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जिस पार्टी की ब्रिटेन में चली आँधी पहले उसका गढ़ भेदा, फिर हाथ में श्रीमद्भगवद्गीता लेकर ली शपथ: जिस जगह हुई थी हिंदू विरोधी हिंसा, वहीं से जीती हैं शिवानी राजा

ब्रिटेन के आम चुनावों में लीसेस्टेर ईस्ट से जीतीं भारतीय मूल की शिवानी राजा ने संसद में शपथ ली तो सब देखते रह गए। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि शिवानी राजा ने शपथ लेने के दौरान भगवद् गीता को पकड़ा हुआ था। उनके हाथ भगवद गीता देख संसद में बैठे सारे लोग हैरान थे। शिवानी ने इसी माहौल में अपनी सांसद पद की शपथ ली। उन्होंने कहा- “मुझे गीता पर हाथ रखकर महामहिम राजा चार्ल्स के प्रति अपनी निष्ठा की शपथ लेने पर गर्व है।”

बता दें कि खुद को गर्व से हिंदू कहने वाली शिवानी राजा ने ब्रिटेन के लीसेस्टर ईस्ट से जीत हासिल की है। उन्होंने कंजर्वेटिव पार्टी की ओर से जीत हासिल की और लेबर पार्टी के उम्मीदवार राजेश अग्रवाल को हराया। शिवानी राजा को इस चुनाव में 14,526 वोट मिले और लेबर पार्टी के राजेश अग्रवाल को मात्र 10,100 वोट मिले। इसके अलावा लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के ज़ुफ्फर हक़ केवल 6329 वोट हासिल किए।

उल्लेखनीय है कि शिवानी राजा के साथ ही कंजर्वेटिव पार्टी के लिए भी यह बड़ी जीत है। कंजर्वेटिव पार्टी को यह जीत 37 साल बाद हासिल हुई है। इस सीट पर लगातार लेबर पार्टी कब्जा कर रही थी। शिवानी राजा लीसेस्टर में जन्मी पहली पीढ़ी की ब्रिटिश नागरिक हैं और एक कट्टर हिंदू हैं।

शिवानी राजा की वेबसाइट के अनुसार, शिवानी राजा के माता-पिता 70 के दशक के अंत में केन्या और भारत से लीसेस्टर चले गए थे। शिवानी ने डी मोंटफोर्ट यूनिवर्सिटी से अपनी शिक्षा पूरी की है। उन्होंने फार्मास्युटिकल और कॉस्मेटिक साइंस में ग्रेजुएशन किया है और बाद में इंग्लैंड में कुछ बड़े कॉस्मेटिक्स ब्रांड के साथ काम किया है। पिछले महीने की शुरुआत में वह लीसेस्टर पूर्व में हिन्दू कथावाचक गिरिबापू के ‘शिव कथा’ कार्यक्रम में शामिल हुईं थी।

29 साल की शिवानी ने लीसेस्टर में जीत ऐसे माहौल में हासिल की है जहाँ 2022 में भारत बनाम पाकिस्तान टी20 एशिया कप मैच के बाद इस्लामी कट्टरपंथियों ने जमकर हिंसा की थी और हिंदुओं को निशाना बनाया था। ऐसे में शिवानी का इस जगह से जीता जाना एक न केवल कन्जर्वेटिव पार्टी की जीत मानी जा रही बल्कि सभी हिंदू इसे जीत से जोड़ रहे हैं। शिवानी के अलावा यूके के आम चुनाव में 27 अन्य भारतीय मूल के सांसद हाउस ऑफ कॉमन्स के लिए चुने गए हैं।

बता दें कि 4 जुलाई को हुए चुनावों में लेबर पार्टी की जीत के बाद किएर स्टॉर्मर ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री बने हैं। उनकी पार्टी ने 460 सदस्यीय हाउस ऑफ कॉमन्स में से 412 सीटें हासिल की हैं। ये आँकड़ा लेबर पार्टी को मिले 2019 के पिछले चुनाव से 211 अधिक है। वहीं ऋषि सुनकर की कंजर्वेटिव पार्टी की बात करें तो इस बार उन्हें पिछले चुनाव से 250 सीटें कम आईं यानी सिर्फ 121 सीट। लेबर पार्टी का वोट शेयर 33.7 प्रतिशत था। वहीं सुनक की पार्टी का वोट शेयर 23.7 फीसदी।

रशीदा से सेक्स नहीं कर पाया केरल का पुलिसवाला तो नंबी नारायणन को फँसाया: CBI ने किया खुलासा, कहा- ISRO वैज्ञानिक का जासूसी से नहीं था कोई लेना-देना

