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दिल्ली कॉन्ग्रेस अध्यक्ष ने अपने पद से दिया इस्तीफा: AAP से गठबंधन और कन्हैया कुमार को टिकट देने पर जताई नाराजगी, बोले- प्रभारी करते हैं मनमानी

लोकसभा चुनाव 2024 की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन कॉन्ग्रेस पार्टी की मुश्किलें कम होने के बजाय लगातार बढ़ती जा रही है। अब दिल्ली कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने टिकट बँटवारों में अनदेखी और दिल्ली की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी से गठबंधन का आरोप लगाया है।

लवली ने रविवार (28 अप्रैल 2024) को चार पेज का अपना त्याग पत्र कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भेज दिया। अरविंदर सिंह लवली को अगस्त 2023 में इस पद पर नियुक्त किया गया था। उन्होंने कहा कि दिल्ली प्रदेश का अध्यक्ष बनाए जाने के बाद उन्होंने कॉन्ग्रेस को राजधानी में स्थापित करने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रयास किए।

लवली ने कॉन्ग्रेस के दिल्ली प्रभारी दीपक बाबरिया पर भी आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा, “प्रभारी ने मुझे पंगु बना रखा है। वह मुझे पार्टी नहीं चलाने दे रहे हैं। मेरी सलाह पर कोई नियुक्ति नहीं की जाती है। प्रदेश कॉन्ग्रेस की रजामंदी नहीं होने पर भी AAP के साथ गठबंधन किया गया।” उन्होंने आरोप दिल्ली के पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं की भावनाओं की उपेक्षा का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा, “दिल्ली कॉन्ग्रेस इकाई उस पार्टी के साथ गठबंधन के खिलाफ थी, जो कॉन्ग्रेस पार्टी के खिलाफ झूठे, मनगढ़ंत और दुर्भावनापूर्ण भ्रष्टाचार के आरोप लगाने के एकमात्र आधार पर गठित की गई थी। इसके बावजूद पार्टी ने दिल्ली में आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन करने का फैसला किया।” बता दें कि गठबंधन के बाद दिल्ली की कुल सात सीटों में से तीन कॉन्ग्रेस को मिली है।

लवली कन्हैया कुमार की उम्मीदवारी से भी नाराज दिखे। उन्होंने कहा कि स्थानीय उम्मीदवारों को नजरअंदाज किया गया। अपने पत्र में लवली ने आगे लिखा है, “तीन सीटों पर प्रत्याशी चुनने में भी प्रदेश इकाई की सहमति नहीं ली गई। उत्तर पूर्वी में कन्हैया कुमार और उत्तर पश्चिमी दिल्ली से उदित राज को टिकट दिया गया, जबकि स्थानीय उम्मीदवारों को दरकिनार कर दिया गया।”

उन्होंने पार्टी हाईकमान पर सवाल उठाते हुए कहा, “पार्टी उम्मीदवारों पर अंतिम निर्णय लेना हाईकमान का विशेषाधिकार है। हालाँकि, चौंकाने वाली बात यह है कि एक बार जब हाईकमान ने उपरोक्त 2 उम्मीदवारों के संबंध में निर्णय ले लिया तो औपचारिक घोषणा से पहले पीसीसी को सूचित भी नहीं किया गया।”

नेपाल में ‘द केरल स्टोरी’: 14-15 साल की 2 हिंदू लड़कियों को भगा ले गए 6 मुस्लिम लड़के, साथ में थी 2 मुस्लिम लड़कियाँ – जिस्मफरोशी के लिए ग्रूमिंग जिहाद

भारत के पड़ोसी देश नेपाल में एक बार फिर से साम्प्रदायिक तनाव की खबर है। यहाँ के धनुहा जिले में एक साथ 2 नाबालिग हिन्दू लड़कियों के साथ ग्रूमिंग जिहाद की घटना हुई है। इससे नाराज होकर गुरुवार (25 अप्रैल 2024) को हिन्दू समाज सड़कों पर उतर आया। आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग के साथ रास्तों को जाम किया गया और विरोधस्वरूप टायरों को जला कर प्रदर्शन किया गया। नेपाली पुलिस ने हिन्दू संगठन से जुड़ी लक्ष्मी नाम की एक महिला नेता को हिरासत में लिया तो हालात और बिगड़ गए। आखिरकार पुलिस ने 27 अप्रैल 2024 (शनिवार) को लक्ष्मी को रिहा करके ग्रूमिंग जिहाद के आरोपितों की तलाश शुरू कर दी है।

यह मामला नेपाल के धनुहा जिले के औराही थानाक्षेत्र का है। यहाँ के एक गाँव में रहने वाले 2 हिन्दू परिवारों ने पुलिस में एक साथ शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत के मुताबिक गुरुवार (16 अप्रैल 2024) की शाम लगभग 6 बजे गाँव की 2 नाबालिग हिन्दू लड़कियाँ घर में पढ़ाई कर रहीं थीं। इसी दौरान मुस्लिम समाज के कुछ लोग इन दोनों लड़कियों को बहला-फुसला कर अपने साथ भगा ले गए। आरोपितों में 2 मुस्लिम महिलाएँ भी शामिल हैं। पुलिस में दी शिकायत के अनुसार एक पीड़िता की उम्र 15 जबकि दूसरी की 14 साल है।

FIR कॉपी में नामजद आरोपित

ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। पीड़ित परिजनों ने इस केस में साजिद, मोफिद, समीर, अशरफ, मस्तकीम और लियासत के साथ हकीदा और नगीना खातून को भी नामजद किया है। इन सभी पर आरोप है कि ये नेपाल की लड़कियों को कम उम्र में फँसा कर उन्हें मोटे दाम में भारत के कोलकाता, मुंबई जैसे शहरों में बेच देते हैं।

