Home Blog Page 996

‘…मेरे जीवन के बुरे दिन समाप्त हुए’ : BJP में शामिल होकर बोले यूट्यूबर मनीष कश्यप, लालू परिवार पर निशाना साधा

यूट्यूबर मनीष कश्यप आज (25 अप्रैल 2024) भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए हैं। इससे पहले वो चंपारण सीट से निर्दलीय लोकसभा चुनाव लड़ने की तैयारी में थे। कश्यप ने अपनी माँ के साथ दिल्ली आकर पार्टी हेडक्वार्टर में सांसद मनोज तिवारी की मौजूदगी में भाजपा की सदस्यता ली।

बीजेपी ज्वाइन करने के बाद उन्होंने कहा, “हम कल मनोज तिवारी के साथ बिहार से आए। उनके कारण ही मैं जेल से रिहा हो सका और मेरे जीवन के बुरे दिन समाप्त हुए, इसलिए, मैं भाजपा में शामिल हो गया। हमें बिहार को मजबूत करना है।”

उन्होंने कहा, “लालू परिवार ने बिहार को लूटा और बर्बाद किया। बीजेपी के साथ मिलकर बिहार को मजबूत करूँगा…मुझ पर आरोप लगाए गए लेकिन पटना कोर्ट ने न सिर्फ मुझे जमानत दे दी बल्कि बरी भी कर दिया। मुझ पर लगाया गया एनएसए वापस ले लिया गया…सनातन को बदनाम करने वालों और राष्ट्रवाद के विरोधियों के खिलाफ मेरी लड़ाई जारी रहेगी…।”

वहीं मनीष के भाजपा ज्वाइन करने पर बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने कहा, “मनीष कश्यप ने बीजेपी ज्वाइन किया है। उनकी माता जी उपस्थित हैं। मनीष कश्यप ने जनता के सरोकार को उठाया है। हमेशा मोदी जी समर्थन में बात की, लेकिन कुछ दलों ने उनको बहुत दुख दिया। इनका हमेशा बीजेपी ने साथ दिया है।”

बता दें कि मनीष कश्यप पर तमिलनाडु सरकार ने NSA लगाया था। यूट्यूबर कश्यप पर तमिलनाडु में बिहार के मजदूरों को लेकर कथित तौर पर फर्जी वीडियो शेयर करने का आरोप लगा था। इसके बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। 9 नहीने बाद जाकर उनकी इस केस में रिहाई हुई थी। जेल से निकलने के बाद ही खबरें आई थीं कि वह निर्दलीय चुनाव में खड़ें होंगे। इसके लिए वह जगह-जगह घूमे और लोगों से मिले भी। लेकिन, भाजपा ज्वाइन करने के बाद उन्होंने कहा कि वो चुनाव नहीं लड़ रहे।

मार्क्सवादी सोच पर नहीं करेंगे काम: संपत्ति के बँटवारे पर बोला सुप्रीम कोर्ट, कहा- निजी प्रॉपर्टी नहीं ले सकते

संपत्ति के बँटवारे मामले में बढ़ रहे राजनैतिक विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (24 अप्रैल 2024) को कहा है कि वो इस मामले में किसी मार्क्सवादी विचार का काम नहीं करेंगे। कोर्ट ने कहा कि वह संपत्ति बँटवारे मामले में संविधान के अनुच्छेद 39 (ब) पर जस्टिस वीर कृष्णा की 1977 में की गई ‘मार्क्सवादी टिप्पणी’ का पालन नहीं करेंगे, जिसमें कहा गया था कि सार्वजनिक भलाई के लिए एक समुदाय के ‘भौतिक संसाधनों’ में पुनर्वितरण के लिए निजी संपत्तियाँ शामिल होंगी।

बता दें कि संविधान के अनुच्छेद 39 (B) में प्रावधान है कि राज्य अपनी नीति को यह सुनिश्चित करने की दिशा में निर्देशित करेगा कि ‘समुदाय के भौतिक संसाधनों का स्वामित्व और नियंत्रण इस प्रकार वितरित किया जाए जो आम लोगों की भलाई के लिए सर्वोत्तम हो’। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई की अध्यक्षता में 9 जजों की पीठ विभिन्न याचिकाओं से उत्पन्न जटिल कानूनी प्रश्न पर विचार कर रही है कि क्या निजी संपत्ति को संविधान के अनुच्छेद 39(बी) के तहत ‘समुदाय का भौतिक संसाधन’ माना जा सकता है।

इसी की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी कहा कि कहना ‘खतरनाक’ होगा कि किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति को ‘समुदाय का भौतिक संसाधन’ नहीं माना जा सकता, साथ ही ‘सार्वजनिक भलाई’ के लिए राज्य की तरफ से उस पर कब्जा नहीं किया जा सकता। सुनवाई के दौरान, बेंच ने कहा कि समुदाय के भौतिक संसाधन और निजी संपत्ति में फर्क होना चाहिए। कोई बिन कीमत चुकाए निजी संपत्ति नहीं ले सकता, लेकिन चूँकि समुदाय के भौतिक संसाधनों में नैचुरल रिसोर्स भी आते है। इसलिए अगर किसी व्यक्ति के पास निजी वन है तो ऐसा नहीं कह सकते कि जरूरत पड़ने पर समुदाय के लिए उसका प्रयोग नहीं हो पाएगा। अदालत ने कहा कि आर्टिकल 39 (ब) का प्रयोग किसी की निजी संपत्ति लेने के लिए नहीं करना चाहिए।

TOI की रिपोर्ट के अनुसार सीजेआई ने कहा, “हमें 1977 के रंगनाथ रेड्डी मामले में (अनुच्छेद 39(बी) की) जस्टिस कृष्णा अय्यर की मार्क्सवादी समाजवादी व्याख्या तक जाने की जरूरत नहीं है, लेकिन सामुदायिक संसाधनों में निश्चित रूप से वे संसाधन शामिल होंगे जिन पर वर्तमान पीढ़ी भरोसा करती है।” उन्होंने आगे संपत्ति बँटवारे मामले में दो विचार समझाए। कोर्ट ने कहा,

“मार्क्सवादी समाजवादी दृष्टिकोण यह है कि सब कुछ राज्य और समुदाय का है। पूंजीवादी दृष्टिकोण व्यक्तिगत अधिकारों को महत्व देता है। इसके अलावा अंतर-पीढ़ीगत समानता की रक्षा के लिए संसाधनों को भरोसे में रखने का गाँधीवादी दृष्टिकोण है।”

