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जम्मू-कश्मीर में अवैध मस्जिद को ढहाने पहुँची टीम पर हमला: तोड़ डाला बुलडोजर, DSP समेत 6 पुलिसकर्मी घायल

केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में बवाल हो गया। यहाँ अवैध मस्जिद तोड़ने पहुँची प्रशासनिक टीम पर लोगों ने हमला बोल दिया। इस हमले में एक डीएसपी समेत 6 अधिकारी घायल हो गए। इस दौरान भीड़ ने बुलडोजर को भी तोड़ दिया। हिंसक भीड़ को कंट्रोल करने के लिए पुलिस वालों को हवाई फायरिंग करनी पड़ी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये मामला कठुआ जिले के नागरी तहसील स्थित कल्याणपुर पादरी इलाके का है, जहाँ शनिवार (29 जून 2024) की सुबह खूब हंगामा हुआ। यहाँ अवैध रूप से बनाई गई एक मस्जिद को तोड़ने के लिए सरकारी अधिकारी जेसीबी मशीन लेकर पहुँचे थे। मस्जिद पर बुलडोजर चलाए जाने की खबर आग की तरह फैल गई और वहाँ गुज्जर बकरवाल समुदाय के लोग भारी संख्या में जमा हो गए। खबर है कि इन लोगों ने वहां पथराव शुरू कर दिया, जिसमें डीएसपी रेंक के एक अधिकारी सहित 6 पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए। इस दौरान मस्जिद तोड़ने के लिए लाई गई जेसीबी भी लोगों ने तोड़ दी। इलाके में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है।

बताया जा रहा है कि मस्जिद सरकारी जमीन पर बनी है। इस अतिक्रमण रोधी अभियान में शामिल एक अधिकारी ने बताया, “जब उन्होंने अपना अभियान शुरू किया, तो एक विशेष समुदाय के लोगों ने उन पर हमला कर दिया। पुलिस को बिगड़ी हालात को कंट्रोल करने के लिए चेतावनी के तौर पर हवा में गोलियाँ चलानी पड़ीं।” इस घटना में घायल अधिकारियों को तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उनका इलाज चल रहा है। इलाके में माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है, जिसके चलते वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी स्थिति पर कड़ी नजर रख रहे हैं।

अधिकारियों ने कहा, “अतिरिक्त पुलिस बलों की तैनाती का मकसद हालात को आगे बिगड़ने से रोकना और सभी लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।” उन्होंने आगे कहा, “अधिकारी इस घटना को गंभीरता से ले रहे हैं और हालात को काबू में रखते हुए इस मसले का हल निकालने की कोशिश कर रहे हैं।”

Times of India के अनुसार आर्मी अफसर बलिदानियों की विधवाओं से करते हैं ‘सेक्स’ की माँग: फर्जी हेडलाइन से छाप दी रिपोर्ट, बवाल के बाद बदला

अंग्रेजी दैनिक ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ ने गुरुवार (27 जून) को खबर दी कि अधिकारियों ने 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान बलिदान हुए सैनिकों की पत्नियों से यौन संबंध बनाने की माँग की थी। उस लेख का शीर्षक कुछ ऐसा था, ‘हम कारगिल विधवाएँ अधिकारियों की वासना की संतुष्टि के लिए आसान लक्ष्य थीं।’ इससे लगता है कि सेना के अधिकारी इस तरह की माँग कर रहे थे।

शीर्षक में शब्दों का चयन चालाकी से किया गया था। इससे पता चलता था कि कारगिल युद्ध में हुतात्मा सैनिकों की विधवाओं को सेना के अधिकारी अपनी वासना की पूर्ति के लिए शिकार बनाया गया था। हालाँकि, लेख को ध्यान से पढ़ने से यह स्पष्ट हो जाता है कि पीड़ितों से यौन संबंध बनाने की माँग करने वाले लोग सेना के अधिकारी नहीं, बल्कि सरकारी कार्यालयों के कर्मचारी थे।

टाइम्स ऑफ इंडिया की विवादास्पद हेडलाइन का स्क्रीनशॉट

TOI के अनुसार, 60 वर्षीय इंदु सिंह को संकट के समय सहायता के बजाय कई वर्षों तक सरकारी कार्यालयों में उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। वह सीमा सुरक्षा बल (BSF) के बलिदानी इंस्पेक्टर इंद्रजीत सिंह की विधवा ने कहा कि मेरठ में एक सरकारी अधिकारी ने वासना के कारण उनके साथ दुर्व्यवहार किया था। आरोपित अधिकारी ने उन्हें अपने पैरों से अनुचित तरीके से छुआ भी था।

लालकृष्ण आडवाणी के हस्तक्षेप के बाद अधिकारी निलंबित हुआ

रिपोर्ट के अनुसार, “उक्त अधिकारी को उनके संबंधित गाँवों में शहीदों के स्मारकों के निर्माण के लिए भूमि आवंटन की देखरेख का काम सौंपा गया था। जब वह आवंटन के संबंध में कुछ मदद के लिए उसके सामने बैठी थी तो अधिकारी ने उनके पैर छुए थे।” इंदु सिंह द्वारा 2001 में तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री से संपर्क करने के बाद उक्त अधिकारी को निलंबित कर दिया गया था।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में आगे कहा गया, “अधिकारी की अनुचित हरकतों और अन्य युद्ध विधवाओं से अधिकारियों के उनके प्रति अपमानजनक रवैये के बारे में सुनने के बाद इंदु ने कहा कि उन्होंने 2001 में तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी से अधिकारी के खिलाफ शिकायत करने का फैसला किया। आडवाणी के हस्तक्षेप के बाद अधिकारी को निलंबित कर दिया गया।”

यह कोई अकेली घटना नहीं है: इंदु सिंह

इंदु सिंह ने एक और घटना का भी जिक्र किया, जिसमें सरकारी स्वामित्व वाली जीवन बीमा निगम (LIC) के एक अधिकारी ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया था। सरकारी कार्यालयों में अधिकारियों द्वारा की जाने वाली इन हरकतों में दोहरे अर्थ वाली बातें करना, विधवाओं को अपने बगल में बैठने के लिए मजबूर करना या उन्हें देर तक रुकने के लिए कहना शामिल था।