शिकायतकर्ता ने इन सभी आरोपितों को मानव तस्करी का एक संगठित गिरोह बताया है और कड़ी कार्रवाई की माँग की है। इन सभी नामजदों पर पूर्व में भी आपराधिक हरकतों को अंजाम देने का आरोप है।

ऑपइंडिया ने नेपाल में सक्रिय हिन्दू सम्राट सेना के अध्यक्ष राजेश यादव से बात की। उन्होंने बताया कि 16 अप्रैल की घटना को 9 दिन बीत जाने पर किसी की भी गिरफ्तारी नहीं हुई तो नेपाल के हिन्दू संगठन आक्रोशित हो उठे। हिन्दू सम्राट सेना के नेतृत्व में 25 अप्रैल को धनुहा जिले में विरोध प्रदर्शन किया गया।

इस प्रदर्शन में न सिर्फ आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई करने बल्कि दोनों नाबालिग बच्चियों की सकुशल बरामदगी की भी माँग उठाई गई। विरोध के दौरान सड़क पर टायरों को रख कर जलाया गया, जिससे थोड़े समय के लिए मुख्य रास्ता रुक गया। इस विरोध प्रदर्शन के कुछ वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।

राजेश यादव का आरोप है कि नेपाल की पुलिस मुस्लिमों और वामपंथी नेताओं के दबाव में आ गई है। इसी कारण नेपाली पुलिस ने विरोध-प्रदर्शन का नेतृत्व कर रही लक्ष्मी नाम की एक हिन्दू महिला को हिरासत में ले लिया।

लक्ष्मी की हिरासत की खबर सुन कर नेपाल के हिन्दू संगठनों में आक्रोश फ़ैल गया। हिन्दू सम्राट सेना सहित कई अन्य संगठनों ने इस कार्रवाई पर नेपाल पुलिस की निंदा की और आंदोलन की चेतावनी दी। आखिरकार हिरासत में लिए जाने के 2 दिनों बाद 27 अप्रैल को लक्ष्मी को रिहा कर दिया गया।

ऑपइंडिया द्वारा जुटाई गई जानकारी के मुताबिक अभी तक नेपाली पुलिस दोनों में से किसी भी पीड़िता को बरामद नहीं कर पाई है। सभी नामजद आरोपितों में से किसी की गिरफ्तारी भी नहीं हुई है। एक आरोपित के अम्मी-अब्बा को हिरासत में लिए जाने की अपुष्ट सूचना है हालाँकि इस पर नेपाल पुलिस का कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। राजेश यादव ने हमें बताया कि यदि जल्द से जल्द दोनों बच्चियों को बरामद कर के सभी आरोपितों पर कार्रवाई न हुई तो हिन्दू सम्राट सेना पूरे नेपाल में आंदोलन खड़ा करेगी।

15000 करोड़ रुपए के घोटाले में फरार अभिनेता साहिल खान गिरफ्तार: महादेव बेटिंग ऐप नेटवर्क का है हिस्सेदार, 26 साल छोटी लड़की से किया है निकाह

छत्तीसगढ़ के कुख्यात महादेव बेटिंग ऐप घोटाले में मुंबई पुलिस साइबर सेल की विशेष जाँच दल (SIT) ने शनिवार (27 अप्रैल 2024) को अभिनेता साहिल खान को गिरफ्तार कर लिया। इसके पहले गिरफ्तारी की आशंका के बीच साहिल खान ने बॉम्बे हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका दी थी। हालाँकि, यह याचिका खारिज हो गई थी। SIT ने साहिल को जगदलपुर से गिरफ्तार किया है।

छत्तीसगढ़ के रहने वाले साहिल खान पर बेटिंग साइट चलाने और उसे प्रमोट करने के आरोप हैं। मुंबई पुलिस द्वारा महादेव बेटिंग केस की जाँच में साहिल खान का नाम आया था। इसके बाद SIT ने हाल ही में साहिल खान को बुलाकर उनसे पूछताछ की थी। बताया जा रहा है कि साहिल लोटस बुक 24/7 नाम के एक सट्टेबाजी ऐप वेबसाइट में भी भागीदार है। यह महादेव सट्टेबाजी ऐप नेटवर्क का हिस्सा है।

साहिल खान पर लॉयन बुक ऐप को प्रमोट करने का आरोप लगा है। लॉयन बुक को प्रमोट करने के बाद उसने बतौर पार्टनर लोटस बुक 24/7 ऐप को भी लॉन्च किया था। साहिल खान बेटिंग ऐप को बढ़ावा देने के लिए अपने सर्किल का बखूबी इस्तेमाल करता था। वह ग्रांड पार्टियों का आयोजन करता था और सिलेब्रिटीज को बुलाता था।

अग्रिम जमानत की याचिका बॉम्बे हाई कोर्ट से खारिज होने के बाद साहिल खान मुंबई छोड़कर फरार हो गया। इसके बाद से पुलिस लगातार उसका पीछा कर रही थी। साहिल खान बार बार अपना लोकेशन बदलता रहा था। पुलिस अधिकारियों ने फरार साहिल खान का लगभग 40 घंटे तक पीछा करने के बाद उसे छत्तीसगढ़ के जगदलपुर से पकड़ लिया।

महादेव बेटिंग ऐप लगभग 15,000 करोड़ रुपए का घोटाला है। इसमेें छत्तीसगढ़ की पिछली कॉन्ग्रेस सरकार का भी नाम आया था। इस मामले में साहिल खान सहित 32 व्यक्तियों के खिलाफ जाँच चल रही है। इस जाँच में आरोपितों के बैंक खाते, मोबाइल फोन, लैपटॉप और सभी तकनीकी उपकरणों की जाँच शामिल है। 

