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₹600 करोड़ के ड्रग्स के साथ धराए 14 पाकिस्तानी तस्कर, अधिकारियों को देख बरसाने लगे थे गोलियाँ: ATS ने एजेंसियों संग मिल कर बिछाया था जाल

गुजरात एंटी टेररिस्ट स्क्वॉयड (ATS) ने नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (ACB) और इंडियन कोस्ट गॉर्ड के साथ मिलकर अंतर्राष्ट्रीय समुद्री सीमा के पास से लगभग 86 किलोग्राम ड्रग्स के साथ 14 पाकिस्तानी नागरिकों को पकड़ा है। इस ड्रग्स की कीमत अंतर्राष्ट्रीय बाजार में लगभग 600 करोड़ रुपए है। दरअसल, इस खेप के बारे में पिछले कुछ दिनों से खुफिया इनपुट मिल रही थी।

इस ऑपरेशन को लेकर इंडियन कोस्ट गार्ड ने X पोस्ट में कहा, “गुजरात एटीएस और एनसीबी की ओर से समुद्र में रात भर किए गए ऑपरेशन में वेस्ट अरेबियन सी में पाकिस्तानी नाव को पकड़ा गया है। इसमें 14 पाकिस्तानी क्रू मेंबर सवार थे। उनके पास से 86 किलोग्राम ड्रग्स पकड़ा गया है, जिसकी कीमत लगभग 600 करोड़ रुपए है। पिछले महीने 80 किलोग्राम ड्रग्स पकड़ा गया था।”

ऑपरेशन के दौरान गिरफ्तारी से बचने की कोशिश में पाकिस्तानी नागरिकों ने एटीएस अधिकारियों पर अपनी नाव चढ़ाने की कोशिश की। इतना ही नहीं, उन्होंने अधिकारियों पर फायरिंग भी की। इसके बाद भारतीय एजेंसियों के जवानों ने जवाबी कार्रवाई की जवाब में गोलियाँ चलाईं। आखिरकार नाव को कब्जे में लेकर सभी संदिग्धों को पकड़ लिया गया।

दरअसल, खुफिया इनपुट के आधार पर भारतीय एजेंसियाँ पिछले दो दिनों से अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकट तलाशी अभियान चला रही थीं। अभी एक दिन पहले ही एनसीबी ने गुजरात और राजस्थान में ‘म्याऊं म्याऊं’ कहलाने वाली प्रतिबंधित दवा मेफेड्रोन का बनाने वाली तीन प्रयोगशालाओं का भंडाफोड़ कर सात लोगों को गिरफ्तार किया था। साथ ही लगभग 300 करोड़ रुपए के नशीले पदार्थ जब्त किए।

इससे पहले नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने गुजरात एटीएस के साथ मिलकर 12 मार्च 2024 को भी एक ऑपरेशन चलाया था। इस ऑपरेशन के दौरान एक पाकिस्तानी नाव को जब्त किया था। इस नाव पर 60 पैकेट ड्रग्स जब्त किए गया थे। वहीं, 6 पाकिस्तानियों को गिरफ्तार किया गया था। इनकी कीमत लगभग 450 करोड़ रुपए थी।

उससे भी पहले 26 फरवरी 2024 को एजेंसी ने अरब सागर में पोरबंदर तट से पाँच पाकिस्तानी नागरिकों को चरस सहित 3,300 किलोग्राम नशीले पदार्थों के साथ पकड़ा था। इस अभियान में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी), भारतीय नौसेना और गुजरात आतंकवाद निरोधी दस्ते ने हिंद महासागर में तट से लगभग 60 समुद्री मील दूर अंजाम दिया था।

IIT से इंजीनियरिंग, स्विटरजरलैंड से MBA, ‘जागृति’ से युवाओं को बना रहे उद्यमी… BJP ने देवरिया में यूँ ही नहीं शशांक मणि त्रिपाठी को दिया टिकट, दशकों से जमीन पर कर रहे काम

भाजपा ने देवरिया से इस बार शशांक मणि त्रिपाठी को टिकट दिया है। देवरिया लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व 2014 में कलराज मिश्रा भी कर चुके हैं, जो फ़िलहाल राजस्थान के राज्यपाल हैं। इसके बाद 2019 में भाजपा के ही रामपति राम त्रिपाठी सांसद बने। 2014 में 2.65 लाख तो 2019 में 2.49 लाख वोटों से भाजपा विजयी हुई। इस बार भी बड़ी जीत की उम्मीद जताई जा रही है। लेकिन, जिन्हें लग रहा कि शशांक मणि त्रिपाठी को टिकट दिया जाना चौंकाने वाला फैसला है, उन्हें उनके बारे में पहले जानना चाहिए।

शशांक मणि त्रिपाठी के पिता प्रकाश मणि त्रिपाठी भले ही 1996 और 1999 में 2 बार देवरिया से भाजपा सांसद बने हों, लेकिन उनके बेटे ने अपने दम पर न सिर्फ एक अभियान खड़ा किया बल्कि खुद को पूर्वांचल में बदलाव के लिए समर्पित सा कर दिया। प्रकाश मणि त्रिपाठी भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट जनरल रहे हैं, 1971 का भारत-पाकिस्तान युद्ध लड़ा है और मिजोरम में 1976 में उग्रवाद विरोधी अभियान का भी हिस्सा रहे। उन्हें परम विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया जा चुका है, वो भारतीय सेना ने ‘डिप्टी चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ’ रहे हैं।

