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पंजाब में 2 आतंकियों की घुसपैठ के बाद हाई अलर्ट, रिपोर्ट में दावा- हथियारों से लैस थे नकाबपोश: ग्रामीणों ने बताया- बंदूक दिखा खाना बनाने को कहा, फिर पठानकोट की ओर बढ़े

पंजाब के पठानकोट जिले में पाकिस्तान सीमा से 2 आतंकियों के घुसपैठ की सूचना है। इस सूचना के बाद पठानकोट के साथ गुरदासपुर जिले में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। पुलिस ने मुख्य हाइवे सहित अन्य मार्गों पर सख्त तलाशी अभियान छेड़ रखा है। इस मामले से सीमा सुरक्षा बल (BSF) और सेना को भी अवगत करवा दिया गया है।

बताया जा रहा है कि चेहरा ढँके इन दोनों आतंकियों के पास भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारुद है। मंगलवार (25 जून 2024) को इन दोनों संदिग्धों ने कुछ लोगों को बंदूक दिखा कर खाना भी बनवाया था और खाना खाने के बाद दोनों संदिग्ध आतंकी वहाँ से निकल गए। जाते-जाते उन्होंने खाना बनाने वालों को धमकी भी दी। बाद में इन लोगों ने पुलिस को सूचित किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पठानकोट में BSF की डिंडा आउटपोस्ट है। यहाँ मंगलवार को दो संदिग्ध हरकतें देखी गईं। बताया जा रहा है कि चेहरे को ढँक कर इस रास्ते से 2 आतंकियों ने बॉर्डर पार करके भारतीय सीमा में प्रवेश किया है। इन दोनों के पास भारी मात्रा में हथियारों के साथ गोला-बारूद भी है। सीमा से सटे एक फार्म हाउस पर दोनों आतंकी रात 9:30 के आसपास थोड़ी देर रुके भी।

जिस फार्म हाउस में संदिग्ध रुके थे, वह कोट बांठियाँ गाँव में बना है। यहाँ मौजूद मजदूरों को इन दोनों ने बंदूक से डराया और उनसे खाना बनवाया। खाना खा लेने के बाद दोनों पठानकोट की तरफ बढ़ गए।फर्म हाउस से निकलने के दौरान दोनों संदिग्धों ने मजदूरों को धमकी दी कि अगर उन्होंने किसी को बताया तो उन्हें जान से मार डाला जाएगा।

आतंकियों के चले जाने के बाद मजदूरों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने फ़ौरन मौके पर पहुँच कर जाँच-पड़ताल शुरू की। संदिग्धों की तलाश में सघन तलाशी अभियान छेड़ दिया गया है। हाईवे से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में भी जाने वाले मार्गों पर पुलिस ने पहरा बैठा दिया है। ग्रामीणों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वो किसी भी संदिग्ध हरकत की सूचना फ़ौरन पुलिस को दें।

शिकायतकर्ता ग्रामीण की पहचान सुरक्षा के लिहाज से गुप्त रखी गई है। पंजाब पुलिस के सीनियर अधिकारी भी हालातों पर नजर रखे हुए हैं। इस सूचना पर एक उच्चस्तरीय बैठक भी हुई है। मामले से सेना और सीमा सुरक्षा बल (BSF) को भी अवगत करवा दिया गया है। पठानकोर्ट एयरबेस सहित कई अन्य सैन्य स्थलों के साथ सार्वजानिक स्थलों की भी सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।

‘NEET परीक्षा लेने वाली NTA है प्राइवेट संस्था, RTI के तहत भी नहीं’: झूठ फैलाते पकड़े गए BBC-NDTV वाले पंकज पचौरी, मनमोहन सिंह ने PM रहते बनाया था मीडिया सलाहकार

मनमोहन सिंह के काल में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में कम्युनिकेशंस एडवाइजर रहे पंकज पचौरी ने NTA (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) को लेकर दावा किया है कि ये एक प्राइवेट संस्था है। UPA के समय में पंकज पचौरी प्रधानमंत्री की मीडिया स्ट्रैटेजी का जिम्मा सँभालते और अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों के लिए विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर रणनीति तैयार करते थे। NEET UG के पेपर लीक और PG की परीक्षा रद्द होने के बाद अब वो ‘राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी’ को लेकर नया दावा कर रहे हैं।

पंकज पचौरी ने ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर किए गए एक पोस्ट में लिखा कि ये जानना बड़ा हैरानी भरा है कि NTA एक प्राइवेट संस्था है जो सरकारी शैक्षिक संस्थाओं के लिए छात्रों के भविष्य का निर्णय ले रहा है। उन्होंने कहा कि ये RTI (सूचना का अधिकार कानून) के अंतर्गत आता है या नहीं, ये भी स्पष्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि न इसकी प्रक्रियाएँ पारदर्शी हैं न ये जिम्मेदारी लेता है। उन्होंने कहा कि इसी कारण केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय इस घोटाले से पाक साफ़ निकल सकता है।