साल 1994 के जिस इसरो जासूसी केस में देश के शीर्ष वैज्ञानिकों में से एक नंबी नारायणन और 3 अन्य वैज्ञानिकों को फँसाकर उनका करियर खत्म कर दिया गया और देश को क्रायोजेनिक रॉकेट इंजन के विकास में पीछे हो जाना पड़ा, वो पूरा मामला ही फर्जी था। वो मामला था एक एक पुलिस वाले की हवस न मिटाने वाली विदेशी महिला के साथ खुन्नस निकालने का। उसने तो पहले महिला के सारे कागजात जब्त कर लिए और फर्जी केस में उसे गिरफ्तार कर लिया, फिर इस मामले में इसरो के वैज्ञानिकों को घसीट लिया गया। जी हाँ, सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में इन बातों का जिक्र किया है।

सीबीआई की चार्जशीट के मुताबिक, मालदीव की महिला मरियम रशीदा तिरुअनंतपुरम के एक होटल में रुकी थी। तब बतौर CI काम कर रहा एस विजयन उसी होटल में पहुँचा था। वो मरियम रशीदा के कमरे में घुस गया था और उसके साथ यौन संबंध बनाने की कोशिश की थी, मरियम ने इसका विरोध किया तो विजयन ने मरियम को सबक सिखाने के लिए उसे गिरफ्तार कर लिया। बाद में विजयन ने रशीदा का संपर्क इसरो वैज्ञानिक डी शशिकुमारन से जोड़ा और फिर इस पूरे केस का ताना बाबा बुना गया।

चार्जशीट में सीबीआई ने कहा, “यह शुरू से ही कानून के दुरुपयोग का एक स्पष्ट मामला है। पीड़िता मरियम रशीदा को अवैध रूप से हिरासत में लिया गया था। उसे झूठे मामले में फँसाया गया था। पीड़ितों के खिलाफ झूठी पूछताछ रिपोर्ट दी गई। उनपर गंभीर आरोप लगाए गए।” सीबीआई ने जासूसी मामले में अंतरिक्ष वैज्ञानिक नंबी नारायणन को फँसाने के सिलसिले में दो पूर्व डीजीपी, केरल के सिबी मैथ्यूज और गुजरात के आर.बी. श्रीकुमार व तीन अन्य रिटायर पुलिस अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट दायर किया था।

सीबीआई ने बताया है कि केरल के पूर्व C.I.S एस विजयन ने जासूसी का मामला गढ़ा था। उन्होंने बिना किसी ठोस सबूत के मालदीव की मूल निवासी मरियम रशीदा के खिलाफ वंचियूर पुलिस स्टेशन में केस दर्ज किया था। पूर्व डीजीपी सिबी मैथ्यूज ने बिना किसी ठोस सबूत के गौरकानूनी तरीके से वैज्ञानिक नंबी नारायणन को गिरफ्तार किया था। एस विजयन, सिबी मैथ्यूज, केके जोशुआ, आरबी श्रीकुमार और पीएस जयप्रकाश ने झूठे दस्तावेज बनाने की साजिश में सक्रिय भूमिका निभाई। इन पुलिस अधिकारियों ने वैज्ञानिकों और अन्य लोगों को अवैध रूप से गिरफ्तार किया और यातनाएँ दी।

सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में कहा कि जब रशीदा की हिरासत अवधि समाप्त होने वाली थी, तब विजयन की तरफ से पेश की गई एक झूठी रिपोर्ट के आधार पर उन्हें और हसन को आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत एक मामले में फँसा दिया गया और उनकी हिरासत जासूसी मामले की जाँच के लिए गठित एसआईटी को सौंप दी गई। एजेंसी ने अपनी अंतिम रिपोर्ट में कहा है, शुरुआती गलतियों को बरकरार रखने के लिए, पीड़ितों (नारायणन और अन्य समेत) के खिलाफ झूठी पूछताछ रिपोर्ट के साथ गंभीर प्रकृति का एक और मामला शुरू किया गया।

सीबीआई ने पूर्व डीजीपी आर. बी. श्रीकुमार और सिबी मैथ्यूज, पूर्व एसपी एस विजयन और के.के. जोशुआ और पूर्व खुफिया अधिकारी पी. एस. जयप्रकाश के खिलाफ मुकदमा चलाने की सिफारिश की है। एजेंसी ने उन पर आईपीसी की कई धाराओं के तहत आरोप लगाए हैं, जिनमें धारा 120 बी (आपराधिक साजिश), 342 (गलत तरीके से बंधक बनाना), 323 (स्वेच्छा से चोट पहुँचाना), 330 (स्वीकारोक्ति करवाने के लिए स्वेच्छा से चोट पहुँचाना), 167 (लोक सेवक द्वारा गलत दस्तावेज तैयार करना), 193 (झूठी गवाही देना), 354 (महिला की गरिमा को ठेस पहुँचाना) शामिल हैं। हालाँकि, सीबीआई ने मामले में केरल पुलिस और आईबी के तत्कालीन अधिकारियों समेत अन्य 13 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की सिफारिश नहीं की, क्योंकि उनके खिलाफ कोई सबूत उपलब्ध नहीं था।

