Home Blog Page 998

‘सैम पित्रोदा हमारे गुरु’ कहकर कॉन्ग्रेस ने किया ‘मरने के बाद टैक्स’ वाला आइडिया खारिज: नुकसान से बचने के लिए ‘गोदी मीडिया’ पर निशाना

सैम पित्रोदा के विरासत टैक्स वाले बयान से कॉन्ग्रेस ने किनारा कर लिया है। कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद और संचार इंचार्ज जयराम रमेश ने इसे निजी बयान बताया है। खुद सैम पित्रोदा ने भी आरोप लगाया है कि उनके बयान को तोड़मरोड़ कर पेश किया गया। पित्रोदा ने बुधवार (24 अप्रैल, 2024) को एक बयान में सुझाव दिया था कि भारत में अमेरिका जैसा विरासत टैक्स होना चाहिए जिसके अंतर्गत किसी व्यक्ति के मरने के बाद उसकी 55% सम्पत्ति पर सरकार कब्जा कर लेती है।

जयराम रमेश ने इस बयान के विषय में ट्विटर पर लिखा, “पित्रोदा जी उन मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखते हैं जिनके बारे में वह बोलना जरूरी समझते हैं। लोकतंत्र में एक व्यक्ति अपनी बात रखने, चर्चा करने और व्यक्तिगत विचारों को लेकर बहस करने के लिए स्वतंत्र होता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पित्रोदा जी के विचार हमेशा कॉन्ग्रेस की पोजीशन को दर्शाते हैं। कई बार उनके विचार अलग होते हैं। अब उनकी टिप्पणियों को सनसनीखेज बनाकर दूसरे संदर्भ में पेश किया जा रहा है।”

सैम पित्रोदा ने स्वयं इस मामले में सफाई पेश की है। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अमेरिका के विरासत टैक्स पर एक व्यक्ति के रूप में मैंने जो कहा, उसे गोदी मीडिया ने तोड़-मरोड़ कर पेश किया है ताकि प्रधानमंत्री कॉन्ग्रेस के घोषणापत्र के बारे में जो झूठ फैला रहे हैं, उससे ध्यान भटका सके। प्रधानमंत्री की मंगलसूत्र और सोना छीनने की टिप्पणी बिल्कुल गलत है।” पित्रोदा के बयान को लेकर काफी विरोध हो रहा था।

सैम पित्रोदा ने इससे पहले मीडिया से बात करते हुए कहा था, “अमेरिका में एक विरासत कर (इनहेरिटेंस टैक्स) है। अगर किसी व्यक्ति के पास 100 मिलियन डॉलर है और जब वह मरता है तो वह केवल इसका 45% ही अपने बच्चों को दे सकता है, 55% सरकार के खजाने में जाता है। इस कानून के अनुसार, आपने अपने समय में सम्पत्ति बनाई और अब इसे जनता के लिए छोड़ दीजिए। पूरी नहीं तो कम से कम आधी तो जनता के लिए छोड़ ही दें। मुझे ये एकदम सही लगता है।”

इसके बाद सैम पित्रोदा ने इस कानून की वकालत में कहा था,”भारत में ऐसा कोई कानून नहीं है, भारत में अगर किसी के पास 10 बिलियन डॉलर (लगभग ₹82,000 करोड़) हैं और वह मरता है तो उसके बच्चों को पूरे 10 बिलियन डॉलर मिलते हैं। जनता को उसमे से कुछ नहीं मिलता। यह कुछ मामले हैं जिन पर बहस और विचार होगा। जब हम सम्पत्ति दोबारा से बाँटने के बारे में बात करेंगे तो इसका मतलब नए कानून और नीतियों पर बात करना होगा।”

पित्रोदा का बयान राहुल गाँधी के सम्पत्ति के सर्वे और उसे दोबारा बाँटने के वादों के बीच आया था। गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी लगातार देश के लोगों के सम्पत्ति के सर्वे की बात कर रहे हैं। कॉन्ग्रेस के मेनिफेस्टो में भी सर्वे की बात की गई है। राहुल गाँधी ने यह भी कहा है कि सर्वे के बाद सम्पत्ति का दोबारा से बँटवारा किया जाएगा। अब इस मामले में पित्रोदा के बयान पर भारी विरोध के बाद कॉन्ग्रेस ने सफाई पेश की है।

जहाँ त्योहार में भी शांति नहीं, वहाँ लोग चुनाव के लायक नहीं: पश्चिम बंगाल में रामनवमी हिंसा पर कलकत्ता हाई कोर्ट सख्त, कहा – ‘टाल दिया जाए लोकसभा चुनाव’

राम नवमी के मौके पर हुई हिंसा को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट ने कड़ा रुक अपनाया है। कलकत्ता हाई कोर्ट ने कहा कि जहाँ दो समुदाय 8 घंटे की भी शांति नहीं बना सकते, वहाँ चुनाव की कोई जरूरत नहीं है। कलकत्ता हाई कोर्ट ने मंगलवार (23 अप्रैल, 2024) को इस साल रामनवमी के दौरान हुई सांप्रदायिक हिंसा से जुड़ी घटनाओं का न्यायिक संज्ञान लिया और हिंसा के मामलों की सुनवाई की।

रामनवमी पर पश्चिम बंगाल में भड़की सांप्रदायिक हिंसा को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट ने कहा कि इस साल जिन निर्वाचन क्षेत्रों में सांप्रदायिक हिंसा भड़की है, उन जगहों पर वह लोकसभा चुनाव 2024 की मंजूरी नहीं देगी। अगर लोग शांति के साथ कोई जश्न नहीं मना सकते हैं, तब चुनाव आयोग से हमारी सिफारिश है कि ऐसे निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव न हों।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस टीएस शिवगणनम ने कहा, “हम चुनाव आयोग से सिफारिश करेंगे कि जब लोग कुछ घंटों के लिए शांति के साथ पर्व नहीं मना सकते हैं तब उन्हें संसदीय प्रतिनिधि चुनने का अधिकार भी नहीं दिया जाना चाहिए। ऐसे में चुनाव (वहाँ पर) टाल दिए जाने चाहिए।”

हाई कोर्ट ने आगे कहा, “कुछ छोटी घटनाओं के चलते बड़ा धमाका हो सकता है। ऐसा नहीं होता कि ये सारी घटनाएँ पहले से सुनियोजित होती हैं। त्योहार के दिन…किसी आदमी के ऊपर कोई चीज सवार हो जाती है और वह (हो सकता है बाकी लोगों को भड़काए)…लेकिन इस तरह की असिहष्णुता दोनों तरफ से है।”

कलकत्ता हाई कोर्ट ने इस दौरान यह भी कहा कि वह चुनाव आयोग के सामने बहरामपुर संसदीय क्षेत्र में होने वाले चुनाव को टालने का प्रस्ताव रखेगा। हिंसा की घटनाओं के बारे में हाई कोर्ट ने राज्य से हलफनामा माँगते हुए मामले को 26 मई तक के लिए स्थगित कर दिया है। इसमें याचिकाकर्ताओं की स्वीकारोक्ति भी दर्ज है कि यह पहली बार है कि बेहरामपुर में रामनवमी पर ऐसी हिंसा हुई।

हाई कोर्ट की बेंच ने मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (एमआरएम) की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए ये टिप्पणियाँ कीं, जिसमें मुर्शिदाबाद के बेलडांगा और शक्तिपुर में हिंसा की एनआईए या सीबीआई जाँच की माँग की गई थी। शक्तिपुर इलाके में यह हिंसा रामनवमी जुलूस के एक स्थानीय मस्जिद से गुजरने के तुरंत बाद हुईं, जिसमें कई लोग घायल हो गए थे। चीफ जस्टिस ने कहा कि समाचार रिपोर्टों की मानें तो कोलकाता में रामनवमी पर लगभग 33 कार्यक्रम आयोजित किए गए, लेकिन कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। फिर मुर्शिदाबाद में ये कैसे हुआ?

