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21 साल का B.Sc का छात्र कराता है UPSC की ऑनलाइन तैयारी, खरीदी कार तो प्रोफेसर भी रह गए दंग: छात्रों में सरकारी कर्मचारी से लेकर इंजीनियर तक शामिल

महज 21 साल का लड़का, जो बीएससी (माइक्रोबॉयोलॉजी) की पढ़ाई कर रहा है, वो प्राइवेट यूट्यूब चैनल के माध्यम से यूपीएससी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराता है। अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज वो कार भी खरीद चुका है और ग्रेजुएट होते ही सरकारी नौकरी करने की तैयारी कर रहा है। छात्र की प्लानिंग है कि वो सरकारी नौकरी पाने के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों को मुफ्ट कंटेंट प्रोवाइड कराएँगे, ताकी जिन युवाओं के पास पैसा नहीं है, वो भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सफलता हासिल कर सके। ऐसा करने वाले लड़के का नाम है सयूज एस चंद्रन, जो केरल के कारसगोड के रहने वाले हैं।

ऑनमनोरमा की रिपोर्ट के मुताबिक, कासरगोड के पहाड़ी गाँव राजापुरम के सेंट पायस कॉलेज में पढ़ने वाले सयूज एस चंद्रन अचानक चर्चा में आ चुके हैं। दरअसल, मंगलवार (25 जून 2024) को सेंट पायस कॉलेज में पढ़ाने वाले असिस्टेंट प्रोफेसर ने छात्र को फोन किया और कहा कि वो अपनी फाइल कॉलेज में जमा कर दे, लेकिन छात्र ने कहा कि वो कॉलेज नहीं आ पाएगा, क्योंकि वो कार खरीदने जा रहा है। प्रोफेसर को लगा कि कार तो माता-पिता खरीद रहे होंगे, ऐसे में छात्र क्यों छुट्टी ले रहा है, तब जाकर छात्र ने बताया कि वो माता-पिता के पैसों से नहीं, बल्कि अपने पैसों से कार खरीद रहा है। इसके बाद ये पूरी कहानी सामने आई।

वैसे, कार खरीदने की खबर से कोई हैरान नहीं हुआ, लेकिन कार खरीदने के लिए छात्र ने जो मेहनत की, वो प्रेरित करने वाली है। दरअसल, छात्र सयूज एस चंद्रन एक ऑनलाइन कोचिंग चैनल चलाते हैं, जिसका नाम है IAS HUG MALAYALAM. ये चैनल एक प्राइवेट चैनल है और इसे वही लोग देख सकते हैं, जिन्होंने इसे सब्सक्राइब किया हुआ है। सयूज ने इस चैनल की फीस रखी है 500 रुपए प्रति महीने की, जो अब 1 हजार रुपए प्रति महीने कर दिया है। खासकर नए सब्सक्राइबर्स से। इस चैनल पर सयूज एस चंद्रन समसामयिक मामलों, सिविल सेवा योग्यता परीक्षा (सीएसएटी), इतिहास, भूगोल और सामान्य अध्ययन पर आधारित शिक्षा देते हैं, जो यूपीएससी जैसी बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वालों के बेहद काम की होती है।

इस चैनल को शुरू करने के सवाल पर सयूज ने कहा, “शुरू में मैंने चैनल इसलिए बनाया था कि जो पढ़ाई मैं कर रहा हूँ, उसे दूसरों के साथ बाँट सकूँ, ताकी मैं भी चीजों को भूलूँ न। लेकिन धीरे-धीरे ये आगे बढ़ता गया।” शुरुआत में, सयूज ने अपने नाम सयूज चंद्रन के नाम पर ‘एससी आईएएस अकादमी’ शुरू की। फिर उन्हें एहसास हुआ कि “अकादमी” एक बहुत बड़ा टैग है। इसलिए उन्होंने चैनल का नाम बदलकर ‘आईएएस हब मलयालम’ रख दिया। उनकी कक्षाएँ धीमी गति वाली और मलयालम में होती हैं, और वह बहुत कुछ दोहराते हैं। उनके नोट्स अंग्रेजी में हैं।

रसायन विज्ञान विभाग की डॉ. आशा चाको ने बताया, “सयूज से पढ़ने वाले लोगों में कॉलेज के शिक्षक, सरकारी क्लर्क, आईटी प्रोफेशनलर, केमिकल इंजीनियर, गृहिणी और कॉलेज जाने वाले लोग भी शामिल हैं।” डॉ. आशा ने कहा कि वो इकलौती ऐसी व्यक्ति हैं पूरे कॉलेज में, जो जानती थी कि सयूज क्या कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “हमारे पास कई छात्र हैं जो आईएएस और आईपीएस अधिकारी बनने की ख्वाहिश रखते हैं, लेकिन सयूज जैसा कोई नहीं है जो छात्र रहते हुए भी इतना अच्छा पढ़ाता है।” अब चूँकि सयूज की अगले साल ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी हो जाएगी, इसके बाद वो खुद यूपीएसकी की सिविल सर्विस की परीक्षा में शामिल होंगे।

सयूज के पिता रिटायर्ड फौजी हैं और उनकी माँ एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं। सयूज ने अपनी 12वीं तक की पढ़ाई स्थानीय स्कूल-कॉलेज में ही की और 2022 में 12वीं की परीक्षा पास करने के बाद उन्होंने NEET की परीक्षा दी। उनका मन था कि वो डॉक्टर बनें, लेकिन नीट की परीक्षा में उन्हें असफलता मिली। इसके बाद उन्होंने माइक्रोबॉयोलॉजी में बीएससी की पढ़ाई शुरू कर दी। शुरुआत में सयूज ने अखबारों को पढ़ना शुरू किया और छोटा-मोटा कंटेंट बनाना शुरू किया, लेकिन जब 2 महीने में ही उनके चैनल पर 10 हजार से ज्यादा व्यू आने लगे, तो उन्होंने इसे आगे बढ़ाया।

