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TMC नेता जिन्ना अली बना रहा था देसी बम, मकसद था – चुनाव में लोगों को डराना… उसके हाथ में ही हो गया ब्लास्ट: बुरी तरह घायल, EC ने माँगी रिपोर्ट

बंगाल में लोकसभा चुनावों के बीच तृणमूल कॉन्ग्रेस का नेता/कार्यकर्ता देसी बम बनाते समय घायल हो गया। घटना मुर्शिदाबाद की है। कार्यकर्ता का नाम जिन्ना अली है। बताया जा रहा है कि जिन्ना कथिततौर पर बम बना रहा था जब वही बम उसके हाथ में फट गया और उसका सीधा हाथ चोटिल हो गया।

घटना के संबंध में डेक्कन क्रॉनिकल ने रिपोर्ट प्रकाशित की है। बताया गया है कि विस्फोट बुधवार को हुआ था। पड़ोसियों ने रात में जब ये आवाज सुनी तो वो भागकर जिन्ना के घर गए। वहाँ उन्होंने जिन्ना को बेहोश खून से लथपथ देखा।

स्थानीय फौरन उसे बीरभूम इलाज के लिए लेकर गए। बाद में मुर्शिदाबाद के कॉन्ग्रेस प्रवक्ता जयंत दास ने इस संबंध में बताया कि तृणमूल कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ता क्रूड बम बना रहे थे ताकि प्रतिद्वंदी पार्टी के कार्यकर्ताओं को चुनाव से पहले डराया जा सके।

रिपोर्ट में बताया गया कि इस घटना के संबंध में चुनाव आयोग ने भी संज्ञान लिया है। चुनाव आयोग ने राज्य पुलिस और जिला प्रशासन से घटना के संबंध में रिपोर्ट माँगी है। चुनाव आयोग ने कहा है कि बेहरामपुर के बुरवान गाँव के मुनई कांद्रा में घटना घटी है उस पर रिपोर्ट दी जाए। ये जगह पोलिंग स्टेशन के 50 यार्ड के भीतर है। 13 मई को यहाँ लोकसभा चुनाव होने हैं।

बंगाल में देसी बम फेंकने की घटना हो रही आम

बता दें कि बंगाल में चुनावों के समय में देसी बमों का मिलने की घटनाएँ हर चुनाव में सामान्य होती जा रही हैं। मुर्शिदाबाद में पिछले साल बड़ी तादाद में देसी बम मिल चुके हैं। पंचायत चुनाव से लेकर विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव तक में बमबाजी की जाती है।

पिछले साल ही पंचायत चुनाव की रिपोलिंग के दिन तालाब के पास मुर्शिदाबाद में 35 बम मिले थे। इसी तरह इन चुनावों में भी प्रथम चऱण की वोटिंग वाले दिन बमबाजी की घटनाएँ सामने आई थीं। भाजपा कार्यकर्ता के घर के बाहर भी बम मिले थे।

‘मुस्लिमों का संसाधनों पर पहला दावा’, पूर्व PM मनमोहन सिंह ने 2009 में दोहराया था 2006 वाला बयान: BJP ने पुराना वीडियो दिखा किया हमला

देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 2009 लोकसभा चुनावों के समय ‘मुस्लिमों का देश के संसाधनों पर पहला हक’ वाला बयान दोहराया था। इसका एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह अपने पुराने बयान पर कायम रहने की बात करते हैं। भाजपा ने इस वीडियो के जरिए कॉन्ग्रेस पर हमला बोला है।

भाजपा ने एक्स (पहले ट्विटर) पर मनमोहन सिंह का एक वीडियो डालते हुए लिखा है, “अप्रैल 2009 में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले डॉ मनमोहन सिंह ने अपना बयान दोहराया था कि अल्पसंख्यकों जिसमें विशेष कर गरीब मुसलमानों को देश के संसाधनों के विषय में प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था कि वह अपने पूर्व बयान पर कायम हैं जिसमें कहा गया था कि संसाधनों के मामले में मुसलमानों का पहला अधिकार होना चाहिए।”

भाजपा ने आगे लिखा, “डॉ मनमोहन सिंह का यह स्पष्ट बयान कॉन्ग्रेस के झूठ और उनके पहले के बयान पर दी गई सफाई को ध्वस्त करता है। साथ ही यह इस बात को सिद्ध करता है कि मुसलमानों को तरजीह देना कॉन्ग्रेस पार्टी की स्पष्ट नीति है। यह आरक्षण से लेकर संसाधनों तक हर चीज में मुस्लिमों को प्राथमिकता देने की कॉन्ग्रेस की मानसिकता का एक और साक्ष्य है।”

इस वीडियो में मनमोहन सिंह कहते सुने जा सकते हैं, “मैनें यह नहीं कहा (सुना नहीं जा सका)… मैंने कहा कि अल्पसंख्यक और विशेषकर मुस्लिम अल्पसंख्यक, अगर वह गरीब हैं तो उनका देश के संसाधनों पर पहला दावा बनता है, मैंने कहा कि सब तरह के अल्पसंख्यक और साथ में जोड़ा कि विशेषकर मुस्लिम अल्पसंख्यक का हक़ है, मैं अपने इस बयान पर कायम हूँ।” इस बयान में पीएम मनमोहन सिंह अपने 2006 के एक बयान की बात कर रहे थे।

