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पैसा SC/ST ‘कल्याण’ के लिए, लेकिन 37% फंड चुनावी गारंटी पूरा करने में लगाएगी कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार: ₹14,000 करोड़ के ‘कट’ से उबली भाजपा

कॉन्ग्रेस के कर्नाटक में चुनाव जीतने के लिए किए रेवड़ी वादे अब राज्य के दलितों आदिवासियों पर भारी पड़ रहे हैं। राज्य के दलित और आदिवासी समुदाय के कल्याण के लिए दिया जाने वाला पैसा अब कॉन्ग्रेस सरकार की चुनावी गारंटियाँ पूरा करने के लिए लगाया जा रहा है। कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार ने फैसला लिया है कि वह राज्य के दलित-आदिवासियों के दिए गए ₹14,730 करोड़ फंड को अब अपनी गारंटियों में खर्च करेगी।

कर्नाटक की सिद्दारमैया सरकार ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए ₹39,121 करोड़ की धनराशि दलित और आदिवासियों के फंड के रूप में जारी किया था। कर्नाटक में नियमों के अनुसार ऐसा करना आवश्यक है। लेकिन अब कॉन्ग्रेस सरकार ने इसमें से लगभग एक तिहाई फंड काटने का इरादा कर लिया है। इस फंड का उपयोग करके कॉन्ग्रेस अब अपनी चुनावी गारंटियाँ पूरी करेगी। इसको लेकर अब राज्य में विरोध भी हो रहा है। वह पहले भी ऐसा ही कर चुकी है।

राज्य में जीत को कॉन्ग्रेस ने किए थे ‘रेवड़ी’ वादे

2023 में विधानसभा चुनाव जीतने के लिए कॉन्ग्रेस ने पाँच गारंटी दी थी। इन्हें ‘रेवड़ी’ कहा गया था। कॉन्ग्रेस ने 2023 विधानसभा चुनाव में वादा किया था कि सत्ता में आने पर वह हर घर को 200 यूनिट मुफ्त बिजली देगी। इसे गृह ज्योति योजना का नाम दिया गया था। इसके अलावा गृह लक्ष्मी नाम की योजना का भी एक वादा किया गया था। इसके अंतर्गत कॉन्ग्रेस ने वादा किया था कि वह राज्य की महिलाओं को ₹2000 प्रतिमाह देगी।

कॉन्ग्रेस ने कर्नाटक की आर्थिक स्थिति और मुफ्त सुविधाओं के वादों से अर्थव्यस्था पर पड़ने वाले बोझ को दरकिनार करते हुए हर परिवार को 10 किलो अनाज देने का भी वादा किया था, इसे अन्न भाग्य योजना का नाम दिया गया था। कॉन्ग्रेस ने राज्य में महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा का भी वादा किया था। इसके अलावा राज्य के बेरोजगार युवाओं को भी ₹1500 देने की बात कही गई थी। इनमें से कुछ योजनाएँ पूरी तरह से लागू कर दी गई हैं तो कुछ को आंशिक रूप से लागू किया गया है।

कॉन्ग्रेस के इन ‘रेवड़ी’ वादों का असर अब राज्य के खजाने पर दिख रहा है और वह राजस्व बढ़ाने के लिए नई-नई जुगत भिड़ा रही है। वह राज्य की आम जनता को अब नए कर और बढ़े करों से लादना चाह रही है। साथ ही वह कमाई के नए जुगाड़ भी लगा रही है।

भाजपा-DSS आर-पार के मूड में

भाजपा ने कॉन्ग्रेस सरकार के इस फैसले को लेकर उसकी आलोचना की है। भाजपा ने इसे कॉन्ग्रेस का दलित विरोधी कदम बताया है। भाजपा ने इसे फंड का दुरूपयोग बताया है। कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष R अशोका ने लिखा है, “दलित विरोधी कॉन्ग्रेस सरकार ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों के विकास के लिए निर्धारित ₹14,730 करोड़ की राशि को अपनी गारंटी योजनाओं के लिए इस्तेमाल करने का निर्णय लिया है।”

उन्होंने आगे लिखा, “सामाजिक न्याय के स्वयंभू चैंपियन सीएम, आपने वाल्मीकि ST कल्याण बोर्ड में दलितों के ₹187 करोड़ के पैसे लूट लिए, अब आप दलितों के विकास के लिए निर्धारित ₹14,730 करोड़ की राशि को गारंटियों के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं, क्या आपको सत्ता के लालच में दलितों को लूटने में शर्म नहीं आती? दलितों को अपने कल्याण की कीमत पर आपकी गारंटी योजनाओं के लिए क्यों पैसे देने होंगे?”

दलित संघर्ष समिति नाम के संगठन ने भी कॉन्ग्रेस सरकार के इस निर्णय के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया है। दलित संघर्ष समिति ने इस मुद्दे पर कॉन्ग्रेस सरकार का विरोध किया है। उसने इसे कॉन्ग्रेस सरकार का एकतरफा निर्णय बताया है।

पहले भी ले चुकी दलित-आदिवासी का पैसा

कॉन्ग्रेस सरकार ने जुलाई 2023 में राज्य के SC-ST समुदाय के कल्याण के लिए खर्च किए जाने वाले ₹11,000 करोड़ को भी इन गारंटियों के लिए उपयोग करने का फैसला लिया था, जिसके कारण इसकी काफी आलोचना हुई थी। कॉन्ग्रेस सरकार ने यह कह कर अपना बचाव करने का प्रयास किया था कि यह दूसरी योजनाओं को दिया जाने वाला यह पैसा भी गरीबों के विकास में लगेगा। हालाँकि, दलित संगठनों ने उसकी इस दलील को स्वीकार नहीं किया था।