शशांक मणि त्रिपाठी को करीब से जानने वाले लोग बताते हैं कि उनमें भी उनकी पिता की छाया दिखती है, खासकर अनुशासन के मामले में उन पर अपने फौजी पिता का खासा प्रभाव है। वो अपने काम के प्रचार-प्रसार में यकीन नहीं रखते। युवा कार्यकर्ताओं की जिद पर सोशल मीडिया पर उनकी सक्रियता भले ही चुनाव के दौरान बढ़ी हो, लेकिन उससे पहले वो सिर्फ जमीन पर काम करने में व्यस्त थे। लेकिन, भारतीय जनता पार्टी ने उनके काम को पहचाना और देवरिया से उन्हें टिकट दिया।

2009 के लोकसभा चुनाव में प्रकाश मणि त्रिपाठी बसपा उम्मीदवार गोरख प्रसाद जायसवाल से हार गए थे, ऐसे में शशांक मणि त्रिपाठी को इस हार का दाग मिटाने का भी मौका पार्टी ने दिया है। 89 वर्ष की उम्र में भी उनके पिता कार्यकर्ताओं से मिल रहे हैं, उनमें जोश भर रहे हैं। शशांक मणि त्रिपाठी की बात करें तो उन्हें ‘जागृति यात्रा’ के लिए जाना जाता है, जिसके तहत युवाओं को उद्यमशीलता से परिचित कराया जाता है, उन्हें भ्रमण करा कर उद्यमी बनने के लिए प्रेरित किया जाता है, उनका सहयोग किया जाता है।

उन्होंने देवरिया में करोड़ों रुपए की लागत से ‘जाग्रति इंटरप्राइज सेंटर’ का निर्माण कराया है, ताकि पूर्वांचल के छोटे शहरों और गाँवों के युवाओं को आगे बढ़ने का मौका दिया जा सके। 300 वर्ष पुराने बरगद के वृक्ष के बगल में 6 एकड़ का ये परिसर बरपार गाँव में स्थित है। इसका उद्देश्य है – उद्यम और नवोन्मेष को बढ़ावा देना। डिजिटल लाइब्रेरी, कृषि और स्वास्थ्य को डिजिटल दुनिया से जोड़ना और पूर्वांचल में विकास के लिए नई खोजों के लिए प्रयास करना इसका उद्देश्य है, जो युवाओं को प्रशिक्षित कर के हासिल होगा।

इसके तहत ‘हर घर उद्यमी’ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, ताकि गाँवों और छोटे शहरों के युवा उद्यम को लेकर आकर्षित हों। 3 महीने में ही 300 गाँवों और 4500 स्थानीय लोगों से संपर्क साधा गया। पहले राउंड में 30 आइडियाज को चुना गया, जिनमें से 10 पर शोध हुआ और अंततः 3 विजेता घोषित हुए। उन्हें एक-एक लाख रुपए का इनाम दिया गया। ऐसा नहीं है कि चुनाव से पहले शशांक मणि त्रिपाठी ये सब करने लगे, उन्होंने ‘जागृति यात्रा’ वर्षों पहले शुरू की थी।

शशांक मणि त्रिपाठी ने IIT दिल्ली से इंजीनियरिंग की है। स्विट्जरलैंड के लॉज़ेन स्थित IMD से उन्होंने मैनेजमेंट की पढ़ाई पूरी की। 1997 में उन्होंने भारत की स्वतंत्रता के 50 वर्ष पूरे होने पर ‘आज़ाद भारत रेल यात्रा’ निकाली थी। 2008 में ‘जागृति’ अभियान का शुभारंभ हुआ। 15 वर्षों में उन्होंने पूरे भारत में 7000 उद्यमी नेतृत्वकर्ताओं को तैयार कर के देश-समाज के उत्थान में अपना योगदान दिया। अमेरिका से लेकर फ़्रांस तक में इस मॉडल को दोहराया गया।

हमने इस मामले में RC कुशवाहा से बात की, जिन्होंने बताया कि एक माध्यम से उन्होंने शशांक मणि त्रिपाठी से मुलाकात की थी। वो ‘नई रोशनी एंटरप्राइजेज’ के संस्थापक हैं। उन्होंने बताया कि शशांक मणि त्रिपाठी जैसे लोग उद्यमियों की जिस तरह से मदद करते हैं, अगर उनके जैसे और लोग हो जाएँ तो ये धरती बदल जाएगी। उनकी कंपनी महिलाओं के लिए सैनिटरी नैपकिंस बनाती है। उन्होंने बताया कि इस कारोबार की स्थापना और इसे आगे बढ़ाने में उन्हें शशांक मणि त्रिपाठी की खासी मदद मिली है। ये कंपनी सलेमपुर में स्थित है।

