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स्पीकर की कुर्सी सँभालते ही ओम बिरला ने आपातकाल के पीड़ितों को किया स्मरण, लोकसभा में दो मिनट का मौन: विपक्ष का हंगामा

लोकसभा के स्पीकर चुने गए ओम बिरला ने कार्यभार संभालने के बाद आपातकाल को याद किया। उन्होंने आपातकाल के दिनों में हुए अत्याचार पर लोकसभा में दो मिनट का मौन भी रखा। इस दौरान भी विपक्ष के सांसद शोर मचाते रहे।

स्पीकर पद के लिए ओम बिरला को NDA गठबंधन ने अपना उम्मीदवार बनाया था, उनके सामने INDI गठबंधन ने K सुरेश को उतारा था। ओम बिरला को ध्वनिमत से स्पीकर चुन लिया गया। विपक्ष ने इस दौरान वोटों का बंटवारा भी नहीं करवाया। इसके बाद ओम बिरला ने कार्यभार संभाल लिया।

ओम बिरला ने कार्यभार संभालने के बाद 1975 में इंदिरा गाँधी की कॉन्ग्रेस सरकार द्वारा लगाए गए आपातकाल की निंदा की। आपातकाल के 50 वर्ष पूरे होने पर उन्होंने कहा, “ये सदन 1975 में देश में आपातकाल लगाने के निर्णय की कड़े शब्दों में निंदा करता है। इसके साथ ही हम, उन सभी लोगों की संकल्पशक्ति की सराहना करते हैं, जिन्होंने आपातकाल का पुरजोर विरोध किया, संघर्ष किया और भारत के लोकतंत्र की रक्षा का दायित्व निभाया।”

स्पीकर ओम बिरला ने आपातकाल के दौरान किए गए अत्याचारों के पीड़ितों पर संवेदना जताई। उन्होंने कहा, “आपातकाल के दौरान लोगों को कॉन्ग्रेस सरकार द्वारा जबरन थोपी गई अनिवार्य नसबंदी का, शहरों में अतिक्रमण हटाने के नाम पर की गई मनमानी का और सरकार की कुनीतियों का प्रहार झेलना पड़ा। ये सदन उन सभी लोगों के प्रति संवेदना जताना चाहता है।”

स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि इंदिरा गाँधी की सरकार ने आपातकाल के दौरान न्यायपालिका और नौकरशाही पर भी हमला किया था। उन्होंने कहा कि संविधान में इस दौरान जबरन संशोधन किए गए थे और इनके जरिए कॉन्ग्रेस सारी शक्तियाँ इंदिरा गाँधी के हाथ में लाना चाहती थी।

ओम बिरला ने आपातकाल के दौरान अत्याचारों के कारण मारे गए लोगो के प्रति संवेदना प्रकट करने के लिए सदन से 2 मिनट का मौन रखने को ही कहा। इस दौरान भाजपा समेत सभी पार्टियों ने मौन रखा जबकि कॉन्ग्रेस समेत तमाम विपक्षी पार्टियाँ हल्ला मचाती रहीं। विपक्षी दलों ने इस मौन में भाग नहीं लिया।

आपताकाल को लेकर NDA सांसदों ने सदन के बाहर भी प्रदर्शन किया। NDA सांसदों ने इस दौरान बैनर-पोस्टर भी पकड़े हुए थे जिन पर लिखा था, ”ना भूलेंगे, ना माफ़ करेंगे और ना दोहराने देंगे।” इसको लेकर संसदीय मामलों के मंत्री किरेन रिजीजू ने कहा कि इंदिरा गाँधी ने अकेले ही आपाताकाल लगाने का निर्णय ले लिया था, हम ऐसा दोबारा कभीं नहीं होने देंगे।

पश्चिम से बन-ठन कर आई रोगग्रस्त वेश्या की हो रही पूजा… आपातकाल के खिलाफ आत्मदाह करने वाले प्रभाकर शर्मा, पत्र में लिखा था – नरपिशाचिनी के राज में नहीं जिऊँगा

भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने 25 जून, 1975 को देश पर आपातकाल थोप दिया था। लालकृष्ण आडवाणी समेत विपक्ष के कई नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। अखबारें सरकारी स्क्रूटनी के बाद छप कर निकलने लगीं। पत्रकारों को प्रताड़ित किया जाने लगा। अभिनेत्री स्नेहलता रेड्डी को जेल में इतना प्रताड़ित किया गया कि उनकी मौत हो गई। बीमार महारानी गायत्री देवी को जेल में ठूँस कर यातनाएँ दी गईं। संजय गाँधी के आदेश पर हजारों लोगों की जबरन नसबंदी हुई।

आपातकाल की गुम कहानियों में एक प्रभाकर शर्मा की भी है। प्रभाकर शर्मा सत्याग्रही थे। बिहार के वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र किशोर ने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रभाकर शर्मा के बारे में बताया है। सुरेंद्र किशोर 5 दशकों में कई पत्र-पत्रिकाओं का संपादन कर चुके हैं और पद्मश्री से सम्मानित हैं। जॉर्ज फर्नांडिस के लिए काम कर चुके सुरेंद्र किशोर आपातकाल के दौरान जेल भी गए थे। बिहार में पशुपालन घोटाले को उजागर करने वालों में भी शामिल रहे। सुरेंद्र किशोर आपातकाल के भुक्तभोगी हैं, ऐसे में उन्होंने प्रभाकर शर्मा की कहानी बताई है।