गौरतलब है कि देश भव में 17 अप्रैल 2024 को रामनवमी का त्योहार मनाया गया। इस दौरान पश्चिम बंगाल में कई जगहों पर हिंसा भड़की। कोलकाता पूरी तरह से शांत रहा, लेकिन अन्य हिस्सों से हिंसा की खबरें आई। यही नहीं, मुर्शिदाबाद में रामनवमी जुलूस के दौरान हिंसा के लिए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग (ईसी) को ही जिम्मेदार ठहरा दिया था। हालाँकि चुनाव आयोग ने बंगाल में हिंसा होने पर 2 पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर दिया, जिसमें मुर्शिदाबाद जिले के शक्तिपुर और बेलडांगा थाने के प्रभारी शामिल थे। ये अधिकारी अपने संबंधित अधिकार क्षेत्र में 17अप्रैल को हुई हिंसा को रोकने में विफल रहे थे। इसी मामले में हाई कोर्ट ने सरकार से सवाल पूछा है।

दंगे के लिए विरोध प्रदर्शन की जगहों को दिए गए थे हिन्दू नाम, खुले में हो रही थी लोगों को मारने की प्लानिंग: दिल्ली दंगे में सलीम को बेल से HC का इनकार

दिल्ली हाई कोर्ट ने 2020 दंगों के आरोपित सलीम मलिक उर्फ़ मुन्ना को सोमवार (22 अप्रैल, 2024) को जमानत देने से मना कर दिया। कोर्ट ने कहा कि उसने दिल्ली दंगा की योजना बनाने में स्पष्ट रूप से भाग लिया था। कोर्ट ने इस दौरान दंगे को सेक्यूलर रूप देने के लिए विरोध प्रदर्शनों को हिन्दू नाम देने की योजना पर भी टिप्पणी की।

दिल्ली हाई कोर्ट दिल्ली दंगा के मामले में आरोपित सलीम मलिक की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहा था। जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस मनोज जैन की सदस्यता वाली बेंच ने इस मामले की सुनवाई की है। उन्होंने दंगों में सलीम मलिक की भूमिका के चलते उसे जमानत देने से इनकार किया।

कोर्ट ने कहा कि सलीम उस व्हाट्सएप ग्रुप का हिस्सा भले नहीं था जिसमें दंगे की योजना बनाई गई थी लेकिन वह उस बैठकों में शामिल था जहाँ लोगों को मारने की योजना पर काम हुआ था। कोर्ट ने इस मामले में कहा कि सलीम चाँद बाग़ की एक बैठक में भी शामिल हुआ था जिसमें दिल्ली को जलाने की खुले तौर पर बात की गई थी।

हाई कोर्ट ने कहा कि ऐसी बातें किसी भी लोकतांत्रिक देश में स्वीकार नहीं की जा सकतीं। कोर्ट ने कहा कि इन बैठकों में हथियार खरीदने, लोगों को मारने और पेट्रोल बम तक खरीदने की बातें की गई। इसके अलावा इन बैठकों में लोगों की सम्पत्ति जब्त करने की बात की गई थी। कोर्ट ने कहा कि सलीम की दंगे के दौरान यह जिम्मेदारी थी कि वह गलियों में लगे CCTV कैमरे तोड़ दे या फिर उन्हें ढक दे।

कोर्ट ने कहा कि सलीम मलिक को जिस मामले में आरोपित बनाया गया है, उसमें उसके खिलाफ इस बात के काफी सबूत हैं कि उसने अपराध किया। कोर्ट ने 2020 के दिल्ली दंगों को एक बड़ी साजिश करार दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस मामले में दंगाइयों ने 2019 के दंगों से भी सबक लिया था और उस हिसाब से प्लानिंग की थी।

दंगे से पहले विरोध प्रदर्शनों के लिए चुने गए स्थानों के नाम हिन्दू और सेक्यूलर नामों पर रखने पर कोर्ट ने कहा कि ऐसा इसे सेक्यूलर दिखाने के लिए किया गया था। कोर्ट ने कहा कि लोगों को विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है लेकिन हिंसा करने का नहीं।

दिल्ली दंगों की भी बात करें तो 4 मुख्य चरणों में इसकी साजिश रची गई थी। पहले चरण में PFI सहित अन्य इस्लामी संगठनों ने विश्वविद्यालयों में CAA के खिलाफ प्रदर्शन किया और छात्रों को भड़काया। दूसरे फेज में शाहीन बाग़ जैसे धरने हुए। तीसरे चरण में हिन्दू-विरोधी प्रतीकों और गतिविधियों की बाढ़ आ गई। चौथे चरण में वारिस पठान जैसों के घृणास्पद बयानों के बाद हिन्दुओं पर हमले शुरू हो गए।

मुस्लिम महिलाओं ने भी अपनी छतों से ईंट-पत्थर फेंके थे। मुस्लिम परिवार के लोग अपने छात्रों को पहले ही स्कूलों से ले गए थे। फैसल फारूक का स्कूल दंगाइयों का अड्डा बना। ताहिर हुसैन की फैक्ट्री दंगाइयों का बसेरा बनी। हिन्दुओं की दुकानों को चुन-चुन कर जलाया गया। पेट्रोल बम और पत्थरों का इस्तेमाल हुआ। इस दंगे में 50 से अधिक लोग मारे गए थे।

लोकसभा चुनाव में विदेशी पत्रकारों का प्रोपेगेंडा: खालिस्तानी समर्थक महिला पत्रकार के ‘वीजा प्रपंच’ की मीडिया ने ही खोली पोल, अब फ्री प्रेस के नाम पर ड्रामा

ऑस्ट्रेलियन पत्रकार अवनी डायस ने 20 अप्रैल 2024 को भारत छोड़ दिया। अब उन्होंने आरोप लगाया है कि भारत सरकार उनकी लोकसभा चुनाव कवरेज में अडंगा लगा रही है। उनका वीजा नहीं बढ़ रहा है। उन्हें परेशान किया जा रहा था, इसलिए उन्हें 20 अप्रैल को भारत छोड़ना पड़ा। उनके इस दावे की पोल खुल चुकी है, क्योंकि उन्होंने पहले वीजा ही अप्लाई नहीं किया था। उन्होंने वीजा अप्लाई किया, तो उनका वीजा जून माह तक बढ़ाया जा चुका था।

