मध्य प्रदेश के इंदौर में लव जिहाद का मामला सामने आया है। यहाँ अल्फेज खान नाम के युवक ने अपने साथ गुजराती कॉलेज में पढ़ने वाली एक लड़की को अपने प्रेम जाल में फाँस लिया और फिर धर्म-परिवर्तन का दबाव डालने लगा। अल्फेज खान ने कहा कि अगर छात्रा धर्म परिवर्तन करती है, तभी वो उसके साथ निकाह करेगा और उसकी जिंदगी ‘सेट’ कर देगा, क्योंकि उसके पास काफी पैसा है। खेत-बाड़ी है और परिवार से वो काफी मजबूत है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अल्फेज खान ने छात्रा के सामने एक महीने पहले प्रेम प्रस्ताव रखा और विवाह के लिए तैयार किया। जब छात्रा उसकी बातों में आ गई, तो अल्फेज ने अचानक उसके सामने धर्म-परिवर्तन की शर्त रख दी। छात्रा नहीं मानी, तो अल्फेज ने जान से मारने की धमकी दी। इस पूरे घटना से डरी छात्रा ने हिंदू संगठनों से मदद माँगी, और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। अब पुलिस ने लव जिहाद समेत अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है।
जानकारी के मुताबिक, अल्फेज खान और पीड़िता दोनों ही छोटी ग्वालटोली थाना इलाके के गुजराती कॉलेज में पढ़ते हैं। शुक्रवार (26 अप्रैल 2024) को अल्फेज खान ने छात्रा को कॉलेज के गेट पर बुलाया और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डालने लगा। उसने छात्रा से कहा कि उसके पास काफी खेत और दुकान है। धर्म परिवर्तन करके निकाह कर लो, तो तुम्हारी लाइफ सेट हो जाएगी।
छात्रा ने अल्फेज से धर्म परिवर्तन करने और उसके साथ किसी भी तरह के संबंध से मना कर दिया, तो अल्फेज खान ने उसे जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद पीड़ित छात्रा ने इसकी सूचना अपने माता-पिता और हिंदू संगठनों को दी और पुलिस के पास जाकर केस दर्ज कराया। पुलिस ने इस मामले में अल्फेस के एफआइआर दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया। थाना इन्चार्ज उमेश यादव ने अल्फेस खान के गिरफ्तारी की पुष्टि की है।
NSA के तहत असम के डिब्रूगढ़ जेल में बंद खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह पंजाब के खडूर साहिब से निर्दलीय चुनाव लड़ सकता है। यह जानकारी उसके वकील राजदेव सिंह खालसा ने दी है। हालाँकि, अमृतपाल की माँ बलविंदर कौर ने इस मीडिया रिपोर्ट का खंडन किया है और कहा है कि इसको लेकर अभी निर्णय नहीं लिया गया है। वहीं, एक घोटाले में तिहाड़ जेल में बंद जनता द्वारा चुने गए आम आदमी पार्टी के संयोजक एवं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को वोट देने की इजाजत नहीं है।
इन दोनों मामलों को लेकर सोशल मीडिया पर बहस हो रही है। लोगों का कहना है कि जब देश की सुरक्षा के घातक एक आतंकवाद समर्थक व्यक्ति, जब जेल में रहते हुए चुनाव लड़ सकता है तो एक घोटाले में जेल में बंद राजनेता, जो अभी तक दोषी भी साबित नहीं हुआ है, वह अपना वोट क्यों नहीं डाल सकता है। सबके अपने-अपने तर्क और दावे हैं, लेकिन कानून का अपना रास्ता और तरीका है।
भारत में जेल में रहते हुए चुनाव लड़ने की परंपरा बहुत पुरानी है। कहा जाता है कि इसकी शुरुआत पूर्वांचल के गैंगस्टर हरिशंकर तिवारी ने सबसे पहले जेल में रहते हुए चुनाव जीता था। इसके बाद बाहुबलियों और गैंगस्टरों में यह तरीका तेजी से प्रसिद्ध हुआ और जेल में रहते हुए कई गैंगस्टर एवं बाहुबली चुनाव जीते। इनमें मुख्तार अंसारी, अमरमणि त्रिपाठी दर्जनों प्रमुख नाम हैं। ये प्रक्रिया आज भी जारी है।
जेल में बंद कैदी कैसे लड़ लेता है चुनाव?
