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‘पाकिस्तान बहुत प्यारा है’: बरेली के शाहरुख़ अहमद ने स्टेट्स पर डाला लाहौर वाला बोर्ड, हिन्दू संगठनों ने की कार्रवाई की माँग तो लॉक की फेसबुक प्रोफाइल

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में पाकिस्तान प्रेम का मामला सामने आया है। यहाँ शाहरुख़ अहमद ने अपने सोशल मीडिया स्टेट्स पर पाकिस्तान के शहर लाहौर की तस्वीर डाली। इसी स्टेट्स में पाकिस्तान का झंडा भी लगा है। साथ में कैप्शन के तौर पर पाकिस्तान को बहुत प्यारा बताया गया है। रविवार (7 जुलाई 2024) को हिन्दू संगठन के सदस्यों ने इस पोस्ट पर आपत्ति जताते हुए कार्रवाई की माँग उठाई है। पुलिस ने संज्ञान ले कर जाँच शुरू कर दी है।

यह मामला बरेली जिले के थाना क्षेत्र शीशगढ़ का है। रविवार को बरेली के विश्व हिन्दू परिषद कार्यकर्ता हिमांशु पटेल ने अपने X हैंडल से शाहरुख़ अहमद की शिकायत की है। शिकायत में उन्होंने कहा है कि गाँव जाफ़रपुर में मोहम्मद शरीफ का बेटा शाहरुख अहमद ने फेसबुक पर एक वीडियो शेयर की है। इस वीडियो को पाकिस्तान समर्थक बताते हुए कहा गया कि उसमें ‘पाकिस्तान बहुत प्यारा है’ लिखा गया है। हिमांशु का आरोप है कि बरेली के खुराफातियों में सुधार नहीं हो रहा है।

हिमांशु पटेल ने जो वीडियो शेयर की है उसमें एक व्यस्त सड़क पर कई गाड़ियाँ दिख रहीं हैं। सामने हरे रंग के बोर्ड पर इंग्लिश और उर्दू में लाहौर लिखा हुआ है। तस्वीर के बीचोंबीच पाकिस्तान का झंडा छपा हुआ है। कैप्शन के तौर पर बड़े अक्षरों में ‘पाकिस्तान बहुत प्यारा है’ लिखा गया है। पाकिस्तान शब्द को खासतौर पर बोल्ड कर के हरे रंग से रंगा गया है। ऑपइंडिया से बात करते हुए हिमांशु पटेल ने बताया कि उनके द्वारा शिकायत करने के बाद आरोपित ने अपनी फेसबुक प्रोफ़ाइल लॉक कर ली है।

हिमांशु पटेल का कहना है कि अगर पुलिस ने अपनी तरफ से संज्ञान ले कर कार्रवाई नहीं की तो बाकायदा शिकयत दे कर आरोपित के खिलाफ एक्शन की माँग की जाएगी। उन्होने हमें बताया कि पाकिस्तान परस्त शाहरुख़ के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की गंभीर धाराओं में FIR दर्ज कर के कार्रवाई होनी चाहिए। हालाँकि, बरेली पुलिस ने इस शिकायत का संज्ञान ले लिया है। रविवार को पुलिस ने अपने आधिकारिक हैंडल से बताया है कि शीशगढ़ के थाना प्रभारी को जरूरी कानूनी कार्रवाई के निर्देश दे दिए गए है।

‘नदिया में हूँ, आओ पकड़ लो’: TMC सांसद महुआ मोइत्रा की दिल्ली पुलिस को गीदड़-भभकी, महिला आयोग की अध्यक्ष पर ‘पाजामे’ वाली आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद FIR दर्ज

बदजुबानी के लिए चर्चित तृणमूल कॉन्ग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा की मुश्किलों में इजाफा हुआ है। सोशल मीडिया के X (पूर्व ट्विटर) प्लेटफॉर्म पर आपत्तिजनक कमेंट करने के आरोप में उन पर FIR दर्ज कर ली गई है। शुक्रवार (5 जुलाई 2024) को हुई शिकायत के बाद दिल्ली पुलिस द्वारा यह FIR भारतीय न्याय संहिता की धाराओं में दर्ज की गई है। महुआ मोइत्रा पर राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्षा रेखा शर्मा पर अशोभनीय कमेंट करने का आरोप है। मामले की जाँच दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल कर रही है। FIR के बाद महुआ मोइत्रा ने दिल्ली पुलिस को खुद को गिरफ्तार करने के लिए कहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक महिला आयोग की तरफ से शुक्रवार को दिल्ली पुलिस में तहरीर दी गई थी। तहरीर में बताया गया था कि तृणमूल कॉन्ग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने अपने X हैंडल पर राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्षा रेखा शर्मा के खिलाफ अशोभनीय बाते लिखीं हैं। गुरुवार को किए गए इस ट्वीट में महुआ मोइत्रा ने रेखा शर्मा के हाथरस भगदड़ वाले घटनास्थल पर पहुँचने को ले कर टिप्पणी की थी। तब शेयर हुए एक वीडियो में रेखा शर्मा के पीछे किसी व्यक्ति को छाता ले कर चलते देखा गया था।

इस वीडियो पर एक X यूजर ने सवाल किया था कि रेखा शर्मा अपना छाता खुद ले कर क्यों नहीं चल सकतीं। इस कमेंट के जवाब में महुआ मोइत्रा ने लिखा, “वह (रेखा शर्मा) अपने बॉस का पजामा संभालने में बहुत बिजी हैं।” शुक्रवार को राष्ट्रीय महिला आयोग ने इसे आपत्तिजनक मानते हुए भारतीय न्याय संहिता के सेक्शन 79 के तहत कार्रवाई के योग्य माना था। दिल्ली पुलिस में शिकायत शिकायत देते हुए तब कार्रवाई की रिपोर्ट 3 दिनों में तलब की गई है।

