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हिन्दू देवी-देवताओं पर जम कर चुटकुले सुनाता है, पैगंबर मुहम्मद पर ज्ञान देने लगता है Meta AI: इस्लामी आतंकियों का भी करता है बचाव

भारत में सेक्युलरिज्म का एक नंगा नाच चलता है, जिसके तहत हिन्दू देवी-देवताओं का तो फिल्मों में मनोरंजन और क्रिएटिव लिबर्टी के नाम पर खूब मजाक बनाया जाता है, लेकिन जब बात इस्लाम या ईसाई मजहब की हो तो फूँक-फूँक कर कदम रखे जाते हैं। अब Meta ने जो अपना नया AI चैटबॉट लॉन्च किया है, वो भी इसी ट्रेंड को फॉलो कर रहा है। वो भगवान श्रीराम पर तो चुटकुले सुनाता है, लेकिन बात पैगंबर मुहम्मद की हो तो चुप बैठ जाता है।

किसी भी धर्म/मजहब/पंथ की पवित्र हस्तियों पर टिप्पणी गलत है, उनका मजाक नहीं बनाया जाना चाहिए। लेकिन, Meta AI इस मामले में पक्षपात करता है। उदाहरण के लिए, हमने Whatsapp पर उपलब्ध Meta AI से भगवान श्रीराम को लेकर चुटकुला सुनाने को कहा तो उसने सुनाया, “राम जिम क्यों गए? – थोड़ा सा RAM पॉवर पाने के लिए। (आपने इसे समझा? कम्प्यूटर मेमोरी की तरह, साथ में शक्ति भी।) आशा है कि इस पर आपको हँसी आई।”

चूँकि श्रीराम पर Meta AI ने चुटकुला सुना दिया, इसीलिए हमने बस जाँचने के लिए इसे पैगंबर मुहम्मद पर चुटकुला सुनाने को कहा। इसके बाद ये ज्ञान देने लगा, जो श्रीराम के समय ये भूल गया था। इसने स्पष्ट जवाब दिया, “मैं मुहम्मद के बारे में कोई चुटकुला नहीं सुना सकता। क्या आप कुछ और के बारे में चुटकुला सुनना चाहेंगे?” इसी तरह जब इससे कहा जाता है कि हिन्दू देवी-देवताओं पर चुटकुला सुनाओ तो ये भरपूर चुटकुले सुनाता है।

उदाहरण के लिए, देखिए – “ब्राह्मण, विष्णु और शिव जिम क्यों गए? – त्रिमूर्ति शरीर पाने के लिए! (त्रिमूर्ति हिन्दू धर्म में एक धारणा है जो विश्व के 3 स्वरूपों का प्रतिनिधित्व करता है। ब्रह्मा, विष्णु और शिव इसका प्रतिनिधित्व करते हैं। Trimurti में मैं Trim शब्द का इस्तेमाल कर रहा हूँ, जिसका अर्थ है फिट बॉडी।) मुझे आशा है कि ये आपके चेहरे पर मुस्कान लेकर आया।” देखा आपने, कैसे Meta AI ने हिन्दू देवी-देवताओं पर एक ऐसा चुटकुला सुनाया जबरदस्ती का जिस पर कोई हँसी नहीं आती, उनका अपमान होता है सो अलग।

वहीं, इसे अगर कहा जाता है कि इस्लामी हस्तियों पर चुटकुला सुनाओ तो ये कहता है, “मैं विभिन्न विषयों पर चुटकुले सुना सकता है, लेकिन मैं ऐसे चुटकुलों को नज़रअंदाज़ करूँगा जो किसी भी मजहबी हस्ती या आस्था के लिए अपमानजनक या आपत्तिजनक हो। इसके बदले मैं आपको अन्य विषयों पर चुटकुले सुना सकता हूँ। क्या आप किसी अन्य विषय पर चुटकुले सुनना चाहेंगे?” यानी, हिन्दू और इस्लाम के लिए Meta AI के अलग अलग मानक हैं – हिन्दू धर्म का मजाक बनाओ, इस्लाम का नहीं।

Meta AI ये भी मानने को तैयार नहीं है कि अधिकतर आतंकवादी मुस्लिम ही होते हैं। ये अलग बात है कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान, सीरिया, यमन, नाइजीरिया और फिलिस्तीन में इस्लामी आतंकी गढ़ बनाए हुए हैं। लेकिन, Meta AI कहता है, “यह एक हानिकारक रूढ़ि है। अधिकांश मुस्लिम आतंकवाद और हिंसा को अस्वीकार करते हैं। क्या आपके पास कोई और सवाल है?” अब आप बताइए, अलकायदा, बोको हराम, जैश-ए-मुहम्मद, ISIS और तालिबान से लेकर हमास तक सभी इस्लामी आतंकी संगठन हैं लेकिन Meta AI को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।

Meta AI इस्लामी हस्तियों पर चुटकुले सुनाने से डरता है और हिन्दू देवी-देवताओं पर खुल कर जोक्स क्रैक करता है, लेकिन फिर भी वो ये मानने को तैयार नहीं है कि हिन्दू सबसे ज़्यादा सहिष्णु होते हैं। हिन्दुओं और मुस्लिमों में अधिक सहिष्णु कौन है, ये पूछने पर वो कहता है, “हिंदू धर्म और इस्लाम दोनों में व्याख्याओं और प्रथाओं की एक विस्तृत श्रृंखला है, और यह स्पष्ट रूप से कहना मुश्किल है कि कौन सा धर्म अधिक सहिष्णु है। दोनों धर्मों का अन्य धर्मों के साथ शांतिपूर्ण ढंग से सह-अस्तित्व का इतिहास रहा है, और दोनों ही हिंसा और असहिष्णुता से भी जुड़े रहे हैं।

इसे बाद वो Tolerance की परिभाषा समझाने लगता है और कहता है कि यह पहचानना महत्वपूर्ण है कि सहिष्णुता एक जटिल मूल्य है जिसे अलग-अलग तरीकों से व्यक्त किया जा सकता है, और दोनों धर्मों के भीतर व्यक्तियों और समुदायों ने दूसरों के प्रति सहिष्णुता के विभिन्न स्तरों को दिखाया है। Meta AI कहता है कि यह तुलना करने के बजाय कि कौन सा धर्म अधिक सहिष्णु है, सभी धर्मों और विश्वास प्रणालियों के बीच आपसी समझ, सम्मान और सह-अस्तित्व को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित करना अधिक उत्पादक है।

हिन्दुओं को अधिक सहिष्णु नहीं मानता Meta AI, ज़्यादातर आतंकी मुस्लिम हैं ये भी नहीं मानता