इस खुलासे पर प्रतिक्रिया देते हुए नंबी नारायणन ने बुधवार (10 जुलाई 2024) को कहा, “एक व्यक्ति के तौर पर उन्हें इस बात की चिंता नहीं है कि चार्जशीट किए गए पूर्व पुलिस और आईबी अधिकारियों को दंडित किया गया या नहीं, क्योंकि मामले में उनकी भूमिका समाप्त हो चुकी है। नारायणन ने पत्रकारों से कहा, उन्हें पहले ही दंडित किया जा चुका है। वे पहले से ही पीड़ित हैं। मेरी कोई इच्छा नहीं है कि उन्हें जेल जाना चाहिए। मुझे उनसे माफी की भी उम्मीद नहीं है। मुझे खुशी होती अगर वे सिर्फ इतना कहते कि उन्होंने गलती की है।”

बता दें कि नंबी नारायणन को फंसाने की साजिश से जुड़ा मामला 2021 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर दर्ज किया गया था। 15 अप्रैल, 2021 को सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया था कि इसरो वैज्ञानिक नंबी नारायणन से जुड़े 1994 के जासूसी मामले में दोषी पुलिस अधिकारियों की भूमिका पर एक उच्च स्तरीय समिति की रिपोर्ट सीबीआई को दी जाए।

इस मामले में नंबी नारायणन को 1996 में जाकर राहत मिली थी, लेकिन तब तक काफी नुकसान हो चुका था। इसके बाद नंबी नारायणन ने काफी लंबी लड़ाई लड़ी। उन्हें भारत सरकार ने मुआवजा भी दिया, तो सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केरल सरकार को भी उन्हें मुआवजा देना पड़ा। मोदी सरकार ने नंबी नारायणन को 2019 में पद्म भूषण से सम्मानित किया था। वहीं, एक्टर-डायरेक्टर आर माधवन ने नम्बी नारायणन की जिंदगी पर नम्बी-द रॉकेट इफेक्ट नाम की फिल्म भी बनाई थी, जिसके राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला था।

6 बार मेडिकल टेस्ट से इनकार, मानसिक तौर पर अक्षम… ट्रेनिंग में VIP ट्रीटमेंट की डिमांड करने वाली IAS पूजा खेडकर के चयन पर उठ रहे सवाल

आईएएस बनने के बाद अधिक सम्मान पाने की लालसा में महिला ट्रेनी पूजा खेडकर की हर जगह आलोचना हो रही है। सरकार ने उनका ट्रांसफर पुणे से वाशिम कर दिया है लेकिन अब उनके उन सर्टिफिकेट्स पर सवाल खड़े हो रहे हैं जिसके आधार पर वो आईएएस बनीं। इसके साथ ही ये भी कहा जा रहा है कि कहीं बड़ा पद पाने के लिए पूजा खेडकर ने अपने पिता को लेकर कोई इंटरव्यू में झूठ तो नहीं बोले।

ये सवाल दरअसल एक वीडियो सामने आने से शुरू हुए हैं। वीडियो पूजा खेडकर एक मॉक इंटरव्यू का है जो उनकी कोचिंग वालों ने कराया था। इसमें वो कहती दिखाई दी थी कि उनके माता-पिता अलग हो चुके हैं और उनकी अपने पिता से कोई खास बात नहीं है। जबकि इस पूरे मामले में जहाँ पूजा खेडकर द्वारा अधिकारियों से अनुचित माँग की गई, उसमें सामने आया है कि पूजा के लिए उनके पिता भी अधिकारियों को धमकाते थे।

इसके अलावा ये भी पता चला है कि पूजा खेडकर के पिता ने हाल में लोकसभा चुनाव लड़ा था और उस समय उन्होंने अपने दायर हलफनामे में ऐसी किसी बात का जिक्र नहीं किया था कि वो अपनी पत्नी से अलग हो गए हैं। इसी आधार पर पूजा खेडकर की बात पर सवाल खड़े हो रहे हैं जो उन्होंने अपने मॉक इंटरव्यू में कही। उनके विकलांगता सर्टिफिकेट पर सवाल उठने के साथ ये भी कहा जा रहा है कि वो ओबीसीसी श्रेणी में भी क्रीमी लेयर में आती हैं इसलिए एक बार पूजा खेडकर की ज्वाइनिंग पर जाँच होनी जरूरी है।

उल्लेखनीय है कि पूजा खेडकर ने साल 2023 में आईएएस परीक्षा को पास किया था उसमें उनकी 841 रैंक आई थी। अपने आपको उन्होंने इस सिलेक्शन प्रोसेस में मानसिक रूप से बीमार होने का दावा भी किया था। हालाँकि बाद में जब मेडिकल चेक अप की बारी आई तो वो अपनी ही बीमारी का सत्यापन करवाने के लिए 6 बार नहीं गईं। ऐसे में ये अब भी एक सवाल बना हुआ है कि अगर पूजा ने चेक अप कराने से मना किया तो फिर कैसे उनका सिलेक्शन हुआ। ये भी कहा जा रहा है कि 2021 में पूजा को ओबीसी पीडब्ल्यूबीडी 1 में खेल प्राधिकरण में सहायक निदेशक के रूप में चुना गया था, लेकिन 2023 में, उन्होंने रहस्यमय तरीके से अपनी श्रेणी 4 एम पीडब्ल्यूबीडी 1 को पीडब्ल्यूबीडी 5 में बदल दिया और आईएएस के रूप में चयनित हो गईं।

