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कॉन्ग्रेस ही लेकर आई थी कर्नाटक में मुस्लिम आरक्षण, BJP ने खत्म किया तो दोबारा ले आए: जानिए वो इतिहास, जिसे देवगौड़ा सरकार की आड़ में छिपा रहे चमचे

कर्नाटक में मुस्लिम रिजर्वेशन पर घिरी कॉन्ग्रेस पार्टी का प्रचार तंत्र उनके बचाव में सोशल मीडिया पर एक्टिव है। कहा जा रहा है कि ये सारे मुस्लिमों को आरक्षण में रखने का काम कॉन्ग्रेस ने नहीं किया है बल्कि ये तो देवगौड़ा की सरकार ने किया है, जिन्होंने भाजपा के साथ मिलकर राज्य में सरकार बनाई थी। कुल मिलाकर इस पूरे मसले को ऐसा दिखाने की कोशिश हो रही कि इसमें कॉन्ग्रेस कोई तुष्टिकरण नहीं कर रही, जबकि हकीकत यह है कि कॉन्ग्रेस की करनी छिपाने के लिए देवगौड़ा सरकार का नाम आगे लाया जा रहा है और ये रिजर्वेशन जैसे आज कॉन्ग्रेस मुस्लिमों को दे रही है वैसे ही पहले कॉन्ग्रेस ने ही दिया था।

बात 1994 की है जब वीरप्पा मोईली की सरकार ने एक आदेश के बाद सारे मुस्लिमों को अन्य पिछड़ा वर्ग की सूची में डालकर आरक्षण दिया था। ये फैसला उन्होंने रेड्डी कमीशन की दी गई सिफारिश पर लिया था। इसमें 6 फीसद आरक्षण कैटेगरी 2बी के लोगों के लिए था जिन्हें ‘अधिक पिछड़ा’ कहा गया था।

इस 6% में भी 4% रिजर्वेशन मुस्लिमों को दिया गया था और 2% बौद्ध और अनुसूचित जाति के लोगों को, जो ईसाई धर्म में कन्वर्ट हो गए थे। इस आदेश को 24 अक्टूबर 1994 के बाद लागू होना था। हालाँकि इस बीच इस आरक्षण को सुप्रीम कोर्ट चुनौती दी गई और कर्नाटक सरकार के इस फैसले पर रोक लग गई।

इसके बाद साल 1995 में देवगौड़ा की सरकार आई और मुस्लिमों के लिए ओबीसी कोटा दोबारा से आया जिसे बाद में भारतीय जनता पार्टी की बोम्मई सरकार के आने के बाद हटाया गया और मुस्लिमों को दिए जाने वाला आरक्षण 4 फीसद वोक्कालिगा और लिंगायत में 2-2% बँट गया।

कर्नाटक की बोम्मई सरकार का पूरे राज्य में खूब विरोध हुआ। ये बात इतनी बढ़ी कि जब चुनाव नजदीक आए तो कॉन्ग्रेस ने सत्ता में आने के लिए इस मुद्दे को भुनाया। राज्य के कॉन्ग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने वादा किया कि अगर उनकी सरकार आई तो वो मुस्लिमों का 4 फीसद आरक्षण उन्हें लौटा देंगे। इतना ही नहीं, कॉन्ग्रेस नेता ने भाजपा के फैसले को असंवैधानिक तक कहा था और कहा था कि आरक्षण संपत्ति की तरह नहीं बाँट सकते, इस पर मुस्लिमों का अधिकार है।

साल 2023 में कॉन्ग्रेस ने इस आरक्षण को देने की बात अपने मेनिफेस्टो में भी कही थी। इसके बाद चुनावों में कॉन्ग्रेस की जीत हुई और सत्ता में आने के एक साल भी पूरे नहीं हुए कि इन्होंने मुस्लिमों से किए अपने वादे को पूरा करने के लिए सारे मुस्लिमों को ओबीसी कैटेगरी में आरक्षण दिलाने का काम शुरू कर दिया। लिस्ट जब पिछड़े वर्ग आयोग के पास भेजी गई तो ये मामला उठा और लोगों को कॉन्ग्रेस की हरकत का पता चला। अब आयोग इस मामले में सरकार के दिए तर्कों से संतुष्ट नहीं है इसलिए आने वाले समय में इस संबंध में मुख्य सचिव को तलब करेंगे।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ ही दिन पहले बताया था कि कैसे यूपीए सरकार के समय कॉन्ग्रेस नेता मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री पद पर होते हुए कहते थे कि इस देश की संपत्ति पर पहला अधिकार मुस्लिमों है… पीएम के इस बयान के कुछ ही समय बाद ये मामला खुल गया था कि कर्नाटक में कॉन्ग्रेस ने सारे मुस्लिमों को ओबीसी लिस्ट में रखकर आरक्षण देने का निर्णय लिया है। इसके बाद हर जगह कॉन्ग्रेस पर सवाल उठने लगे थे और उन्होंने देवगौड़ा सरकार पर ठीकरा फोड़कर ये दिखाना चाहा था कि उन्होंने इस आरक्षण की शुरू नहीं की और भाजपा उन्हें बदनाम करना चाहती है जबकि सच यही है कि कॉन्ग्रेस ने ही इस आरक्षण को मुस्लिमों को दिया था।

गर्लफ्रेंड का बर्गर खा गया दोस्त तो भड़क गया SSP का बेटा दानियाल नजीर, सुरक्षाकर्मी से रायफल छीन दाग दीं गोलियाँ, जज के बेटे की मौत

पड़ोसी देश पाकिस्तान के कराची शहर से एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। यहाँ एक युवक ने अपने करीबी दोस्त की गोली मारकर हत्या कर दी है। उसने अपने दोस्त की इसलिए हत्या कर दी, क्योंकि उसने अपनी गर्लफ्रेंड के लिए जिंजर बर्गर ऑर्डर किया था। उस बर्गर को उसके दोस्त खा गया।

रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ित की पहचान 17 वर्षीय अली केरियो के रूप में हुई है। अली कराची दक्षिण जिला सत्र न्यायाधीश जावेद केरियो का बेटा है। वहीं, आरोपित शूटर दानियाल नज़ीर मीरबहार वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) नज़ीर अहमद मीरबहार का बेटा है।

घटना 8 फरवरी 2024 की है। 8 फरवरी को दानियाल ने अपनी प्रेमिका शाज़िया को कराची के डिफेंस हाउसिंग अथॉरिटी (डीएचए) स्थित अपने घर पर आमंत्रित किया था। इस दौरान 17 वर्षीय उसका दोस्त अली केरियो और उसका भाई अहमर केरियो भी मौजूद थे।

