ यूँ रफा-दफा करवाया बलात्कार का मामला, यूपी पुलिस ने शुरू की जाँच

उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में रेप जैसे गंभीर मामले को भी 5 जूते मार कर रफा-दफा कर लेने का मामला सामने आया है। इस अजीबोगरीब समझौते का मास्टरमाइंड एक मौलवी बताया जा रहा है जिसके खिलाफ अब पुलिस FIR दर्ज कर रही है। गुरुवार (25 जुलाई, 2024) को की गई मौलवी की इस करतूत का वीडियो भी अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। मौलवी के साथ पंचायत में मौजूद 4 अन्य पंच भी फरार हो गए हैं। पुलिस आरोपितों की तलाश के साथ मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई में जुटी हुई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना आगरा के थाना क्षेत्र शाहगंज की है। यहाँ 25 जुलाई को भोगीपुरा पुलिस चौकी पर एक व्यक्ति ने अपनी बेटी के लापता होने की शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत में लड़की के पिता ने बताया कि उनकी बेटी घर से कहीं चली गई जिसका कोई अता-पता नहीं है। पुलिस मामले में जाँच कर ही रही थी कि अगले दिन भोर में 3 बजे लड़की का पिता फिर से थाने पहुँच गया। उसने पुलिस को बताया कि उनकी बेटी वापस लौट आई है और उनको अब कोई पुलिसिया कार्रवाई नहीं चाहिए।

इस बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल होने लगा। इस वीडियो में एक पंचायत में 5 पंच बैठे दिख रहे हैं। पंचों का नेतृत्व एक मौलवी कर रहा है। वीडियो में वो मौलवी एक युवक को 5 जूते मारने की सजा सुना रहा है। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने इसकी जाँच शुरू की तो असल घटना निकल कर सामने आई। बताया जा रहा है कि 25 जुलाई को एक मुस्लिम युवक अपनी ही समुदाय की लड़की को उसके घर से भगा ले गया था। उसने किसी अज्ञात जगह ले कर कर लड़की को कोल्डड्रिंक में नशा दिया और बाद में बलात्कार किया।

इधर लड़की को घर पर न पा कर उसके अम्मी-अब्बू परेशान हो गए। उन्होंने फ़ौरन इस घटना की सूचना पुलिस को दी। पुलिस की सक्रियता को देख कर आरोपित ने पीड़िता को उसके घर वापस लौटा दिया। घर आने के बाद दोनों पक्षों की तरफ से मोहल्ले के एक मौलवी ने मामले में हस्तक्षेप किया। उसने लड़की के घर वालों को बेइज्जती आदि का डर दिखाया और 5 पंचों के साथ पंचायत करने लगा। पंचायत ने आरोपित युवक को 5 जूते मारने का फरमान सुनाया। आरोपित की पिटाई पीड़िता से ही करवाई गई।

बताया यह भी गया है कि आरोपित द्वारा पीड़िता को हर्जाने के तौर पर 15 हजार रुपए भी पंचायत में दिलवाए गए। इसी फरमान के साथ पीड़ित और आरोपित पक्ष की मौजूदगी में रेप जैसे गंभीर मामले पर पर्दा डाल दिया गया। ACP मयंक तिवारी ने बताया कि वायरल वीडियो का संज्ञान ले कर केस दर्ज करवाया जा रहा है। इस बीच पीड़िता ने आरोपित द्वारा लिए गए रुपए भी वापस कर दिए हैं। घटना के बाद मौलवी सहित पंचायत में मौजूद पंच फरार हो गए हैं। पुलिस फरार सभी आरोपितों की तलाश के साथ मामले में जरूरी जाँच व कानूनी कार्रवाई कर रही है।

अब ट्रेनी IAS नहीं रहेंगी पूजा खेडकर, कभी परीक्षा भी नहीं दे पाएँगी: UPSC ने की कार्रवाई, अग्रिम जमानत माँगते हुए दिल्ली की कोर्ट से कहा- मैंने कुछ गलत नहीं किया