जानकारी के लिए: साल 1977 में रंगनाथ रेड्डी मामले में कोर्ट की बहुमत ने स्पष्ट किया था कि समुदाय के भौतिक संसाधनों में निजी संपत्ति शामिल नहीं है। वहीं, जस्टिस अय्यर का अलग रूख था। उन्होंने कहा था कि जनता की भलाई के लिए एक समुदाय के ‘भौतिक संसाधनों’ में पुनर्वितरण के लिए निजी संपत्तियाँ शामिल होंगी।

मोहम्मद जुबैर को ‘जेहादी’ कहने वाले व्यक्ति को दिल्ली पुलिस ने दी क्लीनचिट, कोर्ट को बताया- पूछताछ में कुछ भी आपत्तिजनक नहीं मिला

प्रोपेगेंडा वेबसाइट AltNews के संस्थापक मोहम्मद जुबैर को ‘जेहादी’ कहने वाले जगदीश कुमार को दिल्ली पुलिस ने क्लीनचिट दी है। दिल्ली पुलिस ने दिल्ली हाई कोर्ट को बताया है कि जगदीश कुमार के खिलाफ कुछ भी आपत्तिजनक नहीं पाया गया है। दरअसल जगदीश कुमार ने जुबैर को लेकर कहा था कि ‘एक जिहादी हमेशा जिहादी ही रहता है’।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया कि उसने जगदीश कुमार से उसके इरादों के बारे में पूछताछ की थी और उनके बयान में कुछ भी आपत्तिजनक नहीं निकला। दिल्ली पुलिस ने कहा कि जगदीश कुमार के ट्वीट से जनता में भय या चिंता पैदा नहीं होती है। इसीलिए उनके खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है।

अदालत में पेश की गई दिल्ली पुलिस की रिपोर्ट में कहा गया है, “शिकायतकर्ता श्री जगदीश सिंह द्वारा किए गए कैप्शन वाले ट्वीट और इस संबंध में उनकी जाँच से पता चला है कि 18.04.2020 को किए गए कैप्शन वाले ट्वीट से जनता या जनता के किसी भी वर्ग में भय या चिंता पैदा नहीं होती है, जिससे कोई भी व्यक्ति राज्य के विरुद्ध या सार्वजनिक शांति के विरुद्ध अपराध करने के लिए प्रेरित हो। उपरोक्त के मद्देनजर शिकायतकर्ता यानी श्री जगदीश सिंह के खिलाफ उपरोक्त ट्वीट के संबंध में कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है।”

दरअसल, इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने जगदीश कुमार के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने और जुबैर के खिलाफ FIR दर्ज करने पर दिल्ली पुलिस की खिंचाई की थी। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने अदालत में अपनी रिपोर्ट पेश की है। यह घटना साल 2020 की है। जुबैर ने अपने ट्वीट में जगदीश कुमार को ट्रोल कहा था और उनकी डिस्प्ले तस्वीर को रीट्वीट किया था।

अपने ट्वीट में मोहम्मद जुबैर ने लिखा था, “नमस्कार जगदीश सिंह। क्या आपकी प्यारी पोती को सोशल मीडिया पर लोगों को गाली देने के आपके पार्ट टाइम काम के बारे में पता है? मैं आपको अपना प्रोफ़ाइल चित्र बदलने का सुझाव देता हूँ।” हालाँकि, जगदीश कुमार की प्रोफाइल फोटो को रिट्वीट करते हुए जुबैर ने उनकी पोती की तस्वीर को धुंधला कर दिया था।

इसके बाद दिल्ली पुलिस ने जुबैर पर मामला दर्ज कर लिया था। जुबैर के खिलाफ दर्ज FIR में ट्विटर पर एक नाबालिग लड़की को ‘धमकी देने और प्रताड़ित करने’ के लिए यौन उत्पीड़न से बच्चों की सुरक्षा अधिनियम (POCSO) के प्रावधानों के साथ-साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराएँ भी लगाई गई हैं।

दिल्ली पुलिस ने बाद में हाई कोर्ट के समक्ष एक हलफनामा दायर कर कहा कि उसने आरोप पत्र में जुबैर का नाम नहीं लिया है, क्योंकि उसे जुबैर के खिलाफ कोई आपराधिक मामला बनता हुआ कुछ नहीं मिला। हालाँकि, दिल्ली उच्च न्यायालय ने जुबैर के खिलाफ कथित ‘घृणास्पद ट्वीट’ करने वाले जगदीश कुमार के खिलाफ कार्रवाई करने में विफल रहने के लिए पुलिस की खिंचाई की।

न्यायमूर्ति अनुप जयराम भंभानी ने कहा कि अगर जुबैर के खिलाफ नफरत फैलाने वाला भाषण देने के लिए जगदीश कुमार के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो अदालत अपना कर्तव्य नहीं निभाएगी। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से कहा था, “आपने उसके (जुबैर) खिलाफ खूब प्रहार किए, लेकिन मामला अब उसी तरह से खत्म हो गया है जैसा कि होना चाहिए था क्योंकि उसके खिलाफ कोई सबूत नहीं था। लेकिन आपने इस आदमी (जगदीश कुमार) के खिलाफ क्या कार्रवाई की है।”