मनमोहन सिंह ने दिसम्बर 2006 में एक कार्यक्रम में कहा था, “हमें अल्पसंख्यकों और विशेष कर मुस्लिमों, के लिए ऐसी योजनाएँ बनानी होंगी जिससे वह हमारे विकास के लाभ का समान रूप से लाभ ले सकने के लिए सशक्त हों। उनका संसाधनों पर पहला दावा हो।” यह बात पीएमओ की वेबसाइट पर भी लिखी हुई है। इस बयान के बाद खूब बवाल मचा था। इस बयान के अगले दिन पीएमओ ने सफाई भी पेश की थी। हालाँकि, अब सामने आए नए वीडियो से स्पष्ट है कि पीएम मनमोहन सिंह 2009 तक अपने बयान पर कायम थे।

उनके इस बयान का जिक्र हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक चुनावी रैली में किया था। पीएम मोदी ने कॉन्ग्रेस के सम्पत्ति दोबारा बाँटने के वादे को लेकर कहा था कि कॉन्ग्रेस महिलाओं के मंगलसूत्र छीन कर उनको बाँटना चाहती है जिनका वह सम्पत्ति पर पहला अधिकार मानती है। कॉन्ग्रेस ने इसके बाद फिर से इस बयान को झुठलाने की कोशिश की थी लेकिन इसमें सफल नहीं हो सकी थी। अब मनमोहन सिंह का यह वीडियो सामने आने के बाद कॉन्ग्रेस और घिर गई है।

चाकू मारो, पत्थर मारो, मार डालो… गुजरात में मुस्लिम भीड़ ने मंदिर के नीचे हिंदू दुकानदार पर किया हमला, बचाने आए लोगों को भी नहीं छोड़ा: 11 पर FIR दर्ज

गुजरात के भरूच के वागरा तालुका के ओच्छन गाँव में मुस्लिम भीड़ ने किशन कुमार नाम के हिंदू व्यापारी और उनकी पत्नी पर जानलेवा हमला किया। किशन भगवान राम के मंदिर के नीचे एक किराने की दुकान चलाते हैं। मुस्लिम भीड़ ने हमले के दौरान गाँव के सरपंच समेत उन लोगों को भी मारा है जो किशन को बचाने आगे आए। हमले की सूचना मिलने के बाद पुलिस घटनास्थल पर पहुँचीं और 2 नाबालिग समेत 11 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करके अपनी जाँच शुरू कर दी।

जानकारी के मुताबिक, घटना 21 अप्रैल 2024 की है। उस दिन रात के 10:30 बजे आरोपित अब्दुल अहमद पटेल के 2 बेटे किशन की दुकान से कुछ सामान लेने आए थे। इस दौरान दोनों किसी बात पर गाली-गलौच कर रहे थे। किशन ने दोनों की अभद्र भाषा को सुना तो उन्हें कहा कि वो सामान लेकर जाएँ, दुकान के बाहर महिलाएँ खड़ी हैं, वो असहज हो सकती हैं। इसी बात पर दोनों भाई भड़क गए। दोनों फिर व्यापारी और उसकी पत्नी के साथ गाली-गलौच करने लगे।

झगड़ा बढ़ा तो मारपीट की आवाज सुनकर जावेद, हुजेफ, मुस्ताक, रियाज, अब्दुल समेत 15-20 लोगों की भीड़ आ गई। भीड़ ने बिन कुछ सोचे समझे किशन को घेरकर मारना-पीटना शरू कर दिया। एफआईआर में ये भी कहा गया है कि भीड़ ने मंदिर के नीचे बनी किराने की दुकान पर पथराव भी किया और उस दुकान को जलाने की कोशिश भी की।

ऑपइंडिया की पीड़ित से बातचीत

ऑपइंडिया को जब घटना की जानकारी हुई तो हमने इसके लिए पीड़ित किशन कुमावत से संपर्क किया। उन्होंने हमें बताया- “अब्दुल पटेल के दोनों बच्चे पिछले कुछ समय से मेरी दुकान में जबरन डिब्बा खोलकर कुछ भी खाने लगते थे। पैसे माँगता था तो कहते थे कि अपने गाँव भाग जा। कल वो मेरी दुकान पर आए और खड़े थे। हंगामा शुरू हुआ तो अब्दुल अहमद, रियाज, फिरोजा, सबीना, तस्लीमा, सईद, मुस्ताक, हुजेफ और जावेद सहित 15-20 का समूह आया। उन लोगों ने मुझे घेरा और पीटना शुरू कर दिया।”