बता दें कि पूजा खेडकर का पूरा मामला उस समय खुला है जब पुणे कलेक्टर ने उनकी गलत माँगों के चलते उनकी शिकायत मुख्य सचिव को भेजी। अपने शिकायत पत्र में उन्होंने बताया था कि कैसे पूजा खेडकर वीआईपी ट्रीटमेंट पाने के लिए अधिकारियों को धमका रही हैं और परेशान कर रही हैं। उन्होंने अधिकारी अजय मोरे के चैंबर तक में कब्जा कर लिया था। वहीं अपनी निजी कार में वीआईपी नंबर लगाकर उसे चला रही थीं।

खच्चर पर लाद कर सोने की तस्करी, ITBP ने लद्दाख में चीन सीमा से दबोचे 2 तस्कर: 108 kg गोल्ड के साथ चाकू, टॉर्च और हथौड़ा भी बरामद

‘भारत तिब्बत सीमा पुलिस’ (ITBP) ने चीन सीमा से सोने की तस्करी कर रहे 2 तस्करों को गिफ्तार किया है। इनके पास से 108 किलो सोना बरामद किया गया है। दोनों आरोपित इस सोने को खच्चर पर लाद कर भारत की सीमा में घुस रहे थे। पकड़े गए आरोपितों के नाम 40 वर्षीय तेंजिन तारगी और 69 वर्षीय त्सेरिंग चांबा हैं। इन दोनों से पुलिस के अलावा कस्टम विभाग के अधिकारी भी पूछताछ कर रहे हैं। घटना मंगलवार (9 जुलाई, 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना पूर्वी लद्दाख की है। यहाँ भारत चीन सीमा से लगभग 1 किलोमीटर दूर नार्बुला टॉप के पास सिरिगापले में ITBP की टीम गश्त कर रही थी। तस्करी और घुसपैठ रोकने के लिए सक्रिय यह गश्ती दल चिश्मूले, नार्बुला टॉप, जक्ले और जक्ला क्षेत्र की तरफ जा रहा था। मंगलवार की दोपहर लगभग डेढ़ बजे में ITBP की टीम को खच्चरों के साथ 2 संदिग्ध लोग दिखाई दिए। दोनों का पीछा कर के उनको रुकने की चेतावनी दी गई। आखिरकार दोनों रुक गए और उनकी तलाशी ली गई।

इनकी तलाशी के दौरान खच्चरों की पीठ पर सोना पाया गया। सोने का वजह 108 किलो निकला। इस सोने को खच्चरों की पीठ पर छिपा कर रखा गया था। सोने के अलावा इनके पास से दूरबीन, टॉर्च, खाने-पीने का सामान, कुछ अन्य चीनी वस्तुएँ, दूध, 2 चाकू और एक हथौड़ा भी बरामद हुआ। डिप्टी कमांडेंट दीपक भट्ट के नेतृत्व में ITBP की टीम ने दोनों ने पूछताछ की तो वो सोने को ले कर कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। आखिरकार इन दोनों को कैम्प लाया गया। इसी के साथ पुलिस और कस्टम विभाग को भी सूचित कर दिया गया था।

सभी सुरक्षा एजेंसियों की सामूहिक पूछताछ में सामने आया कि दोनों आरोपित सोने को खच्चरों पर लाद कर चीन की सीमा से भारत में घुसे थे। ये दोनों तस्कर हैं जिनके नाम तेंजिन तारगी और त्सेरिंग चांबा हैं। बरामद सोने को जब्त कर लिया गया है जिसकी कीमत करोड़ों रुपयों में बताई जा रही है। जाँच एजेंसियाँ यह भी पता लगाने की कोशिश में जुटी हैं कि दोनों आरोपित सोना कहाँ से ला रहे थे और इसको भारत में किसको डिलीवरी देनी थी। फ़िलहाल पूरे मामले की जाँच जारी है। इस कार्रवाई को ITBP की तस्करी के खिलाफ एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।

भारतीय लड़कियों से खाड़ी देशों में करवाया जा रहा मुजरा, सैफुद्दीन है शामिल: पीड़िता ने दिल्ली सहित कई महानगरों की बताई हालात, कॉन्ग्रेस नेता का भी नाम

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 13 मई 2024 को एक हिन्दू लड़की ने अपने मुस्लिम शौहर के खिलाफ हिंसा का केस दर्ज करवाया था। इसमें 6 नामजद सहित अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था। इस मामले में अब पीड़िता सामने आई है। उसने लव जिहाद की गहरी साजिश का आरोप लगाया है। पीड़िता ने इस पूरे नेटवर्क में कॉन्ग्रेस के एक नेता को भी शामिल बताया है।

