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बिक गई है कलकत्ता हाई कोर्ट… एक भी वोट मत देना BJP को: ममता बनर्जी ने सरकारी नौकरी करने वालों को भड़काया, HC ने किया है 26000 टीचरों की भर्ती रद्द

बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कलकत्ता हाई कोर्ट द्वारा सुनाए गए ‘शिक्षक घोटाला’ मामले में फैसले पर कहा है कि भारतीय जनता पार्टी ने हाई कोर्ट को खरीद लिया है। उन्होंने घोटाले के तहत भर्ती हुए 26000 शिक्षकों की भर्ती रद्द किए जाने के मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी। जनता को भड़काते हुए सीएम ममता ने अपील की कि चाहे कुछ भी हो जाए भाजपा और सीपीएम को टीचरों और सरकारी मुलाजिमों से एक भी वोट नहीं मिलना चाहिए।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले पर नाराजगी जाहिर करने के दौरान कहा, “भाजपा और सीपीए या कॉन्ग्रेस को एक भी वोट नहीं मिलना चाहिए।” उन्होंने कहा कि भाजपा ने हाई कोर्ट को खरीद लिया है। अब बस उम्मीद बची है तो सुप्रीम कोर्ट से।

अपनी बात कहते हुए ममता बनर्जी बोलीं, “उन्होंने (भाजपा) हाई कोर्ट को खरीद लिया है। उन्होंने सीबीआई को खरीद लिया है। उन्होंने एनआईए को खरीद लिया है। उन्होंने बीएसएफ को खरीद लिया है। उन्होंने सीएपीएफ को खरीद लिया है। उन्होंने दूरदर्शन का रंग भगवा करवा दिया है। वो सिर्फ भाजपा और मोदी की बात करता है। उसे बिलकुल मत देखो। उसका बहिष्कार करो।”

सीएम ममता के इस बयान के बयान के बाद वरिष्ठ वकील विकास रंजन भट्टाचार्य ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बयानों पर स्वत: संज्ञान लेने के लिए एक याचिका दायर की। उन्होंने कह कि ये कोर्ट की अवमानना है। लोग अदालत पर हँस रहे हैं। जजों को पक्षपाती कहा जा रहा है। अपनी याचिका के साथ उन्होंने पेपर की कटिंग भी दी है। उनकी इस याचिका पर कोर्ट ने मामले को लिस्ट करते हुए इसपर हलफनामा दायर करने को कहा है।

हाई कोर्ट का फैसला और टीएमसी की राजनीति

बता दें कि बंगाल के शिक्षक भर्ती घोटाले में लंबे समय से जाँच चल रही थी। इस केस में पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी समेत कई तृणमूल नेता जेल जा चुके हैं। वहीं कुछ दिन पहले ही SSC भर्ती घोटाले में फैसला सुनाते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली TMC सरकार को झटका दिया था।

स्कूल भर्ती घोटाले पर फैसला सुनाते हुए कलकत्ता उच्च न्यायालय ने कहा था कि 2016 के पूरे पैनल को रद्द किया जाए। 9वीं से लेकर 12वीं ग्रुप C एवं D में हुई सभी नियुक्तियों को अवैध ठहराते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट ने कहा कि 23,753 नौकरियों को रद्द किया जाए। इतना ही नहीं, इन सभी को 4 सप्ताह के भीतर पूरा वेतन लौटाना होगा, वो भी 12% ब्याज के साथ।

अब ममता बनर्जी इसी कोर्ट के फैसले के खिलाफ जनता में जो गुस्सा उमड़ा है उसका प्रयोग चुनाव जीतने के लिए कर रही हैं। कुछ समय से संदेशखाली मुद्दे पर उनकी सरकार को बहुत आलोचना झेलनी पड़ी थी लेकिन इस मुद्दे को टीएमसी इस्तेमाल करने का कोई मौका नहीं छोड़ रही।

इंदिरा गाँधी की 100% प्रॉपर्टी अपने बच्चों को दिलवाने के लिए राजीव गाँधी सरकार ने खत्म करवाया था ‘विरासत कर’… वरना सरकारी खजाने में चला जाता पैसा, 3 दशकों से था यह नियम

इंडियन ओवरसीज कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष और राहुल गाँधी के सलाहकार सैम पित्रोदा ने ‘विरासत कर (Inheritance Tax)’ का मुद्दा छेड़कर कॉन्ग्रेस की ही परेशानी बढ़ा दी है। अब लोकसभा चुनाव से पहले वो पुराने पन्ने भी खुल रहे हैं जिनपर इतने समय से चुप्पी थी। हर कोई कॉन्ग्रेस की मंशा पर सवाल खड़ा कर रहा है कि उनका मकसद देश के लोगों से उनकी कमाई संपत्ति छीनना है… लेकिन मालूम हो कि ‘विरासत कर’ देश के लिए नया टैक्स नहीं है। 40 साल पहले तक ये भारत में लागू था, जिसे 1985 में राजीव गाँधी सरकार ने ठीक उस समय खत्म किया जब इंदिरा गाँधी के संपत्ति के बँटवारे की बात आई।

मौजूदा जानकारी के अनुसार, यह ‘विरासत कर’ का कॉन्सेप्ट देश में तीन दशकों तक अस्तित्व में था। एस्टेट ड्यूटी एक्ट 1953 के तहत, व्यक्ति के मृत्यु के बाद उसकी विरासत का कर 85% तक जा सकता था। इसमें भी दरें निर्धारित थीं। जो प्रॉपर्टी 20 लाख रुपए से ऊपर थी उसमें 85% टैक्स लगता था जिसका मतलब है कि व्यक्ति की मौत के बाद अधिकांश जमीन पर अधिकार सरकार का हो जाता था। हालाँकि, ये कानून उस तरह से काम नहीं किया, जिस प्रकार से सोचा गया था।