पीड़िता ने कहा, “मैं पढ़ी-लिखी थी और हर मौके पर इस कृत्य का विरोध करती थी। हालाँकि, अधिकांश युवा विधवाएँ, जो अशिक्षित थीं और ग्रामीण क्षेत्रों से थीं और बाहरी दुनिया से उनका कोई संपर्क नहीं था, उन्हें परेशान किया जाता था।” इंदु सिंह के अनुसार, सरकारी अधिकारी विधवाओं को ‘आसान शिकार’ मानते थे। उन्होंने बताया, “विधवापन के शुरुआती दिनों में मैंने नैतिकता का पूर्ण पतन देखा।”

लोगों की नाराजगी के बाद टाइम्स ऑफ इंडिया ने शीर्षक बदला

लेख की विषय-वस्तु से स्पष्ट है कि कारगिल युद्ध की विधवा इंदु सिंह द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोप राज्य सरकार के अधिकारियों पर लगाए गए थे, न कि भारतीय सेना के अधिकारियों पर। TOI ने पाठकों को गुमराह करने का प्रयास किया। खासकर उन लोगों को जो इस लेख को पूरा पढ़ने का धैर्य नहीं रखते।

सोशल मीडिया पर आक्रोश के बाद अंग्रेजी दैनिक ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ को इस लेख का शीर्षक बदलने के लिए मजबूर होना पड़ा। इस लेख का नया शीर्षक है, ‘हम कारगिल की विधवाएँ “सरकारी अधिकारियों के अवांछित प्रयासों का आसान लक्ष्य थीं”।’

हालाँकि, भारतीय मीडिया क्षेत्र में क्लिकबेट लेखों की कोई कमी नहीं है, लेकिन एक प्रमुख अंग्रेजी दैनिक को ध्यान आकर्षित करने के लिए भ्रामक रणनीति का सहारा लेते देखना निराशाजनक था।

अयोध्या में खराब सड़क मामले में 6 इंजीनियर सस्पेंड: बारिश के कारण कई जगह धँसी राम पथ, PWD और जल विभाग दोनों पर गिरी गाज

प्री-मानसून की पहली बारिश में अयोध्या गलत कारणों से चर्चा में आ गया था। बारिश की वजह से अयोध्या में बना राम पथ कई जगहों पर धंस गया था और सड़कों पर गड्ढे बन गए थे। राम पथ के धँसने की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही थी, जिसके बाद अब यूपी सरकार ने एक्शन शुरु कर दिया है। यूपी सरकार ने लोक निर्माण विभाग यानी पीडब्ल्यूडी और जल निगम के 6 इंजीनियरों-अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूपी सरकार ने पीडब्ल्यूडी के तीन इंजीनियरों अधिशासी अभियंता ध्रुव अग्रवाल, सहायक अभियंता अनुज देशवाल और कनिष्ठ अभियंता प्रभात पाण्डेय को सस्पेंड कर दिया है, तो जल निगम के अधिशासी अभियंता आनंद कुमार दुबे, सहायक अभियंता राजेंद्र कुमार यादव और कनिष्ठ अभियंता मोहम्मद शाहिद पर भी गाज गिराई है। इन सभी इंजीनियरों-अधिकारियों को पद से हटा दिया गया है। जाँच के बाद रिपोर्ट आने के बाद इन पर और भी कठोर कदम उठाया जा सकता है।

अधिकारियों ने निर्माण कार्य की घटिया गुणवत्ता को इस ढहने का मुख्य कारण बताया है। घटना पर राज्य सरकार की त्वरित प्रतिक्रिया में न केवल इंजीनियरों को निलंबित करना शामिल है, बल्कि सिविल कार्यों में शामिल गुजरात स्थित फर्म की जिम्मेदारियों की गहन जाँच भी शुरू करना शामिल है। फर्म को निर्माण चरणों के दौरान बनाए गए गुणवत्ता और मानकों के बारे में स्पष्टीकरण देने के लिए नोटिस दिया गया है।

गौरतलब है कि अयोध्या में बारिश के बाद निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठे थे। सड़कों के धंस जाने की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी। इसके बाद विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की भी कोशिश की थी। उन्होंने अयोध्या में हुए विकास कार्यों में भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए थे। बता दें कि अयोघ्या में अकेले सड़कों, सीवर लाइनों के निर्माण के लिए 600 करोड़ से भी अधिक धनराशि खर्च की गई थी, लेकिन पहली बारिश में कई जगहों पर सड़क के धंस जाने की तस्वीरें सामने आने के बाद इन पैसों के बंदरबाँट के आरोप लगने लगे थे।

हिन्दू देवी-देवताओं पर जम कर चुटकुले सुनाता है, पैगंबर मुहम्मद पर ज्ञान देने लगता है Meta AI: इस्लामी आतंकियों का भी करता है बचाव

भारत में सेक्युलरिज्म का एक नंगा नाच चलता है, जिसके तहत हिन्दू देवी-देवताओं का तो फिल्मों में मनोरंजन और क्रिएटिव लिबर्टी के नाम पर खूब मजाक बनाया जाता है, लेकिन जब बात इस्लाम या ईसाई मजहब की हो तो फूँक-फूँक कर कदम रखे जाते हैं। अब Meta ने जो अपना नया AI चैटबॉट लॉन्च किया है, वो भी इसी ट्रेंड को फॉलो कर रहा है। वो भगवान श्रीराम पर तो चुटकुले सुनाता है, लेकिन बात पैगंबर मुहम्मद की हो तो चुप बैठ जाता है।

किसी भी धर्म/मजहब/पंथ की पवित्र हस्तियों पर टिप्पणी गलत है, उनका मजाक नहीं बनाया जाना चाहिए। लेकिन, Meta AI इस मामले में पक्षपात करता है। उदाहरण के लिए, हमने Whatsapp पर उपलब्ध Meta AI से भगवान श्रीराम को लेकर चुटकुला सुनाने को कहा तो उसने सुनाया, “राम जिम क्यों गए? – थोड़ा सा RAM पॉवर पाने के लिए। (आपने इसे समझा? कम्प्यूटर मेमोरी की तरह, साथ में शक्ति भी।) आशा है कि इस पर आपको हँसी आई।”

