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जामिया अरबिया मदरसे के मौलवी अजीजुल रहमान ने नाबालिग बच्चे से किया कुकर्म, मुँह खोलने पर जान से मारने की देता था धमकी: रामपुर पुलिस ने दबोचा

उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में एक मदरसे के अंदर नाबालिग छात्र से अप्राकृतिक रेप किए जाने का मामला सामने आया है। कुकर्म का आरोप मौलाना अजीजुल रहमान पर लगा है। अजीजुल इस मदरसे में बच्चों को दीनी तालीम दिया करता था। कुकर्म के बाद वह छात्र को कहीं मुँह खोलने पर जान से मारने की धमकी देता था। आरोपित ने छात्र को अपने घर ले जाने की भी कोशिश करता था।

पीड़ित छात्र के पिता की तहरीर पर पुलिस ने मंगलवार (25 जून 2024) को FIR दर्ज कर ली। इसके बाद मौलाना अजीजुल को गिरफ्तार कर लिया है। यह मामला रामपुर जिले के अजीमनगर थाना क्षेत्र का है। यहाँ के गाँव नांगलिया अंकिल में जामिया अरबिया सिराजुल उलूम नाम का एक मदरसा है। इस मदरसे में रामपुर के ही मिलक खानम इलाके का एक 15 वर्षीय छात्र भी पढ़ता है।

मंगलवार (25 जून) को छात्र के पिता ने थाने में तहरीर दी। इसमें पिता ने कहा कि उसका बेटा मदरसे में मज़हबी तालीम लेता है। वहाँ मौलाना अजीजुल रहमान दीनी तालीम देता है। मौलाना उसी गाँव का निवासी है, जहाँ मदरसा बना हुआ है। शिकायत में पीड़ित छात्र के पिता ने बताया कि पिछले एक साल से मौलाना ने कई बार उसके बेटे का पैजामा उतार कर उसके साथ अप्राकृतिक रेप किया।

कुकर्म करने के लिए मौलाना कभी बच्चे को लालच देता था तो कभी धमकियाँ। कुकर्म के बाद अजीजुल बच्चे को मुँह बंद रखने की धमकी देते हुए कहता था कि किसी को बताने पर वो जान से मार देगा। सोमवार 24 जून को मौलाना पीड़ित छात्र पर अपने घर चलने का दबाव बनाने लगा। जैसे-तैसे छात्र मौलाना के चंगुल से छूटकर अपने घर पहुँचा।

घर पहुँच कर उसने अपने परिजनों को पूरी बात बता दी। पीड़ित छात्र के अब्बा ने अगले दिन मामले की शिकायत पुलिस में की। पुलिस ने शिकायतकर्ता की तहरीर पर मौलाना अजीजुल को नामजद करते हुए FIR दर्ज कर ली है। उस पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 377 और 506 के साथ पॉक्सो एक्ट के सेक्शन 3/4 के तहत कार्रवाई की गई है।

पुलिस टीमों का गठन कर के फ़ौरन ही मौलाना की तलाश शुरू कर दी गई। केस दर्ज होने के कुछ ही घंटों बाद 25 जून (मंगलवार) को आरोपित मौलाना को गिरफ्तार कर लिया गया। मामले में जाँच व अन्य कानूनी कार्रवाई की जा रही है। ऑपइंडिया के पास इस मामले से संबंधित शिकायत की कॉपी मौजूद है।

मणिपुर में फर्जी आधार कार्ड और वोटर आईडी बना-बना कर बसाए जा रहे घुसपैठिए, कार्रवाई में जुटी सरकार और जाँच एजेंसियाँ:

पिछले साल मणिपुर में कई महीनों तक हिंसा और आपसी संघर्ष का माहौल रहा। अब पुलिस ने वहाँ एक ऐसे गिरोह का खुलासा किया है, जो फर्जी आधार और वोटर आईडी कार्ड बना कर विदेशी घुसपैठियों को बसा रहा है। एक विशेष पुलिस टीम इन्हें ट्रैक कर रही थी, और हाल ही में कई आरोपित गिरफ्तार हुए हैं। पुलिस ने चुराचांदपुर से म्यांमार के 2 अवैध घुसपैठियों को गिरफ्तार किया है। उनके पास से 2 फर्जी आईडी कार्ड मिले। पुलिस ऐसे कई मामलों की जाँच कर रही है।

