Home Blog Page 770

एक तरफ अमरनाथ यात्रा को दहलाने की साजिश विफल, दूसरी तरफ काँवड़ यात्रा की सुरक्षा के लिए ATS को सँभालनी पड़ी जिम्मेदारी: ‘ढाई मोर्चे’ पर लड़ता भारत

अब से करीब 7 साल पहले जून 2017 में तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने कहा था कि भारत अपने दुश्मनों से ढाई मोर्चे पर युद्ध लड़ने के लिए तैयार है और देश की रक्षा के लिए भी। उन्होंने कहा था कि आने वाले समय में हमें पाकिस्तान-चीन के साथ ही देश के अंदर के दुश्मनों से लड़ने के लिए तैयार रहना होगा। उनकी भविष्यवाणी सच साबित होती दिख रही है। एक तरफ अमरनाथ यात्रा के लिए भारत सरकार को सुरक्षा की अभूतपूर्व तैयारियाँ करनी पड़ रही हैं, तो अब देश के भीतर ही काँवड़ियों की सुरक्षा के लिए भी सरकार को एटीएस जैसी एजेंसियों की तैनाती करनी पड़ रही है। एटीएस का मतलब तो जानते ही होंगे? एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड।

यूपी एटीएस के हवाले काँवड़ियों की सुरक्षा

अब देश के उन हिस्सों में भी आतंकवाद निरोधक दस्तों की तैनाती करनी पड़ रही है, जहाँ कभी किसी ने नहीं सोचा था कि आतंकवाद खतरा इस कदर बढ़ जाएगा कि काँवड़ यात्रा को आतंकवादियों से सुरक्षा के लिए एटीएस की तैनाती करनी पड़ेगी, लेकिन सिक्योरिटी इनपुट के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मुजफ्फरनगर रूट पर एटीएस की तैनाती की है। एटीएस के कमांडोज को काँवड़ियों की सुरक्षा के लिए तैनात किया गया है। एसएसपी अभिषेक सिंह ने एटीएस के कमांडोज को ब्रीफिंग दी है और अलर्ट मोड पर रहने को कहा है। इसकी के साथ मुजफ्फरनगर में एटीएस (एंटी टेरेरिस्ट स्क्वाड) की टीम भी तैनात कर दी गई है।

शनिवार (27 जुलाई 2024) की सुबह लखनऊ से पहुंची एटीएस की टीम ने मुजफ्फरनगर में शिवचौक पर डेरा डाला। यहाँ एसएसपी अभिषेक सिंह ने टीम में शामिल जवानों को कांवड़ यात्रा रूट के संबंध में जानकारी दी और पूरी मुस्तैदी से निगरानी का निर्देश दिया। मुजफ्फरनगर में इनकी सबसे ज्यदा भीड़ रहती है, क्योंकि यहां शिव चौक मंदिर की परिक्रमा करते हुए शिव भक्त हरियाणा राज्य के विभिन्न जनपदों के साथ ही राजस्थान और दिल्ली के अलावा गाजियाबाद, बुलंदशहर, अलीगढ़, गौतमबुद्धनगर, मेरठ, हापुड़ लिए भी निकलते हैं। जनपद में कांवड़ यात्रा का पूरा रूट लगभग 240 किलोमीटर का है। यात्रा की सुरक्षा के लिए पुलिस प्रशासन ने दो हजार से ज्यादा स्थानों पर सीसीटीवी लगाए हैं। प्रत्येक दो किलोमीटर की दूरी पर पुलिस की तैनाती की गई है।

अमरनाथ यात्रा पर खालिस्तानी आतंकी हमले का खतरा

अमरनाथ यात्रा पर अब तक पाकिस्तानी और उनके कश्मीरी प्यादे आतंकवादियों के हमलों का डर रहता था, लेकिन इस बार अमरनाथ यात्रा पर खालिस्तानी आतंकियों के हमले का भी खतरा बढ़ गया है। खुफिया एजेंसियों ने खालिस्तानी आतंकियों के कुछ मैसेज इंटरसेप्ट किए हैं, जिसके बाद अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा को बढ़ा दिया गया है। खुफिया जानकारी के अनुसार, आईएसआई तीर्थयात्रा के दौरान हमला करने के लिए पंजाब के गैंगस्टर नेटवर्क, कट्टरपंथी समूहों और आतंकवादी संगठनों का इस्तेमाल करने की योजना बना रही है।

रिपोर्ट्स से पता चलता है कि अराजकता और भय पैदा करने के अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए स्थानीय आपराधिक तत्वों का फायदा उठाने की एक ठोस कोशिश की जा रही है। इसके अलावा, खुफिया रिपोर्ट से पता चलता है कि आईएसआई बब्बर खालसा इंटरनेशनल का इस्तेमाल पंजाब और दिल्ली में भाजपा नेताओं और प्रमुख हिंदू हस्तियों को निशाना बनाने के लिए कर रही है। आईएसआई और बब्बर खालसा के बीच यह गठजोड़ न केवल तीर्थयात्रियों के लिए बल्कि क्षेत्र के प्रमुख राजनीतिक और धार्मिक नेताओं के लिए भी बहुआयामी खतरा पैदा करता है। बता दें कि इस साल अमरनाथ यात्रा पर काफी लोग जा रहे हैं, जिनका पहले से रजिस्ट्रेशन किया जाता है। इस साल खालिस्तानी आतंकियों का खतरा सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े हो गए हैं।