लगभग डेढ़ दशक पहले पटना हाई कोर्ट में ऐसा मामला आया, जिसमें जेल की सजा काट रहे एक कैदी ने चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की थी। इस पर पटना हाई कोर्ट ने कहा था कि जब कैदियों को वोट देने का अधिकार नहीं है तो चुनाव लड़ने जैसी जिम्मेदारी की छूट कैसे मिल सकती है। इसके बाद अदालत ने उसकी अर्जी खारिज कर दी थी।
बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी हाई कोर्ट के फैसले को मंजूरी दी थी। हालाँकि, साल 2013 में कॉन्ग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सरकार ने कानून में बदलाव करते हुए जेल में बंद लोगों को चुनाव में खड़ा होने की इजाजत दे दी। इसके पीछे तर्क दिया गया कि कई बार राजनैतिक लड़ाई में भी लोग विपक्ष को अंदर करवा देते हैं। ऐसे में जेल में होने की वजह से एक काबिल व्यक्ति चुनाव लड़ने के अयोग्य हो जाएगा।
इसके तहत लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 62(5) में संशोधन हुआ और जेल में रहते हुए चुनाव लड़ने की छूट मिल गई। वे चुनाव में उम्मीदवार हो सकते हैं। अपने लोगों से चुनाव प्रचार भी करवा सकते हैं। हालाँकि, वोट नहीं दे सकते। आरोप से मुक्त होने या सजा पूरी होने के बाद कोई भी व्यक्ति अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकता है।
बताना जरूरी है कि चुनाव की प्रक्रिया में जेल में बंद कैदियों को वोट देने का अधिकार नहीं होता है, लेकिन वे चुनाव लड़ लेते हैं। हालाँकि, इसके लिए महत्वपूर्ण है कि कैदी विचाराधीन होना चाहिए। चुनाव लड़ने वाले व्यक्ति को पीठासीन अधिकारी के सामने नामांकन पत्र देना होता है। ऐसी स्थिति में सवाल उठेगा कि जेल में बंद कैदी पीठासीन अधिकारी के समक्ष कैसे हाजिर होगा।
झाँसी के वित्त एवं राजस्व विभाग के एडीएम वरुण पांडेय का कहना है कि अगर कैदी जेल से चुनाव लड़ते हैं तो वे अपने प्रतिनिधि के जरिए नामांकन दाखिल कर सकते हैं। तय नियमों के तहत, अधिकतर मामलों में यह प्रतिनिधि परिवार का ही कोई सदस्य होता है। नए नियमों के अनुसार, सजायफ्ता कैदियों के चुनाव लड़ने पर पूरी तरह रोक है।
वोट देने का अधिकार
जेल में बंद कैदियों को मताधिकार से वंचित करने का प्रमाण अंग्रेजी जब्ती अधिनियम 1870 में मिलता है। उस दौरान देशद्रोह या गुंडागर्दी के दोषी व्यक्तियों को मताधिकार से अयोग्य ठहरा दिया जाता था और उन्हें वोट देने से वंचित कर दिया जाता था। यही नियम गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1935 में भी लागू रहा। इसके तहत खास सजा काट रहे लोगों को वोट देने से रोक दिया गया था।
हालाँकि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 में किसी व्यक्ति को तब मताधिकार का अधिकार वापस ले लिया जाता है, जब वह आरोपित या दोषी हो या जेल में हो। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 62 वोट देने का अधिकार देती है। इसकी धारा 62(5) के तहत कुछ लोगों को अयोग्य ठहराया गया है।
इसमें कहा गया है, “कोई भी व्यक्ति किसी भी चुनाव में मतदान नहीं करेगा, यदि वह जेल में बंद है, चाहे वह सजा के तहत कारावास में बंद है या परिवहन या अन्यथा, अथवा पुलिस की वैध हिरासत में है।” हालाँकि, इसकी उपधारा के तहत, यह कुछ व्यक्ति पर लागू नहीं होगा यदि वह कुछ समय के लिए प्रिवेंटिव कस्टडी में है।
संविधान के अनुच्छेद 326 में मताधिकार की अयोग्यता के लिए कुछ आधार मौजूद हैं। ये अयोग्यताएँ मानसिक अस्वस्थता, गैर-निवास और अपराध/भ्रष्ट/अवैध आचरण से संबंधित हैं। प्रवीण कुमार चौधरी बनाम भारत निर्वाचन आयोग [डब्ल्यू.पी. (सी) 2336/2019], मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने फिर से पुष्टि की कि कैदियों को वोट देने का अधिकार नहीं है।
उत्तर प्रदेश के खीरी जिले में एक नाबालिग लड़की के चेहरे पर गोद कर कर आरोपित द्वारा अपना नाम लिखने का मामला सामने आया है। इससे पीड़िता का चेहरा जख्मी हो गया। आरोपित का नाम अमन है जिसके खिलाफ पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है। अमन पर पीड़िता को बंधक बनाने, पिटाई करने और धमकाने का भी आरोप है। घटना शुक्रवार (19 अप्रैल, 2024) की है।
यह मामला खीरी के थाना क्षेत्र धौरहरा का है। यहाँ अपनी बेटी को 14 साल की बताते हुए पीड़िता ने पुलिस में शिकायत दी है। शिकायत में महिला ने बताया कि 19 अप्रैल की दोपहर 11:30 पर उनकी बेटी परचून की दुकान पर सामान खरीदने गई थी। जब वह वापस लौट रही थी तब मस्जिद के सामने उसे अलीम नाई का बेटा अमन मिला। अमन नाबालिग को जबरन पकड़ कर अपने घर ले गया। यहाँ उसने लड़की को एक कमरे में बंद कर दिया।
जब लड़की ने अमन की इस हरकत का विरोध किया तो उसको गंदी-गंदी गालियों के साथ जान से मारने की धमकी भी दी गई।
थाना धौरहरा क्षेत्रान्तर्गत एक युवती के चेहरे पर अल्फाबेट लिखने की घटना के संबंध में अपर पुलिस अधीक्षक (पूर्वी) खीरी की बाइट pic.twitter.com/pNYb1ulirt
आरोप है कि इसी दौरान अमन ने किसी नुकीली चीज से लड़की के गाल को गोद कर अपना नाम लिख दिया। निशान के साथ पीड़िता की फोटो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। 3 दिनों तक बंद रहने के बाद नाबालिग मौक़ा पा कर अमन की कैद से भाग निकली और अपने घर पहुँच गई। रविवार (21 अप्रैल, 2024) को पुलिस ने अमन के खिलाफ IPC की धारा 323, 504 और 343 के तहत FIR दर्ज कर ली है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।
खीरी पुलिस के मुताबिक, पीड़ित परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों की जाँच करवाई जा रही है। आरोपित और पीड़िता एक ही समुदाय से हैं।
इंडियन प्रीमियर लीग 2024 में बड़े-बड़े स्कोर बन रहे हैं। गेदबाजों का कल्तेआम हो रहा है। किसी भी बॉलर की परवाह नहीं। पुराने खिलाड़ी तो अपनी आदत के मुताबिक खेल रहे हैं, लेकिन कुछ ने जो गजब का बदलाव किया है। नए खिलाड़ियों ने अपने खेल को ऐसा कर लिया है, मानों वो जेंटलमैन गेम क्रिकेट को बदमाशों का खेल बेसबॉल बना देने पर आमादा है। बेसबॉल को पसंद करने वाले लोग ऑफेंड न हों, मैंने सिर्फ खेल से इतर होने वाले बेसबॉल के डंडे का उपयोग का रेफरेंस दिया है। आईपीएल में मानों इस साल सारे बैट्समैन बेसबॉल का डंडा लेकर गेंदबाजों के पीछे ही पड़ गए हों। कोलकाता नाइट राइडर्स और पंजाब किंग्स के हाई स्कोरिंग मैच के बाद पंजाब किंग्स के कार्यवाहक कप्तान सैम करन ने प्रेजेंटेटर से पूछ लिया कि “भईया, कहीं ये क्रिकेट की जगह बेसबॉल का गेम तो नहीं था?”