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल इस मामले की जाँच कर रही है। खुद पर FIR दर्ज होने के बावजूद महुआ मोइत्रा के तेवर ज्यों के त्यों रहे। उन्होंने राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) के ट्वीट को Quote कर के दिल्ली पुलिस से खुद को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने के लिए कहा है। खुद को पश्चिम बंगाल के नादिया में बताते हुए महुआ मोइत्रा ने कहा है कि वो अपना छाता खुद ले कर चल सकती हैं।

पाबंदियों से तंग आकर ज़ीनत ने अपनाया हिन्दू धर्म, ‘सीमा कश्यप’ बन मुनेश कुमार से रचाई शादी: गोमूत्र पीकर किया शुद्धिकरण

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में एक और मुस्लिम लड़की ने घर वापसी की है। यहाँ जीनत (बदला हुआ नाम) ने हिन्दू धर्म अपना लिया है। जीनत अब मुनेश कुमार की धर्मपत्नी बन चुकी हैं। शादी के बाद दुल्हन ने नाम सीमा कश्यप रखा है। अब उन्होंने बरेली के अगत्स्य मुनि आश्रम में वैदिक विधि-विधान के साथ अग्नि को साक्षी मान कर विवाह किया। विवाह के दौरान लड़की ने हिंदू देवी-देवताओं की जयकार के साथ पूजन-हवन किया। यह विवाह बुधवार (3 जुलाई 2024) को सम्पन्न हुआ है।

घर-वापसी करने वाली लड़की मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले की रहने वाली है। लगभग 1 साल से उनका अफेयर मुनेश कुमार से चल रहा था। मुनेश बरेली जिले के निवासी हैं। वह मुरादाबाद अक्सर अपनी रिश्तेदारी में जाते थे। इसी रिश्तेदारी के पड़ोस में 26 वर्षीया लड़की का घर है। शुरुआत में दोनों में थोड़ी-बहुत बातें हुईं। कुछ दिनों में दोनों के मोबाइल नंबर बँट गए। आपस में बात करते हुए दोनों ने एक दूसरे से प्यार कर लिया और शादी करने का निर्णय ले डाला।

लड़की की अम्मी अब दुनिया में नहीं हैं। उनके अब्बा को ये रिश्ता रास नहीं आया। बात नाते-रिश्तेदारी में भी फैल गई तो ज़ीनत पर तमाम तरह की पाबंदियाँ डाल दी गईं। फोन आदि चलाने पर भी रोक लगा दी गई। जीनत के लिए कोई मुस्लिम लड़का ही देखा जाने लगा था। हालाँकि इन तमाम प्रताड़नाओं के बावजूद जीनत मुनेश से ही शादी करने की जिद पर कायम रहीं। इधर लड़की के प्रेमी मुनेश कुमार ने अपनी तरफ से शादी की कोशिशें जारी रखीं। उनके परिचितों के माध्यम से उन्हें बरेली के अगत्स्य मुनि आश्रम का पता मिला।

बुधवार (3 जुलाई) को जीनत जैसे-तैसे घर से निकल पाईं। रास्ते में उन्हें मुनेश मिले। दोनों एक साथ अगत्स्य मुनि आश्रम पहुँचे। यहाँ के पुजारी पंडित के के शंखधर ने दोनों के कागजात चेक किए। बालिग़ हो चुकी जीनत ने यह शादी और घर वापसी अपनी मर्जी से होना बताया। उन्होंने इसका एक शपथ पत्र भी दिया। आखिरकार पंडित के के शंखधर ने दोनों जीनत और मुनेश का विवाह वैदिक विधि-विधान से करवाया। जीनत ने गंगाजल और गोमूत्र पी कर अपना शुद्धिकरण किया।

घर-वापसी के बाद उन्होंने अपना नाम सीमा कश्यप रख लिया है। शादी बात जीनत अपने पति के साथ ससुराल चली गईं हैं।

जानबूझकर भीड़ के बीच से निकाली गई सूरजपाल की गाड़ी, हाथरस पुलिस ने बताया: भोले बाबा के वकील बोले- ज़हरीले स्प्रे से हुई घटना

उत्तर प्रदेश के हाथरस में हुई भगदड़ में 121 लोगों की मौत के मामले में हर रोज नए खुलासे हो रहे हैं। नारायण हरि साकार उर्फ भोले बाबा उर्फ सूरजपाल के वकील एपी सिंह ने दावा किया है कि श्रद्धालुओं में कुछ लोगों के पास जहरीले स्प्रे थे। उन्होंने वहाँ पर इस्तेमाल किया तो लोगों को साँस लेने में दिक्कत हुई और फिर भगदड़ मची। यह बात भी सामने आई है कि घटना के दिन जानबूझकर श्रद्धालुओं के भीड़ के बीच से सूरजपाल की गाड़ी निकाली गई थी।

सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता एपी सिंह ने कहा कि हाथरस हादसे के जरिए नारायण हरि के सत्संग को बदनाम करने की साजिश की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि सत्संग के दौरान 10 से 15 अज्ञात लोगों ने कमर पर जहरीला नशीला स्प्रे बाँधकर लोगों के ऊपर स्प्रे किया था। इसकी वजह से लोग बेहोश होते रहे और दम घुटने से मौत हुई। उन्होंने चरणरज की वजह से भगदड़ की घटना को नकार दिया।