इसके तहत नागरिकों को दो बार संपत्ति से जुड़ा कर भरना पड़ता था एक तो जीवन रहते (जिसे 2016 में मोदी सरकार ने बंद करवा दिया) और फिर उनके निधन पर भी। इसके अलावा जिस प्रकार से कॉन्ग्रेस ने इस कर को लागू करके धन जुटाने की सोची थी वो भी लक्ष्य पूरा नहीं हुआ क्योंकि जब देश में ऐसा कर आ गया तो फिर लोग बेनामी प्रॉपर्टी के मामले और संपत्ति छिपाने के मामले ज्यादा बढ़ गए। अंत में ये एक्ट 1985 में जाकर खत्म कर दिया गया।

अब दिलचस्प बात ये है कि जिस समय पर ये कानून रद्द किया गया वो वही समय था जब पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की प्रॉपर्टी उनके पोते-पोतियों के नाम पर होनी थी। राजीव गाँधी सरकार ने इस काम से ठीक एक माह पहले एस्टेट ड्यूटी 1953 को खत्म किया, उस समय वीपी सिंह वित्त मंत्री हुआ करते थे। घोषणा हुई कि ये कानून 1 अप्रैल 1985 के बाद से लागू नहीं होगा। इसके बाद 2 मई 1985 को इंदिरा गाँधी की करीबन 21 लाख 50 हजार की संपत्ति उनके तीन पोते-पोतियों में हस्तांतरित हो गई। आज उस प्रॉपर्टी की कीमत करीब 4.2 करोड़ रुपए है।

यूनाइटेड प्रेस इंटरनेशनल (यूपीआई) की 2 मई 1985 की एक रिपोर्ट के अनुसार, 1981 में हस्ताक्षरित वसीयत में इंदिरा गाँधी ने अपने बेटे राजीव गाँधी और उनकी पत्नी सोनिया गाँधी को वसीयत का निष्पादक (एग्जिक्यूटर) नियुक्त किया था, लेकिन बाद में उन्होंने उन्हें कुछ नहीं दिया। उन्होंने अपनी बहु मेनका गाँधी के लिए भी कुछ नहीं छोड़ा था। सारी संपत्ति तीनों पोते-पोतियों के नाम की गई थी।

बता दें कि राजीव गाँधी द्वारा ये वसीयत कोर्ट में दिखाए जाने के बाद इसे अखबार में भी पब्लिश किया गया था। इस विल के अनुसार इंदिरा गाँधी संपत्ति का बड़ा हिस्सा महरौली में निर्माणाधीन एक खेत और एक फार्महाउस था, जिसकी कीमत 98,000 डॉलर थी (आज के हिसाब से 81,72,171 रुपए)।

इसके अलावा तीनों बच्चों के नाम इंदिरा गाँधी और जवाहरलाल नेहरू द्वारा लिखित पुस्तकों के कॉपीराइट के साथ-साथ इकट्ठा हुए लगभग 75,000 डॉलर की नकदी, स्टॉक और बांड भी थे। वहीं इंदिरा गाँधी की प्राचीन वस्तुएँ और लगभग 2500 डॉलर की निजी आभूषण केवल प्रियंका गाँधी के लिए छोड़े गए थे। 1984 में तीनों वारिस नाबालिग थे इसलिए उस समय राजीव गाँधी और सोनिया गाँधी को उनके बड़े होने तक संपत्ति संभालने की जिम्मेदारी दी गई।

अब ये ध्यान देने वाली बात है कि जिस देश में 20 लाख से अधिक संपत्ति होने पर 85% प्रॉपर्टी सरकार को चली जाती थी, वो नियम राजीव गाँधी की सरकार में ठीक उस समय पलटा गया जब उनके बच्चों को उनकी दादी की विरासत मिलनी थी। यूपीआई की रिपोर्ट में भी कहा गया था, “1 अप्रैल से प्रभावी हुए एक वित्त विधेयक के तहत, भारत में सभी मृत्यु शुल्क समाप्त कर दिए गए हैं और गांधी संपत्ति पर कोई विरासत कर नहीं लगाया जाएगा।”

जिस जज ने सुनाया ज्ञानवापी में सर्वे करने का फैसला, उन्हें फिर से धमकियाँ आनी शुरू: इस बार विदेशी नंबरों से आ रही कॉल, पहले मिला था पत्र

ज्ञानवापी विवादित ढाँचे में सर्वे का फैसला देने वाले जज रवि कुमार दिवाकर को विदेशों से धमकी भरी कॉल आ रही हैं। जज का कहना है कि पिछले 20-24 दिन में 140 कोड वाले नंबरों से कई बार उन्हें धमकी भरी कॉलें आई हैं। उन्होंने इस संबंध में एसएसपी को पत्र लिखकर शिकायत दी है। कंप्लेन की एक कॉपी जिला जज को भी दी गई है।

बता दें कि ज्ञानवापी मामले में फैसला देने के बाद चर्चा में आए रवि कुमार दिवाकर फिलहाल बरेली में फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम में जज हैं। उन्होंने कुछ समय पहले 2010 के दंगे केस में मौलाना तौकीर रजा को मुख्य अभियुक्त बनाने वाले केस की सुनवाई की थी।

इस मामले में उन्होंने तौकीर रजा के खिलाफ वारंट जारी कर पुलिस को निर्देश दिए थे कि तौकीर रजा को अदालत में पेश किया जाए। हालाँकि इसके बाद तौकीर रजा का मामला अदालत से ट्रांसफर हो गया और फिर मौलाना को सुप्रीम कोर्ट से राहत दे दी गई मगर इसी, बीच जज को विदेशों से कॉल आना शुरू हो गईं।

जज के अनुसार, उन्होंने एसएसपी सुशील घुले को पत्र लिखकर कार्रवाई करने को कहा है। इस संबंध में एसएसपी ने भी बताया कि उन्हें न्यायाधीश का पत्र मिला है। साइबर सेल से वो मामले की जाँच करवा रहे हैं। जो भी तथ्य सामने आएँगे उसके आधार पर आगे कार्रवाई होगी।