ये अपराधी घुसपैठियों को बताते हैं कि उन्हें दस्तावेज में अपने पते के रूप में किस जगह का नाम लिखना है। दक्षिणी मणिपुर सरकार द्वारा कफ्रजी दस्तावेज बनाने वाले गिरोह के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का केंद्र है। राज्य सरकार कह चुकी है कि ये सिर्फ मणिपुर ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए खतरा हैं। म्यांमार में तानाशाही जुंटा सेना और लोकतंत्र समर्थकों के बीच हिंसा चल रही है। उसमें से कई भाग कर भारत पहुँच रहे हैं। मणिपुर में इनका बायोमेट्रिक्स रिकॉर्ड किए जाते हैं।

जी बायोमेट्रिक्स रिकॉर्ड कराने से बच जाते हैं, वो फर्जी आधार और वोटर आईडी बनाने वाले गिरोह से संपर्क करते हैं। सीमा पर स्थित जिलों जिरबाम और मोरेह जिलों से 2018 में 2 ऐसे गिरोह पकड़ाए थे। 10 गिरफ्तार आरोपितों में से 9 म्यांमार के मुस्लिम घुसपैठिए थे। वहीं तमिलनाडु की परिथा बेगम नामक एक महिला भी गिरफ्तार हुई थी। मोरेह में मोहम्मद तोम्बा के घर पर छापेमारी कर पुलिस ने 2 लैपटॉप, 4 आधार कार्ड, एक प्रिंटर मशीन, एक लैमिनेटिंग फिल्म मशीन, प्लास्टिक शीट्स, कई DVD और फोटो पेपर जब्त किया था।

मई 2018 में तो सिर्फ राजधानी इम्फाल में ही 98 घुसपैठियों को चिह्नित किया गया था। इसी तरह अक्टूबर 2021 में मणिपुर के टेंगनौपल में म्यांमार के 24 घुसपैठिए फर्जी दस्तावेजों के साथ धराए थे। इससे एक सप्ताह पहले इम्फाल एयरपोर्ट से फर्जी आधार कार्ड का इस्तेमाल कर के दिल्ली जाने की कोशिश कर रहे थे। इसी तरह 2023 में 22-23 जुलाई को मात्र 2 दिनों में 700 से भी अधिक घुसपैठिए मणिपुर में घुस गए थे। फर्जी दस्तावेज वाले गिरोह से न सिर्फ राष्ट्रीय सुरक्षा, बल्कि चुनावी प्रक्रिया को भी खतरा है।

2023 में कक्चिंग में कुकी ईसाइयों के ध्वस्त हुए घरों में से 1000 से भी अधिक फर्जी आईकार्ड जब्त किए गए थे। UIDAI ने आधार कार्ड्स की वेरिफिकेशन की प्रक्रिया तेज़ कर दी है। चुनाव आयोग से लेकर पुलिस तक सब मिल कर इस समस्या से निपटने के लिए काम कर रहे हैं। मणिपुर के 8 गाँवों में शेल्टर होम में रह रहे घुसपैठियों की संख्या उन गाँवों की जनसंख्या से भी ज़्यादा है। 2021 से ही म्यांमार से चीन-कुकी समुदाय के लोग पलायन कर मणिपुर में आ रहे हैं।

इससे वहाँ की डेमोग्राफी बदल रही है, खुद संसद में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इसकी चर्चा कर चुके हैं। कुकी-जो समुदाय अपने लिए अलग केंद्र शासित प्रदेश माँग रहा है। ‘इंडिजिनस ट्राइबल लीडर्स फोरम (ITLF)’ ने अमित शाह से मिल कर ये माँग रखी थी। Zo लोगों को ज़ोमी या चीन-कुकी-मिजो भी कहा जाता है। इनमें से अधिकतर म्यांमार के चीन पहाड़ी से आए हैं। कई अपराधों में ये शामिल रहे हैं। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना कह चुकी हैं कि अमेरिका इन ईसाइयों के लिए अलग मुल्क बनाने की साजिश रच रहा है।

बुर्कानशीं लड़की से बात कर रहा था आकाश, कट्टरपंथी मुस्लिमों की भीड़ ने घेर कर मारा-पीटा: लड़की का बाल पकड़कर खींचा, वीडियो वायरल