किशन कहते हैं- “झगड़े के बीच में मेरी पत्नी मुझे बचाने आई तो उसे भी पीटा गया। आसपास के लोगों ने बीच बचाव करके मुझे बचाया पर वो लोग तो चिल्ला रहे थे इसे मार डालो… मेरे पड़ोसी ने मुझसे कहा कि किशन भाई तुम मेरे घर आ जाओ ये लोग तुम्हें मार डालेंगे। मैं उनके घर जाता इस बीच मेरे गाँव में सरपंच समेत सब लोग आ गए। उस भीड़ ने तो उनपर भी हमला कर दिया। मैं पड़ोसी के घर से बाहर निकला तो देखा मेरी दुकान में आग लगाने की कोशिश की गई थी।” पीड़ित ने बताया कि इस बीच पुलिस को सूचना मिलते ही उनकी एक टीम फौरन मौके पर पहुँची और दुकान में लगी आग को बुझाया गया। किशन कहते हैं- “मेरे पड़ोसी मुझे नहीं छिपाते तो मैं मार दिया गया होता।”

सरपंच से ऑपइंडिया की बात

गौरतलब है कि इस घटना में हिंदू व्यापारी के अलावा गाँव के सरपंच धर्मेंद्र सिंह राणा पर भी हमला किया गया था। ऑपइंडिया ने उनसे बात की तो उन्होंने भी बताया कि गाँव में एक शादी थी और वो उसमें शामिल होने गए थे। इसी बीच किसी ने आकर उन्हें बताया कि रामजी के मंदिर के नीचे किराने की दुकान चलाने वाले किशन को मुस्लिम भीड़ मार रही है। उसे बचा लो, नहीं तो सब उसे मार डालेंगे।

सरपंच कहते हैं कि इतना सुनने के बाद वो और कुछ अन्य लोग किशन को बचाने गए मगर, मामला शांत होने की बजाय और बढ़ गया। मुस्लिम भीड़ ने सब पर हमला कर दिया। उनके कपड़े फाड़ दिए। सरपंच कहते हैं, “मेरे पीठ और गर्दन में चोट आई है। हमलावर भीड़ में महिलाएँ भी थीं। वे भी इतनी उग्र थीं कि सबके सब किशन को मारने की बातें कह रहे थे।”

सरपंच ने बताया, “भीड़ जिस तरह से किशन को मार रही थी, उसे देखकर लग रहा था कि उसे मार दिया गया होगा। अगर हमने बीच में पड़ने का जोखिम नहीं उठाया होता तो शायद वो ऐसा कर देते। उन्होंने हमलपर हमला बोला। जहाँ हमला हुआ वो पूरा इलाका हिंदुओं का है, वहाँ हमारा रामजी मंदिर है। भीड़ कह रही थी कि इसे चाकू मारो। पुलिस ने आकर मामले को संभाला और कार्रवाई की।”

इस घटना के संबंध में भरूच जिले की वागरा पुलिस ने अब्दुल अहमद पटेल और उनके 2 बच्चों रियाज मुस्ताक पटेल, फिरोजा मुस्ताक पटेल, सबीना मुस्ताक पटेल, तसलीमा मुस्ताक पटेल, तस्लीमा अब्दुल पटेल, सईद अहमद पटेल को गिरफ्तार किया है। मुस्ताक अहमद पटेल, हुजेफ जाकिर पटेल और जाविद एडम पटेल सहित 11 लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 143, 147, 149, 323, 337, 436, 504 और 506 (2) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। ऑपइंडिया के पास FIR की कॉपी उपलब्ध है।

हजारों महिलाओं की सेक्स वीडियो रिकॉर्डिंग, घर-घर जाकर अश्लील फोटो दिखा वोट न करने की अपील: एक्शन में महिला आयोग, नेता की ओर से ‘फर्जी’ केस दर्ज

कर्नाटक महिला आयोग ने राज्य के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया को एक पत्र लिख कर एक मामले में SIT जाँच की माँग की है। कर्नाटक महिला आयोग ने यह जाँच कथित तौर पर हासन में वायरल हो रही सेक्स वीडियो के विषय में करने को कहा है। आयोग ने कहा है कि हासन में बड़े नेता ने महिलाओं से सेक्सुअल फेवर की माँग की और कुछ का रेप तक किया।

कर्नाटक महिला आयोग ने कहा है कि हासन में हजारों महिलाओं सेक्स वीडियो की वीडियो रिकॉर्ड की गई हैं। उन्हें ब्लैकमेल किया जा रहा है और इससे समाज का सर शर्म से झुक गया है। आयोग ने कहा है कि मुख्यमंत्री सिद्दारमैया एक SIT बनाकर इस मामले में की जाँच करवाएँ।

कर्नाटक महिला आयोग की अध्यक्ष नागलक्ष्मी चौधरी ने इस पत्र में कहा है कि उनको इन वीडियो के वायरल होने की शिकायत कर्नाटक राज्य महिला दुर्जन्य विरोधी वेदिके नाम की एक संस्था से मिली है। आयोग ने कहा है कि महिलाओं की यह आपत्तिजनक वीडियो पेन ड्राइव के जरिए वायरल की जा रही हैं। महिला आयोग ने एक पत्र कर्नाटक के DGP को भी लिखा है।

दूसरी तरफ हासन के वर्तमान सांसद और जेडीएस नेता प्रज्व्वल रेवन्ना के एक पोलिंग एजेंट ने पुलिस से एक शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में कहा गया है कि जेडीएस सांसद की फर्जी अश्लील वीडियो वायरल की जा रही हैं।