पहले मिला था धमकी भरा पत्र

बता दें कि यह पहली बार नहीं है कि जज को इस प्रकार से अंतरराष्ट्रीय नंबरों से धमकियाँ दी जा रही हों। इससे पहले उन्होंने जब ज्ञानवापी विवादित ढाँचे का फैसला दिया था उस समय उन्हें धमकी भरा पत्र मिला था। पत्र में लिखा था

“अब न्यायाधीश भी भगवा रंग में सराबोर हो चुके हैं। फैसला उग्रवादी हिंदुओं और उनसे जुड़े संगठनों को प्रसन्न करने के लिए सुनाते हैं। इसके बाद ठीकरा विभाजित भारत के मुसलमानों पर फोड़ते हैं। आप न्यायिक कार्य कर रहे हैं। आपको सरकारी मशीनरी मिली है, फिर आपकी पत्नी व माँ को डर कैसा है? आजकल न्यायिक अधिकारी हवा का रूख देखकर चालबाजी दिखा रहे हैं। आपने वक्तव्य दिया था कि ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का निरीक्षण एक सामान्य प्रक्रिया है। आप भी तो मूर्तिपूजक हैं। आप मस्जिद को मंदिर घोषित कर देंगे। कोई भी काफिर मूर्तिपूजक हिंदू न्यायाधीश से मुसलमान सही फैसले की उम्मीद नहीं कर सकता।”

इस धमकी के बाद प्रशासन ने जज की सिक्योरिटी से बिना खिलवाड़ किए उसे और सख्त कर दिया था। उनके साथ 9-10 पुलिसकर्मियों को हमेशा रहने को कहा गया था। बरेली में ट्रांसफर के बाद भी उनके साथ दो सुरक्षाकर्मी हमेशा रहते हैं। हालाँकि, फिर भी सुरक्षा की चिंता करते हुए कहा जा रहा है कि आतंकियों से लड़ने के लिए 2 सुरक्षाकर्मी पर्याप्त नहीं हैं क्योंकि उनके पास हथियार भी नहीं होते, जबकि आतंकियों के पास गन होती हैं। पिछले साल जज के लखनऊ आवास के पास से पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया का एक सदस्य गिरफ्तार हुआ था, जिसके बाद शाहजहाँपुर एसएसपी ने जज के आवास के बाहर गनर तैनात करवाए थे।

PUBG खेलते हुए 1 बच्ची की माँ को फँसाया, इस्लाम कबूल करा के किया निकाह और बना डाला जीनत फातिमा: डोनर बनकर हुई परेशान तो किया आत्मत्या का प्रयास

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में इस्लाम अपनाकर एक मुस्लिम युवक से निकाह करने वाली हिंदू महिला संदिग्ध परिस्थितियों में जीवन और मौत से जूझ रही है। वह फिलहाल अस्पताल में भर्ती है और कोमा में है। लड़की के परिजनों ने उसके शौहर मोहम्मद फुजैन पर गला दबाकर हत्या करने का आरोप लगाया है, जबकि लड़की के फुजैन का कहना है कि उसने आत्महत्या की कोशिश की है।

इस महिला का नाम जीनत है। इस्लाम कबूल करने से पहले उसका नाम हर्षदा था। हर्षदा मुंबई की रहने वाली है। लगभग 2 साल पहले PUBG खेलते हुए हर्षदा का संपर्क मुरादाबाद के फ़ुजैल से हुआ। हर्षदा ने धर्मांतरण करके निकाह कर लिया। अब उसकी एक बच्ची है। फुजैल हर्षदा को टॉर्चर करता था। पुलिस ने 22 अप्रैल 2024 को FIR दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है।

यह मामला मुरादाबाद के थाना क्षेत्र गलशहीद का है। मुंबई के शिवाजी नगर की रहने वाली हर्षदा की माँ ने 22 अप्रैल को पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में उन्होंने बताया है कि उनकी शादीशुदा बेटी की PUBG खेलते हुए मुरादाबाद के मुहम्मद फ़ुजैल से दोस्ती हुई थी। तब फ़ुजैल मुंबई में मुम्ब्रा इलाके में रहता था। मार्च 2022 में हर्षदा ने बिना बताए मुरादाबाद जाकर फ़ुजैल से निकाह कर लिया।

हर्षदा की लगभग 7 साल पहले शादी हुई थी और उससे 6 साल का एक बेटा भी है। बाद में उसका पति से तलाक हो गया। बाद में वह मोहम्मद फुजैल के बहकावे में फँस गई और इस्लाम अपनाकर जीनत फातिमा बन गई और मोहम्मद फुजैल से निकाह कर लिया। लगभग 1 साल पहले फुजैल से जीनत को एक बच्ची भी हुई। इसके बाद फुजैल का उस पर अत्याचार शुरू हो गया।

15 अप्रैल 2024 को जीनत ने अपनी माँ माधुरी को मुंबई कॉल किया। फोन पर उसने बताया कि फ़ुजैल उसे मारता-पीटता है और गंदी-गंदी गालियाँ देता है। तब तक फ़ुजैल ने काम-धंधा करना भी बंद कर दिया था। जीनत ने अपने शौहर की आदतों से खुद को बेहद परेशान बताया था। 2 दिनों बाद जीनत की माँ को पता चला कि उसकी बेटी मुरादाबाद के विवेकानंद अस्पताल के ICU वार्ड में भर्ती है।

पीड़िता की माँ ने फ़ुजैल को कॉल करके अपनी बेटी के अस्पताल में होने की वजह पूछी। फ़ुजैल ने जवाब दिया कि जीनत ने आत्महत्या का प्रयास किया है। अपनी बेटी के सुसाइड के प्रयास की जानकारी मिलते ही माधुरी अपनी एक रिश्तेदार के साथ मुरादाबाद आ गई। यहाँ वो अपनी बेटी को ICU वार्ड में देखकर परेशान हो गईं। आखिरकार माधुरी ने पुलिस में जाकर शिकायत दर्ज करवाई।