उन्होंने इसके लिए एक दस्तावेज शेयर किया, जिसमें लिखा है कि NTA को ‘सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट’ के तहत पंजीकृत किया गया है। अब आपको बताते हैं कि सच्चाई क्या है। मेडिकल के छात्रों को भड़काने के लिए ये सब झूठ फैलाए जा रहे हैं। असल में NTA एक स्वायत्त संस्था है, प्राइवेट कंपनी नहीं। और हाँ, ये RTI के अंतर्गत भी आता है। NTA से जुड़ी कोई भी जानकारी सूचना के अधिकार के तहत प्रक्रिया का पालन कर के जानी जा सकती है। पंकज पचौरी BBC और NDTV समेत कई बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं।

NTA कैसे RTI के तहत आता है, ये आप उसी की वेबसाइट पर जाकर पढ़ सकते हैं। इसी वेबसाइट पर ये भी लिखा है कि ये एक स्वायत्त संस्था है जो उच्च शिक्षा में एडमिशन/फेलोशिप के लिए होने वाली परीक्षाएँ आयोजित करती हैं। हाल ही में मोदी सरकार ने भी NTA के डायरेक्टर जनरल सुबोध कुमार सिंह को बदला है। सरकार किसी प्राइवेट कंपनी के मुखिया को कैसे बदल देगी? NTA के अध्यक्ष प्रदीप जोशी UPSC के चेयरमैन रहे हैं।

अमेरिका में 59 वर्षीय भारतीय की हत्या, रिचर्ड लुईस ने चेहरे पर मुक्का मार जमीन पर गिराया… मरने के लिए छोड़ भाग गया, Video वायरल

अमेरिका के ओक्लाहोमा सिटी में एक भारतीय-अमेरिकी मोटल मैनेजर की पार्किंग में हिंसक हमले के बाद मौत हो गई। ये वारदात, 22 जून 2024 की रात हुई, जब 59 साल के हेमंत शांतिलाल मिस्त्री को एक व्यक्ति ने बहस के बाद मुक्का मार दिया। कथित तौर पर मिस्त्री ने उस व्यक्ति को मोटल के सामने से अपना सामान हटाने को कहा था। इस घटना का वीडियो वायरल हो गया है, जिसमें वो व्यक्ति मिस्त्री से बहस करता दिख रहा है और अचानक उनपर हमला करता दिख रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ओक्लाहामा में 41 वर्षीय रिचर्ड लुईस ने मिस्त्री के चेहरे पर मुक्का मार दिया। इस क्रूर हमले में मिस्त्री बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़े, जबकि लुईस मौके से भाग गया। ओक्लाहोमा सिटी पुलिस विभाग को रात करीब 10:00 बजे एक इमरजेंसी कॉल मिली और पुलिस मौके पर पहुँची तो देखा कि मिस्त्री बेहोश पड़े थे। उन्हें पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन अगले दिन शाम करीब 7.40 बजे उनकी मौत हो गई।

ओक्लाहोमा सिटी पुलिस विभाग के मिन्सिग्टन डिलन क्विर्क ने कहा, “झड़प के दौरान एक व्यक्ति बेहोश हो गया, जिसकी बाद में मौत हो गई।” मारपीट की इस घटना का वीडियो किसी ने शूट कर लिया और ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। फुटेज में सफेद टी-शर्ट पहने मिस्त्री और आसमानी नीले रंग की टी-शर्ट पहने लुईस के बीच तीखी बहस होती दिखाई दे रही है, जो जल्द ही हिंसक हो गई। इसमें आरोपित तेजी से मिस्त्री के मुँह पर मुक्का मारता है और वो तुरंत पीछे की तरफ गिर जाते हैं। इसके बाद हमलावर ने उन्हें बचाने की कोई कोशिश नहीं की और अपना सामान उठाकर वहाँ से निकल गया।

इस घटना के तुरंत बाद रिचर्ड लुईस नाम के आरोपित को साउथ मेरिडियन एवेन्यू के 1900 ब्लॉक में स्थित एक होटल से गिरफ्तार कर लिया गया। उसे हिरासत में ले लिया गया और वर्तमान में उसे $100,000 के बॉन्ड पर ओक्लाहोमा काउंटी जेल में रखा गया है। उस पर गंभीर हमले और मारपीट के आरोप हैं। उस पर सेकंड डिग्री मर्डर का आरोप लगाया गया है।

‘ड्रग्स फ्री असम’ के लिए खुद CM सरमा ने सँभाली स्टीयरिंग, रोड रोलर से जखीरे को कर दिया समतल: बताया- अब तक ₹2100 करोड़ के ड्रग्स हो चुके हैं जब्त

असम मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने राज्य में ड्रग्स के इस्तेमाल के खिलाफ जंग छेड़ी हुई है। उन्होंने राज्य के बच्चों को इस बुरी लत से बचाने के लिए ड्रग फ्री असम का आह्वान किया। उन्होंने 26 जून को अंतराराष्ट्रीय स्तर पर मनाए जा रहे नशा निषेध दिवस पर अपना ट्वीट किया। साथ ही एक वीडियो लगाई जिसमें वो लाखों-करोड़ों की ड्रग्स को खुद रोड रोलर चलाकर कुचलते दिख रहे हैं।

हिमंता बिस्वा सरमा ने अपने ट्वीट में कहा, “असम ने ड्रग्स के खिलाफ जंग छेड़ रखी है। राज्य में नियमित अंतराल पर इस बुराई पर प्रहार किया जाता है। अब तक 2100 करोड़ से ज्यादा की ड्रग्स बरामद हो चुकी है। हम नशामुक्त असम बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं जहाँ हमारे बच्चे नशीले पदार्थ के खतरे से सुरक्षित रहें और स्वस्थ जीवन जी सकें। नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के खिलाफ़ अंतरराष्ट्रीय दिवस पर, हम नशा मुक्त भारत के बड़े लक्ष्य के लिए खुद को फिर से प्रतिबद्ध करते हैं!”