मुंबई की माटुंगा पुलिस ने भारतीय दंड संहिता, जुआ अधिनियम, आईटी अधिनियम की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है। पुलिस ने आईपीसी की धारा 420, 465, 467, 468, 471, 120 (बी) के तहत दर्ज एफआईआर में अभिनेता साहिल खान और डाबर कंपनी के गौरव बर्मन और मोहित बर्मन और अन्य के नाम शामिल किए हैं।

बताते चलें कि साहिल खान बॉलीवुड का एक असफल अभिनेता है। उसने Excuse Me और स्टाइल जैसी फिल्मों में काम किया है। हालाँकि, ये फिल्में कुछ कमाल नहीं दिखा पाईं और थक-हारकर उसने फिल्म इंडस्ट्री छोड़ दी। इसके बाद वह फिटनेस इंफ्लुएंसर बन गया। साहिल Divine Nutrition नाम की एक कंपनी भी चलाता है और सप्लीमेंट्स बेचता है।

साहिल खान ने इस साल फरवरी में उसने अपनी दूसरी शादी के बारे में खुलासा किया था। उसने बताया था कि रूस में सगाई के बाद उसने 26 साल छोटी Milena से शादी की है। साहिल खान ने साल 2004 में ईरान में जन्मीं अभिनेत्री निगार खान से शादी की थी। हालाँकि, शादी के एक साल बाद ही दोनों अलग हो गए थे।

सरकारी ठेका लेने के लिए क्या हिंदुओं को मुस्लिम बनना होगा?: कॉन्ग्रेस के घोषणा पत्र पर फिर उठ रहा सवाल, मंगलसूत्र और सोना पर हो चुका है विवाद

कॉन्ग्रेस ने लोकसभा चुनाव 2024 के अपने घोषणा पत्र में जिस तरह के वादे किए हैं, उसकी तह में छिपी हुई उसकी तुष्टिकरण की नीति खुल-खुलकर सामने आ रही है। कभी मुस्लिमों की तुष्टिकरण के लिए बदनाम हो चुकी कॉन्ग्रेस इस दाग को धोना भी नहीं चाहती है। पीएम मोदी ने अपने भाषणों में कॉन्ग्रेस की घोषणा पत्र का पोल खोल दिया है।

उधर कॉन्ग्रेस बार-बार ये दोहरा रही है कि वह अपने घोषणा पत्र में किसी धर्म या मजहब का जिक्र नहीं किया है, लेकिन घोषणा पत्र पर शब्दों के साथ की गई जादूगरी को ध्यान से देखा जाए तो कॉन्ग्रेस की यह बात झूठ साबित होती है। कॉन्ग्रेस ने अल्पसंख्यक शब्द की आड़ में इस पूरे खेल को अंजाम दिया है।

भाजपा नेता अमित मालवीय ने कॉन्ग्रेस के इस खेल को अपने सोशल मीडिया हैंडल X पर साझा किया है। उन्होंने कॉन्ग्रेस के घोषणा पत्र के एक प्वॉइंट का स्क्रीनशॉट साझा किया है। इसमें लिखा है, “हम यह सुनिश्चित करेंगे कि अल्पसंख्यक शिक्षा, स्वास्थ्य, सरकारी ठेके, कौशल विकास, खेल और सांस्कृतिक विकास में बिना किसी भेदभाव के उचित साझेदारी का अवसर प्राप्त करें।”

शिक्षा-स्वास्थ्य आदि विषयों की बात तक तो ठीक है, लेकिन कॉन्ग्रेस सरकार यह कैसे सुनिश्चित करेगी की सरकारी ठेकों में मुस्लिम वर्ग को उचित भागीदारी का अवसर मिले। सार्वजनिक कार्यों का ठेका कई नियमों और दिशा-निर्देशों के तहत जारी किया जाता है। इसमें किसी तरह का धार्मिक भेदभाव की गुंजाइश नहीं होती है, लेकिन कॉन्ग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में इसका जिक्र करके तुष्टिकरण की एक नई कोशिश की है।

अमित मालवीय अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखते हैं, “कॉन्ग्रेस यह कैसे सुनिश्चित करेगी कि अल्पसंख्यकों (मुस्लिम पढ़ें) को ‘सार्वजनिक कार्य ठेका’ में उचित हिस्सा मिले? क्या तकनीकी और वित्तीय बोली के साथ अब धार्मिक कोटा भी होगा? क्या मुस्लिमों के पक्ष में योग्य बोलीदाताओं की अनदेखी की जाएगी?”

भाजपा IT सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने कॉन्ग्रेस पार्टी से पूछा, “क्या सार्वजनिक ठेका हासिल करने के लिए हिंदुओं को अल्पसंख्यकों बनना होगा, भले ही वे स्वयं ऐसा करने में सक्षम हों? क्या यह ‘टेंडर घोटाला’ की नींव नहीं रख रहा है?”

उन्होंने आगे कहा, “कॉन्ग्रेस न केवल एससी/एसटी/ओबीसी की संपत्ति पर कब्जा करना चाहती है, सोना और उनके मंगलसूत्र सहित हिंदू महिलाओं की छोटी बचत को अपने कब्जे में लेना चाहती है और इसे अल्पसंख्यकों के बीच वितरित करना चाहती है, बल्कि उन्हें सम्मान के साथ आजीविका कमाने के अवसरों से भी वंचित करना चाहती है।”

बताते चलें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह विरासत कर, सोना और मंगलसूत्र सहित कॉन्ग्रेस के विभाजनकारी मुद्दों को जनता के सामने ला चुके हैं। इन दोनों नेताओं ने अपनी कई जनसभाओं में इन मुद्दों का जिक्र किया है। कॉन्ग्रेस के घोषणा पत्र की वास्तविक सच्चाई सामने आने के पार्टी बौखलाई हुई भी नजर आ रही है।