मुफ्त वाली गारंटी ले गईं बजट का बड़ा हिस्सा

कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार की यह गारंटियाँ बजट का एक बड़ा हिस्सा ले जा रही हैं। इससे बाकी के विकास कामों के लिए पैसा नहीं बच रहा है। वित्त वर्ष 2023-24 में इन पाँच चुनावी गारंटियों पर ₹39,825 करोड़ का खर्चा किया गया था। यह कर्नाटक के 2023-24 के बजट का लगभग 17% था। वित्त वर्ष 2024-25 में गारंटियों का यह खर्चा और बढ़ गया है। 2023-24 के मुकाबले इसमें लगभग एक तिहाई की वृद्धि हुई है।

वित्त वर्ष 2024-25 के लिए पेश किए गए बजट में कर्नाटक ने इन पाँच चुनावी गारंटियों पर ₹52,000 करोड़ खर्च करने की योजना बनाई है। राज्य की कई अन्य योजनाओं का असर इस खर्च के कारण पड़ रहा है।

जुलाई 2023 में ही कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भी अपने विधायकों से स्पष्ट कर दिया था कि उन्हें कोई भी फंड नहीं दिए जाएँगे और पूरा फोकस गारंटियों को पूरा करने पर लगाया जाएगा। भाजपा ने कॉन्ग्रेस सरकार पर आरोप लगाया है कि वह राज्य के विकास का सारा पैसा अपने चुनावी वादे पूरे करने में फूँक रही है जिससे राज्य पिछड़ रहा है।

‘पिता की मौत के बाद माँ और उसका मुस्लिम प्रेमी बना रहे इस्लाम कबूलने का दबाव, खतना की भी कोशिश’: किशोर ने पुलिस में दी शिकायत

मध्य प्रदेश के खरगोन में इस्लामी धर्मांतरण का मामला सामने आया है। यहाँ एक नाबालिग बेटे ने अपनी हिन्दू माँ और उनके मुस्लिम प्रेमी के खिलाफ इस्लाम कबूलने का दबाव बनाने की शिकायत दर्ज करवाई है। पीड़ित को खतना करवाने के लिए भी कहा जा रहा था। महिला के पति की मौत हो चुकी है। मंगलवार (2 जुलाई, 2024) को पुलिस ने केस दर्ज कर के आरोपित महिला और उसके प्रेमी को गिरफ्तार कर लिया है। मामले में जाँच और अन्य जरूरी कार्रवाई की जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंगलवार को पीड़ित ‘बजरंग दल’ के कार्यकर्ताओं के साथ पुलिस स्टेशन पहुँचा। उसने बताया कि कुछ साल पहले उसके पिता का निधन हो चुका है। पिता की मौत के बाद एक मुस्लिम युवक ने पीड़ित की माँ को अपने झाँसे में लिया। तब से मुस्लिम युवक और पीड़ित की माँ एक दूसरे के सम्पर्क में लगातार बने हुए हैं। शिकायत के मुताबिक, 3 मार्च, 2024 को मुस्लिम युवक पीड़ित पर इस्लाम कबूल करने का दबाव बनाने लगा। यह दबाव देने में पीड़ित की माँ ने भी सहयोग किया।

आरोप है कि जब नाबालिग ने इस्लाम कबूल करने से मना कर दिया तो उसकी बुरी तरह से पिटाई हुई। इस पिटाई में मुस्लिम युवक का साथ पीड़ित की माँ ने भी दिया। बताया गया है कि आरोपित मुस्लिम युवक जब भी पीड़ित के घर आता है तब उसे मुस्लिम बनने का दबाव देता है। इनकार करने पर जान से मार डालने की धमकी दी जाती है। मामला ‘बजरंग दल’ वालों के संज्ञान में आते हुए उन्होंने न सिर्फ मुस्लिम युवक बल्कि पीड़ित किशोर की माँ के खिलाफ भी करवाई की माँग उठाई।

मंगलवार को इसी माँग के साथ बजरंग दल कार्यकर्ता पीड़ित किशोर को ले कर थाने गए। पुलिस ने पीड़ित की तहरीर पर मुस्लिम युवक और पीड़ित की माँ पर समुचित धाराओं में FIR दर्ज कर ली। आरोपित और पीड़ित की माँ दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस के मुताबिक मामले में जाँच और अन्य जरूरी कार्रवाई की जा रही है।

‘एक व्यक्ति को बचाने में इतनी रुचि क्यों?’: संदेशखाली मामले में CBI जाँच रुकवाने पहुँची TMC सरकार को सुप्रीम कोर्ट का झटका, कहा – आप कई दिनों तक बैठे रहे

सुप्रीम कोर्ट ने संदेशखाली के TMC नेता शाहजहाँ शेख को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार को खरी-खरी सुनाई है। संदेशखाली में महिलाओं के यौन शोषण के मामले की जाँच CBI कर रही है। कलकत्ता हाईकोर्ट ने ये आदेश दिया था। इसके खिलाफ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुँची थी, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने इस पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। जस्टिस BR गवई और जस्टिस KV विश्वनाथन की पीठ ने ये फैसला सुनाया है।

फजीहत के बाद शाहजहाँ शेख को निलंबित कर के TMC ने किसी तरह डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश की थी। शाहजहाँ शेख और उसके गुर्गों पर बसीरहाट के संदेशखाली में जनजातीय समाज की महिलाओं के यौन शोषण के साथ-साथ कइयों की जमीन कब्जाने के भी आरोप हैं। इससे पहले 29 अप्रैल को ये मामला सामने आया था, जब जस्टिस गवई ने पूछा था कि आखिर एक निजी व्यक्ति के हितों को बचाने के लिए राज्य सरकार को क्यों याचिका दायर करनी चाहिए?