अब सयूज एस चंद्रन का कहना है कि वो अगले साल यूपीएससी की परीक्षा में खुद बैठेंगे। सफलता के प्रति आश्वस्त सयूज कहते हैं कि वो अधिकारी बनने के बाद इस चैनल पर और ध्यान देंगे, साथ ही कंटेंट को पूरी तरह से फ्री कर देंगे। ताकी इसका फायदा अन्य लोगों को भी मिल सके। सयूज का चैनल पूरी तरह से सब्सक्रिप्शन मोड पर चलता है, लेकिन कई लोग जो पैसे देने में सक्षम नहीं होते, सयूज उनके लिए अपने चैनल का लिंक वॉट्सऐप-टेलीग्राम जैसे ऐप्स के माध्यम से भेजते हैं, ताकी उनकी मदद हो सके।

केरल के सयूज एस चंद्रन की ये यात्रा प्रेरणादायक है। उन्होंने महज 1 साल में ही न सिर्फ अपने पैरों पर खड़े होने का साहस रखा, बल्कि वो समाज में भी सकारात्मक बदलाव लाना चाहते हैं।

शरद पवार ने उद्धव ठाकरे के CM बनने की उम्मीदों पर फेरा पानी: कहा- कोई एक व्यक्ति MVA का सीएम चेहरा नहीं बन सकता, शिवसेना (UBT) ने की थी माँग

महाराष्ट्र के दिग्गज एवं एनसीपी (सपा) के प्रमुख नेता शरद पवार ने शिवसेना (UBT) के प्रमुख उद्धव ठाकरे की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। शिवसेना (UBT) इस बात पर जोर दे रही है कि महाराष्ट्र के आगामी विधानसभा चुनावों के लिए महाविकास अघाड़ी (MVA) के मुख्यमंत्री पद के चेहरे के रूप में उद्धव ठाकरे का नाम पेश किया जाना चाहिए। हालाँकि, पवार ने इसे खारिज कर दिया।

शरद पवार ने शनिवार (29 जून 2024) को कहा कि किसी व्यक्ति को सीएम चेहरे के रूप में पेश करने का विचार ठीक नहीं है। उन्होंने कहा, “हमारा गठबंधन हमारा सामूहिक चेहरा है। एक व्यक्ति हमारा मुख्यमंत्री पद का चेहरा नहीं बन सकता। सामूहिक नेतृत्व हमारा फॉर्मूला है।” दरअसल, सांसद संजय राउत ने ठाकरे के नाम को मुख्यमंत्री पद के चेहरे के तौर पर आगे बढ़ाया था।

पवार ने एमवीए में सभी वामपंथी दलों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विरोध करने वालों को शामिल करने का आह्वान भी किया। उन्होंने कहा, “हाल के लोकसभा चुनावों के दौरान पीडब्ल्यूपी (भारतीय किसान और श्रमिक पार्टी), आम आदमी पार्टी और कम्युनिस्ट पार्टियों ने हमारी मदद की। एमवीए में हम तीन भागीदार हैं, लेकिन हमें इन सभी दलों को शामिल करना चाहिए।”

शरद पवार ने आगे कहा, “मोदी का विरोध करने वाले सभी लोगों को एमवीए का हिस्सा बनाना चाहिए। मुख्यमंत्री पद के चेहरे के बारे में जो भी निर्णय लिया जाना है, वह चर्चा के माध्यम से और सभी को विश्वास में लेने के बाद लिया जाएगा।” इस बीच संजय राउत ने शनिवार (29 जून) को फिर कहा कि MVA को सीएम का चेहरा पेश करने की जरूरत है।

संजय राउत ने पहले कहा था, “मुख्यमंत्री पद के चेहरे के बिना महाराष्ट्र में चुनाव लड़ना एमवीए के लिए खतरनाक होगा। महाराष्ट्र ने देखा है कि उद्धव ठाकरे ने राज्य को कैसे सँभाला, खासकर कोविड-19 के महत्वपूर्ण दौर में। लोगों ने उद्धव ठाकरे की लोकप्रियता के कारण एमवीए को वोट दिया… एक चेहरा विहीन गठबंधन चुनाव जीतने में हमारी मदद नहीं करेगा।”

संजय राउत ने राहुल गाँधी को लेकर एक बड़ी बात भी कही। उन्होंने कहा, “अगर इंडिया ब्लॉक ने राहुल गाँधी को प्रधानमंत्री पद के चेहरे के तौर पर पेश किया होता तो हमें 25-30 सीटें और मिल जातीं… लोगों को पता होना चाहिए कि वे किसके लिए वोट कर रहे हैं। लोगों ने इंदिरा गाँधी और नरेंद्र मोदी को वोट दिया। वे चेहरा जानना चाहते हैं।”

सांसद राउत ने आगे कहा, “हमारे बीच इस बात पर कोई मतभेद नहीं है कि हमारा मुख्यमंत्री पद का चेहरा कौन होना चाहिए। हम एकजुट होकर चुनाव लड़ने के लिए दृढ़ हैं। हम 175 से 180 विधानसभा सीटें जीतेंगे।” बताते चलें कि इस साल अक्टूबर में महाराष्ट्र विधानसभा के चुनाव होने हैं। इसको लेकर मोहरे तैयार किए जाने लगे हैं।

‘उनका गुस्सा मीडिया टायकून्स से था’: राहुल गाँधी से अपमानित होने के बाद भी उनका बचाव कर रहीं पत्रकार मौसमी सिंह, वफादारी दिखाने के लिए ताक पर रखा आत्मसम्मान