चूँकि श्रीराम पर Meta AI ने चुटकुला सुना दिया, इसीलिए हमने बस जाँचने के लिए इसे पैगंबर मुहम्मद पर चुटकुला सुनाने को कहा। इसके बाद ये ज्ञान देने लगा, जो श्रीराम के समय ये भूल गया था। इसने स्पष्ट जवाब दिया, “मैं मुहम्मद के बारे में कोई चुटकुला नहीं सुना सकता। क्या आप कुछ और के बारे में चुटकुला सुनना चाहेंगे?” इसी तरह जब इससे कहा जाता है कि हिन्दू देवी-देवताओं पर चुटकुला सुनाओ तो ये भरपूर चुटकुले सुनाता है।

उदाहरण के लिए, देखिए – “ब्राह्मण, विष्णु और शिव जिम क्यों गए? – त्रिमूर्ति शरीर पाने के लिए! (त्रिमूर्ति हिन्दू धर्म में एक धारणा है जो विश्व के 3 स्वरूपों का प्रतिनिधित्व करता है। ब्रह्मा, विष्णु और शिव इसका प्रतिनिधित्व करते हैं। Trimurti में मैं Trim शब्द का इस्तेमाल कर रहा हूँ, जिसका अर्थ है फिट बॉडी।) मुझे आशा है कि ये आपके चेहरे पर मुस्कान लेकर आया।” देखा आपने, कैसे Meta AI ने हिन्दू देवी-देवताओं पर एक ऐसा चुटकुला सुनाया जबरदस्ती का जिस पर कोई हँसी नहीं आती, उनका अपमान होता है सो अलग।

वहीं, इसे अगर कहा जाता है कि इस्लामी हस्तियों पर चुटकुला सुनाओ तो ये कहता है, “मैं विभिन्न विषयों पर चुटकुले सुना सकता है, लेकिन मैं ऐसे चुटकुलों को नज़रअंदाज़ करूँगा जो किसी भी मजहबी हस्ती या आस्था के लिए अपमानजनक या आपत्तिजनक हो। इसके बदले मैं आपको अन्य विषयों पर चुटकुले सुना सकता हूँ। क्या आप किसी अन्य विषय पर चुटकुले सुनना चाहेंगे?” यानी, हिन्दू और इस्लाम के लिए Meta AI के अलग अलग मानक हैं – हिन्दू धर्म का मजाक बनाओ, इस्लाम का नहीं।

Meta AI ये भी मानने को तैयार नहीं है कि अधिकतर आतंकवादी मुस्लिम ही होते हैं। ये अलग बात है कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान, सीरिया, यमन, नाइजीरिया और फिलिस्तीन में इस्लामी आतंकी गढ़ बनाए हुए हैं। लेकिन, Meta AI कहता है, “यह एक हानिकारक रूढ़ि है। अधिकांश मुस्लिम आतंकवाद और हिंसा को अस्वीकार करते हैं। क्या आपके पास कोई और सवाल है?” अब आप बताइए, अलकायदा, बोको हराम, जैश-ए-मुहम्मद, ISIS और तालिबान से लेकर हमास तक सभी इस्लामी आतंकी संगठन हैं लेकिन Meta AI को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।

Meta AI इस्लामी हस्तियों पर चुटकुले सुनाने से डरता है और हिन्दू देवी-देवताओं पर खुल कर जोक्स क्रैक करता है, लेकिन फिर भी वो ये मानने को तैयार नहीं है कि हिन्दू सबसे ज़्यादा सहिष्णु होते हैं। हिन्दुओं और मुस्लिमों में अधिक सहिष्णु कौन है, ये पूछने पर वो कहता है, “हिंदू धर्म और इस्लाम दोनों में व्याख्याओं और प्रथाओं की एक विस्तृत श्रृंखला है, और यह स्पष्ट रूप से कहना मुश्किल है कि कौन सा धर्म अधिक सहिष्णु है। दोनों धर्मों का अन्य धर्मों के साथ शांतिपूर्ण ढंग से सह-अस्तित्व का इतिहास रहा है, और दोनों ही हिंसा और असहिष्णुता से भी जुड़े रहे हैं।

इसे बाद वो Tolerance की परिभाषा समझाने लगता है और कहता है कि यह पहचानना महत्वपूर्ण है कि सहिष्णुता एक जटिल मूल्य है जिसे अलग-अलग तरीकों से व्यक्त किया जा सकता है, और दोनों धर्मों के भीतर व्यक्तियों और समुदायों ने दूसरों के प्रति सहिष्णुता के विभिन्न स्तरों को दिखाया है। Meta AI कहता है कि यह तुलना करने के बजाय कि कौन सा धर्म अधिक सहिष्णु है, सभी धर्मों और विश्वास प्रणालियों के बीच आपसी समझ, सम्मान और सह-अस्तित्व को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित करना अधिक उत्पादक है।

हिन्दुओं को अधिक सहिष्णु नहीं मानता Meta AI, ज़्यादातर आतंकी मुस्लिम हैं ये भी नहीं मानता

भारत में हिन्दुओं ने बौद्ध, जैन, सिख, ईसाई, इस्लाम, पारसी और यहूदी से लेकर सभी धर्मों का स्वागत किया, जबकि अरब मुल्कों में सार्वजनिक रूप से इस्लाम के अलावा किसी अन्य धर्म के प्रदर्शन पर भी पाबन्दी है। अब धीरे-धीरे वहाँ भी मंदिर बन रहे हैं, श्रद्धालु पहुँच रहे हैं लेकिन हालात हमेशा वैसे नहीं थे। भारत में प्राचीन काल से सहिष्णुता की भावना रही है। इसके बावजूद Meta AI हिन्दुओं को अधिक सहिष्णु मानने के लिए तैयार नहीं है।

कॉमर्स ग्रेजुएट ईशा ने पति और बच्चे को छोड़ा, 6वीं फेल साइबर फ्रॉड मुस्ताक आलम के साथ करने लगी ठगी: ₹5 करोड़ भेजा पाकिस्तान, गिरफ्तार