पोलिंग एजेंट तेजस्वी एमजी ने अपनी शिकायत में कहा है कि उनके सांसद की अश्लील फोटो और वीडियो बनाकर कुछ लोग हर दरवाजे जा रहे हैं और प्रज्ज्वल रेवन्ना के खिलाफ वोट ना देने की अपील कर रहे हैं। इससे चुनावों को प्रभावित करने की कोशिश हो रही है। तेजस्वी एमजी ने आरोप लगाया कि नवीन नाम का शख्स कुछ लोगों के साथ मिलकर यह काम कर रहा है।

प्रज्व्व्ल रेवन्ना देश के पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौडा के पोते और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी के भतीजे हैं। वह 2019 में हासन से सांसद बने थे। इस बार वह फिर इस सीट से ताल ठोंक रहे हैं। इस बार उनको भाजपा का भी समर्थन प्राप्त है क्योंकि राज्य में दोनों पार्टियों ने गठबंधन किया है। उनका मुकाबला कॉन्ग्रेस के श्रेयस एम पटेल से है।

कॉन्ग्रेस ने हासन में वायरल हो रहे वीडियो को लेकर एचडी कुमारस्वामी को भी घेरा है। कॉन्ग्रेस ने एक ट्वीट में लिखा है, “कुमारस्वामी क्या आप जिस पेन ड्राइव को लम्बे समय से सीक्रेट बना कर रख रहे थे अब बाहर आ गई है? क्या हासन की सड़कों पर घूम रही पेन ड्राइव आपकी है?”

कर्नाटक के हासन में शुक्रवार (26 अप्रैल, 2024) को मतदान है। इन कथित सेक्स वीडियो के सामने आने के बाद इनका प्रभाव चुनाव पर भी पड़ सकता है।

राजस्थान में कॉन्ग्रेस की सहयोगी RLP की बगावत, बाड़मेर में मतदान से एक दिन पहले BJP प्रत्याशी कैलाश चौधरी को वोट देने की अपील

लोकसभा चुनाव 2024 में इस समय चर्चा बटोर रही राजस्थान की बाड़मेर-जैसलमेर सीट पर कॉन्ग्रेस के सहयोगी दल राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के स्थानीय नेताओं ने झटका दे दिया है। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के नेताओं ने कॉन्ग्रेस पर गंभीर आरोप लगाते हुए गठबंधन को छोड़ दिया और बीजेपी प्रत्याशी को समर्थन का ऐलान कर दिया है। इस लोकसभा सीट पर शुक्रवार को ही मतदान है। ऐसे में मतदान से महज कुछ घंटों पहले ये बड़ा बदलाव हुआ है, जिससे कॉन्ग्रेस बैकफुट पर चली गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हनुमान बेनीवाल की पार्टी राजस्थान में कॉन्ग्रेस के साथ चुनाव लड़ रही है। वो नागौर लोकसभा सीट से इंडी गठबंधन के प्रत्याशी हैं, लेकिन बाड़मेर-जैसलमेल लोकसभा सीट पर उनकी पार्टी के बड़े धड़े ने गठबंधन के सहयोगी कॉन्ग्रेस का साथ देने से इनकार कर दिया और केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी को समर्थन का ऐलान कर दिया। आरएलपी नेता गजेंद्र चौधरी और उनके समर्थकों ने कैलाश चौधरी को समर्थन देने का ऐलान किया है।

राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के पूर्व संयोजक गजेंद्र चौधरी ने कहा कि हमारी पार्टी का प्रदेश में कॉन्ग्रेस के साथ गठबंधन है, लेकिन बाड़मेर-जैसलमेर के स्थानीय नेताओं के विरोध को अनदेखा कर ये गठबंधन किया गया। चौधरी ने कहा कि कॉन्ग्रेस नेताओं ने हमारी पार्टी को तोड़ने का काम किया है और वहाँ हमारे कार्यकर्ताओं का कोई मान-सम्मान भी नहीं मिल रहा है, ऐसे में हमने स्वविवेक से बीजेपी के प्रत्याशी कैलाश चौधरी को समर्थन दिया है।

हनुमान बेनीवाल पर कॉन्ग्रेसियों ने किया था हमला

आरएलपी नेता गजेंद्र चौधरी ने कॉन्ग्रेस से नाराजगी की वजह बताते हुए कहा कि 4 साल पहले साल 2019 में हमारे अध्यक्ष (हनुमान बेनीवाल) और केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी पर कॉन्ग्रेस के लोगों ने बायतु में जानलेवा हमला किया था। ऐसे में हमारे कार्यकर्ताओं में आक्रोश है और कॉन्ग्रेस के नेता अब भी इस गठबंधन को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं, क्योंकि उनकी नीयत में खोट है। इसी वजह से बाड़मेर-जैसलमेर सीट पर हमने कॉन्ग्रेस की जगह बीजेपी प्रत्याशी को समर्थन देने का फैसला किया है।

