Home Blog Page 997

टिकट देकर वापस माँग रही कॉन्ग्रेस, उम्मीदवार दिखा रहे ठेंगा: अब अपने ही प्रत्याशियों के खिलाफ चुनाव प्रचार कर रही पार्टी

लोकसभा चुनाव 2024 में नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाले एनडीए के सामने अपने अस्तित्व बचाने की लड़ाई लड़ रही कॉन्ग्रेस की अगुवाई वाली इंडी गठबंधन तमाम अंतर्विरोधों से जूझ रही है। केरल में कॉन्ग्रेस और वामदलों की आपसी लड़ाई चल रही है, तो पंजाब में आम आदमी पार्टी और कॉन्ग्रेस की। गुजरात में उसके कैंडिडेट का नामांकन खारिज हो गया, तो मध्य प्रदेश की खजुराहो सीट पर उसकी सहयोगी सपा के कैंडिडेट का।

बात राजस्थान में पहुँची, तो यहाँ तीन पार्टियों के साथ गठबंधन करने के बाद भी उसके सामने नई मुसीबत खड़ी हो गई है। एक तो कॉन्ग्रेस पार्टी को हर सीट पर दमदार कैंडिडेट नहीं मिल रहे और कहीं कैंडिडेट आखिरी समय में मिल गए, और उन्होंने नामांकन दाखिल कर भी दिया, तो अब कॉन्ग्रेस की कार्यकर्ताओं की ड्यूटी लगानी पड़ रही है अपने ही कैंडिडेट को हराने के लिए।

जी हाँ, राजस्थान की बाँसवाड़ा-डूंगरपुर लोकसभा सीट पर कॉन्ग्रेस की यही हालत है। इस लोकसभा सीट पर कॉग्रेस पार्टी और भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) के बीच चुनावी गठबंधन को लेकर बातचीत 2023 के विधानसभा चुनाव के पहले से चल रही थी। लेकिन गठबंधन फाइनल नहीं हो पाया। आखिर में भारत आदिवासी पार्टी ने अपने विधायक राज कुमार रोत को उम्मीदवार घोषित कर दिया। राज कुमार रोत ने नामांकन दाखिल कर दिया और तभी कॉन्ग्रेस ने अरविंद डमोर को टिकट दे दिया। उन्होंने भी नामांकन दाखिल कर दिया। फिर दोनों दलों में समझौता हो गया। नामांकन वापसी के दिन जब समझौता हुआ, तो कॉन्ग्रेस पार्टी ने अपने उम्मीदवार अरविंद डमोर को नामांकन वापस लेने के लिए ढूँढना शुरू कर दिया।

समय बीत गया, अरविंद डमोर ने नामांकन वापस नहीं लिया। यहाँ से बीजेपी के टिकट पर महेंद्रजीत सिंह मालवीय मैदान में हैं। वो अबतक कॉन्ग्रेस में थे। चार बार के विधायक रहे थे और अभी विधायकी और कॉन्ग्रेस पार्टी छोड़कर बीजेपी में आए हैं। बड़े नेता माने जाते हैं। उन्हें हराने के लिए कॉन्ग्रेस और बीएपी ने हाथ तो मिला लिया, लेकिन अब रास्ते में आ गए खुद कॉन्ग्रेस के ही उम्मीदवार अरविंद डमोर

अरविंद डमोर ने कह दिया है कि वो नाम वापस नहीं लेंगे। चूँकि बीएपी पार्टी के साथ कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ लोग कोई गठबंधन नहीं चाहते, ऐसे में वो राहुल गाँधी की इज्जत बचाने के लिए चुनाव लड़ रहे हैं। लेकिन दोराहे पर खड़े हो गए हैं कॉन्ग्रेस के नेता। पार्टी के नेताओं को प्रचार करना पड़ रहा है कि वो अरविंद डमोर को वोट न दें, भले ही वो कॉन्ग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी हैं। क्योंकि अब कॉन्ग्रेस और बीएपी के बीच समझौता हो गया है, ऐसे में कॉन्ग्रेस के लोग बीएपी को वोट करें। हालाँकि अरविंद डमोर कह रहे हैं कि वो पूरी ताकत से चुनाव लड़ रहे हैं। अरविंद का कहना है कि बीएपी से गठबंधन के विरोधी कॉन्ग्रेसी खेमे का उन्हें पूरा समर्थन हासिल है। वो चुनाव में जीत दर्ज करेंगे।

अब चुनाव परिणाम कुछ भी हों, लेकिन ये साफ है कि बाँसवाड़ा-डूँगरपुर लोकसभा सीट पर कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता अपनी ही पार्टी के सिंबल पर चुनाव लड़ रहे प्रत्याशी के खिलाफ चुनाव प्रचार कर रहे हैं। बीएपी ने भी पूरा जोर लगाया हुआ है और ये कोशिश कर रही है कि कॉन्ग्रेस के वोट उसे मिले। वहीं, बीजेपी के प्रत्याशी महेंद्रजीत मालवीय कॉन्ग्रेस के पुराने नेता रहे हैं। ऐसे में अपने प्रभाव वाले कॉन्ग्रेसी वोटों को तो वो अपने पास खींच ही रहे हैं, साथ ही उनके विरोध के वोट भी बीएपी और कॉन्ग्रेस में बंट रहे हैं। इस सीट पर 26 अप्रैल को मतदान किया जाएगा। ऐसे में चुनावी जीत किसे मिलती दिख रही है, ये अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। हालाँकि आखिरी नतीजों के बारे में पता तो 4 जून को ही लग पाएगा।