इस पर पश्चिम बंगाल सरकार के वकील जयदीप गुप्ता ने कहा था कि इस मामले में सरकार पर टिप्पणी की गई थी कि उसने कार्रवाई नहीं की। अब पश्चिम बंगाल सरकार की तरफ से कॉन्ग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी बतौर अधिवक्ता पेश हुए। उन्होंने दलील दी कि शाहजहाँ शेख के खिलाफ न सिर्फ यौन शोषण और जमीन हड़पने, बल्कि राशन घोटाले के तहत भी मामला दर्ज कर दिया गया है जिसमें 4 साल पहले ही 43 FIR दर्ज किए गए थे।

उनका कहना था कि ये मामला सिर्फ ED अधिकारियों पर हमले से जुड़े 2 FIR का ही होना चाहिए था। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सभी मामले संदेशखाली से ही जुड़े हुए हैं और अलग-अलग नहीं हैं। जस्टिस गवई ने याद दिलाया कि राज्य सरकार ने कई दिनों तक कुछ नहीं किया। साथ ही वही सवाल दागा कि राज्य सरकार किसी को क्यों बचा रही है? बता दें कि शाहजहाँ शेख को राशन घोटाले में गिरफ्तार करने गई ED टीम पर हमले के बाद वो फरार हो गया था, जिसके बाद उसके कारनामों का काला चिट्ठा खुला था।

5 साल बाद रूस गए PM मोदी, क्रेमलिन ने कहा- ईर्ष्या से देख रहे पश्चिमी देश: जानिए राष्ट्रपति पुतिन के साथ यह मुलाकात कितनी अहम

देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 3 दिवसीय (8-10 जुलाई) विदेश दौरे पर रवाना हो गए हैं। वह इन तीन दिनों में रूस और ऑस्ट्रिया का दौरा करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी का तीसरी बार पद संभालने के बाद यह दूसरा महत्वपूर्ण विदेश दौरा है। यह इस कार्यकाल में पहला द्विपक्षीय दौरा है। इस दौरे में पीएम मोदी रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी मिलेंगे।

पीएम मोदी इससे पहले 2019 में अंतिम बार रूस गए थे। इसके बाद कोविड महामारी और फिर यूक्रेन रूस संघर्ष के कारण दोनों देशों के नेता, एक दूसरे के देश नहीं आ जा पाए। यूक्रेन युद्ध के बाद पहली बार पीएम मोदी रूस जा रहे हैं। इस बीच चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के अलावा और कोई भी बड़ा नेता पुतिन ने नहीं मिला है।

पीएम मोदी अपने इस दौरे में राष्ट्रपति पुतिन से मुलाक़ात के साथ ही रूस में रहने वालों भारतीयों से बातचीत के कार्यक्रम में भी शरीक होंगे। इसके अलावा उन्हें रूस का सर्वोच्च सम्मान सेंट एन्ड्रू आर्डर से नवाजा जाएगा। उन्हें यह पुरस्कार 2019 में दिया गया था, अब वह इसे ग्रहण करेंगे।

राष्ट्रपति पुतिन के साथ पीएम मोदी भारत और रूस के बीच व्यापार और सैन्य सहयोग को लेकर भी बातचीत होगी। भारत, रूस से लगातार बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीद रहा है। इस कारण भारत का व्यापार घाटा भी बढ़ रहा है। इसको लेकर भी बातचीत होगी।

दोनों नेताओं की बातचीत में मुख्य मुद्दा यूक्रेन-रूस युद्ध होगा। यह युद्ध बीते 2 वर्ष से अधिक समय से जारी है और दोंनो संघर्षरत देशों के बीच कोई समझौता नहीं हो पाया है। भारत के दोनों देशों के साथ अच्छे रिश्ते रखता है और कई बार माहौल को शांत करवाने का काम करता रहा है।

सालाना समिट में भी होंगे शामिल

पीएम मोदी के इस दौरे पर अमेरिका समेत बाक़ी विश्व की भी नजरें हैं। यहाँ वह राष्ट्रपति पुतिन के साथ भारत-रूस शिखर सम्मेलन में भी हिस्सा लेंगे। दोनों देशों के बीच राजनयिक सहयोग का यह सबसे बड़ा मंच है। इसमें पीएम मोदी ने 2019 में आखिरी बार हिस्सा लिया था। इसके अब तक 21 संस्करण सम्पन्न हो चुके हैं। यह अंतिम बार दिल्ली में आयोजित किया गया था।

पीएम मोदी ने इस दौरे को लेकर ट्विटर पर लिखा, “अगले तीन दिनों में मैं रूस और ऑस्ट्रिया में रहूँगा। ये यात्राएँ इन देशों के साथ संबंधों को और मजबूत करने का एक शानदार अवसर होंगी, जिनके साथ भारत की पुरानी दोस्ती है। मैं इन देशों में रहने वाले भारतीय समुदाय के साथ बातचीत करने के लिए भी उत्सुक हूँ।”

पीएम मोदी की इस यात्रा पर रूस ने कहा है कि इसे देख कर पश्चिमी देश जल रहे हैं और इसको बहुत ही गंभीरता से ले रहे हैं। रूस ने कहा कि यह दौरा महत्वपूर्ण होने वाला है इसीलिए पश्चिमी देश काफी गंभीरता से रहे हैं।

पीएम मोदी रूस के बाद यूरोपियन देश ऑस्ट्रिया भी जाएँगे। ऑस्ट्रिया में 41 वर्षों में यह पहली बार किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यात्रा होगी। प्रधानमंत्री मोदी ऑस्ट्रिया के राष्ट्रपति और चांसलर, दोनों से मिलेंगे और साथ ही वियना में रहने वाले भारतीय समुदाय से भी बातचीत करेंगे।

घर में अलमारी, अलमारी में ड्रॉवर, ड्रॉवर के भीतर आतंकियों का बंकर… कश्मीर के कुलगाम का ये Video देख हो जाएँगे हैरान, सुरक्षाबलों ने एनकाउंटर के बाद बिल खोजा

जम्मू-कश्मीर के कुलगाम से एक हैरान करने वाली वीडियो सामने आई है। इस वीडियो में दिखाई दे रहा है कि कैसे आतंकी अपने छिपने के लिए ऐसे तरीके खोज रहे हैं जिनकी कल्पना करना भी मुश्किल हो। आतंकियो ने अलमारी के भीतर जहाँ सामान रखने के खाने (ड्रॉवर) बनाए जाते हैं उसके अंदर घुसकर बंकर बनाया हुआ है ताकि सुरक्षाबल की नजर से बचे रहें।