बता दें कि पिछले लोकसभा चुनाव में आरएलपी बीजेपी के साथ थी। वहीं, कॉन्ग्रेस के उम्मीदवार उम्मेदाराम बेनीवाल पहले आरएलपी में थे, लेकिन टिकट बंटवारे से ठीक पहले वो कॉन्ग्रेस में शामिल हो गए और कॉन्ग्रेस से लोकसभा प्रत्याशी बन गए। आरएलपी के स्थानीय नेता इसे विश्वासघात बता रहे हैं।

लोकसभा चुनाव 2024: दूसरे चरण की 89 सीटों पर मतदान, 1198 उम्मीदवारों का फैसला करेंगे मतदाता, मैदान में 5 केंद्रीय मंत्री और 3 राजघरानों के वारिस

लोकसभा चुनाव 2024 के दूसरे चरण के लिए शुक्रवार को मतदान कराया जाएगा। इस चरण में लोकसभा की 89 (88 + 1 मणिपुर) क्षेत्रों में मतदान होगा। इस चरण के मतदान में 5 केंद्रीय मंत्रियों की सियासत दाँव पर है, तो 3 राजघरानों के वारिस भी लोकतंत्र के इस पर्व में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। देश की कुल 89 लोकसभा सीटों पर शुक्रवार की शाम तक उम्मीदवारों के भविष्य का फैसला ईवीएम में कैद हो जाएगा। लोकसभा चुनाव के दूसरे दौर के लिए सर्वाधिक 20 सीटें केरल में हैं, जिसमें राहुल गाँधी की वायनाड सीट भी शामिल है।

लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण में पूर्व पीएम एचडी देवेगौड़ा के बेटे और पूर्व सीएम एचडी कुमार स्वामी, छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, राजस्थान में पूर्व सीएम अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत, केरल में पूर्व सीएम और पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटनी के बेटे अनिल एंटनी के बेटे की किस्मत का फैसला भी ईवीएम में कैद हो जाएगा। इसके साथ ही 3 राजपरिवारों के वारिसों का फैसला भी ईवीएम में कैद होगा, उनके नाम हैं- झालावाड़-बारां से BJP उम्मीदवार दुष्यंत सिंह, जो धौलपुर राजपरिवार से हैं। इसके अलावा कर्नाटक के मैसूर से राजपरिवार के यदुवार कृष्ण दत्त वाडियार और बीजेपी की तरफ से ही त्रिपुरा राजपरिवार के कृति देव बर्मन।

मैदान में 5 केंद्रीय मंत्री

दूसरे चरण में 5 केंद्रीय मंत्री चुनाव मैदान में हैं, जिसमें केरल की अटिंगल सीट से वी. मुरलीधरन, केरल की तिरुवनंतपुरम सीट से राजीव चंद्रशेखर, राजस्थान की जोधपुर लोकसभा सीट से केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, राजस्थान के बाड़मेर से केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी और बेंगलुरु उत्तर सीट से केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे चुनाव मैदान में हैं। इस चरण के मतदान में कुल 1198 उम्मीदवारों की किस्मत दांव पर है। बाहरी मणिपुर लोकसभा के भी चार उम्मीदवारों को जोड़ें तो कुल संख्या 1202 हो जाती है। चूँकि बाहरी मणिपुर लोकसभा सीट पर दो चरणों में मतदान कराया जा रहा है, जिसमें आधे इलाकों में पहले चरण में मदतान कराया जा चुका है।

इन राज्यों में होगा मतदान

लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण में 89 सीटों पर 26 अप्रैल को मतदान होना है, इनमें केरल की (20) सीटों, कर्नाटक (14), राजस्थान (13), महाराष्ट्र (8), उत्तर प्रदेश (8), मध्य प्रदेश (7), असम (5), बिहार (5) हैं, तो छत्तीसगढ़ (3), पश्चिम बंगाल (3), मणिपुर, त्रिपुरा और जम्मू-कश्मीर में 1-1 सीट पर भी मतदान कराया जाएगा। साल 2019 के लोकसभा चुनाव में इन 88 में से 52 सीटें भाजपा ने जीतीं थीं। वहीं कांग्रेस को 18 और शिवसेना और जदयू को चार-चार सीटों पर सफलता मिली थी। इसके अलावा 10 सीटें अन्य के खाते में गई थी।

उत्तर प्रदेश की 8 लोकसभा सीटों पर चुनाव

लोकसभा चुनाव में दूसरे चरण में उत्तर प्रदेश की आठ सीटों पर शुक्रवार को मतदान होगा। अमरोहा, मेरठ, बागपत, गाजियाबाद, गौतम बुद्ध नगर, बुलंदशहर, अलीगढ़ और मथुरा लोकसभा सीट के 1.67 करोड़ मतदाता 91 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे, जिसमें 10 महिला प्रत्याशी हैं। गौतम बुद्ध नगर व मथुरा सीट पर सर्वाधिक 15-15 और बुलंदशहर में सबसे कम छह प्रत्याशी किस्मत आजमा रहे हैं। पिछले चुनाव में इन आठ सीटों में से सात भाजपा और एक बसपा की झोली में गई थीं।

गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव सात चरणों में हो रहे हैं। पहले चरण में 102 सीटों पर 19 अप्रैल को वोटिंग हुई थी। सातवें और अंतिम चरण में 1 जून को वोटिंग होनी है। लोकसभा चुनाव के नतीजे 4 जून को मतगणना के बाद आएँगे।