यही नहीं, उनके ही संस्थान के अन्य साथी लोकसभा चुनाव की कवरेज कर रहे हैं। ऐसे में अवनी डायस की बनाई पूरी कहानी की जब हवा निकल गई, तब भी ‘विदेशी पत्रकारों’ की एक लॉबी प्रोपेगेंडा फैलाने से बाज नहीं आ रही। कुछ पत्रकारों ने भारत सरकार को एक पत्र लिखा है और अवनी डायस के कथित ‘देश निकाले’ पर विरोध जताया है। हालाँकि अवनी डायस भारत और सनातन विरोधी प्रोपेगेंडा के लिए जानी जाती रही हैं, उनके कई कारनामे पहले भी पकड़े जा चुके हैं।

दरअसल, ये पूरा विवाद खड़ा हुआ मंगलवार (23 अप्रैल 2024) को, जब ऑस्ट्रेलिया की पत्रकार अवनी डायस ने एक्स पर दावा किया कि भारत सरकार ने उनका वीजा नहीं बढ़ाया, इसलिए उन्हें ‘मजबूरी में’ भारत छोड़ना पड़ा। डायस ने दावा किया कि ‘उनकी रिपोर्ट’ भारत सरकार को पसंद नहीं आई, इसलिए ऐसा किया गया। अवनी डायस जनवरी 2022 से नई दिल्ली में हैं और ऑस्ट्रेलियन ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन(एबीसी) की दक्षिण एशिया ब्यूरो चीफ के तौर पर काम कर रही थी।

डायस ने अपने एक्स पोस्ट में लिखा, “पिछले सप्ताह मुझे अचानक भारत छोड़ना पड़ा। मोदी सरकार ने मुझसे ये कहते हुए वर्क वीजा बढ़ाने से इनकार कर दिया कि मेरी खबरें ‘लाइन क्रॉस’ करती हैं। मुझे ये भी बताया गया कि लोकसभा चुनाव की रिपोर्टिंग की भी मान्यता मुझे नहीं मिलेगी। मुझे मतदान के ‘उन’ दिनों में से एक में भारत छोड़ना पड़ा, जिसे मोदी ‘मदर ऑप डेमोक्रेसी’ कहते हैं।”

हालाँकि अवनी डायस ने कहा कि मुझे मेरी फ्लाइट से 24 घंटे पहले 2 माह का वीजा एक्सटेंशन मिल गया था, वो भी ऑस्ट्रेलियाई सरकार के हस्तक्षेप के बाद।

अवनी डायस के इन आरोपों के बाद इंडिया टुडे की पत्रकार गीता मोहन ने उनके सभी दावों की हवा निकाल दी। उन्होंने लिखा, “एबीसी की दक्षिण एशिया संवाददाता अवनी डायस का दावा कि उन्हें चुनाव कवर नहीं करने दिया गया, पूरी तरह से झूठा है और भ्रम फैलाने वाला है। सूत्रों के मुताबिक, वो वीजा नियमों का उल्लंघन करते हुए पकड़ी गई थी। इसके बावजूद उन्होंने जब अनुरोध किया, तब उनका वीजा बढ़ा दिया गया। खासकर चुनाव की कवरेज तक के लिए। उनका पिछला वीजा 20 अप्रैल 2024 तक का ही था। उन्होंने 18 अप्रैल 2024 को वीजा की फीस भरी और उनका वीजा जून के आखिर तक बढ़ा दिया गया। इसके बावजूद उन्होंने 20 अप्रैल को भारत छोड़ने का फैसला किया, जबकि उनके पास वैध वीजा था और उसे बढ़ाया भी जा चुका था।”

उन्होंने आगे लिखा, “रही बात चुनाव कवर करने की अनुमति मिलने की, तो ये बात भी तथ्यात्मक रूप से गलत है। क्योंकि सभी वीजा धारक (विदेशी) पत्रकारों को बूथ के बाहर से चुनाव को कवर करने की अनुमति है। अगर आपको बूथ के अंदर से कवरेज करनी है, तो उसके लिए विशेष अनुमति लेनी पड़ती है। हालाँकि जबतक आपके वीजा के एक्सटेंशन को लेकर प्रक्रिया चल रही हो, तब तक ये अनुमति नहीं दी जाती। ये बात ध्यान देने योग्य है कि एबीसी के अन्य संवाददाताओं मेघना बाली और सोम पाटीदार को पहले ही चुनाव कवरेज के लिए अनमति पत्र मिल चुके हैं।”

गीता मोहन ने साफ कहा कि अवनी जो आरोप लगा रही हैं, वो पूरी तरह से गलत है, क्योंकि उनके साथी चुनाव की कवरेज कर रहे हैं। विदेशी पत्रकार होने के नाते किसी तरह की कोई रोक नहीं लगाई गई है। उनके पास वीजा नहीं था, लेकिन जब उन्होंने वीजा का समय बढ़ाने की अपील की, तो तुरंत उसे बढ़ा दिया गया। ऐसे में उनका दावा पूरी तरह से गलत है।

अवनी डायस के सभी आरोपों की हवा निकलने के बावजूद ‘विदेशी पत्रकारों’ ने एकजुटता प्रदर्शित करने के लिए एक विरोध पत्र लिखा है, जिसे जॉन रीड नाम के पत्रकार ने एक्स पर साझा किया है। जॉन रीड ने लिखा, “खुला पत्र: एबीसी की अवनी डायस, जिन्हें ‘जबरदस्ती’ भारत से रिपोर्टिंग की ‘लाइन क्वॉस’ करने के आरोपों में बाहर निकाल दिया गया, उसपर विदेशी संववादाताओं का विरोध।” इस पत्र पर 30 ‘विदेशी पत्रकारों’ के नाम हैं।

खैर, इस प्रोपेगेंडा से इतर अवनी डायस से जुड़ा एक और मामला भी है। उसने कनाडा में हरदीप निज्जर की हत्या को भारत से जोड़ने की कोशिश करते हुए एक डॉक्यूमेंट्री बनाई थी, जिस पर भारत सरकार रोक लगा चुकी है और यू-ट्यूब पर पर भी उसके मामले में नोटिस दिख रहा है। दरअसल, यो डॉक्यूमेंट्री न सिर्फ तथ्यात्मक रूप से गलत थी, बल्कि भारत के संवेदनशील सीमाई इलाकों में गलत तरीके से फिल्माई गई थी। उन लोकेशन पर शूट करने के लिए गलत तरीके से अनुमति हासिल की गई थी, जिसका बीएसएफ ने भी विरोध किया था।

उस डॉक्यूमेंट्री के निर्माण के समय डायस ने वीजा शर्तों का भी उल्लंघन किया था, जिसके बाद सरकार ने उन्हें चेताया था। अब बताया जा रहा है कि डायस को कोई और नौकरी मिल गई है, ऐसे में उन्होंने ‘नाखून कटाकर बलिदानी’ बनने का फैसला किया है, जो लोगों में सिर्फ भ्रम फैलाने और उसके भारत विरोधी प्रोपेगेंडा का महज एक हिस्सा मात्र भर है।