इसी तरह शिव तिवारी ‘ग्रोसरी बाबा’ चलाते हैं। उनकी कंपनी ‘शिव फूड्स एन्ड डेयरी कॉर्पोरेशन’ की स्थापना और इसे आगे बढ़ाने में भी शशांक मणि त्रिपाठी और उनकी ‘जागृति’ अभियान का योगदान है। इसी तरह सचिन वर्मा ‘संतोष मसाला’ नामक कंपनी चलाते हैं। वो भी अपने कारोबार का श्रेय शशांक मणि त्रिपाठी को ही देते हैं। देवरिया और उसके आसपास के इलाकों में ऐसे कई उद्यमी हैं। कई युवाओं को उम्मीद है कि शशांक मणि त्रिपाठी के सांसद बनने के बाद इस अभियान में और तेज़ी आएगी।

शशांक मणि त्रिपाठी बताते हैं कि वो देवरिया-कुशीनगर के 400 गाँवों का बारीकी से भ्रमण कर चुके हैं। उनका कहना है कि ग्रामीण युवाओं में असीम प्रतिभा है, लेकिन हनुमत शक्ति की तरह उस ऊर्जा को जगाना है। रोजगार को वो सबसे बड़ी समस्या बताते हुए इसके समाधान की बात करते हैं। उन्होंने भोजपुरी-हिंदी कॉल सेंटर की भी स्थापना की हुई है, जिसमें सवा 200 लोग काम करते हैं। उन्होंने ‘मिडिल ऑफ डायमंड इंडिया’ और ‘भारत: उद्यमिता एवं भागीदार में राष्ट्र निर्माण’ नामक पुस्तकें भी लिख रखी हैं।

कन्हैया कुमार के नामांकन में उनकी ही पार्टी के स्थानीय नेताओं का हंगामा, अरविंदर लवली के बाद अब संदीप दीक्षित ने दिखाए तेवर: दिल्ली कॉन्ग्रेस में भगदड़

आम आदमी पार्टी और कॉन्ग्रेस में गठबंधन पुराने कॉन्ग्रेसियों को रास नहीं आ रही है। दिल्ली प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, तो संदीप दीक्षित ने भी पार्टी को तीखे तेवर दिखाए हैं। वहीं, कॉन्ग्रेस प्रत्याशी कन्हैया कुमार की उम्मीदवारी के खिलाफ कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने हंगामा खड़ा कर दिया। कार्यकर्ताओं का कहना है कि लोकल नेता को उम्मीदवार बनाने की जरूरत है, किसी बाहरी को कैंडिडेट नहीं बनाया जाना चाहिए।

कन्हैया का जोरदार विरोध

कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता कन्हैया कुमार के खिलाफ फिर खड़े हो गए हैं। दिल्ली कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में पार्टी के दफ्तर के बाहर प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं का कहना है कि उत्तर पूर्वी दिल्ली से किसी लोकल को ही कैंडिडेट बनाना चाहिए न कि किसी बाहरी को मौका देना चाहिए। ऐसा रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि अरविंदर सिंह लवली के इस्तीफे के पीछे की वजह आप के साथ गठबंधन के अलावा कन्हैया कुमार भी एक फैक्टर हैं।

बता दें कि कॉन्ग्रेस इस बार आम आदमी पार्टी के साथ लोकसभा चुनाव लड़ रही है। दिल्ली में उसे तीन सीट मिली हैं। इसमें से एक सीट उत्तर पूर्वी दिल्ली की है, जहाँ से कन्हैया कुमार को टिकट मिला है, लेकिन कन्हैया की उम्मीदवारी का कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता जबरदस्त प्रदर्शन कर रहे हैं। इस बीच कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने मौजपुर मेट्रो स्टेशन के बाहर प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि हमें बाहरी पसंद नहीं है। उन्हें इस सीट से कोई लोकल कैंडिडेट चाहिए।

इस बीच, अरविंदर सिंह लवली के इस्तीफे के बाद कॉन्ग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने कहा कि मेरा मानना ​​है कि उन्होंने जो कुछ भी लिखा है और पत्र के जरिए अपना दर्द व्यक्त किया है, पार्टी को उस पर विचार करना चाहिए। वह पार्टी के लिए एक संपत्ति हैं, हमारे सीनियर नेतृत्व को इस मामले को गंभीरता से लेना चाहिए। हमें उन चीजों से बचना चाहिए, जो पार्टी ने राज्य में जो कुछ भी हासिल किया है, उसमें बाधा डाल सकती है। अरविंदर सिंह लवली काफी पीड़ा में है, आलाकमान को इस मामले को गंभीरता से लेना चाहिए।

इस बीच, खबर आ रही है कि मल्लिकार्जुन खड़गे ने लवली को मनाने की कोशिशें शुरू कर दी हैं। कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कॉन्ग्रेस महासचिव संगठन केसी वेणुगोपाल को अरविंदर सिंह लवली से बात करने और दिल्ली कॉन्ग्रेस संकट को हल करने का रास्ता खोजने का निर्देश दिया है।