लोकसभा ही नहीं, विधानसभा उप-चुनाव में भी यही हाल

बाँसवाड़ा-डूँगरपुर लोकसभा सीट से बीजेपी के उम्मीदवार महेंद्रजीत सिंह मालवीय चुनाव लड़ रहे हैं। वो अभी तक बागीदौरा विधानसभा से विधायक थे। उन्होंने विधानसभा से भी इस्तीफा दे दिया। ऐसे में यहाँ उपचुनाव हो रहे हैं। कॉन्ग्रेस में कन्फ्यूजन सिर्फ लोकसभा सीट को लेकर ही नहीं है, बल्कि बागीदौरा विधानसभा सीट पर उप-चुनाव को लेकर भी है। यहाँ से कॉन्ग्रेस ने पहले टिकट दिया कमल कांत कटारा को, लेकिन किसी कारणों से वो नामांकन ही दाखिल नहीं कर पाए। उनकी जगह पर कॉन्ग्रेस के सिंबल पर कपूर सिंह ने पर्चा दाखिल कर दिया।

लेकिन लोकसभा सीट जैसा मामला यहाँ भी फंस गया, क्योंकि इस उप-चुनाव को लेकर भी कॉन्ग्रेस और बीएपी में सहमति बन गई। अब यहाँ से कॉन्ग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए सुभाष तंबोलिया बीजेपी के उम्मीदवार हैं। उनके मुकाबले बीएपी ने विधानसभा चुनाव में हारे जयकृष्ण पटेल को फिर से मैदान में उतारा है। वहीं, कॉन्ग्रेस के सिंबल पर कपूर सिंह दावेदारी पेश कर रहे हैं। उन्हें भी कॉन्ग्रेस ने नाम वापस लेने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने भी नामांकन वापस नहीं लिया और अब पूरी ताकत से चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में अब कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ता उप-चुनाव में भी यही दुहाई दे रहे हैं कि कॉन्ग्रेस के समर्थक वोटर कॉन्ग्रेस को वोट न देकर बीएपी को अपना वोट दें। खैर, यहाँ भी 26 अप्रैल को मतदान होगा और नतीजे 4 जून को सामने आएँगे।

‘संपत्ति सर्वे’ पर पलटे राहुल गाँधी: कहा- सिर्फ जानना चाहता हूँ कि कितना अन्याय हुआ है, पहले कहा था – लोगों की संपत्ति छीन कर दोबारा बाँटेंगे

देशवासियों की सम्पत्ति का सर्वे करने वाले बयान से राहुल गाँधी ने पलटी मार ली है। उनका कहना है कि इस मामले में एक्शन लेने की बात उन्होंने नहीं की है। इससे पहले राहुल गाँधी ने कॉन्ग्रेस के सत्ता में आने पर देश के लोगों की सम्पत्ति का सर्वे करवाने की बात कही थी, इसके साथ ही इस सम्पत्ति को दोबारा बाँटने की भी बात कही गई थी।

राहुल गाँधी ने दिल्ली स्थित जवाहर भवन ने यह बाते कहीं। यहाँ सामाजिक न्याय सम्मेलन में हिस्सा ले रहे थे। इसे कॉन्ग्रेस ने आयोजित किया था। इस आयोजन में उन्होंने अपने सर्वे और एक्स रे वाली बात का बचाव किया है। राहुल गाँधी ने कहा, “मैंने अभी तक यह नहीं कहा है कि हम कार्रवाई करेंगे। मैं तो बस इतना कह रहा हूँ कि हम पता लगाएँगे कि कितना अन्याय हुआ है।”

राहुल गाँधी का कहना है कि उन्होंने जबसे सामाजिक न्याय की बात की है, तब से प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा ने उन पर हमले करना चालू कर दिया है। राहुल गाँधी ने कहा कि देश के लोगों की सम्पत्ति का एक्सरे करने से समस्या पता चलेगी। गौरतलब है कि राहुल गाँधी ने इससे पहले देश के लोगों की सम्पत्ति का सर्वे करवाया जाएगा। यह सर्वे सम्पत्ति के दोबारा से बँटवारे को लेकर किया जाएगा। इससे सम्पत्ति बाँटने में सहायता मिलेगी।

राहुल गाँधी ने इस सामाजिक न्याय सम्मेलन में जातिगत जनगणना को लेकर भी बात की। उन्होंने कहा, “ये मेरे लिए राजनीति नहीं है। ये मेरे लिए लाइफ मिशन है। इसे मैं छोड़ने वाला नहीं हूँ। मैं गारंटी से कह रहा हूँ… आप लिख लो…. आप लिख लो… जाति जनगणना को कोई शक्ति नहीं रोक सकती है। जितनी तेजी से इसे रोका गया, उतनी फोर्स से ये वापस आई। हिंदुस्तान के 90 परसेंट लोगों को ये बात समझ में आ गई है।”

राहुल गाँधी के सम्पत्ति के सर्वे और दोबारा बाँटने की बातों के बीच कॉन्ग्रेस नेता सैम पित्रोदा ने विरासत टैक्स की बात भी की है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए बताया कि अमेरिका में किसी व्यक्ति की मौत के बाद उसकी 55% सम्पत्ति सरकार ले लेती है और पित्रोदा को यह सही लगता है। भारत में ऐसा कानून नहीं है। उनके इस बयान से कॉन्ग्रेस ने दूरी बना ली थी। कॉन्ग्रेस ने इसे उनकी निजी राय बताया है। पीएम मोदी ने इसको लेकर बताया है कि कॉन्ग्रेस जिन्दगी के साथ और जिन्दगी के बाद लूट की नीति रखती है।

‘हमने इजाजत दी नहीं, फिर आप बाहर कैसे निकल गए?’: 7 मई तक बढ़ाई गई मनीष सिसोदिया की हिरासत अवधि, जज ने वकील को लगाई फटकार