दरअसल, आईपीएल 2024 के 42वें मैच में कुछ ऐसा हुआ, जो अब तक नहीं हुआ था। कोलकाता नाइट राइडर्स बनाम पंजाब किंग्स का ये मैच कोलकाता के खूबसूरत ईडन गार्डन्स मैदान पर खेला गया। कोलकाता नाइट राइडर्स के बल्लेबाजों ने कोहराम मचाया और 20 ओवरों में 261 रनों का स्कोर खड़ा कर दिया। माना जा रहा था कि ये स्कोर काफी बड़ा है और केकेआर को ये मैच जीतने से कोई नहीं रोक सकता। इस स्कोर में फिल साल्ट के 37 गेंदों के असाल्ट से 75 रन, सुनील नरेन के 32 गेदों पर 71 रन, वेंकटेश अय्यर के 23 गेंदों पर 39 रन, कप्तान श्रेयस अय्यार के 10 गेंदों पर 28 रन, आंद्रे रसेल के 12 गेंदों पर 24 रन शामिल थे।
जवाब में महज 18.4 ओवरों में पंजाब किंग्स के बल्लेबाजों ने सिर्फ 2 विकेट खोकर 262 रन बनाकर मैच जीत लिया। इसमें प्रभसिमरन सिंह के 20 गेंदों पर 54, राइली रूसो ने 16 गेंदों पर 26 रन बनाए और आउट हुए, तो जॉनी बैरिस्टो ने 48 गेदों पर नाबाद 108 और शशांक सिंह ने 28 गेदों पर नाबाद 68 रन जोड़ डाले थे। इस पूरे मैच में सुनील नरेन की इकॉनमी सबसे बेहतर रही। उन्होंने अपने 4 ओवरों में महज 24 रन देकर एक विकेट हासिल किया, तो पंजाब किंग्स की तरफ से राहुल चाहर की इकॉनमी सबसे बेहतर रही, उन्होंने 4 ओवर में 33 रन देकर एक विकेट हासिल किया। बाकी किसी भी गेदबाज की इकॉनमी 10 से नीचे नहीं रही। 9 गेंदबाजों की इकॉनमी 15 से ऊपर की रही, जिसमें सैम करन, कगिसो रबाडा, हर्षल पटेल, दुश्मांता चमीरा, हर्षित राणा, वरुण चक्रवर्ती जैसे धुरंधर और प्रतिभाशाली गेंदबाज रहे।
केकेआर के गेंदबाजों का प्रदर्शन, स्क्रीनशॉट-ESPNCricinfo वेबसाइट
कुछ यही हाल मुंबई इंडियंस और दिल्ली कैपिटल्स के बीच दिल्ली में खेले जा रहे मैच के शुरुआत में भी दिखा है। महज 7 ओवरों में दिल्ली कैपिटल्स ने 113 रनों का स्कोर खड़ा कर दिया। जसप्रीत बुमराह जैसे धुरंधर गेंदबाज का पहला ओवर 18 रनों के लिए गया, तो टॉप करन ने 19 रन दे दिए। हालत ये रही कि मुंबई इंडियन ने अपने शुरुआती 5 ओवर पाँच अलग-अलग बॉलर्स के हाथ में सौंपे। हालाँकि जसप्रीत बुमराह छठें ओवर में दोबारा आए और महज 3 तीन रन दिए, लेकिन स्ट्राइक पर तब अभिषेक पोरेल थे, ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी जेक फ्रेजर-मैक्गर्क नहीं। जेक इस मैच में 27 गेदों पर 84 रन बनाकर आठवें ओवर में ही आउट हो गए।
खैर, ये छोटा सा सैंपल इसलिए, कि लोगों को थोड़ा दुख और हो, क्योंकि लोग सोशल मीडिया पर हंगामा मचा रहे हैं कि आईपीएल 2024 में गेंदबाजों का कल्तेआम हो रहा है। पूरा खेल बैट्समैनों के हिसाब से बना दिया गया है। ये वही लोग हैं, जो कुछ समय पहले तक सिर्फ इसलिए हंगामा करते थे, क्योंकि लखनऊ की पिच लो-स्कोरिंग थी और यहाँ रन नहीं बनते थे। ये वो लोग हैं, जो यूएई में खेले गए आईपीएल की यह कहकर आलोचना कर रहे थे कि पिच बहुत धीमे हैं और स्पिनर्स हावी हैं। ये ऑस्ट्रेलिया की वाका पिच को तेज गेंदबाजों के लिए स्वर्ग और बैट्समैनों के लिए कब्र बताते हैं और इंग्लैंड की पिचों को उनके गेंदबाजों के हिसाब से स्विंग और फास्ट बॉलिंग की मदद देने वाले बताते हैं।
ये वही लोग हैं, तो मौके पर इंग्लैंड की हंड्रेड लीग (100 गेंदों का खेल) को बेस्ट बताते हैं और ऑस्ट्रेलिया की बीबीएल को क्रांतिकारी बताते हैं। ये वही लोग हैं, तो कहते थे कि वन-डे गेम नीरस हो गया है, लेकिन ये वही लोग हैं तो ऑस्ट्रेलिया-दक्षिण अफ्रीका के बीच 334-338 रनों वाले मैच को सबसे बेहतरीन बताते हैं। ये वही लोग हैं, जो इंग्लैंड के बैजबाल को बेस्ट बताते हैं, लेकिन आईपीएल में धड़ाधड़ रन बनने लगे और लगातार बनने लगे तो रोने लगते हैं।
क्यों भाई? ऐसे दोमुँही बातें कर कैसे लेते हैं आप? टी-20 क्रिकेट का मतलब है एंटरटेनमेंट। टेस्ट क्रिकेट का मतलब है धैर्य-कौशल की परीक्षा। दुनिया में खिलाड़ियों को ये कहकर वर्गीकृत कर दिया जाता है कि ये तो टेस्ट स्पेशलिस्ट बैट्समैन है और ये टी-20 बैट्समैन है। वो ये भूल जाते हैं कि शॉट्स फॉर्मेट में भी राहुल द्रविड़ ने झंडे गाड़े, तो वीरेंद्र सहवाग ने टेस्ट क्रिकेट में और मौजूदा दौर में डेविड वॉर्नर को कौन खारिज कर सकता है, जिसने तीनों ही फॉर्मेट में झंडे गाड़े हैं।