भारत में हिन्दुओं ने बौद्ध, जैन, सिख, ईसाई, इस्लाम, पारसी और यहूदी से लेकर सभी धर्मों का स्वागत किया, जबकि अरब मुल्कों में सार्वजनिक रूप से इस्लाम के अलावा किसी अन्य धर्म के प्रदर्शन पर भी पाबन्दी है। अब धीरे-धीरे वहाँ भी मंदिर बन रहे हैं, श्रद्धालु पहुँच रहे हैं लेकिन हालात हमेशा वैसे नहीं थे। भारत में प्राचीन काल से सहिष्णुता की भावना रही है। इसके बावजूद Meta AI हिन्दुओं को अधिक सहिष्णु मानने के लिए तैयार नहीं है।

कॉमर्स ग्रेजुएट ईशा ने पति और बच्चे को छोड़ा, 6वीं फेल साइबर फ्रॉड मुस्ताक आलम के साथ करने लगी ठगी: ₹5 करोड़ भेजा पाकिस्तान, गिरफ्तार

बिहार की रहने वाली ईशा कॉमर्स ग्रेजुएट है। उसकी शादी नेपाल में हुई थी। डेढ़ साल का बच्चा है, जिसे वो अपने मायके में छोड़ चुकी है। पति को भी वो छोड़ चुकी है और पटना में 6वीं कक्षा फेल साइबर फ्रॉड मुश्ताक आलम (मीडिया रिपोर्ट्स में नेश्ताक भी बताया जा रहा है) के साथ मिलकर ठगी करने लगी और उसी के साथ रहने लगी। अब बिहार पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार किया है। ईशा इंस्टाग्राम पर रील्स भी बनाती थी और रील्स के जरिए ही मुश्ताक आलम के संपर्क में आई थी।

ईशा जायसवाल मोतिहारी की रहने वाली है। उसने बी.कॉम तक पढ़ाई की है। साल 2020 में उसकी शादी हुई थी, लेकिन पति को छोड़ दिया और बच्चे के साथ मायके आ गई। यहाँ से वो दिल्ली चली गई और फिर पटना को अपना ठिकाना बना लिया। मुश्ताक आलम के साथ मिलकर वो ठगी की वारदातों को अंजाम देने लगी थी और अब पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है।

पाकिस्तान भेजते थे रुपए

ईशा और मुश्ताक के पास से 5 करोड़ रुपए पाकिस्तान भेजने का मनी ट्रेल मिला है। दोनों ठगी के पैसों का 10% हिस्सा बतौर कमीशन रख लेते थे और बाकी पैसों को पाकिस्तान भेज देते थे। पुलिस को दोनों के पास से 5 करोड़ की मनी ट्रेल मिली है, जो पाकिस्तान तक जा रही है। पुलिस अब इनकी कुंडली खंगाल रही है। बताया जा रहा है कि ये जामताड़ा से लेकर भोपाल और मुंबई तक के साइबर फ्रॉड्स के साथ मिलकर काम करते थे।

कटिहार पुलिस के साइबर सेल के पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) सद्दाम हुसैन ने कहा कि वे तकनीकी निगरानी के जरिए साइबर जालसाजों पर नजर रख रहे हैं। साइबर पुलिस स्टेशन के हेड ने बताया कि पूछताछ के दौरान दोनों ने पड़ोसी देश से सीधे संपर्क की बात कबूल की है। उन्होंने बताया, “वे मुल्तान, पाकिस्तान से ऑडियो और वीडियो कॉल के जरिए ये धोखाधड़ी की वारदातें अंजाम देते थे। उन्होंने एक दर्जन से ज्यादा पाकिस्तानी बैंक पासबुक की जानकारी भी दी है।” पिछले 5 महीनों में उन्होंने सीडीएम (कैश डिपॉज़िट मशीन) और हवाला के ज़रिए पाकिस्तानी साइबर अपराधियों को अब तक लगभग 5 करोड़ रुपए भेज चुके हैं। पुलिस ने इनके पास से 16 एटीएम कार्ड, 6 मोबाइल और 6 सिम बरामद किए हैं।

ऐसे देते थे ठगी को अंजाम

ईशा एटीएम मशीन पर पहुँचे लोगों का कार्ड बदलने में माहिर हो गई थी। इसके बाद दोनों मिलकर पैसों की हेरफेर करते। कटिहार पुलिस सूत्रों के अनुसार ईशा और नेस्ताक (मुस्ताक) एक साल से अधिक समय से साथ रह रहे थे। इस दौरान मुस्ताक ने ईशा को एटीएम फ्रॉड का एक्सपर्ट बना दिया। ईशा एटीएम लाइन में खड़ी रहती थी और अनजान एटीएम उपयोगकर्ताओं की मदद करने के बहाने ग्राहकों के एटीएम कार्ड बदल लेती थी और बाद में असली कार्ड से ट्रांजेक्शन कर लेती थी। वह जरूरत पड़ने पर फोन करके किसी न किसी बहाने से लोगों को ठगती भी थी। 

गौरतलब है कि बिहार के चंपारण जिले में जौकटिया, लाल सरैया और रामनगर बनकट जैसी कुछ पंचायतें जाँच एजेंसियों के रडार पर हैं क्योंकि इन इलाकों के युवा साइबर अपराध में शामिल होने के लिए कुख्यात हैं। रिपोर्ट के अनुसार, ईडी, आईटी और एनआईए ने इन इलाकों में कई जगहों पर छापेमारी की है। साइबर ठगी करने वाले ज्यादातर लोग जौकटिया से ही गिरफ्तार किए गए हैं। बेतिया पुलिस सूत्रों के अनुसार, जौकटिया से 50 से ज्यादा युवाओं को गिरफ्तार किया गया है। 

पुलिस के अनुसार, गाँव के करीब 700 से 1000 युवा साइबर अपराध में संलिप्त हैं। 24 वर्षीय मुश्ताक जौकटिया पुराना टोला का रहने वाला है। चार साल पहले छठी फेल आलम बेतिया में इलेक्ट्रीशियन का काम करता था, तभी वह अपने गाँव में साइबर अपराधियों के संपर्क में आया। उनके जरिए उसने पाकिस्तानी नेटवर्क से संपर्क बनाया।

NEET पेपर लीक में अब पत्रकार जमालुद्दीन गिरफ्तार: स्कूल प्रिंसिपल एहसान उल हक से था लगातार संपर्क में, इंडोनेशिया घूमने का भी एंगल

NEET पेपर लीक मामले में CBI की कार्रवाई जारी है। सीबीआई ने शुक्रवार (28 जून) की शाम को शुक्रवार (28 जून) को झारखंड के हजारीबाग से ओएसिस स्कूल के प्रिंसिपल एहसान उल हक, वाइस प्रिंसिपल इम्तियाज आलम और पत्रकार जमालुद्दीन को गिरफ्तार किया है। इसके पहले चार और आरोपित पकड़े गए हैं। सभी आरोपितों को CBI प्लेन से दिल्ली लाने की तैयारी में है।

