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‘शरीर पर कई घाव, ठुड्डी के बगल में छेद, आँख-नाक-दाँत से बहता खून, मुड़ा हुआ हाथ’: MLA नितेश राणे पुलिस को देंगे सबूत, 14वीं मंजिल से गिरी थी सुशांत की मैनेजर

दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मैनेजर रहीं दिशा सालियान की संदिग्ध मौत के मामले में अब मुंबई पुलिस ने अब भाजपा विधायक नितेश राणे को नोटिस जारी किया है। मुंबई पुलिस ने कहा है कि नितेश राणे शुक्रवार (12 जुलाई, 2024) को पूछताछ के लिए हाजिर हों। पुलिस उनसे पूछेगी कि उनके पास इस घटना को लेकर क्या सबूत हैं, क्योंकि वो मीडिया में ऐसे दावे कर चुके हैं। नितेश राणे ने कहा कि उन्हें समन प्राप्त हो गया है। उन्होंने फिर से दोहराया कि वो पहले दिन से ही ये कह रहे हैं कि ये मामला हत्या का है।

नितेश राणे ने कहा कि वो और उनके पिता नारायण राणे पुलिस के साथ सहयोग करने के लिए तैयार हैं, इससे पहले जो MVA की सरकार थी उसने इस मामले पर पर्दा डालने की कोशिश की ताकि वो आदित्य ठाकरे को बचा सके। नितेश राणे ने कहा कि अब जब सरकार बदल गई है, पारदर्शी जाँच होगी। उन्होंने कहा कि वो पुलिस को सच्चाई बताएँगे। बता दें कि ‘महा विकास अघाड़ी’ सरकार में उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री थे और उनके बेटे आदित्य मंत्री। नितेश राणे का कहना है कि आदित्य भी उस पार्टी में मौजूद थे।

मुंबई पुलिस ने दिसंबर 2023 में इस मामले की जाँच के लिए SIT का गठन किया था। 8 जून, 2020 को दिशा सालियान को मृत पाया गया था। इसके मात्र 6 दिन बाद ही सुशांत सिंह राजपूत की भी संदिग्ध मौत हो गई थी। बांद्रा स्थित फ़्लैट में वो फंदे पर लटके हुए मिले थे। वहीं दिशा सालियान मलाड स्थित एक इमारत (गैलेक्सी रीजेंट बिल्डिंग) के 14वीं फ्लोर से नीचे कूद गई थीं। इन दोनों ही मौतों को आत्महत्या बताया गया था। सुशांत सिंह राजपूत जहाँ 34 वर्ष के थे, वहीं दिशा सालियान की उम्र मात्र 28 वर्ष थी।

एक चश्मदीद ने आरोप लगाया था कि घटना की रात दिशा से चार लोगों ने रेप किया था। बाद में उप-मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी बताया था कि इस मामले में पुलिस को नए सबूत मिले हैं। एंबुलेंस के ड्राइवर पंकज सैदन ने रिपब्लिक भारत के साथ बातचीत में कहा था, “दिशा सालियान के पूरे शरीर पर घाव थे। उनकी ठुड्डी के बगल में 1.5 इंच का छेद था। उनकी आँख, नाक, दाँत से खून बह रहा था। उनका हाथ भी मुड़ गया था।”

SC आयोग ने कर्नाटक सरकार को किया तलब: दलित कल्याण का फंड झटक कर अपनी गारंटियों पर खर्च कर रही कॉन्ग्रेस, अब 7 दिन में देना होगा जवाब

कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार को दलित आदिवासियों का फंड लेने के मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) ने तलब किया है। कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार ने अपनी चुनावी गारंटियां पूरी करने के लिए दलित और आदिवासियों के विकास के लिए दिया गया फंड ले लिया था।

NCSC के अध्यक्ष किशोर मकवाना ने इस मामले में बताया, “कर्नाटक सरकार ने अनुसूचित जाति के कल्याण के लिए जारी किया गया फंड अन्य कार्य के लिए लेकर इसका दुरुपयोग किया है। यह अनुसूचित जाति के कल्याण के लिए उठाए गए कदम के विरुद्ध है। इसका NCSC ने संज्ञान लिया है और इस मामले में कर्नाटक सरकार को नोटिस भेजा है। कर्नाटक सरकार को इस मामले में नोटिस भी भेजा गया है। यदि कर्नाटक सरकार इस मामले में जवाब नहीं देती तो कार्रवाई की जाएगी।”

गौरतलब है कि हाल ही में कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार ने फैसला लिया था कि वह राज्य के दलित-आदिवासियों के दिए गए ₹14,730 करोड़ फंड को अब अपनी गारंटियों में खर्च करेगी।कर्नाटक की सिद्दारमैया सरकार ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए ₹39,121 करोड़ की धनराशि दलित और आदिवासियों के फंड के रूप में जारी किया था। कर्नाटक में नियमों के अनुसार ऐसा करना आवश्यक है। लेकिन कॉन्ग्रेस सरकार ने इसमें से लगभग एक तिहाई फंड काटने का इरादा कर लिया है। वह पहले भी ऐसा ही कर चुकी है।

कॉन्ग्रेस सरकार ने जुलाई 2023 में राज्य के SC-ST समुदाय के कल्याण के लिए खर्च किए जाने वाले ₹11,000 करोड़ को भी इन गारंटियों के लिए उपयोग करने का फैसला लिया था, जिसके कारण इसकी काफी आलोचना हुई थी। कॉन्ग्रेस सरकार ने यह कह कर अपना बचाव करने का प्रयास किया था कि यह दूसरी योजनाओं को दिया जाने वाला यह पैसा भी गरीबों के विकास में लगेगा। हालाँकि, दलित संगठनों ने उसकी इस दलील को स्वीकार नहीं किया था।