दिल्ली के पूर्व उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की हिरासत अवधि 7 मई, 2024 तक बढ़ा दी गई है। उनकी माँग है कि फ़िलहाल उन पर आरोप तय नहीं किए जाएँ। इस याचिका पर राउज एवेन्यू कोर्ट ने जाँच अधिकारियों से जवाब माँगा है। वहीं दलील पूरी होते ही मनीष सिसोदिया के वकील कोर्ट से बाहर चले गए, जिस पर जज ने जताई और कहा कि ऐसा उन्होंने पहली बार देखा है। इस पर वकील ने माफ़ी माँगते हुए कहा कि हमें वॉकआउट नहीं करना चाहिए था।

याचिकाकर्ता की तरफ से दलील दी गई कि जाँच अभी तक चल ही रही है। हालाँकि, CBI ने इसका विरोध किया। याचिका में कहा गया कि खुद IO ने 4 महीने के भीतर जाँच पूरी करने की बात कही थी, लेकिन अब तक जाँच चल ही रही है। कहा गया कि कोर्ट के आदेश के बाद गिरफ़्तारी हुई और बयान दर्ज किया गया, ऐसे में अभी चार्ज फ्रेम करने पर सुनवाई शुरू नहीं होनी चाहिए। वहीं CBI ने कहा कि अब तक जितनी चार्जशीट दाखिल हुई है उस पर हम बहस करेंगे।

हालाँकि, कोर्ट ने कहा कि अभी तक याचिका की प्रति उस तक नहीं पहुँची है। मनीष सिसोदिया को तिहाड़ जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ही बुधवार (24 अप्रैल, 2024) को पेश किया गया। कोर्ट ने इस दौरान मनीष सिसोदिया के वकील से इस बात को लेकर नाराज़गी जताई कि वो बिना अनुमति लिए बाहर निकल गए थे। कोर्ट ने कहा कि हमने तो बाहर जाने के लिए कहा ही नहीं था। उधर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और BRS नेता K कविता की हिरासत अवधि भी 7 मई तक बढ़ाई जा चुकी है।

बता दें कि 24 अप्रैल, 2024 को ही मनीष सिसोदिया की हिरासत अवधि खत्म हो रही थी। वो शराब घोटाले में जेल में बंद हैं। कोर्ट ने CBI को निर्देश दिया है कि इस मामले में एक तालिका बना कर बयान और सबूत दिखाए जाएँ। 26 फरवरी, 2023 को ही मनीष सिसोदिया को गिरफ्तार किया गया था, ऐसे में वो 1 साल 2 महीने से जेल में बंद हैं। वहीं अरविंद केजरीवाल भी इसी के तहत मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जेल में बंद हैं। शराब घोटाले में किकबैक लेकर प्राइवेट प्लेयर्स को फायदा पहुँचाने का आरोप है।

कर्नाटक में OBC के भीतर नौकरी-एडमिशन-चुनाव में सभी मुस्लिमों को आरक्षण, कॉन्ग्रेस सरकार ने दी थी सुविधा: बोला पिछड़ा आयोग – ये सामाजिक न्याय के खिलाफ

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस पार्टी SC, ST और OBC समाज का आरक्षण छीन कर मुस्लिमों को देना चाहती है। कर्नाटक के आँकड़े इसकी पुष्टि भी करते हैं। वहाँ सभी शैक्षिणक संस्थानों एवं सरकारी नौकरियों में मुस्लिमों की सभी जातियों को OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग) के अंतर्गत आरक्षण की सुविधा दी गई है। ‘राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग’ (NCBC) की प्रेस विज्ञप्ति से भी इस पर मुहर लगती है। यानी, पीएम मोदी के आरोपों में दम है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि जो हक़ बाबासाहेब ने दलितों, पिछड़ों एवं जनजातीय समाज को दिया, कॉन्ग्रेस और I.N.D.I. गठबंधन वाले उसे मजहब के आधार पर मुस्लिमों को देना चाहते हैं। एक चुनावी जनसभा के दौरान उन्होंने कॉन्ग्रेस को वो चुनौती देना चाहते हैं कि वो वादा करे कि संविधान में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और OBC को जो आरक्षण मिला है, उसे वो कम कर के मुस्लिमों में नहीं बाँटेगी। इस बयान के बाद कॉन्ग्रेसियों ने पीएम मोदी की आलोचना शुरू कर दी थी।

कर्नाटक में 2011 की जनगणना के हिसाब से मुस्लिम कुल जनसंख्या का 12% हैं। आरक्षण के नियमों की कैटेगरी 2B में मुस्लिमों की सभी जातियों को शामिल किया गया है। वहीं कैटेगरी 2A में भी मुस्लिमों की 19 जातियाँ हैं। वहीं कैटेगरी 1 में 17 जातियाँ इस्लामी हैं। NCBC के दौरे में भी इसकी पुष्टि हुई थी। यहाँ तक कि स्थानीय निकाय के चुनावों में भी जो सीटें OBC समाज के लिए आरक्षित हैं वहाँ मुस्लिमों को चुनाव लड़ने की इजाजत है।

NCBC ने बताया था कि मुस्लिम भी सामुदायिक विभाजन से अछूते नहीं हैं और वहाँ भी विभाजन है। शेख, सैयद और पठान की अर्थित स्थिति अच्छी है, वहीं समाजिक भेदभाव के खिलाफ पिछड़े मुस्लिम अगड़ों का विरोध भी करते हैं। कॉन्ग्रेस सरकार ने 30 मार्च, 2002 को अध्यादेश जारी कर ये फैसला लिया गया था। शिक्षा एवं रोजगार में मुस्लिमों को आरक्षण दिया गया। सरपंच से लेकर नगपालिका और जिला परिषद अध्यक्ष तक के पदों पर OBC के 32% रिजर्वेशन के अंतर्गत मुस्लिम भी आते हैं।