बता दें कि उत्तर पूर्वी दिल्ली से कॉन्ग्रेस उम्मीदवार कन्हैया कुमार को लेकर दिल्ली कॉन्ग्रेस की बैठक में पूर्व सांसद संदीप दीक्षित में जमकर विरोध किया था। इसके बाद उत्तरी पश्चिमी दिल्ली से कॉन्ग्रेस उम्मीदवार उदित राज को लेकर भी पार्टी के अंदर विरोध देखा गया था। पिछले दिनों दिल्ली कॉन्ग्रेस के प्रभारी दीपक बावरिया ने अपने आवास साउथ एवेन्यू पर पूर्व विधायकों और मंत्रियों की बैठक बुलाई थी, जिसमें दिल्ली कॉन्ग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली भी मौजूद थे। उनकी मौजूदगी में पार्टी के कई नेताओं ने उदित राज का विरोध किया था और दिल्ली कॉन्ग्रेस प्रभारी दीपक बावरिया को भी खरी-खोटी सुनाई।

‘दाढ़ी-टोपी की वजह से मुझे मंच पर नहीं बैठने देते’: मौलाना बदरुद्दीन अजमल का राहुल गाँधी पर निशाना, कहा – खत्म हो गई है कॉन्ग्रेस

एक वक्त था, जब भाजपा ने देश में ‘कॉन्ग्रेस मुक्त भारत’ नारा दिया था। जनता ने 44 सीटें देकर भारत को लगभग कॉन्ग्रेस मुक्त कर भी दिया। हालाँकि, यह बात विपक्षी दलों को नहीं समझ में आ रही है। अब उत्तर पूर्व राज्यों के मुस्लिमों में अपना प्रभाव रखने वाले सांसद बदरुद्दीन अजमल ने कहा है कि कॉन्ग्रेस खत्म हो चुकी है, लेकिन राहुल गाँधी को पता नहीं चल रहा है। वे अभी भी यात्रा निकाल रहे हैं।

दैनिक भास्कर को दिए अपने विशेष साक्षात्कार में बदरुद्दीन अजमल ने कहा कि NDIA ब्लॉक असम में भी है, लेकिन राहुल गाँधी या कॉन्ग्रेस ने उन्हें साथ नहीं लिया। इसके बावजूद वह 14 में सिर्फ उन्हीं तीन सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं, जहाँ कॉन्ग्रेस नहीं है। अजमल ने कहा कि उनका लक्ष्य भाजपा को केंद्र और राज्य की सत्ता से हटाना है।

अजमल ने कहा कि अफसोस की बात है कि सोनिया गाँधी पावर में नहीं हैं और राहुल गाँधी को RSS के लोगों ने घेर रखा है। गुलाम नबी आजाद जैसे सेक्युलर लोग थे। उन्हें पार्टी में रहने नहीं दिया। सलमान खुर्शीद को उन्होंने टिकट नहीं दिया। उन्होंने कहा, “उन्हें लोगों की पहचान करनी चाहिए। भले वे सत्ता में नहीं हैं, लेकिन आज भी लोग उनके पास सलाह लेने आते हैं। उन्हें खुद पता करना होगा।” 

AIUDF के प्रमुख और असम के धुबरी से चौथी बार लोकसभा का चुनाव लड़ रहे अजमल ने कॉन्ग्रेस के भविष्य पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा, “स्थिति ये है कि कॉन्ग्रेस बिल्कुल खत्म हो गई है। राहुल जी अब तक पदयात्रा और न्याय यात्रा कर रहे हैं। इधर, मैदान लुट रहा है और वे लोगों को यात्रा में ट्रेनिंग दे रहे हैं।”

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा को लेकर अजमल ने कहा कि अगर कॉन्ग्रेस उन्हें CM बना देती तो आज असम में भाजपा नहीं होती। असम में भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को अगर किसी ने बैठाया है, तो वो राहुल गाँधी ही हैं। उन्होंने कहा कि सरमा के पास पार्टी चलाने का लंबा अनुभव था और तरुण गोगोई के समय में वे करीब हर मंत्रालय का जिम्मा संभाल चुके थे।

अजमल ने कहा, “भारत के मुसलमान से ज्यादा उत्पीड़ित फिलहाल कोई नहीं है। भारतीय मुसलमान के पास न कोई लीडरशिप है और न ही उनके साथ कोई खड़ा होने वाला है। मैं 15 साल UPA में था। अभी INDIA ब्लॉक देश में बड़ी-बड़ी बात करता है, लेकिन इसने मुझे स्टेज पर नहीं बैठने दिया। उन्होंने कहा कि अगर हमने दाढ़ी-टोपी वाले को स्टेज पर बैठाया तो हिंदू भाइयों में गलत मैसेज जाएगा।”

सुंदर राज्य, अविश्वसनीय काम… CM योगी आदित्यनाथ के मुरीद हुए पूर्व इंग्लिश क्रिकेटर केविन पीटरसन, लखनऊ एयरपोर्ट की ख़बसूरती में खोए

दक्षिण अफ्रीकी मूल के विस्फोटक इंग्लिश क्रिकेटर रहे केविन पीटरसन पूरी दुनिया घूम चुके हैं। दुनिया के सबसे व्यस्त एयरपोर्ट से लेकर दुनिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट पर वो जा चुके हैं, लेकिन इन दिनों वो लखनऊ एयरपोर्ट को देखकर भौचक नजर आ रहे हैं। आईपीएल 2024 के लिए लखनऊ पहुँचे केविन पीटरसन लखनऊ एयरपोर्ट के नए टर्मिनल को देखकर अचंभित रह गए। पीटरसन ने कहा कि इतना खूबसूरत एयरपोर्ट टर्मिनल उन्होंने आजतक नहीं देखा। यही नहीं, उन्होंने तो बाकायदा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक को टैग करके लखनऊ एयरपोर्ट की तारीफ की।