मुफ्त वाली गारंटी ले गईं बजट का बड़ा हिस्सा

कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार की यह गारंटियाँ बजट का एक बड़ा हिस्सा ले जा रही हैं। इससे बाकी के विकास कामों के लिए पैसा नहीं बच रहा है। वित्त वर्ष 2023-24 में इन पाँच चुनावी गारंटियों पर ₹39,825 करोड़ का खर्चा किया गया था। यह कर्नाटक के 2023-24 के बजट का लगभग 17% था। वित्त वर्ष 2024-25 में गारंटियों का यह खर्चा और बढ़ गया है। 2023-24 के मुकाबले इसमें लगभग एक तिहाई की वृद्धि हुई है।

वित्त वर्ष 2024-25 के लिए पेश किए गए बजट में कर्नाटक ने इन पाँच चुनावी गारंटियों पर ₹52,000 करोड़ खर्च करने की योजना बनाई है। राज्य की कई अन्य योजनाओं का असर इस खर्च के कारण पड़ रहा है।

जुलाई 2023 में ही कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भी अपने विधायकों से स्पष्ट कर दिया था कि उन्हें कोई भी फंड नहीं दिए जाएँगे और पूरा फोकस गारंटियों को पूरा करने पर लगाया जाएगा। भाजपा ने कॉन्ग्रेस सरकार पर आरोप लगाया है कि वह राज्य के विकास का सारा पैसा अपने चुनावी वादे पूरे करने में फूँक रही है जिससे राज्य पिछड़ रहा है।

राज्य में जीत को कॉन्ग्रेस ने किए थे ‘रेवड़ी’ वादे

2023 में विधानसभा चुनाव जीतने के लिए कॉन्ग्रेस ने पाँच गारंटी दी थी। इन्हें ‘रेवड़ी’ कहा गया था। कॉन्ग्रेस ने 2023 विधानसभा चुनाव में वादा किया था कि सत्ता में आने पर वह हर घर को 200 यूनिट मुफ्त बिजली देगी। इसे गृह ज्योति योजना का नाम दिया गया था। इसके अलावा गृह लक्ष्मी नाम की योजना का भी एक वादा किया गया था। इसके अंतर्गत कॉन्ग्रेस ने वादा किया था कि वह राज्य की महिलाओं को ₹2000 प्रतिमाह देगी।

कॉन्ग्रेस ने कर्नाटक की आर्थिक स्थिति और मुफ्त सुविधाओं के वादों से अर्थव्यस्था पर पड़ने वाले बोझ को दरकिनार करते हुए हर परिवार को 10 किलो अनाज देने का भी वादा किया था, इसे अन्न भाग्य योजना का नाम दिया गया था। कॉन्ग्रेस ने राज्य में महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा का भी वादा किया था। इसके अलावा राज्य के बेरोजगार युवाओं को भी ₹1500 देने की बात कही गई थी। इनमें से कुछ योजनाएँ पूरी तरह से लागू कर दी गई हैं तो कुछ को आंशिक रूप से लागू किया गया है।

कॉन्ग्रेस के इन ‘रेवड़ी’ वादों का असर अब राज्य के खजाने पर दिख रहा है और वह राजस्व बढ़ाने के लिए नई-नई जुगत भिड़ा रही है। वह राज्य की आम जनता को अब नए कर और बढ़े करों से लादना चाह रही है। साथ ही वह कमाई के नए जुगाड़ भी लगा रही है।

ncsc issues notice to karnataka congress government for using sc st funds to fulfill electoral guarantees

‘क्लासमेट जोया और उसकी अम्मी करती थी तंग’: हिंदू लड़की ने की आत्महत्या, 1 हफ्ते बाद खुला मामला; जाँच में जुटी कर्नाटक पुलिस

कर्नाटक के हावेड़ी जिले में एक 14 साल की बच्ची ने अपनी क्लासमेट के टॉर्चर से तंग आकर एक हफ्ते पहले आत्महत्या कर ली थी, लेकिन मामला अब जाकर प्रकाश में आया है। लड़की का नाम अर्चना था और क्लासमेट की पहचान जोया के तौर पर हुई है। अर्चना ने सुसाइड से पहले एक नोट लिखा था जिसमें उसने जोया और उसकी अम्मी को अपनी मौत का जिम्मेदार बताया है।

अर्चना डोड्डाननवर जिले के हिरेकेरुर तालुक में मोरारजी देसाई सरकारी आवासीय विद्यालय में पढ़ती थी। द न्यू इंडियन एक्सप्रेस पर प्रकाशित खबर के अनुसार, एक हफ्ते पहले अर्चना ने अपने घर पर आत्महत्या की तो घरवालों ने पुलिस को बताने की बजाय खुद उसका अंतिम संस्कार कर दिया। साथ ही स्कूल प्रबंधन और जोया के परिवार के साथ बैठकर मुआवजे की रकम भी तय कर ली। अर्चना के घरवालों ने इस मामले को रफा-दफा करने के लिए 10 लाख माँगे थे। हालाँकि सहमति एक लाख रुपए में बनी।

बताया जा रहा है कि जब कुछ ग्रामीणों को इन रुपयों में से हिस्सा नहीं मिला तो उन्होंने इस आत्महत्या की बात को फैला दिया और बात पुलिस तक पहुँची। ग्रामीणों ने बताया कि अर्चना की मौत में कुछ तो गड़बड़ थी। वह एक होनहार छात्रा थी। वहीं कुछ लोग अर्चना की फोटो लेने भी सफल हो गए थे। उन्होंने वो सारी तस्वीरें आदि दिखाते हुए स्कूल प्रबंधन और लड़की के माता-पिता का एक्शन लेने की माँग की।