पहले भी भारत को लेकर प्रोपेगेंडा फैलाती रही हैं अवनी डायस

अवनी डायस भारत विरोधी, सनातन विरोधी लेखों के लिए जानी जाती है। उसने कई बार प्रोपेगेंडा फैलाने की कोशिश की, लेकिन हर बार एक्सपोज होती रही। इसी साल मार्च में अवनी डायस ने ब्रिसबेस में स्थित श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर पर खालिस्तानी कट्टरपंथियों के हमले को नकारते हुए कट्टरपंथियों को क्लीनचिट देने की कोशिश की थी। उन्हें इसे हिंदू समूहों का ही हमला करार दे दिया था। उनके दावों को खुद ऑस्ट्रेलियन हिंदू मीडिया ने एक्सपोज कर दिया था। एक फेसबुक पोस्ट में ऑस्ट्रेलियन हिंदू मीडिया ने अवनी डायस और उनकी साथी नाओमी सेल्वारत्नम को ‘ब्राउन सिपाही’ की संज्ञा दी थी।

जनवरी 2024 में अयोध्या में भगवान राम के भव्य मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा को अवनी ने ‘हिंदू वर्चस्ववाद’ कहा था और बड़ी आसानी से हिंदुओं के 500 सालों के संघर्ष, राम मंदिर के इतिहास और उसे आक्रमणकारी बाबर के लोगों द्वारा 1956 में तोड़ने जाने को छिपा लिया था।

यही नहीं, मार्च 2022 में वो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ‘हिंदू सुप्रीमिस्ट मॉन्क’ भी कहा था। वो सीएए पर भी गलत जानकारियाँ फैलाती हुई पकड़ी जा चुकी है, जिसके बाद उसने अपना ट्वीट भी डिलीट कर दिया था।

हर सड़क पर लाउडस्पीकर से अजान सुनने का देखा था ख्वाब… लोगों का गुस्सा देख खुद की जमीन पर मस्जिद बनाने का प्लान भी कैंसल

कोरिया का पॉप स्टार गायक ‘किम दाऊद’ साल 2019 में मुस्लिम बनने के बाद से इस्लाम प्रचार में कोई कसर नहीं छोड़ता। हाल में उसने अपने इंस्टाग्राम पर जानकारी दी थी कि वो कोरिया में मस्जिद बनवा रहा है और इसके लिए उसने जमीन भी खरीद ली है।

किम ने यह सूचना देते हुए अपनी जो खुशी जाहिर की थी वो ज्यादा देर नहीं रह पाई क्योंकि स्थानीय विरोध और प्रशासन से सहयोग के बिना उसे ये योजना रद्द करनी पड़ी। वहीं जमीन के मालिक ने भी उससे किया कॉन्ट्रैक्ट तोड़ दिया।

किम द्वारा मस्जिद के लिए जमीन खरीदी जाने की बात मीडिया में काफी चर्चा में आई थी। उसने अपने यूट्यूब चैनल पर वीडियो डालकर घोषणा की थी कि थी कि वो मस्जिद के लिए जमीन ले चुका है। इस दौरान उसके हाथ में एक कॉन्ट्रैक्ट भी था जिसके अनुसार उसने 384.4 स्क्वॉयर मीटर जमीन योनजोंग द्वीप के इंचियन में 1 करोड़ 13 लाख 72 हजार 497 रुपयों में ली थी।

अपनी वीडियो में उसने इस प्रोजेक्ट के लिए डोनेशन माँगी थाी और इसके लिए बैंक जानकारी भी साझा की थी। उसने कहा था- “मुझे आर्थिक सहायता चाहिए ताकि मस्जिद बन सके। अगर आप मदद करना चाहते हैं तो यहाँ सहायता करें। बहुत मुश्किलें आएँगी लेकिन मुझे लगता है कि मैं कर लूँगा। जब तक कोरिया की हर सड़क आजान की खूबसूरत आवाज से नहीं गूँजता मैं अपना सर्वश्रेष्ठ करता रहूँगा।”

स्थानीयों से लेकर प्रशासन तक ने लताड़ा

किम के इस पोस्ट को दुनिया भर के इस्लामवादियों ने सराहा। लेकिन कोरिया के लोगों को किम का ये ढंग नहीं पसंद आया। उन्होंने उसका विरोध करना शुरू कर दिया और कहा- “अगर इस्लाम इतना ही पसंद है तुम्हें तो तुम अरब देश में चले जाओ… मस्जिद बन जाने से तो सिर्फ सिर्फ घर की कीमतें इलाके में कम होंगीं।”

स्थानीय विरोध के अलावा किम को इस काम के लिए प्रशासन की मंजूरी लेना भी मुश्किल काम हो गया। प्रशासन ने कहा कि दाऊद को जिस जगह मस्जिद बनानी है वहाँ पर सड़क की हालत देखते हुए इमारत बनाने की इजाजत नहीं दी जा सकती।” वहीं योनहाप न्यूज एजेंसी ने बताया कि किम अभी उस भूमि के मालिक नहीं है जहाँ वो मस्जिद बनाने की बात कर रहे हैं। मालिक ने उनके साथ कॉन्ट्रैक्ट तोड़ दिया है।

मुस्लिम फेडरेशन का नहीं मिला समर्थन

इसके अतिरिक्त कोरिया सरकार के साथ आधिकारिक तौर पर पंजीकृत एकमात्र इस्लामी संगठन कोरिया मुस्लिम फेडरेशन (केएमएफ) ने पिछले हफ्ते कोरिया टाइम्स को बताया कि किम की मस्जिद बनाने की योजना उनकी निजी परियोजना है। समूह ने कहा, “कोरिया मुस्लिम फेडरेशन से जुड़ी देश भर की सभी मस्जिदें केएमएफ के नाम से पंजीकृत हैं, और किसी को भी किसी व्यक्ति के नाम पर पंजीकरण करने या मस्जिद के निर्माण के लिए धन जुटाने की अनुमति नहीं है।”

कोरियन मुस्लिम फेडरेशन के अनुसार, कोरिया में 19 मस्जिद हैं और 350000 कोरियन मुस्लिम हैं जबकि 150,000 मुस्लिम कोरिया से बाहर के आकर यहाँ रहते हैं। इनमें से 120,000 श्रमिक हैं और 30,000 छात्र और व्यवसायी हैं जोकि उज्बेकिस्तान, बांग्लादेश, इंडोनेशिया और पाकिस्तान से आएँ हैं।

यौन उत्पीड़न का आरोप

गौरतलब है कि किम के ऊपर साल 2020 में यौन उत्पीड़न का इल्जाम भी लगा था। एक महिला ने दावा किया था कि किम ने 2019 में उनके साथ यौन उत्पीड़न किया। वीडियो वायरल होने के बाद किम ने इस संबंध में माफी भी माँगी थी। उन्होंने कहा था कि ऐसी घटना घटी है लेकिन उन्होंने समझौता कर लिया है।