‘इंदिरा की संपत्ति के लिए राजीव गाँधी सरकार ने बदल दिया था कानून, 4 पीढ़ियों तक नामदारों ने की मौज’: पीएम मोदी ने बताई ‘विरासत कर’ की सियासत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्य प्रदेश में विजय संकल्प रैली को संबोधित किया। उन्होंने कॉन्ग्रेस पर जोरदार हमला बोला। मुरैना में जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी कहा, “…मध्य प्रदेश के लोग जानते हैं कि किस समस्या से एक बार पीछा छूट जाए तो फिर उस समस्या से दूर ही रहना चाहिए। कॉन्ग्रेस पार्टी ऐसी ही विकास विरोधी एक बहुत बड़ी समस्या है। चंबल के लोग कॉन्ग्रेस का वो दौर कैसे भूल सकते हैं? कॉन्ग्रेस ने चंबल की पहचान खराब कानून-व्यवस्था और ऐसे क्षेत्र के तौर पर बना दी थी…” इस दौरान पीएम मोदी ने इनहैरिटेंट कानून को लेकर कॉन्ग्रेस पर निशाना साधा और कहा कि इंदिरा जी की मौत के बाद उनकी प्रॉपर्टी कहीं सरकार न ले ले, इसके लिए राजीव गाँधी की सरकार ने कानून ही बदल दिया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुरैना में जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, “इन दिनों कॉन्ग्रेस के शहजादे, आज कल वो इतने चिंतित हैं कि आए दिन उनको मोदी का अपमान करने में मजा आता है। मोदी के लिए भला-बुरा कहने में उनको मजा आ रहा है और मैं देख रहा हूँ सोशल मीडिया में, टी.वी. में बहुत सारे लोग चिंता जताते हैं कि ये भाषा अच्छी नहीं है। ऐसी भाषा देश के प्रधानमंत्री के लिए बोलना ठीक नहीं है… कुछ लोग बहुत दुखी हो जाते हैं कि मोदी जी को ऐसा क्यों बोला?… मेरी सबसे विनती है कि कृपा करके आप दुखी मत हों, आप गुस्सा मत कीजिए। आपको पता है कि ये नामदार हैं, हम तो कामदार हैं। और नामदार तो कामदार के साथ सदियों से ऐसे ही गाली-गलौज करते हुए आए हैं… मैं तो आपमें से आता हूँ, गरीबी से निकला हूँ, अगर 5-50 गालियाँ पड़ जाएँगी तो पड़ जाएँगी। आप गुस्सा मत कीजिए…”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुरैना में जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, “भाजपा के लिए देश से बड़ा और कुछ भी नहीं है और कॉन्ग्रेस के लिए अपना परिवार ही सब कुछ है। कॉन्ग्रेस की नीति है जो देश के लिए सबसे ज्यादा योगदान करे, सबसे ज्यादा मेहनत करे, सबसे ज्यादा समर्पण करे, उसे सबसे पीछे रखो। इसलिए कॉन्ग्रेस ने वर्षों तक सेना के जवानों की ‘वन रैंक वन पेंशन’ जैसी माँग पूरी नहीं होने दी। हमने सरकार बनते ही ‘वन रैंक वन पेंशन’ को लागू किया। हमने सीमा पर खड़े जवानों की सुविधा की भी चिंता की। कॉन्ग्रेस सरकार ने जवानों के जो हाथ बाँध रखे थे, हमने उन्हें भी खुली छूट दे दी। हमने कहा कि अगर एक गोली आती है तो 10 गोली चलनी चाहिए। अगर एक गोला फेंकते हैं तो 10 तोपें चल जानी चाहिए।”

पीएम मोदी ने कहा कि आज कल शाही परिवार के शहजादे पूरे देश में बढ़ चढ़ कर कह रहे हैं, अब आपकी संपत्ति का एक्सरे होगा और आलमारी में क्या पड़ा है, उसका पता लगाया जाएगा। माता-बहन ने कुछ बचत की है, तो एक्सरे करके खोजा जाएगा। लॉकर का एक्सरे किया जाएगा। स्त्री धन पर भी उनकी नजर है। कॉन्ग्रेस उसे जब्त करके अपने वोटबैंक को मजबूत करने के लिए उसे बाँटने की सार्वजनिक घोषणा कर रही है, मेनिफेस्टो में बता रही है। मैंने पहले ही दिन कहा था कि इनका मेनिफेस्टो मुस्लिम लीग का ही प्रतिबिंब है।

पीएम मोदी ने कहा, “जीते जी तो छोड़िए, मृत्यु के बाद भी, आपकी बची हुई संपत्ति जो स्वाभाविक रूप से आपके बेटे-बेटी को मिलनी चाहिए, वो भी आप नहीं दे पाएँगे। आप ने कितनी भी मेहनत करके उसे इकट्ठा किया होता, कॉन्ग्रेस वाले ऑफिसियली कहते हैं कि आपकी कमाई का आधे से ज्यादा उनकी सरकार छीन लेगी। कॉन्ग्रेस आपकी विरासत पर इनहेरिटेंट टैक्स लगाना चाहती है। इससे जुड़े जो तथ्य अब सामने निकल कर आ रहे हैं, वो आँखें खोलने वाले हैं।”

पीएम मोदी ने खोला इंदिरा-राजीव गाँधी का किस्सा

पीएम मोदी ने कहा, “मैं आज देश के सामने पहली बार एक दिलचस्प तथ्य आपके सामने रखना चाहता हूँ। जब देश की एक प्रधानमंत्री बहन जी नहीं रही, तो उनकी जो मिल्किय थी, उनकी जो प्रॉपर्टी थी, वो उनकी संतानों को मिलनी थी। लेकिन पहले ऐसा कानून था कि उनको मिलने से पहले एक हिस्सा सरकार ले लेती थी। ऐसा कानून कॉन्ग्रेस ने ही बनाया था। जब इंदिरा जी नहीं रही, तब उनके बेटे राजीव जी को प्रॉपर्टी मिलनी थी, उस प्रॉपर्टी को बचाने के लिए उस समय के प्रधानमंत्री श्रीमान राजीव गाँधी ने, अपनी संपत्ति बचाने के लिए पहले जो इनहेरिटेंट कानून था, उसे समाप्त किया और अपने पैसे बचा लिए। खुद पर जब आई, तब कानून ही बदल दिया। और आज सत्ता पाने के बाद वही कानून कॉन्ग्रेस वाले वापस लाना चाहते हैं।” उन्होंने कहा, “बिना टैक्स के अपने परिवार के 4-4 पीढ़ियों की अकूत धन-दौलत हासिल करने के बाद आप जैसे सामान्य मानविकी की विरासत, आपकी मेहनत की कमाई, जो आपने अपने बच्चों के लिए बचत करके रखा है, उसकी आधी संपत्ति लूटना चाहते हैं। इसीलिए पूरा देश कह रहा है, ‘कॉन्ग्रेस की लूट जिंदगी के साथ भी, जिंदगी के।’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुरैना में जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, “कॉन्ग्रेस दलितों का, पिछड़ों का, आदिवासियों का, हक छीनने का षडयंत्र लंबे समय से कर रही है। 19 दिसंबर 2011 में जब उनकी सरकार थी, तब भी कॉन्ग्रेस की केंद्र सरकार धर्म के नाम पर आरक्षण देने का एक नोट संसद में लेकर आई। इस संसदीय नोट में ये कहा गया था कि OBC समाज को जो 27 प्रतिशत आरक्षण मिलता है, मंडल कमीशन के अनुसार जो आरक्षण मिलता है, उस आरक्षण का एक हिस्सा काटकर के, मजहब के नाम पर दिया जाएगा। सिर्फ दो दिन बाद, 22 दिसंबर 2011 को इसका आदेश भी निकाल दिया गया। बाद में आंध्र प्रदेश के हाई कोर्ट ने कॉन्ग्रेस सरकार के इस आदेश को रद्द कर दिया। ये सुप्रीम कोर्ट में गए लेकिन राहत नहीं मिली। तब 2014 में कॉन्ग्रेस ने घोषणापत्र में लिखा कि धर्म के आधार पर आरक्षण देने के लिए कानून बनाना पड़े तो कानून भी बनाएंगे… उसके बाद इन समाजों ने एक होकर, कॉन्ग्रेस के सपनों को मिट्टी में मिला दिया, उनको सत्ता से बाहर कर दिया। फिर भी सुधरने को तैयार नहीं है…”