महाराष्ट्र के संभाजीनगर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में कुछ लोगों द्वारा एक युवक को बेरहमी से पीटते देखा जा सकता है। पास ही में एक बुर्कानशीं महिला भी खड़ी दिख रही है। कहा जा रहा है कि पीड़ित हिन्दू युवक है। इस बुर्के वाली महिला से बात करने के कारण मुस्लिम भीड़ उसे पीट रही है। घटना मंगलवार (25 जून 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला संभाजीनगर के थाना क्षेत्र सिटी चौक के लेबर कॉलोनी का है। दावा किया जा रहा है कि यहाँ मंगलवार की दोपहर को 22 साल का एक हिन्दू युवक सूबेदारी रेस्ट हाउस के पास किसी मुस्लिम महिला से सड़क पर खड़े होकर बात कर रहा था। इसी बीच 40-50 मुस्लिम युवकों का एक झुंड वहाँ पहुँच गया। झुंड को देखकर मुस्लिम युवती ने लड़के को भागने के लिए कहा।

हालाँकि, मुस्लिमों की भीड़ ने आकाश को घेर लिया और उसे गालियाँ देते हुए पिटाई शुरू कर दी। इस दौरान महिला से भी अभद्रता की गई। आरोपितों द्वारा पीड़िता के बालों को पकड़ा गया और उसे अपशब्द बोले गए। युवक को पीटते हुए यह भीड़ सड़क से हट कर पार्क तक पहुँच गई। पीड़ित को पूरे शरीर में घूँसे और पैरों से मारा गया। पीड़िता की पहचान आकाश के रूप में हुई है।

इस दौरान पीड़ित युवक और महिला हमलावरों को समझाने की कोशिश करते रहे, लेकिन उन पर कोई असर नहीं पड़ा। बताया जा रहा है कि घटना से इलाके में तनाव फैल गया है। इस हमले की वीडियो किसी ने बनाकर सोशल मीडिया पर डाल दी। कुछ ही देर में यह वीडियो वायरल हो गया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हमलावरों पर कड़ी कार्रवाई की माँग उठने लगी।

वायरल वीडियो का पुलिस ने भी संज्ञान लेकर जाँच-पड़ताल शुरू कर दी है। इलाके के पुलिस उपायुक्त (DCP) नितिन बगाटे ने इंस्पेक्टर निर्मला परदेशी के साथ घटनास्थल का दौरा किया और इस मामले के संबंध में जानकारी जुटाई। वायरल वीडियो के आधार पर हमलावरों और पीड़ित की पहचान के प्रयास शुरू कर दिए गए हैं।

इंस्पेक्टर निर्मला परदेशी ने कहा कि जाँच के बाद घटना की FIR दर्ज करके आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल किसी गिरफ्तारी की सूचना नहीं है। बताते चलें कि इससे पहले भी देश के कई हिस्सों में मुस्लिम लड़कियों साथ बात करने पर कट्टरपंथी मुस्लिमों की भीड़ ने पीटा था।

‘भारतीय टीम में गया तब मुझे नहीं आती थी हिंदी, साथियों ने सिखाया’: R आश्विन ने हिंदी विरोधियों को दिखाया आईना, कहा – सीखनी चाहिए

भारत के महान क्रिकेट खिलाड़ियों में से एक रविंचंद्रन अश्विन ने तमिलनाडु में सत्ताधारी डीएमके की तरफ से हिंदी भाषियों, हिंदुओं और हिंदी भाषा को लेकर खड़े किए जा रहे विवाद के बीच ऐसी बात कही है, जिस पर सभी को गौर करना चाहिए। उन्होंने भाषाई विवाद पर पानी डालते हुए कहा है कि हम जिस भी समूह के बीच रहते हैं, उसके बारे में थोड़ा-बहुत जानना हमारे ही फायदे में होता है, लेकिन इसके लिए किसी तरह का दबाव नहीं बनाया जाना चाहिए। अश्विन ने कहा कि लोग ‘हिंदी नहीं जानते’ कहकर अपना सीना गर्व से चौड़ा करते हैं, लेकिन ये सही बात नहीं है। अश्विन ने इससे जुड़ा एक घटनाक्रम भी साझा किया।