उस दिन आरोपित दानियाल ने अपने और अपनी गर्लफ्रेंड शाजिया के लिए दो जिंजर बर्गर का ऑर्डर दिया। बर्गर आया तो अली ने एक बर्गर का आधा हिस्सा खा लिया। इससे दानियाल भड़क गया। उसने अपने सुरक्षा गार्ड की असॉल्ट राइफल छीन ली और उससे अली पर गोलियाँ चला दीं।

अली को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। जाँच अधिकारी ने जाँच में पुलिस अधिकारी के बेटे को शामिल करते हुए इसकी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को सौंप दी है। मामले की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। आरोपित दानियाल फिलहाल जेल में है।

मुंबई के मशहूर सोमैया स्कूल की प्रिंसिपल परवीन शेख को हिंदुओं से नफरत, PM मोदी की तुलना कुत्ते से… पसंद है हमास और इस्लामी हत्यारे

इजरायल और हमास के बीच की लड़ाई सिर्फ मिडिल-ईस्ट तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर भारत में भी दिखता है। हमास के समर्थक इस्लामिक कट्टरपंथियों में आतंकवाद के प्रति सहानुभूति साफ तौर पर नजर आती है। बहुत सारे कट्टरपंथी इजरायल के निरपराध नागरिकों की हत्याओं का ये कह कर बचाव कर रहे हैं हमास ने ये नृशंष हत्याएं आत्मरक्षा में उठाया।

अक्टूबर 2023 में हमास और फिलिस्तीनी लड़ाकों ने इजरायल की सीमा पार कर भीषण हमला किया था, जिसमें 1300 आम नागरिकों की हत्या कर दी गई तो 100 से ज्यादा लोगों को अगवा कर लिया गया। हमलावर आतंकियों ने महिलाओं का रेप किया, पुरुषों का सिर कलम किया और गर्भवती महिलाओं का पेट फाड़ डाला। इन घटनाओं का समर्थन करने वाले लोगों के बारे में ऑपइंडिया को एक ऐसी हमास समर्थक महिला की सूचना मिली, जिसके हाथों में हजारों बच्चों के भविष्य को बनाने की जिम्मेदारी है। वो महिला सोशल मीडिया पर न सिर्फ हमास समर्थक, बल्कि एंटी हिंदू पोस्ट को भी लाइक करती है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना कुत्ते से करती है।

मिलिए उसी महिला से, जिसका नाम परवीन शेख है। परवीन शेख मुंबई के मशहूर स्कूल द सोमैया स्कूल की प्रिंसिपल हैं। ये स्कूल मुंबई के घाटकोपर-ईस्ट इलाके में आने वाले विद्या विहार में स्थित है। परवीन शेख 12 साल से स्कूल से जुड़ी हुई हैं, जिनमें से 7 साल वो बतौर प्रिंसिपल काम कर चुकी हैं।

शेख के पास MSc की डिग्री है, तो MEd की भी। परवीन शेख 2 दशकों से शिक्षण के पेशे में है, इसकी जानकारी सोमैया स्कूल की वेबसाइट पर दर्ज है। परवीन शेख की अगुवाई में ये स्कूल कई सारे अवॉर्ड भी जीत चुका है।

सोमैया स्कूल की वेबसाइट का स्क्रीनशॉट

हजारों बच्चों के भविष्य को संवारने का जिम्मा जिस परवीन शेख पर है, उस पर ऐसे आरोपों की जानकारी मिलने के बाद ऑपइंडिया ने उसकी सोशल मीडिया प्रोफाइल की पड़ताल की।

परवीन शेख सोशल मीडिया पर लगातार सक्रिय नहीं दिखती, ऐसा उनके एक्स (पूर्व में ट्विटर) की गतिविधियों से पता चलता है। वो @ParveenShaikh1 नाम से एक्स पर हैं। चूँकि उनके संस्थान ने इसी हैंडल को टैग किया है, ऐसे में इस प्रोफाइल को हम असली मान कर चल रहे हैं। स्कूलुशंस पॉडकास्ट ने भी इसी हैंडल को टैग किया है। ठीक इसी तरह से सिम्हा TISS (टाटा इंस्टीट्यूट का हिस्सा) ने जून 2020 में परवीन शेख को इसी हैंडल को टैग किया है।

सोमैया स्कूल की प्रिंसिपल परवीन शेख के एक्स पर 250 फॉलोवर्स हैं, और 241 पोस्ट किए गए हैं। उनका एक्स हैंडल ज्यादा सक्रिय नहीं दिखता, अगर कुछ पोस्ट हैं भी तो वो स्कूल और परवीन शेख की उपलब्धियों के बारे में ही है। ऐसे में परवीन शेख की प्रोफाइल एक शिक्षाविद की ज्यादा दिखती है।

परवीन शेख के एक्स हैंडल की सामान्य पोस्ट

परवीन शेख की प्रोफाइल भले ही बाहर से एक शिक्षाविद की लग रही हो, लेकिन जैसे ही हम उनके ‘रिप्लाई’ और ‘लाइक’ की तरफ जाते हैं, तब जाकर परवीन शेख का असली चेहरा बेनकाब होता है।

परवीन शेख ने जो सबसे नया ट्वीट ‘लाइक’ किया है, वो है एक्स यूजर सुलेमान अहमद का, जिसमें यूएन में फिलिस्तीन के समर्थन में वोटिंग करने वाले देशों की लिस्ट है। ये उनका सबसे कम खतरनाक लगता है, क्योंकि फिलिस्तीन को समर्थन करना कोई अपराध नहीं है। हालाँकि इस ट्वीट को करने वाला सुलेमान अहमद खुद हिंदुओं और भारत के खिलाफ एक्स पर प्रोपेगेंडा चलाता रहता है।

परवीन शेख द्वारा लाइक किए गए ट्वीट का स्क्रीनशॉट

परवीन शेख ने 12 अप्रैल 2024 को एक अन्य ट्वीट को लाइक किया है, जिससे उनकी विचारधारा बेनकाब हो जाती है। शेख ने यहूदी विरोधी और फेक न्यूज पेडलर जैकसन हिंकल की पोस्ट लाइक की है, जिसमें वो हमास नेता इस्माइल हनियेह के बेटे और पोते की ‘मौत को शहादत’ बता रहा है। उन्हें इजरायल ने हमास आतंकी होने की वजह से मार दिया था और जैकसन के पोस्ट में दोनों को ‘शहीद’ बताया गया है। इससे पता चलता है कि उनका मानना है कि हमास को यहूदियों के खिलाफ अत्याचार करने के लिए अल्लाह ने आदेश दिया है।

परवीन शेख द्वारा पसंद किया गया ट्वीट

परवीन शेख ने एक्स पर हमास द्वारा इजरायल के खिलाफ जारी ‘प्रतिरोध’ से जुड़े बयानों को बार-बार लाइक किया है। बता दें कि हमास और उसके समर्थक 7 अक्टूबर 2023 को निरीह यहूदियों की हत्या को ‘प्रतिरोध’ बताकर प्रचारित करते हैं।