पीएम मोदी ने कहा कि आपके साथ खिलवाड़ करने के कॉन्ग्रेस के जो इरादे हैं, उनसे आपकी रक्षा के लिए ये मोदी दीवार बनके खड़ा है। ये गाली-गलौच इसलिए हो रहा है, क्योंकि मोदी 56 इंच का सीना तानकर खड़ा हो गया है। इनके मंजूसे सफल नहीं होंगे। ये मोदी की गारंटी है। लेकिन इसमें आपकी भी बड़ी भूमिका है।

बिक गई है कलकत्ता हाई कोर्ट… एक भी वोट मत देना BJP को: ममता बनर्जी ने सरकारी नौकरी करने वालों को भड़काया, HC ने किया है 26000 टीचरों की भर्ती रद्द

बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कलकत्ता हाई कोर्ट द्वारा सुनाए गए ‘शिक्षक घोटाला’ मामले में फैसले पर कहा है कि भारतीय जनता पार्टी ने हाई कोर्ट को खरीद लिया है। उन्होंने घोटाले के तहत भर्ती हुए 26000 शिक्षकों की भर्ती रद्द किए जाने के मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी। जनता को भड़काते हुए सीएम ममता ने अपील की कि चाहे कुछ भी हो जाए भाजपा और सीपीएम को टीचरों और सरकारी मुलाजिमों से एक भी वोट नहीं मिलना चाहिए।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले पर नाराजगी जाहिर करने के दौरान कहा, “भाजपा और सीपीए या कॉन्ग्रेस को एक भी वोट नहीं मिलना चाहिए।” उन्होंने कहा कि भाजपा ने हाई कोर्ट को खरीद लिया है। अब बस उम्मीद बची है तो सुप्रीम कोर्ट से।

अपनी बात कहते हुए ममता बनर्जी बोलीं, “उन्होंने (भाजपा) हाई कोर्ट को खरीद लिया है। उन्होंने सीबीआई को खरीद लिया है। उन्होंने एनआईए को खरीद लिया है। उन्होंने बीएसएफ को खरीद लिया है। उन्होंने सीएपीएफ को खरीद लिया है। उन्होंने दूरदर्शन का रंग भगवा करवा दिया है। वो सिर्फ भाजपा और मोदी की बात करता है। उसे बिलकुल मत देखो। उसका बहिष्कार करो।”

सीएम ममता के इस बयान के बयान के बाद वरिष्ठ वकील विकास रंजन भट्टाचार्य ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बयानों पर स्वत: संज्ञान लेने के लिए एक याचिका दायर की। उन्होंने कह कि ये कोर्ट की अवमानना है। लोग अदालत पर हँस रहे हैं। जजों को पक्षपाती कहा जा रहा है। अपनी याचिका के साथ उन्होंने पेपर की कटिंग भी दी है। उनकी इस याचिका पर कोर्ट ने मामले को लिस्ट करते हुए इसपर हलफनामा दायर करने को कहा है।

हाई कोर्ट का फैसला और टीएमसी की राजनीति

बता दें कि बंगाल के शिक्षक भर्ती घोटाले में लंबे समय से जाँच चल रही थी। इस केस में पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी समेत कई तृणमूल नेता जेल जा चुके हैं। वहीं कुछ दिन पहले ही SSC भर्ती घोटाले में फैसला सुनाते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली TMC सरकार को झटका दिया था।

स्कूल भर्ती घोटाले पर फैसला सुनाते हुए कलकत्ता उच्च न्यायालय ने कहा था कि 2016 के पूरे पैनल को रद्द किया जाए। 9वीं से लेकर 12वीं ग्रुप C एवं D में हुई सभी नियुक्तियों को अवैध ठहराते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट ने कहा कि 23,753 नौकरियों को रद्द किया जाए। इतना ही नहीं, इन सभी को 4 सप्ताह के भीतर पूरा वेतन लौटाना होगा, वो भी 12% ब्याज के साथ।

अब ममता बनर्जी इसी कोर्ट के फैसले के खिलाफ जनता में जो गुस्सा उमड़ा है उसका प्रयोग चुनाव जीतने के लिए कर रही हैं। कुछ समय से संदेशखाली मुद्दे पर उनकी सरकार को बहुत आलोचना झेलनी पड़ी थी लेकिन इस मुद्दे को टीएमसी इस्तेमाल करने का कोई मौका नहीं छोड़ रही।

इंदिरा गाँधी की 100% प्रॉपर्टी अपने बच्चों को दिलवाने के लिए राजीव गाँधी सरकार ने खत्म करवाया था ‘विरासत कर’… वरना सरकारी खजाने में चला जाता पैसा, 3 दशकों से था यह नियम

इंडियन ओवरसीज कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष और राहुल गाँधी के सलाहकार सैम पित्रोदा ने ‘विरासत कर (Inheritance Tax)’ का मुद्दा छेड़कर कॉन्ग्रेस की ही परेशानी बढ़ा दी है। अब लोकसभा चुनाव से पहले वो पुराने पन्ने भी खुल रहे हैं जिनपर इतने समय से चुप्पी थी। हर कोई कॉन्ग्रेस की मंशा पर सवाल खड़ा कर रहा है कि उनका मकसद देश के लोगों से उनकी कमाई संपत्ति छीनना है… लेकिन मालूम हो कि ‘विरासत कर’ देश के लिए नया टैक्स नहीं है। 40 साल पहले तक ये भारत में लागू था, जिसे 1985 में राजीव गाँधी सरकार ने ठीक उस समय खत्म किया जब इंदिरा गाँधी के संपत्ति के बँटवारे की बात आई।