एपी सिंह के मुताबिक, एक अज्ञात सफेद स्कॉर्पियो और एक काली स्कॉर्पियो पंडाल से कुछ दूरी पर खड़ी थी। घटना के बाद स्प्रे करने वाले लोग भाग गए थे। उन्होंने कहा कि यह बात उन्हें 3-4 लोगों ने बताई है। ये सभी लोग उस दिन घटनास्थल पर मौजूद थे। उन्होंने कहा कि वे इन लोगों के बयान भी एसआईटी और प्रशासन के सामने दर्ज करवाएँगे।

उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के लिए पुलिस और प्रशासन द्वारा अनुमति दी गई थी। इतना ही कार्यक्रम के लिए प्रशासन को नक्शा भी दिया गया था, जिसके आधार पर परमिशन मिली थी। वकील एपी सिंह ने स्थानीय प्रशासन से उस दिन की टोल तक के पास वाले सीसीटीवी संरक्षित करने की माँग की है।

उधर, हाथरस पुलिस का कहना है कि सेवादारों ने जानबूझकर भोले बाबा की गाड़ी को श्रद्धालुओं के भीड़ के बीच से निकाली थी। वे सेवादार जानते थे कि अगर ऐसा हुआ तो बाबा चरणरज के लिए श्रद्धालुओं में भगदड़ मच सकती है। इसके बावजूद उन्होंने ऐसा किया। पुलिस इस ऐंगल से मामले की जाँच कर रही है कि किसी के कहने पर तो सेवादारों ने जानबूझकर ऐसा तो नहीं किया था।

दरअसल, पूछताछ में यह बात भी सामने आई है कि मुख्य सेवादार देवप्रकाश मधुकर के संपर्क में एक राजनीतिक दल था। इतना ही नहीं, प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी इस बात की आशंका जता चुके हैं कि यह साजिश हो सकती है। इसके बाद पुलिस और SIT इस मामले की प्रमुखता से जाँच कर रही है। इसके साथ ही इसके फंडिंग के स्रोतों की भी जाँच की जा रही है।

नेता के बेटे ने स्कूटी सवार महिला को कुचल कर मार डाला, 100 मीटर तक बोनट पर घसीटा: पिता हिरासत में, आरोपित कार लेकर फरार

महाराष्ट्र के मुम्बई से हिट एन्ड रन का मामला सामने आया है। यहाँ BMW चला रहे व्यक्ति ने एक स्कूटी सवार महिला को टक्कर मार दी। दुर्घटना में महिला की मौत हो गई है। BMW मिहिर शाह नाम का व्यक्ति चला रहा था जो एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के पदाधिकारी का बेटा बताया जा रहा है। घटना रविवार (7 जुलाई, 2024) की है। पुलिस ने केस दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना मुंबई के वर्ली इलाके की है। यहाँ के कोलीवाड़ा इलाके के रहने वाले प्रदीप मछली बेच कर अपने परिवार को चलाते हैं। उनकी पत्नी कावेरी इस कारोबार में उनका हाथ बँटाती थीं। रविवार को पति-पत्नी स्कूटी से मछली खरीदने मंडी में गए थे। यहाँ से लौटते हुए एक तेज रफ़्तार BMW ने उनकी स्कूटी को जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में पति-पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गए जिन्हे अस्पताल में भर्ती करवाया गया। यहाँ पर कावेरी ने दम तोड़ दिया जबकि प्रदीप का गंभीर हालत में इलाज चल रहा है।

पुलिस ने केस दर्ज कर के मामले की जाँच शुरू कर दी है। जाँच में निकल कर आया है कि हादसे के समय कार मिहिर शाह नाम का एक व्यक्ति चला रहा था। कार की स्पीड तय मानक से काफी ज्यादा थी। टक्कर लगने से कावेरी लगभग 100 मीटर तक कार की बोनट पर ही लटकी रह गईं। इसके बावजूद भी मिहिर ने कार नहीं रोकी। मिहिर शाह के पिता राजेश शिवसेना एकनाथ शिंदे गुट के पदाधिकारी हैं। घटना के बाद मिहिर शाह कार ले कर फरार हो गया।

पुलिस ने मिहिर के पिता राजेश शाह को हिरासत में ले लिया है। BMW राजेश के ही नाम पर रजिस्टर्ड है। फरार मिहिर की तलाश की जा रही है।

पाकिस्तान-ईरान ने 12000 अफगानों को देश से निकाला: CAA में मुस्लिमों को जोड़ने की पैरवी कर रहा था भारत का जो गिरोह, वो इस्लामी मुल्कों की करनी पर चुप

ईरान और पाकिस्तान ने हाल ही में लगभग 12,000 अफगान प्रवासियों को अपने-अपने देशों से निर्वासित किया है। अफगानिस्तान के शरणार्थी और प्रत्यावर्तन मंत्रालय ने बताया कि सभी अफगान वापस अफगानिस्तान लौट आए हैं। हालाँकि, भारत में पड़ोसी देशों के मुस्लिमों को लेकर चिंतित रहने वाले कथित सेक्युलर इस पर चुप्पी साधे हुए हैं। एक इस्लामी देश में ही मुस्लिमों के लिए जगह नहीं है।

ऐसा नहीं है कि ऐसा सिर्फ अफगानिस्तान के लोगों के साथ हो रहा है। जो काम पाकिस्तान अफगान लोगों के साथ करता है, वही काम अरब देश पाकिस्तान-बांग्लादेश या एशिया के अन्य इस्लामी देशों के साथ करते हैं। ऐसे में समय में देश के ये सेक्युलर जमात चुप्पी साध लेता है। इनके पास कहने को ना शब्द होते हैं और ना ही इसके पीछे देने के लिए तर्क होता है।