कॉन्ग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने कुछ दिनों पहले ‘इंडिया टुडे’ की पत्रकार मौसमी सिंह को अपमानित किया था। इसके बावजूद भी वो अपने आत्मसम्मान को ताक पर रख कर कॉन्ग्रेस का बचाव कर रही हैं। असल में मौसमी सिंह ने जो सवाल प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूछा था, उसे राहुल गाँधी ने ‘BJP का सवाल’ बता दिया था। ‘द लल्लनटॉप’ पर सौरभ द्विवेदी ने इस दौरान मौसमी सिंह से इस घटना के संबंध में सवाल पूछा और राहुल गाँधी की आक्रामकता की आड़ में इसे जायज ठहराए जाने पर सवाल उठाया।

इसके जवाब में मौसमी सिंह ने कहा, “मैंने भी ये सोचा कि मुझे जब राहुल गाँधी ने एकदम से ऐसा कहा, तब मुझे लगा था कि इसमें भाजपा का सवाल कहाँ बनता है? फिर मुझे भी महसूस हुआ कि पिछले 10 वर्षों में एक धारणा, एक सोच राहुल गाँधी की इकोसिस्टम में है। जिस तरह से लगातार कॉन्ग्रेस भी कहती आई है और राहुल गाँधी ने भी इसे बार-बार दोहराया है कि उनकी छवि को बिगाड़ने में मीडिया का बड़ा योगदान रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि चमकाने के लिए राहुल गाँधी की छवि को बदनाम करना – ये भाजपा के लिए बहुत ज़रूरी था।”

मौसमी सिंह ने राहुल गाँधी का बचाव करते हुए कहा कि उन्हें ऐसा लगता है कि मीडिया का भी इस करतूत में बड़ा योगदान रहा। बकौल मौसमी सिंह, बाद में ब्रीफिंग में जब पूछा गया तो राहुल गाँधी ने कहा था कि उनका किसी रिपोर्टर के प्रति कोई घृणा की भावना नहीं है, उनका ये भी इरादा नहीं था कि किसी पत्रकार की ईमानदारी पर संदेह करें, लेकिन मीडिया के जो शीर्ष के लोग हैं उन्होंने एक भूमिका निभाई है और उन्हें लगता है कि ये टायकून्स इसके लिए जवाबदेह हैं।

मौसमी सिंह ने कहा कि राहुल गाँधी ने कई बार पत्रकारों से इस तरह की बात की है, लेकिन उन्हें भी इसका एहसास होगा कि इससे कुछ हासिल नहीं होगा। इस दौरान उन्होंने राहुल गाँधी को परिपक्व भी बता दिया और कहा कि नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद उन्होंने उन्हें पहचाना और उनसे हालचाल भी लिया। बता दें कि विपक्ष द्वारा संसद न चलने देने और लोगों के टैक्स के पैसे की बर्बादी पर मौसमी सिंह ने सवाल पूछा था, जिस पर भड़के राहुल गाँधी ने उन्हें भाजपा की टीशर्ट पहनने की सलाह दे डाली थी।

मंदिर के बाहर सो रहे पुजारी को चाकुओं से गोदा, लगाए ‘सर तन से जुदा’ के मजहबी नारे: इकबाल, महताब के साथ कई अन्य नामजद

हरियाणा के फरीदाबाद में शुक्रवार (28 जून 2024) को रवि भगत नाम के एक युवक की गर्दन काटने का प्रयास किया गया है। पीड़ित एक मंदिर का पुजारी है। इकबाल और महताब ने अपने साथियों के साथ मिलकर यह हमला मंदिर के सामने ही अंजाम दिया। बताया जा रहा है कि इस दौरान ‘सिर तन से जुदा’ के नारे भी लगाए गए। गंभीर रूप से घायल रवि भगत का अस्पताल में इलाज चल रहा है।

पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना फरीदाबाद के थाना क्षेत्र मुजेसर की है। यहाँ की जनता कॉलोनी में काली माता का एक मंदिर है। इस मंदिर की देखरेख और पूजा-पाठ का काम रवि भगत करते हैं। शुक्रवार की रात को रवि भगत मंदिर के बाहर चारपाई पर सो रहे थे।

आरोप है कि इसी दौरान हमलावर रवि भगत के पास आए और उन्हें दबोचा लिया और उनकी गर्दन चाकू से रेतने लगा। शिकायतकर्ता द्वारा बताया गया है कि हमलावरों ने सिर तन से जुदा के नारे भी लगाए।आसपास के कुछ अन्य निवासियों ने भी इस नारे को सुनने का दावा किया है। हमले के बाद हमलावर घटनास्थल से भाग निकले।

रवि भगत के रिश्तेदार ने बताया कि दिन भर प्याऊ में लोगों को पानी पिलाकर और मंदिर का विधि-विधान निबटाकर रवि भगत सोने चले गए थे। मंदिर के बाहर उनसे कुछ दूरी पर उनकी 5 साल की बेटी भी सो रही थी। आधी रात के बाद कुछ हमलावर मंदिर की तरफ आए और उन्होंने रवि भगत से बहस करना शुरू कर दिया। फिर हमला कर दिया।

आरोप है कि हमलावरों द्वारा हमले के दौरान चाकू और सूजे का इस्तेमाल किया गया था। घटना के दौरान पीड़ित पुजारी की बेटी अपने पिता की हालात देखकर चीखने लगी। चीखने की आवाज सुनकर आसपास के लोग मंदिर के पास जमा हो गए। लोगों का जमावड़ा देख कर हमलावर भाग निकले। हमलावरों में महताब और इक़बाल के अलावा शशि और वाधवा उपनाम वाले लोग भी बताए जा रहे हैं।

घायल पुजारी रवि भगत को अस्पताल में भर्ती करवाया गया, जहाँ उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। बताया जा रहा है कि रवि भगत के शरीर के कई हिस्सों में चाकू लगे हैं और उन काफी खून निकल चुका है।इस घटना के बाद हिन्दू संगठनों में आक्रोश फ़ैल गया है। बिट्टू बजरंगी ने फरीदाबाद में घटनास्थल पर हिन्दू पंचायत करने का एलान किया है।