बिहार की रहने वाली ईशा कॉमर्स ग्रेजुएट है। उसकी शादी नेपाल में हुई थी। डेढ़ साल का बच्चा है, जिसे वो अपने मायके में छोड़ चुकी है। पति को भी वो छोड़ चुकी है और पटना में 6वीं कक्षा फेल साइबर फ्रॉड मुश्ताक आलम (मीडिया रिपोर्ट्स में नेश्ताक भी बताया जा रहा है) के साथ मिलकर ठगी करने लगी और उसी के साथ रहने लगी। अब बिहार पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार किया है। ईशा इंस्टाग्राम पर रील्स भी बनाती थी और रील्स के जरिए ही मुश्ताक आलम के संपर्क में आई थी।

ईशा जायसवाल मोतिहारी की रहने वाली है। उसने बी.कॉम तक पढ़ाई की है। साल 2020 में उसकी शादी हुई थी, लेकिन पति को छोड़ दिया और बच्चे के साथ मायके आ गई। यहाँ से वो दिल्ली चली गई और फिर पटना को अपना ठिकाना बना लिया। मुश्ताक आलम के साथ मिलकर वो ठगी की वारदातों को अंजाम देने लगी थी और अब पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है।

पाकिस्तान भेजते थे रुपए

ईशा और मुश्ताक के पास से 5 करोड़ रुपए पाकिस्तान भेजने का मनी ट्रेल मिला है। दोनों ठगी के पैसों का 10% हिस्सा बतौर कमीशन रख लेते थे और बाकी पैसों को पाकिस्तान भेज देते थे। पुलिस को दोनों के पास से 5 करोड़ की मनी ट्रेल मिली है, जो पाकिस्तान तक जा रही है। पुलिस अब इनकी कुंडली खंगाल रही है। बताया जा रहा है कि ये जामताड़ा से लेकर भोपाल और मुंबई तक के साइबर फ्रॉड्स के साथ मिलकर काम करते थे।

कटिहार पुलिस के साइबर सेल के पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) सद्दाम हुसैन ने कहा कि वे तकनीकी निगरानी के जरिए साइबर जालसाजों पर नजर रख रहे हैं। साइबर पुलिस स्टेशन के हेड ने बताया कि पूछताछ के दौरान दोनों ने पड़ोसी देश से सीधे संपर्क की बात कबूल की है। उन्होंने बताया, “वे मुल्तान, पाकिस्तान से ऑडियो और वीडियो कॉल के जरिए ये धोखाधड़ी की वारदातें अंजाम देते थे। उन्होंने एक दर्जन से ज्यादा पाकिस्तानी बैंक पासबुक की जानकारी भी दी है।” पिछले 5 महीनों में उन्होंने सीडीएम (कैश डिपॉज़िट मशीन) और हवाला के ज़रिए पाकिस्तानी साइबर अपराधियों को अब तक लगभग 5 करोड़ रुपए भेज चुके हैं। पुलिस ने इनके पास से 16 एटीएम कार्ड, 6 मोबाइल और 6 सिम बरामद किए हैं।

ऐसे देते थे ठगी को अंजाम

ईशा एटीएम मशीन पर पहुँचे लोगों का कार्ड बदलने में माहिर हो गई थी। इसके बाद दोनों मिलकर पैसों की हेरफेर करते। कटिहार पुलिस सूत्रों के अनुसार ईशा और नेस्ताक (मुस्ताक) एक साल से अधिक समय से साथ रह रहे थे। इस दौरान मुस्ताक ने ईशा को एटीएम फ्रॉड का एक्सपर्ट बना दिया। ईशा एटीएम लाइन में खड़ी रहती थी और अनजान एटीएम उपयोगकर्ताओं की मदद करने के बहाने ग्राहकों के एटीएम कार्ड बदल लेती थी और बाद में असली कार्ड से ट्रांजेक्शन कर लेती थी। वह जरूरत पड़ने पर फोन करके किसी न किसी बहाने से लोगों को ठगती भी थी। 

गौरतलब है कि बिहार के चंपारण जिले में जौकटिया, लाल सरैया और रामनगर बनकट जैसी कुछ पंचायतें जाँच एजेंसियों के रडार पर हैं क्योंकि इन इलाकों के युवा साइबर अपराध में शामिल होने के लिए कुख्यात हैं। रिपोर्ट के अनुसार, ईडी, आईटी और एनआईए ने इन इलाकों में कई जगहों पर छापेमारी की है। साइबर ठगी करने वाले ज्यादातर लोग जौकटिया से ही गिरफ्तार किए गए हैं। बेतिया पुलिस सूत्रों के अनुसार, जौकटिया से 50 से ज्यादा युवाओं को गिरफ्तार किया गया है। 

पुलिस के अनुसार, गाँव के करीब 700 से 1000 युवा साइबर अपराध में संलिप्त हैं। 24 वर्षीय मुश्ताक जौकटिया पुराना टोला का रहने वाला है। चार साल पहले छठी फेल आलम बेतिया में इलेक्ट्रीशियन का काम करता था, तभी वह अपने गाँव में साइबर अपराधियों के संपर्क में आया। उनके जरिए उसने पाकिस्तानी नेटवर्क से संपर्क बनाया।

NEET पेपर लीक में अब पत्रकार जमालुद्दीन गिरफ्तार: स्कूल प्रिंसिपल एहसान उल हक से था लगातार संपर्क में, इंडोनेशिया घूमने का भी एंगल

NEET पेपर लीक मामले में CBI की कार्रवाई जारी है। सीबीआई ने शुक्रवार (28 जून) की शाम को शुक्रवार (28 जून) को झारखंड के हजारीबाग से ओएसिस स्कूल के प्रिंसिपल एहसान उल हक, वाइस प्रिंसिपल इम्तियाज आलम और पत्रकार जमालुद्दीन को गिरफ्तार किया है। इसके पहले चार और आरोपित पकड़े गए हैं। सभी आरोपितों को CBI प्लेन से दिल्ली लाने की तैयारी में है।