आर अश्विन ने क्रिकेट के शुरुआती दिनों को लेकर एक किताब लिखी है, जिसे पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने “आई हैव द स्ट्रीट्स: ए कुट्टी क्रिकेट स्टोरी” नाम से प्रकाशित किया है। आज भी अश्विन को अपने शुरुआती दिन याद हैं, जब वो गलियों में क्रिकेट खेला करते थे। उनके अनुभवों और यादों को ESPNCricinfo से जुड़े स्पोर्ट्स राइटर सिद्धार्थ मोंगा ने किताब की शक्ल दी है। इस किताब को लेकर आयोजित एक कार्यक्रम में अश्विन ने वो बात कही, जिसे मान लिया जाए तो पूरे देश से भाषाई विवाद ही खत्म हो जाए।

सीएसके के कंटेंट हेड राधाकृष्णन के साथ बातचीत में अश्विन ने हिंदी में बातचीत न करने की चुनौतियों पर अपने विचार साझा किए और एक व्यावहारिक दृष्टिकोण पेश किया। अश्विन ने कहा कि तमिलानाडु में लोग ‘हिंदी न जानने को गर्व से ‘हिंदी थेरियाडू पोडा’ कहकर खुद का सीना चौड़ा करते हैं, लेकिन लोगों को इससे किनारा करना चाहिए। लोगों को चाहिए कि वो जिनके बीच भी हैं, उनकी भाषा को थोड़ा बहुत जानें-समझें। इससे उन्हीं को आसानी होगी।’ अश्विन ने कहा कि वो जब भारतीय टीम से जुड़े थे, तो उन्हें हिंदी बिल्कुल नहीं आती थी, लेकिन अब वो चीजों को समझ लेते हैं। बोल भी लेते हैं, हाँ, लिख नहीं पाते। उन्होंने कहा कि लोगों को थोड़ा बहुत एडजस्ट करना चाहिए। आप अकड़ के चलते बहुत कुछ सीखने और बड़े मौकों से वंचित रह सकते हैं।

अश्विन ने इस बातचीत के दौरान तमिलनाडु से बाहर करियर बनाने की इच्छा रखने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए संवादी हिंदी सीखने के महत्व पर जोर दिया। अश्विन ने हिंदी बोलने वाले लोगों से भाषा सीखने वालों के साथ सहानुभूति रखने और भाषाई बाधाओं से परे समावेशिता को बढ़ावा देने का भी आग्रह किया। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने यह पुस्तक इस बात पर जोर देने के लिए लिखी है कि भाषा सीखने से दूसरों से स्वीकृति पाने और बातचीत का हिस्सा बनने/योगदान देने में काफी मदद मिलेगी।

बता दें कि तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी डीएमके से जुड़े नेता अक्सर हिंदी भाषियों का मजाक उड़ाते हैं और हिंदी बोलने वालों को नफरत की नजर से देखते हैं। वो अक्सर ‘हिंदी थेरियाडू पोडा’ जैसे तकिया-कलाम इस्तेमाल करते हैं, ताकि खुद को हिंदी न जानने वाला बताकर गर्व का अहसास कर सकें। यही नहीं, डीएमके के लोग उत्तर भारतीयों को “वडक्कन”, “पानीपुरी बेचने वाला” जैसी बातों से अपमानित करने का भी प्रयास करते हैं। डीएमके सांसद दयानिधि मारन तो ‘हिंदी भाषी शौचालय साफ करते हैं।’ बोल चुके हैं, तो डीएमके के पूर्व सांसद सेंथिलकुमार ने हिंदी पट्टी के राज्यों को ‘गौमूत्र’ राज्य कह दिया था।

‘राहुल गाँधी हाजिर हों’: जिस दिन बने नेता प्रतिपक्ष उसी दिन सुल्तानपुर की कोर्ट ने सुनाया आदेश, जमानत पर बाहर चल रहे पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी को उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर स्थित अदालत ने व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है। MP-MLA कोर्ट ने बुधवार (26 जून, 2024) को कहा कि 2 जुलाई से पहले राहुल गाँधी अदालत में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएँ। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी के लिए उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दाखिल किया गया है। वकील संतोष कुमार पांडेय ने ये शिकायत दर्ज कराई थी।