इसके अलावा अपने एक ट्वीट में उन्होंने जानकारी दी कि एसटीएफ असम द्वारा चलाए गए एक सफल अभियान में 900 ग्राम हेरोइन जब्त की गई जिसकी कीमत 4.5 करोड़ रुपए है। इस मामले में एक आरोपित को भी गिरफ्तार किया गया है।

गौरतलब है कि असम में इस समय नशीली दवाओं के खिलाफ हिमंता सरकार ने अभियान को तेज किया हुआ। ऐसे में जगह-जगह से नशीली दवाओं की जब्ती और तस्करों की गिरफ्तारी हुई है। एक हफ्ता पहले असम पुलिस ने शिवसागर और कार्वी आंगलोंग जैसे जिलों से 48 करोड़ रुपए की ड्रग्स को जब्त किया था। मामले में तीन आरोपित गिरफ्तार हुए थे। उससे पहले सिलचर में 210 करोड़ कीमत की 21 किलो हेरोइन जब्त की गई थी। वहीं असम के कछार में दो अलग अलग अभियानों में 9.5 करोड़ की ड्रग्स बरामद की गई थी।

छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार हिंसा में NSUI का विधानसभा अध्यक्ष गिरफ्तार, जो मोबाइल लूटकर भागा था वह भी पुलिस ने किया बरामद: सतनामी समाज के ध्वज का हुआ था अपमान

छतीसगढ़ के बलौदा बाजार में हुई भीषण हिंसा और आगजनी में पुलिस ने कॉन्ग्रेस के छात्र संगठन NSUI के विधानसभा अध्यक्ष को गिरफ्तार किया है। NSUI अध्यक्ष ने एक इस हिंसा के दौरान मोबाइल भी लूट लिया था। पुलिस इस हिंसा मामले में लगातार कार्रवाई कर रही है।

हिंसा मामले में गिरफ्तार किए गए NSUI अध्यक्ष का नाम सूर्यकांत वर्मा है। उस पर उस हिंसा के दौरान तोड़फोड़ करने और फोन चुराने का आरोप है। पुलिस इस हिंसा मामलें में अब तक 145 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। इस मामले में अब भी जाँच जारी है।

बलोदाबाजार में हुआ यह पूरा बवाल सतनामी समाज से जुड़ा हुआ है। यह पूरा बवाल मई माह में हुआ था। मई माह में बलोदा बाजार के गिरौदपुरी धाम के पास स्थित बाघिन गुफा में लगे सतनामी समुदाय के एक धार्मिक चिन्ह को क्षतिग्रस्त कर दिया गया था। इसको लेकर पूरा समाज काफी गुस्सा हुआ था।

पुलिस ने बाद में इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। बताया गया था कि धार्मिक चिन्हों को क्षति पहुंचाने का काम बिहार से आए तीन मजदूरों ने किया था जो पैसा ना मिलने पर गुस्सा थे। कहा गया था कि उन्होंने नशे में यह काम किया। हालाँकि, इसको लेकर सतनामी समुदाय के लोग संतुष्ट नहीं हुए थे। उनका कहना था कि मामले को दबाया जा रहा है और सही आरोपितों की गिरफ्तारी नहीं हुई है। सतनामी समुदाय ने इसके बाद प्रशासन से मुलाक़ात की और जाँच की माँग की। उन्होंने एकदिवसीय प्रदर्शन का भी ऐलान कर दिया।

यह प्रदर्शन 10 जून, 2024 को होना था। पहले प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा लेकिन थोड़ी ही देर में इसने उग्र रूप धारण कर लिया और देखते देखते स्थिति बिगड़ गई। इस दौरान एसपी और कलेक्टर के ऑफिस में तिरंगे को भी नुकसान पहुँचा कर यहाँ सफ़ेद झंडा लगाया गया। इस दूँ बहुत सी गाड़ियों में तोड़फोड़ की गई और आगजनी भी हुई।

कानून-व्यवस्था बिगड़ती देख मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने यहाँ के कलेक्टर और एसपी को हटा दिया। इस बीच उपद्रवियों पर कार्रवाई चालू हो गई। हिंसा के दो दिनों के भीतर 100 अधिक दंगाई पकड़े गए। मामले में अब तक 13 FIR दर्ज हो चुकी हैं और 145 आरोपित भी गिरफ्तार हो चुके हैं।

वायनाड में मिला माओवादियों का प्लांट किया हुआ विस्फोट उपकरण, लोकसभा चुनाव के बहिष्कार का भी किया था ऐलान: राहुल गाँधी ने बहन के लिए खाली की है सीट