बता दें कि इस समय किम के यूट्यूब पर 50 लाख से ज्यादा सब्सक्राइबर्स हैं और इंस्टाग्राम पर 30 लाख से ज्यादा फॉलोवर्स हैं। उसने 2019 सितंबर में ईसाई धर्म छोड़कर अपने मुस्लिम बनने का ऐलान किया था। इसके बाद ये पूर्व गायक अब चर्चा में आया है।

आपकी मौत के बाद जब्त हो जाएगी 55% प्रॉपर्टी, बच्चों को मिलेगा सिर्फ 45%: कॉन्ग्रेस नेता सैम पित्रोदा का आइडिया

कॉन्ग्रेस नेता सैम पित्रोदा ने मृत्यु के बाद लोगों की आधी सम्पत्ति जब्त करने के कानून की वकालत की है। उन्होंने इसके लिए अमेरिकी कानून का हवाला दिया है। पित्रोदा का बयान राहुल गाँधी के सम्पत्ति के सर्वे और उसे दोबारा बाँटने के वादों के बीच आया है।

ओवरसीज कॉन्ग्रेस के मुखिया सैम पित्रोदा ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “अमेरिका में एक विरासत कर (इनहेरिटेंस टैक्स) है। अगर किसी व्यक्ति के पास 100 मिलियन डॉलर है और जब वह मरता है तो वह केवल इसका 45% ही अपने बच्चों को दे सकता है, 55% सरकार के खजाने में जाता है। इस कानून के अनुसार, आपने अपने समय में सम्पत्ति बनाई और अब इसे जनता के लिए छोड़ दीजिए। पूरी नहीं तो कम से कम आधी तो जनता के लिए छोड़ ही दें। मुझे ये एकदम सही लगता है।”

इसके बाद सैम पित्रोदा ने इस कानून की वकालत में कहा, “भारत में ऐसा कोई कानून नहीं है, भारत में अगर किसी के पास 10 बिलियन डॉलर (लगभग ₹82,000 करोड़) हैं और वह मरता है तो उसके बच्चों को पूरे 10 बिलियन डॉलर मिलते हैं। जनता को उसमे से कुछ नहीं मिलता। यह कुछ मामले हैं जिन पर बहस और विचार होगा। जब हम सम्पत्ति दोबारा से बाँटने के बारे में बात करेंगे तो इसका मतलब नए कानून और नीतियों पर बात करना होगा।”

सैम पित्रोदा ने आरोप लगाया कि भारत के लोग अपने नौकरों को पैसा नहीं बांटते बल्कि उस पैसे से दुबई और विदेश घूमने टहलने जाते हैं। उन्होंने बताया कि कॉन्ग्रेस यदि सत्ता में आती है तो वह नौकरों और घर में काम करने वालों को कितना पैसा दिया जाए इसके लिए भी नियम बनाएगी।

गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी लगातार देश के लोगों के सम्पत्ति के सर्वे की बात कर रहे हैं। कॉन्ग्रेस के मेनिफेस्टो में भी सर्वे की बात की गई है। राहुल गाँधी ने यह भी कहा है कि सर्वे के बाद सम्पत्ति का दोबारा से बँटवारा किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस के इस चुनावी एजेंडे को लेकर हमला बोला है। उन्होंने कहा है कि कॉन्ग्रेस महिलाओं का मंगलसूत्र छीनना चाहती है। कॉन्ग्रेस के सम्पत्ति बँटवारे की योजना को लेकर सोशल मीडिया पर भी काफी विरोध हुआ है।

राम जानकी मंदिर के पुजारी के सिर को ईंटों से फोड़ा, ‘लैंड जिहाद’ पर उतारू अताबुल मियाँ पहले भी कर चुका है हमला: नेपाल पुलिस ने पकड़ कर छोड़ दिया, हिन्दू संगठन नाराज़

नेपाल के सिरहा जिले में एक हिन्दू मंदिर के पुजारी पर जानलेवा हमले की खबर है। हमले में पुजारी का सिर फट गया जिनको इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया। हमले का आरोप अताबुल मियाँ पर लगा है। हिन्दू संगठनों का आरोप है कि नेपाली पुलिस ने अताबुल को हिरासत में ले कर थाने से ही छोड़ दिया। इस घटना और पुलिस की कार्रवाई से नाराज हिन्दू संगठन से सदस्यों ने प्रशासन को आंदोलन की चेतावनी दी है। घटना गुरुवार (18 अप्रैल, 2024) की है।

नेपाल में सक्रिय ‘हिन्दू सम्राट सेना’ के अध्यक्ष राजेश यादव ने ऑपइंडिया से बात की। उन्होंने बताया कि घटना सिरहा जिले के कल्याणपुर इलाके की है। यहाँ के वार्ड नंबर 12 में राम जानकी मंदिर आसपास के हिन्दुओं के लिए श्रद्धा का केंद्र है। यहाँ पुजारी हेबू मुखिया पूजापाठ करते हैं। गुरुवार की रात लगभग 8 बजे पुजारी मंदिर में आरती आदि कर के घर लौट रहे थे। इसी दौरान उन पर अताबुल मियाँ हमला कर देता है। हमले में ईंट का इस्तेमाल किया जाता है जिस से पुजारी का सिर फट गया।

सिर पर चोट लगने से पुजारी हेबू गंभीर रूप से घायल हो गए। आसपास के लोगों ने उनको विराटनगर के अस्पताल में भर्ती करवाया। फ़िलहाल पुजारी हेबू मुखिया इलाज के बाद अपने घर आ चुके हैं। इधर पुलिस ने अताबुल मियाँ को हिरासत में ले लिया। हिन्दू सम्राट सेना का आरोप है कि राजनैतिक दबाव के चलते पुलिस ने अताबुल को बिना केस दर्ज किए ही थाने से छोड़ दिया। पुलिस की यह हरकत नेपाल के हिन्दू संगठनों को नागवार गुजरी है। उन्होंने इसे अपराध को संरक्षण देने वाली हरकत बताया है।

‘हिन्दू सम्राट सेना’ के सदस्यों ने जल्द से जल्द अताबुल मियाँ की गिरफ्तारी की माँग उठाई है। इस माँग के लिए संगठन ने सिरहा जिले के पुलिस अधीक्षक के ऑफिस पर प्रदर्शन का एलान किया है। पुजारी पर हुए हमले में अताबुल को हत्या के प्रयास की धाराओं में गिरफ्तार किए जाने की माँग की जा रही है।

पुजारी की जमीन पर लैंड जिहाद की साजिश

ऑपइंडिया ने पुजारी हेबू मुखिया के बेटे रामकरन से बात की। उन्होंने बताया कि हमलावर अताबुल की उम्र लगभग 45 साल है। वो बेलहा किराने की दुकान चलाता है। उसके 2 बेटे हैं जो कतर देश में रहते हैं। पुजारी ने स्थानीय हिन्दू से एक जमीन खरीदी थी जिसे अताबुल मियाँ हड़पना चाहता है। वो पुजारी पर जबीन को फ्री में खुद को सौंप देने का दबाव लम्बे समय से बनाता आ रहा है। कुछ समय पहले भी उसने पुजारी को हथियार से मारने का प्रयास किया था। रामकरन ने अपने मामले में नेपाली पुलिस की कार्यशैली को भी असंतोषजनक बताया है।