NCBC ने कर्नाटक की इस नीति को सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध बताया है। पिछले साल NCBC ने ग्राउंड पर जाकर आरक्षण की स्थति का पता लगाया था। आयोग का कहना है कि ऐसे में मुस्लिमों में जो जातियाँ शिक्षिक-सामाजिक रूप से पिछड़ी हैं उनकी भी हकमारी हो रही है। सभी मुस्लिमों को पिछड़े समाज में डालना इस समाज की विविधता और जटिलता को नज़रअंदाज़ करने के जैसा है। इस तरह पीएम मोदी का ये आरोप ठीक है और ये आशंका है कि कॉन्ग्रेस सत्ता में आने पर पूरे देश में ये फॉर्मूला बड़े स्तर पर लागू कर सकती है।

पिछड़े और कमजोर वर्ग की मुस्लिम जातियों कुंजरे (रायन), जुलाहे (अंसारी), दुनिया (मंसूरी), कसाई (कुरैशी), फकीर (अल्वी), हज्जाम (सलमानी), मेहतर (हलालखोर), धोबी (हवारी), लोहार-बढ़ई (सैफी), मनिहार (सिद्दीकी), दर्जी (इदरीसी) शामिल हैं जो दलित में आते हैं और खुद को पसमांदा कहते हैं। अनुच्छेद 15(4) एवं 16(4) के तहत मुस्लिमों की अगड़ी जातियों शेख, सैयद और पठान को भी नौकरी-एडमिशन में आरक्षण का लाभ दिया जा रहा है।

फर्जी मेजर बनकर मोहम्मद फारूक दिखा रहा था पुलिस को भौकाल, तलाशी हुई तो निकला शराब तस्कर: महाराष्ट्र में गिरफ्तार, लाखों की दारू बरामद

फर्जी मेजर बनकर शराब तस्करी करने वाले राहिल शेख उर्फ मोहम्मद फारूक शेख को महाराष्ट्र के नंदुरबार में गिरफ्तार किया गया है। मोहम्मद फारूक गुजरात के वडोदरा का रहने वाला है और महाराष्ट्र के नंदुरबार में आता जाता था। उसका काम ही मेजर की यूनिफॉर्म पहनकर शराब तस्करी करने का था। काफी दिन उसने मेजर की वर्दी पहन पहनकर अपना फर्जीवाड़ा चलाया लेकिन हाल में उसका भंडाफोड़ तब हुआ जब वो पुलिस के आगे अपनी शेखी बघारने लगा।

दरअसल, हुआ यूँ कि महाराष्ट्र के नंदुरबार में वाहन चेकिंग के दौरान ट्रैफिक जाम हो गया था। इस बीच मोहम्मद फारूक सेना के प्रमुख रैंक वाले अधिकारी की वर्दी पहनकर कार से उतरा और पुलिस पर चिल्लाने लगा। इसी बीच कांस्टेबल उसके पास आया और मेजर समझकर उसे सलाम किया। इसके बाद जब महाराष्ट्र पुलिस ने अपनी तसल्ली के लिए उससे पूछताछ करनी शुरू की तो उसकी सारी शेखी निकल गई।

नंदुरबार पुलिस ने फर्जी मेजर बने राहिल की जाँच की तो उसकी कार में डेढ़ लाख की विदेशी शराब की बोतलें मिलीं। जब पुलिस ने इनके बारे में पूछा तो भी वह खुद को आर्मी ऑफिसर बताता रहा। पुलिस को संदेह हुआ तो उसकी आईडी की जाँच की गई और फिर पता चला कि उसका आईडी भी नकली ही था।

ऑपइंडिया को जब इस घटना की सूचना मिली तो हमने नंदुरबार पुलिस थाने में संपर्क किया। पुलिस ने हमें पुष्टि करते हुए बताया कि आरोपित मोहम्मद फारूक शेख को गिरफ्तार किया गया है। वो रहने वाला महाराष्ट्र के जलगाँव का है लेकिन वर्तमान में वडोदरा के गोरवा में रह रहा था। वह सेना की वर्दी पहनकर महाराष्ट्र से शराब की गाड़ी भरकर गुजरात ले जाता था ताकि सीमा पार करने में समस्या न हो। इस बार वह पकड़ लिया गया।

ऑपइंडिया ने जब गोरवा थाने में संपर्क किया तो इस मामले में पुलिस अधिकारी सिद्धराज सिंह ने बताया कि उन्होंने आरोपित के घर की तलाशी भी ली है। उसके पास से करीबन 3.67 लाख रुपए की विभिन्न ब्रांड की विदेशी शराब मिली हैं। इसके अलावा सेना की एक जोड़ी वर्दी भी बरामद की गई है।

अब पुलिस इस मामले में आगे की जाँच कर रही है कि उसे ये शराब की बोतलें आखिर कहाँ से मिलीं। नंदुरबार पुलिस चार दिन की रिमांड पर रखकर आरोपित से पूछताछ कर रही है। इसके बाद गोरवा पुलिस ट्रांसफर वारंट के आधार पर अपनी कार्रवाई करेगी। दोनों राज्य की पुलिसें पता लगा रही हैं कि सेना का फर्जी मेजर बनकर फारूक कहाँ-कहाँ घूमा और कितनी अवैध गतिविधियाँ कीं? अभी सामने आया है कि मोहम्मद फारूख शेख ने पाँच साल पहले एक मैट्रिमोनियल साइट के जरिए शाहिदा को बेवकूफ बनाकर उससे शादी की थी, उसने खुद को सेना से रिटायर हुआ बताया था।

सिर्फ हिंदुओं (गैर-मुस्लिमों) की 55% संपत्ति पर कब्जा करेगी कॉन्ग्रेसी सरकार, इस्लाम मानने वालों के पास रहेगी 100% दौलत: मुस्लिम पर्सनल लॉ से समझिए कॉन्ग्रेस का खेल