खैर, केकेआर और पंजाब किंग्स के मैच की ही बात कर लेते हैं, तो ये कि केकेआर 261 रन बनाने के बाद भी इसलिए हार गया, क्योंकि उनकी रणनीति सही नहीं थी। जब ये पता है कि पहली गेंद से आक्रमण करना है। आपके पास बहुत ही बेहतरीन हिटर मौजूद हैं, जो पहली गेंद से छक्का लगाने में सक्षम हैं, तो फिर क्यों दोनों अय्यर ऊपर आए? रमनदीप और रिंकू सिंह को रोककर क्यों रखा गया? अगर ये खिलाड़ी होते, तो स्कोर शायद 280 बन जाता और शायद तब आप जीत जाते। इस बात को ध्यान में रखें कि केकेआर के बल्लेबाजों ने 18 छक्के लगाए थे, तो पंजाब किंग्स ने 24 छक्के लगा दिए।
खैर, ये बात तो ‘रन -कौशल’ की है। अब बात आपके मुख्य मुद्दे की भी कर लेते हैं। आप कह रहे हैं कि पिचें इस तरह से तैयार की जा रही हैं कि गेंदबाजों का कल्तेआम हो रहा है। तो भाई, जिस जगह सब पीटे गए, उसी पिच पर तो सुनील नरेन ने भी गेंदबाजी की। सुनील ने तो अपने 4 ओवरों में सिर्फ 24 रन ही दिए और 1 विकेट भी लिया। वो भी तब, जब उनकी पहली दो गेंदों पर प्रभसिमरन ने छक्का और चौका लगाकर 10 रन बटोर लिए थे, इसके अलावा सिर्फ 1 ही चौका सुनील ने और दिया। यानी सुनील नरेन की 24 गेंदों में से 21 पर कोई बाउंड्री ही नहीं लगी। दूसरी तरफ राहुल चाहर ने भी 4 ओवरों में महज 33 रन दिए, उस मैच में जहाँ बाकी सारे गेंदबाज पिट रहे थे।
तो बात पिच की नहीं है। बात है कौशल की, माइंडसेट की। बैट्समैन मार रहा है। वो मारेगा। सिर्फ 120 गेंदों का खेल है, वो विकेट बचाकर करेगा क्या? आप अपने 24 गेंदों पर क्या करते हैं ये आपका कौशल है। अब दिल्ली-मुंबई के मैच की ही बात कर लें तो जसप्रीत बुमराह के पहले ओर में 18 रन बने, जिसमें पहली गेंद नो-बॉल थी और उस पर छक्का लगा, दूसरी गेंद फ्री हिट थी, जिसपर चौका लगा। बाकी की 5 गेंदों पर तो महज 8 रन ही बने न? वहीं, दूसरे ओर में बुमराह ने सिर्फ 3 रन दिए।
ये आँकड़े बता रहे हैं कि टी-20 क्रिकेट जिस लिए बनाया गया था, वो उसी दिशा में बढ़ रहा है। यहाँ बल्लेबाज अपनी ताकत दिखाएगा, गेंदबाज को बचाव करना है। इसमें कुछ भी गलत नहीं है। रही बात इम्पैक्ट सब नाम के नियम की, तो दोनों ही टीमों के पास एक ज्यादा बल्लेबाज और एक ज्यादा गेंदबाज का मौका बन रहा है। अब आपके बल्लेबाज या गेंदबाज का प्रदर्शन खराब है, तो उसमें खेल कहाँ खत्म हो रहा है? वैसे, इस साल गेंदबाजों के लिए 2 बाउंसर भी दिए गए हैं, जिसका सभी तेज गेंदबाजों ने खूब स्वागत किया। शुरुआती मैचों में इसका असर भी दिखा, फिर बल्लेबाजों ने अपने खेल में बदलाव किया और वो नए-नए तरीके अपनाने लगे। खैर, शॉट भी तो वही खेले जा रहे हैं, जो अब तक खेले जा रहे थे। रातों-रात तो कोई बदलाव हुआ नहीं है। ऐसे में क्रिकेट की हत्या हो गई, गेंदबाजों का कत्लेआम कर दिया गया जैसे टर्म्स अपनाने की जगह गेंदबाजों को और स्मार्ट बनने की जरूरत है, जो सुनील नरेन, जसप्रीत बुमराह, राहुल चाहर, राशिद खान जैसे बॉलर दिखा रहे हैं।
दिल्ली के भजनपुरा इलाके में एक हिन्दू युवक की चाकुओं से गोद कर निर्ममता से हत्या कर दी गई है। मृतक का नाम करण झा है जिनकी उम्र 19 साल थी। करण के साथ माधव नाम का एक अन्य युवक घायल हो गया है। हमले का आरोप अफजाल उर्फ़ अज्जू और उसके एक साथी समीर पर लगा है। घटना मंगलवार (23 अप्रैल, 2024) की है। पुलिस ने दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। मृतक मूलतः बिहार का रहने वाला था। हत्या के बाद करण के पिता को छोड़ कर उनका परिवार दिल्ली से पलायन कर के गाँव चला गया है।
यह मामला दिल्ली के भजनपुरा इलाके का है। यहाँ घटना के चश्मदीद और कातिलों के हमले में भुक्तभोगी 29 वर्षीय माधव गोयल ने पुलिस में FIR दर्ज करवाई है। माधव गोयल और करण में स्कूल के समय से दोस्ती थी। पहले करण झा माधव के साथ ड्राई फ्रूट की मंडी में काम करता था लेकिन 10 दिन पहले उसने भजनपुरा में ‘आर्टिस्ट कॉफी हाउस’ नाम से चाय, कॉफी और फास्टफूड की दुकान खोल ली थी। 23 अप्रैल (मंगलवार) की दुपहरी में माधव अपने दोस्त करण से मिलने उनकी दुकान पर गए थे। अपराह्न 3:30 पर करण अपने साथी माधव के साथ स्कूटी से घर की तरफ निकला।
घटना के समय स्कूटी करण चला रहा था। जैसे ही दोनों दोस्त दुकान से निकल कर मुख्य सड़क तक आए वैसे ही उनके दाईं तरफ से अफसर अली का बेटा अफजाल अचानक दौड़ता हुआ है। अफ़ज़ाल भजनपुरा के ही पास सुभाष नगर का निवासी है। उसके पास एक धारदार चाकू था। कोई कुछ समझ पाता इस से पहले ही अफ़ज़ाल ने करण झा के सीने में घोंप दिया। सीने पर घाव होते ही करण अपने साथी माधव सहित स्कूटी से नीचे गिर पड़ा। इसी दौरान 20-25 साल का एक अन्य लड़का वहाँ आया। उसने माधव को पीछे से दबोच लिया।