अलमारी के भीतर बने छोटे-छोटे बंकरों का खुलासा दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले में मुठभेडों के दौरान हुआ। इस दौरान सुरक्षाबल ने ‘द रेजिस्टेंट फ्रंट’ के कमांडर सहित दो और आतंकियों को मार गिराया। ये टीआरएफ कमांडर आदिल हुसैन वही आतंकी था जिसने साल 2022 में शोपियाँ में सेब के बाग में कश्मीरी हिंदू सुनील कुमार को टारगेट करते हुए मौत के घाट उतारा था। इसके अलावा भी दर्जनों घटनाओं को अंजाम दिया था।

कुलगाम में हुई 2 मुठभेड़ों में अब तक 6 आतंकी मारे गए हैं। वहीं हमारे 2 जवान बलिदान भी हुए हैं। ये दोनों मुठभेड़ें जम्मू-कश्मीर के चिनीगाम और दूसरी कुलगाम में हुई हैं। बताया जा रहा है कि सुरक्षाबल ने इलाके में आतंकियों की पूर्व सूचना मिलने पर तलाशी शुरू की थी। सूचना पुख्ता होने पर उन्होंने इलाके की घेराबंदी की और इसी बीच आतंकियों ने गोलीबारी शुरू कर दी।

भारतीय जवान बहादुरी से उस घर में घुसे जहाँ आतंकी थे, छानबीन के दौरान पुलिस ने पाया कि घर की अलमारी में एक तहखाना बनाया गया था। पुलिस ने एक शख्स को उस बंकर के भीतर घुसवाकर पूरे बंकर की वीडियो बनवाई। माना जा रहा है कि इन बंकरों का प्रयोग आतंकी अपने छिपने के साथ-साथ हथियार और गोला बारूद छिपाने के लिए करते थे।

भारत-इजरायल से घृणा जिसकी USP, जो कश्मीर पर चलाती है पाकिस्तान का प्रोपेगेंडा; वह शबाना महमूद बनी ब्रिटेन की नई ‘न्याय मंत्री’

यूनाइटेड किंगडम (UK) में नई लेबर पार्टी सरकार ने भारत और इजरायल पर दुष्प्रचार करने वाली शबाना महमूद को न्याय मंत्री बनाया है। शबाना महमूद को लॉर्ड चांसलर का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है। शबाना महमूद पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर की मूलनिवासी हैं। वह 2010 से बर्मिंघम लेडीवुड से सांसद हैं। वह पाकिस्तान से होने के कारण लगातार एक दशक से अधिक समय से प्रदेश जम्मू-कश्मीर के बारे में झूठी अफवाहें फैला रही हैं।

सितंबर 2014 से वह लगातार इंग्लैंड में सांसद हैं। नवम्बर 2015 में शबाना महमूद और उनके कुछ साथियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इंग्लैंड की यात्रा से पहले एक पत्र लिखा था। इस पत्र में उन्होंने जम्मू-कश्मीर से सेना हटाने, AFSPA को हटाने, आतंकवाद के आरोप में बंद लोगों को रिहा करने और कथित तौर पर सामूहिक कब्रों की जाँच करने की माँग की थी।

शबाना महमूद की इन मांगों को भारत में इंग्लैंड के हस्तक्षेप के तौर देखा गया था। इसी पत्र में शबाना महमूद ने संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव के तहत जम्मू-कश्मीर में जनमत संग्रह कराने की माँग की थी और इसके लिए अपने इरादे भी बताए थे।

गौरतलब है कि शबाना संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव का इस्तेमाल पाकिस्तान और उसकी सेना भारत पर दबाव डालने के लिए करती आई है, जबकि वह स्वयं इसका कभी पालन नहीं करती। शबाना महमूद और उनके साथी सांसदों ने भी पाकिस्तान के इसी एजेंडे को आगे बढ़ाने का काम किया था।

जनवरी, 2017 में ब्रिटेन के निचले सदन हाउस ऑफ़ कॉमन्स में बोलते हुए महमूद ने भारत के आंतरिक मामलों में विदेशी हस्तक्षेप की की माँग की थी। इसमें उन्होंने कई झूठे तथ्यों के आधार पर भारत की खराब छवि पेश करने का प्रयास किया था।

इस भाषण में उन्होंने कहा था, “यह दुनिया के सबसे ज़्यादा सेना की मौजूदगी वाले क्षेत्रों में से एक है जहाँ दो परमाणु-सशस्त्र शक्तियों के बीच पुराना विवाद है। दुनिया भर में इस क्षेत्र के बाहर कहीं भी इस पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता है और स्पष्ट रूप से हमारे देश में भी नहीं दिया जाता है। जबकि हमारे ब्रिटिश कश्मीरी लोगों की संख्या बहुत ज़्यादा है। इस पर वही लोग ध्यान दे रहे हैं, लेकिन इसके बाहर के लोग कोई भी रुचि नहीं ले रहे।”

अनुच्छेद 370 हटने के बाद भी किया था प्रलाप

मोदी सरकार के अनुच्छेद 370 समाप्त करने के बाद शबाना महमूद ने प्रोपेगैंडा की रफ़्तार डबल कर दी थी। उन्होंने इसको लेकर ट्विटर पर लिखा था, “भारत सरकार के अनुच्छेद 370 को खत्म करने के निर्णय से मैं बहुत चिंतित हूँ, इससे जम्मू-कश्मीर की स्वायत्तता खत्म हो गई है। हाल के दिनों में हमने भारत सरकार द्वारा जो कार्रवाई में बढ़त देखी है, इसे रोका जाना चाहिए। मानवाधिकारों को बरकरार रखा जाना चाहिए।”