पीड़िता मूलतः UP के बहराइच जिले रहने वाली है, जबकि आरोपित कर्नाटक के बीदर से रहने वाले हैं। पीड़िता ने इस मामले में लखनऊ के गुडम्बा थाने में केस दर्ज कराया है। पीडिता ने अपनी शिकायत में बताया कि वो पिछले 6-7 वर्षों से दुबई और बहरीन में रहकर काम करती थी। बहरीन में उसकी मुलाक़ात कर्नाटक के बीदर निवासी सैफुद्दीन से हुई थी।

सैफुद्दीन ने पीड़िता से दोस्ती की और बहरीन में उससे रेप किया। इसके बाद पीड़िता ने बहरीन में बलात्कार का केस दर्ज करवाया। रेप की वजह से पीड़िता गर्भवती हो गई। इसके बाद पीड़िता को इस्लाम कबूल करने की सलाह दी गई थी। आरोप है कि सैफुद्दीन के परिजनों के दबाव में 13 फरवरी 2024 को पीड़िता ने धर्मांतरण करके सैफुद्दीन से निकाह किया।

गर्भावस्था के 5 माह पूरे होने पर सैफुद्दीन ने पीड़िता को इलाज के बहाने मुंबई भेजा। यहाँ साजिशन पीड़िता का गर्भपात करवा दिया। वहाँ से सैफुद्दीन पीड़िता को अपने घर कर्नाटक के बीदर ले गया। वहाँ लड़की को सैफुद्दीन के भाई सबीरूद्दीन और 3 अन्य लोगों ने अपनी बहन के साथ मिलकर उसका शारीरिक और मानसिक तौर पर प्रताड़ित किया।

लखनऊ की पीड़िता ने अपनी शिकायत में सैफुद्दीन की पूर्व प्रेमिका मोनिका और कुछ अन्य लोगों के नाम दर्ज करवाए हैं। इसके आधार पर सैफुद्दीन, उसके 4 भाई, बहन और पूर्व प्रेमिका मोनिका पर 498A, 323 और 313 IPC के तहत FIR दर्ज कर ली थी। इस मामले की FIR से संबंधित कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है।

अब पीड़िता ने मीडिया को अपनी प्रताड़ना को विस्तार से बताया है। ABP न्यूज़ से बात करते हुए लड़की ने बताया कि सैफुद्दीन उसे एक क्लाइंट के तौर पर मिला था। कुछ दिनों की बातचीत में वो पीड़िता पर डोरे डालने लगा। वह शराब में गोलियाँ डालकर पीता था। वह खुद को अपने घर से बेहद परेशान बताया करता था।

पीड़िता ने बताया कि वह अपनी बीवी और गर्लफ्रेंड से खुद को परेशान बताता था। धीरे-धीरे सैफुद्दीन ने पीड़िता को अपने साथ निकाह के लिए तैयार करने की कोशिश करने लगा। एक दिन आरोपित सैफुद्दीन ने लड़की को नशीली दवा देकर उसका रेप किया और फिर अश्लील वीडियो बनाकर उसे ब्लैकमेल करने लगा।

पीड़िता ने आगे बताया कि सैफुद्दीन का पेशा लड़कियों को इमोशनल ब्लैकमेल करके उन्हें अपने जाल में फँसाना है। ये लड़कियाँ मुंबई, दिल्ली और गुजरात आदि प्रदेशों की हैं। इन लड़कियों को होटल और ब्यूटी पॉर्लर की जॉब दिलाने का लालच दिया जाता है। बाद में लड़कियों को खाड़ी देशों में बेच दिया जाता और उनसे मुजरा करवाया जाता है।

पीड़िता का दावा है कि वो कई लड़कियों को जानती है, जो बहरीन के अलग-अलग बार में काम कर रही हैं। इसी दौरान पीड़िता ने बताया कि बीदर में कॉन्ग्रेस पार्टी का एक नेता है, जो सैफुद्दीन का रिश्तेदार है। इस रिश्तेदार पर भी आरोप है कि उसने न सिर्फ पीड़िता के साथ हाथापाई की, बल्कि उसका रेप भी करने का प्रयास किया।

शिक्षकों की डिजिटल हाज़िरी के मामले में योगी सरकार ने बदला आदेश: जिस तरह अखिलेश अभी कर रहे राजनीति, पिता मुलायम ने नक़ल कानून का विरोध कर बनाई थी सरकार

उत्तर प्रदेश में एक नया नियामक लागू किया गया, जिसके तहत शिक्षकों को कहा गया कि वो डिजिटल रूप से हाज़िरी लगाएँ। हालाँकि, इसके विरोध में शिक्षकों ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया। उत्तर प्रदेश में फ़िलहाल स्कूलों की टाइमिंग 8 बजे से लेकर 2 बजे तक हैं, हालाँकि, भाजपा सरकार ने आदेश जारी किया कि शिक्षकों को पौने 8 बजे हाज़िरी बनानी पड़ेगी। अब आदेश को मोडिफाई कर के कहा गया है कि शिक्षकों को आधे घंटे का अतिरिक्त समय दिया जाएगा।