जनरल बिपिन रावत ने साल 2017 में ही किया था आगाह

बता दें कि जून 2017 में उस समय के भारतीय सेना के प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने कहा था कि भारत को आने वाले दिनों में ढाई मोर्चे पर युद्ध के लिए तैयार रहना होगा। साथ ही उन्होंने ये भी कहा था कि भारतीय सेना बाहर के किसी भी हमले या अंतर के किसी भी हमले यानी दोनों मोर्चों पर एक साथ युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने एएनआई को दिए एक इंटरव्यू में साफ तौर पर कहा था, “भारतीय सेना ढाई मोर्चों पर युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार है।” उन्होंने चीन, पाकिस्तान के साथ ही देश के अंदर मौजूद खतरों के बारे में आगाह किया था। उनके इस बयान के महज 7 साल के भीतर ही देश के अंदर धार्मिक यात्राओं के लिए भी एटीएस जैसी एजेंसियों की तैनाती इस बात पर मुहर लगाती है कि वो कितने दूरदर्शी थे।

गौरतलब है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश से जुड़े कई टेरर मॉड्यूल भंग किए जा चुके हैं। पश्चिमी यूपी के कई जिलों से कट्टरपंथी आतंकवादियों को पकड़ा जा चुका है, तो अलीगढ़ जैसे शहरों से आईएसआईएस का मॉड्यूल भी पकड़ा जा चुका है। वहीं, पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए काम करने वाले, जासूसी करने वाले और आईएसआई के इशारे पर आतंकी हमलों को अंजाम देने के लिए तैयार आतंकवादियों को भी पकड़ा जा चुका है। अब काँवड़ यात्रा पर आतंकी हमले का अलर्ट जारी होने के बाद यूपी एटीएस ने मोर्चा संभाल लिया है, तो अमरनाथ यात्रा को खालिस्तानी आतंकियों से बचाने की भी फुलप्रूफ तैयारी हो चुकी है। ये घटनाक्रम ये भी बताते हैं कि भारत देश और भारत देश की सुरक्षा एजेंसियाँ हर खतरे से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।

यूपी के जालौन में चरम पर ‘लव जिहाद’: डेढ़ महीने में गायब हुई 5 लड़कियाँ, हिंदू संगठनों ने प्रशासन को चेताया, अकरम पर 15 हजार का ईनाम घोषित

उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में लव जिहाद के कई मामले सामने आए हैं। महज डेढ़ महीने के भीतर 5 हिंदू लड़कियाँ गायब हो चुकी हैं। इनके अपहरण की आशंका मुस्लिम युवकों पर जताई जा रही है। लव जिहाद की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए हिंदू संगठन भी मैदान में उतर आए हैं। उन्होंने प्रशासन को चेतावनी दी है। इस बीच, पुलिस ने अकरम नाम के आरोपित पर 15 हजार का ईनाम भी घोषित कर दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लव जिहाद की वजह से बीते डेढ़ माह में जालौन नगर से पाँच हिंदू लड़कियाँ गुम हो गईं। इसको लेकर हिंदू संगठनों में आक्रोश पनप रहा है और वह जिले के अधिकारियों को ज्ञापन सौंप चुके हैं। पुलिस के द्वारा लड़कियों की बरामदगी न होने पर उन्होंने अनशन की चेतावनी दी थी। देर रात इसको लेकर रणनीति बनाई जा रही थीं, इसकी भनक जिला प्रशासन को लगी तो मौके पर डीएम और एसपी ने पहुँचकर अनशन न करने की बात कही। आश्वासन पर अनशन की स्थगित कर दिया गया।

जानकारी के मुताबिक, जालौन कस्बे में कट्टरपंथी मुस्लिम युवक हिंदू समाज की लड़कियों को निशाना बना रहे हैं। इसको लेकर हिंदू संगठनों ने कई बार विरोध प्रदर्शन किया और रोष प्रकट करते हुए उच्च अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होने से नाराज होकर हिंदू संगठनों ने अनिश्चितकालीन अनशन की चेतावनी दी थी। इसी बात को लेकर वह अपनी रणनीति शुक्रवार (26 जुलाई 2024) की रात तैयार कर रहे थे। किसी तरह पुलिस को इसकी भनक लग गई और एसपी को इसकी जानकारी दी गई।

शादी के 15 दिन पहले गुम हो गई थी लड़की, हिंदू संगठन नाराज

बीती 14 जुलाई को कोतवाली क्षेत्र निवासी एक युवती की शादी थी। लेकिन शादी से पूर्व ही बीती तीन जुलाई को युवती घर से लापता हो गई। जिसके संबंध में पीड़ित के भाई ने जालौन कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। 13 जुलाई की रात में युवती के पिता की मृत्यु हो गई थी। इस घटना को लेकर 15 जुलाई को हिंदू सगठनों के नेता द्वारिकाधीश मंदिर पर एकत्रित हुए और मौन जुलूस निकालकर तहसील परिसर में मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन एसडीएम को सौंपा था। ज्ञापन देने एक सप्ताह के बाद भी पुलिस किसी युवती को बरामद नहीं कर पाई। इस केस में मुख्य आरोपित का नाम अकरम है।

इस मुद्दे पर जब बैठक की जा रही थी, तभी मौके पर डीएम राजेश कुमार और एसपी दुर्गेश कुमार पहुँचे और वहाँ मौजूद लोगों से अनशन न करने की बात रखी। इसके अलावा उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ठोस कदम उठाए जाएँगे और मतांतरण या धर्मांतरण कराने वाले लोगों के घर पर बुलडोजर आदि की कार्रवाई भी अमल में लाई जाएगी।