पुलिस के मुताबिक अब तक की जाँच में धार्मिक उन्माद की बात निकल कर नहीं आई है। हालाँकि, इस घटना के अन्य पहलुओं को खंगाला जा रहा है। नामजद आरोपित फरार हैं, जिनकी तलाश में पुलिस द्वारा जगह-जगह दबिश दी जा रही है। घटनास्थल और आसपास के क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

‘ब्राह्मण घृणा ही बन जाती है हिन्दू घृणा, चर्च-मस्जिद के दरवाजे पर ही होता है इसका अंत’: बोले J साई दीपक – यूपी में हिन्दुओं के लिए चंद्रशेखर ‘रावण’ सबसे बड़ा खतरा

हिन्दू घृणा के खिलाफ अधिवक्ता J साई दीपक ने अपना वक्तव्य दिया है, सोशल मीडिया पर जम कर वायरल हो रहा है। उन्होंने बताया है कि कैसे एक गिरोह ब्राह्मणों के खिलाफ घृणा से शुरुआत करता है और वो बाद में हिन्दू घृणा का रूप ले लेता है। इसके लिए उन्होंने पंजाब का उदाहरण दिया, जहाँ ब्राह्मणों के खिलाफ घृणा के नाम पर खलिस्तानी विचारधारा प्रकट हुई और अब इसके तहत सिखों को हिन्दू विरोधी बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हम एक सीमावर्ती व महत्वपूर्ण राज्य को खो रहे हैं।

‘संगम टॉक्स’ में J साई दीपक ने कहा कि वो एकदम स्पष्ट है कि भारत की प्राचीन वैदिक परंपरा, जो कि हिन्दू धर्म की जड़ है, उस पर हमले की अनुमति देकर आप किसी न किसी रूप में हिन्दू धर्म पर हमले को रास्ता दे रहे हैं। अधिवक्ता ने इसके लिए तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश के तटवर्ती क्षेत्रों और केरल का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि आप ये बिलकुल नहीं कह सकते कि आप एक समूह को पंचिंग बैग बना कर हिन्दू धर्म को एक करने चले हैं।

बकौल J साई दीपक, आप बाहर किसी को घृणा के लिए पैदा नहीं कर पा रहे हैं, इसीलिए अपने भीतर ही किसी को आपने घृणा का विषय बना दिया है। उन्होंने चुनौती दी कि अगर आपके पास बाहर कोई घृणा करने के लिए मिल जाए, तो आप असली अपराधियों को पहचान लेंगे। उन्होंने बताया कि इसके बदले जिहादियों के साथ सहयोग किया जा रहा है और ब्राह्मणों का सफाया किया जा रहा है। J साई दीपक ने कहा कि कुछ लोगों ने हिंदुत्व के नाम पर जानबूझकर कुछ समूहों को निशाना बनाना चुना है, ये कौन सा अभियान है?

J साई दीपक ने कहा, “जो लोग वैदिक नियम-कायदों को मानते हैं, उन्हें आप क्या सन्देश भेज रहे हैं? वैदिक सनातन धर्म हिन्दू धर्म की जड़ है, ये जो महासमुद्र है उसका केंद्र है वो। आप उन संस्थाओं को क्या कह रहे हैं, देश छोड़ देने के लिए? फिर आप नक्सलियों और जिहादियों से अलग कैसे हुए? इस वायरस ने हमारी विचारधारा को संक्रमित कर दिया है। जमीन पर काम कर रहे लोग भुगत रहे हैं। उत्तर प्रदेश में हिन्दुओं को सबसे बड़ा खतरा चंद्रशेखर आज़ाद ‘रावण’ से आने वाला है। हिन्दू एकता के नाम पर आप उसके पास भी जाते हैं, और बाकी सबको दरकिनार करते हैं।”

J साई दीपक ने कहा कि आप कुछ नया नहीं बना रहे हैं, लेकिन हजारों वर्षों से जो बनाया गया है उसे तबाह कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर आप वर्णाश्रम धर्म को सिर्फ और सिर्फ छुआछूत वाले विषय की नज़र से देखते हैं तो आपके साथ गद्दार की तरह व्यवहार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण घृणा बाद में हिन्दू घृणा बन जाती है और इसका अंत चर्च या मस्जिद के दरवाजे पर होता है। इस चर्चा में वैज्ञानिक आनंद रंगनाथन भी मौजूद थे।

इस चर्चा में J साईं दीपक ने ये भी बताया कि शिक्षा व्यवस्था में जो वामपंथी विचारधारा घुस गई थी वो अब तक नहीं हटाई गई है। उन्होंने ‘होठों पर सावरकर, रीढ़ में गाँधी और आत्मा में मार्क्स’ कह कर तंज कसा। सुप्रीम कोर्ट के वकील ने इस दौरान जम्मू में बढ़ती रोहिंग्या मुस्लिमों की जनसंख्या पर भी सवाल खड़ा किया। उन्होंने पूछा कि जम्मू कश्मीर में आतंकी घटनाओं को लेकर कितने लोगों ने सरकार से सवाल पूछा? उन्होंने कहा कि हम एक अँधेरे रास्ते पर ले जाए जा रहे हैं, हमें माला पहना दिया गया है और संगीत बज रहा है।

जम्मू-कश्मीर में अवैध मस्जिद को ढहाने पहुँची टीम पर हमला: तोड़ डाला बुलडोजर, DSP समेत 6 पुलिसकर्मी घायल

केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में बवाल हो गया। यहाँ अवैध मस्जिद तोड़ने पहुँची प्रशासनिक टीम पर लोगों ने हमला बोल दिया। इस हमले में एक डीएसपी समेत 6 अधिकारी घायल हो गए। इस दौरान भीड़ ने बुलडोजर को भी तोड़ दिया। हिंसक भीड़ को कंट्रोल करने के लिए पुलिस वालों को हवाई फायरिंग करनी पड़ी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये मामला कठुआ जिले के नागरी तहसील स्थित कल्याणपुर पादरी इलाके का है, जहाँ शनिवार (29 जून 2024) की सुबह खूब हंगामा हुआ। यहाँ अवैध रूप से बनाई गई एक मस्जिद को तोड़ने के लिए सरकारी अधिकारी जेसीबी मशीन लेकर पहुँचे थे। मस्जिद पर बुलडोजर चलाए जाने की खबर आग की तरह फैल गई और वहाँ गुज्जर बकरवाल समुदाय के लोग भारी संख्या में जमा हो गए। खबर है कि इन लोगों ने वहां पथराव शुरू कर दिया, जिसमें डीएसपी रेंक के एक अधिकारी सहित 6 पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए। इस दौरान मस्जिद तोड़ने के लिए लाई गई जेसीबी भी लोगों ने तोड़ दी। इलाके में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है।

बताया जा रहा है कि मस्जिद सरकारी जमीन पर बनी है। इस अतिक्रमण रोधी अभियान में शामिल एक अधिकारी ने बताया, “जब उन्होंने अपना अभियान शुरू किया, तो एक विशेष समुदाय के लोगों ने उन पर हमला कर दिया। पुलिस को बिगड़ी हालात को कंट्रोल करने के लिए चेतावनी के तौर पर हवा में गोलियाँ चलानी पड़ीं।” इस घटना में घायल अधिकारियों को तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उनका इलाज चल रहा है। इलाके में माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है, जिसके चलते वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी स्थिति पर कड़ी नजर रख रहे हैं।

अधिकारियों ने कहा, “अतिरिक्त पुलिस बलों की तैनाती का मकसद हालात को आगे बिगड़ने से रोकना और सभी लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।” उन्होंने आगे कहा, “अधिकारी इस घटना को गंभीरता से ले रहे हैं और हालात को काबू में रखते हुए इस मसले का हल निकालने की कोशिश कर रहे हैं।”

Times of India के अनुसार आर्मी अफसर बलिदानियों की विधवाओं से करते हैं ‘सेक्स’ की माँग: फर्जी हेडलाइन से छाप दी रिपोर्ट, बवाल के बाद बदला

अंग्रेजी दैनिक ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ ने गुरुवार (27 जून) को खबर दी कि अधिकारियों ने 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान बलिदान हुए सैनिकों की पत्नियों से यौन संबंध बनाने की माँग की थी। उस लेख का शीर्षक कुछ ऐसा था, ‘हम कारगिल विधवाएँ अधिकारियों की वासना की संतुष्टि के लिए आसान लक्ष्य थीं।’ इससे लगता है कि सेना के अधिकारी इस तरह की माँग कर रहे थे।

शीर्षक में शब्दों का चयन चालाकी से किया गया था। इससे पता चलता था कि कारगिल युद्ध में हुतात्मा सैनिकों की विधवाओं को सेना के अधिकारी अपनी वासना की पूर्ति के लिए शिकार बनाया गया था। हालाँकि, लेख को ध्यान से पढ़ने से यह स्पष्ट हो जाता है कि पीड़ितों से यौन संबंध बनाने की माँग करने वाले लोग सेना के अधिकारी नहीं, बल्कि सरकारी कार्यालयों के कर्मचारी थे।

टाइम्स ऑफ इंडिया की विवादास्पद हेडलाइन का स्क्रीनशॉट

TOI के अनुसार, 60 वर्षीय इंदु सिंह को संकट के समय सहायता के बजाय कई वर्षों तक सरकारी कार्यालयों में उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। वह सीमा सुरक्षा बल (BSF) के बलिदानी इंस्पेक्टर इंद्रजीत सिंह की विधवा ने कहा कि मेरठ में एक सरकारी अधिकारी ने वासना के कारण उनके साथ दुर्व्यवहार किया था। आरोपित अधिकारी ने उन्हें अपने पैरों से अनुचित तरीके से छुआ भी था।

लालकृष्ण आडवाणी के हस्तक्षेप के बाद अधिकारी निलंबित हुआ

रिपोर्ट के अनुसार, “उक्त अधिकारी को उनके संबंधित गाँवों में शहीदों के स्मारकों के निर्माण के लिए भूमि आवंटन की देखरेख का काम सौंपा गया था। जब वह आवंटन के संबंध में कुछ मदद के लिए उसके सामने बैठी थी तो अधिकारी ने उनके पैर छुए थे।” इंदु सिंह द्वारा 2001 में तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री से संपर्क करने के बाद उक्त अधिकारी को निलंबित कर दिया गया था।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में आगे कहा गया, “अधिकारी की अनुचित हरकतों और अन्य युद्ध विधवाओं से अधिकारियों के उनके प्रति अपमानजनक रवैये के बारे में सुनने के बाद इंदु ने कहा कि उन्होंने 2001 में तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी से अधिकारी के खिलाफ शिकायत करने का फैसला किया। आडवाणी के हस्तक्षेप के बाद अधिकारी को निलंबित कर दिया गया।”

यह कोई अकेली घटना नहीं है: इंदु सिंह

इंदु सिंह ने एक और घटना का भी जिक्र किया, जिसमें सरकारी स्वामित्व वाली जीवन बीमा निगम (LIC) के एक अधिकारी ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया था। सरकारी कार्यालयों में अधिकारियों द्वारा की जाने वाली इन हरकतों में दोहरे अर्थ वाली बातें करना, विधवाओं को अपने बगल में बैठने के लिए मजबूर करना या उन्हें देर तक रुकने के लिए कहना शामिल था।