मौजूदा जानकारी के अनुसार, यह ‘विरासत कर’ का कॉन्सेप्ट देश में तीन दशकों तक अस्तित्व में था। एस्टेट ड्यूटी एक्ट 1953 के तहत, व्यक्ति के मृत्यु के बाद उसकी विरासत का कर 85% तक जा सकता था। इसमें भी दरें निर्धारित थीं। जो प्रॉपर्टी 20 लाख रुपए से ऊपर थी उसमें 85% टैक्स लगता था जिसका मतलब है कि व्यक्ति की मौत के बाद अधिकांश जमीन पर अधिकार सरकार का हो जाता था। हालाँकि, ये कानून उस तरह से काम नहीं किया, जिस प्रकार से सोचा गया था।

इसके तहत नागरिकों को दो बार संपत्ति से जुड़ा कर भरना पड़ता था एक तो जीवन रहते (जिसे 2016 में मोदी सरकार ने बंद करवा दिया) और फिर उनके निधन पर भी। इसके अलावा जिस प्रकार से कॉन्ग्रेस ने इस कर को लागू करके धन जुटाने की सोची थी वो भी लक्ष्य पूरा नहीं हुआ क्योंकि जब देश में ऐसा कर आ गया तो फिर लोग बेनामी प्रॉपर्टी के मामले और संपत्ति छिपाने के मामले ज्यादा बढ़ गए। अंत में ये एक्ट 1985 में जाकर खत्म कर दिया गया।

अब दिलचस्प बात ये है कि जिस समय पर ये कानून रद्द किया गया वो वही समय था जब पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की प्रॉपर्टी उनके पोते-पोतियों के नाम पर होनी थी। राजीव गाँधी सरकार ने इस काम से ठीक एक माह पहले एस्टेट ड्यूटी 1953 को खत्म किया, उस समय वीपी सिंह वित्त मंत्री हुआ करते थे। घोषणा हुई कि ये कानून 1 अप्रैल 1985 के बाद से लागू नहीं होगा। इसके बाद 2 मई 1985 को इंदिरा गाँधी की करीबन 21 लाख 50 हजार की संपत्ति उनके तीन पोते-पोतियों में हस्तांतरित हो गई। आज उस प्रॉपर्टी की कीमत करीब 4.2 करोड़ रुपए है।

यूनाइटेड प्रेस इंटरनेशनल (यूपीआई) की 2 मई 1985 की एक रिपोर्ट के अनुसार, 1981 में हस्ताक्षरित वसीयत में इंदिरा गाँधी ने अपने बेटे राजीव गाँधी और उनकी पत्नी सोनिया गाँधी को वसीयत का निष्पादक (एग्जिक्यूटर) नियुक्त किया था, लेकिन बाद में उन्होंने उन्हें कुछ नहीं दिया। उन्होंने अपनी बहु मेनका गाँधी के लिए भी कुछ नहीं छोड़ा था। सारी संपत्ति तीनों पोते-पोतियों के नाम की गई थी।

बता दें कि राजीव गाँधी द्वारा ये वसीयत कोर्ट में दिखाए जाने के बाद इसे अखबार में भी पब्लिश किया गया था। इस विल के अनुसार इंदिरा गाँधी संपत्ति का बड़ा हिस्सा महरौली में निर्माणाधीन एक खेत और एक फार्महाउस था, जिसकी कीमत 98,000 डॉलर थी (आज के हिसाब से 81,72,171 रुपए)।

इसके अलावा तीनों बच्चों के नाम इंदिरा गाँधी और जवाहरलाल नेहरू द्वारा लिखित पुस्तकों के कॉपीराइट के साथ-साथ इकट्ठा हुए लगभग 75,000 डॉलर की नकदी, स्टॉक और बांड भी थे। वहीं इंदिरा गाँधी की प्राचीन वस्तुएँ और लगभग 2500 डॉलर की निजी आभूषण केवल प्रियंका गाँधी के लिए छोड़े गए थे। 1984 में तीनों वारिस नाबालिग थे इसलिए उस समय राजीव गाँधी और सोनिया गाँधी को उनके बड़े होने तक संपत्ति संभालने की जिम्मेदारी दी गई।

अब ये ध्यान देने वाली बात है कि जिस देश में 20 लाख से अधिक संपत्ति होने पर 85% प्रॉपर्टी सरकार को चली जाती थी, वो नियम राजीव गाँधी की सरकार में ठीक उस समय पलटा गया जब उनके बच्चों को उनकी दादी की विरासत मिलनी थी। यूपीआई की रिपोर्ट में भी कहा गया था, “1 अप्रैल से प्रभावी हुए एक वित्त विधेयक के तहत, भारत में सभी मृत्यु शुल्क समाप्त कर दिए गए हैं और गांधी संपत्ति पर कोई विरासत कर नहीं लगाया जाएगा।”

जिस जज ने सुनाया ज्ञानवापी में सर्वे करने का फैसला, उन्हें फिर से धमकियाँ आनी शुरू: इस बार विदेशी नंबरों से आ रही कॉल, पहले मिला था पत्र

ज्ञानवापी विवादित ढाँचे में सर्वे का फैसला देने वाले जज रवि कुमार दिवाकर को विदेशों से धमकी भरी कॉल आ रही हैं। जज का कहना है कि पिछले 20-24 दिन में 140 कोड वाले नंबरों से कई बार उन्हें धमकी भरी कॉलें आई हैं। उन्होंने इस संबंध में एसएसपी को पत्र लिखकर शिकायत दी है। कंप्लेन की एक कॉपी जिला जज को भी दी गई है।

बता दें कि ज्ञानवापी मामले में फैसला देने के बाद चर्चा में आए रवि कुमार दिवाकर फिलहाल बरेली में फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम में जज हैं। उन्होंने कुछ समय पहले 2010 के दंगे केस में मौलाना तौकीर रजा को मुख्य अभियुक्त बनाने वाले केस की सुनवाई की थी।

इस मामले में उन्होंने तौकीर रजा के खिलाफ वारंट जारी कर पुलिस को निर्देश दिए थे कि तौकीर रजा को अदालत में पेश किया जाए। हालाँकि इसके बाद तौकीर रजा का मामला अदालत से ट्रांसफर हो गया और फिर मौलाना को सुप्रीम कोर्ट से राहत दे दी गई मगर इसी, बीच जज को विदेशों से कॉल आना शुरू हो गईं।

जज के अनुसार, उन्होंने एसएसपी सुशील घुले को पत्र लिखकर कार्रवाई करने को कहा है। इस संबंध में एसएसपी ने भी बताया कि उन्हें न्यायाधीश का पत्र मिला है। साइबर सेल से वो मामले की जाँच करवा रहे हैं। जो भी तथ्य सामने आएँगे उसके आधार पर आगे कार्रवाई होगी।