पुलिस ने जानकारी होने पर इलाके का दौरा किया। वह अर्चना के घर गए। उस विद्यालय में गए जहाँ वो पढ़ती थी। पता लगने पर पुलिस ने घटना की जाँच शुरू कर दी है। अर्चना के परिजनों के अलावा ग्रामीणों और स्कूल प्रबंधन से भी पूछताछ की जा रही है। वो सुसाइड नोट भी मिला है जिसमें लड़की ने लिखा था कि उसकी मौत की जिम्मेदार क्लासमेट जोया और उसकी अम्मी हैं जिन्होंने उसे प्रताड़ित किया।

BMW से महिला को कुचलकर गर्लफ्रेंड के घर गया था मिहिर शाह, 40 बार किए थे कॉल: पुलिस के सामने कबूला गुनाह, मुंबई की सड़क पर डेढ़ किमी घिसटती रही थी मृतका

मुंबई में BMW गाड़ी से महिला कावेरी नखवा को कुचलने और घसीटने वाले मिहिर शाह को अब अपने करियर की चिंता हो रही है। मिहिर शाह का कहना है कि उसने यह दुर्घटना करके अपना करियर बर्बाद कर लिया है। उससे पुलिस पूछताछ में हुए और खुलासे भी लगातार सामने आ रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उसने पुलिस को पूछताछ में अपने करियर को लेकर चिंता जताई है। उसने कहा है कि यह दुर्घटना उसके लिए एक बड़ी गलती है और इसके कारण उसका करियर खत्म हो गया है। उसने इस पूछताछ में और भी कई खुलासे किए हैं।

उसकी पूछताछ के बाद बुधवार (10 जुलाई, 2024) को मुंबई पुलिस ने हादसे वाली जगह पर दुर्घटना का नाट्य रूपांतरण करके देखा। इस दौरान उसके अलावा मुंबई पुलिस उसके साथ उसके ड्राइवर राजेश बिदावत को ले गई थी। राजेश बिदावत भी घटना के दौरान गाड़ी में ही मौजूद था।

मिहिर शाह से हुई पूछताछ में और भी कई खुलासे हुए हैं। पता चला है कि घटना के बाद मिहिर शाह ने अपनी गर्लफ्रेंड को 40 बार फोन किया था। वह घटनास्थल से सीधे गर्लफ्रेंड के ही घर गया था। इसके बाद उसने अपने घर पर सूचना दी थी।

 मिहिर की बहन ने उसे गर्लफ्रेंड के घर से ले आई थी। इसके बाद राजेश शाह को छोड़ कर पूरा परिवार शाहपुर के एक रिजॉर्ट में चला गया था। यहाँ मिहिर शाह के साथ उसकी दोनों बहने, माँ और एक दोस्त भी गया था। यह वाकया 7 जुलाई को हुआ था।

इसके बाद अगले ही दिन मिहिर शाह 8 जुलाई, 2024 को वापस मुंबई के विरार आ गया था। यहाँ वह अपने एक दोस्त के पास आया था। उसके दोस्त ने अपना फोन ऑन किया था तो पुलिस को उसकी लोकेशन मिल गई। पूछताछ में खुद ही गाड़ी से महिला को घसीटने और कुचलने बात भी कबूली है।

गौरतलब है कि 7 जुलाई, 2024 को रात में मिहिर शाह ने अपनी BMW गाड़ी से स्कूटी पर जा रहे एक दंपती को टक्कर मार दी थी। इस टक्कर में महिला की मौके पर ही मौत हो गई थी। इसके बाद भी मिहिर शाह अपनी गाड़ी से महिला कावेरी को 1.5 किलोमीटर तक घसीटता रहा था। घटना के बाद फरार हो गया था। मुंबई पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई थी। उसको मंगलवार को गिरफ्तार किया गया था। मिहिर शाह के पिता राजेश शाह को भी गिरफ्तार किया गया था लेकिन उन्हें जमानत मिल गई थी।

राहुल गाँधी-ध्रुव राठी-उद्धव ठाकरे के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका, जिस स्टोरी के लिए ‘मिड डे’ को माँगनी पड़ी थी माफी, उसका हवाला दे फैलाया था ‘ईवीएम हैकिंग’ का झूठ

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी, शिवसेना-यूबीटी नेता उद्धव ठाकरे, आदित्य ठाकरे, संजय राउत और यूट्यूबर ध्रुव राठी के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही की माँग को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। इस याचिका में इन नेताओं के खिलाफ EVM को लेकर झूठी कहानियाँ फैलाने और जनता में भ्रम पैदा करने का आरोप लगाया गया है।

याचिका में कहा गया है कि उक्त लोगों ने अपने ‘छिपे लक्ष्यों’ की प्राप्ति के लिए ईवीएम को लेकर अलग-अलग धारणाएँ बनाई और लोगों को गुमराह कर नागरिकों को गलत तरीके से प्रभावित किया।

दरअसल, मिडडे अखबार ने 16 जून 2024 को एक खबर छापी थी, जिसमें ईवीएम मशीन को ओटीपी के जरिए अनलॉक करने का दावा किया गया था। विपक्षी नेताओं ने उसका इस्तेमाल देश के लोकतंत्र पर सवाल खड़ा करने के लिए किया। 16 जून को मिड डे समाचार पत्र में प्रकाशित 5 कॉलम की रिपोर्ट में दावा किया गया था पुलिस ने अपनी जाँच में पाया है कि एनडीए के प्रत्याशी रवींद्र वायकर के रिश्तेदार ने मतदान के वक्त फोन इस्तेमाल कर रहे थे जो कि ईवीएम से कनेक्ट था।