बताया जा रहा है कि यह दूसरा हमलावर समीर था। समीर ने भी घायल करण को 3-4 लातें मारीं। बाद में दोनों हमलावरों ने माधव को भी पीटना शुरू कर दिया। इसी दौरान आसपास के लोग जमा होने शुरू हो गए। लोगों को जुटता देख कर दोनों हमलावर मौके से भाग निकले। घायल करण को ई-रिक्शा पर लाद कर अस्पताल ले जाया गया जहाँ उसे मृत घोषित कर दिया गया। चोटिल हुए माधव का भी इलाज करवाया गया। मामले की सूचना पुलिस को दी गई तो वो मौके पर पहुँच कर कार्रवाई में जुट गई।
मिली थी अंजाम भुगतने की धमकी
पुलिस को दी गई शिकायत में माधव ने बताया है कि कुछ समय पहले करण का अफजाल उर्फ़ अज्जू से झगड़ा हुआ था। यह विवाद शैतान चौक पर हुआ था जिसके बाद अफजाल ने करण को अंजाम भुगतने की धमकी भी दी थी। माधव ने करण की हत्या के पीछे इसी झगड़े को वजह बताया है। करण के मकान मालिक भुवनेश सिंहल ने भी भी ऑपइंडिया को बताया कि करण और अफजाल में पहले भी झगड़ा हुआ था जो अब उसकी हत्या की वजह बन गया। मृतक का मोबाइल हमले में टूट गया था जिसे माधव ने पुलिस के पास जमा कर दिया है।
ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। अपनी FIR में माधव ने करण के कातिलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है। पुलिस ने अफ़ज़ाल और समीर के खिलाफ IPC की धारा 302, 323 और 34 के तहत कार्रवाई की है। दोनों को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया गया है। FIR में बताया गया है कि मृतक पर धारदार हथियार से वार किए गए जो मौत की वजह बना। पुलिस ने अपनी प्ररम्भित जाँच में बताया है कि घटनास्थल का मुआयना करने पर काफी खून बिखरा पाया गया। इस खून से सनी सफेद रंग की एक चप्पल भी मौके पर पड़ी थी। ऑपइंडिया के पास इस घटना का CCTV फुटेज मौजूद है।
दिल्ली छोड़ कर बिहार लौटा परिवार
ऑपइंडिया ने मृतक करण के मकान मालिक भुवनेश से बात की। भुवनेश ने हमें बताया कि करण 2 छोटी बहनों का एकलौता भाई था। वह परिवार का एकमात्र कमाऊ सदस्य था। उनका परिवार मूलतः बिहार के सीतामढ़ी जिले का रहने वाला है। करण की हत्या के बाद उनके पिता को छोड़ कर बाकी परिवार सीतामढ़ी चला गया है। भुवनेश ने बताया कि मृतक के परिजन काफी डरे हुए हैं और वो पलायन कर चुके हैं। मृतक के पिता महज कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए रुके हुए हैं।
करण का अंतिम संस्कार दिल्ली के निगमबोध घाट पर किया जा चुका है। करण के मकान मालिक भुवनेश का यह भी दावा है कि इस से पहले भी करण को मारने की तमाम कोशिशें की जा चुकी थीं। हमलावर कई दिनों से उसकी घात में थे। ऑपइंडिया ने इस मामले में पुलिस का पक्ष जानने के लिए DCP नार्थ ईस्ट को कॉल किया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। पुलिस का वर्जन आने के बाद उसे खबर में अपडेट किया जाएगा।
जम्मू कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय ने हाल ही में J&K प्रशासन को आदेश दिया है कि वो 2019 से ही नज़रबंदी (Preventive Detention) में रखे गए एक वकील को 5 लाख रुपए का मुआवजा दे। उक्त वकील का नाम मोहम्मद अली लोन उर्फ़ ज़ाहिद है। जस्टिस राहुल भारती ने कहा कि जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट उसे हिरासत में लेने के खिलाफ 3 बार आदेश दे चुका है। उस पर ‘पब्लिक सेफ्टी एक्ट’ (PSA) लगाया गया था। जज का कहना है कि पिछले फैसलों के खिलाफ अपील दायर करने की बजाए प्रशासन ने फिर से डिटेंशन ऑर्डर दे दिया।
जम्मू कश्मीर उच्च न्यायालय ने अली मोहम्मद लोन के खिलाफ चौथा डिटेंशन ऑर्डर रद्द करते हुए ‘बटरफ्लाई वीड्स’ की लेखिका लॉरा मिलर का एक उद्धरण दोहराया, “अतीत एक बहुत ही धृष्ट प्रेत है, जब तक मौका मिलता है वो पीछा करता ही रहता है।” हाईकोर्ट ने कहा कि पुलवामा के SSP की यही सोच है। बता दें कि 61 वर्षीय अली मोहम्मद लोन अलगाववादी रहा है। वो जमात-ए-इस्लामी का सदस्य था। उसे PSA के तहत सबसे पहले 2019 में हिरासत में लिया गया था।
उसकी हिरासत को हाईकोर्ट द्वारा रद्द किए जाने के बाद प्रशासन ने नया आदेश दिया। 2020 में दूसरी बार ऐसा हुआ, 2021 में तीसरी बार। 2022 में पुलवामा के SSP की अनुशंसा पर DM ने चौथी बार उसकी नजरबंदी का आदेश जारी किया। जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट ने अली मोहम्मद लोन को हिरासत में लिए जाने वाले फैसले को ‘पूर्वकल्पित’ करार देते हुए कहा कि बिना कोई अपराध सिद्ध हुए उसे जेल की बेड़ियों से बाँध कर रखा गया।