पहले मिला था धमकी भरा पत्र

बता दें कि यह पहली बार नहीं है कि जज को इस प्रकार से अंतरराष्ट्रीय नंबरों से धमकियाँ दी जा रही हों। इससे पहले उन्होंने जब ज्ञानवापी विवादित ढाँचे का फैसला दिया था उस समय उन्हें धमकी भरा पत्र मिला था। पत्र में लिखा था–

“अब न्यायाधीश भी भगवा रंग में सराबोर हो चुके हैं। फैसला उग्रवादी हिंदुओं और उनसे जुड़े संगठनों को प्रसन्न करने के लिए सुनाते हैं। इसके बाद ठीकरा विभाजित भारत के मुसलमानों पर फोड़ते हैं। आप न्यायिक कार्य कर रहे हैं। आपको सरकारी मशीनरी मिली है, फिर आपकी पत्नी व माँ को डर कैसा है? आजकल न्यायिक अधिकारी हवा का रूख देखकर चालबाजी दिखा रहे हैं। आपने वक्तव्य दिया था कि ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का निरीक्षण एक सामान्य प्रक्रिया है। आप भी तो मूर्तिपूजक हैं। आप मस्जिद को मंदिर घोषित कर देंगे। कोई भी काफिर मूर्तिपूजक हिंदू न्यायाधीश से मुसलमान सही फैसले की उम्मीद नहीं कर सकता।”

इस धमकी के बाद प्रशासन ने जज की सिक्योरिटी से बिना खिलवाड़ किए उसे और सख्त कर दिया था। उनके साथ 9-10 पुलिसकर्मियों को हमेशा रहने को कहा गया था। बरेली में ट्रांसफर के बाद भी उनके साथ दो सुरक्षाकर्मी हमेशा रहते हैं। हालाँकि, फिर भी सुरक्षा की चिंता करते हुए कहा जा रहा है कि आतंकियों से लड़ने के लिए 2 सुरक्षाकर्मी पर्याप्त नहीं हैं क्योंकि उनके पास हथियार भी नहीं होते, जबकि आतंकियों के पास गन होती हैं। पिछले साल जज के लखनऊ आवास के पास से पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया का एक सदस्य गिरफ्तार हुआ था, जिसके बाद शाहजहाँपुर एसएसपी ने जज के आवास के बाहर गनर तैनात करवाए थे।

PUBG खेलते हुए 1 बच्ची की माँ को फँसाया, इस्लाम कबूल करा के किया निकाह और बना डाला जीनत फातिमा: डोनर बनकर हुई परेशान तो किया आत्मत्या का प्रयास

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में इस्लाम अपनाकर एक मुस्लिम युवक से निकाह करने वाली हिंदू महिला संदिग्ध परिस्थितियों में जीवन और मौत से जूझ रही है। वह फिलहाल अस्पताल में भर्ती है और कोमा में है। लड़की के परिजनों ने उसके शौहर मोहम्मद फुजैन पर गला दबाकर हत्या करने का आरोप लगाया है, जबकि लड़की के फुजैन का कहना है कि उसने आत्महत्या की कोशिश की है।

इस महिला का नाम जीनत है। इस्लाम कबूल करने से पहले उसका नाम हर्षदा था। हर्षदा मुंबई की रहने वाली है। लगभग 2 साल पहले PUBG खेलते हुए हर्षदा का संपर्क मुरादाबाद के फ़ुजैल से हुआ। हर्षदा ने धर्मांतरण करके निकाह कर लिया। अब उसकी एक बच्ची है। फुजैल हर्षदा को टॉर्चर करता था। पुलिस ने 22 अप्रैल 2024 को FIR दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है।

यह मामला मुरादाबाद के थाना क्षेत्र गलशहीद का है। मुंबई के शिवाजी नगर की रहने वाली हर्षदा की माँ ने 22 अप्रैल को पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में उन्होंने बताया है कि उनकी शादीशुदा बेटी की PUBG खेलते हुए मुरादाबाद के मुहम्मद फ़ुजैल से दोस्ती हुई थी। तब फ़ुजैल मुंबई में मुम्ब्रा इलाके में रहता था। मार्च 2022 में हर्षदा ने बिना बताए मुरादाबाद जाकर फ़ुजैल से निकाह कर लिया।

हर्षदा की लगभग 7 साल पहले शादी हुई थी और उससे 6 साल का एक बेटा भी है। बाद में उसका पति से तलाक हो गया। बाद में वह मोहम्मद फुजैल के बहकावे में फँस गई और इस्लाम अपनाकर जीनत फातिमा बन गई और मोहम्मद फुजैल से निकाह कर लिया। लगभग 1 साल पहले फुजैल से जीनत को एक बच्ची भी हुई। इसके बाद फुजैल का उस पर अत्याचार शुरू हो गया।

15 अप्रैल 2024 को जीनत ने अपनी माँ माधुरी को मुंबई कॉल किया। फोन पर उसने बताया कि फ़ुजैल उसे मारता-पीटता है और गंदी-गंदी गालियाँ देता है। तब तक फ़ुजैल ने काम-धंधा करना भी बंद कर दिया था। जीनत ने अपने शौहर की आदतों से खुद को बेहद परेशान बताया था। 2 दिनों बाद जीनत की माँ को पता चला कि उसकी बेटी मुरादाबाद के विवेकानंद अस्पताल के ICU वार्ड में भर्ती है।

पीड़िता की माँ ने फ़ुजैल को कॉल करके अपनी बेटी के अस्पताल में होने की वजह पूछी। फ़ुजैल ने जवाब दिया कि जीनत ने आत्महत्या का प्रयास किया है। अपनी बेटी के सुसाइड के प्रयास की जानकारी मिलते ही माधुरी अपनी एक रिश्तेदार के साथ मुरादाबाद आ गई। यहाँ वो अपनी बेटी को ICU वार्ड में देखकर परेशान हो गईं। आखिरकार माधुरी ने पुलिस में जाकर शिकायत दर्ज करवाई।

शिकायत में माधुरी ने अपनी बेटी के आत्महत्या के प्रयास में मोहम्मद फ़ुजैल और उसके अब्बा असलम को आरोपित किया है। पुलिस ने मोहम्मद फ़ुजैल और उसके अब्बा असलम को नामजद करते हुए FIR दर्ज कर ली है। इन दोनों पर IPC की धारा 323, 506, 306 और 511 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। इसमें अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