राम प्रताप नामक एक शख्स ने इस मामले में पार्टी बनने के लिए आवेदन दिया है। इस याचिका का विरोध करते हुए पांडेय ने कहा कि राम प्रताप न तो इस मामले में पीड़ित है और न ही उसका इस मामले से कोई लेना-देना है। काशी प्रसाद शुक्ला इस केस में राहुल गाँधी के अधिवक्ता हैं। उन्होंने भी इस याचिका का विरोध किया। हालाँकि, अदालत ने राम प्रताप के आग्रह को कबूल नहीं किया और राहुल गाँधी को व्यक्तिगत पेशी का आदेश दिया। ये मामला 2018 से ही चला आ रहा है।

भाजपा नेता विजय मिश्रा ने इस संबंध में शिकायत दायर की थी। वो जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष भी रहे हैं। इससे पहले फरवरी 2024 में राहुल गाँधी को अमेठी में अपनी ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ रोक कर कोर्ट में पेश होना पड़ा था, जहाँ से उन्हें अंतरिम जमानत मिली थी। उसी समय से वो इस मामले में जमानत पर ही चल रहे हैं। 2 जुलाई को फिर इस मामले की सुनवाई होगी। मजिस्ट्रेट शुभम वर्मा इस मामले की सुनवाई कर रहे हैं।

राहुल गाँधी इसी तरह मोदी सरनेम पर भी आपत्तिजनक टिप्पणी कर के फँसे थे। गुजरात की जनता के खिलाफ उनकी टिप्पणी भी अदालत तक पहुँची थी। राहुल गाँधी को इसी दिन लोकसभा में भी नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता दी गई है। उन्होंने इस लोकसभा चुनाव में रायबरेली व वायनाड से जीत दर्ज की। उन्होंने वायनाड की सीट खाली कर दी है, जहाँ से अब उनकी बहन प्रियंका गाँधी लड़ेंगी। राहुल गाँधी का विवादों से पुराना नाता रहा है।

पंजाब में 2 आतंकियों की घुसपैठ के बाद हाई अलर्ट, रिपोर्ट में दावा- हथियारों से लैस थे नकाबपोश: ग्रामीणों ने बताया- बंदूक दिखा खाना बनाने को कहा, फिर पठानकोट की ओर बढ़े

पंजाब के पठानकोट जिले में पाकिस्तान सीमा से 2 आतंकियों के घुसपैठ की सूचना है। इस सूचना के बाद पठानकोट के साथ गुरदासपुर जिले में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। पुलिस ने मुख्य हाइवे सहित अन्य मार्गों पर सख्त तलाशी अभियान छेड़ रखा है। इस मामले से सीमा सुरक्षा बल (BSF) और सेना को भी अवगत करवा दिया गया है।

बताया जा रहा है कि चेहरा ढँके इन दोनों आतंकियों के पास भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारुद है। मंगलवार (25 जून 2024) को इन दोनों संदिग्धों ने कुछ लोगों को बंदूक दिखा कर खाना भी बनवाया था और खाना खाने के बाद दोनों संदिग्ध आतंकी वहाँ से निकल गए। जाते-जाते उन्होंने खाना बनाने वालों को धमकी भी दी। बाद में इन लोगों ने पुलिस को सूचित किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पठानकोट में BSF की डिंडा आउटपोस्ट है। यहाँ मंगलवार को दो संदिग्ध हरकतें देखी गईं। बताया जा रहा है कि चेहरे को ढँक कर इस रास्ते से 2 आतंकियों ने बॉर्डर पार करके भारतीय सीमा में प्रवेश किया है। इन दोनों के पास भारी मात्रा में हथियारों के साथ गोला-बारूद भी है। सीमा से सटे एक फार्म हाउस पर दोनों आतंकी रात 9:30 के आसपास थोड़ी देर रुके भी।

जिस फार्म हाउस में संदिग्ध रुके थे, वह कोट बांठियाँ गाँव में बना है। यहाँ मौजूद मजदूरों को इन दोनों ने बंदूक से डराया और उनसे खाना बनवाया। खाना खा लेने के बाद दोनों पठानकोट की तरफ बढ़ गए।फर्म हाउस से निकलने के दौरान दोनों संदिग्धों ने मजदूरों को धमकी दी कि अगर उन्होंने किसी को बताया तो उन्हें जान से मार डाला जाएगा।