उन्होंने उनलोगों को जवाब दिया है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तानाशाह कहते हैं और देश में ‘अघोषित आपातकाल’ होने की बातें करते हैं। जो लोग ऐसी बातें करते हैं, या तो उन्होंने असली आपातकाल देखा नहीं है या फिर वो जानबूझकर आपातकाल के दर्द को कम कर के आँकते हैं। कोलकाता से प्रकाशित साप्ताहिक पत्रिका ‘रविवार’ में प्रभाकर शर्मा की ये कहानी 8 दिसंबर, 1979 में छपी थी। उन्होंने इंदिरा गाँधी को एक मार्मिक पत्र भी भेजा था, जिसकी एक प्रति उन्होंने विनोबा भावे को भेजी थी।

जब्त होती थीं पत्रिकाएँ, झुक गए थे जज भी

बता दें कि विनोभा भावे को आपातकाल का विरोध न करने के कारण उस दौर में ‘सरकारी संत’ कहा जाने लगा था। उन्होंने प्रभाकर शर्मा के इस पत्र की चर्चा तक किसी से नहीं की। समाजवादी नेता कर्पूरी ठाकुर ने उन्हें कई बार आपातकाल विरोधी आंदोलन का नेतृत्व करने को कहा, लेकिन वो चुप रहे। इस पर कर्पूरी ठाकुर ने कहा कि उन्हें महात्मा गाँधी का उत्तराधिकारी कहलाने का कोई अधिकार नहीं है। ये भी चर्चा थी कि उन्होंने आपातकाल को ‘अनुशासन पर्व’ कहा है, जिसे उन्होंने आपातकाल खत्म होने के बाद नकार दिया था।

खैर, इन्हीं विनोबा भावे की पत्रिका ‘मैत्री’ पर भी सरकार का कहर बरपा था। वो खुद इसके संपादक थे। विनोबा भावे गोहत्या पर प्रतिबन्ध लगाने की माँग के साथ अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने वाले थे, इसी खबर को छापने पर ‘मैत्री’ की पत्रिकाओं को जब्त कर लिया गया। इसकी 4000 प्रतियाँ जब्त की गई थीं। एक जूनियर सब-इंस्पेक्टर को भेज कर महाराष्ट्र के वर्धा स्थित पवनार आश्रम पर छापा मारा गया। विनोबा भावे इस पर ‘धन्य हो, धन्य हो’ कह कर रह गए।

सुप्रीम कोर्ट ने भी इस दौरान लोगों की मदद करने से इनकार कर दिया था। 5 न्यायाधीशों की पीठ ने फैसला दिया कि नए निजाम में सरकार किसी को भी जेल में डाल सकती है। सर्वोच्च न्यायालय ने इसमें हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था। सिर्फ एक जज HR खन्ना ने इससे मतभेद जताया। बताया जाता है कि 3 जजों ने CJI बनने के लालच में ये फैसला दिया, उन्हें डर भी था कार्रवाई का। इंदिरा गाँधी ने 38वें संविधान संशोधन के जरिए न्यायपालिका को आपातकाल की समीक्षा से वंचित कर दिया, सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा कि इंदिरा गाँधी के चुनाव संबधी फैसला अब उसकी परिधि से बाहर है।

अब आते हैं वापस प्रभाकर शर्मा पर। उन्होंने 14 अक्टूबर, 1976 को 1976 को वर्धा के निकट सुरगाँव में आत्मदाह किया था। उन्होंने उससे पहले लिखे गए पत्र में बताया था कि कैसे सरकार ने पशुबल का इस्तेमाल कर पत्र-पत्रिकाओं के स्वातंत्र्य लेखन को छीन लिया था। उन्होंने लिखा था कि सत्य पर निर्मम प्रहार किया जाता है, उन्होंने ‘मैत्री’ को जब्त किए जाने का भी विरोध करते हुए लिखा था कि भारत की अहिंसक और आध्यात्मिक संस्कृति पर निर्लज्ज प्रहार किया गया है।

प्रभाकर शर्मा ने इंदिरा गाँधी को अपने मार्मिक पत्र में क्या लिखा था

उन्होंने आपातकाल की तुलना मुगलों के अत्याचार से करते हुए कहा कि महात्मा गाँधी से जिस पार्टी को अहिंसा की शिक्षा मिली उसी ने ऐसा किया है। उन्होंने पूछा था कि उनके घर में लोग घुस आएँ और उनकी संपत्ति पर कब्ज़ा कर के पिस्तौल दिखा कर स्त्रियों का बलात्कार करें तो उन्हें कैसा महसूस होगा? उनका इशारा इंदिरा गाँधी के ‘गरीबी हटाओ’ के नारे पर था। उन्होंने लिखा था कि राक्षसी कानून लगा कर अँधेरी गुफा में देश को धकेल दिया गया है।

प्रभाकर शर्मा ने लिखा था, “ये केंद्र सरकार गुंडों का संगठन है। मानवता, शील, चरित्र, न्याय, लज्जा, ईमानदारी और भारतीय संस्कृति को इसने तिलांजलि दे दी है। अख़बारों में भी इसकी खबर नहीं छप सकती। जयप्रकाश नारायण का स्वागत तक करने पर गिरफ़्तारी हो जाती है। जालसाजी, भ्रष्टाचार और काले धन के बल पर इंदिरा गाँधी PM बनी हैं। उनके खिलाफ आदेश देने पर न्यायधीशों को भी हटा दिया जाएगा। आज इंदिरा गाँधी की मर्जी है धर्मशास्त्र, सबक है नीति-शास्त्र, इच्छा है संस्कृति, गर्वोन्माद है कानून और हुंकार है न्याय।”