इस रिपोर्ट में पुलिस के हवाले से कहा गया था कि प्रत्याशी का रिश्तेदार ओटीपी के जरिए ईवीएम अनलॉक कर रहा था। पुलिस उसका फोन फॉरेंसिक जाँच को भेज चुकी है। हालाँकि बाद में मिड-डे ने अपनी खबर का खंडन छापा था और कहा था कि ये खबर गलत थी। ऐसा होना मुमकिन नहीं है।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि ध्रुव राठी और अन्य लोग लगातार फेक न्यूज फैलाकर आम जनता को भ्रमित करते हैं, ये उनकी आदत में शुमार है। ऐसा करना नीलेश नवलखा बनाम भारत संघ (2021) में बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश का उल्लंघन है। उक्त आदेश में मीडिया को ‘मीडिया ट्रायल’ का सहारा लेने से बचने के लिए दिशा-निर्देश दिए गए थे। याचिका के अनुसार, राहुल गाँधी, ध्रुव राठी समेत सभी आरोपितों ने उस आदेश का उल्लंघन किया है, जिसमें कोर्ट ने कहा था कि जिन मामलों की सुनवाई चल रही हो, उस पर कोई राय बनाकर जनता के बीच गलत बातें फैलाने पर आपराधिक अवमानना की श्रेणी में आएगा। ऐसा करना कोर्ट की अवमानना अधिनियम की धारा 2(सी) के तहत दंडनीय अपराध है।

इस मामले की सुनवाई बॉम्बे हाई कोर्ट में जस्टिस श्याम चांडक और जस्टिस मोहिते-डेरे की बेंच में हुई। जिसमें याचिकाकर्ता ने कोर्ट की अवमानना अधिनियम 1971 की धारा 2(बी) और 12 के तहत राहुल गाँधी, उद्धव ठाकरे, ध्रुव राठी, आदित्य ठाकरे और संजय राउत के खिलाफ कार्यवाही की माँग की। इसके अलावा याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट से पुलिस को आईपीसी की धारा 192, 193, 107, 409, 120(बी) और 34 के तहत लंबित जाँच के संबंध में सार्वजनिक मशीनरी का दुरुपयोग करने और झूठे सबूत बनाने के लिए उपरोक्च लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया। याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में CBI, IB और ED सहित विशेष जाँच दल (SIT) के गठन की भी माँग की है, ताकि राहुल गाँधी, ध्रुव राठी, उद्धव ठाकरे व अन्य लोगों की ‘छिपी मंशा’ की जाँच की जा सके।

इस दौरान याचिकाकर्ता ने जस्टिस रेवती मोहिते-डेरे से इस मामले की सुनवाई से अलग होने की भी अपील की, क्योंकि जस्टिस डेरे की बहन शरद पवार की एनसीपी से जुड़ी हुई हैं। हालाँकि, पीठ ने इस मामले की सुनवाई करने से इनकार किया। साथ ही कहा कि इसे गलत तरीके से उसके समक्ष रखा गया। याचिकाकर्ताओं से कहा गया कि वे चीफ जस्टिस से संपर्क करें और अपनी याचिका को उचित पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने का अनुरोध करें।

सोने के पाउडर में मिलाते थे केमिकल, फिर ट्रॉली बैग से लेकर अंडरवियर तक में कर देते स्प्रे: दुबई से सूरत हो रही थी तस्करी, मियाँ-बीवी हनीफ-उमेमा सहित 4 गिरफ्तार

गुजरात में दुबई से सोने की तस्करी के लिए अजोबोग़रीब तकनीक अपनाने का मामला सामने आया है। सूरत पुलिस ने एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह का खुलासा किया है। पुलिस ने एक शादीशुदा जोड़े समेत 4 तस्करों को गिरफ्तार किया है। साथ ही 927 ग्राम सोना भी जब्त किया गया है, बाजार में जिसकी कीमत 64.89 लाख रुपए आँकी गई है। असल में ये तस्कर सोने के ऊपर एक केमिकल का छिड़काव करते थे, फिर फिर इसे बैग के भीतर साट देते थे।

हवाई अड्डे पर सिक्योरिटी चेक के दौरान भी पता नहीं चल पाता था कि बैग में सोना है। एक जोड़ा इसी तरह तस्करी कर के सोना ला रहा था और उसे जहाँगीरपुरा सायन हजीरा रोड पर स्थित एक होटल में इस सोने की डिलीवरी देनी थी। पुलिस ने सूचनाओं के आधार पर रात के समय नईम मोहम्मद नामक शख्स के घर पर छापेमारी की। हनीफ सालेह और उसकी बीवी उमेमा नईम को भी गिरफ्तार किया गया है। वहीं अब्दुल समेत फारूक बेमत और फिरोज इब्राहिम नूर फरार होने में कामयाब रहे।

पुलिस ने जब इनके पास मौजूद 4 ट्रॉली बैग को चेक किया तो उनमें से उन्हें 927 ग्राम सोना मिला। साथ ही उसमें 76.14 लाख रुपए की अन्य वस्तुएँ भी मिलीं। केमिकल स्प्रे कर के इन्हें बैग में छिपाया गया था। तस्करी के लिए ये सबसे पहले सोने को पाउडर के रूप में परिवर्तित करते थे, उसके बाद उसमें केमिकल मिलाते थे, फिर छोटे-छोटे पाउच में भर कर फिर उस पाउच को अपने अंडरवियर ये मोज़े में डाल लेते थे। 2023 में भी 4 लोगों को 4.30 करोड़ रुपए के तस्करी के सोने के साथ पकड़ा गया था।