केरल के वायनाड के एक पहाड़ी गाँव से माओवादियों द्वारा लगाया गया विस्फोटक उपकरण जब्त हुआ है। वहाँ अक्सर माओवादियों की आवाजाही की सूचना मिलती रही है। पुलिस ने मंगलवार (25 जून, 2024) को ये जानकारी दी है। इस विस्फोटक उपकरण को मक्किमला नाम एक गाँव में पाया गया, जो थालाप्पुझा थाना क्षेत्र अंतर्गत पड़ता है। केरल पुलिस की इलीट फ़ोर्स ‘थंडरबोल्ट’ के कॉम्बिंग ऑपरेशन के दौरान इसे पाया गया, जिसके बाद आशंका है कि माओवादी वहाँ सक्रिय हैं।

स्थानीय मीडिया की खबरों में इसे लैंडमाइन भी बताया गया है, लेकिन पुलिस ने इसकी पुष्टि नहीं की है। हालाँकि, इस विस्फोटक उपकरण को न्यूट्रलाइज कर दिया गया है। पश्चिमी घाट के कबानीदलम में अक्सर माओवादियों की आवाजाही रिपोर्ट की जाती रही है। कम्बामाला जंगल के क्षेत्रों में पिछले महीने केरल पुलिस और माओवादियों के बीच मुठभेड़ भी हुई थी। अक्टूबर 2023 में इसी मक्किमला में एक रिजॉर्ट में बड़ी संख्या में नक्सलियों ने शरण ली थी।

इन माओवादियों ने न सिर्फ रिजॉर्ट के मैनेजर के मोबाइल फोन को छीन लिया था, बल्कि उसी फोन का इस्तेमाल कर के मीडिया को एस्टेट के कामगारों की तथाकथित समस्याओं का विवरण भी भेजा था। इसी साल अप्रैल में चाय के बागान में काम कर रहे मजदूरों से बात करते हुए हथियारबंद माओवादियों की तस्वीरें भी सामने आई थीं। इनका नेता CP मोइद्दीन था। इन्होंने इन कामगारों से लोकसभा चुनाव 2024 का बहिष्कार करने के लिए भी कहा था।

बता दें कि 2019 में राहुल गाँधी ने केरल के वायनाड से भी चुनाव लड़ा था, उत्तर प्रदेश के अमेठी से वो हार गए थे। मुस्लिम बहुल वायनाड में IUML के साथ गठबंधन के कारण उनकी इज्जत बची। इस बार उन्होंने रायबरेली और वायनाड दोनों सीटों से जीत दर्ज की, फिर वायनाड खाली कर दिया। अब वहाँ से प्रियंका गाँधी लड़ेंगी। इस तरह कॉन्ग्रेस उत्तर और दक्षिण भारत में एक-एक गाँधी को रख कर अगले 5 साल के लिए राजनीतिक जमीन तैयार कर रही है।

अजीम अली ने हिंदू नाबालिग का वर्षों किया रेप, धर्मांतरण करवाकर किया निकाह: जबरन मांस खिलाता और नमाज पढ़वाता, मना करने पर परिजन संग मिलकर करता पिटाई

उत्तर प्रदेश के बदायूँ जिले से ग्रूमिंग जिहाद का एक मामला सामने आया है। यहाँ अजीम अली ने एक हिन्दू लड़की को जबरन इस्लाम कबूल करवाकर उससे निकाह कर लिया। वह शाकाहारी पीड़िता को जबरन मांस खिलाता और मज़हबी किताबें पढ़वाता था। जबरन मजारों पर भी ले जाता था। इन सबसे मना करने पर पीड़िता की पिटाई की जाती थी।

यह मामला बदायूँ जिले के कोतवाली नगर का है। यहाँ मंगलवार (25 जून 2024) को पीड़िता ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत में पीड़िता ने बताया कि जब वो 17 साल की थी, तब उसके मोहल्ले में रहने वाले 24 वर्षीय अजीम ने उसे अपने जाल में फँसा लिया। इस दौरान अजीम ने लड़की के अश्लील फोटो और वीडियो बनाकर ब्लैकमेल किया और कई बार रेप किया।

लगभग एक साल पहले अजीम ने पीड़िता को जान से मारने और वीडियो वायरल करने की धमकी देकर अपने साथ लेकर चला गया। लड़की के पिता ने पुलिस में केस दर्ज करवाया तो अजीम और उसके अब्बा शाकिर अली ने डरा-धमका कर पीड़िता से अपने पक्ष में बयान दर्ज करवा लिया। शाकिर अली पेशे से फार्मासिस्ट हैं। शाकिर इस केस में नामजद कुल 5 आरोपितों में से एक हैं।

कोर्ट में बयान दिलवाने के बाद आरोपित पीड़िता को अपने साथ लेकर चले गए। कुछ दिनों के बाद खुद अजीम अली, उसके अब्बा शाकिर अली, उसकी अम्मी रेशमा, भाई नदीम अली और बहन सायमा पीड़िता पर हिन्दू धर्म त्याग कर इस्लाम कबूल करने का दबाव बनाने लगे। उससे जबरन मांस पकवाते थे और खाने के लिए भी दबाव बनाते थे। पीड़िता का कहना है कि शुद्ध शाकाहारी है।