‘घर के काम पर होता है मूल्यांकन, न कि विदेश में कही गई बातों पर’: अमेरिकी यूनिवर्सिटीज में फिलिस्तीन समर्थक प्रदर्शनों के खिार पुलिस कार्रवाई पर भारत

भारत के विदेश मंत्रालय ने गुरुवार (25 अप्रैल 2024) को संयुक्त राज्य अमेरिका के विभिन्न विश्वविद्यालयों में फिलिस्तीन समर्थक विरोध प्रदर्शनों पर चल रही पुलिस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया व्यक्त की। मंत्रालय ने कहा कि लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, जिम्मेदारी की भावना और सार्वजनिक सुरक्षा एवं व्यवस्था का संतुलन होना चाहिए।

मीडिया ब्रीफिंग को संबोधित करते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “लोकतांत्रिक देशों को विशेष रूप से दूसरे लोकतांत्रिक देशों के लिए समझ को प्रदर्शित करना चाहिए, क्योंकि हम सभी का मूल्यांकन इस बात से किया जाता है कि हम घर पर क्या करते हैं, न कि हम विदेश में क्या कहते हैं।”

बता दें कि 17 अप्रैल को अमेरिका के कोलंबिया विश्वविद्यालय में फिलिस्तीन समर्थक विरोध प्रदर्शन हुआ। इसके बाद यह प्रदर्शन फिर न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय, येल विश्वविद्यालय, इलिनोइस विश्वविद्यालय और कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले और दक्षिणी कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय तक फैल गया।

फ़िलिस्तीन समर्थक प्रदर्शनकारियों ने इन विश्वविद्यालयों के अंदर ‘लिबरेटेड एन्कैंपमेंट ज़ोन‘ स्थापित किए हैं। इसके बाद अमेरिका की पुलिस ने इन प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू की और कइयों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने बुधवार (24 अप्रैल 2024) को दक्षिण कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय से इजरायल विरोधी प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार करना शुरू किया।

इस बीच टेक्सास यूनिवर्सिटी से दर्जनों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया गया। पुलिस को लाठी-डंडों के साथ दंगा भड़काने वाली मुद्रा में देखा गया और एक-एक करके गिरफ्तार करने से पहले उन्होंने प्रदर्शनकारियों के एक समूह को घेर लिया गया। उन्हें पकड़-पकड़कर पुलिस अपने साथ लेकर चली गई।

वहीं, सोमवार (22 अप्रैल 2024) को येल विश्वविद्यालय के एक शिविर से 40 से 48 से अधिक प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया। उसी सप्ताह में न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय में 133 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। मंगलवार (23 अप्रैल 2024) को मिनेसोटा विश्वविद्यालय से लगभग 9 फ़िलिस्तीन समर्थक प्रदर्शनकारियों को गिरफ़्तार किया गया।

अमेरिका में फिलिस्तीन समर्थक विरोध प्रदर्शन और उसके बाद गिरफ्तारियों के अलावा, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने हाल ही में प्रकाशित अमेरिकी विदेश विभाग की विवादास्पद रिपोर्ट जिसका शीर्षक है ‘Country Reports on Human Rights Practices’ (मानवाधिकार पर देशों की रिपोर्ट) पर भी प्रतिक्रिया व्यक्त की।

इस रिपोर्ट के सारांश में 3 मई से 15 नवंबर 2023 के बीच मणिपुर में हुई हिंसा का जिक्र किया गया है। इसके अलावा, रिपोर्ट में उमर खालिद, अतीक अहमद, सिद्दीकी कप्पन, खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर जैसे लोगों की चर्चा थी। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस रिपोर्ट को पक्षपातपूर्ण बताया और कहा कि मीडिया इसे महत्व ना दे।

(यह रिपोर्ट मूल रूप से अंग्रेजी में लिखी गई है। आप इस लिंक पर क्लिक करके विस्तार से पढ़ सकते हैं।)

हिंदुओं से घृणा और इस्लामी कट्टरपंथ से मोहब्बत: प्रिंसिपल परवीन शेख पर ऑपइंडिया की रिपोर्ट से जागा मशहूर सोमैया स्कूल, बोला- करेंगे कार्रवाई

मुंबई के मशहूर सोमैया स्कूल की इस्लामिक कट्टरपंथी प्रिंसिपल परवीन शेख पर ऑपइंडिया की रिपोर्ट के बाद स्कूल ट्रस्ट जाग उठा है। सोमैया स्कूल ट्रस्ट ने कहा है कि वो पूरे मामले में जल्द कदम उठाएगा। सोमैया ट्रस्ट ने ऑपइंडिया की रिपोर्ट के जवाब में कहा कि हमें परवीन शेख के इस पहलू के बारे में पता नहीं था, ये पूरी तरह से अस्वीकार्य है। सोमैया ट्रस्ट ने कहा है कि परवीन शेख के बारे में सामने आई जानकारियाँ चिंता पैदा करने वाली हैं, और वो इस मामले को देख रहे हैं।