‘हम तुष्टिकरण नहीं, संतुष्टिकरण के लिए काम करते हैं’: गोवा में बोले PM मोदी – ये 2 विचारधाराओं के बीच का चुनाव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गोवा में जनसभा को संबोधित किया। पीएम मोदी ने गोवा लोकसभा क्षेत्र में आयोजित रैली में कहा कि “2024 के चुनाव में अभी तक 2 चरण की वोटिंग हो चुकी है। जमीन से आ रहे फीडबैक और आप जैसे मेरे परिवार जनों का उत्साह एक ही संकेत दे रहा है फिर एक बार मोदी सरकार…अब मैं दूसरा नारा बोलता हूँ, फिर एक बार, गरीबों की सरकार, SC-ST और OBC की सरकार, युवा को अवसर देने वाली सरकार, महिलाओं को सुविधा देने वाली सरकार, मछुआरों को समर्पित सरकार…”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “2024 का चुनाव दो धाराओं के बीच का चुनाव है। एक धारा एनडीए की हो जो देश के नागरिकों की आकांक्षाएँ के लिए काम करती है। जो धारा हर काम में पूर्णता को लेकर संतृप्ति दृष्टिकोण पर काम करती है। वहीं दूसरी धारा INDI गठबंधन की है जो अपने हितों और परिवारों के लिए काम करती है। हमारा दृष्टिकोण तुष्टिकरण का नहीं संतुष्टिकरण का है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “मोदी कभी चैन से नहीं बैठता है, मोदी मौज करने के लिए पैदा नहीं हुआ है। मोदी दिन-रात आपके सपनों को जीता है। आपके सपने ही मोदी के संकल्प हैं। इसलिए मेरा पल-पल आपके नाम, मेरा पल-पल देश के नाम।”

पीएम मोदी ने कहा, “मोदी जो 10 साल में किया है… ये सिर्फ ट्रेलर है। अभी मुझे बहुत कुछ करना है। गोवा को, देश को बहुत आगे लेकर जाना है। मोदी की गारंटी आप नोट करके रख लीजिए… आने वाले समय में गरीबों के 3 करोड़ पक्के घर बनेंगे।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि 70 साल से अधिक के आयु के कोई भी नागरिक होंगे… अब उनका इलाज का खर्चा आपका ये दिल्ली में बैठा बेटा मोदी उठाएगा… ये मोदी की गारंटी है। उन्होंने कहा, “हमने मत्स्य पालन क्षेत्र के लिए अलग मंत्रालय और बजट बनाया। यह सुनिश्चित करता है कि हम मछुआरों और तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के जीवन को बदल सकते हैं। हमने मछुआरों को किसान क्रेडिट कार्ड मुहैया कराए…अब हमने मछुआरों के लिए बीमा बढ़ाने का फैसला किया है।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज पूरी दुनिया भारत को जानना चाहती है, भारत को देखना चाहती है। आज पूरी दुनिया हमारी विरासत के प्रति आकर्षित है। इसलिए INDI गठबंधन के 10 साल में जितने विदेशी टूरिस्ट भारत आए थे, मोदी के आने के बाद पहले की तुलना में दो करोड़ टूरिस्ट ज्यादा हिंदुस्तान में आए हैं।

पीएम मोदी ने कहा, “गोवा भारत भक्तों की भूमि है। गोवा के मंदिर जितने भव्य हैं, गोवा के चर्च भी उतने खूबसूरत है। एक भारत, श्रेष्ठ भारत की बहुत ही सुंदर तस्वीर गोवा में दिखती है, इसलिए पूरी दुनिया के लिए गोवा आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है।”

बेटा सनातन को मिटाने की बात करता है, माँ जाती है मंदिर: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की पत्नी दुर्गा स्टालिन ने की श्री वेंकटेश्वर मंदिर में पूजा

तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी डीएमके खुद को द्रविडियन पॉलिटिक्स की चैंपियन बताती है। उसके मुखिया एमके स्टालिन भी सनातन का विरोध करते हैं, तो एमके स्टालिन का मंत्री बेटा उदयनिधि स्टालिन सीधे तौर पर सनातन को मिटाने की बात करता है। एक तरफ घर के पुरुष सदस्य सनातन के खिलाफ आग उगलते रहते हैं, तो दूसरी तरफ घर की मालकिन यानी एमके स्टालिन की पत्नी दुर्गा स्टालिन मंदिर-मंदिर जाकर दर्शन करती हैं। कुछ दिन पहले केरल के सुप्रसिद्ध गुरुवायुर के श्री कृष्ण मंदिर के पीठासीन देवता भगवान गुरुवायुरप्पन के दर्शन कर उन्हें 32 सिक्कों के वजन वाली टोपी अर्पित की थी, तो अब वो आँध्र प्रदेश के तिरुपति के श्री वेंकटेश्वर मंदिर पहुँची हैं।

एएनआई द्वारा जारी की गई फुटेज के मुताबिक, दुर्गा स्टालिन ने शनिवार (27 अप्रैल 2024) को तिरुमाला के श्री वेंकटेश्वर मंदिर में प्रार्थना की। उनके आगमन पर मंदिर के अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। बता दें कि दुर्गा स्टालिन के बेटे उदयनिधि स्टालिन खुद को प्राउड क्रिश्चियन बताते हैं।

बता दें कि उदयनिधि स्टालिन ने सितंबर 2023 को खुलेआम मंच से सनातन को डेंगू मलेरिया कहा था। ईसाई होने पर गर्व करने वाले उदयनिधि ने कहा कि सनातन का सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि इसे खत्म किया जाना चाहिए। इतना ही नहीं, उदयनिधि ने कहा कि इसको लेकर अगर कोई कानूनी कार्रवाई की बात करता है तो वो इससे डरने वाले नहीं हैं।

एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किए जा रहे उनके भाषण की एक वीडियो क्लिप में उन्हें यह कहते हुए सुना जा सकता है, “सनातन धर्म को खत्म करने के लिए इस सम्मेलन में मुझे बोलने का मौका देने के लिए मैं आयोजकों को धन्यवाद देता हूँ। मैं सम्मेलन को ‘सनातन धर्म का विरोध’ करने के बजाय ‘सनातन धर्म को मिटाओ‘ कहने के लिए आयोजकों को बधाई देता हूँ।”

उदयनिधि ने कहा, “कुछ चीजें हैं जिनका हमें उन्मूलन करना है और हम केवल विरोध नहीं कर सकते। मच्छर, डेंगू, मलेरिया, कोरोना ये सभी चीजें हैं जिनका हम विरोध नहीं कर सकते, हमें इन्हें मिटाना है। सनातन ​​भी ऐसा ही है। विरोध करने की जगह सनातन ​​को ख़त्म करना हमारा पहला काम होना चाहिए।”

गौरतलब है कि पिछले दिनों दुर्गा स्टालिन मशहूर पहाड़ी मंदिर भी गईं थीं। दुर्गा अक्सर मंदिर जाती हैं और उन्होंने देश के कई प्रसिद्ध मंदिरों में पूजा-अर्चना की है। पिछले साल, उन्होंने केरल के गुरुवायुर श्री कृष्ण मंदिर के पीठासीन देवता, भगवान गुरुवायुरप्पन को 32 सिक्कों के वजन वाली एक सुनहरी टोपी अर्पित की थी। उन्होंने मंदिर में चंदन को पीसकर पेस्ट बनाने की मशीन भी भेंट की।

कसाब को फाँसी के फंदे तक पहुँचाया, 1993 मुंबई ब्लास्ट के आतंकियों को दिलाई सज़ा: वकील उज्जवल निकम को BJP ने चुनावी मैदान में उतारा

लोकसभा चुनाव 2024 के लिए भारतीय जनता पार्टी ने मशहूर वकील उज्जवल निकम को मैदान में उतारा है। उज्जवल निकम को मुंबई की नॉर्थ-सेंट्रल लोकसभा सीट से बीजेपी ने उम्मीदवार बनाया है। उन्हें दो बार की लोकसभा सांसद पूनम महाजन की जगह पर उम्मीदवार बनाया गया है। पूनम महाजन 2014 और 2019 में यहाँ से सांसद थी, लेकिन इस बार निकम को इस सीट से उतारा गया है।

उज्जवल निकम कई हाई-प्रोफाइल केस जीत चुके हैं। उन्होंने 26/11 मुंबई हमले के दोषी कसाब को फाँसी के फंदे तक पहुँचाया था। उज्जवल निकम को लेकर कहा जाता है कि वह जिस केस को अपने हाथ में लेते हैं उसे अंजाम तक जरूर पहुँचाते हैं और आरोपित को सजा पक्की मानी जाती है। उन्होंने मुंबई आतंकी हमले के अलावा 1993 में बॉम्बे ब्लास्ट, गुलशन कुमार हत्याकांड, प्रमोद महाजन हत्याकांड मामलों के संदिग्धों के खिलाफ मुकदमा चलाने में मदद की थी।

बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति ने लोकसभा चुनाव के लिए मुंबई उत्तर मध्य सीट से उज्जवल निकम के नाम पर अपनी स्वीकृति दी है।

मुंबई नॉर्थ सेंट्रल सीट पर अब बीजेपी के उज्जवल निकम का सामना वर्षा गायकवाड़ से होगा। वर्ष गायकवाड़ धारावी विधानसभा सीट से कॉन्ग्रेस की विधायक हैं। ये सीट कॉन्ग्रेस के हिस्से आई है। वर्ष गायकवाड़ के नाम का ऐलान एक दिन पहले ही हुआ था और अब उनसे मुकाबले के लिए बीजेपी ने उज्जवल निकम को उम्मीदवार के तौर पर उतार दिया है।

उज्जवल निकम 2013 मुंबई सामूहिक बलात्कार मामले में विशेष लोक अभियोजक भी थे। उज्जवल निकम को 2016 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। उज्जवल निकम जलगाँव से हैं और पिछले चुनाव में बीजेपी उन्हें जलगांव से उम्मीदवार बनाने पर विचार कर रही थी, लेकिन आखिर में उन्हें मुंबई

राम-राम कहने पर मुँह में डाल दी लाठी, छाती में गोली मार सड़क पर घसीटी लाश: कारसेवक कमलाकांत पांडेय, मुलायम सरकार में छीना गया जिनका ‘मंगलसूत्र’

लोकसभा चुनाव के दौरान इस समय देश की राजनीति में ‘मंगलसूत्र’ शब्द चर्चा का विषय बना हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा सरकार आने पर घुसपैठियों से देशवासी महिलाओं के मंगलसूत्र की रक्षा करने का भरोसा दिया है। हालाँकि, विपक्ष भी मंगलसूत्र पर अपनी सोच के मुताबिक सत्ता पक्ष पर हमला कर रहा है। इस बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भरी जनसभाओं में समाजवादी पार्टी से साल 1990 में अयोध्या में बलिदान हुए कारसेवकों की विधवाओं के मंगलसूत्र को ले कर सवाल पूछा है।

ऑपइंडिया ने उन तमाम गुमनाम बलिदानी कारसेवकों में एक एक अन्य परिवार को खोज निकाला। प्रयागराज जिले के निवासी कमलाकांत पांडेय की विधवा का मंगलसूत्र भी 1990 के राम मंदिर आंदोलन में छिन गया था।