पीड़िता ने शिकायत में आगे बताया कि उसे जबरन इस्लामी कपड़े पहनाए जाते थे और इस्लामी किताबें पढ़ने पर मजबूर किया जाता था। उसकी मर्जी के बिना उसे मजारों पर ले जाया जाता था। जब लड़की इस सब चीजों का विरोध किया था तो कमरे में बंद करके उसकी बेरहमी से पिटाई होती थी। इतना ही नहीं, पीड़िता को लम्बे समय तक भूखा भी रखा जाता था।

कुछ दिनों बाद आरोपितों ने अजीम ने पीड़िता का जबरन धर्मांतरण कराकर उससे निकाह कर लिया। निकाह के बाद लड़की का नाम मायरा रखा गया। 24 जून (सोमवार) को अजीम, उसके अम्मी-अब्बा और उसके भाई-बहन मिलकर पीड़िता को बेरहमी से मारने लगे। वो पीड़िता द्वारा इस्लामी तौर-तरीके नहीं अपनाए जाने से नाराज थे।

घटना के दिन पीड़िता देर रात जैसे-तैसे करके आरोपितों के चंगुल से निकल कर पुलिस स्टेशन पहुँची। यहाँ उसने पुलिस को पूरी बात बताई और आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की। पुलिस ने पीड़िता की लिखित तहरीर पर FIR दर्ज कर ली है। FIR में अजीम, शाकिर अली, सायमा, नदीम और रेशमा बेगम को नामजद किया गया है।

इन सभी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 323, 504 और 506 के अलावा उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 2021 की धारा 3/5(1) के तहत कार्रवाई की गई है। ऑपइंडिया के पास शिकायत कॉपी मौजूद है। बदायूँ पुलिस ने बताया कि मामले की जाँच और अन्य जरूरी कार्रवाई की जा रही है।

अयोध्या में बनेगा मंदिरों का म्यूजियम, ₹750 करोड़ होगा खर्च: टाटा संस ने ली निर्माण की जिम्मेदारी, योगी सरकार ने लगाई मुहर

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में मंदिरों का एक बड़ा संग्रहालय बनने जा रहा है। ये संग्रहालय टाटा समूह द्वारा बनाया जाएगा जिसमें करीबन 650 करोड़ रुपए का खर्च आएगा। आज उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के मंत्रिमंडल ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इस महत्वपूर्ण निर्णय के संबंध में जानकारी यूपी सरकार के एक्स हैंडल पर भी दी गई है। पोस्ट में बताया गया है कि विश्वस्तरीय मंदिर संग्रहालय के निर्माण एवं संचालन हेतु भूमि के उपयोग का लाइसेंस दिए जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी गई है।

संग्रहालय के फैसले को लेकर उत्तर प्रदेश के पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि टाटा समूह को म्यूजियम ऑफ टेंपल्स के लिए 1 रुपए के टोकन अमाउंट पर 90 सालों के लिए जमीन लीज पर दी जाएगी। यह संग्रहालय अत्याधुनिक होगा और उसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाया जाएगा। म्यूजियम में भारत के प्रसिद्ध मंदिरों के स्थापत्य व इतिहास की जानकारियाँ प्रदर्शित की जाएगी। प्रस्तावित संग्रहालय में लाइट एंड साउंड शो की भी व्यवस्था की जाएगी।

इस म्यूजियम के निर्माण को लेकर टाटा संस ने कहा है कि वह अपने कॉरपोरेट सोशल रेस्‍पॉसिबिलिटी (CSR) फंड से 650 करोड़ रुपए खर्च कर टेंपल म्‍यूजियम बनाएँगे। यह म्‍यूजियम अयोध्‍या की सदर तहसील के मांझा जामतारा गाँव में बनाया जाएगा। इसके साथ गाँव के आसपास और भी इन्फ्रा तैयार होगा। इसके लिए लगभग 100 करोड़ रुपए खर्च होंगे। यानी कुल मिलाकर 750 करोड़ का निवेश किया जाएगा।

मालूम हो कि टाटा समूह द्वारा इस म्यूजियम को बनाए जाने का प्रस्ताव सबसे पहले पिछले साल सामने आया था। तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस परियोजना से अवगत कराया गया था। पीएम को ये प्रस्ताव बहुत पसंद आया। उसके बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत वरिष्ठ अधिकारियों को विस्तार से परियोजना के बारे में बताया गया और अब खबर है कि इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है।

उम्मीद की जा रही है कि जिस तरह यात्री राम मंदिर प्रभु के दर्शन करने आते हैं वैसे ही वो अयोध्या में आकर म्यूजियम को भी देखेंगे और इससे ये जगह एक पर्यटन स्थल के तौर पर और भी ज्यादा विकसित होगी। वहीं मंदिर के बारे में बताएँ तो मंदिर का काम भी 2025 तक समाप्त होने वाला है। वहीं पहली मंजिल का काम जुलाई के आखिर तक पूरा होने वाला है।

स्पीकर की कुर्सी सँभालते ही ओम बिरला ने आपातकाल के पीड़ितों को किया स्मरण, लोकसभा में दो मिनट का मौन: विपक्ष का हंगामा