जाँच के दौरान सीबीआई ने एहसान उल हक और इम्तियाज आलम के साथ-साथ हजारीबाग के दो पत्रकारों- मोहम्मद जमालुद्दीन और मोहम्मद सलाउद्दीन को भी ट्रैक किया था। इसमें एक पत्रकार जमालुद्दीन को सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया है। जमालुद्दीन झारखंड के एक हिंदी दैनिक अखबार से जुड़ा है। पेपर लीक मामले पर एहसान की जमालुद्दीन और सलाउद्दीन से लगातार बातचीत होती रहती थी।

सीबीआइ को जानकारी मिली कि नीट परीक्षा के तत्काल बाद एहसान उल हक विदेश घूमने गया था और करीब एक सप्ताह तक इंडोनेशिया के बाली में था। परीक्षा के पहले और बाद के उसके फोन डिटेल में बिहार से भी कनेक्शन मिला है। पेपर लीक कराने वाले गिरोह ने हजारीबाग में कई कोचिंग संचालकों से मोटी रकम लेकर प्रश्न पत्र उपलब्ध कराए थे। इनमें एक प्रोफेसर की भूमिका भी संदिग्ध है।

CBI और पुलिस के मुताबिक, 3 मई को NEET के प्रश्न पत्र कूरियर एजेंसी ब्लू डार्ट के हजारीबाग नूतन नगर सेंटर से बैंक ले जाने की बजाय पहले ओएसिस स्कूल लाए गए। इसके बाद यहाँ से बैंक भेजे गए थे। माना जाता है कि ओएसिस स्कूल में ही पेपर का पैकेट खोला गया था। ये सभी सरगना संजीव मुखिया से जुड़े बताए जा रहे हैं। मुखिया का गैंग पेपर के बॉक्स का सील तोड़ने में माहिर है।

ओएसिस स्कूल भी NEET परीक्षा का एक सेंटर था। इस सेंटर का प्रश्न पत्र और बुकलेट पटना में अधजला बरामद हुआ था। इस मामले का यह सबसे बड़ा सबूत है। इससे पहले 27 जून को सीबीआई ने पटना से मनीष प्रकाश और उसके दोस्त आशुतोष को गिरफ्तार किया था। उससे पहले दो अन्य आरोपित चिंटू और मुकेश को गिरफ्तार कर रिमांड पर लिया है।

NEET के अलावा, UGC-NET की परीक्षा भी इस ओएसिस स्कूल में आयोजित हुई थी। इसी स्कूल से ही यूजीसी-नेट के प्रश्नपत्र भी लीक होने का शक है। सीबीआई की टीम ने स्कूल के वाइस प्रिंसिपल सह सेंटर सुपरिंटेंडेंट इम्तियाज आलम का एक मोबाइल और लैपटॉप जब्त कर लिया है। इसके अलावा, जाँच एजेंसी ने अन्य कई सामानों को जब्त किया है।

पटना में 28 जून को CBI की टीम आरोपित चिंटू और मुकेश को लेकर उनके दोस्त रॉकी के घर पहुँची। बताया जा रहा है कि पटना के कंकड़बाग में रॉकी के घर से कई सबूत हाथ लगे हैं। चिंटू की देवघर में गिरफ्तारी के बाद रॉकी फरार हो गया था। CBI ने चिंटू, मुकेश, आशुतोष और मनीष के मोबाइल की जाँच की। ये सभी आरोपित 6 महीने से आपस में संपर्क में थे।

सीबीआई द्वारा गिरफ्तार मनीष प्रकाश ने अपने दोस्त आशुतोष से कहकर परीक्षार्थियों के लिए ‘लर्न एंड प्ले स्कूल’ को बुक कराया था। पटना के खेमनी चक स्थित लर्न एंड प्ले स्कूल में NEET का जला हुआ प्रश्न पत्र मिला था, जो इस घटना का प्रमुख सबूत है। इस पेपर पर दी गई जानकारी से पता चला था कि ये प्रश्न पत्र हजारीबाग के ओएसिस स्कूल के परीक्षा केंद्र से लीक हुआ था।

मनीष प्रकाश ने इस स्कूल में 20 से 25 NEET परीक्षार्थियों को रुकवाकर उन्हें प्रश्न पत्र दिया था और उन्हें आंसर शीट रटवाया था। कहा जा रहा है कि मनीष प्रकाश ने संजीव मुखिया के कहने पर परीक्षार्थियों के लिए इसका इंतजाम किया था। मनीष नालंदा का रहने वाला है। उसका परिवार पटना के बहादुरपुर थाना क्षेत्र के संदलपुर इलाके में रहता है। चिंटू संजीव मुखिया का रिश्तेदार है।

वहीं, बिहार पुलिस की EOU टीम से पेपर लीक जाँच की रिपोर्ट और सबूत हासिल करने के बाद अब CBI पेपर लीक के मुख्य आरोपित संजीव मुखिया को दबोचने की दिशा में काम कर रही है। संजीव मुखिया यूपी पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले के मुख्य आरोपित रवि अत्री भी संजीव मुखिया से जुड़ा है। इसके अलावा, कई परीक्षाओं के पेपर लीक से भी मुखिया जुड़ा हो सकता है।

लद्दाख में नदी पार करते समय बहा टी-72 टैंक अजेय, 1 JCO समेत 5 जवानों को वीरगति : युद्धाभ्यास के दौरान अचानक जलस्तर बढ़ने से हादसा

केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में एक हादसे में सेना के एक JCO समेत 5 जवानों की जान चली गई। ये सभी जवान लद्दाख के दौलत बेग ओल्डी इलाके में एक सैन्याभ्यास में हिस्सा ले रहे थे, तभी टैंक द्वारा नदी पार करने के दौरान नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से ये हादसा हो गया। जवान टैंक में ही फँस गए और टैंक बहकर नीचे गिर गया। इस हादसे पर रक्षा मंत्री ने दुख जताया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये हादसा दुनिया के सबसे ऊँचे हवाई पट्टी वाले दौलत बेग ओल्डी सेक्टर में हुआ है। जो चुशूल से 148 किमी दूर है। ये हादसा रात में करीब 1 बजे हुआ, जब नदी के पानी का स्तर अचानक बढ़ गया। सभी जवान टी-72 टैंक में सवार थे। ये टैंक नदी को पार कर सकता है। इस हादसे में वीर गति प्राप्त करने वाले जवानों के नाम आरआईएस एमआर के रेड्डी, डीएफआर भूपेंद्र नेगी, एलडी अकदुम तैयबम, हवलदार ए खान (6255 एफडी वर्कशॉप), सीएफएन नागराज पी (एलआरडब्ल्यू) हैं।