नेटीजेंस बता रहे घुसपैठ का नतीजा

नेपाल में पुजारी पर हुए इस हमले ने नेपाली सोशल मीडिया पर भी तूल पकड़ लिया है। नेपाली ‘X’ यूजर इस घटना पर नाराजगी जताते हुए अलग-अलग राय दे रहे हैं। विवेका ने लिखा कि पूरी नेपाल की सीमा पर रोहिंग्या बस चुके हैं। सुरेंद्र ने ‘राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी’ के सांसद को टैग करते हुए हमलावर पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। सुरस्वामी ने लिखा कि नेपाल में विदेशियों की तादाद बढ़ती जा रही है जो कि वहाँ के मूल मधेशी लोगों के लिए एक बड़ा खतरा है।

चित्र- X/@sanatanchautari पर आए कमेंट

एक अन्य ‘X’ यूजर @msapkota00043 ने नेपाल की पुलिस को टैग किया है। इसके साथ उन्होंने लिखा है कि हिन्दू पर दिन दहाड़े हमला नेपाल की शांति और सुरक्षा को खुली चुनौती है। शरद शर्मा ने लिखा, “पाकिस्तानी मुस्लिमों को नागरिकता देने का अंजाम भुगतना शुरू हो चुका है। यह मुस्लिमों को गले लगाने का अंजाम है।” शरद ने आशंका जताई है कि जल्द ही नेपाल के नए मालिक होंगे और तब मधेशी लोगों को तराई से भगा दिया जाएगा।

‘नरेंद्र मोदी ने गुजरात CM रहते मुस्लिमों को OBC सूची में जोड़ा’: आधा-अधूरा वीडियो शेयर कर झूठ फैला रहे कॉन्ग्रेसी हैंडल्स, सच सहन नहीं कर पाएँगे

लोकसभा चुनाव 2024 में मतदान का आगाज हो चुका है और इसके साथ ही कॉन्ग्रेस समर्थक हैंडलों ने सोशल मीडिया पर दुष्प्रचार फैलाना और तेज़ कर दिया है। जहाँ एक तरफ कॉन्ग्रेस के नेता नरेंद्र मोदी की वापसी को अवश्यम्भावी मान कर सुस्त पड़े हुए हैं, ट्रॉल्स बाज नहीं आ रहे। अब उन्होंने दावा करना शुरू कर दिया है कि नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री रहते गुजरात में मुस्लिमों को आरक्षण दिया था। पीएम मोदी ने ध्यान दिलाया था कि कॉन्ग्रेस SC-ST-OBC समाज का आरक्षण लेकर मुस्लिमों को देना चाहती है, जिसके बाद ये सब कुछ शुरू हुआ।

राजस्थान के टोंक-सवाई माधोपुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा था कि कॉन्ग्रेस और I.N.D.I. अलायंस जब सत्ता में था, तो ये लोग दलितों-पिछड़ों के आरक्षण में सेंधमारी करके अपने खास वोटबैंक को अलग से आरक्षण देना चाहते थे, जबकि संविधान इसके बिल्कुल खिलाफ है। पीएम मोदी ने स्पष्ट कहा था कि आरक्षण का जो हक बाबासाहेब ने दलित, पिछड़ों और जनजातीय समाज को दिया, कॉन्ग्रेस और I.N.D.I. अलायंस वाले उसे मजहब के आधार पर मुस्लिमों को देना चाहते थे।

इसी के बाद कॉन्ग्रेसियों ने बवाल शुरू कर दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ये भी बताया था कि कैसे आंध्र प्रदेश में कॉन्ग्रेस पार्टी ने 2004 में दलितों और जनजातीय समाज का आरक्षण लेकर मुस्लिमों को देने की कोशिश की थी, पार्टी संविधान के खिलाफ गई थी। इसके बाद ‘Amock’ नाम के सोशल मीडिया हैंडल ने लिखा कि नरेंद्र मोदी ने गुजरात का CM रहते OBC का आरक्षण मुस्लिमों को दे दिया। साथ ही पीएम मोदी के इंटरव्यू की एक क्लिप भी शेयर की।

आधा-अधूरा वीडियो के जरिए प्रोपेगंडा का प्रयास

कॉन्ग्रेस समर्थकों ने इस दौरान पीएम नरेंद्र मोदी के आधे-अधूरे वीडियो शेयर कर के अपना गंदा एजेंडा चलाने की कोशिश की। इस वीडियो में वो बता रहे हैं कि उनके कार्यकाल में गुजरात में कई मुस्लिम जातियों को OBC कोटा का फायदा मिला। उन्होंने बताया कि कैसे मीडिया इन चीजों को नज़रअंदाज़ करता है। यहाँ पीएम मोदी ने एक बार भी ये नहीं कहा कि उन्होंने OBC की सूची बदल कर उसमें मुस्लिमों को जोड़ा। सच्चाई तो ये है कि कई राज्यों में कई मुस्लिम जातियों को ओबीसी कोटा का फायदा मिलता रहा है।

पिछले 40 वर्षों से ऐसा होता रहा है। सेन्ट्रल OBC कोटा में भी मुस्लिमों को आरक्षण दिया गया था, केंद्र की UPA सरकार ने इस संबंध में अधिसूचना जारी की थी। नरेंद्र मोदी जब मुख्यमंत्री तक नहीं बने थे, तभी से ये सब चला आ रहा है। जब हम गुजरात में OBC जातियों की सूची का अध्ययन करते हैं तो हमें पता चलता है कि इसमें जो भी मुस्लिम जातियाँ हैं वो नरेंद्र मोदी के CM बनने से पहले से ही मौजूद हैं। नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्रित्व काल में इसमें 14 नई जातियाँ जोड़ी गईं, जिनमें से किसी का भी इस्लाम मजहब से कोई ताल्लुक नहीं है।

गुजरात की सरकारों द्वारा विभिन्न जातियों को OBC सूची में जोड़ने के लिए जारी की गई अधिसूचनाएँ

7 अक्टूबर, 2001 – ये वो तारीख़ थी जब नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। 22 मई, 2014 तक वो इस पद पर रहे। गुजरात सरकार द्वारा जारी की गई शैक्षिक एवं सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों की सूची में 7 मौके ऐसे आए जब इसमें नई जातियाँ जोड़ी गईं। ये हैं – कमली, तम्बोली, गड़ई, गौरव, कलाल (हिन्दू), संघर (हिन्दू), नगरची, कायस्थ, गंधर्व (हिन्दू), दर्जी, भंडारी, काठी राजगीर, अहीर गोर, कुरुहिन शेट्टी और हजारी (राजपूत)।