एक अन्य ट्वीट देखिए, जिसे परवीन शेख ने लाइक किया है।

इस पोस्ट में एनिमेटेड तस्वीर है, जिसमें काले कपड़ों में नकाबपोश व्यक्ति असाल्ट राइफल पकड़े हुए है। इसके कैप्शन में ‘अल्लाह से दुआ’ की प्रार्थना की गई है। जब हम इस ट्वीट के मूल पर जाते हैं, जिसके जवाब में ये पोस्ट किया गया है, तब हम पाते हैं वो ओरिजनल पोस्च, जिसमें हमास आतंकी -हमजा हिशाम अमीर की तारीफ की गई है। अमीर ने इजरायलियों पर आरपीजी से हमले किए थे, और उस समय वो आम नागरिकों के कपड़े में था। उसकी तारीफ न सिर्फ हमास ने की, बल्कि पूरी दुनिया के इस्लामिक कट्टरपंथियों ने उसकी शान में कसीदे गढ़े।

एक अन्य ट्वीट, जिसे शेख ने लाइक किया है, उसमें पोस्ट पकड़े एक व्यक्ति खड़ा है और उस पोस्ट पर लिखा है, ‘प्रतिरोध आतंकवाद नहीं है।’ ये पोस्ट हमास आतंकियों द्वारा 7 अक्टूबर को किए गए हमले को ‘आतंकवाद’ की जगह ‘प्रतिरोध’ बताकर सही साबित करने का प्रयास है।

परवीन शेख द्वारा लाइक किया गया पोस्ट

हमास के 7 अक्टूबर के हमले को ‘प्रतिरोध’ बताने वाली पोस्ट से आगे परवीन शेख ने हमास द्वारा जारी किए गए उस स्टेटमेंट यानी बयान को भी लाइक किया है, जिसमें हमास ने अपने ‘फाइटर्स’ द्वारा 7 अक्टूबर के ‘युद्ध’ में महिलाओं का रेप नहीं किया।

हमास का स्टेटमेंट, जिसे परवीन सेख ने लाइक किया है।

परवीन शेख ने एक अन्य ट्वीट जो पसंद किया है, उसमें दावा किया गया है कि हमास बुरा नहीं है।

परवीन शेख हमास के प्रति किस हद तक सहानुभूति रखती है, इसका पता इसी बात से लग जाता है कि 7 अक्टूबर को हमास द्वारा इजरायली नागरिकों के नरसंहार के दूसरे ही दिन उसने फिलिस्तीन के समर्थन वाली पोस्ट को लाइक किया है।

हमास ही नहीं, परवीन शेख भारत के इस्लामी कट्टरपंथियों की भी समर्थक

परवीन शेख ने 2021 में दिल्ली के हिंदू-विरोधी दंगों के आरोपित शरजील उसामी के ट्वीट को भी लाइक किया है, जिसमें समस्त हिंदुओं को ‘कट्टरपंथी’ कहा गया है।

अप्रैल 2022 में परवीन शेख ने ऐसे ट्वीट को लाइक किया है, जिसमें हिंदुओं को राम नवमी के मौके पर हुई हिंसा का जिम्मेदार ठहराया गया है और मुस्लिमों को ‘पीड़ित’ बताया गया है। जबकि हकीकत ये है कि 2022 की रामनवमी के दौरान हिंदुओं पर हमले हुए। खुद ऑपइंडिया ने 5 राज्यों में हुए ऐसे कई हमलों की रिपोर्ट प्रकाशित की थी।

परवीन शेख ने दिल्ली के हिंदू-विरोधी दंगों के मुख्य साजिशकर्ता उमर खालिज के समर्थन वाली पोस्ट को भी लाइक किया है।

परवीन शेख जाकिर नईक की भी फैन है।

हिंदू विरोधी ट्वीट्स भी लाइक करती है परवीन शेख

परवीन शेख ने ऐसा वीडियो भी लाइक किया है, जिसमें एक बच्चा ये बताता रहा है कि कैसे मंदिर जाने से केवल दुख और गरीबी आती है।

ये वीडियो यहाँ देखा जा सकता है।

ऑपइंडिया को परवीन का ऐसा ट्वीट भी मिला है, जिसमें वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना कुत्ते से करती दिख रही हैं।

परवीन शेख के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

यही नहीं, फरवरी 2022 में परवीन शेख पीएम मोदी को ‘रोल प्ले’ करने वाला करार दे रही हैं, साथ ही वो पीएम मोदी को फिल्म इंडस्ट्री भी ज्वॉइन करने की सलाह दे रही हैं।

यही नहीं, सोमैया स्कूल की प्रिंसिपल परवीन शेख पीएम मोदी को ‘फ्रॉड’, ‘शैतान’ और ‘नरसंहार’ को बढ़ावा देने वाला भी बताती दिख रही हैं।

अप्रैल 2021 के ट्वीट में परवीन शेख ने यूपी के सीएम को ‘आधुनिक जमाने का फिराउन’ कहा, जिसका इस्लामिक किताबों में शाब्दिक अर्थ ‘शैतान’ है।

यही नहीं, परवीन शेख सरकारी स्कूलों में हिजाब पहनने की भी समर्थक है, जबकि हिसाब धार्मिक रूप से इस्लाम का जरूरी हिस्सा नहीं है।

जून 2022 परवीन शेख ने केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान को ‘अपना जमीर शैतान को बेचने’ वाला कहा। जबकि वो कतर की सरकार से कह रहे थे कि वो (कतर) भारत के आतंरिक मामलों में हस्तक्षेप न करे।

पीएम नरेंद्र मोदी मोदी, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ और राष्ट्रवादी पत्रकारों को अपशब्द कहने वाली परवीन शेख हमास के नरेटिव को भी आगे बढ़ाती रही हैं। परवीन शेख यहूदी विरोधी बातों को भी आगे बढ़ाती दिख रही हैं।

परवीन शेख के ट्वीट्स के स्क्रीनशॉट

परवीन शेख एक तरफ सो हिंदू विरोधी ट्वीट्स को लाइक करती है, तो दूसरी तरफ कट्टरपंथी इस्लाम का विरोध करने वाले तकरीबन हर तर्क को कुतर्की के साथ खारिज करती है।

परवीन शेख के कुतर्क का स्क्रीनशॉट

परवीन शेख न सिर्फ हमास का खुलेआम समर्थन करती है, बल्कि भारतीय इस्लामिक कट्टरपंथियों का भी समर्थन करती है।

ये बात अभी साफ नहीं है कि सोमैया स्कूल ने कोई सोशल मीडिया पॉलिसी बनाई है या नहीं। शायद मैनेजमेंट भी अपने उन ‘शिक्षकों’ की सोशल मीडिया पर भी नजर नहीं रख पाता, जिन्हें उसने बच्चों को पढ़ाने के लिए नौकरी पर रखा है।