प्रभाकर शर्मा ने आगे लिखा था कि इंदिरा गाँधी अपने जघन्य कुकृत्यों के कारण लोकमत का सामना करने का साहस खो चुकी हैं, उन्होंने राष्ट्र की अंतरात्मा की हत्या की है। उन्होंने इंदिरा गाँधी पर प्रजा को दब्बू व चरित्रहीन बनाने का आरोप लगाते हुए कहा था कि नई पीढ़ी तो खत्म ही है। होने स्पष्ट ऐलान किया था कि संपूर्ण भारत को सत्ता के लिए अपने पाँवों तले रौंदने वाली नरपिशाचिनी के राज में जीने की बजाए वो हजार बार मल-मूत्र में रेंगने वाले कीड़े के रूप में जन्म लेना पसंद करेंगे।

उन्होंने याद किया था कि ये वही भारत है जहाँ अद्वैतवाद का जन्म हुआ, हजारों संतों ने तपस्या की और बहुमातैक्य की अनुभूति प्राप्त कर आध्यात्मिक और अहिंसक संस्कृति के बीज बोए थे। उन्होंने कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि आपातकाल का विरोध न करने पर ये ऐसे लोगों का देश कहलाएगा जिसने शरीर और आत्मा को बेच कर पश्चिम से बन-ठन कर आई रोगग्रस्त वेश्या को पूजना शुरू कर दिया है। उन्होंने नौकरशाही पर भी अपना पद बनाए रखने के लिए जनता पर दमन किया।

प्रभाकर शर्मा ने लिखा था, “शहरी वर्ग ने अपने भोग-विलास, फैशन और ऐशोआराम को बनाए रखने के लिए सरकार के अपमानजनक कानूनों और जुल्मों के आगे घुटने टेक दिए हैं। सत्ता और संपत्ति की पूजा के लिए मनुष्य जाति के नैतिक एवं आध्यात्मिक मूल्यों का यह पतन देख कर मेरा हृदय विदीर्ण हो जाता है। अज्ञान और दारिद्र्य में गोते लगाने वाले करोड़ों भारतवासियों के रहते इन सत्ताधीशों और शहरवासियों को नींद कैसे आती है और अन्न कैसे पचता है?”

प्रभाकर शर्मा ने लिखा था कि उन्होंने बहुत कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया है, लेकिन इंदिरा गाँधी के दमनकारी कुकृत्यों की तुलना में ये शब्द बेहद ही सौम्य माने जाने चाहिए। उन्होंने ईश्वर की दृष्टि में सबको समान बताते हुए लिखा था कि वो कभी इन मदांध सत्ताधीशों को माफ़ नहीं करेगा। उन्होंने लिखा था कि भावी पीढ़ी आज के मदग्रस्त अफसरों, मंत्रियों, राष्ट्रपति और पिट्ठू न्यायाधीशों को सबसे बड़ा अपराधी मानेगी। उन्होंने आरोप लगाया था कि अपने निकृष्ट स्वार्थ की पूर्ति के लिए ये लोग चकाचौंध और भ्रामक विचारों द्वारा प्रजा को सम्मोहित कर उसका पतन सुनिश्चित कर रहे हैं।

आडवाणी और विनोबा भावे तक भी पहुँची खबर

प्रभाकर शर्मा के आत्मदाह की खबर लालकृष्ण आडवाणी को भी मिली थी। 13 नवंबर, 1976 को एक पत्र के जरिए उन्हें सर्वोदय कार्यकर्ता प्रभाकर शर्मा के आत्मदाह की खबर मिली थी। प्रभाकर शर्मा ही नहीं, ऐसे सैकड़ों गाँधीवादियों ने इस ‘दूसरे स्वाधीनता आंदोलन’ में हिस्सा लिया और सरकारी दमनचक्र का शिकार बने। सर्वोदय आंदोलन महात्मा गाँधी ने शुरू किया था, बाद में विनोबा भावे ने इसका नेतृत्व किया। प्रभाकर शर्मा, विनोबा भावे के सहयोगी थे लेकिन विनोबा भावे इस पर चुप रहे।

प्रभाकर शर्मा की उस वक्त उम्र 65 वर्ष थी। प्रभाकर शर्मा ने अपने पत्र में महात्मा गाँधी की पत्रिका ‘यंग इंडिया’ का उल्लेख करते हुए ये भी कहा था कि हम एक आज़ाद स्त्री-पुरुष की तरह नहीं जी सकते तो हमें मर जाना चाहिए। उन्होंने लिखा था कि इंदिरा गाँधी के शासनकाल में चिट्ठी लिखना भी अपराध है, इसीलिए सज़ा भुगतने की बजाए वो मरना पसंद करेंगे। उन्होंने लिखा था कि आपातकाल ने नौकरशाहों को शैतान और जनता को कायर बना दिया है।

कोर्ट में बोले केजरीवाल- मैंने सिसोदिया का नहीं लिया नाम, CBI ने कहा था- दिल्ली के CM ने नई शराब नीति को मनीष का आइडिया बताया

दिल्ली शराब घोटाला केस में सीबीआई ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार कर लिया है। इस बीच, सीबीआई ने कोर्ट में दिल्ली की शराब नीति को लेकर बड़ा दावा किया है। सीबीआई ने कहा है कि अरविंद केजरीवाल ने पूछताछ में दिल्ली की शराब नीति की जिम्मेदारी मनीष सिसोदिया पर डाली है। वहीं, कुछ मीडिया रिपोर्ट में अरविंद केजरीवाल ने कोर्ट में कहा है कि मनीष सिसोदिया पर जिम्मेदारी डालने से जुड़ी जो खबरें मीडिया में चल रही हैं, वो गलत हैं।

आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, सीबीआई ने कहा कि केजरीवाल ने विजय नायर से संबंधों पर पलड़ा झाड़ने की कोशिश की है। उन्होंने सीबीआई से कहा कि विजय नायर ने उनके साथ काम नहीं किया बल्कि उसने आतिशी और सौरभ भारद्वाज के तहत काम किया था। सीबीआई का दावा है कि इस तरह केजरीवाल ने दिल्ली एक्साइज पॉलिसी की पूरी जिम्मेदारी मनीष सिसोदिया पर डाल दी। केजरीवाल ने कहा कि एक्साइज पॉलिसी का आइडिया उनका नहीं बल्कि मनीष सिसोदिया का था। उन्होंने सारा दोष मनीष सिसोदिया पर डालते हुए कहा कि उन्हें आबकारी नीति के बारे में कोई जानकारी नहीं है।

सीबीआई ने कोर्ट में कहा कि 16 मार्च 2021 को एक शराब कारोबारी से संपर्क किया गया। मुख्यमंत्री केजरीवाल ने शराब नीति को लेकर उससे मुलाकात की। केजरीवाल ने 16 मार्च को सचिवालय में मगुंटा रेड्डी से पहली बार मुलाकात की। रेड्डी ने केजरीवाल से मुलाकात कर शराब नीति को लेकर सपोर्ट माँगा था, इस पर केजरीवाल ने मदद का आश्वासन दिया लेकिन उनसे आम आदमी पार्टी को फंड देने को कहा।

मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि सीबीआई ने बताया कि अरविंद केजरीवाल ने ही मंगुटा रेड्डी से कहा था कि वो बीआरएस की नेता के. कविता से बात करें। इसके बाद 19 मार्च 2021 को कविता ने रेड्डी से संपर्क किया और उनसे हैदराबाद में मिलने को कहा। हैदराबाद में कविता ने रेड्डी से पचास करोड़ की माँग की। रेड्डी को बताया गया कि वे पहले से ही नई शराब नीति पर काम कर रहे हैं और उनसे इस पॉलिसी पर साथ मिलकर काम करने को कहा गया। ये सब मुख्यमंत्री केजरीवाल की जानकारी और उनके निर्देश पर हुआ।

केजरीवाल की गिरफ्तारी के लिए सीबीआई का कारण यह था कि वह उस कैबिनेट का हिस्सा थे जिसने शराब नीति को मंजूरी दी थी। उसमें बदलाव किए गए और थोक विक्रेताओं के लिए प्रॉफिट मार्जिन 5 फीसदी से बढ़ाकर 12 फीसदी कर दिया गया।

इस बीच, कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि अरविंद केजरीवाल ने मनीष सिसोदिया पर जिम्मेदारी डालने की खबरों का खंडन किया है। न्यूज18 के मुताबिक, “अरविंद केजरीवाल ने कोर्ट में कहा है कि’ मीडिया में चल रहा है कि मैंने सारा दोष मनीष सिसोदिया पर डाल दिया है। मैंने ऐसा कोई बयान नहीं दिया है।'”

बता दें कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को बुधवार (26 जून 2024) को सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया। सीबीआई ने अरविंद केजरीवाल को तिहाड़ जेल से लाकर कोर्ट में पेश किया और अपनी दलीलें देकर कोर्ट की अनुमति से अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार कर लिया। सीबीआई ने कोर्ट से अरविंद केजरीवाल की 5 दिन की कस्टडी माँगी है।

मुरैना में 2 गोहत्यारों के घरों को बुलडोजर ने किया ध्वस्त: अब तक 6 गिरफ्तार, 3 फरार… बोरी में मिला था मांस, बजरंग दल कार्यकर्ता पर किया था हमला

मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में प्रशासन ने बुधवार (26 जून 2024) को गो-हत्या के आरोपित जफ्फार खान और असगर खान के घरों पर बुलडोजर चला दिया है। इस मामले में कुल 9 आरोपित नामजद किए गए हैं, जिनमें से 6 को गिरफ्तार कर लिया गया है। फरार 3 गो-हत्यारों की तलाश जारी है। बजरंग दल ने कठोर कार्रवाई की माँग लेकर प्रदर्शन किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला मुरैना के थाना क्षेत्र नूराबाद का है। यहाँ 21 जून (शुक्रवार) को बजरंग दल ने बंगाली कॉलोनी स्थित एक घर में गोमांस होने की शिकायत की थी। तब गोकशी रोकने के प्रयास में दिलीप गुर्जर नाम के एक व्यक्ति पर आरोपितों ने हमला कर दिया था। इस घटना के विरोध में हिन्दू संगठनों ने पुलिस स्टेशन का घेराव करके नारेबाजी की थी।

सूचना मिलने पर पुलिस घटनास्थल पर पहुँची तो उसे एक बोरे में मांस भरा मिला। जाँच में यह मांस गाय का निकला। फ़ौरन ही शिकायत दर्ज करके कार्रवाई शुरू कर दी गई। इस घटना में पुलिस ने कुल 9 आरोपितों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज की हैं। आरोपितों में जफ्फार खान, असगर खान, शम्मी, अफसर, रेतुआ, बिश्नोई, मौसम, इकरार और साहू शामिल हैं।

आरोपितों के खिलाफ IPC की विभिन्न धाराओं के साथ-साथ गोहत्या अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की गई है। इनमें असगर और उसके ससुर रेतुआ पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) की भी धाराएँ लगाई गई हैं। प्रशासन की जाँच में असगर और जफ्फार के घर अवैध तौर पर बने पाए गए। गोकशी की इस घटना में फरार चल रहे 3 आरोपितों की तलाश जारी है।