उस समय ये तस्कर सोने के पेस्ट का इस्तेमाल कर रहे थे, हालाँकि, उन्होंने फिर नया तरीका निकाल लिया। सोना का पेस्ट बनाने के बाद वो उसमें केमिकल का मिश्रण करते हैं, फिर केमिकल वाले उस सोने के पेस्ट को लिक्विड फोम की शक्ल में लाया जाता है। इसके बाद फिर ट्रॉली बैग में इसे रखा जाता था। मेटल डिवाइस डिटेक्टर से भी इसे नहीं पकड़ा जा सकता है। सोने की इस तरह की तस्करी से भारत सरकार को भी नुकसान होता है, क्योंकि कस्टम विभाग को एक्साइज ड्यूटी टैक्स नहीं मिलता है।

जिस स्कूल में पढ़ती थी 8 साल की बच्ची, उससे उसी के स्कूल के 12-13 साल के 3 लड़कों ने किया गैंगरेप: शव नहर में फेंका, खोजी कुत्तों ने सुलझाई हत्या की गुत्थी

आंध्र प्रदेश के नंदयाल में 8 साल की लड़की के साथ 3 नाबालिग लड़कों ने सामूहिक दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या कर दी। घटना रविवार (7 जुलाई 2024) को मुचुमरी गाँव में हुई और बुधवार (10 जुलाई 2024) को इसका खुलासा हुआ। पुलिस के अनुसार, रेप के आरोपित लड़के (12-13 साल) पीड़िता के साथ एक ही स्कूल में पढ़ते थे। तीनों उसे खिलाने के बहाने सुनसान जगह पर ले गए। वहाँ उन्होंने उसका पहले रेप किया और फिर डर से उसकी हत्या कर दी। बाद में उसकी पहचान मिटाने के लिए शव को नहर में फेंक दिया। उधर शाम तक बच्ची के घर न लौटने पर उसके परिजनों ने पुलिस थाने में शिकायत दी।

रिपोर्ट्स के अनुसार, घरवालों ने रविवार को बच्ची की गुमशुदगी की रिपोर्ट कराई। इस संबंध में पुलिस ने जानकारी देते हुए बताया, नाबालिग लड़की के पिता ने रविवार को थाने शिकायत लेकर आए। शिकायत में उन्होंने बताया कि उनकी बेटी पास के मुचुमरी पार्क में खेल रही थी लेकिन अचानक लापता हो गई। उन्होंने उसे हर जगह ढूँढा मगर उसका कुछ पता नहीं चला। शिकायत के बाद पुलिस ने मुचुमरी में हर जगह तलाश की और स्थानीय लोगों से जानकारी के लिए पूछताछ की, लेकिन लड़की नहीं मिली।

पुलिस ने शिकायत दर्ज करके डॉग स्क्वॉयड को भी जाँच में शामिल किया। इसके बाद वो खोजी कुत्तों की मदद से तीन आरोपितों तक पहुँचे। खोजी कुत्ते न केवल पुलिस को अपराध स्थल तक ले गए बल्कि उन्होंने पुलिस को आरोपितों के घर भी पहुँचाया। पुलिस ने पूछताछ की तो एक आरोपित ने जुर्म कबूल लिया।

आरोपितों ने बताया है कि उन्होंने बच्ची को मुचुमरी पार्क के पास खेलते हुए देखा था। वह उनके स्कूल में पढ़ती थी इसलिए उन्हें चेहरे से पहचानती थी। लड़कों ने उसे अपने साथ खेलने के लिए कहा, फिर लुकाछिपी के खेल के बहाने तीनों बच्ची को मुचुमरी सिंचाई परियोजना के पास एक सुनसान जगह पर ले गए। वहाँ उन्होंने बच्ची का मुँह बंद किया और फिर एक के बाद एक उसके साथ बलात्कार किया। लड़की बेहोश हुई तो तीनों डर गए इसलिए उसे मारकर नहर में फेंककर वह वहाँ से फरार हो गए। पुलिस ने तीनों की बात सुनने के बाद इनके विरुद्ध केस दर्ज किया। अब पुलिस लड़की का शव ढूँढने के साथ केस की आगे जाँच कर रही है। स्थानीय लोगों में बच्ची के साथ हुई निर्ममता की खबर सुनने के बाद काफी गुस्सा है

पथराव करने वाले कॉन्ग्रेसियों को नहीं मिली जमानत, तस्वीरें- CCTV देखने के बाद कोर्ट ने कहा- यह हमले का स्पष्ट मामला: राहुल गाँधी के हिंदू विरोधी बयान का हो रहा था विरोध​