अपने जमाने के धाकड़ बल्लेबाज केविन पीटरसन ने लखनऊ एयरपोर्ट के नए टर्मिनल की खूबसूरती और सुविधाओं से प्रभावित होकर एक्स पर लिखा, “लखनऊ के नए एयरपोर्ट टर्मिनल में ‘स्ट्रीट ऑफ फ्लावर्स’ वाकई में वर्ल्ड क्लास है! इस खूबसूरत राज्य के लिए सभी ने मिलकर क्या कमाल का काम किया है। मुझे यकीन है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को इस पर बहुत गर्व होगा! भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है!”

पीटरसन के पोस्ट से यह साफ ज़ाहिर होता है कि वो उत्तर प्रदेश के विकास और खूबसूरती से काफी प्रभावित हैं। बता दें कि आईपीएल की फ्रेंचायजी लखनऊ सुपर जायंट्स का होम ग्राउंड लखनऊ में ही है। एयरपोर्ट से स्टेडियम की दूरी महज कुछ किलोमीटर की है। ऐसे में सभी खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ का लखनऊ नियमित आना जाना होता है। लखनऊ एयरपोर्ट के पुराने दोनों टर्मिनल की क्षमता कम थी, जिसकी वजह से यूपी सरकार ने लखनऊ एयरपोर्ट का विस्तार कराया। एयरपोर्ट का नया टर्मिनल खूबसूरत तो है ही, ज्यादा क्षमता वाला भी है।

लखनऊ एयरपोर्ट का तीसरा टर्मिनल मार्च महीने से ही शुरु हुआ है, जिसकी सालाना क्षमता 80 लाख यात्रियों की है। अब आईपीएल के मैचों के दौरान लखनऊ एयरपोर्ट पर काफी चहल-पहल रहती है। बता दें कि उत्तर प्रदेश में 5 इंटरनेशनल एयरपोर्ट मौजूदा समय में वर्किंग हैं और तेजी से अन्य हवाई अड्डों का विस्तार भी भारत सरकार कर रही है।

‘अडानी के पोर्ट से अरब भेजे जा रहे हैं सैकड़ों गोवंश, वहाँ उन्हें काटा जाएगा’: सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल, जानिए क्या है सच्चाई

लोकसभा चुनावों के दौरान तमाम चेतावनियों के बावजूद कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा फर्जी खबरें फैला कर नकारात्मक माहौल बनाने की कोशिशें जारी हैं। इन खबरों को फैलाने के लिए सोशल मीडिया को हथियार बनाया गया है। कई बार तो इन्ही भ्रामक खबरों को कुछ दल अपनी विरोधी पार्टी के खिलाफ प्रचार का साधन बना लेते हैं। उन्हीं तमाम आधारहीन खबरों में से इस समय गुजरात से वायरल हो रही है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर के दावा किया जा रहा है कि गुजरात के अडानी पोर्ट पर हजारों गायों से भरे ट्रक देखे गए हैं जिन्हें अरब देशों में सप्लाई किया जाएगा।

वायरल वीडियो के साथ शेयर किए जा रहे कैप्शन में आगे बढ़ कर यह भी दावा किया जा रहा है कि भाजपा सरकार बीफ के व्यापारियों से चंदा ले रही है। इस वीडियो को कल्याण सहाय मीणा नाम के एक ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) यूजर ने शेयर किया है। उन्होंने लिखा, “गुजरात अडानी के पोर्ट पर हजारों गाय ट्रको में खड़ी है। अरब के देशों में जाने के लिए। जिन्हे वहाँ काटा जाएगा। कहा मर गए भक्तों ? गधों को याद दिला दूँ कि गौमांस का धंधा करने वालो से ही भाजपा ने चंदा लिया है। सब पैसे का खेल है।”

इस वीडियो में किसी जगह पर एक कतार में कई ट्रकें खड़ी दिख रहीं हैं। इन ट्रकों के अंदर गोवंश खड़े दिख रहे हैं। वीडियो को काफी ऊपर से ज़ूम कर के बनाया गया है। इस वीडियो को शेयर करने से अंसारी फैमिली भी नहीं चूका। अंसारी फैमिली ने भी ‘X’ हैंडल से कल्याण सहाय मीणा का है कैप्शन कॉपी कर के पेस्ट कर दिया। अंसारी फैमिली ने अपने कैप्शन में हँसी की इमोजी भी डाली है और इसे हैशटैग लगा कर ब्रेकिंग न्यूज़ घोषित कर दिया है।

इन दोनों के अलावा तमाम अन्य यूजर्स भी इस वीडियो को शेयर करने में शिद्दत से जुटे हुए हैं। उन सभी का कैप्शन लगभग एक जैसा ही है। इन तमाम लोगों के कैप्शन में गाय, अडानी और भाजपा कॉमन शब्द हैं। देव ठाकुर नंदवंशी जैसे कुछ हैंडलों ने इसे सवाल के तौर पर शेयर किया है। ऑपइंडिया ने इस वीडियो की पड़ताल की।