शिक्षकों को एक तरह से ये वैकल्पिक व्यवस्था दी गई है, जिसके तहत वो साढ़े 8 बजे तक अटेंडेंस बना सकते हैं, लेकिन उन्हें सफाई देनी पड़ेगी कि वो क्यों देर से आए हैं। उम्मीद है कि इसके बाद शिक्षकों का विरोध प्रदर्शन कम होगा। ‘प्रेरणा पोर्टल’ के तहत ‘डिजिटल रजिस्टर’ की व्यवस्था की गई है। यूपी में शिक्षकों की अनुपस्थिति के कारण शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही थी। शिक्षकों के देर से आने पर उनका वेतन काटे जाने की व्यवस्था की गई थी।

अगर 8 जुलाई, 2024 की बात करें तो उस दिन 6 लाख शिक्षकों में से मात्र 2% ने रजिस्टर में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी। केवल 16,015 शिक्षकों ने अटेंडेंस बनाया था। 75 में से 14 जिलों में शत प्रतिशत लोगों ने इसका बहिष्कार किया। शाहजहाँपुर, पीलीभीत और संत कबीर नगर इन्हीं जिलों में से एक है। बरेली में 1, रामपुर में 2, और महराजगंज में 9 शिक्षकों ने ही हाज़िरी बनाई। कई शिक्षकों ने हाथ पर काली पट्टी बाँध कर ड्यूटी की थी।

भाजपा के विधान पार्षद बाबूलाल तिवारी ने खुद CM योगी आदित्यनाथ से मिल कर इस संबंध में सूचनाओं को साझा किया। हाज़िरी के लिए शिक्षकों के चेहरे पर आधारित सिस्टम भी की गई थी, लेकिन इसका भी विरोध किया गया। अखिलेश यादव ने वोट बैंक को देख कर प्रदर्शनकारी शिक्षकों को समर्थन दिया। इससे इतिहास की भी याद आ जाती है, जब भाजपा सरकार में ही कल्याण सिंह के मुख्यमंत्री रहते नक़ल विरोधी कानून 1992 में पारित किया गया था।

उस समय राजनाथ सिंह यूपी के शिक्षा मंत्री थे। इस कानून के तहत पुलिस को परीक्षा केंद्रों में घुस कर जाँच व कार्रवाई करने की अनुमति दी गई, लेकिन, मुलायम सिंह यादव ने इसका फायदा उठाया। उस दौरान 17% छात्र-छात्राओं ने परीक्षा ही छोड़ दी थी। 1994 में मुलायम सिंह यादव ने सरकार बनते ही अपने पहले निर्णयों में इस कानून को रद्द किया। अब अखिलेश यादव उसी तरह की राजनीति कर रहे हैं। राजनाथ सिंह के CM रहते भी यूपी में भाजपा की हार हुई थी।

क्या CBI को जाँच करने से रोक सकते हैं राज्य? बंगाल सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई, केंद्र ने कहा – ये स्वतंत्र जाँच एजेंसी

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (10 जुलाई 2024) को कहा कि सीबीआई की सामान्य सहमति रद्द करने के बावजूद पश्चिम बंगाल में एफआईआर दर्ज करने को लेकर पश्चिम बंगाल की याचिका सुनवाई योग्य है। इस मामले में ममता बनर्जी वाली पश्चिम बंगाल सरकार ने केंद्र सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इसका केंद्र सरकार ने विरोध किया था।

केंद्र सरकार द्वारा उठाई गई प्रारंभिक आपत्तियों को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति बीआर गवई और संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि पश्चिम बंगाल राज्य की शिकायत में कार्रवाई का कारण बताया गया है। पीठ ने केंद्र सरकार द्वारा दी गई इस दलील को भी खारिज कर दिया कि राज्य ने शिकायत में महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया है।

दरअसल, मामला साल 2018 का है। उस दौरान बंगाल की सरकार ने CBI जाँच के लिए दी गई सामान्य सहमति वापस ले लिया था। इसके बाद भी एजेंसी पश्चिम बंगाल में अपराधों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करना जारी रखी। कोर्ट ने कहा कि सामान्य सहमति वापस लेने के बाद एजेंसी जाँच जारी नहीं रख सकती थी।

वहीं, बंगाल की सरकार ने तर्क दिया कि CBI केंद्र सरकार के अधीन काम कर रही है। खंडपीठ ने कहा कि यह निर्धारित करने के लिए कि यह मुकदमा सुनवाई योग्य है। कोर्ट ने कहा, “वर्तमान मुकदमा कानूनी मुद्दा उठा रहा है कि क्या सामान्य सहमति वापस लेने के बाद CBI एफआईआर दर्ज करना और DSPE Act की धारा 6 का उल्लंघन करने वाले मामलों की जाँच करना जारी रख सकती है।”