अली मोहम्मद लोन ने 25 लाख रुपए के मुआवजे की माँग की थी, लेकिन J&K उच्च न्यायालय ने 5 लाख दिए जाने का आदेश दिया। जजमेंट के 3 महीने के भीतर प्रशासन को उसे ये रकम देनी पड़ेगी। बता दें कि ‘जमात-ए-इस्लामी कश्मीर’ (JIJK) श्रीनगर का एक इस्लामी राजनीतिक दल है। वो कश्मीर को भारत का हिस्सा मानने की बजाए एक विवादित क्षेत्र मानता है और कहता है कि इसका समाधान UN (संयुक्त राष्ट्र) द्वारा किया जाना चाहिए। ज़ाहिद अली उसका प्रवक्ता था।
Why Jammu & Kashmir High Court ordered J&K administration to pay ₹5 lakh compensation to lawyer
भारत में 1941 में ही जमात-ए-इस्लामी मूवमेंट शुरू हो गया था। इसमें सक्रिय कट्टरवादी मौलाना मौदूदी की विचारधारा पर ही चल कर JIJK की स्थापना हुई थी। ये लोग इतने कट्टर थे कि ये शेख अब्दुल्ला को भी सेक्युलर मानते थे। सूफीवाद की आड़ में उन्होंने इस्लाम का प्रसार शुरू किया। श्रीनगर की जामिया मस्जिद में इनकी साप्ताहिक बैठक होती थी। 1960 के दशक में इसने कश्मीर के भारत में होने पर सवाल उठाया। चुनावों में ये अपने समर्थन से उम्मीदवार भी उतारता रहा है।
मध्य प्रदेश के ग्वालियर में साबिर खान नाम के युवक पर एक हिंदू लड़की के साथ लव जिहाद करने का मामला सामने आया है। साबिर ने युवती को पहले प्यार के जाल में फँसाया और फिर उसका शारीरिक शोषण करने लगा। इतना ही नहीं मारपीट करके उस पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया। पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया है कि साबिर ने उसे जबरन गोमांस खिलाया। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।
ग्वालियर के तारागंज निवासी 27 साल की एक महिला ने शुक्रवार (26 अप्रैल 2024) की शाम को बहोड़ापुर थाना पहुँची और शिकायत दर्ज कराई। युवती ने बताया कि वह तारागंज में रहती है और उसके पिता टेंट से जुड़ा कारोबार करते हैं। उसके घर के पास ही साबिर खान उर्फ छोटे खान रहता था। साबिर खान शादीशुदा है।
युवती ने बताया कि 6 अक्टूबर 2021 को साबिर खान ने उससे दोस्ती की। इसके बाद वह उससे अपनी बातों में फँसा लिया। दोनों की बातचीत होने लगी। जिस समय की यह घटना है, उस समय साबिर खान का निकाह नहीं हुआ था। युवती ने बताया कि साबिर की शादी होने के बाद उसने बात करना बंद कर दिया था। इसके बाद भी साबिर उसे लगातार परेशान करता था।
युवती ने आरोप लगाया कि एक दिन साबिर खान ने कहा कि अगर वह उसकी बात नहीं मानेगी तो वह सुसाइड कर लेगा और उसके पिता एवं भाई को फँसा देगा। लड़की भाई और पिता के जेल जाने की आशंका से डर गई और उससे जबरन बात करने लगा। एक दिन उसने युवती को मिलने के बहाने बुलाया और अपने साथ चलने के लिए कहा। युवती के इनकार किया तो उसने हत्या की धमकी दी।
वह युवती को लेकर अपने घर आ गया और वहाँ उसके साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद वह लड़की को ब्लैकमेल करने लगा। इस तरह ब्लैकमेल करते हुए साबिर उसे अपने साथ ले गया और 3 साल तक उसका शारीरिक शोषण करता रहा। इस दौरान साबिर उससे मारपीट भी करता था। युवती ने बताया कि साबिर ने उसके साथ सारी हदें पार कर दीं। उसने कई बार उसके साथ अप्राकृतिक कृत्य भी किया।
पीड़िता ने बताया कि साबिर उस पर धर्म परिवर्तन करके इस्लाम अपनाने का दबाव डालता था। साबिर कहता था, “मेरे साथ रह रही है तो तुझे मुसलमान बनना होगा।” युवती का कहना है कि जब वह धर्म परिवर्तन के लिए तैयार नहीं होती थी तो पीटा जाता था। इतना ही नहीं एक बार उसे गोमांस भी खिलाया गया। उसने बताया कि साबिर का पिता युसूफ खान और भाई समीर खान भी उससे मारपीट करते थे।
लड़की का कहना है कि साबिर के अलावा उसके घर वाले भी उसके साथ मारपीट करते थे। उसने बताया कि 25 अप्रैल की रात को साबिर खान की बीवी और बहन ने उसके साथ जमकर मारपीट की। इतना ही नहीं, उसे जान से मारने का प्रयास भी किया। इसी दौरान वहाँ मकान मालिक गया, जिसकी वजह से उसकी जान बच गई। युवती ने बताया कि इस घटना के बाद वह बेहद डर गई।