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने इस घटना पर दुख व्यक्त किया है। उन्होंने एक्स पर लिखा, “लद्दाख में नदी पार कराते समय हुए दुर्भाग्यपूर्ण हादसे में भारतीय सेना के पाँच बहादुर जवानों की वीरगति से मैं बहुत दुखी हूँ। हम देश के लिए अपने वीर जवानों की अनुकरणीय सेवा को कभी नहीं भूल पाएँगे। शोक संतप्त परिवारों के प्रति मेरी हार्दिक संवेदनाएँ। दुख की इस घड़ी में पूरा देश उनके साथ है।”

बता दें कि टी-72 टैंक भारत में अजेय नाम से जाना जाता है। ये 15 मीटर गहरी नदी को पार कर सकता है। ये टैंक काफी भरोसेमंद माना जाता है। चूँकि इस हादसे के समय पानी का जलस्तर अचानक से बढ़ा और बहाव तेज हो गया, ऐसे में ये पानी के बहाव में बह गया और नीचे खाईं में गिर गया। हालाँकि बताया जा रहा है कि हादसे के समय टैंक पर 5 जवान सवार थे, जबकि इस टैंक को चलाने के लिए 3 ही जवानों की जरूरत होती है।

कोहली के करियर का आखिरी वर्ल्ड कप फाइनल: क्या है प्लान, जेंसन-रबाडा-महाराज की साउथ अफ्रीकी तिकड़ी से रहना होगा सावधान

आईसीसी टी-20 विश्व कप-2024 का आखिरी पड़ाव। मैदान है ब्रिजटाउन का केन्सिंगटन ओवल। आखिरी मुकाबले में भारत और दक्षिण अफ्रीका की टीमें। दाँव पर है विश्व विजेता का खिताब। एक तरफ साल 2011 में आखिरी बार कोई विश्वकप जीता भारत है, तो दूसरी तरफ पहली बार किसी आईसीसी विश्वकप में पहुँचा दक्षिण अफ्रीका। इस मुकाबले में कई खिलाड़ियों पर सभी की नजरें हैं, लेकिन जिस खिलाड़ी पर सभी की नजर है वो है विराट कोहली।

भारतीय क्रिकेट प्रशंसक विराट कोहली को किंग कोहली कहते हैं। विराट कोहली 2011 में 50 ओवरों का विश्वकप जीतने वाली टीम का अहम हिस्सा थे और फाइनल मुकाबले में भी उन्होंने एक छोटी मगर बेहद परिपक्व पारी खेली थी, जो बेशकीमती साबित हुई। इस बार विराट कोहली विश्वकप में ओपनिंग कर रहे हैं और अपने अब तक के सबसे बुरे दौर से गुजर रहे हैं। हो सकता है कि ये विश्व कप का फाइनल विराट कोहली के क्रिकेट जीवन में टी-20 विश्वकप का आखिरी फाइनल मुकाबला भी हो, क्योंकि अब वो 36 साल के होने वाले हैं और लंबे समय से टी-20 इंटरनेशनल मुकाबलों से दूरी भी बनाते दिख रहे हैं।

क्यों है विराट कोहली पर नजर?

आधुनिक क्रिकेट के इतिहास में विराट कोहली जैसा सक्षम बल्लेबाज शायद ही कोई हो। क्रिकेट के हर फॉर्मेट में उन्होंने जमकर रन बटोरे हैं। अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में करीब 27 हजार रन बना चुके विराट कोहली 80 शतक भी लगा चुके हैं। वो इंटरनेशनल टी-20 मैचों में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज भी रहे हैं, हालाँकि इसी विश्वकप में बेहद खराब प्रदर्शन से गुजरने की वजह से वो दूसरे नंबर पर आ चुके हैं। इस विश्वकप में उन्होंने 7 मैचों की 7 पारियों में करीब 10 की बेहद मामूली औसत और करीब 100 के ही स्टारइक रेट से महज 75 रन ही बना पाए हैं। अब फाइनल मुकाबले में वो दमदार पारी खेलकर अपने टी-20 करियर को आईसीसी विश्वकप की ट्रॉफी के साथ विदा कहना चाहेंगे। हालाँकि कप्तान रोहित शर्मा कई बार कह चुके हैं कि वो विराट कोहली की फॉर्म को लेकर चिंता में नहीं हैं, ऐसे में कोहली को इस आखिरी मैच में ये साबित करना भी होगा।

कई फाइनल मुकाबले खेल चुके हैं कोहली

विराट कोहली 2011 के विश्वकप फाइनल मुकाबले के बाद से कई विश्वकप खेल चुके हैं। 50 ओवरों के विश्वकप की बात करें तो साल 2015 और 2019 में सेमीफाइनल मुकाबला भारतीय टीम हारी थी, तो 2023 में फाइनल मुकाबले में उसे हार मिली। इसका मतलब है कि कोहली लगातार 4 विश्वकप मैचों में नॉकआउट मैच खेल चुके हैं, जिसमें भारतीय टीम एक जीती है, तो तीन हारी है। वहीं, टी-20 मुकाबलों में 1 बार टीम को फाइनल में हार मिली, तो 3 बार सेमीफाइनल में। इस बार विराट कोहली अपनी टीम को चैंपियन बनाना चाहेंगे और एक चैंपियन की तरह ही विदाई लेना चाहेंगे।