जालंधर में ओडिशा की छात्रा से गैंगरेप, निहंगों के वेष में थे दुष्कर्मी: लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में पढ़ती है पीड़िता, अमन, रनवीर सिंह और मंजीत सिंह गिरफ्तार

पंजाब में AAP के राज में कानून व्यवस्था चरमरा गई है। पंजाब के बड़े शहर जालंधर में ओडिशा से पढ़ने आई एक छात्रा से तीन युवकों ने रेप किया। यह लोग निहंग बन कर आए थे और छात्रा को रात में अपने साथ उठा ले गए। छात्रा से रेप करने के बाद छात्रा को वह सूनसान इलाके में छोड़ गए। पुलिस ने तीनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पीड़ित 21 वर्षीय छात्रा जालंधर की लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में केमिस्ट्री और बायोलॉजी पढ़ रही है। वह 24 जून, 2024 की रात को अपने कुछ दोस्तों के साथ ढिलवाँ चौक के पास खाने पीने गई हुई थी। छात्रा के साथ तीन युवक भी थे।

यहीं पर कुछ समय बाद तीन युवक आ गए। इनमें से दो ने निहंग का वेश धारण किया हुआ था। यह युवक बाइक पर सवार थे। इन्होने लड़की को डराना धमकाना और उसके दोस्तों से पूछताछ करना चालू कर दिया। निहंग बन कर आए युवकों ने लड़की के साथ के लड़कों को यहाँ से भगा दिया और कहा कि वह लड़की को उसके हॉस्टल छोड़ देंगे।

इसके बाद निहंगों के वेश में आए युवकों ने युवती को अपने साथ बैठा लिया और उसे लेकर चल दिए। यह तीनों उसे वापस हॉस्टल ना ले जाकर सूनसान जगह ले गए। यहाँ उन्होंने लड़की के साथ रेप किया। लड़की का वीडियो भी बनाने का आरोप इन तीनों युवकों पर लगा है।

रेप करने के बाद उसे घायल अवस्था में यह तीनों वहीं छोड़ गए। लड़की ने इसके बाद अपने दोस्तों को फ़ोन किया और पूरी घटना बताई। लड़की के दोस्त उसे लेने आए और फिर अस्पताल में भर्ती करवाया। मामले में इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई है।

पुलिस ने शिकायत दर्ज होने के बाद आरोपितों की तलाश चालू कर दी और उन्हें मंगलवार (25 जून, 2024) को गिरफ्तार कर लिया है। बताया गया है कि इन तीनों में से निहंग कोई नहीं और यह खाली उनका वेश बनाए हुए थे। तीनों में से दो आरोपित काम करते हैं जाकी तीसरा बेरोजगार है। इन तीनों के नाम अमन, रणवीर सिंह और मंजीत सिंह हैं।

‘हमें कॉलेज में बुर्का-हिजाब पहनने दो, कुरान में लिखा है’: बॉम्बे हाईकोर्ट ने ठुकराई मुस्लिम छात्राओं की याचिका, कहा – शैक्षिक संस्थान के फैसले में नहीं देंगे दखल

मुंबई के चेंबूर ट्रॉम्बे एजुकेशन सोसाइटी के एनजी आचार्य और डीके मराठे कॉलेज में ड्रेस कोड तय करते हुए हिजाब, बुर्का बैन किया गया तो नौ छात्राएँ हाई कोर्ट पहुँच गईं। छात्राओं ने माँग की कि कॉलेज परिसर में जो चीज बैन हैं, उन्हें वो (जैसे हिजाब, नकाब) पहनने की अनुमति मिले। उन्होंने तर्क दिया कि हिजाब उनके मजहब में पहनना अनिवार्य है। अब इसी मामले पर सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट ने परिसर में हिजाब, बुर्का और नकाब पर प्रतिबंध लगाने के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

न्यायमूर्ति ए एस चंदुरकर और न्यायमूर्ति राजेश पाटिल की खंडपीठ ने ये कहकर नौ छात्राओं की याचिका को खारिज कर दिया कि वह कॉलेज द्वारा लिए गए फैसले में हस्तक्षेप करने के इच्छुक नहीं है। जानकारी के मुताबिक अदालत जाने वाली छात्राएँ विज्ञान डिग्री पाठ्यक्रम के दूसरे और तीसरे वर्ष में हैं। इन्होंने कॉलेज द्वारा एक ड्रेस कोड लागू करने के निर्देश को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।

निर्देश में छात्र-छात्राओं को परिसर के भीतर हिजाब, नकाब, बुर्का, स्टोल, टोपी और बैज पहनने से मना किया गया था। इसी निर्देश को मानने की बजाय छात्राएँ कोर्ट गईं। अपनी याचिका में इन्होंने कहा कि ऐसे निर्देश उनके मजहब का पालन करने के मौलिक अधिकारों, निजता के अधिकारों के खिलाफ है।

छात्राओं ने इस कार्रवाई को अपनी याचिका में मनमाना, अनुचित, गलत और विकृत बताया था। साथ ही कुरान की आयतों का हवाला देकर कहा कि इस्लाम में हिजाब पहनना अनिवार्य है। वहीं कॉलेज की ओर से पेश वकील अनिल अंतुरकर ने बताया कि कॉलेज परिसर में हिजाब, नकाब और बुर्का पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय सिर्फ इसलिए है ताकि समान ड्रेस कोड लागू हो सके। ये सिर्फ अनुशासनात्मक कार्रवाई है और ये किसी भी तरह से मुस्लिम समुदाय के खिलाफ नहीं है। जो ड्रेस कोड लागू किया गया है वो हर धर्म और जाति के सभी छात्रों के लिए है।