देश में नागरिकता संशोधन कानून लागू हुआ तो यही जमात पड़ोसी देशों के मुस्लिमों को लेकर चिंतित हो रहे थे। उनके लिए ऐसे तर्क दे रहे थे, जैसे मानवाधिकार के ये कितने बड़े रहनुमा हों। सायमा, राना अयूब, आरफा खानुम शेरवानी जैसे लोग CAA का यह कहकर विरोध कर रहे थे, जब भारत पड़ोसी इस्लामी मुल्कों के पीड़ित हिंदू, बौद्ध, जैन, सिख, ईसाई आदि को अपने यहाँ आश्रय दे सकता है तो मुस्लिमों को क्यों नहीं।

अब जब पाकिस्तान अफगानिस्तान के मुस्लिमों को अपने यहाँ से जबरन निकाल रहा है तो ये जमात ना ही पाकिस्तान की भर्त्सना कर पा रहा है और ना ही ईरान का। एक इस्लामी मुल्क जब अन्य इस्लामी मुल्क के गरीब, पीड़ित मुस्लिमों को ही आश्रय नहीं दे रहा है तो भारत जैसे विविधता वाले देश से इस तरह की माँग किस तरह पर की जा सकती है, जबकि हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध जैसे धर्मों के लोगों को आश्रय लेने के लिए दुनिया में और कहीं जगह नहीं है।

चुनिंदा और अपनी सहूलियत के हिसाब से मुद्देे को रंग देने के कारण ही आज भारत में मुस्लिमों से जुड़े हर सवाल पर लोगों को संदेह होने लगा। इस संदेह में आरफा-सायमा जैसे नैरेटिव गढ़ने वालों का बहुत बड़ा योगदान है। वर्ना भारत में तो दुनिया भर के सताए हुए लोगों के आश्रय देने की प्राचीन परंपरा रही है। चाहे वो पारसी हों, यहूदी हों या यहीद के शासन काल के मुस्लिम ही क्यों ना हों, जिन्हें सिंध के राजा दाहिर ने अपने यहाँ शरण दिया था।

भारत में शरण पाने के बाद सारे समुदाय एवं पथ के लोग भारत की संस्कृति में समाहित हो गए, रच-बस गए लेकिन इस्लाम हमेशा खुद को अलग-थलग रखा। वह खुद को विशेष महसूस कराने के दायित्व दूसरे पर डालता रहा। परिणाम ये रहा है कि वे स्थानीय समुदाय के मन-मस्तिष्क में ऐसे लोगों की वजह से अपना स्थान नहीं बना पाए, जो आज के सेक्युलर बिरादरी जैसे कारामात उस दौरान के कुछ कथित लोग भी करते रहे होंगे।

इसमें आखिरकार नुकसान गरीब मुस्लिम वर्ग का ही हुआ। लेकिन, इन लोगों के लिए ये कभी मुद्दा रहा ही नहीं कि गरीब मुस्लिमों के बीच शिक्षा और विकास को तवज्जो दी जाए। अगर ऐसा होता तो ये सीरिया, लेबनान, इराक जैसे हिंसा ग्रस्त मुल्कों के आवाज उठाते। वहाँ के आतंकियों और सरकारों को कोसते। विश्व समुदाय के लोगों से उनके बीच शांति बहाल करने की कोशिश करते। हालाँकि, ऐसी माँग करते हुए उन्हें कभी देखा नहीं गया।

जब ईरान और पाकिस्तान की सरकारों ने अफगानिस्तान के हिंसा प्रभावित लोगों को देश से बाहर निकाल दिया तो हैदराबाद के सांसद ओसदुद्दीन ओवैसी भी चुप्पी साधे बैठे हैं। वे शपथ ग्रहण करते हुए जय फिलिस्तीन के नारे लगा सकते हैं, पाकिस्तान के मुस्लिमों को CAA के तहत भारत में बसने के अधिकार की माँग कर सकते हैं लेकिन अफगानिस्तान के अपने मुस्लिम भाइयों के लिए आवाज नहीं उठा सकते।

ये सारा कुछ इस्लाम की वैश्विक भाईचारा का नतीजा है कह लें, देश की राजनीति में मुस्लिमवाद को बढ़ावा देने की कोशिश, ताकि खुद को पीड़ित शोषित दिखाकर विशेष रियायतों की माँग की सके। दुनिया को यह बताया जा सके कि देखो कि भारत किस तरह मुस्लिमों की अनदेखी करता है। इस तरह नैरेटिव ग़ढ़ने में यहाँ का बुद्धिजीवी, राजीनतिक और समाज का एक बड़ा तबका आक्रामक ढंग से काम कर रहा है।

ईरान और पाकिस्तान द्वारा अफगान शरणार्थियों को जबरन वापस भेजे जाने के बाद अफ़गानिस्तान में मानवीय संकट और भी बढ़ गया है। इनमें से कई निर्वासित अफ़गानिस्तान लौटने के बाद अनिश्चित भविष्य का सामना कर रहे हैं, क्योंकि देश आर्थिक अस्थिरता और बुनियादी सेवाओं की कमी का सामना कर रहा है। इसके अलावा, इन्हें नस्लीय भेदभाव एवं उत्पीड़न का सामना करना पड़ सकता है।

दुनिया भर के मानवाधिकार समूहों और संगठनों ने सामूहिक निर्वासन की निंदा की है और अफ़गान निर्वासितों की सुरक्षा और भलाई के बारे में चिंता व्यक्त की है। अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार समूहों ने कहा कि इस तरह की कार्रवाइयाँ अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करती हैं। इसके तहत शरणार्थियों को ऐसे देशों में जबरन वापस लौटने पर प्रतिबंध है, जहाँ उन्हें उत्पीड़न का सामना करना पड़ सकता है।