जानिए क्या है सच्चाई

जब ऑपइंडिया ने इस वीडियो को खँगाला की तो सच्चाई कुछ और ही निकल कर सामने आई। हमने जब इसकी पड़ताल की तो हमें फेसबुक पर एक रील मिली। इस वीडियो के नीचे अडानी पोर्ट और अरबी भाषा में एक कैप्शन लिखा हुआ था। कैप्शन का हिंदी में अर्थ ‘बीफ बाजार’ है। यही रील हर तरफ वायरल की जा रही है।

जब हमने इस वीडियो की और पड़ताल की तो पाया कि दिख रहा बंदरगाह गुजरात तो दूर भारत का ही नहीं है। यह बंदरगाह इराक में मौजूद है जिसका नाम उम्म कसर पोर्ट है। यह इराक के उम्म कसर शहर में मौजूद है। इसे इराक का दूसरा सबसे बड़ा बंदरगाह कहा जाता है। जब हमने गूगल से इस बंदरगाह के बारे में और जानकारी जुटाई तो पाया कि इराक को यहाँ से 80% सामान सप्लाई किया जाता है। इसी दौरान यह जानकारी भी निकल कर आई कि इसी बंदरगाह से कई गाय, भैंसें और अन्य जानवर ब्राज़ील भेजे जाते हैं।

इराक का अल-कसर पोर्ट

हमने अपनी और पड़ताल के दौरान गूगल पर उम्म कसर पोर्ट की तस्वीरें खोजीं। यहाँ दिखीं तस्वीरें वायरल वीडियो में दिख रहे दृश्यों से काफी मेल खाती हैं। इसी के साथ हमने गुजरात स्थित उन 2 बंदरगाहों की पड़ताल की जो अडानी ग्रुप द्वारा संचालित हैं। हजीरा और मुंद्रा पोर्ट नाम के इन दोनों बंदरगाहों के चित्र वीडियो में दिख रहे पोर्ट से काफी अलग हैं।

अडानी समूह द्वारा संचालित दोनों पोर्ट

अंत में हम इस निष्कर्ष पर पहुँचते हैं कि वायरल वीडियो में दिख रहे बंदरगाह का भारत से कोई संबंध नहीं है।

‘नवाबों-सुल्तानों के खिलाफ बोलने की हिम्मत नहीं, राजा-महाराजाओं का अपमान करते हैं कॉन्ग्रेस के शहजादे’: राहुल गाँधी को PM मोदी का जवाब, याद दिलाया किसने मंदिरों को तोड़ा

देश के राजा-महाराजाओं पर विवादास्पद टिप्पणी को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी पर हमला बोला है। पीएम मोदी ने राहुल गाँधी का नाम लिए बिना कहा कि कॉन्ग्रेस के शहजादे देश के राजा-महाराजाओं का अपमान करते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केरल के वायनाड सीट से जीतने के लिए कॉन्ग्रेस ने प्रतिबंधित इस्लामी संगठन PFI की मदद ली।

कर्नाटक के बेलगाम (बेलगावी) में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, “कॉन्ग्रेस के शहजादे को हमारे राजा-महाराजाओं के योगदान याद नहीं आते। ये वोट बैंक की राजनीति के लिए राजा-महाराजाओं के खिलाफ बोलने की हिम्मत करते हैं और नवाबों, बादशाहों और सुल्तानों के खिलाफ एक शब्द बोलने की ताकत नहीं है।”

आक्रमणकारी मुगलों की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “कॉन्ग्रेस को औरंगजेब के अत्याचार याद नहीं आते, जिसने हमारे सैकड़ों मंदिरों को तोड़ा, अपवित्र किया। कॉन्ग्रेस औरंगजेब की गुणगान करने वाली पार्टियों के साथ खुशी से गठबंधन करती है। ये भूल गए, जिन्होंने हमारे तीर्थों को तहस-नहस किया, लूटपाट किया, गौ हत्याएँ कीं।”

दरअसल, राहुल गाँधी ने लोकसभा चुनावों के प्रचार के दौरान देश के राजा-महाराजाओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था, राजाओं-महाराजाओं का राज था। जो भी वो चाहते थे, कर देते थे। किसी की जमीन चाहिए होती थी, उसे उठाकर ले जाते थे।” इसका वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। अब उनके इस बयान पर पीएम मोदी ने हमला बोला है।

रामेश्वर ब्लास्ट की चर्चा करते हुए पीएम ने कहा, “जब बेंगलुरु के कैफे में बम धमाका हुआ, तभी कॉन्ग्रेस ने गंभीरता से नहीं लिया। यही नहीं, कॉन्ग्रेस ने वोट के लिए पीएफआई… जो आतंकवाद को पनाह देने वाला देश विरोधी संगठन है, जिस पर मोदी सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया है। कॉन्ग्रेस सिर्फ एक सीट वायनाड जीतने के लिए ऐसे पीएफआई आतंकी संगठन का बचाव करने में लगी है।”