विवेकानंद अस्पताल के डॉक्टर मयंक ने UP Tak से बात करते हुए बताया कि जीनत फातिमा नाम की महिला 16 अप्रैल को अस्पताल में भर्ती करवाई गया था। उस समय वह बेहोश थी और उसके गले पर फंदे का निशान था। फाँसी पर लटकने की वजह से उनके दिमाग में ऑक्सीजन नहीं पहुँची जिससे वह कोमा में चली गई है। हालाँकि, जीनत उर्फ़ हर्षदा को बचाने के सभी प्रयास किए जा रहे हैं।

ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। पीड़िता के परिजनों ने बताया है कि फ़ुजैल हर्षदा को भगाकर अपने गाँव ले आया था। कुछ मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि फ़ुजैल लड़की से डोनर (किराए की कोख) का भी काम करवाता था। जिनके बच्चे नहीं होते थे, उनके लिए हर्षदा डोनर बनती थी। इससे फुजैल को मोटी आमदनी होती थी। हर्षदा जब इस काम से मना करती थी तो फुजैल मारपीट करता था।  

‘तुम च$र, हमसे पहले क्यों भरा पानी?’: मेवात में सरकारी ट्यूबवेल पर मुस्लिम महिलाओं का दलितों पर हमला, गाँव छोड़कर नहीं जाने पर हत्या की धमकी

हरियाणा के नूहं जिले में एक दलित परिवार पर मुस्लिम भीड़ द्वारा हमला करने का मामला सामने आया है। कहा जा रहा है कि जब ट्यूबवेल पर दलित महिलाएँ पानी भर रही थीं तो मुस्लिम महिलाओं ने उनसे मारपीट शुरू कर दी और कहा कि ये जगह उनके लिए पानी भरने की है। कुछ ही देर में इस दलित विरोधी हिंसा में मुस्लिम परिवार के पुरुष भी शामिल हो गए।

पीड़ितों का आरोप है कि इस दौरान उन्हें जातिसूचक शब्द बोले गए। हमलावरों ने उन्हें धमकी दी कि वे गाँव छोड़कर भाग जाएँ, नहीं तो उन्हें मार दिया जाएगा। हिंसा के शिकार आधे दर्जन दलितों को अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। घटना 17 अप्रैल 2024 की है। वहीं, पुलिस ने सोमवार (22 अप्रैल 2024) को FIR दर्ज करके जाँच शुरू की है। FIR में कुल 18 हमलावर नामजद किए गए हैं।

यह घटना तावडू इलाके के थाना सदर की है। यहाँ गाँव सहसीलापट्टी घुसबैठी की रहने वाली दलित महिला रजनी ने 22 अप्रैल को पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में रजनी ने बताया कि 17 अप्रैल की शाम लगभग 8 बजे वो अपने परिवार की कुछ अन्य महिलाओं के साथ सरकारी ट्यूबवेल पर पीने वाला पानी भरने गई थीं। यहाँ पर कुछ मुस्लिम महिलाएँ भी पानी भर रहीं थीं।

रजनी ने कहा कि इस दौरान असमीना, रहमती और मकसूदन ने उन्हें देखकर दलित महिलाओं के बर्तन फेंकने शुरू कर दिए। रजनी ने मुस्लिम महिलाओं से इसकी वजह पूछी तो मुस्लिम महिलाओं ने कहा, “तुम नीची जाति च$री, चु#ड़ी हो। हमसे पहले पानी कैसे भर सकती हो?” रजनी ने जातिसूचक गालियों का विरोध किया तो तीनों मुस्लिम महिलाओं ने उन पर हमला कर दिया और उन्हें पीट दिया।

पीड़िताओं का कहना है कि उन्होंने जैसे-तैसे भागकर अपनी जान बचाई। इधर मुस्लिम महिलाओं ने घर पहुँचकर लोगों को जमा कर लिया। कुछ ही देर में दलितों के घर की तरफ मुस्लिम भीड़ हमलावर दौड़ पड़ी। हमलावरों में अलीशेर, सोहेल, फारूख, सली मौहम्मद, असलूम, असलम, शहारून, महबूब, मुफीद, शारुख, उसमान, शेरू, इकराम, साहून, रमजान, असमीना, रहमती और मकसूदन शामिल थे।

हमलावरों लाठी-डंडा और फरसा ले रखे थे। ये सभी पीड़िता के घर में घुस गए। वहाँ उन्होंने माँ-बहन की गलियों के साथ पीड़ित परिवार को जातिसूचक गालियाँ दीं। शिकायत के मुताबिक हमलावरों ने कहा, “बहन%द च#रों, आज तुम्हें जान से मार देंगे। आज तुम्हें सबक सिखाते हैं।” रजनी और अन्य दलित महिलाओं पर मुस्लिम भीड़ के हमले में जो भी बीच-बचाव करने आया उसको बेरहमी से पीटा गया।

हमले में पीड़ित महिलाओं की नाक, हाथ, आँख, कंधे, पैर, छाती और चेहरे पर वार किए। लगभग आधे दर्जन पीड़ितों के घायल होने के बाद आरोपितों ने घरों में तोड़फोड़ शुरू कर दी। इस तोड़फोड़ में पंखे, बर्तन और टीन आदि टूट गए। घर के बाहर खड़े ऑटो को भी तोड़ डाला गया। हमलावरों ने जानवरों को भी नहीं छोड़ा। पीड़ितों के घर पर बँधीं गायों और भैंसों को भी पत्थर मारे गए।

पीड़ितों के घर हुआ पथराव

शोर-गुल सुनकर गाँव के कुछ अन्य लोग जमा हो गए, जिसके कारण पीड़ितों की जान बची। घटनास्थल से लौटती भीड़ में शामिल कुछ हमलावरों ने पीड़ितों को धमकी भी दी। उन्होंने कहा, “आज तो च#र, चु&डीं तुम्हें जिंदा छोड़ दिया है। अगर फिर कभी हमसे पहले पानी भरा या हमारे सामने नजर उठाई तो तुम्हें जान से मार देगें।”

धमकी देते हुए उन्होंने आगे कहा, “हमारे गाँव में रहना है तो औकात में रहो। साले हमारे सामने तुम्महारी क्या औकात?” यदि इस घटना की शिकायत कहीं पर की या कहीं किसी अधिकारी के सामने पेश हुए तो तुम्हें गाँव में नहीं रहने देगें। यहाँ से मारपीट कर भगा देगें और फिर कभी गाँव में नहीं घुसने देंगे।”