जाँच के दौरान सीबीआई ने एहसान उल हक और इम्तियाज आलम के साथ-साथ हजारीबाग के दो पत्रकारों- मोहम्मद जमालुद्दीन और मोहम्मद सलाउद्दीन को भी ट्रैक किया था। इसमें एक पत्रकार जमालुद्दीन को सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया है। जमालुद्दीन झारखंड के एक हिंदी दैनिक अखबार से जुड़ा है। पेपर लीक मामले पर एहसान की जमालुद्दीन और सलाउद्दीन से लगातार बातचीत होती रहती थी।

सीबीआइ को जानकारी मिली कि नीट परीक्षा के तत्काल बाद एहसान उल हक विदेश घूमने गया था और करीब एक सप्ताह तक इंडोनेशिया के बाली में था। परीक्षा के पहले और बाद के उसके फोन डिटेल में बिहार से भी कनेक्शन मिला है। पेपर लीक कराने वाले गिरोह ने हजारीबाग में कई कोचिंग संचालकों से मोटी रकम लेकर प्रश्न पत्र उपलब्ध कराए थे। इनमें एक प्रोफेसर की भूमिका भी संदिग्ध है।

CBI और पुलिस के मुताबिक, 3 मई को NEET के प्रश्न पत्र कूरियर एजेंसी ब्लू डार्ट के हजारीबाग नूतन नगर सेंटर से बैंक ले जाने की बजाय पहले ओएसिस स्कूल लाए गए। इसके बाद यहाँ से बैंक भेजे गए थे। माना जाता है कि ओएसिस स्कूल में ही पेपर का पैकेट खोला गया था। ये सभी सरगना संजीव मुखिया से जुड़े बताए जा रहे हैं। मुखिया का गैंग पेपर के बॉक्स का सील तोड़ने में माहिर है।

ओएसिस स्कूल भी NEET परीक्षा का एक सेंटर था। इस सेंटर का प्रश्न पत्र और बुकलेट पटना में अधजला बरामद हुआ था। इस मामले का यह सबसे बड़ा सबूत है। इससे पहले 27 जून को सीबीआई ने पटना से मनीष प्रकाश और उसके दोस्त आशुतोष को गिरफ्तार किया था। उससे पहले दो अन्य आरोपित चिंटू और मुकेश को गिरफ्तार कर रिमांड पर लिया है।

NEET के अलावा, UGC-NET की परीक्षा भी इस ओएसिस स्कूल में आयोजित हुई थी। इसी स्कूल से ही यूजीसी-नेट के प्रश्नपत्र भी लीक होने का शक है। सीबीआई की टीम ने स्कूल के वाइस प्रिंसिपल सह सेंटर सुपरिंटेंडेंट इम्तियाज आलम का एक मोबाइल और लैपटॉप जब्त कर लिया है। इसके अलावा, जाँच एजेंसी ने अन्य कई सामानों को जब्त किया है।

पटना में 28 जून को CBI की टीम आरोपित चिंटू और मुकेश को लेकर उनके दोस्त रॉकी के घर पहुँची। बताया जा रहा है कि पटना के कंकड़बाग में रॉकी के घर से कई सबूत हाथ लगे हैं। चिंटू की देवघर में गिरफ्तारी के बाद रॉकी फरार हो गया था। CBI ने चिंटू, मुकेश, आशुतोष और मनीष के मोबाइल की जाँच की। ये सभी आरोपित 6 महीने से आपस में संपर्क में थे।

सीबीआई द्वारा गिरफ्तार मनीष प्रकाश ने अपने दोस्त आशुतोष से कहकर परीक्षार्थियों के लिए ‘लर्न एंड प्ले स्कूल’ को बुक कराया था। पटना के खेमनी चक स्थित लर्न एंड प्ले स्कूल में NEET का जला हुआ प्रश्न पत्र मिला था, जो इस घटना का प्रमुख सबूत है। इस पेपर पर दी गई जानकारी से पता चला था कि ये प्रश्न पत्र हजारीबाग के ओएसिस स्कूल के परीक्षा केंद्र से लीक हुआ था।

मनीष प्रकाश ने इस स्कूल में 20 से 25 NEET परीक्षार्थियों को रुकवाकर उन्हें प्रश्न पत्र दिया था और उन्हें आंसर शीट रटवाया था। कहा जा रहा है कि मनीष प्रकाश ने संजीव मुखिया के कहने पर परीक्षार्थियों के लिए इसका इंतजाम किया था। मनीष नालंदा का रहने वाला है। उसका परिवार पटना के बहादुरपुर थाना क्षेत्र के संदलपुर इलाके में रहता है। चिंटू संजीव मुखिया का रिश्तेदार है।

वहीं, बिहार पुलिस की EOU टीम से पेपर लीक जाँच की रिपोर्ट और सबूत हासिल करने के बाद अब CBI पेपर लीक के मुख्य आरोपित संजीव मुखिया को दबोचने की दिशा में काम कर रही है। संजीव मुखिया यूपी पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले के मुख्य आरोपित रवि अत्री भी संजीव मुखिया से जुड़ा है। इसके अलावा, कई परीक्षाओं के पेपर लीक से भी मुखिया जुड़ा हो सकता है।

लद्दाख में नदी पार करते समय बहा टी-72 टैंक अजेय, 1 JCO समेत 5 जवानों को वीरगति : युद्धाभ्यास के दौरान अचानक जलस्तर बढ़ने से हादसा

केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में एक हादसे में सेना के एक JCO समेत 5 जवानों की जान चली गई। ये सभी जवान लद्दाख के दौलत बेग ओल्डी इलाके में एक सैन्याभ्यास में हिस्सा ले रहे थे, तभी टैंक द्वारा नदी पार करने के दौरान नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से ये हादसा हो गया। जवान टैंक में ही फँस गए और टैंक बहकर नीचे गिर गया। इस हादसे पर रक्षा मंत्री ने दुख जताया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये हादसा दुनिया के सबसे ऊँचे हवाई पट्टी वाले दौलत बेग ओल्डी सेक्टर में हुआ है। जो चुशूल से 148 किमी दूर है। ये हादसा रात में करीब 1 बजे हुआ, जब नदी के पानी का स्तर अचानक बढ़ गया। सभी जवान टी-72 टैंक में सवार थे। ये टैंक नदी को पार कर सकता है। इस हादसे में वीर गति प्राप्त करने वाले जवानों के नाम आरआईएस एमआर के रेड्डी, डीएफआर भूपेंद्र नेगी, एलडी अकदुम तैयबम, हवलदार ए खान (6255 एफडी वर्कशॉप), सीएफएन नागराज पी (एलआरडब्ल्यू) हैं।