नरेंद्र मोदी ने CM रहते गुजरात में इन जातियों को OBC सूची में जोड़ा गया

कलाल मुस्लिम पहले से सूची में थे, कलाल हिन्दुओं को मोदी सरकार ने जोड़ा

कलाल मुस्लिमों को पहले ही OBC का दर्जा दे दिया गया था, लेकिन इसी जाति के हिन्दुओं को इस सूची में स्थान पाने के लिए नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री बनने तक का इंतज़ार करना पड़ा। 2005 में मोदी की राज्य सरकार ने उनके साथ न्याय किया। गुजरात में 31 मुस्लिम जातियाँ OBC के दायरे में आती हैं, जिनमें से 29 कॉन्ग्रेस शासनकाल में जोड़ी गईं। दिसंबर 1995 और सितंबर 1996 में भाजपा सरकार ने मुस्लिम जातियों को इसमें जोड़ा, लेकिन तब नरेंद्र मोदी सरकार का हिस्सा नहीं थे।

टेंट फाड़ डाला, कुर्सियाँ पटकी, बर्तन फेंक कर मारा, ससुर को पीटा… दहेज़ में बुलेट बाइक के लिए पगलाया मौलाना, UP पुलिस के केस दर्ज करते ही तुरंत किया निकाह

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में एक मौलाना के निकाह में दहेज़ माँगने पर हुआ विवाद चर्चा का विषय बना हुआ है। हीरो होंडा स्प्लेंडर पाने के बावजूद मौलाना बुलेट लेने की जिद पर अड़ा रहा जिसके चलते उसके निकाह में मारपीट और गुंडागर्दी हुई। टेंट को गिरा दिया गया और कुर्सियाँ व बर्तन भी फेंक कर मारे गए। घटना रविवार (14 अप्रैल, 2024) की है। बुधवार (17 अप्रैल, 2024) को पुलिस ने दूल्हे मौलाना और 6 अन्य बारातियों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली। बताया जा रहा है कि बीच में UP पुलिस का दखल पड़ते ही मौलाना निकाह के लिए रेडी हो गया।

यह मामला पीलीभीत जिले के थाना क्षेत्र पूरनपुर का है। दुल्हन के अब्बा शहाबुद्दीन ने 17 अप्रैल को पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में शहाबुद्दीन ने बताया कि उन्होंने अपनी बेटी का निकाह मौलाना मेराज से तय किया था। 14 अप्रैल को हुए इस निकाह में मौलाना ने हीरो होंडा स्प्लेंडर बाइक और 4 लाख रुपए का सामान लिया था। मौलाना और बारातियों ने खाना खा लेने के बाद सारा सामान अपने घर पहुँचा दिया। इसके बाद मौलाना दहेज़ में एक बुलेट बाइक और 2 लाख रुपए और माँगने लगा।

बुलेट माँगने वालों में मौलाना के अब्बा मुन्ने, मोहम्मद यूनुस, परवेज, आफाक, उस्मान और शादाब भी बताए जा रहे हैं। जब लड़की के अब्बा ने इतना पैसा देने में असमर्थता जताई तो मौलाना भड़क गया। उसने सैकड़ों बारातियों और घरातियों के आगे दुल्हन के अब्बा को पहले गालियाँ दीं और और बाद में बेरहमी से पीटा। इन सभी ने निकाह लगाया गया तम्बू भी नोच कर गिरा दिया और खाने-पीने के लिए रखे गए बर्तनों को भी फेंक कर मारना शुरू कर दिया। बाद में मौलाना मेराज बिना निकाह किए ही बारातियों को ले कर वापस लौट गया।

दुल्हन के अब्बा ने पुलिस को बताया है कि निकाह तय करने से ले कर अब तक उनका 6 से 7 लाख रुपया खर्च हो चुका है। मेहमानों के आगे अपमानित होने की वजह से दुल्हन का पूरा परिवार मानसिक आघात में बताया गया है। दुल्हन की माँ भी बीमार पड़ गईं। शहाबुद्दीन ने आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की माँग की है। पुलिस ने इस FIR में मौलाना मेराज, मुन्ने, मोहम्मद यूनुस, परवेज, आफाक, उस्मान और शादाब को नामजद किया है। इन सभी पर IPC की धारा 323 और 504 के साथ दहेज़ प्रतिषेध अधिनियाम 1961 की धारा 3/4 के तहत FIR दर्ज कर लिया।

ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। पुलिस ने इस मामले की जाँच शुरू कर दी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक खुद और अपने परिवार पर FIR दर्ज होने के बाद मौलाना मेराज दुल्हन से निकाह करने के लिए तैयार हो गया। शुक्रवार (19 अप्रैल 2024) को मौलाना का निकाह शहाबुद्दीन की बेटी से हो गया। ऑपइंडिया ने दुल्हन के भाई से बात की। उन्होंने हमें बताया कि केस दर्ज होने के बाद उनकी बहन का निकाह सही सलामत हो गया। अब दुल्हन मौलाना के घर में चैन और सुकून से है। दुल्हन के भाई ने पीलीभीत पुलिस के कार्य की भी तारीफ की और उनसे पूरा सहयोग मिलने की बात कही।

‘खुद को भगवान राम से भी बड़ा समझती है कॉन्ग्रेस, उसके राज में बढ़ी माओवादी हिंसा’: छत्तीसगढ़ के महासमुंद और जांजगीर-चांपा में बोले PM मोदी – I.N.D.I. में सिर-फुटव्वल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (23 अप्रैल, 2024) को छत्तीसगढ़ के महासमुंद और जांजगीर-चांपा में रैली कर भाजपा प्रत्याशियों के लिए वोट माँगा। पीएम ने राजस्थान के टोंक-सवाई माधोपुर में रैली करने के बाद छत्तीसगढ़ का दौरा किया। उससे पहले उन्होंने हनुमान जयंती के अवसर पर एक वीडियो के जरिए देशवासियों को शुभकामनाएँ भी दी। लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर जहाँ विपक्ष सुस्त पड़ा है, पीएम मोदी धुआँधार रैलियाँ करने में लगे हुए हैं।

अब कश्मीर में भी लागू बाबसाहेब का संविधान: छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा में PM नरेंद्र मोदी

जांजगीर-चांपा पहुँचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि छत्तीसगढ़ वासियों ने मोदी की हर गारंटी पर मुहर लगाई है। उन्होंने जनता से कहा कि कुछ महीने पहले मैं विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए आपसे आशीर्वाद माँगने आया था, भाजपा के हर साथी को आप सब ने बहुत आशीर्वाद दिया, हमारे सेवा भाव को बहुत मान दिया। उन्होंने इसके लिए जनता का हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि अयोध्या के जिस मंदिर की उम्मीद देश छोड़ चुका था, उस उम्मीद को पूरा करने का काम भाजपा ने किया है।