शबाना और उसके साथियों ने इस संबंध में तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमन्त्री बोरिस जॉनसन को एक पत्र लिख कर भारत पर दबाव बनाने की माँग की थी। इस पत्र में शबाना महमूद ने भारत और जम्मू कश्मीर पर कई सारे झूठ बोले थे।

शबाना महमूद के पत्र में लिखा,”हम आपसे अनुच्छेद 370 को रद्द करने के भारत सरकार के कदम की कड़ी निंदा करने और हिंदू राष्ट्रवाद चलाने वाले नेता प्रधानमंत्री मोदी के इस कदम पर विचार करने का आह्वान करते हैं। हिन्दू राष्ट्रवाद के कारण भारत बदतर बना रहा है और इससे 19.5 करोड़ मुसलमानों को दूसरे दर्जे का नागरिक बन रहे हैं। BBC की रिपोर्ट में भी यही बात साबित हुई है कि ‘गौ रक्षा’ के नाम पर हिंदू राष्ट्रवादियों द्वारा कितने लोगों की हत्या की गई है।”

शबाना महमूद और उनकी लेबर पार्टी के साथी यह पत्र लिखते समय भूल गए थे कि भारत अब इंग्लैंड का गुलाम नहीं है। ऐसे में उनके किसी भी प्रलाप का भारत पर कोई असर नहीं होने वाला। 7 अगस्त, 2019 को स्काई न्यूज के साथ एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने दावा किया, “मुझे लगता है कि भारत सरकार द्वारा कश्मीर की स्वायत्तता, स्वतंत्रता और विशेष दर्जे को छीनने का यह कदम बेहद भड़काऊ है। यह एक आक्रामक कार्रवाई है। मुझे लगता है कि यह काफी खतरनाक भी है।

उन्होंने भारत के इस फैसले को कश्मीर के साथ विश्वासघात बताया था। अगस्त, 2019 में शबाना महमूद को बर्मिंघम (यहाँ 29.9% मुस्लिम आबादी है) में अनुच्छेद 370 को निरस्त करने पर अपने पाकिस्तानी साथियों के साथ प्रदर्शन करते देखा गया था। भारत और ब्रिटेन आपस में सहयोगी हैं और सहयोगी देश के सांसद का प्रदर्शन करना विचित्र बात थी।

मई 2020 में शबाना महमूद ने लेबर पार्टी के नेता और अब प्रधानमंत्री किएर स्टार्मरको वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कश्मीर की कथित स्थिति के बारे में जानकारी देने के बारे में ट्वीट किया था। जम्मू कश्मीर को लेकर शबाना महमूद का आखिरी सोशल मीडिया मेल्टडाउन 5 अगस्त, 2020 को हुआ था। इसके बाद से उन्होंने जम्मू कश्मीर पर कुछ नहीं लिखा।

इस ट्वीट में उन्होंने लिखा था “भारत सरकार द्वारा कश्मीर की स्वायत्तता और विशेष दर्जा रद्द करने के बाद लॉकडाउन लगाए हुए एक साल हो गया है। यह एक अन्याय से भरी और एकतरफा कार्रवाई थी और कोविड से दोहरे लॉकडाउन के साथ, काफी सारे लोग दोस्तों और परिवार के लिए चिंतित हैं।”

वह इससे पहले भी फिलिस्तीन के मुद्दे से जुड़ी रही हैं। एक तस्वीर में शबाना महमूद एक पोस्टर पकड़े हुए दिखाई दी थीं। इस पर लिखा था, ”फिलिस्तीन को आजाद करो, इजरायली कब्जे को खत्म करो।”

2014 की डेली मेल की एक रिपोर्ट के अनुसार, शबाना महमूद बर्मिंघम में एक सुपरमार्केट को जबरन बंद करने में शामिल थीं, क्योंकि वहाँ कथित तौर पर ‘अवैध बस्तियों’ से सामान स्टॉक किया गया था। यहूदी लोगों ने उन पर ‘तनाव बढ़ाने’ का बढ़ावा देने का आरोप लगाया था। एक लेख में, द जेरूसलम पोस्ट ने बताया था कि वह किस तरह इजरायल विरोधी बयानबाजी लगातार कर रही थीं।

अब यह देखना बाकी है कि लेबर पार्टी के भीतर भारत-विरोधी और इजरायल-विरोधी प्रचार करने वाली शबाना महमूद , अब न्याय मंत्री के रूप में कैसे अपना कर्तव्य निभाती हैं।

अब्बा ने बोरे में 15 दिन की बेटी को पैक किया, फिर जिंदा ही कब्र में गाड़ दिया: तैय्यब के पास इलाज के लिए नहीं थे पैसे, पाकिस्तान के सिंध की घटना

पाकिस्तान के सिंध प्रांत में तैय्यब नाम के शख्स ने अपनी 15 दिन की मासूम बेटी को जिंदा जमीन में दफना दिया। मामला खुला तो पुलिस पूछताछ करने पहुँची। बाप ने जवाब दिया उसके पास बेटी को इलाज के लिए पैसे नहीं थे इसलिए उसने उसे गाड़ दिया।

तैय्यब के जुर्म कबूलने के बाद पुलिस ने फौरन आगे की कार्रवाई करते हुए आरोपित को गिरफ्तार कर लिया। वहीं कब्र खोदकर बच्ची का शव निकाला गया ताकि शव का पोस्टमॉर्म करवाया जा सके। तैय्यब ने कहा कि वह अपनी नवजात बेटी का इलाज नहीं करा पा रहा था।

उसने पैसा का इंतजाम करने की कोशिश की लेकिन इसमें कामयाब नहीं हो सका। ऐसे में तैय्यब ने नवजात को एक बोरे में रखकर जमीन में गाड़ दिया। तैय्यब के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के बाद पुलिस ने उसे जेल भेज दिया है। आगे बच्ची का पोस्टमार्टम कराकर कार्रवाई की जाएगी।