दक्षिण अफ्रीकी तिकड़ी से सावधान रहने की जरूरत

इस मैच में विराट कोहली को दक्षिण अफ्रीकी गेंदबाजों की उन तिकड़ी से सावधान रहना होगा, जो उनके खिलाफ अच्छा करते हैं। विराट कोहली पारंपरिक तौर पर बाएँ हाथ के गेंदबाजों के खिलाफ संघर्ष करते रहे हैं। ऐसे में दक्षिण अफ्रीका के बाएँ हाथ के तेज गेंदबाज मैक्रो जेन्सन से उन्हें बचकर रहने की जरूरत है, जो इस विश्वकप में 16 विकेट हासिल कर चुके हैं। वहीं, दक्षिण अफ्रीकी टीम इस फाइनल मुकाबले में एक दाँव केशव महाराज का चल सकती है, क्योंकि वो लेफ्ट आर्म स्पिनर हैं और लेफ्ट आर्म स्पिनर्स के सामने भारतीय बल्लेबाज काँप से जाते हैं। विराट कोहली ही नहीं, बल्कि रोहित शर्मा भी लेफ्ट आर्म बॉलर्स के सामने डरे-सहमे से नजर आते हैं। हालाँकि रोहित शर्मा ने मिचेल स्टार्क की धज्जियाँ उड़ाकर ये बात साबित कर दी है कि उन्हें ज्यादा दिक्कत नहीं है, लेकिन अतीत में बाएँ हाथ के गेंदबाजों के सामने उन्हें परेशानी होती रही है, चाहे वो स्टार्क हों, शाहीन शाह अफरीदी हों, मुस्तफिजुर रहमान हों या ट्रेंट बोल्ट।

इसके अलावा दक्षिण अफ्रीकी तिकड़ी में कगिसो रबाडा जैसा बॉलर है, जो बाएँ नहीं बल्कि दाहिने हाथ से तेज गेंदबाजी करता है, लेकिन अपनी एक्यूरेसी के दम पर बल्लेबाजों की नाक में दम कर देता है। रबाडा काफी अनुभवी भी हैं। ऐसे में जेन्सन से बचने के चक्कर में अगर रबाडा पर अटैक करने की सोचा गया, तो वो बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं। दक्षिण अफ्रीकी गेंदबाजी में एनरिच नॉर्खिए से भी सावधान रहने की जरूरत है, क्योंकि असामान्य तौर पर अधिक तेज गेंदबाजी की उनकी क्षमता बेहतरीन है और इस विश्वकप में वो इसे साबित भी कर चुके हैं।

इन खिलाड़ियों पर नजर

भारतीय टीम को विराट कोहली से इस मैच में उनके क्रिकेट जीवन की सबसे महत्वपूर्ण पारी की आस है, तो कप्तान रोहित शर्मा से एक बार फिर से बड़ी पारी की उम्मीद है। भारतीय बल्लेबाजी क्रम बेहतरीन रहा है। शिवम दुबे को खिलाने या न खिलाने को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला मैच के समय हो सकता है। चूँकि ब्रिजटाउन का ये मैच जिस चौथी नंबर पिच पर खेली जानी है, उस पर 2 मुकाबले हो चुके हैं, जिस पर तेज गेंदबाजों के लिए काफी कुछ देखा जा चुका है। ऐसे में गेंदबाजी क्रम में एक बार फिर से भारत की सफलता जसप्रीत बुमराह और अक्षदीप सिंह पर निर्भर करेगी, तो बाएँ हाथ के बॉलर्स जडेजा-अक्षर-कुलदीप की तिकड़ी भी काफी अहम रहने वाली है। चूँकि भारतीय टीम को क्विंटन डिकॉक और हेनरिच क्लासन के साथ ही डेविड मिलर से भी निपटना होगा, तो एक ऑफस्पिनर की जरूरत पड़ सकती है, या फिर इस मैच में रोहित शर्मा को भी एक-2 ओवर की गेंदबाजी करते भी हम देख सकते हैं।

‘आपके पास एक ही अंडकोष, सब-इंस्पेक्टर के लिए अनफिट हैं आप’: परीक्षा पास लेकिन मेडिकल बोर्ड ने लगाया अड़ंगा, हाई कोर्ट से भी झटका

उड़ीसा उच्च न्यायालय ने केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के एक कॉन्स्टेबल द्वारा दायर रिट याचिका को खारिज कर दिया है। अपनी याचिका में कॉन्स्टेबल ने कहा था कि उसने विभागीय लिखित परीक्षा पास कर ली है, लेकिन एक अंडकोष होने की वजह से उसे उप-निरीक्षक (दारोगा) के पद पर नियुक्ति नहीं दी जा रही है।

मेडिकल रिव्यू बोर्ड ने एक अंडकोष होने के कारण कॉन्स्टेबल को ‘चिकित्सकीय रूप से अयोग्य’ बताया था। उड़ीसा हाई कोर्ट के न्यायाधीश डॉक्टर संजीव कुमार पाणिग्रही की एकल पीठ ने मेडिकल रिव्यू बोर्ड के फैसले को सही ठहराया और कहा कि पात्रता मानदंडों को पूरा करना जरूरी है। जो पूरा करेगा, वही चुना जाएगा।

न्यायामूर्ति पाणिग्रही ने कहा, “सब-इंस्पेक्टर/Exe (LDCE) का पद कॉन्स्टेबल/जीडी से ऊँचा पद है। सब-इंस्पेक्टर/Exe के पद पर उच्च कर्तव्य और जिम्मेदारियाँ होती हैं। इसलिए जो उम्मीदवार सभी पात्रता मानदंडों को पूरा करते हैं और भर्ती प्रक्रिया के सभी मामलों में अर्हता प्राप्त करते हैं, उन्हें चुना जाएगा और पद पर नियुक्त किया जाएगा।”

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस संजीव कुमार पाणिग्रही ने अपना फैसला सुनाते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय के प्रियंका बनाम भारत संघ एवं अन्य के मामले में दिए गए फैसले का भी हवाला दिया। इस फैसले में दिल्ली हाई कोर्ट ने सशस्त्र बलों में आवश्यक उच्च मानकों को स्पष्ट रूप से स्वीकार किया गया था।

दरअसल, याचिकाकर्ता को साल 2008 में CISF में कॉन्स्टेबल के पद पर नियुक्त किया गया था। साल 2014 में उसने सीमित विभागीय प्रतियोगी परीक्षा (एलडीसीई) में उपस्थित होने के लिए आवेदन किया। यह परीक्षा विभागीय उम्मीदवारों को उप-निरीक्षक (SI) के पद पर पदोन्नति की सुविधा देने के लिए आयोजित की गई थी।