लोकसभा के स्पीकर चुने गए ओम बिरला ने कार्यभार संभालने के बाद आपातकाल को याद किया। उन्होंने आपातकाल के दिनों में हुए अत्याचार पर लोकसभा में दो मिनट का मौन भी रखा। इस दौरान भी विपक्ष के सांसद शोर मचाते रहे।

स्पीकर पद के लिए ओम बिरला को NDA गठबंधन ने अपना उम्मीदवार बनाया था, उनके सामने INDI गठबंधन ने K सुरेश को उतारा था। ओम बिरला को ध्वनिमत से स्पीकर चुन लिया गया। विपक्ष ने इस दौरान वोटों का बंटवारा भी नहीं करवाया। इसके बाद ओम बिरला ने कार्यभार संभाल लिया।

ओम बिरला ने कार्यभार संभालने के बाद 1975 में इंदिरा गाँधी की कॉन्ग्रेस सरकार द्वारा लगाए गए आपातकाल की निंदा की। आपातकाल के 50 वर्ष पूरे होने पर उन्होंने कहा, “ये सदन 1975 में देश में आपातकाल लगाने के निर्णय की कड़े शब्दों में निंदा करता है। इसके साथ ही हम, उन सभी लोगों की संकल्पशक्ति की सराहना करते हैं, जिन्होंने आपातकाल का पुरजोर विरोध किया, संघर्ष किया और भारत के लोकतंत्र की रक्षा का दायित्व निभाया।”

स्पीकर ओम बिरला ने आपातकाल के दौरान किए गए अत्याचारों के पीड़ितों पर संवेदना जताई। उन्होंने कहा, “आपातकाल के दौरान लोगों को कॉन्ग्रेस सरकार द्वारा जबरन थोपी गई अनिवार्य नसबंदी का, शहरों में अतिक्रमण हटाने के नाम पर की गई मनमानी का और सरकार की कुनीतियों का प्रहार झेलना पड़ा। ये सदन उन सभी लोगों के प्रति संवेदना जताना चाहता है।”

स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि इंदिरा गाँधी की सरकार ने आपातकाल के दौरान न्यायपालिका और नौकरशाही पर भी हमला किया था। उन्होंने कहा कि संविधान में इस दौरान जबरन संशोधन किए गए थे और इनके जरिए कॉन्ग्रेस सारी शक्तियाँ इंदिरा गाँधी के हाथ में लाना चाहती थी।

ओम बिरला ने आपातकाल के दौरान अत्याचारों के कारण मारे गए लोगो के प्रति संवेदना प्रकट करने के लिए सदन से 2 मिनट का मौन रखने को ही कहा। इस दौरान भाजपा समेत सभी पार्टियों ने मौन रखा जबकि कॉन्ग्रेस समेत तमाम विपक्षी पार्टियाँ हल्ला मचाती रहीं। विपक्षी दलों ने इस मौन में भाग नहीं लिया।

आपताकाल को लेकर NDA सांसदों ने सदन के बाहर भी प्रदर्शन किया। NDA सांसदों ने इस दौरान बैनर-पोस्टर भी पकड़े हुए थे जिन पर लिखा था, ”ना भूलेंगे, ना माफ़ करेंगे और ना दोहराने देंगे।” इसको लेकर संसदीय मामलों के मंत्री किरेन रिजीजू ने कहा कि इंदिरा गाँधी ने अकेले ही आपाताकाल लगाने का निर्णय ले लिया था, हम ऐसा दोबारा कभीं नहीं होने देंगे।

पश्चिम से बन-ठन कर आई रोगग्रस्त वेश्या की हो रही पूजा… आपातकाल के खिलाफ आत्मदाह करने वाले प्रभाकर शर्मा, पत्र में लिखा था – नरपिशाचिनी के राज में नहीं जिऊँगा

भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने 25 जून, 1975 को देश पर आपातकाल थोप दिया था। लालकृष्ण आडवाणी समेत विपक्ष के कई नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। अखबारें सरकारी स्क्रूटनी के बाद छप कर निकलने लगीं। पत्रकारों को प्रताड़ित किया जाने लगा। अभिनेत्री स्नेहलता रेड्डी को जेल में इतना प्रताड़ित किया गया कि उनकी मौत हो गई। बीमार महारानी गायत्री देवी को जेल में ठूँस कर यातनाएँ दी गईं। संजय गाँधी के आदेश पर हजारों लोगों की जबरन नसबंदी हुई।

आपातकाल की गुम कहानियों में एक प्रभाकर शर्मा की भी है। प्रभाकर शर्मा सत्याग्रही थे। बिहार के वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र किशोर ने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रभाकर शर्मा के बारे में बताया है। सुरेंद्र किशोर 5 दशकों में कई पत्र-पत्रिकाओं का संपादन कर चुके हैं और पद्मश्री से सम्मानित हैं। जॉर्ज फर्नांडिस के लिए काम कर चुके सुरेंद्र किशोर आपातकाल के दौरान जेल भी गए थे। बिहार में पशुपालन घोटाले को उजागर करने वालों में भी शामिल रहे। सुरेंद्र किशोर आपातकाल के भुक्तभोगी हैं, ऐसे में उन्होंने प्रभाकर शर्मा की कहानी बताई है।