बता दें कि पाकिस्तान में छोटे बच्चों पर होते अत्याचार के पहले भी कई मामले सामने आए हैं लेकिन इस घटना के साथ जो एक मामला चर्चा में है उसमें एक महिला पर पर आरोप लगा है कि उसने अपने शौहर के साथ मिलकर 13 साल की बच्ची का उत्पीड़न किया। उत्पीड़न के दौरान उसे नंगा किया गया, उसका शारीरिक शोषण हुआ।

बच्ची ने अपनी शिकायत में बताया कि वो उस दंपत्ति के घर में काम करती थी, लेकिन एक दिन चोरी के शक में हसम ने उसे पकड़ लिया और हिरासत में ले लिया। इसके बाद उसको शारीरिक यातनाएँ दी गईं।

डॉक्टर के यहाँ जाने पर पता चला कि बच्ची के शरीर में हाथ और नाक पर तमाम फ्रैक्चर थे। पुलिस ने कहा है कि वो इस मामले में जाँच कर रहे हैं और जाँच के बाद बच्ची को इंसाफ दिलाया जाएगा।

‘कुरान पढ़ो… हिंदू देवी-देवताओं में शक्ति नहीं, अल्लाह में है’ : JMD (जय माता दी) कोचिंग सेंटर में रिजवान कर रहा था हिंदू बच्चे का ब्रेनवॉश, धमकी देकर बोला- ‘मैं दाऊद का बाप हूँ’

नई दिल्ली के शकूरपुर इलाके से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। पता चला है कि यहाँ एक कोचिंग सेंटर JMD में मुस्लिम ट्यूटर रिजवान हिंदू छात्रों का ब्रेन वॉश कर रहा था। उन्हें भगवान की पूजा छोड़ अल्लाह की इबादत करने को कह रहा था। अब इसी संबंध में कोचिंग में पढ़ने वाले एक छात्र के पिता ने शिकायत दी है।

अपनी शिकायत में बच्चे के पिता बताया कि उन्होंने जब अपने बच्चे का एडमिशन कोचिंग सेंटर में कराया था उस समय उनकी मुलाकात किसी संजय से हुई थी। बाद में पता चला वहाँ रिजवान, अबरार, इरफान पढ़ाते हैं। सामने आए शिकायत पत्र के अनुसार, पिता ने सुभाष पैलेस थाने में पहुँच शिकायत देते हुए बताया कि उनका बच्चा जेएमडी कोचिंग में पढ़ता है और पिछले कई दिनों में उनसे कुरान के बारे में पूछता था। शुरू में उन्होंने इसे अनदेखा किया लेकिन बाद में बच्चे ने बताया कि कोचिंग में पढ़ाने वाले रिजवान टीचर उससे बार-बार कुरान पढ़ने को कह रहे हैं और कलमा पढ़ने के लिए बार-बार दबाव बना रहे हैं।

इसके अलावा सामने आए शिकायत पत्र के अनुसार, ये भी उल्लेख है कि टीचरों ने बच्चों को कहा- “तुम्हारा हिंदू धर्म तो बकवास है। तुम्हारे देवी-देवताओं में कोई शक्ति भी नहीं है। इसलिए अब से कुरान और कलमा पढ़ना है। इसमें बहुत शक्ति है। इसी से बलवान बनोगे।”

लड़के के पिता के अनुसार, उन्होंने जब सारी बात को गंभीरता से लेते हुए कोचिंग में फोन किया और वहाँ एक मैडम से बात हई तो मैडम ने रिजवान सर से बात कराई। रिजवान से बच्चे के पिता ने पूछा- “आप बेटे को क्यों मजबूर कर रहे हैं।” इस पर रिजवान भड़ गया और गाली-गलौच शुरू कर दी। शिकायत मे कहा गया कि रिजवान ने बच्चे के पिता को बोला- “मैं दाऊद इब्राहिम का बाप हूँ। तेरे पूरे परिवार को नंगा नाच कराऊँगा और फिर मुझे गंदी गंदी गालियाँ दी गई।”

इस मामले में स्वराज्य की वरिष्ठ पत्रकार स्वाति गोयल शर्मा ने शिकायत पत्र साझा करते हुए कुछ ट्वीट किए हैं। स्वाति गोयल शर्मा ने कहा, “मैंने लड़कों के पिता से बात की और सच्चाई यह है कि जिस कोचिंग सेंटर में नाबालिग हिंदू लड़कों को इस्लाम धर्मांतरण करवाया जा रहा है उस कोचिंग सेंटर का नाम ‘जय माता दी है’ और इसके बोर्ड पर जेएमडी लिखा है। लड़के के पिता कहते हैं कि उन्होंने जब लड़कों का एडमिशन करवाया उस समय संजय नामक व्यक्ति से उनकी बातचीत हुई थी। पिता को तब नहीं पता था कि ट्यूशन में रिजवान और अबरार जैसे टीचर निकलेंगे और बच्चों को धर्मांतरण के लिए मजबूर करेंगे।”

इस मामले में बच्चे का वर्जन भी मीडिया में सामने आया है। जनमत की पुकार नाम के चैनल पर साफ तौर पर बच्चा बोलता दिख रहा है कि- “रिजवान सर बोलते थे तुम्हारे हिंदू देवी-देवताओं में शक्ति नहीं है। हमारे अल्लाह में है।” वहीं पिता बोलते दिखते हैं कि माता-पिता अपने बच्चों को कोचिंग शिक्षा के लिए भेजते हैं न कि ब्रेनवॉश कराने के लिए भेजते हैं। उन्होंने कहा कि इन लोगों की मानसिकता ऐसी है कि ये टीचर नहीं हो सकते। इनको जिहादी कहा जाए तो बहुत अच्छा होगा। ये काम टीचरों का नहीं है। ये शिक्षक नहीं है ये धर्मपरिवर्तन करवा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वो किसी मजहब पर टिप्पणी नहीं करना चाहते लेकिन जब वो लोग बच्चों को शिक्षा के लिए भेजते है तो उनका ब्रेनवॉश क्यों किया जा रहा है।