देश दुनिया के तमाम मानवाधिकार संगठनों द्वारा पाकिस्तान और ईरान सरकार की निंदा की जा रही है, लेकिन भारत के बुद्धिजीवी खामोश हैं। उन्हें इससे फर्क नहीं पड़ रहा है कि इन देशों से वापस भेजे गए अफगान प्रवासी किस तरह अपना जीवन यापन करेंगे। ये भी पता नहीं है कि उनके साथ उनके देश में किस तरह का सलूक होगा।

इस तरह आरफा-सायमा और ओवैसी जैसे लोगों के लिए दो मुस्लिम देशों के बीच उनका आंतरिक मामला बन जाता है, जबकि वे भारत से चाहते हैं कि बांग्लादेशी मुस्लिम ही नहीं, म्यांमार के रोहिंग्या, पाकिस्तान के शिया-सुन्नी और अफगानिस्तान के मुस्लिमों को भी भारत अपने यहाँ शरण दें।

भारत में शरिया लागू करना चाहता था जो आतंकी लतीफ़, उसे मार गिराने वाले राजेंद्र प्रसाद जाट को ‘शौर्य चक्र’: कश्मीरी हिन्दू राहुल और TikToker आमरीन की कर दी थी हत्या

राष्ट्रपति भवन में शुक्रवार (5 जुलाई, 2024) को रक्षा अलंकरण समारोह-2024 का आयोजन हुआ। इस दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश की रक्षा के लिए अदम्य साहस दिखाने वाले वीरों अथवा उनके परिजनों को वीरता पुरस्कार प्रदान किए। ऑपइंडिया ने इस अवसर पर शौर्य चक्र पाए भारतीय सेना के मेजर राजेंद्र प्रसाद जाट से बातचीत की। मेजर राजेंद्र ने कश्मीर में लश्कर-ए-तैय्यबा के मोस्ट वॉन्टेड 10 लाख रुपए के इनामी आतंकी लतीफ़ राठर को उसके साथियों सहित मुठभेड़ में मार गिराया था।

भारत में शरिया कानून लागू करने की सोच वाले आतंकी राठर ने ही कश्मीर में रील बनाने वाली लड़की आमरीन की हत्या की थी।

मेजर राजेंद्र प्रसाद मूल रूप से राजस्थान के रहने वाले हैं। उनके परिवार और रिश्तेदारियों में कई लोग सेना में शामिल हो कर देश की सेवा कर रहे हैं अथवा पूर्व सैनिक हैं। मेजर राजेंद्र के मुताबिक, बचपन से ही उन्होंने अपने घर-परिवार में देश के लिए मरने-मिटने का जज्बा देखा जो उनको भी सेना में भर्ती होने के लिए प्रेरित कर गया। भारतीय सेना की डोगरा रेजिमेंट के मेजर राजेंद्र प्रसाद ने हमें बताया कि शौर्य चक्र मिलने से उनका परिवार, गाँव और पूरा देश गौरवान्वित है, ऐसे में उनको ख़ुशी होना स्वाभाविक है। फिलहाल मेजर राजेंद्र की तैनाती हैदराबाद में है।

सरेंडर के लिए कहा तो आतंकी बरसाने लगे थे गोलियाँ

जिस वीरता के लिए मेजर राजेंद्र को शौर्य चक्र मिला तो मुठभेड़ अगस्त 2022 में कश्मीर के बडगाम इलाके में हुई थी। तब रात लगभग 10 बजे सुरक्षा बलों को खानसाहिब इलाके के वाटरहेल में कुछ आतंकियों की मौजूदगी के इनपुट मिले थे। सूचना मिलते ही राष्ट्रीय रायफल्स की 62वीं बटालियन में तैनात मेजर राजेंद्र प्रसाद अपनी टुकड़ी के साथ निकल पड़े। घटनास्थल पर पहुँच कर सूचना सही मिली। आतंकियों को घेर लिया गया और सरेंडर के लिए चेताया गया।

जवाब में आतंकियों ने गोलियाँ बरसानी शुरू कर दी। आखिरकार सुरक्षा बलों को जवाबी फायरिंग करनी पड़ी।

अँधेरी रात और जंगली क्षेत्र में हुई थी मुठभेड़

ऑपइंडिया ने मेजर राजेंद्र प्रसाद से उस मुठभेड़ के बारे में बात की। उन्होंने हमें बताया कि अँधेरी रात में दृश्यता न के बराबर थी। मुठभेड़ स्थल भी गाँव के बाहरी हिस्से में था जहाँ से जंगल शुरू होता था। घने पेड़ों के बीच एक घर में आतंकी छिपे हुए थे। छिपते और सँभाल कर सुरक्षा बलों ने घर को चारों तरफ से घेर लिया। कुछ ही देर में आतंकियों को अपने घिरे होने की जानकारी मिल गई। उन्होंने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। जवानों ने पेड़ की ओट में खुद को बचाया और जवाबी गोलीबारी करने लगे।

आतंकी भी मारने थे और नागरिक भी बचाने थे

मेजर राजेंद्र प्रसाद ने हमें आगे बताया कि चूँकि आतंकी एक घर में छिपे थे इसलिए उनकी टुकड़ी को बहुत सँभल कर लड़ना पड़ रहा था। जवानों को ये नहीं पता था कि घर में कितने आतंकी छिपे हैं। साथ ही इस बात की भी पुष्टि नहीं हो पा रही थी कि कहीं आतंकियों ने किसी को बंधक तो नहीं बना लिया है। ऐसे में बेहद संभल कर लड़ते हुए सुबह हो गई। पूरी रात आतंकियों की तरफ से गोलियाँ बरसती रहीं। हालाँकि, इस दौरान मेजर राजेंद्र की टुकड़ी ने घेराबंदी कमजोर नहीं होने दी जिसकी वजह से आतंकी घर से निकल कर भाग नहीं पाए।