पीड़िता ने कहा, “मैं पढ़ी-लिखी थी और हर मौके पर इस कृत्य का विरोध करती थी। हालाँकि, अधिकांश युवा विधवाएँ, जो अशिक्षित थीं और ग्रामीण क्षेत्रों से थीं और बाहरी दुनिया से उनका कोई संपर्क नहीं था, उन्हें परेशान किया जाता था।” इंदु सिंह के अनुसार, सरकारी अधिकारी विधवाओं को ‘आसान शिकार’ मानते थे। उन्होंने बताया, “विधवापन के शुरुआती दिनों में मैंने नैतिकता का पूर्ण पतन देखा।”

लोगों की नाराजगी के बाद टाइम्स ऑफ इंडिया ने शीर्षक बदला

लेख की विषय-वस्तु से स्पष्ट है कि कारगिल युद्ध की विधवा इंदु सिंह द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोप राज्य सरकार के अधिकारियों पर लगाए गए थे, न कि भारतीय सेना के अधिकारियों पर। TOI ने पाठकों को गुमराह करने का प्रयास किया। खासकर उन लोगों को जो इस लेख को पूरा पढ़ने का धैर्य नहीं रखते।

सोशल मीडिया पर आक्रोश के बाद अंग्रेजी दैनिक ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ को इस लेख का शीर्षक बदलने के लिए मजबूर होना पड़ा। इस लेख का नया शीर्षक है, ‘हम कारगिल की विधवाएँ “सरकारी अधिकारियों के अवांछित प्रयासों का आसान लक्ष्य थीं”।’

हालाँकि, भारतीय मीडिया क्षेत्र में क्लिकबेट लेखों की कोई कमी नहीं है, लेकिन एक प्रमुख अंग्रेजी दैनिक को ध्यान आकर्षित करने के लिए भ्रामक रणनीति का सहारा लेते देखना निराशाजनक था।

अयोध्या में खराब सड़क मामले में 6 इंजीनियर सस्पेंड: बारिश के कारण कई जगह धँसी राम पथ, PWD और जल विभाग दोनों पर गिरी गाज

प्री-मानसून की पहली बारिश में अयोध्या गलत कारणों से चर्चा में आ गया था। बारिश की वजह से अयोध्या में बना राम पथ कई जगहों पर धंस गया था और सड़कों पर गड्ढे बन गए थे। राम पथ के धँसने की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही थी, जिसके बाद अब यूपी सरकार ने एक्शन शुरु कर दिया है। यूपी सरकार ने लोक निर्माण विभाग यानी पीडब्ल्यूडी और जल निगम के 6 इंजीनियरों-अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूपी सरकार ने पीडब्ल्यूडी के तीन इंजीनियरों अधिशासी अभियंता ध्रुव अग्रवाल, सहायक अभियंता अनुज देशवाल और कनिष्ठ अभियंता प्रभात पाण्डेय को सस्पेंड कर दिया है, तो जल निगम के अधिशासी अभियंता आनंद कुमार दुबे, सहायक अभियंता राजेंद्र कुमार यादव और कनिष्ठ अभियंता मोहम्मद शाहिद पर भी गाज गिराई है। इन सभी इंजीनियरों-अधिकारियों को पद से हटा दिया गया है। जाँच के बाद रिपोर्ट आने के बाद इन पर और भी कठोर कदम उठाया जा सकता है।

अधिकारियों ने निर्माण कार्य की घटिया गुणवत्ता को इस ढहने का मुख्य कारण बताया है। घटना पर राज्य सरकार की त्वरित प्रतिक्रिया में न केवल इंजीनियरों को निलंबित करना शामिल है, बल्कि सिविल कार्यों में शामिल गुजरात स्थित फर्म की जिम्मेदारियों की गहन जाँच भी शुरू करना शामिल है। फर्म को निर्माण चरणों के दौरान बनाए गए गुणवत्ता और मानकों के बारे में स्पष्टीकरण देने के लिए नोटिस दिया गया है।

गौरतलब है कि अयोध्या में बारिश के बाद निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठे थे। सड़कों के धंस जाने की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी। इसके बाद विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की भी कोशिश की थी। उन्होंने अयोध्या में हुए विकास कार्यों में भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए थे। बता दें कि अयोघ्या में अकेले सड़कों, सीवर लाइनों के निर्माण के लिए 600 करोड़ से भी अधिक धनराशि खर्च की गई थी, लेकिन पहली बारिश में कई जगहों पर सड़क के धंस जाने की तस्वीरें सामने आने के बाद इन पैसों के बंदरबाँट के आरोप लगने लगे थे।

हिन्दू देवी-देवताओं पर जम कर चुटकुले सुनाता है, पैगंबर मुहम्मद पर ज्ञान देने लगता है Meta AI: इस्लामी आतंकियों का भी करता है बचाव

भारत में सेक्युलरिज्म का एक नंगा नाच चलता है, जिसके तहत हिन्दू देवी-देवताओं का तो फिल्मों में मनोरंजन और क्रिएटिव लिबर्टी के नाम पर खूब मजाक बनाया जाता है, लेकिन जब बात इस्लाम या ईसाई मजहब की हो तो फूँक-फूँक कर कदम रखे जाते हैं। अब Meta ने जो अपना नया AI चैटबॉट लॉन्च किया है, वो भी इसी ट्रेंड को फॉलो कर रहा है। वो भगवान श्रीराम पर तो चुटकुले सुनाता है, लेकिन बात पैगंबर मुहम्मद की हो तो चुप बैठ जाता है।