पीएम मोदी ने कहा कि कॉन्ग्रेस की सरकार तुष्टिकरण को प्राथमिकता देती है। उनके लिए नेहा जैसी बेटियों की जिंदगी की कोई कीमत नहीं है। उनको सिर्फ अपनी वोटबैंक की चिंता है। बता दें कि कर्नाटक के कॉन्ग्रेस पार्षद निरंजन हिरेमथ की बेटी नेहा की सरेआम हत्या फयाज ने कर दी थी। तब हिरेमथ से इसे लव जिहाद बताया था, लेकिन कॉन्ग्रेस ने इसे लव स्टोरी कहा था।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत जब आगे बढ़ता है… भारत जब मजबूत होता है तो हर भारतीय खुश होता है, लेकिन कॉन्ग्रेस देशहित से इतना दूर हो चुकी है… परिवार हित में इतना उलझ गई है कि उसे देशहित की उपलब्धियाँ अच्छी नहीं लगती है। उन्होंने कहा कि EVM पर सवाल उठाकर कॉन्ग्रेस ने लोकतंत्र पर सवाल उठाया है।

देवर ज़ुबैर ने बनाया हवस का शिकार, फिर शौहर साबिर बोलने लगा ‘भाभी’: रमजान में महिला की हत्या की कोशिश, वीडियो भी आया सामने

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में एक मुस्लिम महिला के साथ घिनौनी वारदात के बाद उसे जान से मारने की कोशिश का मामला सामने आया है। आरोपित कोई और नहीं, बल्कि मुस्लिम महिला का शौहर और उसका देवर ही है। इस वारदात को इस्लामी दुनिया में पाक कहे जाने वाले महीने रमजान में अंजाम दिया गया। महिला की हत्या की कोशिश का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ बताया जा रहा है।

आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, ये मामला मुजफ्फरनगर जिले के बुढ़ाना पुलिस स्टेशन इलाके का है। जहाँ आरोपित देवर जुबैर खान (बदला हुआ नाम) ने रमजान के महीने में 2 अप्रैल को अपनी भाभी को अकेला देखकर उसे अपनी हवस का शिकार बना डाला। उस समय महिला का शौहर घर पर नहीं था। महिला ने अपने शौहर साबिर खान (बदला हुआ नाम) से अगले दिन देवर जुबैर की करतूत बताई, तो शौहर साबिर ने उसे अपनी बीवी मानने से ही इनकार कर दिया।

शौहर साबिर का कहना था कि अब वो जुबैर की बीवी हो चुकी है, क्योंकि जुबैर ने उसके साथ संबंध बनाए हैं। पीड़ित महिला ने जब इस बात का विरोध किया, तो दोनों भाईयों ने उसे जान से मारने की कोशिश की। बताया जा रहा है कि शौहर साबिर ने महिला का गला दबाकर उसकी जान लेने की कोशिश की, और इस दौरान देवर जुबैर खान वीडियो बनाता रहा। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी वायरल हो रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़िता ने बताया है कि रमजान के दौरान 2 अप्रैल को उसके देवर ने रेप किया। उस समय शौहर बाहर गया हुआ था। महिला ने कहा कि जब उसने इस वारदात के बारे में अपने शौहर से बताया तो उसने साफ कह दिया कि वो अब उसकी बीवी नहीं है, बल्कि भाभी बन गई है। यही नहीं, दोनों अगले ही दिन यानी 3 अप्रैल 2024 को उसके कमरे में आए और गले में चुन्नी डालकर उसे मारने की कोशिश की। इस दौरान देवर ने वीडियो बनाया।

बताया जा रहा है कि महिला ने खुद ही अपनी हत्या की कोशिश का वीडियो और शिकायती पत्र सोशल मीडिया पर वायरल किया था। महिला मुजफ्फरनगर के खातौली थाना इलाके की रहने वाली है। उसने खातौली थाने में ही पुलिस को अपनी शिकायत देकर पूरे घटनाक्रम के बारे में बताया है। खातौली थाना के इंस्पेक्टर उमेश कुमार रोरिया ने घटना की पुष्टि की है और कहा कि पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

5-स्टार होटल मेरियट पर इस्लामी कब्जा करना चाहता था वक्फ बोर्ड, 60 साल तक कोर्ट-कचहरी के बाद हाईकोर्ट से मिला ‘घंटा’

अपने ऊल-जुलूल फरमानों के लिए कुख्यात वक्फ बोर्ड का नया कारनामा सामने आया है। वक्फ बोर्ड ने हैदराबाद के एक नामी 5 स्टार होटल को ही अपनी जागीर घोषित कर दिया। होटल का नाम मैरियट है जिसे कभी वायसराय नाम से भी जाना जाता था। इस पर कब्ज़े के लिए बोर्ड ने होटल से बाकायदा लम्बी कानूनी लड़ाई भी लड़ी। आखिरकार तेलंगाना में वक्फ बोर्ड के तमाम मंसूबे धरे के धरे ही रह गए। हाईकोर्ट ने होटल को न सिर्फ बड़ी राहत दी है बल्कि वक्फ बोर्ड को मिसकंडक्ट (प्रतिकूल प्रविष्टि) भी थमा दी है।

लॉ बीट के मुताबिक इस मामले की सुनवाई तेलंगाना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश आलोक अराधे और न्यायमूर्ति अनिल कुमार जुकांति की बेंच में हुई। सुनवाई इस मुद्दे पर थी कि होटल मेरियट आखिर है किस का?