राहुल गाँधी के लिए हिंदू ‘चरमपंथी’, नरेंद्र मोदी की ईमानदारी के विरोधी भी कायल, जेट विमान से आता था मायावती का सैंडल: जूलियन असांजे की विकिलीक्स ने भारतीय नेताओं पर भी किए थे खुलासे

पूरी दुनिया में खुफिया कागजों का खुलासा कर हंगामा मचा देने वाले विकिलीक्स के फाउंडर जूलियन असांजे लंदन की जेल छूटकर अपने देश ऑस्ट्रेलिया पहुँच गए हैं। उनकी अमेरिका के साथ डील हो गई है। उन्हें अमेरिका के न्याय विभाग के सामने अपने आप को एक मामले में दोषी मान लिया है, जिसकी पाँच वर्ष की सजा वह पहले ही लंदन में काट चुके हैं।

विकिलीक्स के खुलासों से भारत में भी काफी हंगामा मचा था। विकिलीक्स के खुलासों में दावा किया गया था कि राहुल गाँधी हिन्दुओं में धार्मिकता को इस्लामी जिहाद से बड़ा खतरा मानते थे। राहुल गाँधी के अलावा विकिलीक्स में तब गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी और उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती को लेकर भी कई खुलासे हुए थे।

राहुल गाँधी ने हिन्दुओं को बताया था खतरा

विकिलीक्स ने राहुल गाँधी और तत्कालीन अमेरिकी राजदूत टिमोथी रोमर के बीच हुई बातचीत का खुलासा किया था। इस विकिलीक्स में दावा था कि राहुल गाँधी ने टिमोथी रोमर से एक बातचीत में हिन्दू चरमपंथियों को इस्लामी आतंक से बड़ा खतरा बताया था। अमेरिकी राजदूत के भारत में इस्लामी आतंक को लेकर बात करने पर उन्होंने उनका पूरा ध्यान हिन्दू आतंकवाद की थ्योरी पर मोड़ने का प्रयास किया था। उन्होंने अमेरिका को हिन्दुओं को लेकर चेताया भी था।

राहुल गाँधी का कहना था कि ऐसे समूह जो भारत में ही पनपे हैं और पाकिस्तान और इस्लामी समूहों की तरफ से आने वाले आतंकी हमलों का जवाब देने की सोचते हैं, उन पर अधिक ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है। संभवतः उनका इशारा मालेगाँव बम धमाकों की तरफ रहा होगा, इस मामले में कई निर्दोष हिन्दू कार्यकर्ताओं को तब फंसाया गया था।

राहुल गाँधी ने टिमोथी रोमर से बातचीत में यह भी माना था कि भारत में लश्कर-ए-तैयबा को लेकर स्थानीय मुस्लिमों में समर्थन बढ़ रहा था और इसके सबूत भी थे। टिमोथी रोमर ने अपने देश अमेरिका को बताया था कि वह अमेरिकी हित साधने के लिए एक अच्छा साधन हो सकते हैं।

अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा दक्षिणी एशिया में तैनात किए गए रोबर्ट ओ ब्लेक ने अमेरिका को भेजे गए नोट का खुलासा भी विकीलीक्स ने किया था। विकिलीक्स के इस खुलासे में राहुल गाँधी के बारे में अमेरिका के विचारों को लिखा गया था। यह नोट पत्रकार सईद नकवी से बातचीत पर आधारित था।

ब्लेक ने कहा था कि राहुल गाँधी की कॉन्ग्रेस पार्टी में काफी कम लोग तारीफ़ करते हैं। यह भी कहा गया था कि राहुल गाँधी लगातार दिल्ली की राजनीति से बाहर रहते हैं। ब्लेक से बातचीत में नकवी ने कहा था कि राहुल गाँधी कॉन्ग्रेस के लिए फायदे से ज्यादा नुकसान करते हैं।

मायावती रखती थीं 9 खाना बनाने वाले, सैंडल लेने भेजा था जेट

विकिलीक्स के एक खुलासे में उत्तर प्रदेश की तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती पर भी बात की गई थी। अमेरिकी दूतावास में तैनात पोलोफ़ ने अपनी उत्तर प्रदेश यात्रा के बाद सारा ब्यौरा अमेरिका भेजा था। इसमें कहा गया था कि मायावती ने उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार को केंद्रीकृत कर दिया था। इसमें दावा किया गया था कि मुख्यमंत्री रहते हुए मायावती काफी शानदार जीवन जीती थीं। उन्होंने अपना खाना बनाने के लिए 9 शेफ रखे हुए थे।

मायावती की विलासिता के विषय में यह भी बताया गया था कि उन्होंने एक बार अपनीं पसंदीदा सैंडल मँगाने के लिए मुंबई को एक खाली विमान भेजा था। इसी खुलासे में दावा था कि मायावती ने अपने एक मंत्री को उठक बैठक भी लगवाई थी क्योंकि वह बिना उनकी इजाजत के उत्तर प्रदेश के राज्यपाल के पास चला गया था।

अमेरिका को भेजे गए ब्यौरे में दावा था कि बसपा का टिकट लेने के लिए लगभग ₹1 करोड़ की धनराशि देनी पड़ती थी। इसमें यह भी कहा गया था कि इस दौरान अधिकांश पत्रकारों और नौकरशाहों के फोन तक टैप किए जाते थे। इसीलिए यह लोग मायावती के खिलाफ लिखने से बचते थे।

नरेन्द्र मोदी के विकास के बारे में की थी बात

विकिलीक्स में अमेरिका के मुंबई में काउंसल जनरल माइकल ओवेन और मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी की एक मुलाकात का भी जिक्र था। इस मुलाक़ात में नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के विकास के विषय में ओवेन को बताया था। ओवेन ने भी गुजरात में हो रहे विकास की बात मानी थी। ओवेन ने अन्य नेताओं से भी बात की थी। इन नेताओं ने ओवेन को बताया था कि मोदी को रिश्वत नहीं दी जा सकती। इनमें कॉन्ग्रेस के नेता भी शामिल थे, इन्होने भी माना था कि गुजरात में विकास हो रहा है।

CBI ने अरविंद केजरीवाल को कोर्ट से किया गिरफ्तार, दिल्ली शराब घोटाले में CM पर कसा डबल फंदा: क्या सुप्रीम कोर्ट से मिलेगी राहत?

केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) ने दिल्ली शराब नीति घोटाला मामले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार कर लिया है। उन्हें तिहाड़ जेल से सीबीआई की टीम कोर्ट लेकर पहुँची थी, जहाँ कोर्ट की इजाजत के बाद अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार कर लिया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सीबीआई ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया है और सभी आवश्यक दस्तावेज मुहैया करा दिए हैं। बता दें कि मंगलवार, 25 जून को, दिल्ली हाई कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल को जमानत देने के ट्रायल कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी, जबकि ईडी की याचिका को स्वीकार करते हुए उत्पाद शुल्क नीति मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ट्रायल कोर्ट के आदेश पर रोक लगाने की माँग की थी। अब अरविंद केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी है, जिस पर आज (26 जून 2024) को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही है।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले ही सीबीआई ने अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार किया है। सीबीआई ने पूछताछ के लिए अदालत से अरविंद केजरीवाल की हिरासत माँगी, इस पर अदालत ने मंजूरी दे दी। फिलहाल, दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट और आम आदमी पार्टी दफ्तर के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है, किसी भी तरह के विरोध प्रदर्शन की आशंका को देखते हुए ये तैनाती की गई है।

बता दें कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। सीबीआई ने सोमवार को तिहाड़ जेल के अंदर अरविंद केजरीवाल से पूछताछ की थी और फिर अब बुधवार (26 जून 2024) को सीबीआई ने अरविंद केजरीवाल को कोर्ट में पेश करने के बाद औपचारिक तौर पर गिरफ्तार कर लिया।

लोकसभा की पहली बाजी PM मोदी ने जीती, ध्वनिमत से अध्यक्ष चुने गए BJP सांसद ओम बिरला: उम्मीदवार उतारकर भी वोटिंग की हिम्मत नहीं जुटा पाया INDI गठबंधन

भारतीय जनता पार्टी के सांसद ओम बिरला एक बार फिर लोकसभा स्पीकर बन गए है। वोटिंग प्रक्रिया में ओम बिरला को ध्वनि मत से लोकसभा स्पीकर के तौर पर चुना गया। चुनाव के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी उन्हें स्पीकर के आसन तक ले गए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर सदन का स्पीकर बनने पर ओम बिरला को बधाई दी। उन्होंने कहा, “सौभाग्य है कि आप दूसरी बार स्पीकर चुने गए। आप नए प्रतिमान, नए कीर्तिमान गढ़ते आए हैं। आपकी कार्यशैली से युवा सांसदों को प्रेरणा मिलेगी। बतौर सांसद ओम बिरला का कार्य सराहनीय रहा है। आपने दूसरी बार स्पीकर बनकर नया रिकॉर्ड बनाया है।”

पीएम मोदी ने कहा कि ओम बिरला की मुस्कान सदन को भी खुश रखेगी। उन्होंने ने कहा कि सरकार ने लगातार तीसरी बार कार्यकाल शुरू किया है और ओम बिरला को लगातार दूसरी बार सदन के नेतृत्व करने का मौका मिल रहा है। पिछले 20 सालों का इतिहास ऐसा रहा है कि ज्यादातर स्पीकर ज्यादा समय तक स्पीकर नहीं रह पाते। या तो वो चुनाव नहीं जीत पाते या स्पीकर नहीं रह पाते। लेकिन, आपने न सिर्फ चुनाव जीता है बल्कि एक बार फिर स्पीकरपद पर आसीन हुए हैं।

बता दें कि इससे पहले लोकसभा स्पीकर पद को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सहमति नहीं बन पाई थी। ऐसे में लोकसभा स्पीकर के चुनाव की बात सामने आई। पीएम मोदी के नेतृत्व में एनडीए ने अपनी ओर से उम्मीदार के तौर पर ओम बिरला का नाम दिया। वहीं विपक्ष ने अपनी ओर से कॉन्ग्रेस नेता के सुरेश को उतारा था।

एनडीए प्रत्याशी के नाम पर उनके दल में एक तरफ जहाँ सब राजी थे तो वहीं इंडी गठबंधन के प्रत्याशी पर तृणमूल कॉन्ग्रेस की ममता बनर्जी कल से ही नाराज चल रही थीं। ममता बनर्जी का कहना था कि स्पीकर का उम्मीदवार उतारने से पहले उनसे कोई सलाह नहीं ली गई। हालाँकि बाद में खबरें आई कि राहुल गाँधी ने बातचीत करके सब सुलझा लिया है टीएमसी विपक्ष को ही समर्थन देंगी… मगर आज जब वोटिंग की बारी आई तो विपक्ष इतने मतभेदों के बीच मतदान के बिन मान गया और ध्वनिमत से ओम बिरला एक बार फिर लोकसभा स्पीकर चुने गए।

ध्वनि-मत क्या होता है?