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने वादा किया है कि वो सत्ता में आएँगे, तो अमीरों से पैसे छीन लेंगे और गरीबों में बाँट देंगे। कॉन्ग्रेस पार्टी सत्ता में आने के बाद लोगों की संपत्ति की जाँच कराएगी और अगर संपत्ति ज्यादा होगी, तो उसे सरकार अपने कब्जे में ले लेगी। फिर इस संपत्ति को उन्हें दे देगी, जिनके पास संपत्ति कम है। वैसे सुनने में ये बड़ा क्रांतिकारी आईडिया लगता है, लेकिन हकीकत में कितना खतरनाक है, इसका अंदाजा ही किसी को नहीं है।

इस बीच, राहुल गाँधी ही नहीं, उनकी माँ सोनिया गाँधी के करीबी और कॉन्ग्रेसी थिंक टैंक के बड़े चेहरे सैम पित्रोदा ने जले पर नमक छिड़कने और नए जख्म देने की कोशिश करते हुए भारत में अमेरिकी कानून की बात कह दी। उनके मुताबिक, अमेरिका में किसी व्यक्ति के मरने के बाद उसकी संपत्ति का 45 प्रतिशत हिस्सा ही उत्तराधिकारियों को मिलता है, बाकी सरकार ले लेती है। उन्होंने कहा कि सत्ता में आने के बाद कॉन्ग्रेस इस पर भी सोचेगी।

सिर्फ हिंदुओं पर ही असर?

कॉन्ग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में दावा किया है कि वो सारे ‘पर्सनल लॉ’ वापस लाएगी। वो शरिया के भी पक्ष में है। वो तीन तलाक के भी पक्ष में है और तमाम वो गैर-हिंदू कानून, जिसपर कोर्ट रोक लगा चुकी है और मोदी सरकार कानून बना चुकी है, वो उन्हें वापस लाएगी। वो आर्टिकल 370 भी वापस लाएगी और 35ए भी। इसका सीधा सा मतलब है कि पहले की तरह ही जम्मू-कश्मीर में पूरे देश से अलग कानून चलने लगेगा। मुस्लिमों के सारे विवादों, जिसमें उत्तराधिकार कानून भी है, वो सब पर्सनल लॉ के दायरे में आ जाएँगे।

कॉन्ग्रेस के सत्ता में आने के बाद हिंदुओं (कॉन्ग्रेस के मेनिफेस्टो के मुताबिक, पर्सनल लॉ से छेड़छाड़ नहीं) के उत्तराधिकार नियम में बदलाव लाया जाएगा, जिसमें हिंदुओं की मौत की सूरत में उसका 55 प्रतिशत हिस्सा सरकार के हाथ में चला जाएगा। और वेल्थ री-डिस्ट्रीब्यूशन के नाम पर वो अन्य लोगों में बाँट दिया जाएगा। ये तो वही बात हो गई, जिंदगी के साथ भी कॉन्ग्रेस की वसूली और मरने के बाद भी वसूली। यानी फर्क सिर्फ हिंदुओं पर पड़ेगा और उन समुदायों पर, जिनपर हिंदुओं के कानून लागू होते हैं। खासकर संपत्ति का मामला, जिसमें हिंदू, सिख, बौद्ध और जैन धर्म जैसे सनातनी हैं।

इस्लाम में इस तरह से होता है विरासत का बंटवारा

इस्लाम में संपत्ति का बंटवारा शरीयत एक्ट 1937 के जरिए होता है। इसके लिए उत्तराधिकारी पर्सनल लॉ के तहत तय होते हैं। किसी व्यक्ति की मौत के बाद उसकी संपत्ति में बेटे, बेटी, विधवा और माता-पिता को हिस्सा मिलता है। बेटी को बेटे से आधी संपत्ति देने का प्रावधान है। विधवा को संपत्ति का छठाँ हिस्सा मिलता है। ये चौथाई या आठवाँ हिस्सा भी हो सकता है। कोई सीधा उत्तराधिकारी न होने की सूरत में चौथाई, बेटा-पोता होने पर आठवाँ हिस्सा।

वैसे मुस्लिम परिवार में जन्मे बच्चे को जन्म के साथ ही संपत्ति में अधिकार नहीं मिलता है। इसके लिए जरूरी है कि किसी व्यक्ति की मौत के बाद उसके उत्तराधिकारी अंतिम संस्कार करें। उसके सारे कर्ज चुकाए। इसके बाद संपत्ति की कीमत या वसीयत निर्धारित की जारी है और फिर शरिया कानून के अनुसार संपत्ति को रिश्तेदारों में बाँटा जाता है। एक बात और खास है, वो है संपत्ति का सरकार के कब्जे में न जाना। न ही कोई व्यक्ति अपनी पूरी संपत्ति का वसीयत कर सकता है और न ही सरकार किसी मुस्लिम की पूरी संपत्ति को कब्जा कर सकती है, क्योंकि मुस्लिमों में उत्तराधिकार के लिए पति-पत्नी, माता-पिता, बेटा-बेटी, दूसरी-तीसरी पत्नी, पोता-पोती सबकी हिम्मेदारी लग सकती है, लेकिन पूरी संपत्ति वसीयत नहीं की जा सकती।

हालाँकि अब कॉन्ग्रेस सैम पित्रोदा के बयान से पलड़ा झाड़ती दिख रही है। एक तरफ तो जयराम रमेश सैम पित्रोदा को गुरु और मार्गदर्शक बताकर उनके बयान को ‘निजी’ बता रहे हैं, तो दूसरी तरफ सैम अपने बयान को तोड़ने मरोड़ने का आरोप लगा रहे हैं, साथ ही कह रहे हैं कि वो बस उदाहरण दे रहे थे। ये अलग बात है कि उदाहरण देने के बाद उन्होंने साफ तौर पर कहा था कि हम भारत में इस तरह की चीजों के बारे में सोच सकते हैं। खैर, अब लोकसभा चुनाव का मंच सज चुका है। जनता के हाथ में फैसले की ताकत है। अब ये जनता ही तय करेगी कि उसे पूरे देश में एक समान कानून व्यवस्था चाहिए या फिर बहुसंख्यकों की संपत्तियों को छीनने की बात करने वाली पार्टी की सत्ता।