सोमैया ट्रस्ट द्वारा संचालित सोमैया स्कूल मुंबई के घाटकोपर-ईस्ट इलाके में आने वाले विद्या विहार में स्थित है। परवीन शेख 12 साल से स्कूल से जुड़ी हुई हैं, जिनमें से 7 साल वो बतौर प्रिंसिपल काम कर चुकी हैं। अब इस मामले में सोमैया ट्रस्ट ने एक्स पर अपना पक्ष रखा है। सोमैया ट्रस्ट ने लिखा, “आज हमारे संज्ञान में लाए जाने तक हम इस मामले से अनजान थे। हम ऐसी भावनाओं (परवीन शेख की) से सहमत नहीं हैं। यह निश्चित रूप से चिंताजनक है। हम मामले की जाँच कर रहे हैं।”

सोमैया ट्रस्ट की तरफ से दिए गए जवाब पर लोगों ने कड़े एक्शन की माँग की है। बता दें कि ऑपइंडिया ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि कैसे मुंबई के मशहूर स्कूल की प्रिंसिपल परवीन शेख इस्लामिक कट्टरपंथियों की पोस्ट को ‘लाइक’ करती हैं। कैसे उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी मोदी, यूपी के सीएम योगी के लिए अभद्र बातें कही हैं। यही नहीं, परवीन शेख के हिंदू-विरोधी विचारों को भी हमने एक्सपोज किया है।

परवीन शेख पर प्रकाशिक मूल रिपोर्ट को यहाँ पढ़ सकते हैं। : मुंबई के मशहूर सोमैया स्कूल की प्रिंसिपल परवीन शेख को हिंदुओं से नफरत, PM मोदी की तुलना कुत्ते से… पसंद है हमास और इस्लामी हत्यारे

‘हम बहुत अमीर, हमें गरीब देशों में नहीं खेलना’: वीरेंद्र सहवाग ने उड़ाया BBL का मजाक, ब्रिटिश टीवी चैनल से कहा, ‘हमारी कमेंट्री अफोर्ड नहीं कर पाओगे’

क्रिकेट की दुनिया के सबसे विस्फोटक ओपनरों में शुमार रहे वीरेंद्र सहवाग अपने मजाकिया अंदाज के लिए भी जाने जाते हैं। उनका एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वो बेबाकी के साथ अपनी राय रख रहे हैं। क्लब प्रेरेरी फायर के पॉडकास्ट वीडियो में एडम गिलक्रिस्ट जैसे दिग्गज खिलाड़ी ने उनसे जब पूछा कि ‘क्या कभी भारतीय खिलाड़ी ऑस्ट्रेलिया की बिग बैग जैसी लीग में खेल पाएँगे?’ इस सवाल के जवाब में वीरेंद्र सहवाग ने ऐसी बात कह दी, जिससे ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड जैसे देशों का मजाक उड़ गया।

दरअसल, गिलक्रिस्ट के सवाल के जवाब में वीरेंद्र सहवाग ने कहा, “हमें जरूरत ही नहीं है बाहर खेलने की। हम अमीर लोग हैं। हम गरीब देशों में नहीं जाते।” सहवाग का इशारा दुनिया के सबसे अमीर और ताकतवर क्रिकेट बोर्ड बीसीसीआई की तरफ था, जो भारतीय क्रिकेटरों को न सिर्फ मोटी रकम देती है, बल्कि आईपीएल जैसी लीग में दुनिया के किसी भी लीग की तुलना में काफी पैसा भी कमाने का मौका देती है। यही वजह है कि दुनिया के टॉप क्रिकेट आईपीएल में खेलते दिखते हैं, जबकि कोई भी भारतीय क्रिकेटर दुनिया की किसी भी लीग में खेलता नहीं दिखता।

सहवाग ने पूरी बात बताते हुए कहा, “हमें विदेशी लीगों में खेलने की जरूरत ही नहीं है, हम अमीर लोग हैं, दूसरी लीग के लिए गरीब देशों में नहीं जाते। मुझे अब भी याद है जब मुझे भारतीय टीम से ड्रॉप कर दिया गया था, तब मैं आईपीएल खेल रहा था। उसी दौरान मुझे बीबीएल का ऑफर आया कि मैं बिग बैश में खेलूँ। मैंने पूछा पैसा कितना देंगे? उन्होंने कहा हंड्रेड थाउजैंड्स डॉलर (1 लाख डॉलर)। मैंने कहा ये पैसा तो मैं अपनी छुट्टियों में खर्च कर सकता हूँ, कल रात का बिल भी 1 लाख डॉलर से ज्यादा था।” हालाँकि इस दौरान वीरेंद्र सहवाग पूरी तरह से मजाकिया मूड में ही दिख रहे थे।

इस दौरान उन्होंने एक और वाकये का भी खुलासा किया और कहा कि एक बार उन्हें एक टीवी चैनल पैनल में शामिल होने के लिए कह रहे थे, लेकिन जब उन्होंने पैसों के बारे में बात की, तो उन्होंने इसके लिए मना कर दिया था।