शिकायत में माधुरी ने अपनी बेटी के आत्महत्या के प्रयास में मोहम्मद फ़ुजैल और उसके अब्बा असलम को आरोपित किया है। पुलिस ने मोहम्मद फ़ुजैल और उसके अब्बा असलम को नामजद करते हुए FIR दर्ज कर ली है। इन दोनों पर IPC की धारा 323, 506, 306 और 511 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। इसमें अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

विवेकानंद अस्पताल के डॉक्टर मयंक ने UP Tak से बात करते हुए बताया कि जीनत फातिमा नाम की महिला 16 अप्रैल को अस्पताल में भर्ती करवाई गया था। उस समय वह बेहोश थी और उसके गले पर फंदे का निशान था। फाँसी पर लटकने की वजह से उनके दिमाग में ऑक्सीजन नहीं पहुँची जिससे वह कोमा में चली गई है। हालाँकि, जीनत उर्फ़ हर्षदा को बचाने के सभी प्रयास किए जा रहे हैं।

ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। पीड़िता के परिजनों ने बताया है कि फ़ुजैल हर्षदा को भगाकर अपने गाँव ले आया था। कुछ मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि फ़ुजैल लड़की से डोनर (किराए की कोख) का भी काम करवाता था। जिनके बच्चे नहीं होते थे, उनके लिए हर्षदा डोनर बनती थी। इससे फुजैल को मोटी आमदनी होती थी। हर्षदा जब इस काम से मना करती थी तो फुजैल मारपीट करता था।  

‘तुम च$र, हमसे पहले क्यों भरा पानी?’: मेवात में सरकारी ट्यूबवेल पर मुस्लिम महिलाओं का दलितों पर हमला, गाँव छोड़कर नहीं जाने पर हत्या की धमकी

हरियाणा के नूहं जिले में एक दलित परिवार पर मुस्लिम भीड़ द्वारा हमला करने का मामला सामने आया है। कहा जा रहा है कि जब ट्यूबवेल पर दलित महिलाएँ पानी भर रही थीं तो मुस्लिम महिलाओं ने उनसे मारपीट शुरू कर दी और कहा कि ये जगह उनके लिए पानी भरने की है। कुछ ही देर में इस दलित विरोधी हिंसा में मुस्लिम परिवार के पुरुष भी शामिल हो गए।

पीड़ितों का आरोप है कि इस दौरान उन्हें जातिसूचक शब्द बोले गए। हमलावरों ने उन्हें धमकी दी कि वे गाँव छोड़कर भाग जाएँ, नहीं तो उन्हें मार दिया जाएगा। हिंसा के शिकार आधे दर्जन दलितों को अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। घटना 17 अप्रैल 2024 की है। वहीं, पुलिस ने सोमवार (22 अप्रैल 2024) को FIR दर्ज करके जाँच शुरू की है। FIR में कुल 18 हमलावर नामजद किए गए हैं।

यह घटना तावडू इलाके के थाना सदर की है। यहाँ गाँव सहसीलापट्टी घुसबैठी की रहने वाली दलित महिला रजनी ने 22 अप्रैल को पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में रजनी ने बताया कि 17 अप्रैल की शाम लगभग 8 बजे वो अपने परिवार की कुछ अन्य महिलाओं के साथ सरकारी ट्यूबवेल पर पीने वाला पानी भरने गई थीं। यहाँ पर कुछ मुस्लिम महिलाएँ भी पानी भर रहीं थीं।

रजनी ने कहा कि इस दौरान असमीना, रहमती और मकसूदन ने उन्हें देखकर दलित महिलाओं के बर्तन फेंकने शुरू कर दिए। रजनी ने मुस्लिम महिलाओं से इसकी वजह पूछी तो मुस्लिम महिलाओं ने कहा, “तुम नीची जाति च$री, चु#ड़ी हो। हमसे पहले पानी कैसे भर सकती हो?” रजनी ने जातिसूचक गालियों का विरोध किया तो तीनों मुस्लिम महिलाओं ने उन पर हमला कर दिया और उन्हें पीट दिया।

पीड़िताओं का कहना है कि उन्होंने जैसे-तैसे भागकर अपनी जान बचाई। इधर मुस्लिम महिलाओं ने घर पहुँचकर लोगों को जमा कर लिया। कुछ ही देर में दलितों के घर की तरफ मुस्लिम भीड़ हमलावर दौड़ पड़ी। हमलावरों में अलीशेर, सोहेल, फारूख, सली मौहम्मद, असलूम, असलम, शहारून, महबूब, मुफीद, शारुख, उसमान, शेरू, इकराम, साहून, रमजान, असमीना, रहमती और मकसूदन शामिल थे।

हमलावरों लाठी-डंडा और फरसा ले रखे थे। ये सभी पीड़िता के घर में घुस गए। वहाँ उन्होंने माँ-बहन की गलियों के साथ पीड़ित परिवार को जातिसूचक गालियाँ दीं। शिकायत के मुताबिक हमलावरों ने कहा, “बहन%द च#रों, आज तुम्हें जान से मार देंगे। आज तुम्हें सबक सिखाते हैं।” रजनी और अन्य दलित महिलाओं पर मुस्लिम भीड़ के हमले में जो भी बीच-बचाव करने आया उसको बेरहमी से पीटा गया।

हमले में पीड़ित महिलाओं की नाक, हाथ, आँख, कंधे, पैर, छाती और चेहरे पर वार किए। लगभग आधे दर्जन पीड़ितों के घायल होने के बाद आरोपितों ने घरों में तोड़फोड़ शुरू कर दी। इस तोड़फोड़ में पंखे, बर्तन और टीन आदि टूट गए। घर के बाहर खड़े ऑटो को भी तोड़ डाला गया। हमलावरों ने जानवरों को भी नहीं छोड़ा। पीड़ितों के घर पर बँधीं गायों और भैंसों को भी पत्थर मारे गए।