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने इस घटना पर दुख व्यक्त किया है। उन्होंने एक्स पर लिखा, “लद्दाख में नदी पार कराते समय हुए दुर्भाग्यपूर्ण हादसे में भारतीय सेना के पाँच बहादुर जवानों की वीरगति से मैं बहुत दुखी हूँ। हम देश के लिए अपने वीर जवानों की अनुकरणीय सेवा को कभी नहीं भूल पाएँगे। शोक संतप्त परिवारों के प्रति मेरी हार्दिक संवेदनाएँ। दुख की इस घड़ी में पूरा देश उनके साथ है।”

बता दें कि टी-72 टैंक भारत में अजेय नाम से जाना जाता है। ये 15 मीटर गहरी नदी को पार कर सकता है। ये टैंक काफी भरोसेमंद माना जाता है। चूँकि इस हादसे के समय पानी का जलस्तर अचानक से बढ़ा और बहाव तेज हो गया, ऐसे में ये पानी के बहाव में बह गया और नीचे खाईं में गिर गया। हालाँकि बताया जा रहा है कि हादसे के समय टैंक पर 5 जवान सवार थे, जबकि इस टैंक को चलाने के लिए 3 ही जवानों की जरूरत होती है।

कोहली के करियर का आखिरी वर्ल्ड कप फाइनल: क्या है प्लान, जेंसन-रबाडा-महाराज की साउथ अफ्रीकी तिकड़ी से रहना होगा सावधान

आईसीसी टी-20 विश्व कप-2024 का आखिरी पड़ाव। मैदान है ब्रिजटाउन का केन्सिंगटन ओवल। आखिरी मुकाबले में भारत और दक्षिण अफ्रीका की टीमें। दाँव पर है विश्व विजेता का खिताब। एक तरफ साल 2011 में आखिरी बार कोई विश्वकप जीता भारत है, तो दूसरी तरफ पहली बार किसी आईसीसी विश्वकप में पहुँचा दक्षिण अफ्रीका। इस मुकाबले में कई खिलाड़ियों पर सभी की नजरें हैं, लेकिन जिस खिलाड़ी पर सभी की नजर है वो है विराट कोहली।

भारतीय क्रिकेट प्रशंसक विराट कोहली को किंग कोहली कहते हैं। विराट कोहली 2011 में 50 ओवरों का विश्वकप जीतने वाली टीम का अहम हिस्सा थे और फाइनल मुकाबले में भी उन्होंने एक छोटी मगर बेहद परिपक्व पारी खेली थी, जो बेशकीमती साबित हुई। इस बार विराट कोहली विश्वकप में ओपनिंग कर रहे हैं और अपने अब तक के सबसे बुरे दौर से गुजर रहे हैं। हो सकता है कि ये विश्व कप का फाइनल विराट कोहली के क्रिकेट जीवन में टी-20 विश्वकप का आखिरी फाइनल मुकाबला भी हो, क्योंकि अब वो 36 साल के होने वाले हैं और लंबे समय से टी-20 इंटरनेशनल मुकाबलों से दूरी भी बनाते दिख रहे हैं।

क्यों है विराट कोहली पर नजर?

आधुनिक क्रिकेट के इतिहास में विराट कोहली जैसा सक्षम बल्लेबाज शायद ही कोई हो। क्रिकेट के हर फॉर्मेट में उन्होंने जमकर रन बटोरे हैं। अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में करीब 27 हजार रन बना चुके विराट कोहली 80 शतक भी लगा चुके हैं। वो इंटरनेशनल टी-20 मैचों में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज भी रहे हैं, हालाँकि इसी विश्वकप में बेहद खराब प्रदर्शन से गुजरने की वजह से वो दूसरे नंबर पर आ चुके हैं। इस विश्वकप में उन्होंने 7 मैचों की 7 पारियों में करीब 10 की बेहद मामूली औसत और करीब 100 के ही स्टारइक रेट से महज 75 रन ही बना पाए हैं। अब फाइनल मुकाबले में वो दमदार पारी खेलकर अपने टी-20 करियर को आईसीसी विश्वकप की ट्रॉफी के साथ विदा कहना चाहेंगे। हालाँकि कप्तान रोहित शर्मा कई बार कह चुके हैं कि वो विराट कोहली की फॉर्म को लेकर चिंता में नहीं हैं, ऐसे में कोहली को इस आखिरी मैच में ये साबित करना भी होगा।

कई फाइनल मुकाबले खेल चुके हैं कोहली

विराट कोहली 2011 के विश्वकप फाइनल मुकाबले के बाद से कई विश्वकप खेल चुके हैं। 50 ओवरों के विश्वकप की बात करें तो साल 2015 और 2019 में सेमीफाइनल मुकाबला भारतीय टीम हारी थी, तो 2023 में फाइनल मुकाबले में उसे हार मिली। इसका मतलब है कि कोहली लगातार 4 विश्वकप मैचों में नॉकआउट मैच खेल चुके हैं, जिसमें भारतीय टीम एक जीती है, तो तीन हारी है। वहीं, टी-20 मुकाबलों में 1 बार टीम को फाइनल में हार मिली, तो 3 बार सेमीफाइनल में। इस बार विराट कोहली अपनी टीम को चैंपियन बनाना चाहेंगे और एक चैंपियन की तरह ही विदाई लेना चाहेंगे।

दक्षिण अफ्रीकी तिकड़ी से सावधान रहने की जरूरत

इस मैच में विराट कोहली को दक्षिण अफ्रीकी गेंदबाजों की उन तिकड़ी से सावधान रहना होगा, जो उनके खिलाफ अच्छा करते हैं। विराट कोहली पारंपरिक तौर पर बाएँ हाथ के गेंदबाजों के खिलाफ संघर्ष करते रहे हैं। ऐसे में दक्षिण अफ्रीका के बाएँ हाथ के तेज गेंदबाज मैक्रो जेन्सन से उन्हें बचकर रहने की जरूरत है, जो इस विश्वकप में 16 विकेट हासिल कर चुके हैं। वहीं, दक्षिण अफ्रीकी टीम इस फाइनल मुकाबले में एक दाँव केशव महाराज का चल सकती है, क्योंकि वो लेफ्ट आर्म स्पिनर हैं और लेफ्ट आर्म स्पिनर्स के सामने भारतीय बल्लेबाज काँप से जाते हैं। विराट कोहली ही नहीं, बल्कि रोहित शर्मा भी लेफ्ट आर्म बॉलर्स के सामने डरे-सहमे से नजर आते हैं। हालाँकि रोहित शर्मा ने मिचेल स्टार्क की धज्जियाँ उड़ाकर ये बात साबित कर दी है कि उन्हें ज्यादा दिक्कत नहीं है, लेकिन अतीत में बाएँ हाथ के गेंदबाजों के सामने उन्हें परेशानी होती रही है, चाहे वो स्टार्क हों, शाहीन शाह अफरीदी हों, मुस्तफिजुर रहमान हों या ट्रेंट बोल्ट।