वीरेंद्र सहवाग ने कहा, “एक बार स्काई स्पोर्ट्स ने मुझे बुलाकर कहा था कि हम चाहते हैं कि आप हमारे पैनल का हिस्सा बन जाइए। मैंने उनसे कहा कि आप मुझे अफोर्ड नहीं कर पाओगे। फिर उन्होंने मुझे कहा कि नहीं-नहीं ऐसा नहीं है। आप पैसा बताइए-कितना लेंगे। तो मैंने उनसे कहा एक दिन का 10000 पाउंड। इसके बाद उन्होंने मुझसे कहा कि हाँ आपने सही का था। हम आपको एफोर्ड नहीं कर पाएँगे।” ये पूरी बातचीत 13.11 मिनट से आप देख सकते हैं।

बता दें कि 10 हजार ब्रिटिश पाउंड की रकम भारतीय रुपये में 10 लाख से ज्यादा की रकम होती है, जो वीरेंद्र सहवाग एक दिन के लिए माँग रहे थे।

बांग्लादेश की तरक्की देखकर हमें शर्म आती है: पाकिस्तानी PM शहबाज शरीफ बोले- हमें बचपन में बताया गया था कि ये हम पर बोझ है

कंगाली के कगार पर खड़े पाकिस्तान को अब खुद पर शर्म आने लगी है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि कभी देश पर बोझ माने जाने वाले पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) ने औद्योगिक विकास में जबरदस्त प्रगति की है। उन्होंने कहा कि जब वे काफी छोटे थे, तब उन्हें बताया गया था कि पूर्वी पाकिस्तान देश के कंधों पर बोझ है। अब बांग्लादेश को देखकर पाकिस्तान को शर्म आती है।

दरअसल, शहबाज शरीफ ने यह बात देश के व्यापारियों के साथ एक मुलाकात में कही। लगभग एक घंटे तक चली बैठक के दौरान उन्होंने कहा, “मैं काफी छोटा था, जब हमें बताया गया कि यह (बांग्लादेश) हमारे कंधों पर बोझ है। आज आप सभी जानते हैं कि वह ‘बोझ’ कहाँ पहुँच गया है। जब हम उनकी ओर देखते हैं तो हमें शर्म आती है।”

पाकिस्तान के सिंध प्रांत में आयोजित इस बैठक के दौरान पाकिस्तान के व्यापारियों ने भारत के साथ फिर से व्यापार शुरू करने की वकालत की और पीएम शरीफ से इसकी पहल करने की अपील की। पाकिस्तान के बड़े व्यापारिक समूह आरिफ हबीब ग्रुप के मुखिया आरिफ हबीब ने भारत से रिश्ते सुधारने की माँग की।

उन्होंने कहा, “आपने सत्ता में आने के बाद कुछ लोगों से हाथ मिलाया, जिससे पाकिस्तान को फायदा हुआ। अब हम चाहते है कि कुछ और लोगों से हाथ मिलाएँ। पहले भारत से हाथ मिलाएँ, ताकि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को फायदा मिले। फिर अदियाला जेल में बंद इमरान से हाथ मिलाएँ, ताकि देश में राजनीतिक स्थिरता आए। इससे पाकिस्तान में बिजनेस का माहौल बनेगा।”

हालाँकि, भारत के साथ व्यापार शुरू करने और इमरान खान से हाथ मिलाने के सवाल पर शहबाज शरीफ ने कोई सीधा जवाब नहीं दिया। हालाँकि, उन्होंने यह जरूर कहा है कि सभी सुझावों नोट कर लिया गया है और वो उन सुझावों पर अमल करेंगे। उन्होंने कहा कि जब तक वर्तमान में चल रहे मुद्दों को सुलझा नहीं लिया जाता, वो व्यापारियों से बातचीत करते रहेंगे।

बताते चलें कि भारत और पाकिस्तान के बीच साल 2019 में हुए पुलवामा हमले के बाद से व्यापार बंद है। भारत ने पाकिस्तान को दिया गया ‘मोस्ट फेवर्ड नेशन’ का दर्जा भी हटा दिया था। इस दर्जे वाले देश को व्यापार में छूट मिलती है। भारत ने पाकिस्तानी चीजों पर 200 फीसदी कस्टम ड्यूटी भी बढ़ा दी थी। इससे पाकिस्तानी व्यापारियों को कई सालों से नुकसान हो रहा है।

वहीं, जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने के विरोध में पाकिस्तान ने भारत के साथ जमीन के जरिए होने वाले व्यापार को भी बंद कर दिया था। हालाँकि, समुद्री मार्गों से दोनों देशों के बीच अभी भी कुछ व्यापार हो रहा है। फरवरी 2024 में भारत सरकार ने कहा था कि पाकिस्तान के साथ थोड़ा व्यापार अब भी जारी है। ये व्यापार हवाई और समुद्री रास्तों से किया जा रहा है। 

भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले व्यापार में 91 प्रतिशत की गिरावट के बाद वहाँ के हालात खराब हैं। इसके कारण पाकिस्तान के कपड़ा और चीनी उद्योग पर भारी मार पड़ी है। पाकिस्तान कपड़े और दवा उद्योग के कच्चे माल के लिए भारत पर निर्भर था। व्यापारिक प्रतिबंधों से उसे भारी नुकसान हुआ है और देश की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है।