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने फर्जी कागजों के आधार पर IAS बनने के आरोपों में घिरी पूजा खेडकर की उम्मीदवारी रद्द कर दी है। UPSC ने कहा है कि है पूजा अब आगे किसी भी परीक्षा में नहीं बैठ पाएँगी। पूजा खेडकर ने UPSC द्वारा दर्ज करवाई FIR में गिरफ्तारी से बचने के लिए दिल्ली के कोर्ट का रास्ता अख्तियार किया है, जहाँ जमानत पर निर्णय सुरक्षित रख लिया गया है।

UPSC ने बुधवार (31 जुलाई, 2024) को स्पष्ट किया कि उसने पूजा खेडकर को अपना पक्ष रखने के लिए पूरा मौक़ा दिया लेकिन उन्होंने अपना पक्ष नहीं रखा। UPSC ने उनके द्वारा 2022 में दी गई UPSC परीक्षा की उम्मीदवारी भी रद्द कर दी है और साथ ही उन्हें भविष्य की सभी परीक्षाओं में भाग लेने से बहिष्कृत कर दिया है।

UPSC ने कहा, “यूपीएससी ने सभी कागजों की सावधानीपूर्वक जाँच की है और पूजा खेडकर को CSE-2022 नियमों के प्रावधानों के उल्लंघन करने का दोषी पाया है। CSE-2022 के लिए उनकी उम्मीदवारी रद्द कर दी गई है और उन्हें भविष्य की UPSC की सभी परीक्षाओं/चयनों से भी स्थायी रूप से वंचित कर दिया गया है।”

UPSC ने बताया है कि उसने 2009 से लेकर अब तक के परीक्षा रिकॉर्ड की जाँच की है और पाया है कि पूजा खेडकर के अलावा और किसी ने भी अनुमति से अधिक बार परीक्षा नहीं दी है। इसके लिए UPSC ने 15,000 से अधिक अभ्यर्थियों के रिकॉर्ड का मिलान किया है।

पूजा खेडकर को UPSC ने 30 जुलाई, 2024 तक का समय अपना जवाब दाखिल करने के लिए दिया था लेकिन वह अपना पक्ष नहीं रख पाईं। UPSC ने कहा कि पूजा खेडकर को अपना पक्ष रखने का यह आखरी मौका दिया गया था। UPSC ने बताया कि पूजा खेडकर को यह भी सूचना दे दी गई थी कि यदि वह अपना पक्ष नहीं रखती तो उन आगे कार्रवाई की जाएगी।

UPSC ने इससे पहले धोखाधड़ी के मामले में पूजा खेडकर के विरुद्ध FIR भी दर्ज करवाई थी। खेडकर इस मामले में गिरफ्तारी से बचने के लिए दिल्ली की एक अदालत पहुँच गई हैं। उन्होंने यहाँ अग्रिम जमानत लेने के लिए याचिका लगाई है। पूजा खेडकर के इस मामले में बुधवार को सुनवाई भी हुई।

पूजा खेडकर के वकील ने यहाँ कहा कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया है और UPSC समेत पुलिस जाँच के बिना अंत तक पहुँचे उनको गिरफ्तार करना सही नहीं है। खेडकर की तरफ से दावा किया गया कि उन्होंने नाम बदल कर कुछ भी गलत नहीं किया। वहीं दूसरी तरफ UPSC और दिल्ली पुलिस ने आरोप लगाया कि पूजा खेडकर ने धोखाधड़ी की है। इस मामले में कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। वह गुरुवार (1 अगस्त, 2024) को अपना फैसला सुनाएगा।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र की रहने वाली IAS पूजा खेडकर के विरुद्ध कलेक्टर से लाल बत्ती लगी गाड़ी और अपना ऑफिस माँगने के आरोप सबसे पहले सामने आए थे। इसके बाद उनके आरक्षण के प्रमाण पत्रों में भी गड़बड़ मिली। बताया गया कि उन्होंने विकलांगता और OBC आरक्षण के प्रमाण पत्र में भी फर्जीवाड़ा किया और उससे परीक्षा में फायदा लिया।