अहमदाबाद में हिंदुओं, बीजेपी कार्यकर्ताओं और पुलिस पर हमला करने वाले कॉन्ग्रेस के 5 कार्यकर्ताओं की जमानत याचिका खारिज कर दी गई है। इन कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने 2 जुलाई को अहमदाबाद में पत्थरबाजी और दंगा किया था। बता दें कि राहुल गाँधी द्वारा संसद में हिंदुओं के खिलाफ की गई बयानबाजी के बाद बीजेपी कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया था, जिसके बाद उनके विरोध प्रदर्शन पर कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने हमला किया था। इस दौरान कॉन्ग्रेसियों ने बीजेपी कार्यकर्ताओं और पुलिस पर भी पत्थरबाजी की थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अहमदाबाद के सेशन जज जयेशकुमार ईश्वरलाल पटेल की कोर्ट ने पाँचों कॉन्ग्रेसियों की जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने घटना की तस्वीरें और सीसीटीवी फुटेज देखने के बाद कहा कि यह “एक सरकारी कर्मचारी पर हमले का स्पष्ट मामला” और “पुलिस तंत्र पर हमले का स्पष्ट मामला” है। कोर्ट ने यह भी ध्यान दिया कि घायल व्यक्ति के सिर पर आठ टांके भी लगे हैं। जज ने अपने आदेश में कहा कि कुछ “आरोपित किसी पार्टी से जुड़े हो सकते हैं, लेकिन उन्हें कानून और व्यवस्था अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती और न ही कानून में ऐसा कोई प्रावधान है।”

ये पाँच कॉन्ग्रेसी हुए थे गिरफ्तार

अहमदाबाद शहर में एक पुलिस कॉन्स्टेबल और भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) अध्यक्ष की दो शिकायतों के आधार पर कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज की गईं थी। इस मामले में हर्ष ईश्वरभाई परमार (23), विमलभाई पंसारा (50), मनीष ठाकोर (47), संजय बारोट (57), और मुकेशभाई दतनिया (68) को पालडी पुलिस स्टेशन के कॉन्स्टेबल कर्मराज भगवतसिंह द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर गिरफ्तार किया गया था। कॉन्स्टेबल भी झड़प में घायल हो गए थे।

एफआईआर में भगवतसिंह ने कॉन्ग्रेस नेता शहजादखान पठान (जो अहमदाबाद नगर निगम में विपक्ष के नेता भी हैं) और प्रगतिबेन नंदनिया के साथ-साथ “लगभग 200-250 कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं” और “150-200 बीजेपी कार्यकर्ताओं की भीड़” के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत दंगा और पथराव के साथ-साथ अन्य अपराधों में मामला दर्ज कराया गया था।

बता दें कि मंगलवार (2 जुलाई, 2024) को राहुल गाँधी के लोकसभा में हिन्दुओं को हिंसक कहने के बाद बजरंग दल और भाजपा युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने अहमदाबाद कॉन्ग्रेस दफ्तर पर विरोध करने का ऐलान किया था। यह सभी कार्यकर्ता जब प्रदर्शन करते हुए कॉन्ग्रेस दफ्तर के पास पहुँचे तो उन पर हमला चालू हो गया। इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, इस वीडियो में देखा जा सकता है कि कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता हाथों में लाठी-डंडे लेकर पुलिस और BJP कार्यकर्ताओं की ओर दौड़ते दिख रहे थे। इस वीडियो में कुछ कार्यकर्ता पथराव भी करते नजर आए। सबसे खास बात ये है कि इस भीड़ के साथ कॉन्ग्रेस विधायक भी मार्च करते दिख रहे थे, तो उनके आसपास के लोग विरोधी पक्ष पर हमला करते दिखे।

एक पुलिसवाले की हवस ने तबाह कर दी वैज्ञानिक की जिंदगी, कमरा बंद कर की जोर-जबर्दस्ती: जिसे केरल पुलिस ने बताया ISRO की जासूसी, उसका नग्न सच CBI ने किया बेनकाब

CBI ने 1994 में ISRO वैज्ञानिक नम्बी नारायणन पर लगे विदेशी जासूस होने के आरोप के मामले में अब तिरुवनंतपुरम स्थित चीफ जुडिशल मजिस्ट्रेट के समक्ष 27 मार्च, 2024 को अंतिम चार्जशीट दायर की, जो बताता है कि कैसे एक IPS अधिकारी ने अपनी हवस के कारण बदले की पूरी साजिश रची और एक देशभक्त वैज्ञानिक को फँसा दिया। केरल का उक्त स्पेशल ब्रांच सर्किल इंस्पेक्टर S विजयन फ़िलहाल बरख़ास्त है। उसने मालदीव की एक महिला मरियम रशीदा को 1994 में 2 बार गिरफ्तार किया था।

इसने लिए उसने गलत इरादों से फर्जी रिपोर्ट दायर की थी। 20 अक्टूबर, 1994 को उन्हें पहली बार गिरफ्तार किया गया था। तब उस पर वीजा की अवधि खत्म होने के बावजूद भारत में रुकने का आरोप था। उसकी पुलिस हिरासत खत्म होने से 1 दिन पहले S विजयन ने उसके व्यक्तिगत संबंधों के आधार पर उन्हें जासूस ठहरा दिया। इस तरह मरियम रशीदा 13 नवंबर को फिर गिरफ्तार की गई। विजयन ने अपनी पहली रिपोर्ट में बताया था कि 13 सितंबर से मरियम रशीदा तिरुवनंतपुरम के एक होटल में रह रही हैं।

पुलिस अधिकारी ने दावा किया था कि विदेशी नागरिकों की रूटीन चेकिंग के दौरान उसे ये पता चला था। कुछ दिनों बाद वो मरियम रशीदा के उस घर में गया, जहाँ वो होटल से निकलने के बाद रह रही थीं, जहाँ उसने पाया कि उनका वीजा 17 अक्टूबर, 1994 को ही एक्सपायर हो चुका है। विजयन का कहना था कि मरियम रशीदा इसका कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाईं कि भारत में रुकने के लिए उनके पास पैसे कहाँ से आ रहे हैं और वो फोन पर किन लोगों से क्या बात करती हैं।