किसी भी धर्म/मजहब/पंथ की पवित्र हस्तियों पर टिप्पणी गलत है, उनका मजाक नहीं बनाया जाना चाहिए। लेकिन, Meta AI इस मामले में पक्षपात करता है। उदाहरण के लिए, हमने Whatsapp पर उपलब्ध Meta AI से भगवान श्रीराम को लेकर चुटकुला सुनाने को कहा तो उसने सुनाया, “राम जिम क्यों गए? – थोड़ा सा RAM पॉवर पाने के लिए। (आपने इसे समझा? कम्प्यूटर मेमोरी की तरह, साथ में शक्ति भी।) आशा है कि इस पर आपको हँसी आई।”

चूँकि श्रीराम पर Meta AI ने चुटकुला सुना दिया, इसीलिए हमने बस जाँचने के लिए इसे पैगंबर मुहम्मद पर चुटकुला सुनाने को कहा। इसके बाद ये ज्ञान देने लगा, जो श्रीराम के समय ये भूल गया था। इसने स्पष्ट जवाब दिया, “मैं मुहम्मद के बारे में कोई चुटकुला नहीं सुना सकता। क्या आप कुछ और के बारे में चुटकुला सुनना चाहेंगे?” इसी तरह जब इससे कहा जाता है कि हिन्दू देवी-देवताओं पर चुटकुला सुनाओ तो ये भरपूर चुटकुले सुनाता है।

उदाहरण के लिए, देखिए – “ब्राह्मण, विष्णु और शिव जिम क्यों गए? – त्रिमूर्ति शरीर पाने के लिए! (त्रिमूर्ति हिन्दू धर्म में एक धारणा है जो विश्व के 3 स्वरूपों का प्रतिनिधित्व करता है। ब्रह्मा, विष्णु और शिव इसका प्रतिनिधित्व करते हैं। Trimurti में मैं Trim शब्द का इस्तेमाल कर रहा हूँ, जिसका अर्थ है फिट बॉडी।) मुझे आशा है कि ये आपके चेहरे पर मुस्कान लेकर आया।” देखा आपने, कैसे Meta AI ने हिन्दू देवी-देवताओं पर एक ऐसा चुटकुला सुनाया जबरदस्ती का जिस पर कोई हँसी नहीं आती, उनका अपमान होता है सो अलग।

वहीं, इसे अगर कहा जाता है कि इस्लामी हस्तियों पर चुटकुला सुनाओ तो ये कहता है, “मैं विभिन्न विषयों पर चुटकुले सुना सकता है, लेकिन मैं ऐसे चुटकुलों को नज़रअंदाज़ करूँगा जो किसी भी मजहबी हस्ती या आस्था के लिए अपमानजनक या आपत्तिजनक हो। इसके बदले मैं आपको अन्य विषयों पर चुटकुले सुना सकता हूँ। क्या आप किसी अन्य विषय पर चुटकुले सुनना चाहेंगे?” यानी, हिन्दू और इस्लाम के लिए Meta AI के अलग अलग मानक हैं – हिन्दू धर्म का मजाक बनाओ, इस्लाम का नहीं।

Meta AI ये भी मानने को तैयार नहीं है कि अधिकतर आतंकवादी मुस्लिम ही होते हैं। ये अलग बात है कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान, सीरिया, यमन, नाइजीरिया और फिलिस्तीन में इस्लामी आतंकी गढ़ बनाए हुए हैं। लेकिन, Meta AI कहता है, “यह एक हानिकारक रूढ़ि है। अधिकांश मुस्लिम आतंकवाद और हिंसा को अस्वीकार करते हैं। क्या आपके पास कोई और सवाल है?” अब आप बताइए, अलकायदा, बोको हराम, जैश-ए-मुहम्मद, ISIS और तालिबान से लेकर हमास तक सभी इस्लामी आतंकी संगठन हैं लेकिन Meta AI को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।

Meta AI इस्लामी हस्तियों पर चुटकुले सुनाने से डरता है और हिन्दू देवी-देवताओं पर खुल कर जोक्स क्रैक करता है, लेकिन फिर भी वो ये मानने को तैयार नहीं है कि हिन्दू सबसे ज़्यादा सहिष्णु होते हैं। हिन्दुओं और मुस्लिमों में अधिक सहिष्णु कौन है, ये पूछने पर वो कहता है, “हिंदू धर्म और इस्लाम दोनों में व्याख्याओं और प्रथाओं की एक विस्तृत श्रृंखला है, और यह स्पष्ट रूप से कहना मुश्किल है कि कौन सा धर्म अधिक सहिष्णु है। दोनों धर्मों का अन्य धर्मों के साथ शांतिपूर्ण ढंग से सह-अस्तित्व का इतिहास रहा है, और दोनों ही हिंसा और असहिष्णुता से भी जुड़े रहे हैं।

इसे बाद वो Tolerance की परिभाषा समझाने लगता है और कहता है कि यह पहचानना महत्वपूर्ण है कि सहिष्णुता एक जटिल मूल्य है जिसे अलग-अलग तरीकों से व्यक्त किया जा सकता है, और दोनों धर्मों के भीतर व्यक्तियों और समुदायों ने दूसरों के प्रति सहिष्णुता के विभिन्न स्तरों को दिखाया है। Meta AI कहता है कि यह तुलना करने के बजाय कि कौन सा धर्म अधिक सहिष्णु है, सभी धर्मों और विश्वास प्रणालियों के बीच आपसी समझ, सम्मान और सह-अस्तित्व को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित करना अधिक उत्पादक है।

हिन्दुओं को अधिक सहिष्णु नहीं मानता Meta AI, ज़्यादातर आतंकी मुस्लिम हैं ये भी नहीं मानता

भारत में हिन्दुओं ने बौद्ध, जैन, सिख, ईसाई, इस्लाम, पारसी और यहूदी से लेकर सभी धर्मों का स्वागत किया, जबकि अरब मुल्कों में सार्वजनिक रूप से इस्लाम के अलावा किसी अन्य धर्म के प्रदर्शन पर भी पाबन्दी है। अब धीरे-धीरे वहाँ भी मंदिर बन रहे हैं, श्रद्धालु पहुँच रहे हैं लेकिन हालात हमेशा वैसे नहीं थे। भारत में प्राचीन काल से सहिष्णुता की भावना रही है। इसके बावजूद Meta AI हिन्दुओं को अधिक सहिष्णु मानने के लिए तैयार नहीं है।