सत्ता में आते ही सबसे पहले होगी जाति जनगणना: राहुल गाँधी ने कहा- देश के 90% लोगों का मीडिया और न्यायपालिका में जगह नहीं

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने जाति जनगणना कराने की बात कही है। उन्होंने कहा कि जाति जनगणना कॉन्ग्रेस के लिए राजनीति नहीं है। यह उनके जीवन का मिशन है और वे इसे नहीं छोड़़ेंगे। उन्होंने चेतावनी वाले अंदाज में कहा कि कोई भी ताकत जाति जनगणना कराने से उन्हें नहीं रोक सकती। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस सरकार आते ही ऐसा किया जाएगा और ये उनकी गारंटी है।

राहुल गाँधी ने कहा, “ये मेरे लिए राजनीति नहीं है। ये मेरे लिए लाइफ मिशन है। इसे मैं छोड़ने वाला नहीं हूँ। मैं गारंटी से कह रहा हूँ… आप लिख लो…. आप लिख लो… जाति जनगणना को कोई शक्ति नहीं रोक सकती है। जितनी तेजी से इसे रोका गया, उतनी फोर्स से ये वापस आई। हिंदुस्तान के 90 परसेंट लोगों को ये बात समझ में आ गई है।”

उन्होंने आगे कहा, “भले वो आज खुलकर कह नहीं रहे हैं, लेकिन ये बात उनको समझ आ गई है कि हिंदुस्तान के संस्थागत ढाँचा में… हिंदुस्तान की इकॉनोमी में… हिंदुस्तान के ज्यूडिशियरी में… उनकी कोई जगह नहीं है और देश 90 परसेंट उनका है। जैसे ही हमारी सरकार आएगी, पहला काम जाति जनगणना होगा। अब आपको ये जो 90 परसेंट हैं, उन्हें बताना आपका (सभा में मौजूद लोगों का) का काम है।”

‘सामाजिक न्याय सम्मेलन’ में बोलते हुए राहुल गाँधी ने कॉन्ग्रेस के घोषणा पत्र को क्रांतिकारी मैनिफेस्टो बताया है। मीडिया पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा, “इनकी कंपनी में स्टेकहोल्डर्स कौन हैं? इनकी कंपनी में बड़े-बड़े पत्रकार हैं, एंकर हैं… मैंने इनके नाम निकाले। इनमें 95 प्रतिशत वाले लोग हैं ही नहीं। एक ओबीसी एंकर नहीं है, एक दलित एंकर नहीं है, एक दलित एंकर नहीं है।”

इसी तरह ज्यूडिशियरी की बात करते हुए उन्होंने कहा, “हमने कहा कि जब मीडिया में कोई नहीं है तो ज्यूडिशियरी को देखते हैं। हाई कोर्ट के कुल 650 जज हैं। 90 प्रतिशत आबादी वालों की इसमें भागीदारी सिर्फ 100 की है और वो भी छोटे-छोटे। जब तक आप सुप्रीम कोर्ट में पहुँचोगे, तब तक खतम।” उन्होंने कहा कि इससे पता चलता है कि इन लोगों के साथ कितना अन्याय हो रहा है।

राहुल गाँधी ने पिछड़े शब्द को खत्म करने की बात कहते हुए कहा, “ये शब्द मुझे अच्छा नहीं लगता है। सबसे पहले हमें इसे खत्म करना है। भाजपा की पूरी मूवमेंट आपकी हिस्ट्री को मिटाने का है। एक तरह से आपको बीते हुए समय से काट दिया गया है। आपकी हिस्ट्री फूले जी हैं, आंबेडकर जी हैं। मगर यह बहुत चुने हुए लोगों की हिस्ट्री है… दो-तीन-चार लोगों की हिस्ट्री।”

राहुल गाँधी ने कहा, “फूलेजी जैसे करोड़ों लोग थे, जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी खून-पसीना दिया। उनकी कोई बात नहीं करता।” उन्होंने यहाँ तक कहा कि आजादी की लड़ाई में 90 प्रतिशत वालों की केंद्रीय भूमिका थी। आजादी की लड़ाई पिछड़ा, दलित और आदिवासी ने लड़ी, लेकिन उनकी कोई बात नहीं करता।

राममंदिर की चर्चा करते हुए राहुल गाँधी ने कहा, “राम मंदिर बन गया और उसमें हमारा एक आदमी नहीं दिखा।” बता दें कि राहुल गाँधी भले ही दावा करें कि राम मंदिर की टीम रामेश्वर चौपाल भी हैं, जो खुद दलित हैं। इस तरह राहुल गाँधी ने झूठा एवं कई भ्रामक आरोप भाजपा सरकार पर लगाए।

अमेठी की जनता करे पुकार, रॉबर्ट वाड्रा अबकी बार… कॉन्ग्रेस दफ्तर के बाहर ही लगे पोस्टर, राहुल गाँधी की चर्चा के बीच ‘जीजा जी’ की दावेदारी