फ्रांस में जीत के बाद भी नहीं थमे वामपंथी, अब देश को जलाकर कर रहे ‘शक्ति प्रदर्शन’: दक्षिणपंथ की बढ़त देख शुरू हुई थी पेट्रोल बम वाली वाम हिंसा

फ्रांस के आम चुनावों में वामपंथी गठबंधन की जीत हुई है। वामपंथी गठबंधन की जीत के बाद फ्रांस में भीषण दंगे भड़क गए हैं और प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए हैं। यह प्रदर्शनकारी दंगे कर रहे हैं और पेट्रोल बम चला आगजनी कर रहे हैं। फ्रांस में इससे बचने के लिए भारी पुलिस बंदोबस्त किया गया है।

फ्रांस में वामपंथी गठबंधन की जीत अप्रत्याशित तरीके से हुई है। चुनाव से पहले लगातार यह माना जा रहा था कि इन चुनावों में दक्षिणपंथी गठबंधन की जीत होगी। दक्षिणपंथी गठबंधन की नेता मरीन ली पेन के प्रधानमंत्री बनने के आसार जताए जा रहे थे। लेकिन दूसरे चरण की वोटिंग के बाद पासा पलट गया और वामपथी गठबंधन सबसे अधिक सीटें लाने में सफल रहा।

फ्रांस के इन चुनावों में वामपंथी गठबंधन ने 577 सीटों में से लगभग 182 सीटों पर जीत हासिल कर ली है। वहीं दूसरी तरफ फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों की रिनेसां पार्टी ने 163 सीटें जीती हैं। तीसरे नम्बर पर धुर दक्षिणपंथी गठबंधन है, जिसने 132 सीटें जीत ली है। अभी अंतिम परिणाम नहीं सामने आए हैं।

अंतिम परिणामों के सामने आने से पहले ही फ्रांस में भीषण हिंसा का माहौल है। प्रदर्शकारियों ने चुनाव नतीजों के रुझानों के साथ फ्रांस की सड़कों पर कब्जा कर लिया है। फ्रांस की राजधानी पेरिस में प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर गाड़ियों को इकट्ठा करके आग लगा दी और पुलिस से भी भिड़ गए।

दंगाइयों ने पुलिस पर पत्थर भी फेंके। कहीं कहीं कूड़ेदानों में भी आग लगा दी गई। फ्रांस के शहर नान्तेस में भी दंगाइयों ने कहर बरपाया है। अभी यह नहीं साफ है कि दंगाई किस समूह के हैं। पुलिस उन पर कब्जा करने में जुटी हुई है। दंगाइयों ने पेरिस के महत्वपूर्ण स्थानों पर तोड़फोड़ भी की है।

फ्रांस में दंगों के इतिहास को देखते हुए पहले से ही इस हिंसा का अंदाजा लगाया जा रहा था। वामपंथियों के इस हिंसा करने की आशंका जताई जा रही थी। इसके लिए फ्रांस में 30,000 पुलिसकर्मी लगाए गए थे। पेरिस समेत बड़े शहरों में महंगी दुकानों में बैरिकेड लगा दिए गए थे ताकि दंगे के दौरान उन्हें लूट से बचाया जा सके।

कुछ दुकानों के शीशों पर लकड़ी तक ठोंक दी गई ताकि प्रदर्शनकारी यहाँ से ना घुसें। गौरतलब है कि वामपंथियों ने पहले चरण की वोटिंग पूरी होने के बाद फ्रांस में कसके दंगे किए थे। 30 जून, 2024 को इन दंगाइयों ने फ़्रांस में कसके कहर बरपाया था।

वामपंथियों ने पहले चरण के चुनाव में दक्षिणपंथियो की बढ़त के बाद सार्वजनिक सम्पत्ति को जलाया था और पुलिस पर हमले किए थे। दूसरे चरण के बाद हिंसा किस समूह ने की है, यह स्पष्ट नहीं हो सका है। चुनाव नतीजों के बाद अब फ्रांस में वामपंथी प्रधानमंत्री बनने के कयास लगाए जा रहे हैं।

मारपीट से नहीं हुई नशेड़ी फिरोज की मौत,पत्रकार वसीम अली त्यागी समेत 5 ने सोशल मीडिया पर ‘मॉब लिंचिंग’ का झूठ फैलाया: शामली में FIR दर्ज

सोशल मीडिया पर आए दिन भड़काऊ और आपत्तिजनक पोस्ट करने के लिए कुख्यात वसीम अकरम त्यागी और ज़ाकिर अली त्यागी पर उत्तर प्रदेश में FIR दर्ज हुई है। यह FIR शामली पुलिस द्वारा शुक्रवार (5 जुलाई 2024) को दर्ज की गई है। केस में कुल 5 आरोपित हैं जिसमें शिकायतकर्ता खुद पुलिस बनी है। पुलिस का आरोप है कि इन सभी के ट्वीट से समाज में वैमन्सयता फ़ैलाने और शांति भंग होने की आशंका है। साथ ही इन आरोपितों की हरकतों से दूसरे समुदाय के लोगों में नाराजगी है।

यह मामला शामली जिले के थानाक्षेत्र थानाभवन का है। शुक्रवार (5 जुलाई 2024) को यहाँ तैनात सब इंस्पेक्टर मनेंद्र कुमार ने अपने थाने में तहरीर दी है। तहरीर में मनेंद्र ने बताया कि 5 जुलाई को वो अपने साथी पुलिसकर्मियों के साथ जलालाबाद क्षेत्र में संदिग्ध वाहनों की चेकिंग कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने सोशल मीडिया पर थानाभवन क्षेत्र में ही फ़िरोज़ नाम के व्यक्ति की मौत को लेकर कुछ आपत्तिजनक ट्वीट होते देखे। ये ट्वीट वसीम अकरम त्यागी, ज़ाकिर अली त्यागी, आसिफ राणा, सैफ इलाहाबादी और अहमद रज़ा खान द्वारा किए जा रहे थे।