20 घंटे से अधिक चली थी मुठभेड़, 3 आतंकी ढेर

बकौल मेजर राजेंद्र प्रसाद अगले दिन सुबह होने पर सुरक्षा बलों को लगभग सटीक जानकारी हुई कि घर में छिपे आतंकियों की तादाद 3 थी। उनके पास भारी मात्रा में गोला-बारूद था। वो सभी घर की अलग-अलग लोकेशन से गोलियाँ बरसा रहे थे। आखिरकार मेजर रजेन्द्र ने खुद को आगे रखते हुए घर की तरफ मूव किया। गोलियों की बौछार से खुद और अपने साथियों को बचाते हुए वो घर के पास पहुँच गए। इस बीच कई गोलियाँ उन्हें और उनके साथियों को छू कर निकल गईं। घेराबंदी कड़ी होती देख कर तीनों आतंकियों ने हमला तेज कर दिया।

इन तमाम खतरों को उठाते हुए आखिरकार एक-एक कर के मेजर राजेंद्र के नेतृत्व में तीनों आतंकियों का खात्मा हुआ। रात लगभग 10 बजे से शुरू हुई मुठभेड़ अगले दिन शाम लगभग 8 बजे खत्म हुई। तीनों आतंकियों के शव घर और उसके आसपास अलग-अलग लोकेशन पर पड़े पाए गए थे। इन सभी के पास घातक हथियार और गोला-बारूद बरामद हुए थे। तीनों आतंकी लश्कर ए तैयबा के सदस्य थे। ये सभी सेना और आम नागरिकों पर हुए कई आतंकी हमलों में शामिल थे।

साथ ही इनकी तैयारी बड़े हमले की भी थी लेकिन उस से पहले ये मेजर राजेंद्र प्रसाद और उनकी टीम द्वारा ढेर कर दिए गए।

आतंकियों में आमरीन का कातिल लतीफ राठर भी

मेजर राजेंद्र प्रसाद जाट और उनकी टीम द्वारा जिन 3 आतंकियों को ढेर किया गया था उसमें कश्मीर का मोस्ट वॉन्टेड लतीफ़ राठर भी शामिल था। लतीफ़ राठर लश्कर-ए-तैयबा का सक्रिय आतंकी था जिसने मई 2022 में आमरीन नाम की कश्मीरी लड़की की हत्या सिर्फ इसलिए कर दी थी क्योंकि वो सोशल मीडिया पर रील बनाती थी। लतीफ़ भारत में शरिया कानून लागू करने की विचारधारा रखता था और आमरीन के काम को गैर इस्लामिक मानता था।

इसके अलावा लतीफ़ राठर ने कई सैन्य शिविरों और कश्मीरी हिन्दुओं पर आतंकी हमलों को लीड किया था। इन घटनाओं में चर्चित राहुल भट हत्याकांड भी शामिल है।

देश की बेहतरी के लिए काम करें युवा

मेजर राजेंद्र प्रसाद जाट ने ऑपइंडिया के माध्यम से देश के युवाओं को संदेश दिया है। उनका कहना है कि आज का युवा भले ही किसी भी क्षेत्र में कैरियर बनाए, पर वो देश की बेहतरी के लिए प्रयासरत रहे। मेजर राजेंद्र के मुताबिक सशस्त्र बलों के तौर पर सेना के अलावा अर्धसैनिक बल और पुलिस विभाग भी दिन-रात राष्ट्र की सुरक्षा के लिए प्रयासरत है। भारत की अभेद्य सीमाओं के साथ मजबूत आंतरिक तंत्र का श्रेय मेजर राजेंद्र ने इन सभी के सामूहिक प्रयासों को दिया।

मुस्लिम जिम ट्रेनर के साथ पत्नी का अवैध संबंध, पति ने बच्चे सहित खुद की ली जान, मर गई बीवी भी: मिला लव जिहाद का केस वाला सुसाइड लेटर

गुजरात के भरुच में लव जिहाद से परेशान एक युवक परिवार मौत के मुँह में समा गया। यहाँ एक महिला ने आत्महत्या कर ली, तो उसके पति ने बेटे को गला दबा के मार डाला और खुद रेल के आगे कूद कर जान दे दी। इस तरह से एक साथ कुछ ही समय के अंतर में 3 लोगों का परिवार खामोश हो गया।

सुसाइड करने वाले युवक ने अपने माता-पिता को लिखे पत्र में कहा है कि राजा शेख को नहीं छोड़ना है, उसने लव जिहाद किया है। साथ ही कहा है कि मुस्लिम लड़के हिंदू लड़कियों को फँसाने के लिए जिम ट्रेनर बन जाते हैं।

जानकारी के मुताबिक, भरुच के भोलाव कॉलोनी में सीनियर सेक्शन इंजीनियर जतिन मकवाना ने दो दिन पहले आत्महत्या कर ली थी। जतिन ने पहले अपने बेटे को मार डाला, उसके बाद सुनवाड़ी के पास रेलवे ट्रैक पर कूद कर आत्महत्या कर लिया। पत्नी ने फाँसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी, तो जतिन ने भी अपनी जान दे दी।

एक ही दिन में तीन शव मिलने से सनसनी फैल गई थी, जिसकी असली वजह अब सामने आई है। पता चला है कि जतिन ने एक सुसाइड नोट लिखा है। उसी सुसाइड नोट में लव जिहाद की जानकारी सामने आई है, साथ ही जिम ट्रेनर राजा शेख की कारस्तानी भी।

जतिन ने 22 जून को अपने पिता को लिखी चिट्ठी में पत्नी के अवैध संबंधों के बारे में बताया था। साथ ही ये भी बताया कि जिम में ट्रेनिंग दे रहे मुस्लिम युवक एक हिंदू लड़की को बहला-फुसला कर अपने साथ ले गए थे। इसमें जतिन ने लिखा है कि राजा शेख के खिलाफ लव जिहाद का मामला दर्ज किया जाए। जतिन ने यह भी आरोप लगाया कि राजा शेख की माँ ने भी पत्नी से बात की थी। इस मामले में पत्नी की माँ भी बराबर दोषी है।