पीड़ितों के घर हुआ पथराव

शोर-गुल सुनकर गाँव के कुछ अन्य लोग जमा हो गए, जिसके कारण पीड़ितों की जान बची। घटनास्थल से लौटती भीड़ में शामिल कुछ हमलावरों ने पीड़ितों को धमकी भी दी। उन्होंने कहा, “आज तो च#र, चु&डीं तुम्हें जिंदा छोड़ दिया है। अगर फिर कभी हमसे पहले पानी भरा या हमारे सामने नजर उठाई तो तुम्हें जान से मार देगें।”

धमकी देते हुए उन्होंने आगे कहा, “हमारे गाँव में रहना है तो औकात में रहो। साले हमारे सामने तुम्महारी क्या औकात?” यदि इस घटना की शिकायत कहीं पर की या कहीं किसी अधिकारी के सामने पेश हुए तो तुम्हें गाँव में नहीं रहने देगें। यहाँ से मारपीट कर भगा देगें और फिर कभी गाँव में नहीं घुसने देंगे।”

हमलावरों के जाने के बाद पीड़ितों ने घायलों का इलाज शुरू करवाया। कुछ घायलों को नल्हड़ के मेडिकल कॉलेज में भर्ती करवाया गया है। हालात गंभीर होने पर रामवीर नाम के शख्स को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल रेफर कर दिया गया है। पुलिस को दी गई शिकायत में रजनी ने यह भी बताया है कि उनको पहले भी जातिसूचक शब्द बोल कर बेइज्जत किया गया है।

हमलावरों को दबंग और बदमाश बताते हुए पीड़िता ने अपनी जान-माल का खतरा बताया है। FIR में देरी की वजह पीड़िता ने गंभीर रूप से घायल परिजनों के इलाज में व्यस्त होना बताया है। रजनी द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी की कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है।

पुलिस ने अलीशेर, सोहेल, फारूख, सली मौहम्मद, असलूम, असलम, शहारून, महबूब, मुफीद, शारुख, उसमान, शेरू, इकराम, साहून, रमजान, असमीना, रहमती और मकसूदन सहित अन्य हमलावरों पर FIR दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। इन सभी पर IPC की धारा 148, 149, 323, 452, 506 और SC/ST एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस मामले की जाँच में जुट गई है।

गाँव में एक भी हिन्दू मंदिर नहीं

ऑपइंडिया ने इस घटना में घायल हुए चरणजीत से बात की। चरणजीत ने हमें बताया कि उनके गाँव में 14-15 हिन्दुओं के घर हैं, जो दलित समुदाय से आते हैं। इसके अलावा गाँव में मुस्लिम समुदाय के लगभग 400 घर हैं। चरणजीत के मुताबिक, गाँव के अनुसूचित जाति के लोग महादेव और माँ दुर्गा के भक्त हैं, लेकिन डर के मारे उन्होंने गाँव में मंदिर भी नहीं बनवाया है।

चरणजीत ने बताया कि बीते नवरात्रि में उन्होंने अपने परिवार के साथ व्रत रखा था, लेकिन घर में बिना ढोल-मजीरे के पूजा करने पर मजबूर होना पड़ा। वहीं, पीड़िता रजनी ने यह भी बताया कि उन्हें और गाँव के अन्य दलितों को मुस्लिम समुदाय के लोग आए दिन गालियाँ और धमकी देते रहते हैं।

‘लव ब्रेन’ से पीड़ित लड़की अस्पताल में भर्ती: प्रेमी को दिन भर में 100+ बार करती थी कॉल, जवाब नहीं आने पर करती थी तोड़फोड़

चीन में 18 साल की एक लड़की अपने प्रेमी को दिन भर में 100 से अधिक बार कॉल करती थी। उसे ‘लव ब्रेन’ से पीड़ित पाया गया है। जियाओयू (बदला हुआ नाम) नाम की इस लड़की को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वह प्रेमी के प्रति इतनी जुनूनी हो गई कि उसके मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ा है। डॉक्टरों का मानना है कि वह बॉर्डरलाइन पर्सनैलिटी डिसऑर्डर से पीड़ित हो सकती है।

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की न्यूज रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण-पश्चिमी चीन के सिचुआन प्रांत की रहने वाली जियाओयू इतनी जुनूनी हो गई कि उसके प्रेमी का जीवन दुखमय हो गया। चेंग्दू के द फोर्थ पीपुल्स हॉस्पिटल के एक डॉक्टर डू ना ने कहा कि ज़ियाओयू का चिंताजनक व्यवहार उसके विश्वविद्यालय के पहले वर्ष में शुरू हुआ। इसके बाद दोनों के घनिष्ठ संबंध हो गए।

जियाओयू अपने प्रेमी पर निर्भर हो गई और हर समय उसे कॉल करने लगी। वह उससे ना केवल ये पूछती रहती है कि वह अभी कहाँ है और क्या कर रहा है, बल्कि वह यह भी चाहती थी कि उसका प्रेमी दिन और रात उसके कॉल को पिक करे और उसके संदेशों का जवाब दे। इससे उसका प्रेमी जल्द ही असहज और दबा हुआ महसूस करने लगा।

एक वायरल वीडियो क्लिप में ज़ियाओयू अपने प्रेमी को बार-बार अपना सोशल मीडिया ऐप वीचैट कैमरा चालू करने के लिए मैसेज करती दिख रही है। जब उसका प्रेमी जवाब नहीं देता फिर भी वह उसे वीडियो कॉल करती है, जिसे वह नजरअंदाज कर देता है। एक दिन उसने अपने प्रेमी को 100 से अधिक बार फोन किया, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया।