कॉमर्स ग्रेजुएट ईशा ने पति और बच्चे को छोड़ा, 6वीं फेल साइबर फ्रॉड मुस्ताक आलम के साथ करने लगी ठगी: ₹5 करोड़ भेजा पाकिस्तान, गिरफ्तार

बिहार की रहने वाली ईशा कॉमर्स ग्रेजुएट है। उसकी शादी नेपाल में हुई थी। डेढ़ साल का बच्चा है, जिसे वो अपने मायके में छोड़ चुकी है। पति को भी वो छोड़ चुकी है और पटना में 6वीं कक्षा फेल साइबर फ्रॉड मुश्ताक आलम (मीडिया रिपोर्ट्स में नेश्ताक भी बताया जा रहा है) के साथ मिलकर ठगी करने लगी और उसी के साथ रहने लगी। अब बिहार पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार किया है। ईशा इंस्टाग्राम पर रील्स भी बनाती थी और रील्स के जरिए ही मुश्ताक आलम के संपर्क में आई थी।

ईशा जायसवाल मोतिहारी की रहने वाली है। उसने बी.कॉम तक पढ़ाई की है। साल 2020 में उसकी शादी हुई थी, लेकिन पति को छोड़ दिया और बच्चे के साथ मायके आ गई। यहाँ से वो दिल्ली चली गई और फिर पटना को अपना ठिकाना बना लिया। मुश्ताक आलम के साथ मिलकर वो ठगी की वारदातों को अंजाम देने लगी थी और अब पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है।

पाकिस्तान भेजते थे रुपए

ईशा और मुश्ताक के पास से 5 करोड़ रुपए पाकिस्तान भेजने का मनी ट्रेल मिला है। दोनों ठगी के पैसों का 10% हिस्सा बतौर कमीशन रख लेते थे और बाकी पैसों को पाकिस्तान भेज देते थे। पुलिस को दोनों के पास से 5 करोड़ की मनी ट्रेल मिली है, जो पाकिस्तान तक जा रही है। पुलिस अब इनकी कुंडली खंगाल रही है। बताया जा रहा है कि ये जामताड़ा से लेकर भोपाल और मुंबई तक के साइबर फ्रॉड्स के साथ मिलकर काम करते थे।

कटिहार पुलिस के साइबर सेल के पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) सद्दाम हुसैन ने कहा कि वे तकनीकी निगरानी के जरिए साइबर जालसाजों पर नजर रख रहे हैं। साइबर पुलिस स्टेशन के हेड ने बताया कि पूछताछ के दौरान दोनों ने पड़ोसी देश से सीधे संपर्क की बात कबूल की है। उन्होंने बताया, “वे मुल्तान, पाकिस्तान से ऑडियो और वीडियो कॉल के जरिए ये धोखाधड़ी की वारदातें अंजाम देते थे। उन्होंने एक दर्जन से ज्यादा पाकिस्तानी बैंक पासबुक की जानकारी भी दी है।” पिछले 5 महीनों में उन्होंने सीडीएम (कैश डिपॉज़िट मशीन) और हवाला के ज़रिए पाकिस्तानी साइबर अपराधियों को अब तक लगभग 5 करोड़ रुपए भेज चुके हैं। पुलिस ने इनके पास से 16 एटीएम कार्ड, 6 मोबाइल और 6 सिम बरामद किए हैं।

ऐसे देते थे ठगी को अंजाम

ईशा एटीएम मशीन पर पहुँचे लोगों का कार्ड बदलने में माहिर हो गई थी। इसके बाद दोनों मिलकर पैसों की हेरफेर करते। कटिहार पुलिस सूत्रों के अनुसार ईशा और नेस्ताक (मुस्ताक) एक साल से अधिक समय से साथ रह रहे थे। इस दौरान मुस्ताक ने ईशा को एटीएम फ्रॉड का एक्सपर्ट बना दिया। ईशा एटीएम लाइन में खड़ी रहती थी और अनजान एटीएम उपयोगकर्ताओं की मदद करने के बहाने ग्राहकों के एटीएम कार्ड बदल लेती थी और बाद में असली कार्ड से ट्रांजेक्शन कर लेती थी। वह जरूरत पड़ने पर फोन करके किसी न किसी बहाने से लोगों को ठगती भी थी। 

गौरतलब है कि बिहार के चंपारण जिले में जौकटिया, लाल सरैया और रामनगर बनकट जैसी कुछ पंचायतें जाँच एजेंसियों के रडार पर हैं क्योंकि इन इलाकों के युवा साइबर अपराध में शामिल होने के लिए कुख्यात हैं। रिपोर्ट के अनुसार, ईडी, आईटी और एनआईए ने इन इलाकों में कई जगहों पर छापेमारी की है। साइबर ठगी करने वाले ज्यादातर लोग जौकटिया से ही गिरफ्तार किए गए हैं। बेतिया पुलिस सूत्रों के अनुसार, जौकटिया से 50 से ज्यादा युवाओं को गिरफ्तार किया गया है। 

पुलिस के अनुसार, गाँव के करीब 700 से 1000 युवा साइबर अपराध में संलिप्त हैं। 24 वर्षीय मुश्ताक जौकटिया पुराना टोला का रहने वाला है। चार साल पहले छठी फेल आलम बेतिया में इलेक्ट्रीशियन का काम करता था, तभी वह अपने गाँव में साइबर अपराधियों के संपर्क में आया। उनके जरिए उसने पाकिस्तानी नेटवर्क से संपर्क बनाया।