इस मामले में क्षेत्राधिकारी रामसिंह ने बताया कि बीती 3 जुलाई को एक मुकदमा पंजीकृत कराया जा चुका है, जिसमें आरोपित युवक अकरम वांछित चल रहा है। युवक की गिरफ्तारी के लिए चार टीमों का गठन किया गया है। पुलिस अधीक्षक द्वारा आरोपित पर पंद्रह हजार रुपए का इनाम घोषित किया गया है और लड़की की बरामदगी के लिए चार टीमों का गठन किया गया है।

सहेली ने ब्रेकअप में गर्लफ्रेंड की मदद की, इसीलिए मार डाला… MP में धराया बेंगलुरु में बिहार की लड़की की हत्या करने वाला, वीडियो में दिखा कैसे हॉस्टल में घुस घोंपा चाकू

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के कोरमंगला इलाके में एक लड़की की हत्या की वारदात CCTV कैमरे में कैद हो गई। अब हत्यारा मध्य प्रदेश से धराया है। PG हॉस्टल में बिहार की कीर्ति कुमारी का गला काट कर हत्या कर दी गई थी। हत्यारा अभिषेक सिंह भोपाल में ही रह रहा था। ये घटना मंगलवार (23 जुलाई, 2024) की है। अभिषेक और कीर्ति अच्छे दोस्त हुआ करते थे। कीर्ति की दोस्त राजपाली के साथ अभिषेक रिलेशनशिप में था। हालाँकि, राजपाली बाद में अभिषेक से अलग हो गई। घटना वेंकटरेड्डी लेआऊट के ‘भार्गवी स्टेइंग होम फॉर लेडीज’ की है।

इस दौरान कीर्ति ने राजपाली के फैसले का समर्थन किया और अभिषेक से अलग होने में उसकी मदद की। इसी बात को लेकर अभिषेक, कीर्ति से नाराज़ था और आखिरकार उसने इस हत्याकांड को अंजाम दे दिया। MBA कर चुकी 24 वर्षीय कीर्ति एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी भी करती थी। वहीं राजपाली महाराष्ट्र की रहने वाली है। बेंगलुरु में काम करने के दौरान अभिषेक और राजपाली एक-दूसरे के संपर्क में आए थे। दोनों में दोस्ती हुई जो बाद में प्यार में बदल गई।

कुछ समय बाद राजपाली को ये रिश्ता अच्छा नहीं लगा और उसने अभिषेक से बातचीत करना बंद कर दिया। कीर्ति ने नए PG हॉस्टल में शिफ्ट करने में राजपाली की मदद की। दोनों सहेलियों ने अभिषेक से सारे संपर्क तोड़ लिए थे। CCTV में हत्या की वरदा कैद हो गई। वीडियो फुटेज में अभिषेक को एक थैला लेकर पीजी हॉस्टल में घुसते हुए देखा जा सकता है, उसने हॉस्टल की तीसरी मंजिल पर स्थित कीर्ति के कमरे के पास पहुँच कर दरवाजा खटखटाया।

जैसे ही कीर्ति ने दरवाजा खोला, उसने लड़की को कॉरिडोर में खींच लिया। दोनों में हाथापाई शुरू हो गई। वीडियो में देखा जा सकता है कि इसके बाद अभिषेक ने कीर्ति के गर्दन पर चाकू से वार किया, उसके बाद फिर कई वार किए। इस दौरान कीर्ति मदद के लिए चिल्लाती रही, लेकिन अपने-अपने कमरे के दरवाजे पर खड़े होकर ये वाकया देख रही लड़कियाँ मदद के लिए आगे नहीं आईं। हत्या कर अभिषेक फरार हो गया था। अभिषेक ने हत्या के लिए रात के साढ़े 11 बजे का समय चुना था।

‘ममता बनर्जी का ड्रामा स्क्रिप्टेड’: कॉन्ग्रेस नेता अधीर रंजन ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र, कहा – ‘दिल्ली में संत, लेकिन बंगाल में शैतान’

पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी दिल्ली में नीति आयोग की बैठक में शामिल हुई। इस बैठक के बीच से ही निकलीं और आरोप लगाया कि उन्हें बोलने ही नहीं दिया गया। अब इस मामले में पश्चिम बंगाल कॉन्ग्रेस अध्यक्ष और हाल ही में टीएमसी उम्मीदवार यूसुफ पठान से हार झेलने वाले अधीर रंजन चौधरी ने ममता बनर्जी पर जोरदार हमला बोला है। अधीर ने कहा है कि ममता बनर्जी झूठ बोल रही हैं। उन्होंने ममता बनर्जी के दावे को स्क्रिप्टेड करार दिया। इस बीच, उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र भी लिखा है। उन्होंने पत्र में कहा है कि ममता बनर्जी दिल्ली में तो संत बन जाती हैं, लेकिन वो पश्चिम बंगाल में शैतान बन जाती हैं।

अधीर रंजन चौधरी ने ममता पर एक के बाद एक आरोप लगाए और यहाँ तक कह दिया कि ममता झूठ बोल रही हैं कि उन्हें बोलने नहीं दिया जाता है। वे खुद बंगाल में तानाशाही करती हैं। अधीर रंजन चौधरी ने कहा, “नीति आयोग की बैठक के बारे में ममता बनर्जी जो बातें कह रही हैं, मुझे लगता है कि वह झूठ बोल रही हैं… यह बहुत आश्चर्यजनक है कि किसी राज्य के सीएम को बोलने की अनुमति नहीं दी जाएगी। ममता बनर्जी जानती थीं कि वहाँ क्या होने वाला है… उनके पास पहले से ही स्क्रिप्ट थी।” अधीर रंजन चौधरी ने दावा किया है कि जिस तरह से राहुल गाँधी की देशभर में लोकप्रियता बढ़ रही है, उससे ममता बनर्जी को जलन हो रही है।

अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि दिल्ली में ममता बनर्जी संत की तरह नजर आती हैं लेकिन कोलकाता आते ही इनका रूप बदल जाता है। बंगाल में अघोषित आपातकाल है। तानाशाही का स्वरुप रोज देखने को मिलता है। ममता लगातार झूठ बोल रहीं हैं कि बोलने का मौका नहीं दिया जाता है।

इतना ही नहीं अधीर ने यह भी कहा कि चुनाव हो या न हो, बंगाल में जिस तरह की अराजकता का सामना करना पड़ रहा ह। नगर निगम चुनाव में हमें वोट देने का मौका नहीं मिला। जबरदस्ती चुनाव जीतते हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान, वहाँ केंद्र द्वारा सुरक्षा बल तैनात किए गए थे इसलिए कुछ स्थानों पर मतदान शांतिपूर्ण ढंग से हुआ लेकिन हम निश्चित रूप से यह नहीं कह सकते कि सभी जगह मतदान शांतिपूर्ण ढंग से हुआ।

इस बीच, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को लिखे पत्र में भी उन्होंने पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा का मुद्दा उठाया है। चौधरी ने दो पन्नों के पत्र में लिखा, “मैं पश्चिम बंगाल में सार्वजनिक जीवन में शिष्टाचार और कानून-व्यवस्था बहाल करने के लिए आपके हस्तक्षेप की माँग करता हूँ। मेरे लिए, व्यक्तिगत स्तर पर, राज्य में अराजक स्थिति को देखना न केवल परेशान करने वाला है, बल्कि बहुत पीड़ादायक भी है, जिसका कारण सत्तारूढ़ पार्टी का विपक्ष के कार्यकर्ताओं, समर्थकों और समर्थकों के प्रति क्रूर रवैया है।”

उन्होंने कहा, “लोकसभा चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ पार्टी द्वारा फैलाए गए ‘आतंक’ के कारण विपक्षी पार्टी के सदस्यों और कार्यकर्ताओं को काफी नुकसान उठाना पड़ा, लेकिन बहुत गहरी चिंता वाली बात जिस पर तत्काल ध्यान दिये जाने की जरूरत है, वह है पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हिंसा जारी रहने और विपक्षी कार्यकर्ताओं को धमकाया जाना।”

बता दें कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार (27 जुलाई 2024) को नीति आयोग की बैठक में केंद्र के खिलाफ यह आरोप लगाया किया उन्हें बैठक में बोलने की अनुमति नहीं दी गई। बनर्जी ने कहा कि जब वह बोल रही थीं तो उनका माइक बंद कर दिया गया और उन्होंने इसे “बंगाल और अन्य क्षेत्रीय दलों का अपमान” करार दिया।

‘दारू पीने के बाद जाग जाता था मेरे अंदर का शैतान’: जावेद अख्तर ने खूब कबूला – पूरे 25 साल रहा बहुत बड़ा शराबी

बॉलीवुडिया फिल्मों के माध्यम से आम लोगों की जिंदगी में उर्दू घुसेड़ने वाले और खुद को शायर कहने का दंभ भरने वाले जावेद अख्तर कभी दिन-रात शराब में डूबे रहते थे। जावेद अख्तर ने स्वीकार किया है कि वो 20-25 साल तक बहुत बड़े शराबी थे। वो शराब के नशे में शैतान बन जाते थे। उनका खुद पर कोई वश नहीं चलता था। हालाँकि जावेद अख्तर ने दावा किया है कि उन्होंने शराब को 3 दशक पहले ही छोड़ दिया था और वो अगर बीते वक्त में जा पाते, तो अपने जवाब वर्जन को समझाते कि शराब पीना कितना नुकसानदेह है।

We A Man, Yaar नाम के चैट शो में जावेद अख्तर ने कहा कि अपने करियर में सफलता पाने के साथ-साथ उन्होंने जिंदगी में शराब की लत का सामना भी किया है। वो शराब के आदी हो गए थे। शायद वो अपने जज्बातों को दबा रहे थे, लेकिन वो वाकई शैतान बन जाते थे। जावेद अख्तर ने शो के होस्ट से कहा, “शायद मेरे दबे हुए जज्बात थे, गुस्सा था, कड़वाहट थी। इसीलिए पीने के बाद मैं बहुत अपमानजनक हो जाता था, जो कि मैं आमतौर पर नहीं हूँ, न ही था। ये मेरे होश में रहते हुए कभी नहीं होता, लेकिन पीकर (पीने के बाद) कोई दूसरा शैतान निकल आता था।”

जावेद अख्तर ने आगे कहा कि मैंने अपनी जिंदगी में कुछ अच्छी चीजें की है, उनमें शराब छोड़ना भी एक है। उन्होंने कहा कि 31 जुलाई 1991 का वो दिन आखिरी दिन था जब मैंने शराब पी थी। उसके बाद मैंने कभी शैम्पेन की बोतल तक को नहीं छुआ, न ही कभी एक घूँट तक पी। यहाँ तक कि जश्न के दौरान चीयर्स करते हुए भी नहीं।

इस दौरान जब जावेद अख्तर से पूछा गया कि वो अपने जवान वर्जन से क्या कहना चाहेंगे? इसके जवाब में 79 साल के हो चुके जावेद अख्तर ने कहा कि वो अपने यंगर वर्जन से शराब न पीने के लिए कहते। अख्तर ने कहा कि मैंने 20-25 सालों तक जो शराब पी, वो नहीं करना चाहिए।