साल 1964 में अब्दुल गफूर नाम के एक व्यक्ति ने तब वायसराय नाम से चर्चित इस होटल पर अपना हक जताते हुए मुकदमा कर दिया था। मुकदमे में वक्फ अधिनियम 1954 का हवाला दिया गया था, जिसकी वजह से होटल मेरियट की सम्पत्ति विवादित घोषित हो गई थी।

लगभग 50 वर्षों तक वक्फ बोर्ड ने यह मामला कानूनी पेचीदगियों में उलझाए रखा। साल 2014 में एक बार फिर से तेलंगाना राज्य वक्फ बोर्ड होटल मेरियट के खिलाफ सक्रिय हुआ। उसने एक अख़बार में नोटिस के माध्यम से होटल मेरियट को कानूनी कार्रवाई की धमकी दी।

वक्फ बोर्ड की कानूनी कार्रवाई की धमकी पर होटल मेरियट के संचालकों ने भी अदालत में जवाब दाखिल किया। इस जवाब में वक्फ पर पुराने अदालती आदेशों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया था। आखिरकार यह मामला हाईकोर्ट तक पहुँच गया।

हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। आखिरकार अंतिम फैसला होटल मैरियट के पक्ष में आया। अदालत ने वक्फ बोर्ड की याचिका को शुरुआत से ही गैरकानूनी माना। होटल के खिलाफ वक्फ बोर्ड की अधिसूचना को ख़ारिज करते हुए अदालत ने फैसला सुनाया। साथ ही वक्फ बोर्ड को मिसकंडक्ट जारी करते हुए भविष्य में सभी बेदखली के कामों को रोकने का आदेश दिया।

‘मुस्लिम हूँ इसीलिए नहीं करता था नमस्ते, आदाब की थी आदत’: आमिर खान ने हिन्दू अभिवादन परंपरा को बताया ‘अद्भुत भावना’, बोले – शूटिंग के दौरान पता चला इसका महत्व

बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान ने बताया है कि पंजाब में ‘रंग दे बसंती’ (2006) और ‘दंगल’ (2016) की शूटिंग के दौरान उन्हें ‘नमस्ते’ का महत्व पता चला। Netflix पर ‘द ग्रेट इंडियन कपिल शो’ में आए आमिर खान ने कहा कि ‘दंगल’ की शूटिंग के दौरान उन्होंने पंजाब के ग्रामीणों को काफी विनम्र पाया। इसी ढाई महीने के दौरान उन्हें ‘नमस्ते’ का महत्व पता चला। उन्होंने कहा कि ये एक अद्भुत भावना है। बता दें कि भारत में हाथ जोड़ कर ‘नमस्ते’ बोल कर एक-दूसरे के अभिवादन की परंपरा रही है।

‘नमस्ते’ शब्द संस्कृत ग्रंथों में भी मिलता है, ये एक प्राचीन शब्द है। आमिर खान ने कहा कि ये कहानी उनके दिल के बिलकुल करीब है। उन्होंने बताया कि ‘रंग दे बसंती’ की शूटिंग के दौरान उन्हें पंजाब में रहना काफी अच्छा लगता था, वहाँ के लोग और वहाँ की संस्कृति सब में प्यार भरा हुआ है। वहीं ‘दंगल’ की शूटिंग के दौरान उन्हें एक छोटे से गाँव में एक घर में शूटिंग करनी पड़ती थी। बता दें कि ‘दंगल’ पहलवान महावीर सिंह फोगाट के जीवन पर आधारित है, जिन्होंने अपनी चारों बेटियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का रेसलर बनाया।

आमिर खान ने बताया, “आप यकीन नहीं करोगे, लेकिन जब मैं सुबह के 5 या 6 बजे वहाँ पहुँचता था, जैसे ही मेरी कार गुजरती थी तो लोग अपने-अपने घरों के बाहर हाथ जोड़ कर मेरा स्वागत करने के लिए खड़े हो जाते थे। वो ‘सत श्री अकाल’ कहते थे। वो मेरा स्वागत करने के लिए इंतज़ार करते रहते थे। उन्होंने कभी मुझे परेशान नहीं किया, न ही मेरे कार को कभी रोकने की कोशिश की। पैकअप के बाद जब मैं वापस लौटता था तो वो फिर से अपने घरों के बाहर मुझे ‘गुड नाइट’ विश करने के लिए खड़े रहते थे।”

आमिर खान का ये भी कहना है कि मुस्लिम होने के कारण उन्हें ‘नमस्ते’ के लिए हाथ जोड़ने की आदत नहीं थी। उन्होंने कहा कि वो एक मुस्लिम परिवार से ताल्लुक रखते हैं, ऐसे में उन्हें ‘आदाब’ वाले और सिर झुकाने वाले अभिवादन की आदत थी। बता दें कि ‘आदाब’ करने के लिए मुस्लिम हाथ को सिर तक ले जाते हैं। लेकिन, पंजाब में रहने के बाद आमिर खान को ‘नमस्ते’ का महत्व पता चला। ये पहली बार है जब आमिर खान कॉमेडियन कपिल शर्मा के शो में पहुँचे।