हमलावरों के जाने के बाद पीड़ितों ने घायलों का इलाज शुरू करवाया। कुछ घायलों को नल्हड़ के मेडिकल कॉलेज में भर्ती करवाया गया है। हालात गंभीर होने पर रामवीर नाम के शख्स को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल रेफर कर दिया गया है। पुलिस को दी गई शिकायत में रजनी ने यह भी बताया है कि उनको पहले भी जातिसूचक शब्द बोल कर बेइज्जत किया गया है।

हमलावरों को दबंग और बदमाश बताते हुए पीड़िता ने अपनी जान-माल का खतरा बताया है। FIR में देरी की वजह पीड़िता ने गंभीर रूप से घायल परिजनों के इलाज में व्यस्त होना बताया है। रजनी द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी की कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है।

पुलिस ने अलीशेर, सोहेल, फारूख, सली मौहम्मद, असलूम, असलम, शहारून, महबूब, मुफीद, शारुख, उसमान, शेरू, इकराम, साहून, रमजान, असमीना, रहमती और मकसूदन सहित अन्य हमलावरों पर FIR दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। इन सभी पर IPC की धारा 148, 149, 323, 452, 506 और SC/ST एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस मामले की जाँच में जुट गई है।

गाँव में एक भी हिन्दू मंदिर नहीं

ऑपइंडिया ने इस घटना में घायल हुए चरणजीत से बात की। चरणजीत ने हमें बताया कि उनके गाँव में 14-15 हिन्दुओं के घर हैं, जो दलित समुदाय से आते हैं। इसके अलावा गाँव में मुस्लिम समुदाय के लगभग 400 घर हैं। चरणजीत के मुताबिक, गाँव के अनुसूचित जाति के लोग महादेव और माँ दुर्गा के भक्त हैं, लेकिन डर के मारे उन्होंने गाँव में मंदिर भी नहीं बनवाया है।

चरणजीत ने बताया कि बीते नवरात्रि में उन्होंने अपने परिवार के साथ व्रत रखा था, लेकिन घर में बिना ढोल-मजीरे के पूजा करने पर मजबूर होना पड़ा। वहीं, पीड़िता रजनी ने यह भी बताया कि उन्हें और गाँव के अन्य दलितों को मुस्लिम समुदाय के लोग आए दिन गालियाँ और धमकी देते रहते हैं।

‘लव ब्रेन’ से पीड़ित लड़की अस्पताल में भर्ती: प्रेमी को दिन भर में 100+ बार करती थी कॉल, जवाब नहीं आने पर करती थी तोड़फोड़

चीन में 18 साल की एक लड़की अपने प्रेमी को दिन भर में 100 से अधिक बार कॉल करती थी। उसे ‘लव ब्रेन’ से पीड़ित पाया गया है। जियाओयू (बदला हुआ नाम) नाम की इस लड़की को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वह प्रेमी के प्रति इतनी जुनूनी हो गई कि उसके मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ा है। डॉक्टरों का मानना है कि वह बॉर्डरलाइन पर्सनैलिटी डिसऑर्डर से पीड़ित हो सकती है।

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की न्यूज रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण-पश्चिमी चीन के सिचुआन प्रांत की रहने वाली जियाओयू इतनी जुनूनी हो गई कि उसके प्रेमी का जीवन दुखमय हो गया। चेंग्दू के द फोर्थ पीपुल्स हॉस्पिटल के एक डॉक्टर डू ना ने कहा कि ज़ियाओयू का चिंताजनक व्यवहार उसके विश्वविद्यालय के पहले वर्ष में शुरू हुआ। इसके बाद दोनों के घनिष्ठ संबंध हो गए।

जियाओयू अपने प्रेमी पर निर्भर हो गई और हर समय उसे कॉल करने लगी। वह उससे ना केवल ये पूछती रहती है कि वह अभी कहाँ है और क्या कर रहा है, बल्कि वह यह भी चाहती थी कि उसका प्रेमी दिन और रात उसके कॉल को पिक करे और उसके संदेशों का जवाब दे। इससे उसका प्रेमी जल्द ही असहज और दबा हुआ महसूस करने लगा।

एक वायरल वीडियो क्लिप में ज़ियाओयू अपने प्रेमी को बार-बार अपना सोशल मीडिया ऐप वीचैट कैमरा चालू करने के लिए मैसेज करती दिख रही है। जब उसका प्रेमी जवाब नहीं देता फिर भी वह उसे वीडियो कॉल करती है, जिसे वह नजरअंदाज कर देता है। एक दिन उसने अपने प्रेमी को 100 से अधिक बार फोन किया, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया।

इससे वह इतनी परेशान और गुस्सा हो गई कि उसने घरेलू सामान को में तोड़-फोड़ और उसे इधर-उधर फेंकना शुरू कर दिया। उसने अपनी बालकनी से कूदने की धमकी दी तो उसके प्रेमी ने पुलिस को कॉल करके इसकी जानकारी दी। इसके बाद ज़ियाओयू को अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उसमें बॉर्डरलाइन पर्सनालिटी डिसऑर्डर का पता चला। इस डिसऑर्डर को बोलचाल की भाषा में ‘लव ब्रेन’ कहा जाता है।

डॉक्टर डू ने कहा कि यह स्थिति चिंता, अवसाद और द्विध्रुवी विकार जैसी दूसरी मानसिक बीमारियों के साथ भी हो सकती है। डू ने ज़ियाओयू की बीमारी के कारण का खुलासा नहीं किया, लेकिन कहा है कि यह अक्सर उन लोगों में होता है, जिनके बचपन के दौरान अपने माता-पिता के साथ स्वस्थ संबंध नहीं होते हैं।

डॉक्टर का कहना है कि इस बीमारी के हल्के रूप वाले लोगों के जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता है। वे अपनी भावनाओं को नियंत्रित करना सीखकर अपने आप ठीक हो सकते हैं। हालाँकि, इसके गंभीर लक्षणों वाले पीड़ितों को चिकित्सा सहायता की आवश्यकता होगी। जियाओयू की ये कहानी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो रही है।

बता दें कि एक तरफ वहाँ के युवाओं, खासकर लड़कियों में ‘लव ब्रेन’ के गंभीर लक्षण सामने आ रहे हैं, वहीं इसके पीड़ितों को सलाह देने का काम करने वाले उद्योग में जबरदस्त तेजी देखी जा रही है। ये कंपनियाँ लव ब्रेन से पीड़ित लड़के-लड़कियों को डाँटने और साँत्वना देने के लिए साथी प्रदान करता है।