जावेद अख्तर ने कहा कि मेरा बहुत समय बर्बाद हुआ शराब में, मैंने अपनी जिंदगी का एक दशक बर्बाद कर दिया, जबकि उस समय मैं कुछ बेहतर काम कर सकता था। मैं उस समय में फ्रेंच या पर्शियन जैसी कोई भाषा सीख सकता था। मैंने समय और माहौल दोनों को बर्बाद कर दिया।

‘गोल्डी’ और ‘अशोक’ के मसलों में खतरनाक कीटनाशक, किडनी-लीवर हो जाएँगे डैमेज: 13 मसाला कंपनियों की जाँच, 35 में से 23 उत्पाद फेल

जिन मसालों को हम अपनी रसोई का अहम हिस्सा मानते हैं, वे हमारे स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हैं। गोल्डी, अशोक, भोला सब्जी मसाले समेत 13 कंपनियों के नूमने जाँच में फेल हो गए हैं। उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) का कहना है कि इन कंपनियों के कई उत्पाद खाने के योग्य नहीं हैं। इससे पहले MDH और एवरेस्ट के मसालों पर सिंगापुर और हॉन्गकॉन्ग ने प्रतिबंध लगा दिया था।

दरअसल, इस साल मई में कानपुर स्थित मसालों की 13 कंपनियों पर FSDA के अफसरों ने छापा मारा था। इनके अलग-अलग मसालों के 35 उत्पाद के नमूने जाँच के लिए भेजे थे। इनमें से 23 की रिपोर्ट सामने आई है। इन मसालों में पेस्टीसाइड और कीटनाशक की मात्रा काफी अधिक मिली है। इसमें कीड़े भी मिले हैं। इसके बाद FSDA ने इन प्रोडक्ट्स की बिक्री पर रोक लगा दी है।

FSDA के अफसरों ने कानपुर के दादानगर की शुभम गोल्डी मसाला कंपनी से सैंपल इकट्ठा किए थे। उनमें सांभर मसाला, चाट मसाला और गरम मसाला खाने योग्य नहीं है। इसमें कीटनाशक की मात्रा खतरनाक स्तर तक पाया गया है। दरअसल, शुभम गोल्डी कंपनी गोल्डी ब्रांड नाम से मसाला प्रोडक्ट बनाती है। बता दें कि गोल्डी मसाले के ब्रांड एंबेसडर अभिनेता सलमान खान हैं।

इसी तरह नामी अशोक मसालों की दो कंपनियों के उत्पादों में भी खामियाँ पाई गई हैं। इनके धनिया पाउडर, गरम मसाला और मटर पनीर मसाला खाने योग्य नहीं है। ये स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हैं। वहीं, भोला मसाले के प्रोडक्ट की बिक्री पर भी रोक लगा दी गई है। इसके बिरयानी मसाला, सब्जी मसाला और मीट मसाला सेफ नहीं है।

लोकल लेवल पर बिकने वाली 14 अन्य कंपनियों के प्रोडक्ट में भी हानिकारक पदार्थ पाए गए हैं। इन कंपनियों के हल्दी पाउडर में भी पेस्टिसाइट्स मिला है। एक अन्य नामचीन मसाले में प्रोपरगाइट मिला है। इसका इस्तेमाल कीड़ों, खासकर मकड़ी से फसलों की रक्षा के लिए किया जाता है। 16 सैंपल में खतरनाक कीटनाशक और 7 में माइक्रो बैक्टीरिया मिले हैं। 

अब खाद्य विभाग इन सभी कंपनियों के खिलाफ एडीएम सिटी कोर्ट में वाद दायर करेगा। इसके बाद जुर्माना तय होगा। जानकारों ने बताया कि ब्रांडेड कंपनियों के मसाले गोरखपुर, जौनपुर, झांसी, वाराणसी, फतेहपुर, बहराइच समेत कई शहरों में बेचे जा रहे हैं। सहायक खाद्य आयुक्त संजय प्रताप सिंह ने बताया कि इनकी बिक्री पर रोक लगा दी गई है।

कीटनाशक वाले मसालों के कारण हृदय, लिवर और किडनी पर बुरा प्रभाव पर सकता है। MDH और एवरेस्ट मसालों के नमूने फेल होने के बाद शासन के निर्देश पर सैंपल लिए गए थे। खाद्य एवं औषधि विभाग ने मई में अभियान चलाकर शहर की 16 मसाला फैक्ट्रियों पर रेड की थी। MDH और एवरेस्ट के मसालों पर सिंगापुर और हॉन्गकॉन्ग में प्रतिबंध लगा दिए थे।

घर में घुस रिकॉर्ड किया BJP की महिला प्रवक्ता का वीडियो, राजदीप सरदेसाई ने सोशल मीडिया पर डाल दिया: फ्रैक्चर वाला पाँव दिखा कर बोलीं शाजिया इल्मी – कोर्ट जाऊँगी

भारतीय जनता पार्टी की प्रवक्ता शाजिया इल्मी और इंडिया टुडे के कंसल्टिंग एडिटर राजदीप सरदेसाई के बीच सोशल मीडिया पर विवाद देखा गया। ये विवाद हुआ 26 जुलाई को इंडिया टुडे पर एक कार्यक्रम के बाद। राजदीप सरदेसाई ने एक वीडियो शेयर करते हुए दिखाया कि उनके वीडियो पत्रकार के साथ इल्मी ने बदसलूकी की है जबकि दूसरी ओर इल्मी ने कहा कि बदसलूकी उन्होंने नहीं की बल्कि शो के दौरान राजदीप सरदेसाई ने और शो के बाद उनके वीडियो पत्रकार ने उनसे की है। इल्मी के अनुसार उनके माइक उतारने के बाद भी उन्हें उनके घर में रिकॉर्ड किया गया।