जतिन ने सुसाइड नोट में लिखा, “पत्नी ने मेरी, (बेटे का नाम) और हम सबकी जिंदगी बर्बाद कर दी है, लेकिन राजा शेख को मत छोड़ना, (उसके खिलाफ) लव जिहाद का मामला दर्ज करो। ये उसका काम है। आज मेरी जिंदगी बर्बाद हुई है, कल किसी और की होगी।”

‘मुस्लिम युवक खुद को जिम ट्रेनर बताकर हिंदू लड़कियों को फँसाते हैं’

जतिन ने पत्र में आगे लिखा, ”जिम में भी ऐसा ही बिजनेस चल रहा है। मुस्लिम युवक हिंदू लड़कियों को फँसाने के लिए जिम ट्रेनर बन जाते हैं और उनकी जिंदगी बर्बाद कर देते हैं। मेरी आत्मा को शांति मिले इसके लिए राजा शेख को सबसे बड़ी सजा मिलनी चाहिए और जिम में चल रहे इस तरह के धंधे को बंद करना चाहिए। राजा शेख ने ही मेरी और पत्नी की जिंदगी बर्बाद कर दी है।” जतिन ने कहा कि ये बात समाज तक पहुँचनी जरूरी हैं।

इस मामले में फिलहाल भरुच रेलवे पुलिस और अंकलेश्वर बी डिविजन पुलिस मामले की जाँच कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, राजा शेख से भी पूछताछ की जाएगी। पुलिस ने आत्महत्या के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि शुरुआती दौर में पता चला कि पत्नी ने आत्महत्या की है, फिर पति ने बेटे की हत्या कर उसे ट्रेन से नीचे गिरा दिया। फिलहाल एफएसएल टीम जाँच कर रही है।

शंकराचार्य करेंगे पूजा, गजपति लगाएँगे झाड़ू, राष्ट्रपति लेंगी आशीर्वाद… पुरी में शुरू हुई भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा, बहन सुभद्रा और भाई बलराम के साथ निकले महाप्रभु

आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीय के अवसर पर रविवार (7 जून, 2024) को महाप्रभु भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा ओडिशा के पुरी में शुरू हो गई है। दशमी तिथि तक, यानी 10 दिनों तक भगवान अपने भक्तों के बीच में होते हैं। इस दौरान रथ पर उनकी बहन सुभद्रा और बड़े भाई बलराम भी सवार होते हैं। गुंडीचा मंदिर तक ये यात्रा 10 दिनों में तय की जाती है। भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के दर्शन मात्र से 1000 यज्ञों का फल मिलने की बात कही जाती है।

इस रथयात्रा में सबसे आगे तालध्वज पर बलराम जी चलते हैं, उनके पीछे पद्मध्वज पर माँ सुभद्रा और सुदर्शन चक्र को विराजमान किया जाता है। सबसे पीछे गरुड़ ध्वज पर स्वयं भगवान जगन्नाथ चलते हैं। स्कन्द पुराण में भी रथयात्रा का विवरण है, बताया गया है कि रथ के पीछे कीर्तन करते हुए चलने वाले भक्त पुनर्जन्म के चक्र से मुक्त हो जाते हैं। कहा जाता है कि राजा इन्द्रद्युम्न ने इस परंपरा को शुरू किया था। भगवान जगन्नाथ के महाप्रसाद में 7 प्रकार के चावल, 4 प्रकार की दाल, 9 तरह की सब्जियाँ और कई प्रकार की मिठाइयाँ परोसी जाती हैं।

हालाँकि, मिठाइयों में शक्कर की जगह गुड़ का इस्तेमाल होता है, मंदिर में आलू, टमाटर और फूलगोभी का भी इस्तेमाल नहीं किया जाता है। रविवार को सिंहद्वार से महाप्रभु की सवारी प्रस्थान करेगी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी इस दौरान रथयात्रा में भगवान का आशीर्वाद लेने पहुँचेंगी। सबसे पहले पुरी मठ के शंकराचार्य रथ का पूजन करते हैं, उसके बाद ओडिशा के महाराज गजपति सोने की झाड़ू से बुहार कर साफ़-सफाई करते हैं। इस बार दिव्यसिंहदेव इस रस्म को पूरा करेंगे।

8 जुलाई, या फिर 9 जुलाई को महाप्रभु की सवारी गुंडीचा मंदिर तक पहुँच जाएगी। 8-15 जुलाई तक वहीं पकवानों का महाप्रसाद उन्हें चढ़ाया जाएगा। रथयात्रा का समापन होने के साथ ही इन्हें वापस मंदिर में ले जाया जाता है’। फ़िलहाल ‘धडी पहांदी’ रस्म निभाई गई है, जिसके तहत प्राचीन वाद्ययंत्रों को ध्वनि गूँजती है। रथों की प्रतिष्ठा पूजा भी कर ली गई है। राजा इन्द्रद्युम्न द्वारा इस परंपरा को शुरू किए जाने की बात पुराणों में वर्णित है।

केरल की सत्ताधारी CPM फिर शुरू करेगी देश का सबसे बड़ा बूचड़खाना: ‘मालाबार मीट’ के लिए मँगाए निवेश, कटेगा भैंसा-बकरा