उत्तर प्रदेश के अमेठी लोकसभा क्षेत्र में रॉबर्ट वाड्रा के पोस्टर लगाए गए हैं। ये वही सीट है, जहाँ से राहुल गाँधी ने 2004, 2009 और 2014 में जीत दर्ज की थी। हालाँकि, 2019 में उन्हें यहाँ से हार का सामना करना पड़ा था। वो केरल के वायनाड से जीतने में कामयाब रहे। इस बार अटकलें लगाई जा रही थीं कि राहुल गाँधी फिर से अमेठी से केंद्रीय महिला एवं बाल विकास और अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री स्मृति ईरानी के खिलाफ ताल ठोकने जा रहे हैं।

लेकिन, उससे पहले अमेठी में उनके जीजा और प्रियंका गाँधी के पति रॉबर्ट वाड्रा के पोस्टर लगा दिए गए हैं, ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या अमेठी के कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता ही राहुल गाँधी को नहीं चाहते हैं? पोस्टरों पर लिखा है – अमेठी की जनता करे पुकार, रॉबर्ट वाड्रा अबकी बार। निवेदक के रूप में ‘अमेठी की जनता’ लिखा हुआ है। गौरीगंज स्थित कॉन्ग्रेस कार्यालय के बाहर ही ये पोस्टर लगाए गए हैं। रॉबर्ट वाड्रा खुद भी वहाँ से चुनाव लड़ने की इच्छा जता चुके हैं।

उन्होंने कहा था कि अमेठी की जनता चाहती है कि वो वहाँ से चुनाव लड़ें और लोकसभा में उनका प्रतिनिधित्व करें। सोशल मीडिया पर सक्रिय रॉबर्ट वाड्रा अक्सर जयंती-पुण्यतिथि वाले पोस्टर अपनी तस्वीर के साथ पोस्ट करते रहते हैं। वाड्रा के मुताबिक, अमेठी की जनता मानती है कि स्मृति ईरानी को चुन कर उन्होंने गलती की और वो इस गलती को सुधारना चाहती है। उन्होंने दावा किया था कि अमेठी से कई लोग उन्हें फोन भी करते हैं। हालाँकि, सोनिया गाँधी के दामाद ने ये भी कहा था कि आखिरी फैसला पार्टी को लेना है।

अमेठी के लिए कॉन्ग्रेस पार्टी ने अब तक उम्मीदवार की घोषणा ही नहीं की है। इसी बीच ‘जीजा जी’ की दावेदारी से वहाँ की राजनीति गर्म हो गई है। स्मृति ईरानी ने याद दिलाया कि कैसे लोग सफर के दौरान सीट पर रुमाल रख कर कब्ज़ा करते थे, अमेठी में वही हो रहा है। स्थानीय कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं में चर्चा है कि शुक्रवार (26 अप्रैल, 2024) को राहुल गाँधी वहाँ जाएँगे। अमेठी से संजय गाँधी एक बार, राजीव गाँधी 4 बार और सोनिया गाँधी भी एक बार सांसद रह चुकी हैं।

आपकी कमाई बच्चों को नहीं मिलेगी, पंजा छीन लेगा…. कॉन्ग्रेस की लूट जिन्दगी के साथ भी और जिन्दगी के बाद भी: छतीसगढ़ में हमलावर हुए PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने छत्तीसगढ़ के सरगुजा में कॉन्ग्रेस पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने यहाँ कॉन्ग्रेस नेता सैम पित्रोदा के विरासत टैक्स वाले बयान को लेकर हमला बोला है। पीएम मोदी ने लोगों को चेताया है कि अगर कॉन्ग्रेस सत्ता में आई तो जीवन भर की कमाई छीन लेगी। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस की लूट जिन्दगी के साथ भी और जिन्दगी के बाद भी चलती है।

सरगुजा में पीएम मोदी ने भाजपा प्रत्याशी रेणुका सिंह के समर्थन में एक रैली को बुधवार (18 अप्रैल, 2024) को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने सम्पत्ति के दोबारा बँटवारे और मरने के बाद सम्पत्ति जब्त करने जैसे मुद्दों लेकर कॉन्ग्रेस को घेरा। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 2014 में उनके चुनाव प्रचार में अंबिकापुर वालों ने लाल किला बनाया था।

पीएम मोदी ने कहा, “भारत विरोधी INDI गठबंधन की कमजोर सरकार चाहते हैं जिसमें भ्रष्टाचार होता रहे और सब एक दूसरे से लड़ते रहें। कॉन्ग्रेस के शासन में नक्सल और आतंकवाद फैला। कॉन्ग्रेस का कुशासन और लापरवाही देश की बर्बादी का कारण है।”

उन्होंने कॉन्ग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत के नक्सलियों को शहीद बताने को लेकर भी हमला बोला। पीएम मोदी ने कहा, “इसी कॉन्ग्रेस की सबसे बड़ी नेता आतंकवादियों के मारे जाने पर आंसू बहाती हैं। इस कारण कॉन्ग्रेस देश का भरोसा खो चुकी है।”

पीएम मोदी ने कहा कि कॉन्ग्रेस का मेनिफेस्टो मुस्लिम लीग की सोच को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि संविधान निर्माण के समय यह तय हुआ था कि आरक्षण धर्म के नाम पर नहीं होगा लेकिन वोटबैंक के कारण कॉन्ग्रेस ने इन महापुरुषों की बात नहीं मानी। कॉन्ग्रेस ने आंध्र प्रदेश में मुस्लिमों को आरक्षण देने की बात कही।

रैली में पीएम मोदी ने आरोप लगाया कि 2009 और 2014 के मेनिफेस्टो में भी कॉन्ग्रेस ने यह वादा किया था। पीएम मोदी ने कहा कि कॉन्ग्रेस सरकार ने मुस्लिम समुदाय की सभी जातियों को ओबीसी में डाल दिया और सामाजिक न्याय की हत्या की। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस संविधान बदल कर SC/ST और ओबीसी आरक्षण छीनकर अपने वोट बैंक देना चाहते हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस महिलाओं के आभूषणों का एक्सरे करवाएँगे। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सम्पत्ति एक विशेष वर्ग को बाँटी जाएगी। सैम पित्रोदा के विरासत टैक्स वाले बयान पर भी पीएम मोदी ने हमला बोला। उन्होंने कहा कि सैम पित्रोदा ने पहले मध्यम वर्ग पर ज्यादा टैक्स की वकालत की थी और अब इनहेरिटेंस टैक्स की बात कर रही है।