पीएम मोदी ने कहा कि कॉन्ग्रेस के लोग हम पर तंज करते थे, हर चुनाव में हमसे पूछा जाता था कि मंदिर कब बनेगा? बकौल पीएम मोदी, हमने उन्हें तारीख भी बताई, समय भी बताया, निमंत्रण भी भेजा, लेकिन उन्होंने प्राण प्रतिष्ठा के कार्यक्रम का निमंत्रण ठुकरा दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस खुद को भगवान राम से भी बड़ा मानती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि धर्म के नाम पर देश को बाँटने वाली कॉन्ग्रेस आज़ादी के बाद पहले दिन से तुष्टिकरण में लगी हुई थी।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि तुष्टिकरण और वोटबैंक की राजनीति कॉन्ग्रेस के DNA में है, तुष्टिकरण के लिए कॉन्ग्रेस को दलितों, पिछड़ों और जनजातीय समाज का हक भी ​छीनना पड़े तो एक सेकंड भी नहीं लगाएगी।पीएम मोदी ने कहा कि इसके उल्ट भाजपा ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र पर चलने वाली पार्टी है और पार्टी की प्राथमिकता- गरीब, युवा, महिला और किसानों का कल्याण है। पीएम ने कहा कि 2014 से पहले करीब 60 वर्ष तक, कॉन्ग्रेस के एक ही परिवार ने सीधा या रिमोट से सरकार चलाई। उन्होंने आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस कभी नहीं चाहती कि दलित, पिछड़े, आदिवासियों की भागीदारी बढ़े।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “2014 में आपने अपने बीच से आए मोदी को इतनी बड़ी जिम्मेदारी दी। मैं आप सभी के बीच से आया हूँ। मैं ग़रीबी को जी कर आया हूँ। जिन मुसीबतों को आपके माता-पिता ने झेला है, उन्हें मैंने भी झेला है। कॉन्ग्रेस ने अब एक और बड़ा खेल शुरू कर दिया है। पहले कर्नाटक से कॉन्ग्रेस सांसद ने कहा कि ​दक्षिण भारत को अलग देश घोषित कर देंगे और अब कॉन्ग्रेस के गोवा के उम्मीदवार कह रहे हैं कि गोवा पर देश का संविधान लागू नहीं होता, गोवा पर देश का संविधान थोपा गया। ये भारत का और बाबा साहेब आंबेडकर का अपमान है।”

बकौल पीएम मोदी, ये जम्मू-कश्मीर के कुछ लोग भी कहा करते थे कि यहाँ भारत का संविधान नहीं चलेगा, जनता ने मोदी को आशीर्वाद दिया और आज जम्मू-कश्मीर में बाबा साहेब का संविधान लागू हो गया। उन्होंने कहा कि जब भी चुनाव आता है, तो कॉन्ग्रेस वाले एक ही घिसी-पिटी टेप रिकॉर्ड बजाते रहते हैं – भाजपा वाले आएँगे, संविधान खत्म कर देंगे, भाजपा वाले आएँगे, आरक्षण खत्म कर देंगे। पीएम मोदी ने कहा कि अरे, कितने दिनों तक झूठ चलाते रहोगे। उन्होंने कहा कि एक बात याद रखी जानी चाहिए, खुद बाबा साहेब आंबेडकर भी आकर कहें तो भी कोई संविधान नहीं बदल सकता।

‘लोग जान गँवाते रहे, कॉन्ग्रेस तिजोरी भरती रही’ : छत्तीसगढ़ के महासमुंद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

वहीं महासमुंद में जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि 19 अप्रैल को छत्तीसगढ़ में बस्तर सीट पर मतदान हुआ, देश के और राज्यों में भी मतदान हुआ। उन्होंने कहा कि प्रथम चरण के मतदान ने साफ कर दिया है कि देश का मन एकदम साफ है और देश का मन कहता है कि शक्तिशाली, विकसित भारत बनाने के लिए एक मजबूत सरकार बनानी है, इसलिए, जनता जनार्दन का भरोसा भाजपा पर है। बकौल पीएम मोदी, I.N.D.I. गठबंधन में आपस में ही सिर-फुटव्वल चल रही है, 2 दिन पहले झारखंड में इंडी अलायंस की रैली थी, वहाँ सरेआम सिर फोड़े गए, कपड़े फाड़े गए।

पीएम मोदी ने कहा कि दिल्ली में जहाँ कॉन्ग्रेस का शाही परिवार रहता है, वहाँ शाही परिवार का वोट कॉन्ग्रेस को नहीं जाएगा और आपको कहते हैं वोट दो, क्योंकि शाही परिवार जहाँ रहता है, वहाँ कॉन्ग्रेस का उम्मीदवार ही नहीं है। पीएम मोदी ने कहा कि जिस कॉन्ग्रेस से दिल्ली का भरोसा उठ गया हो, उस पर छत्तीसगढ़ भरोसा कैसे कर सकता है, तभी तो देश कह रहा है, फिर एक बार मोदी सरकार। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस जब भी सत्ता में रही है, उसने विकास को पटरी से उतारने का ही काम किया है।

बकौल प्रधानमंत्री, कॉन्ग्रेस और विकास साथ-साथ चल ही नहीं सकते हैं। इसके अलावा कॉन्ग्रेस जहाँ-जहाँ सरकार में रही, हिंसा और भ्रष्टाचार चरम पर पहुँच गया। पीएम मोदी ने कहा कि जब तक नॉर्थ-ईस्ट में थी, वहाँ हिंसा की गतिविधियाँ शांत नहीं हुईं। इसी तरह, उन्होंने उदाहरण दिया कि जब तक छत्तीसगढ़ में रही, प्रदेश में नक्सली, माओवादी हिंसा बढ़ती रही। साथ ही सवाल दागा कि आखिर कॉन्ग्रेस का हिंसा के साथ ये कैसा नाता है? उन्होंने कहा कि अपने भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए कॉन्ग्रेस हिंसा को बढ़ावा देती रही, लोग जान गँवाते रहे, लेकिन कॉन्ग्रेस अपनी तिजोरी भरने में लगी रही।

महासमुंद में पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा, “PM किसान सम्मान निधि के तहत 3 लाख करोड़ रुपए किसानों के खातों में सीधे हस्तांतरित किया गया है। अगर देश में कॉन्ग्रेस सरकार होती, तो इसमें ये करीब ढाई लाख करोड़ रुपए पर कोई न कोई पंजा मार लेता। जब तक देश में भाजपा सरकार है, तब तक आपके हक का पैसा सीधे आपके खाते में पहुँचता रहेगा। कॉन्ग्रेस ने 60 साल तक देश पर राज किया, लेकिन उन्हें कभी इसकी चिंता नहीं हुई कि क्या कभी गरीब के बच्चे भी भूखे सोते होंगे? क्या कभी गरीब के घर में भी चूल्हा नहीं जलता होगा?”

PM ने कहा कि मोदी इस दर्द को जानता था, इसलिए मुफ्त राशन की योजना शुरू की और आज गरीब को मुफ्त राशन मिल रहा है। उन्होंने कहा कि कोई नहीं चाहता कि उसकी संतानें भी गरीब रहें, लेकिन ये कॉन्ग्रेस के शाही परिवार की करनी का फल है जो गरीब था वो गरीब ही रहा। पीएम मोदी ने कहा कि कॉन्ग्रेस की वजह से ही इतनी बड़ी आबादी पिछड़ी रह गई, वंचित रह गई, शोषित रह गई। साथ ही उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस ने ओबीसी कमीशन को संवैधानिक दर्जा नहीं दिया, मेडिकल की परीक्षाओं में ओबीसी आरक्षण तक नहीं दिया।