पीड़िता थाने आकर शिकायत करनी चाही, लेकिन उस समय महिला स्टाफ नहीं होने के कारण वह अगले दिन थाने आई और शिकायत दर्ज कराई। युवती की शिकायत पर साबिर खान के खिलाफ दुष्कर्म, मारपीट, धमकाने और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव की धाराओं में मामला दर्ज कर लिया। उसके पिता और भाई पर भी FIR दर्ज किया गया है। साबिर सहित तीनों आरोपित फिलहाल फरार हैं।
इस मामले में हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ताओं ने बहोड़ापुर थाने पर पहुँचकर नारेबाजी की। इन लोगों की माँग की है कि जिस तरह गुना में हुए अमानवीय कृत्य के बाद आरोपित का घर तोड़ा गया, उसी तरह ग्वालियर में भी आरोपित का घर तोड़ा जाए। इन लोगों ने आरोपित को फाँसी की सजा देने की माँग की।
श्रीलंका में तीन इंटरनेशनल एयरपोर्ट हैं। उसमें से 2 राजधानी कोलंबो में हैं, तो तीसरा दक्षिणी हिस्सा के हंबनटोटा शहर के पास। यही तीसरा एयरपोर्ट अब भारत और रूस की कंपनियाँ चलाएँगी। इस एयरपोर्ट का नाम है मट्टाला राजपक्षे इंटरनेशनल एयरपोर्ट और ये श्रीलंका का सबसे बड़ा रनवे वाला एयरपोर्ट है। ये एयरपोर्ट चीनी पैसों से बना है, जो श्रीलंका की अर्थव्यवस्था पर सबसे बड़ी मुसीबत है, क्योंकि चीन ने जो पैसा दिया है, उसका ब्याज काफी ज्यादा है। खैर, अब इस एयरपोर्ट को 30 साल के लिए भारत और रूस की कंपनियों को लीज पर दे दिया गया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन के एग्जिम बैंक से मिले लोन से इस एयरपोर्ट को बनाया गया था। आरोप है कि उस समय श्रीलंका के राष्ट्रपति रहे महिंद्रा राजपक्षे ने चीन से नजदीकी बढ़ाने के लिए इस एयरपोर्ट को बनवाया था। हालाँकि इस एयरपोर्ट पर हवाई जहाजों की आवाजाही इतनी कम है कि इसे सालों पहले दुनिया का सबसे ‘खाली’ एयरपोर्ट कहा गया और अब इस एयरपोर्ट को संवारने और फ्लाइट ऑपरेशंस को अंजाम देने के लिए भारत की शौर्या ऐरेनॉटिक्स (प्राइवेट) लिमिडेट और रूस की एयरपोर्ट्स ऑफ रीजंस मैनेजमेंट कंपनी को सौंप दिया गया है।
मट्टाला राजपक्षे इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सालाना 1 मिलियन पैसेंजर्स को हैंडल करने की क्षमता है, लेकिन पर्याप्त यात्रियों के न होने की वजह से तमाम इंटरनेशनल एयरलाइंस ने अपना बोरिया बिस्तर समेट लिया था। इस एयरपोर्ट को महिंद्र राजपक्षे द्वारा अपने गृह जिले में विकास दिखाने के तौर पर ‘सफेद हाथी’ की तरह माना जाता है, जिसकी वजह से देश की अर्थव्यवस्था का बंटाधार हुआ। ये एयरपोर्ट अपनी परिचालन लागत तक नहीं निकाल पा रहा है, जबकि इसके पास बड़ा कार्गो टर्मिनल है। इस एयरपोर्ट को बनाने के लिए 209 मिलियन डॉलर की रकम खर्च हुई थी, जो बाकी सारे कामों को बढ़ाते हुए 4 बिलियन डॉलर से ऊपर पहुँच गई।
जानकारी के मुताबिक, साल 2009 से इस एयरपोर्ट को बनाने का काम शुरू हुआ था। साल 2013 से इस एयरपोर्ट पर उड़ाने शुरू की गई थी, लेकिन 2018 आते-आते लगभग सभी कंपनियों ने अपने ऑपरेशन यहाँ से समेट लिए। साल 2020 में भी चर्चाएँ चली थी कि इस एयरपोर्ट को भारत की मदद से फिर से बढ़ाया जाएगा, लेकिन नई सरकार तब कोई फैसला नहीं ले पाई। हालाँकि अब शुक्रवार (26 अप्रैल 2024) को कैबिनेट ने फैसला लिया है कि अब इस एयरपोर्ट को चलाने के लिए भारतीय और रूसी कंपनी को 30 साल के लिए लीज पर दे दिया जाए।
तेलंगाना कॉन्ग्रेस ने अपने आधिकारिक ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) हैंडल से शनिवार (27 अप्रैल, 2024) को एक वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो के माध्यम से कॉन्ग्रेस दावा कर रही है कि भाजपा नेता अमित शाह ने एससी, एसटी और अनुसूचित जनजाति को मिल रहा आरक्षण खत्म करने का एलान किया है। इसी वीडियो के साथ कॉन्ग्रेस ने अपने कैप्शन में SC, ST और OBC के साथ अल्पसंख्यकों को भी भारतीय जनता पार्टी को वोट न देने के लिए भड़काया है।
यह वीडियो 17 सेकेंड का है। वीडियो में अमित शाह एक जनसभा को सम्बोधित करते दिख रहे हैं। इस वीडियो में अमित शाह को कहते दिखाया गया, “भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनेगी तो ये गैर-संवैधानिक SC, ST और OBC का है, वो रिजर्वेशन को हम समाप्त कर देंगे।” रिजर्वेशन खत्म करने की बात अमित शाह ने 2 बार कही है जिस पर जनता की तरफ से खूब तालियाँ बजीं हैं।
మతం పేరిట రాజకీయం చేస్తున్న బిజెపిలో ఉన్న SC,ST,OBC మైనారిటీ సోదర సోదరీమణులారా.. బిజెపికి ఓటు వేయాలా వద్దా అనేది ఈ వీడియో చూశాక నిర్ణయం తీసుకోండి.