इसके अलावा दक्षिण अफ्रीकी तिकड़ी में कगिसो रबाडा जैसा बॉलर है, जो बाएँ नहीं बल्कि दाहिने हाथ से तेज गेंदबाजी करता है, लेकिन अपनी एक्यूरेसी के दम पर बल्लेबाजों की नाक में दम कर देता है। रबाडा काफी अनुभवी भी हैं। ऐसे में जेन्सन से बचने के चक्कर में अगर रबाडा पर अटैक करने की सोचा गया, तो वो बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं। दक्षिण अफ्रीकी गेंदबाजी में एनरिच नॉर्खिए से भी सावधान रहने की जरूरत है, क्योंकि असामान्य तौर पर अधिक तेज गेंदबाजी की उनकी क्षमता बेहतरीन है और इस विश्वकप में वो इसे साबित भी कर चुके हैं।

इन खिलाड़ियों पर नजर

भारतीय टीम को विराट कोहली से इस मैच में उनके क्रिकेट जीवन की सबसे महत्वपूर्ण पारी की आस है, तो कप्तान रोहित शर्मा से एक बार फिर से बड़ी पारी की उम्मीद है। भारतीय बल्लेबाजी क्रम बेहतरीन रहा है। शिवम दुबे को खिलाने या न खिलाने को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला मैच के समय हो सकता है। चूँकि ब्रिजटाउन का ये मैच जिस चौथी नंबर पिच पर खेली जानी है, उस पर 2 मुकाबले हो चुके हैं, जिस पर तेज गेंदबाजों के लिए काफी कुछ देखा जा चुका है। ऐसे में गेंदबाजी क्रम में एक बार फिर से भारत की सफलता जसप्रीत बुमराह और अक्षदीप सिंह पर निर्भर करेगी, तो बाएँ हाथ के बॉलर्स जडेजा-अक्षर-कुलदीप की तिकड़ी भी काफी अहम रहने वाली है। चूँकि भारतीय टीम को क्विंटन डिकॉक और हेनरिच क्लासन के साथ ही डेविड मिलर से भी निपटना होगा, तो एक ऑफस्पिनर की जरूरत पड़ सकती है, या फिर इस मैच में रोहित शर्मा को भी एक-2 ओवर की गेंदबाजी करते भी हम देख सकते हैं।

‘आपके पास एक ही अंडकोष, सब-इंस्पेक्टर के लिए अनफिट हैं आप’: परीक्षा पास लेकिन मेडिकल बोर्ड ने लगाया अड़ंगा, हाई कोर्ट से भी झटका

उड़ीसा उच्च न्यायालय ने केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के एक कॉन्स्टेबल द्वारा दायर रिट याचिका को खारिज कर दिया है। अपनी याचिका में कॉन्स्टेबल ने कहा था कि उसने विभागीय लिखित परीक्षा पास कर ली है, लेकिन एक अंडकोष होने की वजह से उसे उप-निरीक्षक (दारोगा) के पद पर नियुक्ति नहीं दी जा रही है।

मेडिकल रिव्यू बोर्ड ने एक अंडकोष होने के कारण कॉन्स्टेबल को ‘चिकित्सकीय रूप से अयोग्य’ बताया था। उड़ीसा हाई कोर्ट के न्यायाधीश डॉक्टर संजीव कुमार पाणिग्रही की एकल पीठ ने मेडिकल रिव्यू बोर्ड के फैसले को सही ठहराया और कहा कि पात्रता मानदंडों को पूरा करना जरूरी है। जो पूरा करेगा, वही चुना जाएगा।

न्यायामूर्ति पाणिग्रही ने कहा, “सब-इंस्पेक्टर/Exe (LDCE) का पद कॉन्स्टेबल/जीडी से ऊँचा पद है। सब-इंस्पेक्टर/Exe के पद पर उच्च कर्तव्य और जिम्मेदारियाँ होती हैं। इसलिए जो उम्मीदवार सभी पात्रता मानदंडों को पूरा करते हैं और भर्ती प्रक्रिया के सभी मामलों में अर्हता प्राप्त करते हैं, उन्हें चुना जाएगा और पद पर नियुक्त किया जाएगा।”

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस संजीव कुमार पाणिग्रही ने अपना फैसला सुनाते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय के प्रियंका बनाम भारत संघ एवं अन्य के मामले में दिए गए फैसले का भी हवाला दिया। इस फैसले में दिल्ली हाई कोर्ट ने सशस्त्र बलों में आवश्यक उच्च मानकों को स्पष्ट रूप से स्वीकार किया गया था।

दरअसल, याचिकाकर्ता को साल 2008 में CISF में कॉन्स्टेबल के पद पर नियुक्त किया गया था। साल 2014 में उसने सीमित विभागीय प्रतियोगी परीक्षा (एलडीसीई) में उपस्थित होने के लिए आवेदन किया। यह परीक्षा विभागीय उम्मीदवारों को उप-निरीक्षक (SI) के पद पर पदोन्नति की सुविधा देने के लिए आयोजित की गई थी।

याचिकाकर्ता ने लिखित परीक्षा पास ली। उसके बाद उसे शारीरिक दक्षता परीक्षण के लिए बुलाया गया। मेडिकल परीक्षण से पता चला कि उसे उसका सिर्फ एक अंडकोष है। इसके बाद उसे सब-इंस्पेक्टर के रूप में भर्ती के लिए चिकित्सकीय रूप से अयोग्य घोषित कर दिया गया था।

इससे दुखी होकर कॉन्स्टेबल ने बोर्ड के फैसले को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में एक रिट याचिका दायर की। कोर्ट ने कहा, “इसमें विभाग का याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई व्यक्तिगत द्वेष या कुछ भी नहीं है। उसने सिर्फ चयन नियमों के तहत निर्धारित चिकित्सा परीक्षण कराने की कोशिश की है।” इसके बाद याचिका खारिज कर दी।

भगवा रंग से CM ममता बनर्जी को एलर्जी, सभी सार्वजनिक घरों/स्थानों से हटा कर अलग रंग पोतने का आदेश: टीम इंडिया की जर्सी पर की थीं बवाल

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में गेरुआ (या भगवा) और लाल रंगों से छतों की पुताई उठाते हुए मुख्य सचिव को इसकी जाँच करने के आदेश दिए हैं। उन्होंने शुक्रवार (28 जून) को कहा कि बंगाल में घर की छतें भगवा और लाल क्यों होंगी? उन्होंने यह भी कहा कि बंगाल में छत पर लगाने के लिए इस तरह के टिन शेड कैसे आपूर्ति किए जा रहे हैं।

ममता बनर्जी ने कहा बंगाल का रंग नीला-सफेद है। इसका इस्तेमाल होना चाहिए। इससे पहले भी ममता बनर्जी की सरकार राज्य में सरकारी इमारतों के साथ-साथ निजी घरों को भी नीले-सफेद रंग में रंगने पर जोर देती रही हैं। इसके लिए उन्होंने सरकारी इमारतों के साथ निजी घरों को भी कर में छूट देने की घोषणा की है।

राज्य सचिवालय में गुरुवार (27 जून 2024) को आयोजित हुई प्रशासनिक बैठक में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि राज्य का रंग नीला-सफेद है। इसके बाद भी लोग नीले-सफेद रंग को लोग स्वीकार क्यों नहीं कर रहे हैं। ममता बनर्जी ने कहा कि लोग जो चाहे कपड़े पहन सकते हैं। अपनी पसंद का घर भी बना सकते हैं, लेकिन घर की छत लाल और भगवा ही क्यों होगी?