पीएम मोदी ने कहा, “आप जो अपनी मेहनत से सम्पत्ति जुटाते हैं, वह आपके बच्चों को नहीं मिलेगा बल्कि कॉन्ग्रेस का पंजा उसे छीन लेगा। कॉन्ग्रेस का मन्त्र है कि उनकी लूट जिन्दगी के साथ भी और जिन्दगी के बाद भी। जब आप जीवित रहेंगे तो आपको ज्यादा टैक्स से मारेगी, जीवित ना होने पर इन्हेरिटेंस टैक्स लाद देगी।” पीएम मोदी का यह भाषण आप नीचे लगे वीडियो में सुन सकते हैं।

उन्होंने कहा कि भारत के मूल स्वभाव पर कॉन्ग्रेस हमला कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया है कि कॉन्ग्रेस में बैठे अर्बन नक्सल अमेरिका को खुश करने के लिए यह बातें कर रहे हैं। पीएम मोदी इससे पहले भी कॉन्ग्रेस के सम्पत्ति दोबारा बाँटने को लेकर हमले बोल चुके हैं।

अमेरिका की यूनिवर्सिटी में आजादी के नारे और पुलिस पर हमला… फिलीस्तीन का समर्थन करने वालों पर सख्त हुआ US प्रशासन, 130+ गिरफ्तार

अमेरिका की यूनिवर्सिटियों में फिलीस्तीन के समर्थन में बढ़ रही प्रदर्शनबाजी पिछले दिनों आजादी के नारों तक पहुँच गई थी। वो वैसे ही आजादी के नारे थे जो जब कश्मीर में लगाए गए थे तो हिंदुओं के खिलाफ हिंसा हुई थी और दिल्ली में लगाए गए थे तो दंगे हुए थे।

अमेरिका में भी इन नारों के लगने के बीच खबर आई कि वहाँ सुरक्षाकर्मियों पर हमला हुआ है और कैंपस का जबरन माहौल बिगाड़ा जा रहा है। इन घटनाओं के बाद खबर है कि अब अमेरिकी प्रशासन सख्त हो गया है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों द्वारा सुरक्षाकर्मियों और अधिकारियों पर किए जा रहे हमले के बाद यूएस की अलग-अलग में यूनिवर्सिटियों से लोग हिरासत में लिए हैं

न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी में सोमवार को 133 प्रदर्शनकारी गिरफ्तार हुए थे जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया, लेकिन उनके ऊपर ये कार्रवाई इसलिए हुई क्योंकि पिछले दिनों यूनिवर्सिटी में NYPD (न्यूयॉर्क पुलिस डिपार्टमेंट) अधिकारियों पर हमला हुआ था। उन पर कुर्सी और बोतल फेंके गए थे। हमलों में कई अधिकारियों को चोटें आई थीं।

इसके बाद येल यूनिवर्सिटी में 60 लोग गिरफ्तार हुए जिनमें से 47 तो छात्र ही थे। आरोप था कि इनसे बहुत समय से कैंपस प्लाजा को खाली करने को कहा जा रहा था लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही थी। उलटा इन्होंने कैंपस में कैंप लगा लिए थे। ऐसे में सुरक्षा के लिहाज से अधिकारियों को सारे कैंप तितर-बितर करके गिरफ्तारी की कार्रवाई करनी पड़ी।

कैलीफोर्निया स्टेट पॉलिटेक्निक यूनिवर्सिटी में भी ऐसे प्रदर्शनों के कारण कैंपस बंद करना पड़ा और तीन गिरफ्तारियाँ हुईं। वहीं मिशिगन यूनिवर्सिटी में भी घेराव हटाने के दौरान 9 लोगों को पकड़ा गया था जिसके विरोध में सैंकड़ों लोग इकट्ठा हो गए थे।

बता दें कि अमेरिका की यूनिवर्सिटियों में जैसे जैसे फिलीस्तीन के लिए प्रदर्शन की गति बढ़ रही है उसे देखते हुए ही ये कार्रवाइयाँ हुई हैं। इनके कारण पूरे कैंपस पर प्रभाव पड़ रहा है। जो छात्र पढ़ना चाहते हैं वो पढ़ नहीं पा रहे। शिक्षकों को पर्सनल क्लासें रद्द करनी पड़ रही हैं। सेमेस्टर का अंतिम समय है लेकिन परीक्षा की बजाय ऑनलाइन क्लासेज पर शिफ्ट होना पड़ रहा है। कोलंबिया में अभिभावक कॉलेज प्रशासन की हालत देखते हुए अपनी जमा कराई फीसें वापस माँगने लगे हैं। जो प्रदर्शन नहीं कर रहे, वो छात्र अपनी सुरक्षा पर चिंता जताने लगे हैं।

ऐसे हालात देखते हुए कोलंबिया विश्वविद्यालय के अध्यक्ष मिनोचे शफीक ने मंगलवार शाम (स्थानीय समय) घोषणा की कि विरोध प्रदर्शन के आयोजकों को परिसर में फिलिस्तीन समर्थक विरोध शिविर को खत्म करने के लिए आधी रात तक समझौता कर लेने का समय दिया गया है। इस प्रदर्शन के कारण केवल और केवल तनाव बढ़ा है। छात्र असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा है कि अगर उनकी सुनवाई नहीं होती तो वो वैकल्पिक विकल्पों पर विचार करेंगे।