Sunday, April 5, 2026
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एक तरफ अमरनाथ यात्रा को दहलाने की साजिश विफल, दूसरी तरफ काँवड़ यात्रा की सुरक्षा के लिए ATS को सँभालनी पड़ी जिम्मेदारी: ‘ढाई मोर्चे’ पर लड़ता भारत

एक तरफ अमरनाथ यात्रा के लिए भारत सरकार को सुरक्षा की अभूतपूर्व तैयारियाँ करनी पड़ रही हैं, तो अब देश के भीतर ही काँवड़ियों की सुरक्षा के लिए भी सरकार को एटीएस जैसी एजेंसियों की तैनाती करनी पड़ रही है।

अब से करीब 7 साल पहले जून 2017 में तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने कहा था कि भारत अपने दुश्मनों से ढाई मोर्चे पर युद्ध लड़ने के लिए तैयार है और देश की रक्षा के लिए भी। उन्होंने कहा था कि आने वाले समय में हमें पाकिस्तान-चीन के साथ ही देश के अंदर के दुश्मनों से लड़ने के लिए तैयार रहना होगा। उनकी भविष्यवाणी सच साबित होती दिख रही है। एक तरफ अमरनाथ यात्रा के लिए भारत सरकार को सुरक्षा की अभूतपूर्व तैयारियाँ करनी पड़ रही हैं, तो अब देश के भीतर ही काँवड़ियों की सुरक्षा के लिए भी सरकार को एटीएस जैसी एजेंसियों की तैनाती करनी पड़ रही है। एटीएस का मतलब तो जानते ही होंगे? एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड।

यूपी एटीएस के हवाले काँवड़ियों की सुरक्षा

अब देश के उन हिस्सों में भी आतंकवाद निरोधक दस्तों की तैनाती करनी पड़ रही है, जहाँ कभी किसी ने नहीं सोचा था कि आतंकवाद खतरा इस कदर बढ़ जाएगा कि काँवड़ यात्रा को आतंकवादियों से सुरक्षा के लिए एटीएस की तैनाती करनी पड़ेगी, लेकिन सिक्योरिटी इनपुट के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मुजफ्फरनगर रूट पर एटीएस की तैनाती की है। एटीएस के कमांडोज को काँवड़ियों की सुरक्षा के लिए तैनात किया गया है। एसएसपी अभिषेक सिंह ने एटीएस के कमांडोज को ब्रीफिंग दी है और अलर्ट मोड पर रहने को कहा है। इसकी के साथ मुजफ्फरनगर में एटीएस (एंटी टेरेरिस्ट स्क्वाड) की टीम भी तैनात कर दी गई है।

शनिवार (27 जुलाई 2024) की सुबह लखनऊ से पहुंची एटीएस की टीम ने मुजफ्फरनगर में शिवचौक पर डेरा डाला। यहाँ एसएसपी अभिषेक सिंह ने टीम में शामिल जवानों को कांवड़ यात्रा रूट के संबंध में जानकारी दी और पूरी मुस्तैदी से निगरानी का निर्देश दिया। मुजफ्फरनगर में इनकी सबसे ज्यदा भीड़ रहती है, क्योंकि यहां शिव चौक मंदिर की परिक्रमा करते हुए शिव भक्त हरियाणा राज्य के विभिन्न जनपदों के साथ ही राजस्थान और दिल्ली के अलावा गाजियाबाद, बुलंदशहर, अलीगढ़, गौतमबुद्धनगर, मेरठ, हापुड़ लिए भी निकलते हैं। जनपद में कांवड़ यात्रा का पूरा रूट लगभग 240 किलोमीटर का है। यात्रा की सुरक्षा के लिए पुलिस प्रशासन ने दो हजार से ज्यादा स्थानों पर सीसीटीवी लगाए हैं। प्रत्येक दो किलोमीटर की दूरी पर पुलिस की तैनाती की गई है।