दरअसल, कल के इंडिया टुडे के प्राइम टाइम डिबेट में शाजिया इल्मी पैनेलिस्ट थीं। इसी दौरान राजदीप सरदेसाई ने उनका माइक बंद करने को कह दिया। शाजिया इस बर्ताव को देख कुर्सी से उठने लगीं। पहले उन्होंने माइक उतारा और फिर शर्ट से वायर निकालने लगीं। इस बीच कैमरा चलता रहा। शाजिया ने कुछ नहीं कहा। हद्द पार तब हुई जब इल्मी फ्रेम से निकल गईं फिर भी चलता हुआ कैमरा वीडियो पत्रकार ने दूसरी ओर मोड़ दिया। इसी हरकत को देख बाद शाजिया इल्मी भड़क गईं। उन्होंने पत्रकार को उनके घर से जाने को कहा।

अब इस मामले को ट्विस्ट करके सोशल मीडिया पर कैसे परोसा गया उसे समझिए।

जिस वीडियो में शाजिया को रिकॉर्ड करते शूट किया गया उसी वीडियो को आधार बनाते हुए राजदीप सरदेसाई ने शाजिया इल्मी पर निशाना साधा। उन्होंने इल्मी के उस ट्वीट पर जवाब देते हुए ये वीडियो लगाई जिसमें उन्होंने कहा था कि दोबारा शो में फेडर नीचे करने की कोशिश मत करना। सरदेसाई ने इसी ट्वीट के बदले ऐसे दिखाया जैसे उन लोगों की गलती नहीं थी और शाजिया बदसलूकी पर उतर आईं थीं।

सरदेसाई ने ट्वीट में लिखा- “शाजिया इल्मी मैम, मैं अपने हर गेस्ट का आदर करता हूँ। फेडर (आवाज कम करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला डिवाइस) सिर्फ इसलिए कम किया गया था ताकि बातें न टकराएँ और शो में हल्ला न हो। अगर आपको मुझसे कोई मुझसे या सेना के किसी जनरल से शिकायत थी तो निस्संदेह ये आपका विशेषाधिकार है। मैं उसका भी सम्मान करता हूँ, लेकिन आपके लिए माइक को झटता देना और हमारे वीडियो पत्रकार को गाली देना और उसे अपने घर से बाहर जाने का रास्ता दिखाना ठीक नहीं है। वह सिर्फ अपना काम कर रहे थे।”

इस ट्वीट के बाद शाजिया इल्मी ने भी एक ट्वीट किया। उन्होंने कहा, “जब आप मुझे अपमानित करते हैं और कहते हैं कि शाजिया का माइक काट दो, तो मैं आपके शो में क्यों रहूँगी? सिर्फ़ इसलिए क्योंकि मैंने आपसे पूछा था कि क्या आपको लगता है कि सभी रक्षा प्रमुख झूठ बोल रहे हैं। आपके बारे में नहीं पता, लेकिन मेरा आत्मसम्मान है।” इसके बाद शाजिया इल्मी ने कैमरामैन के बर्ताव का भी विवरण दिया और बताया कि उन्होंने कैमरामैन को क्यों निकाला।

अपने एक अन्य ट्वीट में शाजिया इल्मी ने घटना का पूरा विवरण दिया। उन्होंने वीडियो में उस जगह को दिखाया जहाँ बैठकर वो शो में शामिल हुईं। उन्होंने दिखाया कि उनके पाँव में दो हफ्ते से प्लास्टर है और जब वो इंडिया टुडे के कार्यक्रम से जुड़ीं तो भी प्लास्टर था। उन्होंने बताया कि शो में राजदीप ने बड़ी बदतजीजी से उनका माइक काटने को कहा था। इसी पर उन्होंने कहा कि वो उठ रही हैं। अब डिस्कशन में शामिल नहीं होंगी।

इसके बाद शाजिया कहती हैं कि कैमरामैन लगातार उन्हें दिखाता रहा। उसने दिखाया कि कैसे वो माइक निकाल रही हैं, फिर वहाँ से उठकर जा रही हैं। शाजिया कहती हैं कि उन्हें शर्म आ रही थी क्योंकि पहले उन्हें लगा कि सिर्फ उनकी अपर बॉडी पर फोकस है, लेकिन बाद में पता चला कि पूरा दिखा रहा है। उन्होंने उसे कई बार कहा कि माइक बंद कर दो, लेकिन उसने नहीं किया। उलटा जहाँ वह जा रही थी वो वहाँ जाने लगा।

शाजिया इल्मी कहती हैं कि जब शो खत्म हो गया था तब क्यों उनके प्राइवेट स्पेस को दिखाया गया। क्यों जब शो खत्म हो गया तो बार-बार उनके शरीर को दिखाया गया। जब वो कह रही थी जाओ तो वो क्यों नहीं गया। कैमरा घुमाकर क्यों फॉलो किया। जब कहा रिकॉर्ड मत करो तो उसे फौरन बंद कर देना चाहिए था। शाजिया ने कहा कि वो इस मामले में जरूरत पड़ने पर कानूनी लड़ाई लड़ेंगी जिसके लिए सबूत उन्हें राजदीप सरदेसाई ने ही खुद दे दिए हैं। उन्होंने कहा कि वो मामले को कोर्ट में लेकर जाएँगी।

जैसा राजदीप सरदेसाई ने कहा, वैसा ममता बनर्जी ने किया… बीवी बनी सांसद तो ‘पत्रकारिता’ की आड़ में TMC के लिए बना रहे रणनीति? नीति आयोग की बैठक का भी राजनीतिकरण