यह मुकदमा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 131 के तहत भारत सरकार के खिलाफ दायर किया गया था। इसमें राज्य सरकार ने तर्क दिया कि दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम 1946 के तहत CBI का गठन किया गया है। राज्य ने कहा कि सहमति रद्द करने के बावजूद सीबीआई ने राज्य में हुए अपराधों के संबंध में एफआईआर दर्ज करना जारी रखा।

केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 131 संघ और राज्यों के बीच विवाद को खत्म करने के लिए है। यह CBI पर ये लागू नहीं होता है, क्योंकि यह केंद्र सरकार का हिस्सा नहीं है। इसलिए यह दायर मुकदमा केंद्र सरकार के खिलाफ है।

मौलवी ने गला घोंट कर की हिन्दू छात्र को मारने की कोशिश: दरगाह में जामुन तोड़ते देख कर भड़का, मुजीब शेख गिरफ्तार

महाराष्ट्र के बीड जिले में एक दरगाह में लगे जामुन के पेड़ से जामुन का फल तोड़ने पर मौलवी और उसके साथी ने हिंदू बच्चों पर हमला कर दिया। इस दौरान मौलवी ने हिंदू बच्चे का गला भी घोंट दिया। यही नहीं, कई बच्चों को डंडे से भी पीटा, जिसके बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। इस मामले में पुलिस ने आरोपित मौलवी को गिरफ्तार कर लिया है, वहीं उसका एक साथी फरार है।

जानकारी के मुताबिक, सोमवार (08 जुलाई 2024) को डिंड्रूड (मजलगाँव) में मौलवी ने एक बच्चे का गला घोंटने की भी कोशिश की। एक छात्र की हालत गंभीर बताई जा रही है और उसका बीड के एक सरकारी अस्पताल में इलाज चल रहा है। आरोपितों की पहचान मौलवी मुजीब मुज्जिद शेख और समीर अत्तर कसम के रूप में हुई है। पुलिस ने मौलवी मुजीब को गिरफ्तार कर लिया है। घायल छात्र की माँ की शिकायत के अनुसार, दोनों आरोपियों के खिलाफ दिनदरूद थाने में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने मौलवी मुजीब मुज्जिद शेख को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि समीर अत्तर कसम अभी भी फरार है।

जानकारी के अनुसार , 13 वर्षीय छात्र तेजस नवनाथ कटारे और रत्नेश्वर रुस्तम ठोंबरे डिंडरूड के रहने वाले हैं। वे माध्यमिक विद्यालय में पढ़ते हैं। स्कूल से घर लौटते समय बच्चे जिला परिषद स्कूल के पास महबूब सुभानी दरगाह के पास एक पेड़ से जामुन खाने गए थे। इसी दौरान मौलवी मुजीब मुज्जिद शेख और समीर अत्तर कसम वहाँ आए और उन्होंने लाठी से उन पर बेरहमी से हमला करना शुरू कर दिया। इस हमले में 3 छात्र घायल हो गए। एक छात्र डरकर भाग गया। मारपीट के दौरान आरोपित मौलवी ने तेजस के सिर पर डंडे से वार किया। उसने गला दबाकर बच्चे की हत्या करने की भी कोशिश की। तेजस गंभीर रूप से घायल हो गया। सिर में गंभीर चोट लगने के कारण उसका सीटी स्कैन कराया गया है और उसे मेडिकल निगरानी में रखा गया है। फिलहाल उसका इलाज बीड के सरकारी अस्पताल में चल रहा है। जबकि रत्नेश्वर थोम्बरे को मामूली चोट आई है।

तेजस की माँ वंदना कटारे ने डिंड्रूड पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है। उनकी शिकायत के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 109, 118(1) और 3(5) के तहत एफआईआर (संख्या 142/2024) दर्ज की है। पुलिस ने आरोपित मौलवी को गिरफ्तार कर लिया है और दूसरे की तलाश चल रही है।

चाँद दिखा तो बिना अनुमति निकाला मुहर्रम का जुलूस, फिलिस्तीन के झंडे लहरा कर लगाए नारे: मोहम्मद साहिल और गफ्फार का बेटा गोरख नामजद

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में एक जुलूस में कुछ लोगों को नारेबाजी करते देखा जा सकता है। एक व्यक्ति द्वारा इसी जुलूस में फिलिस्तीन का झंडा भी लहराया जा रहा है। कई यूजर्स ने इस घटना पर पुलिस से कार्रवाई की माँग की है। पुलिस ने FIR दर्ज करते हुए मोहम्मद साहिल और गफ्फार के बेटे गोरख को नामजद किया है। 2 आरोपितों को गिरफ्तार कर के आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। घटना रविवार (7 जुलाई 2024) की है।