आतंकियों के चले जाने के बाद मजदूरों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने फ़ौरन मौके पर पहुँच कर जाँच-पड़ताल शुरू की। संदिग्धों की तलाश में सघन तलाशी अभियान छेड़ दिया गया है। हाईवे से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में भी जाने वाले मार्गों पर पुलिस ने पहरा बैठा दिया है। ग्रामीणों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वो किसी भी संदिग्ध हरकत की सूचना फ़ौरन पुलिस को दें।

शिकायतकर्ता ग्रामीण की पहचान सुरक्षा के लिहाज से गुप्त रखी गई है। पंजाब पुलिस के सीनियर अधिकारी भी हालातों पर नजर रखे हुए हैं। इस सूचना पर एक उच्चस्तरीय बैठक भी हुई है। मामले से सेना और सीमा सुरक्षा बल (BSF) को भी अवगत करवा दिया गया है। पठानकोर्ट एयरबेस सहित कई अन्य सैन्य स्थलों के साथ सार्वजानिक स्थलों की भी सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।

‘NEET परीक्षा लेने वाली NTA है प्राइवेट संस्था, RTI के तहत भी नहीं’: झूठ फैलाते पकड़े गए BBC-NDTV वाले पंकज पचौरी, मनमोहन सिंह ने PM रहते बनाया था मीडिया सलाहकार

मनमोहन सिंह के काल में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में कम्युनिकेशंस एडवाइजर रहे पंकज पचौरी ने NTA (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) को लेकर दावा किया है कि ये एक प्राइवेट संस्था है। UPA के समय में पंकज पचौरी प्रधानमंत्री की मीडिया स्ट्रैटेजी का जिम्मा सँभालते और अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों के लिए विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर रणनीति तैयार करते थे। NEET UG के पेपर लीक और PG की परीक्षा रद्द होने के बाद अब वो ‘राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी’ को लेकर नया दावा कर रहे हैं।

पंकज पचौरी ने ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर किए गए एक पोस्ट में लिखा कि ये जानना बड़ा हैरानी भरा है कि NTA एक प्राइवेट संस्था है जो सरकारी शैक्षिक संस्थाओं के लिए छात्रों के भविष्य का निर्णय ले रहा है। उन्होंने कहा कि ये RTI (सूचना का अधिकार कानून) के अंतर्गत आता है या नहीं, ये भी स्पष्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि न इसकी प्रक्रियाएँ पारदर्शी हैं न ये जिम्मेदारी लेता है। उन्होंने कहा कि इसी कारण केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय इस घोटाले से पाक साफ़ निकल सकता है।

उन्होंने इसके लिए एक दस्तावेज शेयर किया, जिसमें लिखा है कि NTA को ‘सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट’ के तहत पंजीकृत किया गया है। अब आपको बताते हैं कि सच्चाई क्या है। मेडिकल के छात्रों को भड़काने के लिए ये सब झूठ फैलाए जा रहे हैं। असल में NTA एक स्वायत्त संस्था है, प्राइवेट कंपनी नहीं। और हाँ, ये RTI के अंतर्गत भी आता है। NTA से जुड़ी कोई भी जानकारी सूचना के अधिकार के तहत प्रक्रिया का पालन कर के जानी जा सकती है। पंकज पचौरी BBC और NDTV समेत कई बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं।

NTA कैसे RTI के तहत आता है, ये आप उसी की वेबसाइट पर जाकर पढ़ सकते हैं। इसी वेबसाइट पर ये भी लिखा है कि ये एक स्वायत्त संस्था है जो उच्च शिक्षा में एडमिशन/फेलोशिप के लिए होने वाली परीक्षाएँ आयोजित करती हैं। हाल ही में मोदी सरकार ने भी NTA के डायरेक्टर जनरल सुबोध कुमार सिंह को बदला है। सरकार किसी प्राइवेट कंपनी के मुखिया को कैसे बदल देगी? NTA के अध्यक्ष प्रदीप जोशी UPSC के चेयरमैन रहे हैं।

अमेरिका में 59 वर्षीय भारतीय की हत्या, रिचर्ड लुईस ने चेहरे पर मुक्का मार जमीन पर गिराया… मरने के लिए छोड़ भाग गया, Video वायरल