वैसे, परवीन शेख का बचाव करने वाला कोई ये कह सकता है कि ट्वीट ‘लाइक’ करने का मतलब उसका समर्थन करना नहीं होता। हालाँकि हम सब देख ही चुके हैं कि परवीन शेख खास विचारधारा से जुड़े ट्वीट्स सालों से लाइक कर रही हैं। कई सारे ट्वीट्स पर उन्होंने जवाब भी दिए हैं, जो ये समझने के लिए काफी है कि वो उन सभी ट्वीट्स और उनकी विचारधाराओं को बढ़ा रही है, जिसे वो लाइक कर रही है। अगर वो ट्वीट्स को सिर्फ ‘सुरक्षित’ करने के लिए लाइक कर रही होती, तो सिर्फ हमास समर्थक, इस्लामिक कट्टरपंथ समर्थक और एंटी-हिंदू ट्वीट्स को ही लाइक नहीं कर रही होती।

बहरहाल, ऑपइंडिया ने इस मामले में परवीन शेख को मेल भेजकर उनका पक्ष भी लेने की कोशिश की है, लेकिन 24 घंटों से अधिक समय बीत जाने के बाद भी अभी तक उनका कोई जवाब नहीं आया है। अगर उनका कोई जवाब आता है, तो हम अपनी स्टोरी को अपडेट करेंगे।

ये लेख मूल रूप से अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित किया है। मूल लेख पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

बिलाल हुसैन हिंदू नामों से लड़कियों को भेजता था अश्लील मैसेज और गंदी तस्वीरें, असम पुलिस ने दबोचा

असम की राजधानी गुवाहाटी में पुलिस ने मोहम्मद बिलाल हुसैन नाम के एक अपराधी को पकड़ा है। बिलाल एक लड़की और उसकी सहेलियों को साइबरस्टॉक कर रहा था। उसने इंटरनेट पर लड़की और उसके दोस्तों की मॉर्फ्ड और भद्दी तस्वीरें बनाकर साझा करके परेशान कर रहा था। बिलाल की हरकतों से तंग आकर लड़की ने इसकी शिकायत पुलिस में की थी।

गुवाहाटी पुलिस की क्राइम ब्रांच की टीम कई महीनों की जाँच के बाद आरोपित मोहम्मद बिलाल हुसैन को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक, घटना सितंबर 2023 में शुरू हुई। पीड़िता और उसके कॉलेज के कुछ दोस्तों के साथ अलग-अलग नामों से अवांछित कॉल और मैसेज आने लगे। इनमें अश्लील मैसेज होते थे।

बिलाल ने कभी नबजीत नाथ के नाम से और कभी नबजीत तालुकदार के नाम से इन लड़कियों को अश्लील मैसेज और मॉर्फ्ड तस्वीरें भेजनी शुरू कर दी। बिलाल अलग-अलग नामों ने इन लड़कियों को अश्लील मैसेज और तस्वीरें भेजता था। वह लड़कियों को धमकी भी देता था कि अगर उन्होंने इसके बारे में किसी को बताया तो गंभीर परिणाम होंगे।

क्राइम ब्रांच की जाँच में पता चला कि मोहम्मद बिलाल हुसैन ने अपना नाम बदलकर पीड़िताओं में से एक लड़की से ऑनलाइन दोस्ती कर ली थी। बातचीत करते हुए उसने लड़की का विश्वास जीत लिया था। इतना ही नहीं, कुछ समय के लिए उसके व्हाट्सएप अकाउंट भी वह चलाया करता था।

हालाँकि, जब पीड़िता और उसके दोस्तों को पता चला कि वह वास्तव में कोई और तो उन्होंने उससे बात करना बंद कर दिया। इससे बिलाल हुसैन गुस्सा हो गया और उसने इन लड़कियों की अश्लील तस्वीरें बनाकर उसे फैलाना शुरू कर दिया। पुलिस के अनुसार, “तकनीकी विश्लेषण और लोगों से मिली जानकारी के आधार हम आरोपित को कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु तक ट्रैक किए।”

पुलिस ने खुलासा किया, “उसकी पहचान मोहम्मद बिलाल हुसैन के रूप में हुई, जो असम के धुला में रहता है और जानबूझकर अपनी असली पहचान छिपा रहा था।” इसके बाद क्राइम ब्रांच की टीम को पता चला कि बिलाल हुसैन अपने गृहनगर दर्रांग के धुला में है। इसके बाद पुलिस ने 24 अप्रैल 2024 को उसे गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस का कहना है कि आरोपित ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है। पुलिस ने लड़कियों के उत्पीड़न में इस्तेमाल किए गए उसके मोबाइल फोन और सिम कार्ड को जब्त कर लिया है। पुलिस ने बिलाल हुसैन को अदालत में पेश किया, जहाँ से उसे पाँच दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है।

कर्नाटक में सारे मुस्लिमों को आरक्षण मिलने से संतुष्ट नहीं पिछड़ा आयोग, कॉन्ग्रेस की सरकार को भेजा जाएगा समन: लोग भी उठा रहे सवाल

कर्नाटक राज्य में सारे मुस्लिमों को आरक्षण देने का मामला शांत नहीं है। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने इस पर आपत्ति जताई थी और सरकार से जवाब माँगा था। अब राज्य का पक्ष देख आयोग ने कहा है कि वो उससे संतुष्ट नहीं है और जल्द दी मुख्य सचिव को समन भेजने वाले हैं।

एनसीबीसी अध्यक्ष हंसराज अहीर ने कहा, “कर्नाटक में मुस्लिमों की सभी जातियों/समुदायों को नागरिकों का सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़ा वर्ग माना जा रहा है और उन्हें राज्य की पिछड़ा वर्ग सूची में श्रेणी IIB के तहत अलग से मुस्लिम जाति के रूप में वर्गीकृत किया गया है।”

उन्होंने कहा, “यह वर्गीकरण उन्हें भारत के संविधान के अनुच्छेद 15(4) और 16(4) के अनुसार शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश और राज्य की सेवाओं में पदों और रिक्तियों पर आरक्षण प्राप्त करने में सक्षम बनाता है।”

एनसीबीसी ने इस बात पर जोर दिया है कि हालाँकि मुस्लिम समुदाय के भीतर वास्तव में वंचित और ऐतिहासिक रूप से हाशिए पर रहने वाले वर्ग हैं, लेकिन सारे लोगों को पिछड़ा मानने से मुस्लिम समाज के भीतर विविधता और जटिलताओं की अनदेखी होगी।” अहीर का कहना है कि वो इस मामले पर राज्य सरकार से मिली प्रतिक्रिया संतोषजनक नहीं हैं। वह इस फैसले पर स्पष्टीकरण देने के लिए कर्नाटक के मुख्य सचिव को बुलाएँगे।