पुलिस ने बताया कि इन आरोपितों ने मॉब लिंचिंग में “एक और मौत” जैसे शीर्षक दिए थे। इन पोस्ट में आरोपितों ने आगे लिखा, “थानाभवन थानाक्षेत्र के जलालाबाद कस्बे में देर रात एक युवक जिसका नाम फिरोज उर्फ काला कुरैशी बताया जा रहा है, कुछ दूसरे समुदाय के लोगों ने घर में घुसने के शक में जमकर पीटा, मार दिया ऐसे तो कोई किसी को भी मार देगा बोल देगा कि उसे शक था।”

पुलिस ने मुताबिक आरोपितों द्वारा इस प्रकार के ट्वीट किए जाने से दूसरे समुदाय के लोगों में नाराजगी है। शिकायत में सब इंस्पेक्टर मनेंद्र कुमार ने आरोप लगाया है कि पाँचों आरोपितों के ट्वीट से लोगों के बीच अपसी वैमन्सयता फैलने, साम्प्रदायक सोहार्द बिगड़ने और स्थानीय स्तर पर शांति भंग होने की आशंका है। आरोपितों द्वारा लिखे गए शब्दों को भद्दी पोस्ट बताते हुए पुलिस ने इसके स्क्रीनशॉट सेव कर लिए हैं। पुलिस ने इन भद्दी पोस्ट वालों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 196 और 353 के तहत कार्रवाई की है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

विक्टिम कार्ड भी नहीं आया काम

शामली पुलिस की इस कार्रवाई के खिलाफ विक्टिम कार्ड खेलने की भी कोशिश की गई। हालाँकि पुलिस ने अपनी कार्रवाई को सही करार दिया है। पुलिस का कहना है कि घटना में साम्प्रदयिक एंगल न होने के बावजूद इसे जानबूझ कर दूसरा रूप देने की कोशिश की गई। आरोपितों द्वारा की गई पोस्ट को पुलिस ने दुर्भावना से ग्रसित बताया है। पुलिस ने इस घटना को मॉब लिंचिंग बताने वाले दावों का भी खंडन किया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

नशे में धुत था फ़िरोज़

फ़िरोज़ की मौत पर फैलाए जा रहे भ्रम पर शामली पुलिस ने सच्चाई पेश की है। पुलिस ने घटना की सच्चाई अपने X हैंडल पर बताई है। पुलिस के मुताबिक 4 जुलाई 2024 की रात फ़िरोज़ जलालाबाद कस्बे में राजेन्द्र के घर में घुस गया था। इस दौरान फ़िरोज़ ने नशा कर रखा था। नशेड़ी फ़िरोज़ ने राजेंद्र के परिजनों से हाथापाई की। फ़िरोज़ के घर वाले आकर उसे अपने साथ ले गए जहाँ उसकी मौत हो गई। मृतक के शरीर पर कोई गंभीर चोट के निशान नहीं पाए गए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से भी यह बात साबित हो गई कि मौत की वजह मारपीट नहीं है।

वसीम और ज़ाकिर उड़ा रहे थे मॉबलिंचिंग की अफवाह

पुलिस द्वारा बार-बार समझाए जाने और सफाई पेश किए जाने के बावजूद वसीम अकरम त्यागी और ज़ाकिर अली आदतन इस मामले को मॉब लिंचिंग बता रहे थे। इन लोगों द्वारा पुलिस और पोस्टमार्टम की जाँच रिपोर्ट आने से पहले ही मामले को साम्प्रदायिक रंग में रंगने की कोशिश शुरू हो चुकी थी। इस वजह से राजेंद्र के परिवार की सुरक्षा भी प्रभावित होने की आशंका थी। अपने नाम के अंत में त्यागी लगाने वाले वसीम अकरम और ज़ाकिर अली की उड़ाई अफवाह से उनके फॉलोवरों ने भी इस झूठ को हवा देनी शुरू कर दी थी।

कुछ ही दिन पहले इन्हीं लोगों ने की थी शामली पुलिस की तारीफ

अपने खिलाफ FIR दर्ज होने के बाद वसीम अकरम त्यागी और ज़ाकिर अली के साथ उनके तमाम समर्थक शामली पुलिस को ही गलत बताने की कोशिश में जुट गए हैं। यह वही समूह है जिसने अभी कुछ दिन पहले शामली पुलिस की तारीफ में कसीदे गढ़े थे। खास बात ये है कि तब थानाक्षेत्र भी यही थानाभवन ही था। जून 2024 में बकरीद पर जावेद द्वारा गाय नहीं बल्कि भैंस क़ुर्बान किए जाने के शामली पुलिस के खुलासे को न सिर्फ वसीम अकरम त्यागी और ज़ाकिर अली ने बल्कि मोहम्मद जुबैर तक ने न्याय और सत्य जैसे परोक्ष पदवी से नवाजा था। महज कुछ ही दिनों में यह समूह शामली पुलिस के खिलाफ अपने नजरिए में पूरी तरह से बदलाव ले आया है।

नफरत का है पुराना इतिहास

पाँचों नामजदों में मुख्य आरोपित ज़ाकिर अली त्यागी और वसीम अकरम अपने X हैंडल से आए दिन हिन्दुओं के खिलाफ अशोभनीय कमेंट और ट्वीट किया करते हैं। ज़ाकिर अली त्यागी तो अगस्त 2020 में सीता और लक्ष्मी को नोचने जैसे ट्वीट कर चुका है। साल 2017 में ज़ाकिर अली त्यागी योगी आदित्यनाथ के खिलाफ एक आपत्तिजनक पोस्ट करने के मामले में जेल भी काट चुका है। वहीं FIR दर्ज होने के बाद पत्रकारिता का लबादा ओढ़ कर विक्टिम कार्ड खेल रहा वसीम अकरम त्यागी आए दिन कुछ पत्रकारों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियाँ किया करता है। सुदर्शन न्यूज़ के प्रधान सम्पादक सुरेश चव्हाणके खिलाफ उसके द्वारा की गई नफरती ट्वीट की एक लम्बी श्रृंखला है।