अमेरिका के ओक्लाहोमा सिटी में एक भारतीय-अमेरिकी मोटल मैनेजर की पार्किंग में हिंसक हमले के बाद मौत हो गई। ये वारदात, 22 जून 2024 की रात हुई, जब 59 साल के हेमंत शांतिलाल मिस्त्री को एक व्यक्ति ने बहस के बाद मुक्का मार दिया। कथित तौर पर मिस्त्री ने उस व्यक्ति को मोटल के सामने से अपना सामान हटाने को कहा था। इस घटना का वीडियो वायरल हो गया है, जिसमें वो व्यक्ति मिस्त्री से बहस करता दिख रहा है और अचानक उनपर हमला करता दिख रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ओक्लाहामा में 41 वर्षीय रिचर्ड लुईस ने मिस्त्री के चेहरे पर मुक्का मार दिया। इस क्रूर हमले में मिस्त्री बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़े, जबकि लुईस मौके से भाग गया। ओक्लाहोमा सिटी पुलिस विभाग को रात करीब 10:00 बजे एक इमरजेंसी कॉल मिली और पुलिस मौके पर पहुँची तो देखा कि मिस्त्री बेहोश पड़े थे। उन्हें पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन अगले दिन शाम करीब 7.40 बजे उनकी मौत हो गई।

ओक्लाहोमा सिटी पुलिस विभाग के मिन्सिग्टन डिलन क्विर्क ने कहा, “झड़प के दौरान एक व्यक्ति बेहोश हो गया, जिसकी बाद में मौत हो गई।” मारपीट की इस घटना का वीडियो किसी ने शूट कर लिया और ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। फुटेज में सफेद टी-शर्ट पहने मिस्त्री और आसमानी नीले रंग की टी-शर्ट पहने लुईस के बीच तीखी बहस होती दिखाई दे रही है, जो जल्द ही हिंसक हो गई। इसमें आरोपित तेजी से मिस्त्री के मुँह पर मुक्का मारता है और वो तुरंत पीछे की तरफ गिर जाते हैं। इसके बाद हमलावर ने उन्हें बचाने की कोई कोशिश नहीं की और अपना सामान उठाकर वहाँ से निकल गया।

इस घटना के तुरंत बाद रिचर्ड लुईस नाम के आरोपित को साउथ मेरिडियन एवेन्यू के 1900 ब्लॉक में स्थित एक होटल से गिरफ्तार कर लिया गया। उसे हिरासत में ले लिया गया और वर्तमान में उसे $100,000 के बॉन्ड पर ओक्लाहोमा काउंटी जेल में रखा गया है। उस पर गंभीर हमले और मारपीट के आरोप हैं। उस पर सेकंड डिग्री मर्डर का आरोप लगाया गया है।

‘ड्रग्स फ्री असम’ के लिए खुद CM सरमा ने सँभाली स्टीयरिंग, रोड रोलर से जखीरे को कर दिया समतल: बताया- अब तक ₹2100 करोड़ के ड्रग्स हो चुके हैं जब्त

असम मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने राज्य में ड्रग्स के इस्तेमाल के खिलाफ जंग छेड़ी हुई है। उन्होंने राज्य के बच्चों को इस बुरी लत से बचाने के लिए ड्रग फ्री असम का आह्वान किया। उन्होंने 26 जून को अंतराराष्ट्रीय स्तर पर मनाए जा रहे नशा निषेध दिवस पर अपना ट्वीट किया। साथ ही एक वीडियो लगाई जिसमें वो लाखों-करोड़ों की ड्रग्स को खुद रोड रोलर चलाकर कुचलते दिख रहे हैं।

हिमंता बिस्वा सरमा ने अपने ट्वीट में कहा, “असम ने ड्रग्स के खिलाफ जंग छेड़ रखी है। राज्य में नियमित अंतराल पर इस बुराई पर प्रहार किया जाता है। अब तक 2100 करोड़ से ज्यादा की ड्रग्स बरामद हो चुकी है। हम नशामुक्त असम बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं जहाँ हमारे बच्चे नशीले पदार्थ के खतरे से सुरक्षित रहें और स्वस्थ जीवन जी सकें। नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के खिलाफ़ अंतरराष्ट्रीय दिवस पर, हम नशा मुक्त भारत के बड़े लक्ष्य के लिए खुद को फिर से प्रतिबद्ध करते हैं!”