बता दें कि इस कर्नाटक में सारे मुस्लिमों को आरक्षण देने के फैसले की चारों ओर से आलोचना हो रही है। सोशल मीडिया पर लोग पीएम मोदी की उस बात को सही बता रहे हैं जहाँ उन्होंने बताया कि मनमोहन सिंह ने पीएम रहते हुए कहा था कि देश के संसाधनों पर पहला हक मुस्लिमों का है। इसके अलावा राज्य सरकार के फैसले पर NCBC ने कर्नाटक की इस नीति को सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध बताया था। पिछले साल NCBC ने ग्राउंड पर जाकर आरक्षण की स्थति का पता लगाया था। आयोग का कहना है कि ऐसे में मुस्लिमों में जो जातियाँ शिक्षिक-सामाजिक रूप से पिछड़ी हैं उनकी भी हकमारी हो रही है।

2011 के जनगणना के अनुसार राज्य में मुस्लिम जनसंख्या करीब 12.92 फीसदी है। ऐसे में एनसीबीसी ने सरकार के फैसले पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे स्थानीय निकाय चुनाव में आरक्षण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। कर्नाटक में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए स्थानीय निकाय चुनाव में 32 फीसदी आरक्षण का दिया जाता है। इस आरक्षण को विभिन्न समुदायों में बाँटने की माँग उठ रही है।

सबूतों का नष्ट करना शराब घोटाले में केजरीवाल की संलिप्तता के प्रमाण: सुप्रीम कोर्ट में ED ने कहा- उनके साथ आम कैदियों जैसा ही व्यवहार होगा

शराब घोटाले में जेल में बंद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कोर्ट में अपनी बात रखी है। ED ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि अरविंद केजरीवाल से अन्य कैदियों से अलग व्यवहार इसलिए नहीं किया जा सकता कि वे राजनेता हैं। एजेंसी ने कहा कि ऐसा करना मनमाना और संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत निहित समानता के अधिकार के सिद्धांत का उल्लंघन होगा।

प्रवर्तन निदेशालय ने 24 अप्रैल 2024 को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष हलफनामा दायर किया। इसमें एजेंसी ने कहा कि अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 19 के तहत आवश्यक सामग्री के कब्जे पर आधारित थी, जो अपराध में उनके शामिल होने का संकेत देगी। एजेंसी ने यह भी कहा कि सबूतों को मिटाना भी उनके अपराध में शामिल होने का संकेत देता है।

इसके अलावा, ED ने कहा कि आरोपितों ने मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध के सबूतों को नष्ट करने के लिए सचेत प्रयास किए। हलफनामे में कहा गया है, “सबूत नष्ट करना पीएमएलए की धारा 50 (जो खुद कानूनी रूप से स्वीकार्य साक्ष्य है) के तहत इन आरोपितों के बयानों की पुष्टि है और साथ ही मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध में इन आरोपियों की संलिप्तता है।”

एजेंसी ने अरविंद केजरीवाल के इस तर्क को भी खारिज कर दिया कि उनकी गिरफ्तारी आगामी लोकसभा चुनावों के कारण हुई है। ED के हलफनामे के अनुसार, “सामग्री के आधार पर अपराध करने वाले किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी, चाहे वह कितना भी बड़ा क्यों न हो, कभी भी स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की अवधारणा का उल्लंघन नहीं है।”

प्रवर्तन निदेशालय ने आगे तर्क दिया कि अगर अरविंद केजरीवाल की बात को स्वीकार कर लिया जाता है तो अपराधी राजनेताओं को इस आधार पर गिरफ्तारी से छूट मिल जाएगी कि उन्हें चुनाव में प्रचार करना आवश्यक है। ईडी के सबूतों को लेकर कहा कि शराब घोटाले की जाँच में बड़े पैमाने पर सबूतों को नष्ट करने की कोशिश की गई और इसे इसी पृष्ठभूमि को देखा जाना चाहिए।

हलफनामे में ED ने कहा, “घोटाले की अवधि में और जब 2021-22 की दिल्ली उत्पाद शुल्क नीति में घोटाला और अनियमितताएँ सार्वजनिक हो गईं, तब 36 व्यक्तियों (आरोपित और इसमें शामिल अन्य व्यक्तियों) द्वारा कुल 170 से अधिक मोबाइल फोन बदले/नष्ट किए गए।”

इसमें आगे कहा गया है, “घोटाले और धन के लेन-देन के महत्वपूर्ण डिजिटल सबूतों को आरोपियों और इसमें शामिल अन्य व्यक्तियों द्वारा सक्रिय रूप से नष्ट कर दिया गया है। सबूतों के इतने सक्रिय और आपराधिक विनाश के बावजूद एजेंसी महत्वपूर्ण सबूतों को फिर से हासिल करने में सक्षम रही है, जो सीधे तौर पर प्रक्रिया में याचिकाकर्ता का खुलासा करती है।”

अरविंद केजरीवाल के खिलाफ मामले को स्पष्ट करते हुए ED ने कहा, “100 करोड़ रुपए की रिश्वत राशि के लिए याचिकाकर्ता ने एक नीति बनाई, जिससे भुगतान की गई रिश्वत की वसूली की सुविधा हुई। रिश्वत देने वाले (इंडोस्पिरिट्स) ने थोक मुनाफे की आड़ में 192 करोड़ रुपए वसूले। जिस नीति ने थोक व्यापारी का मुनाफ़ा 12% तय किया, उससे दी गई रिश्वत की वसूली संभव हो गई।”

ED ने आगे कहा, “इस प्रकार वसूल की गई रिश्वत राशि को बेदाग थोक विक्रेता के लाभ के रूप में पेश किया गया। इस प्रकार याचिकाकर्ता एक नीति बनाने में सक्रिय रूप से सहायता करके अपराध की आय से जुड़ी प्रक्रिया या गतिविधि में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से शामिल था, जो थोक लाभ की आड़ में रिश्वत देने वालों द्वारा रिश्वत की वसूली को सक्षम करेगा।”

दरअसल, अरविंद केजरीवाल ने शराब घोटाले में ED द्वारा की गिरफ्तारी को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन उनकी याचिका खारिज हो गई थी। इसके बाद वे सुप्रीम कोर्ट पहुँचे थे। हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने कहा था कि इस बात के सबूत हैं कि घोटाले में केजरीवाल की संलिप्तता थी और रिश्वत के रूप में प्राप्त धन का इस्तेमाल 2022 के गोवा विधानसभा चुनावों में प्रचार के लिए किया गया था।

‘…मेरे जीवन के बुरे दिन समाप्त हुए’ : BJP में शामिल होकर बोले यूट्यूबर मनीष कश्यप, लालू परिवार पर निशाना साधा