इंस्पेक्टर ने इसे गिरफ़्तारी के लिए पर्याप्त आधार माना। हालाँकि, CBI जाँच में सामने आया कि विजयन ने फर्जी कहानी रची थी। इस कहानी में केवल यही बात सत्य है कि मरियम रशीदा और एक अन्य मालदीवियन महिला फौजिया हसन तिरुवनंतपुरम के उक्त होटल में रुकी हुई थीं। असल में विजयन उनके पास नहीं गया था बल्कि मरियम रशीदा ही उसके सामने पहुँची थीं। 10 अक्टूबर को वो अपने वीजा की अवधि बढ़वाने के लिए पुलिस कमिश्नर के दफ्तर पहुँची हुई थीं।

17 अक्टूबर, 1994 को उनकी श्रीलंका के लिए फ्लाइट थी। कमिश्नर के दफ्तर में ही उसे CI विजयन के केबिन में जाने के लिए कहा गया और विजयन ने उसका वीजा और विमान टिकट अपने पास रखते हुए बाद में आने के लिए कहा। 13 अक्टूबर को S विजयन उसके होटल और 20 अक्टूबर को उसके घर पहुँचा। उसने फौजिया हसन को बाहर जाने के लिए कहा और दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। वहाँ उसने मरियम रशीदा के साथ जोर-जबरदस्ती की।

जब मरियम रशीदा ने विजयन के साथ शारीरिक संबंध बनाने से इनकार कर दिया तो वो वहाँ से जल्दी-जल्दी में निकल कर चला गया। इसे अपना अपमान समझ कर उसने उनका वीजा और टिकट्स नहीं लौटाए। मज़बूरी में मरियम रशीदा को यहाँ रुकना पड़ा और इसी को आधार बना कर विजयन ने उसके खिलाफ मामला चला दिया। उसके बारे में खोद-खोद कर जानकारियाँ निकालने लगा, जिस क्रम में उसे पता चला कि वो ‘लिक्विड प्रोपल्सन सिस्टम्स सेंटर (LPSC)’ के वैज्ञानिक D शशिकुमारन से संपर्क में हैं।

उसने तत्कालीन सिटी पुलिस कमिश्नर VR राजीवन को इसकी रिपोर्ट सौंपी। IB को सूचित किया गया, लेकिन जाँच एजेंसी को कुछ गड़बड़ मिला ही नहीं। फिर पुलिस कमिश्नर ने ISRO के गुप्त राज़ चोरी होने की खबरें मीडिया में प्लांट करवाईं। मरियम रशीदा को दोबारा जिस रिपोर्ट के आधार पर गिरफ्तार किया गया था, उसमें विजयन ने लिखा था कि दोनों महिलाएँ देश-विदेश में कई लोगों से मिल कर भारत की संप्रभुता और अखंडता के खिलाफ काम कर रही हैं, इससे भारत के अपने पड़ोसी देशों के साथ जो संबंध हैं उस पर असर पड़ सकता है।

CBI ने इस रिपोर्ट को भी गलत बताया। विजयन ने अपनी रिपोर्ट का स्रोत बताया ही नहीं। असिस्टेंट पब्लिक प्रॉसिक्यूटर हबीब पिल्लई की सलाह पर उसने दूसरी गिरफ्तार की बात कही, लेकिन हबीब पिल्लई ने नकार दिया कि उन्होंने ऐसी कोई सलाह दी थी। इसका सीधा अर्थ है कि मरियन रशीदा से बदला लेने के लिए फर्जी मामले बनाए गए थे। यहाँ तक कि कुछ IB अधिकारी भी इसमें लिप्त पाए गए। जाँच एजेंसी द्वारा पूछताछ वाली 4 रिपोर्ट CBI के समक्ष आई, किसी पर भी हस्ताक्षर नहीं थे।

केरल पुलिस द्वारा की गई पूछताछ में जो लोगों के बयान थे, उसके भी सिर का पाँव की कोई थाह नहीं थी। यानी, केरल पुलिस की रिपोर्ट भी फर्जी थी। रिपोर्ट में कहा गया कि मरियम और फौजिया ने कबूल किया है कि वो दोनों D शशिकुमारन के अलावा रूसी ख़ुफ़िया एजेंसी Glavkosmos के बेंगलुरु में स्थित एजेंट K चंद्रशेखर से संपर्क में थीं और उन्होंने विदेश में कुछ ‘महत्वपूर्ण जानकारियाँ’ भेजीं, लेकिन, केस डायरी में ये नहीं लिखा था कि वो इन्फॉर्मेशन क्या था जिसे विदेश पहुँचाया गया।

खास बात ये है कि उस दिन दोनों महिलाओं से पूछताछ हुई ही नहीं थी। इन्हीं में से एक हस्ताक्षर-विहीन रिपोर्ट में नम्बी नारायणन का भी नाम था। क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर S जोगेश ने नम्बी नारायणन को गिरफ्तार किया था, लेकिन उसने CBI को बताया कि उसे इंटेररोगेशन रूम के आसपास भी फटकने नहीं दिया जाता था। SIT के मुखिया सीबी मैथ्यूज ने उन्हें बिना हस्ताक्षर वाली रिपोर्ट दी थी, जिसे उन्होंने आगे बढ़ाया। केरल पुलिस को पता था कि सारे बयान और सबूत फर्जी हैं, फिर भी इस मामले में वो आगे बढ़ती रही।