इसके अलावा अपने एक ट्वीट में उन्होंने जानकारी दी कि एसटीएफ असम द्वारा चलाए गए एक सफल अभियान में 900 ग्राम हेरोइन जब्त की गई जिसकी कीमत 4.5 करोड़ रुपए है। इस मामले में एक आरोपित को भी गिरफ्तार किया गया है।

गौरतलब है कि असम में इस समय नशीली दवाओं के खिलाफ हिमंता सरकार ने अभियान को तेज किया हुआ। ऐसे में जगह-जगह से नशीली दवाओं की जब्ती और तस्करों की गिरफ्तारी हुई है। एक हफ्ता पहले असम पुलिस ने शिवसागर और कार्वी आंगलोंग जैसे जिलों से 48 करोड़ रुपए की ड्रग्स को जब्त किया था। मामले में तीन आरोपित गिरफ्तार हुए थे। उससे पहले सिलचर में 210 करोड़ कीमत की 21 किलो हेरोइन जब्त की गई थी। वहीं असम के कछार में दो अलग अलग अभियानों में 9.5 करोड़ की ड्रग्स बरामद की गई थी।

छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार हिंसा में NSUI का विधानसभा अध्यक्ष गिरफ्तार, जो मोबाइल लूटकर भागा था वह भी पुलिस ने किया बरामद: सतनामी समाज के ध्वज का हुआ था अपमान

छतीसगढ़ के बलौदा बाजार में हुई भीषण हिंसा और आगजनी में पुलिस ने कॉन्ग्रेस के छात्र संगठन NSUI के विधानसभा अध्यक्ष को गिरफ्तार किया है। NSUI अध्यक्ष ने एक इस हिंसा के दौरान मोबाइल भी लूट लिया था। पुलिस इस हिंसा मामले में लगातार कार्रवाई कर रही है।

हिंसा मामले में गिरफ्तार किए गए NSUI अध्यक्ष का नाम सूर्यकांत वर्मा है। उस पर उस हिंसा के दौरान तोड़फोड़ करने और फोन चुराने का आरोप है। पुलिस इस हिंसा मामलें में अब तक 145 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। इस मामले में अब भी जाँच जारी है।

बलोदाबाजार में हुआ यह पूरा बवाल सतनामी समाज से जुड़ा हुआ है। यह पूरा बवाल मई माह में हुआ था। मई माह में बलोदा बाजार के गिरौदपुरी धाम के पास स्थित बाघिन गुफा में लगे सतनामी समुदाय के एक धार्मिक चिन्ह को क्षतिग्रस्त कर दिया गया था। इसको लेकर पूरा समाज काफी गुस्सा हुआ था।

पुलिस ने बाद में इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। बताया गया था कि धार्मिक चिन्हों को क्षति पहुंचाने का काम बिहार से आए तीन मजदूरों ने किया था जो पैसा ना मिलने पर गुस्सा थे। कहा गया था कि उन्होंने नशे में यह काम किया। हालाँकि, इसको लेकर सतनामी समुदाय के लोग संतुष्ट नहीं हुए थे। उनका कहना था कि मामले को दबाया जा रहा है और सही आरोपितों की गिरफ्तारी नहीं हुई है। सतनामी समुदाय ने इसके बाद प्रशासन से मुलाक़ात की और जाँच की माँग की। उन्होंने एकदिवसीय प्रदर्शन का भी ऐलान कर दिया।

यह प्रदर्शन 10 जून, 2024 को होना था। पहले प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा लेकिन थोड़ी ही देर में इसने उग्र रूप धारण कर लिया और देखते देखते स्थिति बिगड़ गई। इस दौरान एसपी और कलेक्टर के ऑफिस में तिरंगे को भी नुकसान पहुँचा कर यहाँ सफ़ेद झंडा लगाया गया। इस दूँ बहुत सी गाड़ियों में तोड़फोड़ की गई और आगजनी भी हुई।

कानून-व्यवस्था बिगड़ती देख मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने यहाँ के कलेक्टर और एसपी को हटा दिया। इस बीच उपद्रवियों पर कार्रवाई चालू हो गई। हिंसा के दो दिनों के भीतर 100 अधिक दंगाई पकड़े गए। मामले में अब तक 13 FIR दर्ज हो चुकी हैं और 145 आरोपित भी गिरफ्तार हो चुके हैं।