अमरनाथ यात्रा पर खालिस्तानी आतंकी हमले का खतरा

अमरनाथ यात्रा पर अब तक पाकिस्तानी और उनके कश्मीरी प्यादे आतंकवादियों के हमलों का डर रहता था, लेकिन इस बार अमरनाथ यात्रा पर खालिस्तानी आतंकियों के हमले का भी खतरा बढ़ गया है। खुफिया एजेंसियों ने खालिस्तानी आतंकियों के कुछ मैसेज इंटरसेप्ट किए हैं, जिसके बाद अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा को बढ़ा दिया गया है। खुफिया जानकारी के अनुसार, आईएसआई तीर्थयात्रा के दौरान हमला करने के लिए पंजाब के गैंगस्टर नेटवर्क, कट्टरपंथी समूहों और आतंकवादी संगठनों का इस्तेमाल करने की योजना बना रही है।

रिपोर्ट्स से पता चलता है कि अराजकता और भय पैदा करने के अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए स्थानीय आपराधिक तत्वों का फायदा उठाने की एक ठोस कोशिश की जा रही है। इसके अलावा, खुफिया रिपोर्ट से पता चलता है कि आईएसआई बब्बर खालसा इंटरनेशनल का इस्तेमाल पंजाब और दिल्ली में भाजपा नेताओं और प्रमुख हिंदू हस्तियों को निशाना बनाने के लिए कर रही है। आईएसआई और बब्बर खालसा के बीच यह गठजोड़ न केवल तीर्थयात्रियों के लिए बल्कि क्षेत्र के प्रमुख राजनीतिक और धार्मिक नेताओं के लिए भी बहुआयामी खतरा पैदा करता है। बता दें कि इस साल अमरनाथ यात्रा पर काफी लोग जा रहे हैं, जिनका पहले से रजिस्ट्रेशन किया जाता है। इस साल खालिस्तानी आतंकियों का खतरा सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े हो गए हैं।

जनरल बिपिन रावत ने साल 2017 में ही किया था आगाह

बता दें कि जून 2017 में उस समय के भारतीय सेना के प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने कहा था कि भारत को आने वाले दिनों में ढाई मोर्चे पर युद्ध के लिए तैयार रहना होगा। साथ ही उन्होंने ये भी कहा था कि भारतीय सेना बाहर के किसी भी हमले या अंतर के किसी भी हमले यानी दोनों मोर्चों पर एक साथ युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने एएनआई को दिए एक इंटरव्यू में साफ तौर पर कहा था, “भारतीय सेना ढाई मोर्चों पर युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार है।” उन्होंने चीन, पाकिस्तान के साथ ही देश के अंदर मौजूद खतरों के बारे में आगाह किया था। उनके इस बयान के महज 7 साल के भीतर ही देश के अंदर धार्मिक यात्राओं के लिए भी एटीएस जैसी एजेंसियों की तैनाती इस बात पर मुहर लगाती है कि वो कितने दूरदर्शी थे।

गौरतलब है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश से जुड़े कई टेरर मॉड्यूल भंग किए जा चुके हैं। पश्चिमी यूपी के कई जिलों से कट्टरपंथी आतंकवादियों को पकड़ा जा चुका है, तो अलीगढ़ जैसे शहरों से आईएसआईएस का मॉड्यूल भी पकड़ा जा चुका है। वहीं, पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए काम करने वाले, जासूसी करने वाले और आईएसआई के इशारे पर आतंकी हमलों को अंजाम देने के लिए तैयार आतंकवादियों को भी पकड़ा जा चुका है। अब काँवड़ यात्रा पर आतंकी हमले का अलर्ट जारी होने के बाद यूपी एटीएस ने मोर्चा संभाल लिया है, तो अमरनाथ यात्रा को खालिस्तानी आतंकियों से बचाने की भी फुलप्रूफ तैयारी हो चुकी है। ये घटनाक्रम ये भी बताते हैं कि भारत देश और भारत देश की सुरक्षा एजेंसियाँ हर खतरे से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।

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श्रवण शुक्ल
श्रवण शुक्ल
I am Shravan Kumar Shukla, known as ePatrakaar, a multimedia journalist deeply passionate about digital media. I’ve been actively engaged in journalism, working across diverse platforms including agencies, news channels, and print publications. My understanding of social media strengthens my ability to thrive in the digital space. Above all, ground reporting is closest to my heart and remains my preferred way of working. explore ground reporting digital journalism trends more personal tone.

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