प्रयागराज के रहने वाले थे कमलाकांत पांडेय

ऑपइंडिया ने अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के दौरान कई बलिदानी परिवारों को खोज कर उनके बारे में और वर्तमान हालातों को विस्तार से बताया था। उसी कड़ी में एक अन्य बलिदानी हैं कमलाकांत पांडेय। कमलाकांत पांडेय उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में थाना क्षेत्र नवाबगंज के निवासी थे। उनके गाँव का नाम खिदिरपुर है। यह गंगा नदी के किनारे बसा है, जो कि दांडी पुलिस चौकी क्षेत्र में आता है।

साथी संग अंतिम बार साथ में खाया था पान

प्रयागराज के कौड़िहार बाजार में बुदौना गाँव निवासी रामेश्वर प्रसाद उपाध्याय ने ऑपइंडिया से बात की। उनको ठीक से याद है कि बलिदान होने से 2 दिन पहले 28 अक्टूबर को ही कमलाकांत पांडेय अयोध्या कूच कर गए थे। अंतिम बार कमलाकांत पांडेय कौड़िहार बाजार में रामेश्वर उपाध्याय उर्फ़ लल्लू से मिले थे। दोनों ने एक साथ पान खाया था। इसके बाद कमलाकांत पांडेय विदा ले कर अयोध्या की तरफ निकल गए थे। रामेश्वर प्रसाद को ये नहीं पता था कि कमलाकांत से उनकी वो मुलाकात अंतिम साबित होगी।

कमलाकांत की पत्नी, न पति देख पाईं न राम मंदिर

ऑपइंडिया ने कमलाकांत के बेटे शिवभूषण पांडेय से बात की। उन्होंने बताया कि उनकी माँ का देहांत 2 साल पहले हो गया। अब 42 साल के हो चुके शिवभूषण के अनुसार, पिता के बलिदान के बाद उनकी माँ ने ही परिवार को सँभाला। परिवार में 3 बेटों और 2 बेटियों की जिम्मेदारी उनके सिर पर आ गई थी। घर चलाने के लिए उन्होंने आंगनबाड़ी की नौकरी की और इसके साथ खेतीबाड़ी भी सँभाली। कमलाकांत उत्तर प्रदेश होमगार्ड विभाग में नौकरी करते थे, लेकिन बलिदान होने से कुछ समय पहले उन्होंने नौकरी छोड़ दी थी।

कमलाकांत के घर की स्थिति अच्छी नहीं थी। चिंता में बलिदानी की विधवा को कैंसर हो गया। बीमारी ले कर वो काफी समय तक जिन्दा रहीं लेकिन आखिरकार राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा देखने से पहले ही 2022 में उन्होंने प्राण त्याग दिए। शिवभूषण बताते हैं कि उनकी माँ को मरने से पहले तक लगातार उम्मीद बँधी थी कि उनके पति लौट कर ज़रूर आएँगे। हालाँकि देहांत से पहले कमलाकांत की पत्नी अपने सभी बेटी-बेटों का शादी-ब्याह कर चुकीं हैं। उनके बच्चे खेती-बाड़ी और प्राइवेट काम कर के घर का गुजारा कर रहे हैं।

हर चौखट पर की फरियाद, कहीं नहीं हुई सुनवाई

कारसेवक कमलाकांत पांडेय अपने परिवार में 2 दिन बाद लौट आने का भरोसा दे कर गए थे। हालाँकि, वो फिर कभी लौट कर नहीं आए। जब वो नहीं लौटे तो उनकी पत्नी ने तमाम अधिकारियों की चौखट पर अपने पति के कुशल-क्षेम के लिए दौड़ लगाई पर उनकी कहीं भी सुनवाई नहीं हुई। कारसेवक के बेटे शिवभूषण ने हमें साल 1990 में DM (जिलाधिकारी) से ले कर तत्कालीन मुख्यमंत्री तक को भेजे गए पत्रों की प्रतियाँ दिखाईं। तब शिवभूषण महज 9 या 10 साल के थे पर उन्हें अपनी माँ का संघर्ष और आँसू ज्यों के त्यों याद हैं।

लाश भी नहीं देख पाया परिवार

शिवभूषण बताते हैं कि जब कुछ दिनों तक उनके पिता लौट कर नहीं आए तब अधिकारी उनकी माँ से कहने लगे कि उनके पति अब दुनिया में नहीं हैं। इसके बाद अपने पति का शव देखने और उनका विधिवत अंतिम संस्कार करने की चाह ले कर कमलाकांत की पत्नी कम से कम 20 बार अयोध्या गईं। यहाँ वो गली-गली, अस्पतालों के साथ नदी, तालाबों और श्मशान घाट के आसपास कई दिनों तक भटकती रहीं, पर उन्हें उनके पति न जीवित दिखे न उनका मृत शव मिला।

प्रयागराज से लगभग 150 किलोमीटर दूर अयोध्या आने-जाने के लिए कारसेवक की पत्नी के पास पैसे नहीं होते थे। वो कभी लोगों से उधार माँगती थी तो कभी कई-कई किलोमीटर पैदल चलती थीं।

राम-राम कहने पर मुँह में डाल दी गई थी लाठी

शिवभूषण पांडेय बताते हैं कि जब वो बड़े हुए तो उन्होंने अपने पिता के बारे में खुद से खोजबीन की। इस खोजबीन में उनको कुछ ऐसे रामभक्त मिले तो उनके पिता के जत्थे में कारसेवा करने गए थे। इन्हीं में से कुछ लोगों ने बताया कि 30 अक्टूबर 1990 को तमाम रामभक्तों के साथ कमलाकान्त भी राम-राम करते हुए जन्मभूमि की तरफ बढ़े थे। इसी दौरान पुलिस की वर्दी पहने कुछ लोगों ने जत्थे को रोका। इन्होंने राम का नाम न लेने की चेतावनी दी और जत्थे को रोक दिया। हालाँकि रुकने के बावजूद कमलाकांत राम-राम रटते रहे।