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रशासन को निर्देश दिया कि कोई भी सार्वजनिक संपत्ति लाल या भगवा रंग में नहीं रंगी जाए। केवल नबाना (राज्य सचिवालय) में इस्तेमाल किया गया आसमानी नीला रंग ही इस्तेमाल किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि इमारतों की छत के लिए इस्तेमाल भगवा-लाल रंग के टिन शेड को भी हटाना होगा और उनकी जगह आसमानी नीला रंग है लगाना होगा।

इस टिप्पणी पर विधानसभा में भाजपा के सचेतक शंकर घोष ने कहा कि ममता बनर्जी का अमानवीय चेहरा उजागर हो गया है। लाल-भगवा के जरिए वह क्या कहना चाहती हैं? माकपा के वरिष्ठ नेता सुजन चक्रवर्ती ने कहा कि मुख्यमंत्री ने कहा था कि घर का रंग नीला और सफेद होने पर कर में छूट मिलेगी। यह लोगों की स्वतंत्रता है कि वह कौन सा रंग चुनें।

बता दें कि दिसंबर 2023 में बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करने से पहले रंगों की राजनीति की थी। उन्होंने कहा था कि केंद्र सरकार ने 100 दिन के काम का पैसा और स्वास्थ्य विभाग का पैसा रोक दिया है। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया था कि भाजपा ‘रंगीन राजनीति’ कर रही है।

ममता बनर्जी ने कहा था कि गेरुआ रंग में नहीं रंगे होने के कारण स्वास्थ्य विभाग ने पैसे रोक दिए हैं। उन्होंने आगे कहा था, “मेट्रो स्टेशनों को भी गेरुआ रंग से रंग दिया गया है। मैं सिलीगुड़ी गई और सभी घरों को गेरुए रंग से रंगा हुआ देखा। हमसे कहा गया है कि सभी स्वास्थ्य केंद्रों को गेरुआ रंग का बनाया जाना चाहिए।

ममता ने कहा था, “गेरुआ रंग क्यों रंगा जाएगा? इस राज्य के ब्रांड का रंग नीला-सफेद है। यह कोई पार्टी का रंग नहीं है। हम कलर ब्रांड शुरू करने वाले पहले व्यक्ति थे। यह क्या है! हर जगह सिर्फ बीजेपी का लोगो लगाना चाहिए और बीजेपी का रंग लगाना है।”

बता दें कि बंगाल के सभी स्वास्थ्य केंद्रों का रंग नीला-सफेद है। हालाँकि, केंद्र सरकार के स्पष्ट निर्देश में कहा गया था कि केंद्र के वित्तीय आवंटन से बनने वाले स्वास्थ्य केंद्रों का रंग हल्का पीला होगा। इसके साथ खैरी बॉर्डर होना चाहिए। अब इस रंग के अभाव के कारण बंगाल सरकार आरोप लगाया था कि पश्चिम बंगाल को 800 करोड़ रुपए का आवंटन रोक दिया है।

नवंबर 2023 में टीम इंडिया की जर्सी के रंग को लेकर भी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि सब कुछ गेरुआ रंग में रंगा जा रहा है। मध्य कोलकाता के पोस्ता बाजार में जगधात्री पूजा के उद्घाटन अवसर सीएम ममता ने कहा था, “अब सब कुछ भगवा हो रहा है! भारतीय खिलाड़ियों की ड्रेस भी भगवा हो गई है! वे पहले नीले रंग की ड्रेस पहनते थे।”

1500 साल पुरानी वराह अवतार की मूर्ति का संरक्षण: एक ही पत्थर पर बने 1200 से ज्यादा चित्र, पूरी दुनिया में इकलौता ऐसा

मध्य प्रदेश के सागर जिले के ऐरण में गुप्तकालीन मंदिर, स्मारक, स्तंभ मिले हैं। यहाँ वराह अवतार की ऐसी मूर्ति है, जो पूरी दुनिया में कहीं नहीं दिखती। ऐरण में वराह की मूर्ति 12 फीट ऊँची और 15 फीट लंबी है। ये मूर्ति लाल बलुआ पत्थर के एक ही बड़े टुकड़े पर बनी हुई है, जो हैरान कर देती है। अब इस मूर्ति को संरक्षित किया गया है। इस मूर्ति के संरक्षण में लंबा समय लगा, लेकिन अब अगले कई वर्षों तक ये मूर्ति सुरक्षित रहेगी।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, ऐरण में स्थित वराह की इस मूर्ति लगभग 1,200 चित्र भी बने हैं, जिसमें तमाम देवी-देवता हैं। यह संरचना गुप्त काल की है और इतिहास की गवाह है। यहाँ तक ​​कि इस क्षेत्र पर हमला करने वाले हूणों ने भी मूर्ति की गर्दन पर एक शिलालेख अंकित करके अपना योगदान दिया। अब इस मूर्ति का संरक्षण किया गया है, ताकि इसे और क्षति न पहुँचे।

एएसआई के जबलपुर सर्कल के अधीक्षण पुरातत्वविद् शिवकांत बाजपेयी ने कहा, “यह संरक्षण कार्य लंबे समय से लंबित था। अब, ‘वराह’ मूर्ति कम से कम 15-20 वर्षों तक अच्छी हालत में रहेगी। ऐरण परिसर का संरक्षण किया जाएगा। हमारा लक्ष्य अपने सर्कल में हर स्मारक को संरक्षित करना है।” इसके संरक्षण का कार्य ASI के रायपुर सर्कल ने किया है। इसे संरक्षित करने के लिए रसायनों का उपयोग किया गया और मूर्ति उग घई शैवाल जैसी जैव-कोशिकाओं को हटाया गया। एएसआई की रायपुर स्थित विज्ञान शाखा के उप-अधीक्षण रसायनज्ञ प्रदीप मोहपात्रा ने कहा, “हम सुनिश्चित करते हैं कि स्मारक अगली पीढ़ी को उसी तरह से दिया जाए जैसा हमें मिला।”