यूट्यूबर मनीष कश्यप आज (25 अप्रैल 2024) भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए हैं। इससे पहले वो चंपारण सीट से निर्दलीय लोकसभा चुनाव लड़ने की तैयारी में थे। कश्यप ने अपनी माँ के साथ दिल्ली आकर पार्टी हेडक्वार्टर में सांसद मनोज तिवारी की मौजूदगी में भाजपा की सदस्यता ली।

बीजेपी ज्वाइन करने के बाद उन्होंने कहा, “हम कल मनोज तिवारी के साथ बिहार से आए। उनके कारण ही मैं जेल से रिहा हो सका और मेरे जीवन के बुरे दिन समाप्त हुए, इसलिए, मैं भाजपा में शामिल हो गया। हमें बिहार को मजबूत करना है।”

उन्होंने कहा, “लालू परिवार ने बिहार को लूटा और बर्बाद किया। बीजेपी के साथ मिलकर बिहार को मजबूत करूँगा…मुझ पर आरोप लगाए गए लेकिन पटना कोर्ट ने न सिर्फ मुझे जमानत दे दी बल्कि बरी भी कर दिया। मुझ पर लगाया गया एनएसए वापस ले लिया गया…सनातन को बदनाम करने वालों और राष्ट्रवाद के विरोधियों के खिलाफ मेरी लड़ाई जारी रहेगी…।”

वहीं मनीष के भाजपा ज्वाइन करने पर बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने कहा, “मनीष कश्यप ने बीजेपी ज्वाइन किया है। उनकी माता जी उपस्थित हैं। मनीष कश्यप ने जनता के सरोकार को उठाया है। हमेशा मोदी जी समर्थन में बात की, लेकिन कुछ दलों ने उनको बहुत दुख दिया। इनका हमेशा बीजेपी ने साथ दिया है।”

बता दें कि मनीष कश्यप पर तमिलनाडु सरकार ने NSA लगाया था। यूट्यूबर कश्यप पर तमिलनाडु में बिहार के मजदूरों को लेकर कथित तौर पर फर्जी वीडियो शेयर करने का आरोप लगा था। इसके बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। 9 नहीने बाद जाकर उनकी इस केस में रिहाई हुई थी। जेल से निकलने के बाद ही खबरें आई थीं कि वह निर्दलीय चुनाव में खड़ें होंगे। इसके लिए वह जगह-जगह घूमे और लोगों से मिले भी। लेकिन, भाजपा ज्वाइन करने के बाद उन्होंने कहा कि वो चुनाव नहीं लड़ रहे।

मार्क्सवादी सोच पर नहीं करेंगे काम: संपत्ति के बँटवारे पर बोला सुप्रीम कोर्ट, कहा- निजी प्रॉपर्टी नहीं ले सकते

संपत्ति के बँटवारे मामले में बढ़ रहे राजनैतिक विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (24 अप्रैल 2024) को कहा है कि वो इस मामले में किसी मार्क्सवादी विचार का काम नहीं करेंगे। कोर्ट ने कहा कि वह संपत्ति बँटवारे मामले में संविधान के अनुच्छेद 39 (ब) पर जस्टिस वीर कृष्णा की 1977 में की गई ‘मार्क्सवादी टिप्पणी’ का पालन नहीं करेंगे, जिसमें कहा गया था कि सार्वजनिक भलाई के लिए एक समुदाय के ‘भौतिक संसाधनों’ में पुनर्वितरण के लिए निजी संपत्तियाँ शामिल होंगी।

बता दें कि संविधान के अनुच्छेद 39 (B) में प्रावधान है कि राज्य अपनी नीति को यह सुनिश्चित करने की दिशा में निर्देशित करेगा कि ‘समुदाय के भौतिक संसाधनों का स्वामित्व और नियंत्रण इस प्रकार वितरित किया जाए जो आम लोगों की भलाई के लिए सर्वोत्तम हो’। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई की अध्यक्षता में 9 जजों की पीठ विभिन्न याचिकाओं से उत्पन्न जटिल कानूनी प्रश्न पर विचार कर रही है कि क्या निजी संपत्ति को संविधान के अनुच्छेद 39(बी) के तहत ‘समुदाय का भौतिक संसाधन’ माना जा सकता है।

इसी की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी कहा कि कहना ‘खतरनाक’ होगा कि किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति को ‘समुदाय का भौतिक संसाधन’ नहीं माना जा सकता, साथ ही ‘सार्वजनिक भलाई’ के लिए राज्य की तरफ से उस पर कब्जा नहीं किया जा सकता। सुनवाई के दौरान, बेंच ने कहा कि समुदाय के भौतिक संसाधन और निजी संपत्ति में फर्क होना चाहिए। कोई बिन कीमत चुकाए निजी संपत्ति नहीं ले सकता, लेकिन चूँकि समुदाय के भौतिक संसाधनों में नैचुरल रिसोर्स भी आते है। इसलिए अगर किसी व्यक्ति के पास निजी वन है तो ऐसा नहीं कह सकते कि जरूरत पड़ने पर समुदाय के लिए उसका प्रयोग नहीं हो पाएगा। अदालत ने कहा कि आर्टिकल 39 (ब) का प्रयोग किसी की निजी संपत्ति लेने के लिए नहीं करना चाहिए।

TOI की रिपोर्ट के अनुसार सीजेआई ने कहा, “हमें 1977 के रंगनाथ रेड्डी मामले में (अनुच्छेद 39(बी) की) जस्टिस कृष्णा अय्यर की मार्क्सवादी समाजवादी व्याख्या तक जाने की जरूरत नहीं है, लेकिन सामुदायिक संसाधनों में निश्चित रूप से वे संसाधन शामिल होंगे जिन पर वर्तमान पीढ़ी भरोसा करती है।” उन्होंने आगे संपत्ति बँटवारे मामले में दो विचार समझाए। कोर्ट ने कहा,

“मार्क्सवादी समाजवादी दृष्टिकोण यह है कि सब कुछ राज्य और समुदाय का है। पूंजीवादी दृष्टिकोण व्यक्तिगत अधिकारों को महत्व देता है। इसके अलावा अंतर-पीढ़ीगत समानता की रक्षा के लिए संसाधनों को भरोसे में रखने का गाँधीवादी दृष्टिकोण है।”

जानकारी के लिए: साल 1977 में रंगनाथ रेड्डी मामले में कोर्ट की बहुमत ने स्पष्ट किया था कि समुदाय के भौतिक संसाधनों में निजी संपत्ति शामिल नहीं है। वहीं, जस्टिस अय्यर का अलग रूख था। उन्होंने कहा था कि जनता की भलाई के लिए एक समुदाय के ‘भौतिक संसाधनों’ में पुनर्वितरण के लिए निजी संपत्तियाँ शामिल होंगी।