गोली मार कर घसीटी गई लाश

शिवभूषण ने बताया कि राम-राम कहने से नाराज पुलिस की वर्दी पहने लोगों ने उनके पिता के मुँह में लाठी खोंस दी थी। मुँह में लाठी डालने के बाद कमलाकांत से पूछा गया कि क्या फिर वो राम का नाम लेंगे। इसके जवाब में घायल कमलाकांत ने ‘हाँ’ कहते हुए सिर हिलाया। बताया गया कि इस से नाराज हो कर वर्दी पहने हथियारबंद कुछ लोगों ने कमलाकांत के सीने पर बंदूक रख कर गोली मार दी। घायल कमलाकांत वहीं छटपटाने लगे। घायल कमलाकांत को अस्पताल ले जाने के बजाय सड़क पर घसीटा गया और उनके जत्थे में शामिल अन्य लोगों में दहशत बनाई गई।

शिवभूषण आगे बताते हैं कि उनके पिता के जत्थे में शामिल लोगों ने अंतिम बार लाश को खाकी वर्दी पहने कुछ लोगों द्वारा घसीट कर ले जाते देखा। इसके बाद से कमलाकांत पांडेय को कभी किसी ने नहीं देखा। बलिदानी कारसेवक के परिजन यह मानते हैं कि उनके पूर्वज गुमनाम ढंग से राम के काम आ गए। राम मंदिर बनने से अपने परिवार और रिश्तेदारों को बेहद खुश बताते हुए शिवभूषण ने बताया कि ये कदम उनके पिता और माता की आत्मा को शांति देने वाला है।

मोदी और योगी को दिया धन्यवाद

कमलाकांत का एक बेहद सामान्य परिवार है। हाल ही में कच्चा घर से कर्ज आदि ले कर उनके बेटों ने पक्का मकान बनवाया है। यह परिवार हर दिन मेहनत करता है अगले दिन खाने के इंतजाम के लिए। माता और पिता की ही तरह यह परिवार बेहद धार्मिक है जो हर दिन पूजा-पाठ करता है। कमलाकांत के बेटे शिवभूषण पांडेय ने नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ को धन्यवाद करते हुए कहा कि उनकी ही वजह से उनके बलिदानी पिता का सपना पूरा हो पाया।

‘मुस्लिम बन मेरे से निकाह करो, ज़िंदगी सेट कर दूँगा’: अल्फेज खान ने कॉलेज में साथ पढ़ रही हिन्दू लड़की को फाँसा, मना करने पर जान से मारने की धमकी

मध्य प्रदेश के इंदौर में लव जिहाद का मामला सामने आया है। यहाँ अल्फेज खान नाम के युवक ने अपने साथ गुजराती कॉलेज में पढ़ने वाली एक लड़की को अपने प्रेम जाल में फाँस लिया और फिर धर्म-परिवर्तन का दबाव डालने लगा। अल्फेज खान ने कहा कि अगर छात्रा धर्म परिवर्तन करती है, तभी वो उसके साथ निकाह करेगा और उसकी जिंदगी ‘सेट’ कर देगा, क्योंकि उसके पास काफी पैसा है। खेत-बाड़ी है और परिवार से वो काफी मजबूत है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अल्फेज खान ने छात्रा के सामने एक महीने पहले प्रेम प्रस्ताव रखा और विवाह के लिए तैयार किया। जब छात्रा उसकी बातों में आ गई, तो अल्फेज ने अचानक उसके सामने धर्म-परिवर्तन की शर्त रख दी। छात्रा नहीं मानी, तो अल्फेज ने जान से मारने की धमकी दी। इस पूरे घटना से डरी छात्रा ने हिंदू संगठनों से मदद माँगी, और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। अब पुलिस ने लव जिहाद समेत अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है।

जानकारी के मुताबिक, अल्फेज खान और पीड़िता दोनों ही छोटी ग्वालटोली थाना इलाके के गुजराती कॉलेज में पढ़ते हैं। शुक्रवार (26 अप्रैल 2024) को अल्फेज खान ने छात्रा को कॉलेज के गेट पर बुलाया और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डालने लगा। उसने छात्रा से कहा कि उसके पास काफी खेत और दुकान है। धर्म परिवर्तन करके निकाह कर लो, तो तुम्हारी लाइफ सेट हो जाएगी।

छात्रा ने अल्फेज से धर्म परिवर्तन करने और उसके साथ किसी भी तरह के संबंध से मना कर दिया, तो अल्फेज खान ने उसे जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद पीड़ित छात्रा ने इसकी सूचना अपने माता-पिता और हिंदू संगठनों को दी और पुलिस के पास जाकर केस दर्ज कराया। पुलिस ने इस मामले में अल्फेस के एफआइआर दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया। थाना इन्चार्ज उमेश यादव ने अल्फेस खान के गिरफ्तारी की पुष्टि की है।

जेल में रहते हुए चुनाव लड़ सकते हैं कैदी, लेकिन नहीं डाल सकते वोट: आखिर ऐसा क्यों? जानिए क्या कहता है कानून

NSA के तहत असम के डिब्रूगढ़ जेल में बंद खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह पंजाब के खडूर साहिब से निर्दलीय चुनाव लड़ सकता है। यह जानकारी उसके वकील राजदेव सिंह खालसा ने दी है। हालाँकि, अमृतपाल की माँ बलविंदर कौर ने इस मीडिया रिपोर्ट का खंडन किया है और कहा है कि इसको लेकर अभी निर्णय नहीं लिया गया है। वहीं, एक घोटाले में तिहाड़ जेल में बंद जनता द्वारा चुने गए आम आदमी पार्टी के संयोजक एवं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को वोट देने की इजाजत नहीं है।