संसद में ध्वनि मत का अर्थ होता है किसी मुद्दे पर ध्वनि के आधार पर निर्णय होना। सामान्यत: ऐसे मामले में सदन के सारे सदस्यों से समर्थन माँगा जाता है। फिर हाँ या नहीं के रूप में अपनी आवाज सदस्य देते हैं। जिस पक्ष की ओर से ज्यादा तेज आवाज उठाई जाती है, उसी के आधार पर निर्णय ले लिया जाता है। ये प्रक्रिया प्रस्ताव पारित करने के दौरान भी अपनाई जाती है।

जम्मू-कश्मीर बार एसोसिएशन का 20 साल अध्यक्ष रहा मियाँ अब्दुल कयूम गिरफ्तार, लश्कर आतंकियों से करवाई थी विरोधी वकील की हत्या: अलगाववादियों का भी रहा है करीबी

जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष मियाँ अब्दुल कयूम भट्ट को मंगलवार (25 जून 2024) को गिरफ्तार कर लिया गया। मियाँ अब्दुल कयूम भट्ट 2 दशकों से भी ज्यादा समय तक बार एसोसिएशन का अध्यक्ष रहा है। उसका दामाद जावेद इकबाल वानी अभी श्रीनगर हाई कोर्ट का जज है। मियाँ अब्दुल कयूम भट्ट पर आरोप है कि उसने अपने प्रतिद्वंदी वकील बाबर कादरी की लश्कर के आतंकवादियों से हत्या कराई थी।

कादरी की हत्या करने वाला लश्कर का कमांडर साकिब मंजूर अगस्त 2021 में मुठभेड़ में मारा जा चुका है। वो घाटी में ‘द रेजिस्टेंट फोर्स’ का भी चेहरा था। द रेजिस्टेंट फोर्स लश्कर का मुखौटा संगठन है, जिसने बीते कुछ सालों में घाटी में हुए आतंकवादी हमलों की जिम्मेदारी ली है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मियाँ अब्दुल कयूम भट्ट अलगाववादी कामों के चलते काफी समय जेल में भी बिता चुका है। वो हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के मुखिया सैयद अली शाह गिलानी के गुट में रहा है, जो कश्मीर को पाकिस्तान में मिलाने की वकालत करता था। मियाँ अब्दुल कयूम भट्ट कई बार जेल जा चुका है। उसे 1990 में लोक सुरक्षा अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया था और 1992 तक जेल में रखा गया था। यही नहीं, घाटी में विरोध प्रदर्शन आयोजित करने के आरोप में उन्हें 2008 और 2010 में दो बार फिर से गिरफ्तार किया गया था। 5 अगस्त, 2019 को जिस दिन अनुच्छेद 370 को हटाया गया था, उस समय उसे पीएसए के तहत गिरफ्तार कर लिया गया था, हालाँकि साल 2021 में उसे रिहा कर दिया गया, जब उसने अलगाववादी गतिविधियों में शामिल नहीं होने का वचन दिया था।

कादरी की घर में गोली मार कर हत्या

बाबर कादरी श्रीनगर में वकील थे। वो मियाँ अब्दुल कयूम भट्ट के विरोधी थे और बार एसोसिएशन पर मियाँ अब्दुल कयूम भट्ट के लंबे समय से कब्जे का विरोध कर रहे थे। बाबर कादरी ने आरोप लगाया था कि भट्ट ने चुनावों में हेरफेर करके वर्षों तक अपने पद पर कब्जा जमाए रखा। सितंबर 2020 में कादरी की उनके श्रीनगर स्थित घर पर दो आतंकवादियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी, जो मुवक्किल बनकर आए थे। उन्होंने अपनी हत्या के कुछ दिन पहले एक वीडियो पोस्ट किया था जिसमें आरोप लगाया गया था कि कैसे भट्ट ने बार चुनावों में धांधली की थी। कादरी पर साल 2018 में भी हमला हुआ था।

अगस्त 2022 में पुलिस ने श्रीनगर में भट और दो अन्य वकीलों के घरों की तलाशी ली थी और डिजिटल उपकरण, बैंक स्टेटमेंट और दस्तावेज जब्त किए थे। इस साल की शुरुआत में हाई कोर्ट ने कादरी हत्याकांड को निर्भीक और निष्पक्ष सुनवाई के लिए श्रीनगर से जम्मू की एक अदालत में स्थानांतरित कर दिया था। जहाँ गवाह ऐसे माहौल में गवाही देने की स्थिति में हों जो स्वतंत्र और प्रतिकूल न हो। हाई कोर्ट का आदेश SIA की एक याचिका पर आया था। जिसमें दावा किया गया था कि श्रीनगर का कोई भी वकील कुछ प्रभावशाली अधिवक्ताओं की संलिप्तता के कारण कानूनी सहायता देने को तैयार नहीं था। कादरी की हत्या की प्रारंभिक जाँच के बाद मामला एसआईए को स्थानांतरित कर दिया गया था।

बार एसोसिएशन के चुनाव पर लगी रोक

भट्ट की गिरफ्तारी के कुछ घंटों बाद श्रीनगर के जिला मजिस्ट्रेट ने एक आदेश जारी किया जिसमें जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के चुनावों को रोक दिया गया। ये चुनाव 27 जून को होने वाले थे। प्रशासन ने श्रीनगर में निचली अदालत परिसर में धारा 144 भी लागू कर दी है, जहाँ चुनाव होने वाले थे। भट्ट पाकिस्तान समर्थक अलगाववादी नेता गिलानी के साथ संबंधों के लिए चर्चित था और एसोसिएशन समेत 23 संगठनों को हुर्रियत से जोड़ने में कामयाब रहा था। वो अलगाववादी नेताओं, आतंकियों के मामलों को फ्री में अदालत में चुनौती देता था और उनका केस लड़ता था।