क्या ममता बनर्जी की पार्टी TMC की रणनीति अब राजदीप सरदेसाई तैयार कर रहे हैं? ये सवाल इसीलिए उठ रहा है क्योंकि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने कुछ ऐसा किया है, जिसकी भविष्यवाणी राजदीप सरदेसाई ने पहले ही कर दी थी। मामला शनिवार (27 जुलाई, 2024) को हुई नीति आयोग की बैठक से जुड़ा है, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की। विपक्ष के कई मुख्यमंत्रियों ने इस बैठक का बहिष्कार किया, जबकि आम जनता को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए नीति आयोग के साथ समन्वय आवश्यक है।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री MK स्टालिन, केरल के पिनाराई विजयन, कर्नाटक के सिद्दारमैया, हिमाचल प्रदेश के सुखविंदर सिंह सुक्खू और पंजाब के CM भगवंत मान ने इस बैठक का बहिष्कार किया। हालाँकि, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी नई दिल्ली में हुई इस बैठक में पहुँचीं तो ज़रूर, लेकिन वो बीच मीटिंग में ही इसका बॉयकॉट करते हुए निकल गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी बात नहीं सुनी गई, उनका माइक ऑफ कर दिया गया था।

बता दें कि राजदीप सरदेसाई ने हाल ही में ‘द लल्लनटॉप’ के कार्यक्रम ‘नेता नगरी’ में कहा था, “ये संघीय देश है। विपक्ष के मुख्यमंत्री इसमें नहीं जा रहे हैं, मुझे लगता है सिर्फ ममता बनर्जी और हेमंत सोरेन इसमें जाएँगे। ऐसा चर्चा है कि वो अपनी बात रख कर वॉकआउट भी कर सकते हैं। ये खतरनाक है। ये लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। हम चाहते हैं कि सारे मुख्यमंत्री एक साथ बैठें।” उन्होंने नीति आयोग की इस बैठक के ठीक 1 दिन पहले ये बात कही थी।

तृणमूल कॉन्ग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने ठीक वैसा ही किया है, जैसा राजदीप सरदेसाई ने कहा था। यहाँ एक और बात ध्यान में रखने लायक है कि ‘इंडिया टुडे’ के कंसल्टिंग एडिटर राजदीप सरदेसाई की पत्नी सागरिका घोष TMC से ही राज्यसभा सांसद हैं। सागरिका घोष भी इससे पहले ‘पत्रकार’ ही हुआ करती थीं। अब वो TMC की तरफ से विपक्षी प्रपंच का हिस्सा बनती हैं। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया है कि आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू को 20 मिनट बोलने का मौका दिया गया, जबकि उन्हें मात्र 5 मिनट।

‘मजहबी आतंकवाद को तुरंत कुचला जाए’: एक और जवान के बलिदान के बाद भड़के ‘द कश्मीर फाइल्स’ के निर्देशक, कहा – हिन्दुओं में डर फ़ैलाने की साजिश

केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में आतंकवादी हमला हुआ है। ये आतंकवादी हमला कुपवाड़ा के मच्छल सेक्टर में हुआ, जिसमें पाकिस्तानी सेना के BAT जवान शामिल बताए जा रहे हैं। इस हमले में एक मेजर समेत 4 जवान घायल हो गए थे, जिसमें एक जवान को वीरगति प्राप्त हुई।

जानकारी के मुताबिक, उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा में मच्छल सेक्टर के कामकारी में फॉर्वर्ड पोस्ट पर पाकिस्तानी आतंकियों ने हमला किया। इस गोलीबारी में एक पाकिस्तानी आतंकवादी ढेर हुआ है। सूत्रों का कहना है ये हमला पाकिस्तानी सेना के बैट जवानों ने किया है, जिसमें 2 आतंकवादी सीमा पार भागने में भी सफल रहे। वहीं, भारतीय सेना आसपास के इलाकों में सर्च ऑपरेशन चला रही है। वहीं, घायलों को सुरक्षित जगहों पर भेजा गया है, जहाँ उनका इलाज जारी है।

रक्षा सूत्रों के अनुसार, हमले में शामिल BAT टीम में पाकिस्तान सेना के नियमित सैनिक और SSG कमांडो के होने का संदेह है, जो आतंकवादी संगठनों के साथ मिलकर काम करते हैं। भारतीय सेना के चिनार कॉर्प्स ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि नियंत्रण रेखा पर मच्छल सेक्टर के कमकारी में एक अग्रिम चौकी पर अज्ञात कर्मियों के साथ गोलीबारी हुई है। इसमे एक पाकिस्तानी आतंकी मारा गया है जबकि हमारे 5 जवान घायल हुए हैं।

जम्मू में हिंदुओं के बीच डर का माहौल, जड़ से खत्म किया जाए मजहबी आतंकवाद

फिल्म निर्माता विवेक रंजन अग्निहोत्री मच्छल सेक्टर में आतंकी हमले के बाद अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आतंकवादी घटनाओं को मजहबी आतंकवाद कहा और कहा कि जम्मू में हिंदुओं को डराने के लिए नया पैटर्न तैयार किया गया है, जिससे पुरजोर तरीके से निपटने की जरूरत है। उन्होंने जम्मू क्षेत्र से आतंकवाद को बुरी तरह से कुचल डालने का आह्वान किया।

विवेक रंजन अग्निहोत्री ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “कश्मीर में धार्मिक आतंकवाद लगभग हर रोज हो रहा है। जम्मू क्षेत्र में हिंदुओं के बीच डर का माहौल है, जो कि इरादा है और यह बहुत खतरनाक है। इसे तुरंत जड़ से खत्म किया जाना चाहिए। वैसे, मच्छल का नाम माँ दुर्गा यानी मच्छल माता के नाम पर रखा गया है।”