భారత రాజ్యాంగం ఇచ్చిన రిజర్వేషన్ ఫలాలు అనుభవిస్తూ పొగరు, అహంకారంతో మళ్ళీ అధికారంలోకి వస్తే SC, ST, OBC, మైనారిటీల రిజర్వేషన్లు… pic.twitter.com/45VRpXsgJq
कॉन्ग्रेस ने इस वीडियो के साथ कैप्शन में लिखा है कि भाजपा में जो SC, ST, OBC या अल्पसंख्ययक समुदाय से हैं और धर्म की राजनीति कर रहे हैं वो वोट देने से पहले इस वीडियो को देखें। इसी कैप्शन में आगे अमित शाह, नरेंद्र मोदी और भाजपा को अहंकारी बताते हुए सबक सिखाने का आह्वान भी किया गया है। कॉन्ग्रेस ने इसी ट्वीट में संविधान बचाने की दुहाई देते हुए लिखा, “भाजपा को सत्ता से हटाओ, देश बचाओ।” हालाँकि, पोल खुलने के बाद अब ये वीडियो डिलीट कर लिया गया है।
एडिटेड है वीडियो
ऑपइंडिया ने इस वीडियो की पड़ताल की तो पाया कि यह वीडियो एडिटेड है। इसमें इस तरह से काट-छाँट की गई कि लोगों को यह लगे कि केंद्रीय गृहमंत्री जाति-आधारित आरक्षण खत्म करना चाहते हैं। असलियत तो यह है कि अमित शाह ने मुस्लिमों को मिल रहे असंवैधानिक आरक्षण खत्म कर के SC, ST और OBC को देने की कसम खाई थी। अमित शाह का यह वीडियो गुरुवार (25 अप्रैल, 2024) का है। तब वो तेलंगाना में एक चुनावी रैली को सम्बोधित कर रहे थे।
अपने इस पूरे भाषण में अमित शाह ने कहा था, ”कॉन्ग्रेस और TRS कभी भी तेलंगाना मुक्ति दिवस नहीं मनाते क्योंकि वे मजलिस (AIMIM) से डरते हैं। भाजपा ने तेलंगाना मुक्ति दिवस मनाने का निर्णय लिया है क्योंकि हम मजलिस (असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM) से नहीं डरते।” अमित शाह ने इसी सम्बोधन में आगे कहा, “भाजपा ने कॉन्ग्रेस और TRS द्वारा दिए गए मुस्लिम आरक्षण को खत्म करने और इसे एससी, एसटी और ओबीसी को देने का फैसला किया है।”
हमारी पड़ताल में यह बात निकल कर सामने आई कि अमित शाह ने एससी, एसटी और ओबीसी के लिए आरक्षण खत्म करने की बात नहीं की है। कॉन्ग्रेस की यह कोशिश लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण से पहले फर्जी खबरें फैला कर कई समुदायों के बीच उन्माद फैलाने वाली हरकत मानी जा रही है।
अमेरिका में हमास और फिलिस्तीन के समर्थन में छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बीच कोलंबिया यूनिवर्सिटी के एक इजरायल विरोधी छात्र नेता का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वो यहूदियों के सफाए की बात कह रहा है। वो वीडियो में कहते सुना जा रहा है कि ‘यहूदियों को जीने का हक नहीं। शुक्र मनाओ कि मैं बाहर जाकर यहूदियों की जान नहीं ले रहा।’ ये वीडियो अमेरिका के तमाम यूनिवर्सिटी कैंपस में चल रहे इजरायल विरोधी विरोध-प्रदर्शनों के बीच तेजी से वायरल हुआ है। इस वीडियो के वायरल होने के बाद, कोलंबिया यूनिवर्सिटी ने खैमनी जेम्स को
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस छात्र नेता की पहचान खैमनी जेम्स के तौर पर हुई है, जो सोशल मीडिया पर खुद को एंटी कैपिटलिस्ट, एंटी-इम्पीरियलिस्ट, स्टूडेंट और एजुकेटर कहता है। यही नहीं, वो दुनिया भर में चल रहे आजादी के आंदोलनों का खुद को समर्थक बताता है और आजाद फिलिस्तीन की वकालत करता है। लेकिन इस वीडियो में वो यहूदियों के खिलाफ जमकर आग उगल रहा है।
वीडियो में वो बोल रहा है, “यहूदियों के साथ सारे गोरे वर्चस्ववादियों को खत्म कर देना चाहिए, क्योंकि वो कमजोर लोगों को मार रहे हैं। मेरा शुक्र मनाइए कि मैं बाहर इन यहूदियों को मार नहीं रहा हूँ। हालाँकि मैंने कभी किसी को मारा नहीं है और उम्मीद करता हूँ कि ये नौबत न आए।”
इयान माइल्स चेओंग नाम के यूजर ने उसका वायरल हो रहा वीडियो पोस्ट करते हुए बताया है कि खैमनी जेम्स को कोलंबिया यूनिवर्सिटी से बाहर निकाल दिया गया है।
Hearing unconfirmed reports that Khymani James, the Columbia student protest leader who was exposed for expressing violent intent at Jews, was just expelled. pic.twitter.com/3O3oBRQBsA
इस वीडियो के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया दी। कोलंबिया यूनिवर्सिटी ने भी इस बयान की निंदा करते हुए कहा कि यह हिंसा को बढ़ावा देता है और विश्वविद्यालय के मूल्यों के खिलाफ है। कोलंबिया यूनिवर्सिटी ने उसे बाहर का रास्ता दिखा दिया है।