अलीगढ़ में 94 अवैध मदरसों पर लगेगा ताला, 2000 बच्चे अब सरकारी स्कूल में पढ़ेंगे: योगी सरकार के निर्देश के बाद एक्शन में अधिकारी

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिला प्रशासन ने अवैध तौर पर चल रहे मदरसों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। जिले में 94 गैर मान्यता प्राप्त मदरसों को चिन्हित करके उन्हें अवैध घोषित किया गया है। इन सभी को बंद करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। इन मदरसों में पढ़ने वाले लगभग दो हजार छात्रों को दूसरे स्कूलों में शिफ्ट करवाया जाएगा। बुधवार (31 जुलाई 2024) को प्रशासन ने इस कार्रवाई की जानकारी दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उत्तर प्रदेश शासन की तरफ से इसी साल 26 जून को जिले के प्रशासनिक अधिकारियों के पास पत्र आया था। मुख्य सचिव द्वारा डीएम अलीगढ़ को भेजे गए इस पत्र में जिले में गैर मान्यता प्राप्त मदरसों को चिन्हित करके उन पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए थे। पत्र आने के बाद जिलाधिकारी अलीगढ़ विशाख जी ने प्रशासनिक अधिकारियों की एक टीम का गठन किया था। इस टीम में SDM, BSA, DSP, DIOS और जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी शामिल थे।

इस टीम ने लगातार पूरे जिले में चल रहे तमाम मदरसों का सत्यापन किया। सत्यापन में 94 मदरसों को चिन्हित किया गया है जो बिना मान्यता के चल रहे थे। जिला अल्पंसख्यक अधिकारी निधि गोस्वामी ने बुधवार (31 जुलाई 2024) को मीडिया से बताया कि इन मदरसों को बंद किया जाएगा। इसमें पढ़ रहे लगभग 2 हजार छात्रों को सरकारी स्कूलों में शिफ्ट किया जाएगा। जाँच का दायरा बढ़ाने के लिए मान्यता प्राप्त मदरसों के शिक्षकों को भी टीम में शामिल कर लिया गया है। ये मदरसा टीचर अवैध तौर पर चल रहे मदरसों की लिस्ट तैयार करने में प्रशासन की मदद करेंगे।

जिस पत्रकार से राजीव गाँधी ने कहा था- आरक्षण के नाम पर बुद्धुओं को बढ़ावा नहीं दूँगा, उन्होंने कहा- राहुल गाँधी की राजनीति जाति और वामपंथ का खतरनाक कॉकटेल

राहुल गाँधी लगातार ‘जाति जनगणना’ की बातें कर रहे हैं, वो जाति के हिसाब से हिस्सेदारी की बातें करते हैं। कभी वो बजट बनाने वाले अधिकारियों की जाति पूछते हैं, तो कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को OBC समाज का मानने से इनकार कर देते हैं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या सत्ता पाने के लिए कॉन्ग्रेस पार्टी देश को गृहयुद्ध की तरफ धकेलने की साजिश रच रही है? बड़ी बात ये है कि आरक्षण को लेकर राजीव गाँधी के जो विचार थे, वो कॉन्ग्रेस पार्टी के लिए गले की फाँस बन सकते हैं।

प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का रुख भी आरक्षण के खिलाफ था। वहीं केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में 1985 का मुद्दा उठाया, जब राजीव गाँधी ने प्रधानमंत्री रहते आरक्षण के खिलाफ बयान दिया था। असल में उन्होंने 1985 में ‘नवभारत टाइम्स’ (NBT) के साथ इंटरव्यू में कुछ ऐसा कहा था, जो भाजपा आज लोगों को याद दिला रही है। राजीव गाँधी का ये इंटरव्यू पत्रकार आलोक मेहता ने लिया था। अब आलोक मेहता ने CNN-News18 को दिए गए इंटरव्यू में इस पर और राहुल गाँधी की ताज़ा राजनीति पर विस्तार से बात की है।