इन दोनों मामलों को लेकर सोशल मीडिया पर बहस हो रही है। लोगों का कहना है कि जब देश की सुरक्षा के घातक एक आतंकवाद समर्थक व्यक्ति, जब जेल में रहते हुए चुनाव लड़ सकता है तो एक घोटाले में जेल में बंद राजनेता, जो अभी तक दोषी भी साबित नहीं हुआ है, वह अपना वोट क्यों नहीं डाल सकता है। सबके अपने-अपने तर्क और दावे हैं, लेकिन कानून का अपना रास्ता और तरीका है।

भारत में जेल में रहते हुए चुनाव लड़ने की परंपरा बहुत पुरानी है। कहा जाता है कि इसकी शुरुआत पूर्वांचल के गैंगस्टर हरिशंकर तिवारी ने सबसे पहले जेल में रहते हुए चुनाव जीता था। इसके बाद बाहुबलियों और गैंगस्टरों में यह तरीका तेजी से प्रसिद्ध हुआ और जेल में रहते हुए कई गैंगस्टर एवं बाहुबली चुनाव जीते। इनमें मुख्तार अंसारी, अमरमणि त्रिपाठी दर्जनों प्रमुख नाम हैं। ये प्रक्रिया आज भी जारी है।

जेल में बंद कैदी कैसे लड़ लेता है चुनाव?

लगभग डेढ़ दशक पहले पटना हाई कोर्ट में ऐसा मामला आया, जिसमें जेल की सजा काट रहे एक कैदी ने चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की थी। इस पर पटना हाई कोर्ट ने कहा था कि जब कैदियों को वोट देने का अधिकार नहीं है तो चुनाव लड़ने जैसी जिम्मेदारी की छूट कैसे मिल सकती है। इसके बाद अदालत ने उसकी अर्जी खारिज कर दी थी।

बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी हाई कोर्ट के फैसले को मंजूरी दी थी। हालाँकि, साल 2013 में कॉन्ग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सरकार ने कानून में बदलाव करते हुए जेल में बंद लोगों को चुनाव में खड़ा होने की इजाजत दे दी। इसके पीछे तर्क दिया गया कि कई बार राजनैतिक लड़ाई में भी लोग विपक्ष को अंदर करवा देते हैं। ऐसे में जेल में होने की वजह से एक काबिल व्यक्ति चुनाव लड़ने के अयोग्य हो जाएगा।

इसके तहत लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 62(5) में संशोधन हुआ और जेल में रहते हुए चुनाव लड़ने की छूट मिल गई। वे चुनाव में उम्मीदवार हो सकते हैं। अपने लोगों से चुनाव प्रचार भी करवा सकते हैं। हालाँकि, वोट नहीं दे सकते। आरोप से मुक्त होने या सजा पूरी होने के बाद कोई भी व्यक्ति अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकता है।

बताना जरूरी है कि चुनाव की प्रक्रिया में जेल में बंद कैदियों को वोट देने का अधिकार नहीं होता है, लेकिन वे चुनाव लड़ लेते हैं। हालाँकि, इसके लिए महत्वपूर्ण है कि कैदी विचाराधीन होना चाहिए। चुनाव लड़ने वाले व्यक्ति को पीठासीन अधिकारी के सामने नामांकन पत्र देना होता है। ऐसी स्थिति में सवाल उठेगा कि जेल में बंद कैदी पीठासीन अधिकारी के समक्ष कैसे हाजिर होगा।

झाँसी के वित्त एवं राजस्व विभाग के एडीएम वरुण पांडेय का कहना है कि अगर कैदी जेल से चुनाव लड़ते हैं तो वे अपने प्रतिनिधि के जरिए नामांकन दाखिल कर सकते हैं। तय नियमों के तहत, अधिकतर मामलों में यह प्रतिनिधि परिवार का ही कोई सदस्य होता है। नए नियमों के अनुसार, सजायफ्ता कैदियों के चुनाव लड़ने पर पूरी तरह रोक है।

वोट देने का अधिकार

जेल में बंद कैदियों को मताधिकार से वंचित करने का प्रमाण अंग्रेजी जब्ती अधिनियम 1870 में मिलता है। उस दौरान देशद्रोह या गुंडागर्दी के दोषी व्यक्तियों को मताधिकार से अयोग्य ठहरा दिया जाता था और उन्हें वोट देने से वंचित कर दिया जाता था। यही नियम गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1935 में भी लागू रहा। इसके तहत खास सजा काट रहे लोगों को वोट देने से रोक दिया गया था।

हालाँकि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 में किसी व्यक्ति को तब मताधिकार का अधिकार वापस ले लिया जाता है, जब वह आरोपित या दोषी हो या जेल में हो। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 62 वोट देने का अधिकार देती है। इसकी धारा 62(5) के तहत कुछ लोगों को अयोग्य ठहराया गया है।

इसमें कहा गया है, “कोई भी व्यक्ति किसी भी चुनाव में मतदान नहीं करेगा, यदि वह जेल में बंद है, चाहे वह सजा के तहत कारावास में बंद है या परिवहन या अन्यथा, अथवा पुलिस की वैध हिरासत में है।” हालाँकि, इसकी उपधारा के तहत, यह कुछ व्यक्ति पर लागू नहीं होगा यदि वह कुछ समय के लिए प्रिवेंटिव कस्टडी में है।

संविधान के अनुच्छेद 326 में मताधिकार की अयोग्यता के लिए कुछ आधार मौजूद हैं। ये अयोग्यताएँ मानसिक अस्वस्थता, गैर-निवास और अपराध/भ्रष्ट/अवैध आचरण से संबंधित हैं। प्रवीण कुमार चौधरी बनाम भारत निर्वाचन आयोग [डब्ल्यू.पी. (सी) 2336/2019], मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने फिर से पुष्टि की कि कैदियों को वोट देने का अधिकार नहीं है।