डोडा हमले में शामिल 3 आतंकवादियों के स्केच जारी, 5 लाख का ईनाम घोषित

इस बीच, जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में पुलिस ने 3 आतंकवादियों के स्केच जारी किए हैं। इन आतंकियों के डोडा के ऊपरी इलाकों में छिपे होने का अंदेशा है। ये आतंकी 16 जुलाई 2024 को देसा डोडा के उरार बागी इलाके में हुई आतंकी घटना में शामिल थे।

इन आतंकियों के बारे में जानकारी देने वालों को 5 लाख का ईनाम भी दिया जाएगा (फोटो साभार : J&K Police)

इस हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के एक शैडो ग्रुप ‘कश्मीर टाइगर्स’ ने ली थी। पुलिस ने प्रत्येक आतंकवादी की सूचना देने पर 5 लाख रुपए का नकद इनाम देने का भी ऐलान किया है।

5 साल में कनाडा में 172 भारतीय छात्रों ने गँवाई जान: संसद में केंद्र सरकार ने बताया – विदेश में 633 छात्रों की मौत

भारतीय विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार (26 जुलाई 2024) को लोकसभा में एक प्रश्न के जवाब में बताया कि पिछले पाँच वर्षों में 41 देशों में कम-से-कम 633 भारतीय छात्रों की मौत हुई है। केरल के सांसद कोडिकुन्निल सुरेश द्वारा पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में विदेश राज्यमंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने बताया कि भारतीय छात्रों की सबसे अधिक मौैत कनाडा में हुई है। यहाँ 172 छात्रों की मौत हुई है।

विदेश राज्यमंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने लिखित उत्तर में कहा कि विदेश में भारतीय छात्रों की मृत्यु ‘प्राकृतिक कारणों, दुर्घटनाओं, चिकित्सा आपात स्थितियों’ सहित कई कारणों से हुई है। कनाडा के बाद सबसे अधिक भारतीय छात्रों की मौत अमेरिका (108), फिर यूके (58), ऑस्ट्रेलिया (57), रूस (37) और जर्मनी (24) में हुई है। पड़ोसी देश पाकिस्तान में भी एक छात्र की मौत की खबर है।

विदेशों में भारतीय छात्रों पर हमलों के सवाल पर मंत्री ने कहा कि विदेशों में भारतीय मिशनों/केंद्रों के पास उपलब्ध आँकड़े बताते हैं कि हाल के दिनों में भारतीय छात्रों पर हिंसक हमलों में वृद्धि नहीं हुई है। विदेशों में हिंसा/हमले के कारण मरने वाले छात्रों के कुल संख्या 19 है। इनमें सबसे अधिक कनाडा में 9, अमेरिका में 6 तथा आस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, चीन और किर्गिस्तान में एक-एक मौत शामिल है।

उन्होंने कहा कि विदेश में भारतीय मिशन/पोस्ट द्वारा अप्रिय घटनाओं के मामलों को तुरंत मेजबान देश के संबंधित अधिकारियों के साथ उठाया जाता है, ताकि अपराधियों को दंडित किया जाए। आपात स्थिति या संकट की स्थिति में विदेश में भारतीय मिशन/पोस्ट संकटग्रस्त/फँसे भारतीय छात्रों को भोजन, आश्रय, दवाइयाँ प्रदान करने में मदद करते हैं।

मंत्रालय ने यह भी कहा कि संकटग्रस्त या विदेशों में फँसे भारतीयों की जल्द-से-जल्द वापसी/निकासी सुनिश्चित किया जाता है। हाल ही में दुनिया भर के देशों में फँसे भारतीय छात्रों को वंदेभारत मिशन, ऑपरेशन गंगा (यूक्रेन) और ऑपरेशन अजय (इज़राइल) के माध्यम से भारत लाया गया। बांग्लादेश से कई भारतीय छात्रों की वापसी भी भारतीय उच्चायोग ने सुगम बनाया है।

मंत्रालय ने यह भी बताया कि इस साल तक विदेशों में अध्ययनरत करने वाले भारतीय छात्रों की कुल संख्या 13.30 लाख है। पिछले तीन वर्षों में विदेश में अध्ययन करने जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में वृद्धि देखी गई है। साल 2022 में यह संख्या 7.5 लाख थी, जो वर्ष 2023 में बढ़कर 9.3 लाख और अब 13.33 लाख हो गई है।

देश-वार आँकड़ों के अनुसार, विदेश में अध्ययन करने वाले छात्रों में सबसे अधिक छात्र कनाडा में पढ़ाई करते हैं। इनकी संख्या 4.27 लाख है। इसके बाद अमेरिका में 3.37 लाख, ब्रिटेन में 1.85 लाख, ऑस्ट्रेलिया में 1.22 लाख, जर्मनी में 42997, यूएई में 25000 और रूस में 24940 छात्र अध्ययन कर रहे हैं। कम-से-कम 8580 भारतीय छात्र चीन (हांगकांग सहित) में पढ़ाई कर रहे हैं।

वहीं, 7300 छात्र न्यूजीलैंड में, 2134 नेपाल में, 2000 सिंगापुर में, 1532 जापान में और 1020 ईरान में पढ़ रहे हैं। विदेश मंत्रालय का कहना है कि कम-से-कम 14 भारतीय छात्र पड़ोसी देश पाकिस्तान में भी पढ़ रहे हैं। विदेश मंत्रालय के जवाब से पता चलता है कि युद्धग्रस्त यूक्रेन में 2510 भारतीय छात्र अभी भी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।