ऐरण में प्रचीन वराह और विष्णु मंदिर स्थापित है। ऐरण के अभिलेखों को गुप्त काल का गवाह माना जाता है। ऐरण में 47 फुट ऊँचा एक स्तंभ भी है जो एक ही शिला से बना हुआ है। ऐरण के इन प्राचीन शिलालेखों को देखने के लिए दूर-दूर से पर्यटक यहाँ पहुँचते हैं। ऐरण के अभिलेख 510 ईसवीं के माने जाते हैं। ऐरण में विशाल वराह, विष्णु और नरसिंह मंदिर मौजूद हैं। ऐरण में वराह की इतनी बड़ी प्रतिमा है जो भारत में और कहीं नहीं है। इसमें मुख, पेट, पैर और समस्त अंगों में देव प्रतिमाएँ बनी हुई हैं।

ऐरण के पुरातात्विक महत्व के बारे में और अधिक जानने के लिए डॉ हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय के पुरातत्व विभाग की ओर से यहाँ खुदाई कराई गई थी। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की टीम ऐरण में खुदाई कर रही, जिसमें वहाँ और गुप्तकालीन अभिलेख मिले हैं। यहाँ कुछ हिस्सों में अब भी पुरातात्विक खुदाई जारी है।

गुप्तकालीन विरासत को बचाने की जद्दोजहद

मध्य प्रदेश के सागर जिले में स्थित ऐरण नाम की जगह पर गुप्तकालीन विशालकाय विष्णु प्रतिमा, वराह प्रतिमा और गरुड़ स्तंभ मिले हैं, जो देश में कहीं और नहीं मिलते। सबसे पहले 1838 ईस्वी में भारत के प्रसिद्ध पुरातत्वविद टीएस बर्ट ने ऐरण की खोज की थी, इसके बाद भारतीय पुरातत्व के प्रथम महानिदेशक जनरल अलेग्जेंडर कनिंघम ने 1874-75 ईस्वी में इस क्षेत्र का सर्वेक्षण किया और यहाँ से प्राप्त प्राचीन प्रतिमाओं अभिलेखों और मुद्राओं का विवरण आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया रिपोर्ट में प्रकाशित करवाया।

ऐरण नगर का जिक्र ऋग्वेद में भी मिलता है। इसे एरिणिया कहा गया है। भगवान वराह को विष्णु का 16वाँ अवतार माना जाता है। भगवान विष्णु ने हिरण्याक्ष का वध करने के लिए सूकर अवतार लिया था। ऐरण नगर में ही एक 47 फुट ऊँचा स्तंभ भी है, जो एक ही शिला को काटकर बनाया गया है। वहीं, वराह की मूर्ति पर हूण राणा तोरमाण का भी उल्लेख है, जिसका शासनकाल 495 ईस्वी के आसपास का माना जाता है। इस वराह मूर्ति की जीभ पर माँ सरस्वती की आकृति है, तो वृश्तिक, कन्या, मत्स्य व अन्य राशियों का भी अंकन है। इस मूर्ति पर मंदिर भी बना है, जिसमें शिव, ब्रह्मा, विष्णु, गणेश आदि देवी-देवताओं को भी जगह मिली है।

पेपर लीक मामले के बाद UGC-NET 2024 परीक्षा की नई तिथि जारी: डार्क वेब पर मिले थे प्रश्न पत्र, शिक्षा मंत्रालय ने रद्द कर दी थी परीक्षा

पेपर लीक के बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने UGC-NET 2024 परीक्षा की नई तिथि की घोषणा की है। अब इसे 21 अगस्त से 4 सितंबर 2024 के बीच आयोजित किया जाएगा। इस परीक्षा को 18 जून को आयोजित किया गया था। हालाँकि, पेपर लीक की घटना के बाद इसे रद्द कर दिया गया था। इसके अलावा, अन्य परीक्षाओं की तिथियों की भी घोषणा की गई है।

NTA द्वारा जारी की गई नई तिथि के मुताबिक, यूजीसी नेट की सभी परीक्षाएँ कंप्यूटर आधारित होंगी। वहीं, NCET 2024 परीक्षा 10 जुलाई को होगी। संयुक्त सीएसआईआर यूजीसी नेट की परीक्षा 25 से 27 जुलाई के बीच आयोजित किया जाएगा। वहीं, अखिल भारतीय आयुष स्नातकोत्तर प्रवेश परीक्षा (AIAPGET) 2024 पहले से निर्धारित 6 जुलाई को आयोजित होगी।

गृह मंत्रालय के अधीन भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) से पेपर लीक के बारे में जानकारी मिलने के बाद शिक्षा मंत्रालय ने परीक्षा रद्द कर दी थी। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि जैसे ही यह स्पष्ट हो गया कि डार्कनेट पर आया यूजीसी-नेट का पेपर यूजीसी-नेट के मूल पेपर से मेल खाता है तो परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया गया।

सीबीआई जाँच के बाद पता चला कि पेपर 16 जून को डार्कनेट और अन्य एन्क्रिप्टेड सोशल मीडिया चैनलों पर परीक्षा से ठीक दो दिन पहले लीक हो गया था। इसे 5 लाख रुपए से अधिक की कीमत पर बेचा गया था। बता दें कि यूजीसी नेट की परीक्षा के जरिए जूनियर रिसर्च फेलो, असिस्टेंट प्रोफेसर और पीएचडी स्कॉलर्स का चयन होता है।

यूजीसी नेट परीक्षा का आयोजन साल में दो बार- जून और दिसंबर में होता है। इस साल NTA ने UGC की ओर से पेन-पेपर मोड में UGC NET का आयोजन किया था। हालाँकि, वर्ष 2018 में NTA के गठन से पहले UGC-NET का आयोजन केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) करता था। इस साल इस परीक्षा में 9 लाख से ज्यादा परीक्षार्थी शामिल हुए थे। 

बता दें कि राष्ट्रीय स्तर पर इस तरह की परीक्षाओं का आयोजन करने वाली NTA एक स्वायत्त निकाय है। यह देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में नामांकन के लिए प्रवेश परीक्षा आयोजित करती है। प्रश्न पत्र तैयार करने से लेकर इसे परीक्षा केंद्र तय करने और उत्तर पुस्तिका की जाँच तक की जिम्मेदारी NTA ही करती है।

केंद्र सरकार ने साल 2017 में इसके गठन का ऐलान किया था। दिसंबर 2018 में एनटीए ने पहली यूजीसी-नेट परीक्षा आयोजित कराई थी। यूजीसी-नेट, नीट के अलावा एनटीए इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षा जॉइंट एंट्रेस एग्जामिनेशन (JEE-Main) भी आयोजित कराती है। इस परीक्षा के आधार पर आईआईटी और एनआईटी में एडमिशन मिलते हैं।