इससे वह इतनी परेशान और गुस्सा हो गई कि उसने घरेलू सामान को में तोड़-फोड़ और उसे इधर-उधर फेंकना शुरू कर दिया। उसने अपनी बालकनी से कूदने की धमकी दी तो उसके प्रेमी ने पुलिस को कॉल करके इसकी जानकारी दी। इसके बाद ज़ियाओयू को अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उसमें बॉर्डरलाइन पर्सनालिटी डिसऑर्डर का पता चला। इस डिसऑर्डर को बोलचाल की भाषा में ‘लव ब्रेन’ कहा जाता है।

डॉक्टर डू ने कहा कि यह स्थिति चिंता, अवसाद और द्विध्रुवी विकार जैसी दूसरी मानसिक बीमारियों के साथ भी हो सकती है। डू ने ज़ियाओयू की बीमारी के कारण का खुलासा नहीं किया, लेकिन कहा है कि यह अक्सर उन लोगों में होता है, जिनके बचपन के दौरान अपने माता-पिता के साथ स्वस्थ संबंध नहीं होते हैं।

डॉक्टर का कहना है कि इस बीमारी के हल्के रूप वाले लोगों के जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता है। वे अपनी भावनाओं को नियंत्रित करना सीखकर अपने आप ठीक हो सकते हैं। हालाँकि, इसके गंभीर लक्षणों वाले पीड़ितों को चिकित्सा सहायता की आवश्यकता होगी। जियाओयू की ये कहानी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो रही है।

बता दें कि एक तरफ वहाँ के युवाओं, खासकर लड़कियों में ‘लव ब्रेन’ के गंभीर लक्षण सामने आ रहे हैं, वहीं इसके पीड़ितों को सलाह देने का काम करने वाले उद्योग में जबरदस्त तेजी देखी जा रही है। ये कंपनियाँ लव ब्रेन से पीड़ित लड़के-लड़कियों को डाँटने और साँत्वना देने के लिए साथी प्रदान करता है।

नए ग्राहक जोड़ने पर प्रतिबंध, क्रेडिट कार्ड जारी करने पर भी रोक: RBI ने कोटक महिंद्रा बैंक पर लगाए कई तरह के प्रतिबंध, कहा – 2 साल समय दिया, लेकिन…

कोटक महिंद्रा बैंक पर RBI (रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया) ने कई तरह के प्रतिबंध लगाए हैं। भारतीय रिजर्व बैंक ने Kotak Mahindra Bank को ऑनलाइन या मोबाइल बैंकिंग एप के जरिए ग्राहक जोड़ने से रोक दिया है। इसके साथ ही RBI ने बैंक बैंक द्वारा नए क्रेडिट कार्ड जारी करने पर भी प्रतिबंध लगा दिया है। एक प्रेस रिलीज ने RBI ने ये जानकारी दी और बैंक में कई कमियों को लेकर चिंता भी ज़ाहिर की। विनिमय अधिनियम, 1949 की धारा 35A के तहत ये कार्रवाई की गई है।

हालाँकि, कोटक महिंद्रा बैंक के जो मौजूदा ग्राहक हैं उनके लिए सारी सेवाएँ पूर्ववत ही चालू रहेंगी। जिनके पास कोटक महिंद्रा बैंक के क्रेडिट कार्ड हैं, उनके लिए भी सारी सेवाएँ जारी रहेंगी। कोटक महिंद्रा बैंक को एक ऑडिट निपटाने के लिए कहा गया है, जिसके बाद इन प्रतिबंधों की समीक्षा की जाएगी। इस ऑडिट के माध्यम से सुझाई गई कमियों को दूर किया जाएगा। असल में ये कार्रवाई बैंक द्वारा 2022-23 के लिए IT (इनफार्मेशन एन्ड टेक्नोलॉजी परीक्षण) को लेकर की गई है।

इसमें कई दिक्कतें सामने आई थीं। बैंक को इनके समाधान के लिए समय दिया गया था, लेकिन तय अवधि में ये नहीं हो पाया। RBI ने कहा कि IT रिस्क मैनेजमेंट फ्रेमवर्क के अभाव में बैंक के कोर बैंकिंग सिस्टम और उसके ऑनलाइन व डिजिटल बैंकिंग चैनल्स ने बीते 2 वर्षों की अवधि में कई बार आउटेज देखने को मिला है। इससे ग्राहकों को कई बार परेशानियों का सामना करना पड़ा है। बैंक के आईटी इन्वेंट्री के प्रबंधन और डेटा सिक्योरिटी के तौर-तरीकों में गंभीर खामियाँ पाई गई थीं।

RBI ने कहा है कि 2 साल की अवधि दिए जाने के बावजूद कोटक महिंद्रा बैंक अपने कम्प्यूटर उपकरण, सॉफ्टवेयर अपग्रेडेशन और उसके सिस्टम तक पहुँच जैसी समस्याओं का निराकरण नहीं कर पाया। अब एक्सटर्नल ऑडिट के बाद ही बैंक को राहत मिल सकेगी। अब गुरुवार (25 अप्रैल, 2024) को कोटक महिंद्रा के शेयरों में इस कारण बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है। इसके मार्किट कैपिटलाइजेशन 3.66 लाख करोड़ रुपए का है।

‘अशोक गहलोत ने मुझे दी थी कॉल रिकॉर्डिंग वाली पेन ड्राइव’: पूर्व CM के OSD ने ही किया खुलासा – गजेंद्र शेखावत की छवि खराब करने के लिए रची साजिश

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के ओएसडी रहे लोकेश शर्मा ने कई बड़े खुलासे किए हैं। फोन टैपिंग मामले में फँसे लोकेश शर्मा ने बुधवार (24 अप्रैल 2024) को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कई चौंकाने वाले खुलासे किए। उन्होंने कहा कि कॉल रिकॉडिंग वाली पेन ड्राइव उन्हें खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने दी थी। उन्होंने मुझे ऑडियो को मीडिया के पास भेजने के लिए कहा था, मैंने उनके द्वारा कही गई बातों तो मीडिया तक पहुँचा। इस बारे में अगले दिन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने खबरें देखी और उसके बाद में मुकदमा दर्ज हुआ।