मोहम्मद जुबैर को ‘जेहादी’ कहने वाले व्यक्ति को दिल्ली पुलिस ने दी क्लीनचिट, कोर्ट को बताया- पूछताछ में कुछ भी आपत्तिजनक नहीं मिला

प्रोपेगेंडा वेबसाइट AltNews के संस्थापक मोहम्मद जुबैर को ‘जेहादी’ कहने वाले जगदीश कुमार को दिल्ली पुलिस ने क्लीनचिट दी है। दिल्ली पुलिस ने दिल्ली हाई कोर्ट को बताया है कि जगदीश कुमार के खिलाफ कुछ भी आपत्तिजनक नहीं पाया गया है। दरअसल जगदीश कुमार ने जुबैर को लेकर कहा था कि ‘एक जिहादी हमेशा जिहादी ही रहता है’।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया कि उसने जगदीश कुमार से उसके इरादों के बारे में पूछताछ की थी और उनके बयान में कुछ भी आपत्तिजनक नहीं निकला। दिल्ली पुलिस ने कहा कि जगदीश कुमार के ट्वीट से जनता में भय या चिंता पैदा नहीं होती है। इसीलिए उनके खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है।

अदालत में पेश की गई दिल्ली पुलिस की रिपोर्ट में कहा गया है, “शिकायतकर्ता श्री जगदीश सिंह द्वारा किए गए कैप्शन वाले ट्वीट और इस संबंध में उनकी जाँच से पता चला है कि 18.04.2020 को किए गए कैप्शन वाले ट्वीट से जनता या जनता के किसी भी वर्ग में भय या चिंता पैदा नहीं होती है, जिससे कोई भी व्यक्ति राज्य के विरुद्ध या सार्वजनिक शांति के विरुद्ध अपराध करने के लिए प्रेरित हो। उपरोक्त के मद्देनजर शिकायतकर्ता यानी श्री जगदीश सिंह के खिलाफ उपरोक्त ट्वीट के संबंध में कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है।”

दरअसल, इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने जगदीश कुमार के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने और जुबैर के खिलाफ FIR दर्ज करने पर दिल्ली पुलिस की खिंचाई की थी। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने अदालत में अपनी रिपोर्ट पेश की है। यह घटना साल 2020 की है। जुबैर ने अपने ट्वीट में जगदीश कुमार को ट्रोल कहा था और उनकी डिस्प्ले तस्वीर को रीट्वीट किया था।

अपने ट्वीट में मोहम्मद जुबैर ने लिखा था, “नमस्कार जगदीश सिंह। क्या आपकी प्यारी पोती को सोशल मीडिया पर लोगों को गाली देने के आपके पार्ट टाइम काम के बारे में पता है? मैं आपको अपना प्रोफ़ाइल चित्र बदलने का सुझाव देता हूँ।” हालाँकि, जगदीश कुमार की प्रोफाइल फोटो को रिट्वीट करते हुए जुबैर ने उनकी पोती की तस्वीर को धुंधला कर दिया था।

इसके बाद दिल्ली पुलिस ने जुबैर पर मामला दर्ज कर लिया था। जुबैर के खिलाफ दर्ज FIR में ट्विटर पर एक नाबालिग लड़की को ‘धमकी देने और प्रताड़ित करने’ के लिए यौन उत्पीड़न से बच्चों की सुरक्षा अधिनियम (POCSO) के प्रावधानों के साथ-साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराएँ भी लगाई गई हैं।

दिल्ली पुलिस ने बाद में हाई कोर्ट के समक्ष एक हलफनामा दायर कर कहा कि उसने आरोप पत्र में जुबैर का नाम नहीं लिया है, क्योंकि उसे जुबैर के खिलाफ कोई आपराधिक मामला बनता हुआ कुछ नहीं मिला। हालाँकि, दिल्ली उच्च न्यायालय ने जुबैर के खिलाफ कथित ‘घृणास्पद ट्वीट’ करने वाले जगदीश कुमार के खिलाफ कार्रवाई करने में विफल रहने के लिए पुलिस की खिंचाई की।

न्यायमूर्ति अनुप जयराम भंभानी ने कहा कि अगर जुबैर के खिलाफ नफरत फैलाने वाला भाषण देने के लिए जगदीश कुमार के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो अदालत अपना कर्तव्य नहीं निभाएगी। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से कहा था, “आपने उसके (जुबैर) खिलाफ खूब प्रहार किए, लेकिन मामला अब उसी तरह से खत्म हो गया है जैसा कि होना चाहिए था क्योंकि उसके खिलाफ कोई सबूत नहीं था। लेकिन आपने इस आदमी (जगदीश कुमार) के खिलाफ क्या कार्रवाई की है।”

‘इंदिरा की संपत्ति के लिए राजीव गाँधी सरकार ने बदल दिया था कानून, 4 पीढ़ियों तक नामदारों ने की मौज’: पीएम मोदी ने बताई ‘विरासत कर’ की सियासत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्य प्रदेश में विजय संकल्प रैली को संबोधित किया। उन्होंने कॉन्ग्रेस पर जोरदार हमला बोला। मुरैना में जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी कहा, “…मध्य प्रदेश के लोग जानते हैं कि किस समस्या से एक बार पीछा छूट जाए तो फिर उस समस्या से दूर ही रहना चाहिए। कॉन्ग्रेस पार्टी ऐसी ही विकास विरोधी एक बहुत बड़ी समस्या है। चंबल के लोग कॉन्ग्रेस का वो दौर कैसे भूल सकते हैं? कॉन्ग्रेस ने चंबल की पहचान खराब कानून-व्यवस्था और ऐसे क्षेत्र के तौर पर बना दी थी…” इस दौरान पीएम मोदी ने इनहैरिटेंट कानून को लेकर कॉन्ग्रेस पर निशाना साधा और कहा कि इंदिरा जी की मौत के बाद उनकी प्रॉपर्टी कहीं सरकार न ले ले, इसके लिए राजीव गाँधी की सरकार ने कानून ही बदल दिया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुरैना में जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, “इन दिनों कॉन्ग्रेस के शहजादे, आज कल वो इतने चिंतित हैं कि आए दिन उनको मोदी का अपमान करने में मजा आता है। मोदी के लिए भला-बुरा कहने में उनको मजा आ रहा है और मैं देख रहा हूँ सोशल मीडिया में, टी.वी. में बहुत सारे लोग चिंता जताते हैं कि ये भाषा अच्छी नहीं है। ऐसी भाषा देश के प्रधानमंत्री के लिए बोलना ठीक नहीं है… कुछ लोग बहुत दुखी हो जाते हैं कि मोदी जी को ऐसा क्यों बोला?… मेरी सबसे विनती है कि कृपा करके आप दुखी मत हों, आप गुस्सा मत कीजिए। आपको पता है कि ये नामदार हैं, हम तो कामदार हैं। और नामदार तो कामदार के साथ सदियों से ऐसे ही गाली-गलौज करते हुए आए हैं… मैं तो आपमें से आता हूँ, गरीबी से निकला हूँ, अगर 5-50 गालियाँ पड़ जाएँगी तो पड़ जाएँगी। आप गुस्सा मत कीजिए…”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुरैना में जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, “भाजपा के लिए देश से बड़ा और कुछ भी नहीं है और कॉन्ग्रेस के लिए अपना परिवार ही सब कुछ है। कॉन्ग्रेस की नीति है जो देश के लिए सबसे ज्यादा योगदान करे, सबसे ज्यादा मेहनत करे, सबसे ज्यादा समर्पण करे, उसे सबसे पीछे रखो। इसलिए कॉन्ग्रेस ने वर्षों तक सेना के जवानों की ‘वन रैंक वन पेंशन’ जैसी माँग पूरी नहीं होने दी। हमने सरकार बनते ही ‘वन रैंक वन पेंशन’ को लागू किया। हमने सीमा पर खड़े जवानों की सुविधा की भी चिंता की। कॉन्ग्रेस सरकार ने जवानों के जो हाथ बाँध रखे थे, हमने उन्हें भी खुली छूट दे दी। हमने कहा कि अगर एक गोली आती है तो 10 गोली चलनी चाहिए। अगर एक गोला फेंकते हैं तो 10 तोपें चल जानी चाहिए।”