वांचियूर पुलिस थाने में मरियम रशीदा के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। फौजिया हसन को भी गिरफ्तार किया गया था। D शशिकुमारन, K चंद्रशेखर और नम्बी नारायणन के अलावा बेंगलुरु स्थित लेबर कॉन्ट्रैक्टर सुधीर कुमार शर्मा को भी गिरफ्तार किया गया था। अंततः 1994 में ही दिसंबर में CBI ने मामले को हाथ में लिया। अप्रैल 1996 में एर्नाकुलम के CJM के समक्ष दायर रिपोर्ट में ही CBI ने बता दिया था कि आरोपितों के खिलाफ जो आरोप हैं वो साबित नहीं हो रहे।

अप्रैल 1998 में सुप्रीम कोर्ट ने केरल सरकार द्वारा दोबारा जासूसी काण्ड की जाँच वाले निर्णय को रद्द कर दिया। जून 2011 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ओमान चांडी की सरकार ने CBI द्वारा दोषी पाए गए तीन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई से इनकार कर दिया। सिरांबर 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने 50 लाख रुपए मुआवजा देने के लिए केरल सरकार को आदेश दिया। अप्रैल 2021 में जैन कमिटी की रिपोर्ट के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने CBI से केरल पुलिस के 7 और IB के 11 अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा।

जिस राज्य में हिंदुओं की शोभायात्रा पर होता था पथराव, उसी राज्य में अब 600 मंदिरों का होगा पुर्नोद्धार-खाटू श्याम का बनेगा कॉरिडोर: वे कौन हैं जो कहते हैं कि BJP के आने से नहीं बदलते हालात?

राजस्थान की भजनलाल शर्मा की भाजपा सरकार ने अपना पहला पूर्ण बजट पेश कर दिया है। राज्य की उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री दीया कुमारी ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए राज्य का यह बजट पेश किया। इस बजट में महिलाओं और हिन्दू आस्था पर भी विशेष ध्यान रखा गया है।

राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने बुधवार (11 जुलाई, 2024) को यह बजट राजस्थान विधानसभा में पेश किया। इस बजट में कई महत्वपूर्ण योजनाओं और कामों का ऐलान किया गया। इसमें राजस्थान में महिलाओं के विकास को लेकर विशेष प्रावधान किए गए हैं।

बजट में महिलाओं के लिए लखपति दीदी योजना लाने की घोषणा की गई है। इस योजना के तहत राजस्थान में 15 लाख महिलाओं को फायदा पहुँचेगा। इस योजना के अंतर्गत महिलाओं को कौशल विकास से जोड़ा जाएगा। हर साल 3 लाख महिलाओं को इससे सशक्त किया जाएगा।

महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ कर उन्हें कौशल सिखाए जाएँगे। इसके बाद उन्हें अपना काम चालू करने के लिए आसान कर्ज दिलाया जाएगा। यह कर्ज ₹1 लाख का होगा और इसे छोटे उद्योग के लिए दिया जाएगा। यह योजना केंद्र सरकार की है, जिसे अब और आगे बढ़ाया जा रहा है।

राजस्थान सरकार ने कामकाजी महिलाओं के लिए जिलों में हॉस्टल बनाने की घोषणा की है। इसके अलावा बालिका सैनिक स्कूल भी बनाए जाएँगे। गर्भवती महिलाओं के लिए भी मुफ्त जाँच के लिए वाउचर दिए जाएँगे। महिलाओं के अन्य भी कई योजनाओं की घोषणा की गई है।

मंदिरों के लिए विशेष बजट

राजस्थान की भजनलाल सरकार ने राज्य में मंदिरों के पुनरोत्थान के लिए भी विशेष बजट जारी किया है। राजस्थान के इस बजट में ₹100 करोड़ की धनराशि सीकर में स्थित खाटू श्याम मंदिर के विकास के लिए दी गई है। यहाँ देश भर से करोड़ों श्रृद्धालु आते हैं। इस मंदिर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए इन्फ्रा बनाया जाएगा। यहाँ खाटू श्याम कॉरिडोर विकसित होगा, इसे काशी विश्वनाथ और महाकाल कॉरिडोर के तर्ज पर बनाया जाएगा।

इसके अलावा राजस्थान के प्रसिद्ध मंदिर जीनमाता का भी विकास किया जाएगा। शाकम्भरी मंदिर का भी पुनरोद्धार होगा। राज्य के 600 मंदिरों के लिए भी ₹13 करोड़ का बजट पेश किया गया है। मंदिरों में दीपावली और रामनवमी त्योहारों के मौके पर सजावट की जाएगी।

कॉन्ग्रेस ने भगवा पर लगाई थी रोक

2024 लोकसभा चुनाव के दौरान जयपुर शहर लोकसभा क्षेत्र से कॉन्ग्रेस उम्मीदवार प्रताप सिंह खाचरियावास ने वकील मंगल सिंह के माध्यम से जिला मजिस्ट्रेट में लिखित शिकायत दायर कर दावा किया था कि परकोटा के बाजारों में लोकसभा चुनाव 2024 में एक विशेष पार्टी को फायदा पहुँचाने के लिए भगवा ध्वज लगाए गए हैं। उन्होंने इसे आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करार दिया था।

इसके बाद रातोंरात नगर निगम ने झंडे उतरवा दिए थे। हवामहल से बिधायक बालमुकुंदाचार्य ने ने कलक्टर से शिकायत कर ये ध्वज वापस लगाने की माँग की थी। उन्होंने कहा था कि कॉन्ग्रेस को भगवा ध्वज और राम नाम से आपत्ति है। इस मामले में हिन्दू संगठनों ने जम कर विरोध किया था। इससे पहले कॉन्ग्रेस सरकार के दौरान राजस्थान में हिन्दू शोभा यात्राओं पर पथराव भी होता था।