लोकेश शर्मा ने कहा, “16 जुलाई 2020 को शाम को कुछ ऑडियो क्लिप वायरल हुई थीं। मैंने अपने मोबाइल नंबर से आप सभी मीडिया के साथी को वह ऑडियो क्लिप भेजी थी। उस ऑडियो क्लिप में विधायकों की खरीद-फरोक्त की साजिश रची जा रही थी। और मुझे जो कहा गया वह मैंने किया। घटना इस तरह से थी, 16 जुलाई 2020 को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत होटल फेयर माउंट में आए थे क्योंकि उसे क्राइसिस के दौरान जो विधायक बाड़ेबंदी में विधायक रुके हुए थे। सुबह और शाम दोनों समय मुख्यमंत्री वहां आते थे। बातचीत करते थे, वह उनका रुटीन था।”

लोकेश शर्मा ने आगे कहा, “16 जुलाई 2020 को लगभग 4 बजे वह होटल से निकले उनके जाने के 1 घंटे बाद पीएसओ रामनिवास का मेरे पास कॉल आया कि आप तुरंत मुख्यमंत्री निवास पहुँचे। मुख्यमंत्री जी आपको बुला रहे हैं। मैं 10 मिनट बाद होटल से निकाला और सीधा सीएम आवास पहुँचा। क्योंकि कूकस काफी दूर है आने में करीब एक से डेढ़ घंटा लगा। उसी दौरान मेरे पास तीन से चार कॉल रामनिवास के आए थे। कहां अभी तक पहुँचे क्यों नहीं। वहाँ पहुँचा तो मुझे यह कागज और पेन ड्राइव मुझे मुख्यमंत्री जी ने दिया। इस ऑडियो क्लिप में इस पेन ड्राइव में वह तीनों ऑडियो क्लिप थी। उसकी ओर से स्क्रिप्ट लिखी हुआ कागज भी मुझे दिया।”

लोकश शर्मा ने आगे बताया, “मैंने आप सबको भेजे इस पेपर में कथित रूप से गजेंद्र सिंह रावत जो तत्कालीन केंद्रीय मंत्री थे, हमारे विधायक भंवरलाल शर्मा और एक संजय जैन, इन तीनों की बातचीत का हवाला दिया गया। इस पेन ड्राइव में वह सारी जानकारी थी। पेपर देकर मुझे कहा तुरंत जाइए और मीडिया को यह ऑडियो क्लिप सर्कुलेट कर दीजिए, क्योंकि पेन ड्राइव उसे सीधे सर्कुलेट नहीं किया जा सकता था। तो मैं इसे लेकर घर आया और मैं अपने इस लैपटॉप में ट्रांसफर किया। लैपटॉप से मैंने ऑडियो क्लिप से अपने मोबाइल में लिया उसे फोन के जरिए सभी मीडिया साथियों को फॉरवर्ड किया। यह वीडियो ऑडियो क्लिप मुझे सोशल मीडिया के जरिए नहीं मिली। पेन ड्राइव के जरिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मुझे दी थी। उन्होंने मुझे कहा और वह काम मैंने किया। अगले दिन मुझे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने खबरें देखी और उसके बाद में मुकदमा दर्ज हुआ।”

लोकेश शर्मा ने कहा कि सचिन पायलट समेत उनके गुट के सभी विधायकों के फोन टेप किए जाते थे। तीन विधायकों ने अशोक गहलोत के समर्थन में प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी, उसे भी मैंने ही मैनेज किया था।

पीसी में लोकेश शर्मा ने गहलोत पर बड़ा हमला करते हुए यह भी कहा कि मेरे राजनीतिक गुरु अशोक गहलोत ने अपनी कुर्सी को बचाने के लिए मेरा उपयोग किया था। बाद में मेरे फ़ोन को डिस्ट्रॉय करवाया। लोकेश ने कहा कि अशोक गहलोत को मुझ पर संदेह था, इसलिए 26 नवम्बर 2021 को मेरे कार्यालय में एसओजी की रेड करवाई गई थी। सरकार बच गई तो मेरे केस के बारे में बात करना बंद कर दिया। तीन साल से दिल्ली क्राइम ब्रांच में पूछताछ जारी है।

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के संजीवनी घोटाले पर लोकेश शर्मा ने कहा कि गहलोत के कहने पर गजेंद्र सिंह शेखावत की छवि ख़राब करने के लिए सजीवनी क्रेडिट सोसायटी का मुद्दा उठाया गया। बता दें कि संजीवनी क्रेडिट सोसायटी के मामले में शेखावत ने गहलोत पर मानहानि का केस भी किया है। जिसकी अभी कोर्ट में सुनवाई चल रही है।

पेपर लीक के मामले में लोकेश शर्मा ने गहलोत सरकार पर बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि रीट मामले में पेपर लीक करवाने में गहलोत सरकार के सिस्टम की मिलीभगत थी। युवाओं के सपने तोड़ने वाले अशोक गहलोत अपने पुत्र के भविष्य को लेकर दिन रात एक कर रहे हैं। लोकेश शर्मा ने भाजपा सरकार से पेपर लीक मामले में चल रही जाँच में हर संभव सहयोग की बात भी कही।

शराब के नशे में कोर्ट पहुँच जाते थे जज साहब, जब मन अदालत से लापता हो जाते थे: कई शिकायतों के बाद बर्खास्त, सेवा बहाली की याचिका खारिज

बॉम्बे हाई कोर्ट ने मंगलवार (23 अप्रैल 2024) शराब पीकर कोर्ट आने वाले सिविल जज अनिरुद्ध पाठक को राहत देने से इनकार कर दिया। पाठक को अनुचित आचरण के आरोप में बर्खास्त कर दिया गया था। हाई कोर्ट ने पाठक की याचिका खारिज करते हुए कहा कि न्यायाधीशों को गरिमा का ख्याल रखना चाहिए। उन्हें ऐसा आचरण नहीं करना चाहिए, जिससे न्यायपालिका की छवि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़े।