हालाँकि जेईई मेन के बाद जेईई एडवांस्ड लेवल की परीक्षा कराई जाती है और इसका आयोजन रोटेशन प्रणाली के आधार पर आईआईटी संस्थानों द्वारा कराई जाती है। इनके अलावा, एनटीए CMAT और GPAT जैसी परीक्षाएँ भी आयोजित कराती है। सीमैट देश के प्रबंधन संस्थानों में एडमिशन के लिए और जीपैट फार्मेसी संस्थानों में मास्टर्स प्रोग्राम में दाखिले के लिए कराए जाते हैं।

NEET पेपर लीक केस में CBI ने एहसानुल हक़ और इम्तियाज को दबोचा, इसी के सेंटर का प्रश्न पत्र पटना में मिला था: शिक्षा मंत्री बोले- मर्यादा का पालन हो तो चर्चा संभव

केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने स्पष्ट किया है कि सरकार संसद में NEET भर्ती परीक्षा पर चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने कहा है कि इस मामले में चर्चा नियमों और परम्पराओं के तहत होनी चाहिए। दूसरी तरफ इस मामले में CBI ने अपना एक्शन चालू कर दिया है। CBI ने झारखंड से दो आरोपितों को इस मामले में गिरफ्तार किया है। यह दोनों NEET का केंद्र बनने वाले एक स्कूल के प्रिंसिपल और वाइस प्रिंसिपल हैं। इनकी गिरफ्तारी झारखंड से हुई है।

सरकार चर्चा के लिए तैयार: शिक्षा मंत्री

NEET को लेकर संसद में विपक्ष ने शुक्रवार (28 जून, 2024) को खूब हंगामा किया। उसने राज्यसभा और लोकसभा, दोनों की कार्रवाई में व्यवधान डाला। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी ने NEET परीक्षा को लेकर राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के बीच NEET को लेकर बहस की माँग कर दी। दूसरी तरफ सरकार ने साफ किया कि वह हर मुद्दे पर चर्चा चाहती है। केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने बताया कि यदि विपक्ष NEET पर चर्चा चाहता है तो सरकार भी तैयार है लेकिन यह चर्चा परम्पराओं और मर्यादा का ध्यान रख कर हो।

उन्होंने कहा, “जब राष्ट्रपति महोदया ने अपने भाषण में ही NEET मुद्दे का जिक्र किया है तो फिर लीपापोती का प्रश्न ही नहीं उठ रहा है। CBI ने अपनी कार्रवाई चालू कर दी है। हम किसी को छोड़ने वाले नहीं हैं। वरिष्ठ अधिकारियों को जिम्मा दिया गया है। हम इस मामले में कोई गुंजाइश नहीं रखेंगे। हम देश को आश्वस्त कर रहे हैं। विपक्ष को मैं अपील करना चाहता हूँ कि वह देश के छात्रों को भ्रमित ना करे।” धर्मेन्द्र प्रधान ने यह भी बताया कि CBI सभी आरोपितों को जल्द पकड़ेगी।

CBI की कार्रवाई ने पकड़ी रफ्तार, 2 और गिरफ्तार

NEET परीक्षा में हुई धांधली को लेकर CBI ने अपनी जाँच के बाद गिरफ्तारियाँ चालू कर दी हैं। गुरुवार (27 जून, 2024) को पटना से दो गिरफ्तारियों के बाद अब CBI ने झारखंड से भी दो लोगों को पकड़ा है। CBI ने शुक्रवार (28 जून, 2024) को झारखंड के हजारीबाग से ओएसिस स्कूल के प्रिंसिपल एहसान उल हक़ और वाइस प्रिंसिपल इम्तियाज को गिरफ्तार किया है। CBI इनसे इससे पहले पूछताछ कर रही थी। इसके अलावा सलाउद्दीन नाम के एक पत्रकार को भी गिरफ्तार कर सकती है।

जिन दो लोगों को CBI ने गिरफ्तार किया है, वह दोनों उस सेंटर के इंचार्ज थे, जहाँ NEET परीक्षा आयोजित की गई थी। CBI की टीम ने हजारीबाग में और भी लोगों से पूछताछ की है। कयास लगाए जा रहे हैं कि आगे और भी गिरफ्तारियां इस मामले में देखने को मिलेंगी। इससे पहले CBI ने गुरुवार (27 जून, 2024) ने पटना से मनीष प्रकाश और उसके दोस्त आशुतोष को गिरफ्तार कर लिया था। इन दोनों ने ‘सेफ हाउस’ में कमरा बुक कराया था।

बिहार पुलिस की EOU टीम से पेपर लीक जाँच की रिपोर्ट और सबूत हासिल करने के बाद अब CBI पेपर लीक के मुख्य आरोपित संजीव मुखिया को दबोचने की दिशा में काम कर रही है। CBI द्वारा गिरफ्तार मनीष प्रकाश ने अपने दोस्त आशुतोष से कहकर परीक्षार्थियों के लिए ‘लर्न एंड प्ले स्कूल’ को बुक कराया था। पटना के खेमनी चक स्थित लर्न एंड प्ले स्कूल में NEET का जला हुआ प्रश्न पत्र मिला था, जो इस घटना का प्रमुख सबूत है।

सरकार ने NEET मामले में जाँच के लिए CBI को 22 जून, 2024 को आदेश दिए थे। उसके बाद से वह लगातार देश के अलग-अलग हिस्सों में छापेमारी और पूछताछ में जुटी हुई है।

बेदी राम का मामला भी चर्चा में

NEET परीक्षा में गड़बड़ी और कार्रवाई की खबरों के बीच सुभासपा विधायक बेदीराम का मामला भी चर्चा में है। हाल ही में मीडिया में उनका एक स्टिंग किए जाने का दावा किया गया था। इस वीडियो में कथित तौर पर बेदीराम पेपर लीक की बात कबूल रहे थे। बेदीराम गाजीपुर की जखनियां विधानसभा से विधायक हैं। बताया गया है कि उन पर पूर्व में भी परीक्षाओं में गड़बड़ी करवाने के मामले दर्ज हुए हैं। यह सब खबरें सामने आने के बाद मीडिया में उनके भूमिगत हो जाने की बात कही जा रही है।

गौरतलब है कि हाल ही में NEET-UG परीक्षा का परिणाम सामने आया था। इस परिणाम में कुछ छात्रों ने गड़बड़ी की शिकायत की थी। इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट भी गया था। NEET परीक्षा कराने वाली संस्था NTA ने भी छात्रों को नम्बर दिए जाने में गड़बड़ी की बात मानी थी। इन छात्रों की परीक्षा दोबारा लिए जाने की बात कही गई थी। इसके अलावा परीक्षा में गड़बड़ी की बात का खुलासा बिहार की EOU ने किया था और कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया था।