यह घटना भदोही जिले के थानाक्षेत्र औराई की है। वायरल हो रहे वीडियो का संज्ञान ले कर पुलिस ने अपनी तरफ से इस मामले की FIR दर्ज की है। सोमवार (8 जुलाई) को एक पुलिस सब इंस्पेक्टर द्वारा दी गई तहरीर में बताया गया है कि उन्होंने ट्विटर पर अपने क्षेत्र का एक वीडियो वायरल होते देखा। वीडियो ‘हिन्दू युवा वाहिनी’ द्वारा शेयर कर के पुलिस से कार्रवाई की माँग की गई थी। फिलिस्तीनी झंडा लहराए जाने के इस वीडियो की जाँच के दौरान पता चला कि वह 7 जुलाई को भदोही के माधव बाजार में बनाया गया था।

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा यह जुलूस मुहर्रम को चाँद दिखने के दौरान निकाला गया था। इस जुलूस के लिए प्रशासन से कोई परमिशन भी नहीं ली गई थी। फिलिस्तीनी झंडे लहराने वालों में मोहम्मद साहिल और गफ्फार के बेटे गोरख को नामजद किया गया है। ये दोनों भदोही के ही अलग-अलग गाँवों के निवासी है। पुलिस का आरोप है कि साहिल और गोरख की हरकत गैरकानूनी है और इस से समाज में सौहार्द को नुकसान पहुँचा है। पुलिस के अनुसार, आरोपितों की वजह से समाज में वैमनस्यता फैली और आपसी घृणा की भावना पैदा हुई है।

पुलिस की FIR में दोनों नामजद आरोपितों के साथ कुछ अन्य अज्ञात लोगों को भी शामिल बताया गया है। इस तहरीर पर गफ्फार के बेटे गोरख और बादशाह नाम से चर्चित मोहम्मद साहिल पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 197 (2) के तहत कार्रवाई की गई है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। पुलिस ने 2 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। जुलूस में शामिल अन्य लोगों को चिह्नित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। कुछ लोगों को हिरासत में ले कर पूछताछ की जा रही है। मामले में जाँच व अन्य जरूरी कार्रवाई की जा रही है।

‘एल्विश यादव हाजिर हों’: मनी लॉन्ड्रिंग मामले में YouTuber को ED का नोटिस, करीबियों में शामिल रिजॉर्ट मालिकों से लेकर फैजलपुरिया तक रडार पर

साँपों के जहर केस में पहले ही कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे यूट्यूबर एल्विश यादव की मुश्किलों में इजाफा हुआ है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने समन जारी कर के उनको पूछताछ के लिए पेश होने का आदेश दिया है। नोटिस के मुताबिक, एल्विश को 23 जुलाई को ED की लखनऊ यूनिट के आगे पेश होना है। यह नोटिस मनी लॉन्ड्रिंग केस में जारी हुई है। इस से पहले जारी नोटिस में ED ने एल्विश को सोमवार (8 जुलाई, 2024) को पेश होने का आदेश दिया था। हालाँकि, तब विदेश में होने की बात कहते हुए एल्विश पेश नहीं हुए थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मई 2024 में ED ने एल्विश यादव पर मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया था। इस केस के बाद एल्विश यादव के बैंक खातों के साथ महँगी कारों और अन्य खर्चों की डिटेल जुटाई जा रही है। 23 जुलाई को ED के सवालों में इसको भी शामिल किया जा सकता है। इसके अलावा एल्विश के कुछ अन्य साथियो पर भी ED की नजर है। इनमें नोएडा के रिजॉर्ट मालिक और होटल कारोबारी आदि शामिल हैं। माना जा रहा है कि जल्द ही इन सभी से सवाल-जवाब हो सकता है।

यह कार्रवाई ED की लखनऊ यूनिट कर रही है। इस से पहले प्रवर्तन निदेशालय ने एल्विश यादव को पूछताछ के लिए नोटिस जारी कर के 8 जुलाई को पेश होने के लिए कहा था। हालाँकि, तब एल्विश ने खुद को विदेश में बताया था। तब नोटिस का जवाब देते हुए एल्विश ने हाजिर होने के लिए कुछ दिनों का समय माँगा था। इस बीच में ED ने हरियाणा के गायक राहुल यादव से भी पूछताछ की है। माना जा रहा है कि ED दोबारा राहुल यादव उर्फ़ राहुल फाजिलपुरिया को पूछताछ के लिए बुला सकती है।

बताते चलें कि एल्विश पर रेव पार्टियों में साँपों का जहर सप्लाई करने का आरोप है। नोएडा पुलिस ने उन्हें 17 मार्च, 2024 को गिरफ्तार किया था। 5 दिन जेल में बिताने के बाद एल्विश 22 मार्च को जमानत पर रिहा हुए थे। इस दौरान उनकी माता और पिता उन्हें बेगुनाह बताते रहे। जाँच के बाद नोएडा पुलिस एल्विश के खिलाफ कोर्ट में 1200 पन्नों की चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर चुकी है। चार्जशीट में एल्विश पर रेव पार्टी करना, ड्रग्स की सप्लाई करना और साँपों की तस्करी के आरोप लगाए गए है। फिलहाल मामला कोर्ट में विचाराधीन है।