आलोक मेहता ने कहा कि वो राजीव गाँधी के PM बनने से पहले से ही उनका संपर्क रहा है, ऐसे में वो राहुल गाँधी के ताज़ा भाषणों को सुन कर दुःखी हैं क्योंकि राहुल गाँधी को लगता है कि जाति की राजनीति कामयाब होगी। उन्होंने कहा कि राजीव गाँधी आधुनिक व्यक्ति थे, राहुल गाँधी जो राजनीति कर रहे वो उनकी पिता की राजनीति से एकदम अलग है। आलोक मेहता का मानना है कि राहुल गाँधी या तो कन्फ्यूज्ड हैं या फिर कम्युनिस्ट बनना चाहते हैं।

आलोक मेहता ने याद दिलाया कि छत्तीसगढ़ में कॉन्ग्रेस के सबसे बड़े नेता रहे विद्याचरण शुक्ला को माओवादियों ने ही मार डाला था। अलोक मेहता ने कहा कि वो लंबे समय से इस परिवार को जानते हैं, ऐसे में उन्हें आज ये सब देख कर दुःख होता है। अलोक मेहता का मानना है कि राहुल गाँधी के इस राजनीतिक रुख से उन्हें भले ही तात्कालिक फायदा हो जाए, लेकिन आगे जाकर भारत को इसका नुकसान होगा। वरिष्ठ पत्रकार ने कहा कि वो धार्मिक कट्टरता के साथ-साथ जातिवादी राजनीति के भी खिलाफ हैं।

आलोक मेहता ने कहा कि अगर जातीय राजनीति की ही बात करें तो राहुल गाँधी या तेजस्वी यादव से अधिक सक्षम नेता अखिलेश यादव हैं। अलोक मेहता के अनुसार, राहुल गाँधी कि ताज़ा राजनीति जातिवाद और कम्युनिज्म का मिश्रण है। उन्होंने चीन का उदाहरण देते हुए कहा कि इस तरह की राजनीति अंततः मजदूरों के विद्रोह को जन्म देती है। आलोक मेहता ने कहा कि आज जयराम रमेश कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी के सलाहकार बने हुए हैं, जो खुद एक चुनाव तक लड़ कर नहीं जीत सकते।

राजीव गाँधी के साथ आलोक मेहता (फोटो साभार: News18)

आलोक मेहता का कहना है कि राहुल गाँधी देश के सबसे बड़े भ्रष्टाचारी लालू यादव के साथ मिल कर राजनीति करते हैं। 1985 के जिस इंटरव्यू का जिक्र संसद में हुआ, उसमें राजीव गाँधी ने कहा था कि संविधान बनाए जाने के दौरान आरक्षण की जो व्यवस्था की गई थी, उसका अब काफी राजनीतिकरण हो गया है। उन्होंने कहा था कि आरक्षण के प्रावधानों पर नए सिरे से विचार का समय आ गया है। इस दौरान उन्होंने कहा था – विभिन्न क्षेत्र में बुद्धुओं के आगे बढ़ने से देश को नुकसान होगा।

विशेष विमान से राजस्थान के उदयपुर से नई दिल्ली लौटते समय यात्रा के दौरान ही उन्होंने NBT के आलोक मेहता को इंटरव्यू दिया था। बता दें कि हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर से सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने संसद में करारा पलटवार करते हुए राहुल गाँधी से पूछा कि उनकी जाति क्या है? उन्होंने कहा कि जिसकी खुद की जाति का पता नहीं, वो ‘जाति जनगणना’ की बात करता है। इसके बाद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव भी भड़क गए। उन्होंने कहा कि आप जाति कैसे पूछ सकते हैं? जबकि ‘जाति जनगणना’ के तहत यही लोग पूरे देश की जाति पूछने की माँग करते हैं।