याचिकाकर्ता ने लिखित परीक्षा पास ली। उसके बाद उसे शारीरिक दक्षता परीक्षण के लिए बुलाया गया। मेडिकल परीक्षण से पता चला कि उसे उसका सिर्फ एक अंडकोष है। इसके बाद उसे सब-इंस्पेक्टर के रूप में भर्ती के लिए चिकित्सकीय रूप से अयोग्य घोषित कर दिया गया था।

इससे दुखी होकर कॉन्स्टेबल ने बोर्ड के फैसले को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में एक रिट याचिका दायर की। कोर्ट ने कहा, “इसमें विभाग का याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई व्यक्तिगत द्वेष या कुछ भी नहीं है। उसने सिर्फ चयन नियमों के तहत निर्धारित चिकित्सा परीक्षण कराने की कोशिश की है।” इसके बाद याचिका खारिज कर दी।

भगवा रंग से CM ममता बनर्जी को एलर्जी, सभी सार्वजनिक घरों/स्थानों से हटा कर अलग रंग पोतने का आदेश: टीम इंडिया की जर्सी पर की थीं बवाल

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में गेरुआ (या भगवा) और लाल रंगों से छतों की पुताई उठाते हुए मुख्य सचिव को इसकी जाँच करने के आदेश दिए हैं। उन्होंने शुक्रवार (28 जून) को कहा कि बंगाल में घर की छतें भगवा और लाल क्यों होंगी? उन्होंने यह भी कहा कि बंगाल में छत पर लगाने के लिए इस तरह के टिन शेड कैसे आपूर्ति किए जा रहे हैं।

ममता बनर्जी ने कहा बंगाल का रंग नीला-सफेद है। इसका इस्तेमाल होना चाहिए। इससे पहले भी ममता बनर्जी की सरकार राज्य में सरकारी इमारतों के साथ-साथ निजी घरों को भी नीले-सफेद रंग में रंगने पर जोर देती रही हैं। इसके लिए उन्होंने सरकारी इमारतों के साथ निजी घरों को भी कर में छूट देने की घोषणा की है।

राज्य सचिवालय में गुरुवार (27 जून 2024) को आयोजित हुई प्रशासनिक बैठक में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि राज्य का रंग नीला-सफेद है। इसके बाद भी लोग नीले-सफेद रंग को लोग स्वीकार क्यों नहीं कर रहे हैं। ममता बनर्जी ने कहा कि लोग जो चाहे कपड़े पहन सकते हैं। अपनी पसंद का घर भी बना सकते हैं, लेकिन घर की छत लाल और भगवा ही क्यों होगी?

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रशासन को निर्देश दिया कि कोई भी सार्वजनिक संपत्ति लाल या भगवा रंग में नहीं रंगी जाए। केवल नबाना (राज्य सचिवालय) में इस्तेमाल किया गया आसमानी नीला रंग ही इस्तेमाल किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि इमारतों की छत के लिए इस्तेमाल भगवा-लाल रंग के टिन शेड को भी हटाना होगा और उनकी जगह आसमानी नीला रंग है लगाना होगा।

इस टिप्पणी पर विधानसभा में भाजपा के सचेतक शंकर घोष ने कहा कि ममता बनर्जी का अमानवीय चेहरा उजागर हो गया है। लाल-भगवा के जरिए वह क्या कहना चाहती हैं? माकपा के वरिष्ठ नेता सुजन चक्रवर्ती ने कहा कि मुख्यमंत्री ने कहा था कि घर का रंग नीला और सफेद होने पर कर में छूट मिलेगी। यह लोगों की स्वतंत्रता है कि वह कौन सा रंग चुनें।

बता दें कि दिसंबर 2023 में बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करने से पहले रंगों की राजनीति की थी। उन्होंने कहा था कि केंद्र सरकार ने 100 दिन के काम का पैसा और स्वास्थ्य विभाग का पैसा रोक दिया है। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया था कि भाजपा ‘रंगीन राजनीति’ कर रही है।

ममता बनर्जी ने कहा था कि गेरुआ रंग में नहीं रंगे होने के कारण स्वास्थ्य विभाग ने पैसे रोक दिए हैं। उन्होंने आगे कहा था, “मेट्रो स्टेशनों को भी गेरुआ रंग से रंग दिया गया है। मैं सिलीगुड़ी गई और सभी घरों को गेरुए रंग से रंगा हुआ देखा। हमसे कहा गया है कि सभी स्वास्थ्य केंद्रों को गेरुआ रंग का बनाया जाना चाहिए।

ममता ने कहा था, “गेरुआ रंग क्यों रंगा जाएगा? इस राज्य के ब्रांड का रंग नीला-सफेद है। यह कोई पार्टी का रंग नहीं है। हम कलर ब्रांड शुरू करने वाले पहले व्यक्ति थे। यह क्या है! हर जगह सिर्फ बीजेपी का लोगो लगाना चाहिए और बीजेपी का रंग लगाना है।”

बता दें कि बंगाल के सभी स्वास्थ्य केंद्रों का रंग नीला-सफेद है। हालाँकि, केंद्र सरकार के स्पष्ट निर्देश में कहा गया था कि केंद्र के वित्तीय आवंटन से बनने वाले स्वास्थ्य केंद्रों का रंग हल्का पीला होगा। इसके साथ खैरी बॉर्डर होना चाहिए। अब इस रंग के अभाव के कारण बंगाल सरकार आरोप लगाया था कि पश्चिम बंगाल को 800 करोड़ रुपए का आवंटन रोक दिया है।

नवंबर 2023 में टीम इंडिया की जर्सी के रंग को लेकर भी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि सब कुछ गेरुआ रंग में रंगा जा रहा है। मध्य कोलकाता के पोस्ता बाजार में जगधात्री पूजा के उद्घाटन अवसर सीएम ममता ने कहा था, “अब सब कुछ भगवा हो रहा है! भारतीय खिलाड़ियों की ड्रेस भी भगवा हो गई है! वे पहले नीले रंग की ड्रेस पहनते थे।”