उन्होंने उनलोगों को जवाब दिया है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तानाशाह कहते हैं और देश में ‘अघोषित आपातकाल’ होने की बातें करते हैं। जो लोग ऐसी बातें करते हैं, या तो उन्होंने असली आपातकाल देखा नहीं है या फिर वो जानबूझकर आपातकाल के दर्द को कम कर के आँकते हैं। कोलकाता से प्रकाशित साप्ताहिक पत्रिका ‘रविवार’ में प्रभाकर शर्मा की ये कहानी 8 दिसंबर, 1979 में छपी थी। उन्होंने इंदिरा गाँधी को एक मार्मिक पत्र भी भेजा था, जिसकी एक प्रति उन्होंने विनोबा भावे को भेजी थी।

जब्त होती थीं पत्रिकाएँ, झुक गए थे जज भी

बता दें कि विनोभा भावे को आपातकाल का विरोध न करने के कारण उस दौर में ‘सरकारी संत’ कहा जाने लगा था। उन्होंने प्रभाकर शर्मा के इस पत्र की चर्चा तक किसी से नहीं की। समाजवादी नेता कर्पूरी ठाकुर ने उन्हें कई बार आपातकाल विरोधी आंदोलन का नेतृत्व करने को कहा, लेकिन वो चुप रहे। इस पर कर्पूरी ठाकुर ने कहा कि उन्हें महात्मा गाँधी का उत्तराधिकारी कहलाने का कोई अधिकार नहीं है। ये भी चर्चा थी कि उन्होंने आपातकाल को ‘अनुशासन पर्व’ कहा है, जिसे उन्होंने आपातकाल खत्म होने के बाद नकार दिया था।

खैर, इन्हीं विनोबा भावे की पत्रिका ‘मैत्री’ पर भी सरकार का कहर बरपा था। वो खुद इसके संपादक थे। विनोबा भावे गोहत्या पर प्रतिबन्ध लगाने की माँग के साथ अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने वाले थे, इसी खबर को छापने पर ‘मैत्री’ की पत्रिकाओं को जब्त कर लिया गया। इसकी 4000 प्रतियाँ जब्त की गई थीं। एक जूनियर सब-इंस्पेक्टर को भेज कर महाराष्ट्र के वर्धा स्थित पवनार आश्रम पर छापा मारा गया। विनोबा भावे इस पर ‘धन्य हो, धन्य हो’ कह कर रह गए।

सुप्रीम कोर्ट ने भी इस दौरान लोगों की मदद करने से इनकार कर दिया था। 5 न्यायाधीशों की पीठ ने फैसला दिया कि नए निजाम में सरकार किसी को भी जेल में डाल सकती है। सर्वोच्च न्यायालय ने इसमें हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था। सिर्फ एक जज HR खन्ना ने इससे मतभेद जताया। बताया जाता है कि 3 जजों ने CJI बनने के लालच में ये फैसला दिया, उन्हें डर भी था कार्रवाई का। इंदिरा गाँधी ने 38वें संविधान संशोधन के जरिए न्यायपालिका को आपातकाल की समीक्षा से वंचित कर दिया, सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा कि इंदिरा गाँधी के चुनाव संबधी फैसला अब उसकी परिधि से बाहर है।

अब आते हैं वापस प्रभाकर शर्मा पर। उन्होंने 14 अक्टूबर, 1976 को 1976 को वर्धा के निकट सुरगाँव में आत्मदाह किया था। उन्होंने उससे पहले लिखे गए पत्र में बताया था कि कैसे सरकार ने पशुबल का इस्तेमाल कर पत्र-पत्रिकाओं के स्वातंत्र्य लेखन को छीन लिया था। उन्होंने लिखा था कि सत्य पर निर्मम प्रहार किया जाता है, उन्होंने ‘मैत्री’ को जब्त किए जाने का भी विरोध करते हुए लिखा था कि भारत की अहिंसक और आध्यात्मिक संस्कृति पर निर्लज्ज प्रहार किया गया है।

प्रभाकर शर्मा ने इंदिरा गाँधी को अपने मार्मिक पत्र में क्या लिखा था

उन्होंने आपातकाल की तुलना मुगलों के अत्याचार से करते हुए कहा कि महात्मा गाँधी से जिस पार्टी को अहिंसा की शिक्षा मिली उसी ने ऐसा किया है। उन्होंने पूछा था कि उनके घर में लोग घुस आएँ और उनकी संपत्ति पर कब्ज़ा कर के पिस्तौल दिखा कर स्त्रियों का बलात्कार करें तो उन्हें कैसा महसूस होगा? उनका इशारा इंदिरा गाँधी के ‘गरीबी हटाओ’ के नारे पर था। उन्होंने लिखा था कि राक्षसी कानून लगा कर अँधेरी गुफा में देश को धकेल दिया गया है।

प्रभाकर शर्मा ने लिखा था, “ये केंद्र सरकार गुंडों का संगठन है। मानवता, शील, चरित्र, न्याय, लज्जा, ईमानदारी और भारतीय संस्कृति को इसने तिलांजलि दे दी है। अख़बारों में भी इसकी खबर नहीं छप सकती। जयप्रकाश नारायण का स्वागत तक करने पर गिरफ़्तारी हो जाती है। जालसाजी, भ्रष्टाचार और काले धन के बल पर इंदिरा गाँधी PM बनी हैं। उनके खिलाफ आदेश देने पर न्यायधीशों को भी हटा दिया जाएगा। आज इंदिरा गाँधी की मर्जी है धर्मशास्त्र, सबक है नीति-शास्त्र, इच्छा है संस्कृति, गर्वोन्माद है कानून और हुंकार है न्याय।”