केरल की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) यानी CPM द्वारा नियंत्रित ब्रह्मगिरी डेवलपमेंट सोसाइटी (BDS) द्वारा संचालित देश से सबसे बड़े बूचड़खाने को पुनर्जीवित की प्रक्रिया तेज हो गई है। BDS ने अपने प्रमुख उद्यम ‘मालाबार मीट’ ब्रांड निजी पूंजी स्वीकार की है। कर्ज तथा निवेशकों एवं कर्मचारियों के विरोध के कारण बीडीएस ने लगभग एक साल पहले मीट संयंत्र बंद कर दिया था।

दरअसल, पशु बाजारों से वध के लिए मवेशियों की खरीद-बिक्री पर राष्ट्रव्यापी प्रतिबंध के बाद BDS ने केरल में बीफ का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बनने की कोशिश की थी। इसके लिए CPM ने भरपूर मदद भी की थी। हालाँकि, कोरोना और राजनीतिक खींचतान के बाद यह कर्ज में डूब गई और आखिरकार मीट प्लांट बंद करना पड़ा था। अब मालाबीर मीट ब्रांड को बचाने की कोशिश की जा रही है।

ऑनमनोरमा ने सूत्रों के हवाले से कहा कि कोट्टयम स्थित फर्म बफेट ब्लूवे प्राइवेट लिमिटेड (BBL) ने BDS में हिस्सेदारी ली है। BBL इस प्लांट के रखरखाव में BDS की मदद करेगी। इसके लिए वह कार्यशील पूँजी जुटाएगी और आवश्यक लाइसेंस प्राप्त करेगी। सूत्रों ने बताया कि मध्य केरल की यह फर्म विदेशी बाजारों में भैंस के मांस के निर्यात में शामिल है।

BDS के COO डॉक्टर बी. सुनील कुमार ने बताया कि इससे केरल में ‘पिंक क्रांति’ होगी। उन्होंने कहा, “निजी भागीदारी के साथ मालाबार मीट ब्रांड को फिर से लॉन्च करने के लिए विस्तृत व्यवस्था की जा रही है। हमने कोट्टयम स्थित कंपनी के साथ समान लाभ-साझाकरण के आधार पर एक समझौता किया है। हम प्लांट की क्षमता के 100% तक उत्पादन बढ़ाने की भी सोच रहे हैं।”

मालाबार मीट अपने मौजूदा फ्रोजन बीफ, मटन और चिकन आइटम में और उत्पाद जोड़ेगा। उन्होंने कहा कि मौजूदा आउटलेट्स को गुणवत्तापूर्ण एवं प्रमाणित ताजा मांस उपलब्ध कराने के लिए सुल्तान बाथरी और कलपेट्टा नगरपालिकाओं सहित स्थानीय प्रशासनिक निकायों द्वारा बातचीत शुरू की गई है। सुनील कुमार ने कहा, “अछूते बाजार स्थान का दोहन करने के लिए ‘ताजा मांस’ और ‘ठंडा मांस’ आपूर्ति श्रृंखला भी बनाई जाएगी।”

BDS में 500 से ज़्यादा शुरुआती निवेशकों हैं, जिनमें से अधिकांश पार्टी के कार्यकर्ता और समर्थक हैं। इन्होंने केरल चिकन और वायनाड कॉफ़ी सहित विभिन्न BDS उपक्रमों में पैसा लगाया है। उन्होंने कृषि क्षेत्र सहित विभिन्न परियोजनाओं में 70 करोड़ रुपए से ज़्यादा का निवेश किया था। हालाँकि, कोविड के कारण BDS का कर्ज़ बढ़कर 100 करोड़ रुपए से ज़्यादा हो गया।

इस दौरान मालाबार मीट को 46 करोड़ रुपए और केरल चिकन प्रोजेक्ट को 26 करोड़ रुपए का घाटा हुआ। दावा यह भी किया जाता है कि CPM के नेताओं के आपसी मतभेद के कारण इस ड्रीम प्रोजेक्ट को बंद करना पड़ा। पूर्व चेयरमैन पी. कृष्ण प्रसाद, जिन्हें पिनाराई विजयन के विरोधी गुट का माना जाता है, को कर्ज बढ़ने के कारण चेयरमैन पद से हटना पड़ा था।

निवेश के साथ ही इस संयंत्र के पूर्व कर्मचारियों को बहाली की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। मीट प्रोसेसिंग यूनिट के 70 से ज़्यादा कर्मचारियों में से 26 को बहाल किया जाएगा। बाकी कर्मचारियों को चरणबद्ध तरीके से भर्ती किया जाएगा। पिछले महीने बंद हुई वायनाड कॉफ़ी प्रोजेक्ट भी कनियम्पट्टा स्थित एक सहकारी संस्था से निवेश के बाद सुधार के दौर में है।

बता दें कि वायनाड स्थित ब्रह्मगिरी डेवलपमेंट सोसाइटी (बीडीएस) देश में सबसे बड़े बहु-प्रजाति बूचड़खाने का मालिक है। कोरोना से पहले इस संयंत्र की प्रतिदिन की क्षमता 45 टन थी। जबकि सालना टर्नओवर 7.5 करोड़ रुपए थी। मालाबार मीट ब्रांड के कई फ्रेंचाइजी भी बाँटे गए थे। इसके साथ ही राज्य सरकार की ओर से किसानों को भैंस के बछड़े दिए गए थे पालने के लिए, ताकि भैंसों की कमी ना हो।

हालाँकि, केंद्र सरकार द्वारा पशुओं के वध से संबंधित नियम बना दिए गए। इसके बाद BDS ने इसमें अवसर खोजा और साल 2017 में BDS ने अगले पाँच साल के भीतर यानी साल 2022 तक राज्य के 6,500 करोड़ रुपए के बीफ बाजार में कम से कम 10% हिस्सेदारी हासिल करने का लक्ष्य रखा था। हालाँकि, कोरोना के कारण यह फेल हो गया।