अनिरुद्ध पाठक के खिलाफ कई आरोप हैं, जिनमें अदालत के समय का पालन नहीं करना, अदालत से अनुपस्थित रहना और न्यायिक अकादमी पाठ्यक्रम में भाग लेना भी शामिल है। इससे पहले स्टाफ सदस्यों ने पाठक पर शराब के नशे में अदालत आने का आरोप लगाया था। इन आरोपों के आधार पर पाठक को बर्खास्त कर दिया गया था।

न्यायमूर्ति एएस चंदूरकर और न्यायमूर्ति जितेंद्र जैन ने पाठक की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि अदालतों से उन न्यायिक अधिकारियों की सहायता की उम्मीद नहीं की जाती है, जो अशोभनीय या दोषपूर्ण आचरण में संलग्न हैं। इसके बाद खंडपीठ ने पाठ की याचिका खारिज कर दी। पाठक ने सेवा में बहाली के लिए हाई कोर्ट में याचिका दी थी।

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, “यह एक सार्वभौमिक रूप से स्वीकृत मानदंड है कि न्यायाधीशों और न्यायिक अधिकारियों को सम्मान के साथ काम करना चाहिए और ऐसे आचरण या व्यवहार में शामिल नहीं होना चाहिए, जिससे न्यायपालिका की छवि प्रभावित होने की आशंका हो या जो न्यायिक अधिकारी के लिए अशोभनीय हो।”

बारएंडबेंच के मुताबिक, बुधवार (24 अप्रैल 2024) को दिए अपने फैसले में कोर्ट ने आगे कहा, “यदि न्यायपालिका के सदस्य ऐसे व्यवहार में लिप्त होते हैं, जो निंदनीय है या जो न्यायिक अधिकारी के लिए अशोभनीय है तो रिट अदालतों से ऐसे न्यायिक अधिकारी को हस्तक्षेप करने और राहत देने की उम्मीद नहीं की जाती है।”

दरअसल, अनिरुद्ध पाठक को मार्च 2010 में सिविल जज जूनियर डिवीजन के रूप में नियुक्त किया गया था। उस दौरान से उनके आचरण के बारे में कई शिकायतें मिलने लगीं। शिकायतें मिलने के बाद महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले के मुख्य न्यायाधीश ने फरवरी 2017 में उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल के समक्ष एक रिपोर्ट दायर की।

उस रिपोर्ट में कहा गया है कि अनिरुद्ध पाठक शराब के नशे में अदालत आए थे। कई वकीलों ने यह भी शिकायत की कि अदालत में उनका व्यवहार और अदालती कामकाज करने का तरीका उचित नहीं था।मई 2017 में महाराष्ट्र के जलगाँव के एक जिला न्यायाधीश ने पाठक के खिलाफ शिकायतों के संबंध में एक विवेकपूर्ण जाँच रिपोर्ट दायर की।

इसके बाद महाराष्ट्र न्यायिक अकादमी के अधिकारियों ने भी साल 2018 में पाठक के अनुचित व्यवहार को लेकर एक रिपोर्ट दर्ज की। इसके बाद कानून और न्यायपालिका विभाग ने साल 2022 में एक आदेश पारित करके अनिरुद्ध पाठक को महाराष्ट्र सिविल सेवा (अनुशासन और अपील) नियमों के तहत सेवा से बर्खास्त कर दिया।

इसने पाठक को अपनी बर्खास्तगी को चुनौती देने के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। उच्च न्यायालय के समक्ष पाठक ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया और कहा कि उन्हें दी गई सज़ा अधिक है। हाई कोर्ट ने कहा कि पाठक एक ऐसे पद पर थे जिसे उच्च सम्मान के साथ देखा जाता है। उन्होंने साथ काम करने वाले कर्मचारियों का विश्वास खो दिया है।

खालिस्तानी अमृतपाल लड़ेगा खडूर साहिब से लोकसभा चुनाव: थाने पर हमला करने के कारण हुआ था जेल में बंद, NSA भी लगा

खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह खडूर साहिब से एक निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ेगा। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह जानकारी उसके वकील राजदेव सिंह खालसा ने दी है। इस समय अमृतपाल डिब्रूगढ़ जेल में बंद है। उसके ऊपर एनएसए के तहत मामला दर्ज है।

बता दें कि अमृतपाल सिंह पिछले दिनों अपनी माँ बलविंदर कौर की गिरफ्तारी के कारण चर्चा में आया था। पुलिस ने उसके चाचा सुखचैन सिंह समेत 4 को गिरफ्तार किया था। इन लोगों का प्लान 8 अप्रैल 2024 को खालसा चेतना मार्च का आयोजन करने का था।

उससे पहले ‘वारिस पंजाब दे’ का मुखिया खालिस्तानी अमृतपाल सिंह अजानला पुलिस थाने पर हमला करने के बाद मीडिया की सुर्खियाँ बना था। जब पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए निकली तो पता चला कि वो फरार हो गया है। काफी मशक्कत के बाद पुलिस करीबन एक महीने बाद उसे पकड़ने में सफल हुई थी। इसके बाद उसे असम के डिब्रूगढ़ जेल में भेज दिया गया था। उस पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) भी लगाया गया था।

गौरतलब है कि अमृतपाल सिंह का जन्म जल्लूपुर खेड़ा गाँव में 1993 में हुआ था। 12 क्लास पास करने के बाद वो दुबई गया। वहाँ उसे ट्रांसपोर्ट का बिजनेस किया और 2022 में दीप सिद्धू की मौत के बाद वो ‘वारिस पंजाब दे’ का नया प्रमुख बन गया। इसी के बाद से वो प्रशासन को चुनौती देने लगा था और 2023 में थाने पर हमला किया था।