प्रभाकर शर्मा ने आगे लिखा था कि इंदिरा गाँधी अपने जघन्य कुकृत्यों के कारण लोकमत का सामना करने का साहस खो चुकी हैं, उन्होंने राष्ट्र की अंतरात्मा की हत्या की है। उन्होंने इंदिरा गाँधी पर प्रजा को दब्बू व चरित्रहीन बनाने का आरोप लगाते हुए कहा था कि नई पीढ़ी तो खत्म ही है। होने स्पष्ट ऐलान किया था कि संपूर्ण भारत को सत्ता के लिए अपने पाँवों तले रौंदने वाली नरपिशाचिनी के राज में जीने की बजाए वो हजार बार मल-मूत्र में रेंगने वाले कीड़े के रूप में जन्म लेना पसंद करेंगे।

उन्होंने याद किया था कि ये वही भारत है जहाँ अद्वैतवाद का जन्म हुआ, हजारों संतों ने तपस्या की और बहुमातैक्य की अनुभूति प्राप्त कर आध्यात्मिक और अहिंसक संस्कृति के बीज बोए थे। उन्होंने कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि आपातकाल का विरोध न करने पर ये ऐसे लोगों का देश कहलाएगा जिसने शरीर और आत्मा को बेच कर पश्चिम से बन-ठन कर आई रोगग्रस्त वेश्या को पूजना शुरू कर दिया है। उन्होंने नौकरशाही पर भी अपना पद बनाए रखने के लिए जनता पर दमन किया।

प्रभाकर शर्मा ने लिखा था, “शहरी वर्ग ने अपने भोग-विलास, फैशन और ऐशोआराम को बनाए रखने के लिए सरकार के अपमानजनक कानूनों और जुल्मों के आगे घुटने टेक दिए हैं। सत्ता और संपत्ति की पूजा के लिए मनुष्य जाति के नैतिक एवं आध्यात्मिक मूल्यों का यह पतन देख कर मेरा हृदय विदीर्ण हो जाता है। अज्ञान और दारिद्र्य में गोते लगाने वाले करोड़ों भारतवासियों के रहते इन सत्ताधीशों और शहरवासियों को नींद कैसे आती है और अन्न कैसे पचता है?”

प्रभाकर शर्मा ने लिखा था कि उन्होंने बहुत कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया है, लेकिन इंदिरा गाँधी के दमनकारी कुकृत्यों की तुलना में ये शब्द बेहद ही सौम्य माने जाने चाहिए। उन्होंने ईश्वर की दृष्टि में सबको समान बताते हुए लिखा था कि वो कभी इन मदांध सत्ताधीशों को माफ़ नहीं करेगा। उन्होंने लिखा था कि भावी पीढ़ी आज के मदग्रस्त अफसरों, मंत्रियों, राष्ट्रपति और पिट्ठू न्यायाधीशों को सबसे बड़ा अपराधी मानेगी। उन्होंने आरोप लगाया था कि अपने निकृष्ट स्वार्थ की पूर्ति के लिए ये लोग चकाचौंध और भ्रामक विचारों द्वारा प्रजा को सम्मोहित कर उसका पतन सुनिश्चित कर रहे हैं।

आडवाणी और विनोबा भावे तक भी पहुँची खबर

प्रभाकर शर्मा के आत्मदाह की खबर लालकृष्ण आडवाणी को भी मिली थी। 13 नवंबर, 1976 को एक पत्र के जरिए उन्हें सर्वोदय कार्यकर्ता प्रभाकर शर्मा के आत्मदाह की खबर मिली थी। प्रभाकर शर्मा ही नहीं, ऐसे सैकड़ों गाँधीवादियों ने इस ‘दूसरे स्वाधीनता आंदोलन’ में हिस्सा लिया और सरकारी दमनचक्र का शिकार बने। सर्वोदय आंदोलन महात्मा गाँधी ने शुरू किया था, बाद में विनोबा भावे ने इसका नेतृत्व किया। प्रभाकर शर्मा, विनोबा भावे के सहयोगी थे लेकिन विनोबा भावे इस पर चुप रहे।

प्रभाकर शर्मा की उस वक्त उम्र 65 वर्ष थी। प्रभाकर शर्मा ने अपने पत्र में महात्मा गाँधी की पत्रिका ‘यंग इंडिया’ का उल्लेख करते हुए ये भी कहा था कि हम एक आज़ाद स्त्री-पुरुष की तरह नहीं जी सकते तो हमें मर जाना चाहिए। उन्होंने लिखा था कि इंदिरा गाँधी के शासनकाल में चिट्ठी लिखना भी अपराध है, इसीलिए सज़ा भुगतने की बजाए वो मरना पसंद करेंगे। उन्होंने लिखा था कि आपातकाल ने नौकरशाहों को शैतान और जनता को कायर बना दिया है।