पीएम मोदी ने कहा कि आज कल शाही परिवार के शहजादे पूरे देश में बढ़ चढ़ कर कह रहे हैं, अब आपकी संपत्ति का एक्सरे होगा और आलमारी में क्या पड़ा है, उसका पता लगाया जाएगा। माता-बहन ने कुछ बचत की है, तो एक्सरे करके खोजा जाएगा। लॉकर का एक्सरे किया जाएगा। स्त्री धन पर भी उनकी नजर है। कॉन्ग्रेस उसे जब्त करके अपने वोटबैंक को मजबूत करने के लिए उसे बाँटने की सार्वजनिक घोषणा कर रही है, मेनिफेस्टो में बता रही है। मैंने पहले ही दिन कहा था कि इनका मेनिफेस्टो मुस्लिम लीग का ही प्रतिबिंब है।

पीएम मोदी ने कहा, “जीते जी तो छोड़िए, मृत्यु के बाद भी, आपकी बची हुई संपत्ति जो स्वाभाविक रूप से आपके बेटे-बेटी को मिलनी चाहिए, वो भी आप नहीं दे पाएँगे। आप ने कितनी भी मेहनत करके उसे इकट्ठा किया होता, कॉन्ग्रेस वाले ऑफिसियली कहते हैं कि आपकी कमाई का आधे से ज्यादा उनकी सरकार छीन लेगी। कॉन्ग्रेस आपकी विरासत पर इनहेरिटेंट टैक्स लगाना चाहती है। इससे जुड़े जो तथ्य अब सामने निकल कर आ रहे हैं, वो आँखें खोलने वाले हैं।”

पीएम मोदी ने खोला इंदिरा-राजीव गाँधी का किस्सा

पीएम मोदी ने कहा, “मैं आज देश के सामने पहली बार एक दिलचस्प तथ्य आपके सामने रखना चाहता हूँ। जब देश की एक प्रधानमंत्री बहन जी नहीं रही, तो उनकी जो मिल्किय थी, उनकी जो प्रॉपर्टी थी, वो उनकी संतानों को मिलनी थी। लेकिन पहले ऐसा कानून था कि उनको मिलने से पहले एक हिस्सा सरकार ले लेती थी। ऐसा कानून कॉन्ग्रेस ने ही बनाया था। जब इंदिरा जी नहीं रही, तब उनके बेटे राजीव जी को प्रॉपर्टी मिलनी थी, उस प्रॉपर्टी को बचाने के लिए उस समय के प्रधानमंत्री श्रीमान राजीव गाँधी ने, अपनी संपत्ति बचाने के लिए पहले जो इनहेरिटेंट कानून था, उसे समाप्त किया और अपने पैसे बचा लिए। खुद पर जब आई, तब कानून ही बदल दिया। और आज सत्ता पाने के बाद वही कानून कॉन्ग्रेस वाले वापस लाना चाहते हैं।” उन्होंने कहा, “बिना टैक्स के अपने परिवार के 4-4 पीढ़ियों की अकूत धन-दौलत हासिल करने के बाद आप जैसे सामान्य मानविकी की विरासत, आपकी मेहनत की कमाई, जो आपने अपने बच्चों के लिए बचत करके रखा है, उसकी आधी संपत्ति लूटना चाहते हैं। इसीलिए पूरा देश कह रहा है, ‘कॉन्ग्रेस की लूट जिंदगी के साथ भी, जिंदगी के।’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुरैना में जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, “कॉन्ग्रेस दलितों का, पिछड़ों का, आदिवासियों का, हक छीनने का षडयंत्र लंबे समय से कर रही है। 19 दिसंबर 2011 में जब उनकी सरकार थी, तब भी कॉन्ग्रेस की केंद्र सरकार धर्म के नाम पर आरक्षण देने का एक नोट संसद में लेकर आई। इस संसदीय नोट में ये कहा गया था कि OBC समाज को जो 27 प्रतिशत आरक्षण मिलता है, मंडल कमीशन के अनुसार जो आरक्षण मिलता है, उस आरक्षण का एक हिस्सा काटकर के, मजहब के नाम पर दिया जाएगा। सिर्फ दो दिन बाद, 22 दिसंबर 2011 को इसका आदेश भी निकाल दिया गया। बाद में आंध्र प्रदेश के हाई कोर्ट ने कॉन्ग्रेस सरकार के इस आदेश को रद्द कर दिया। ये सुप्रीम कोर्ट में गए लेकिन राहत नहीं मिली। तब 2014 में कॉन्ग्रेस ने घोषणापत्र में लिखा कि धर्म के आधार पर आरक्षण देने के लिए कानून बनाना पड़े तो कानून भी बनाएंगे… उसके बाद इन समाजों ने एक होकर, कॉन्ग्रेस के सपनों को मिट्टी में मिला दिया, उनको सत्ता से बाहर कर दिया। फिर भी सुधरने को तैयार नहीं है…”

पीएम मोदी ने कहा कि आपके साथ खिलवाड़ करने के कॉन्ग्रेस के जो इरादे हैं, उनसे आपकी रक्षा के लिए ये मोदी दीवार बनके खड़ा है। ये गाली-गलौच इसलिए हो रहा है, क्योंकि मोदी 56 इंच का सीना तानकर खड़ा हो गया है। इनके मंजूसे सफल नहीं होंगे। ये मोदी की गारंटी है। लेकिन इसमें आपकी भी बड़ी भूमिका है।