बॉम्बे हाई कोर्ट ने मंगलवार (23 अप्रैल 2024) शराब पीकर कोर्ट आने वाले सिविल जज अनिरुद्ध पाठक को राहत देने से इनकार कर दिया। पाठक को अनुचित आचरण के आरोप में बर्खास्त कर दिया गया था। हाई कोर्ट ने पाठक की याचिका खारिज करते हुए कहा कि न्यायाधीशों को गरिमा का ख्याल रखना चाहिए। उन्हें ऐसा आचरण नहीं करना चाहिए, जिससे न्यायपालिका की छवि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़े।
अनिरुद्ध पाठक के खिलाफ कई आरोप हैं, जिनमें अदालत के समय का पालन नहीं करना, अदालत से अनुपस्थित रहना और न्यायिक अकादमी पाठ्यक्रम में भाग लेना भी शामिल है। इससे पहले स्टाफ सदस्यों ने पाठक पर शराब के नशे में अदालत आने का आरोप लगाया था। इन आरोपों के आधार पर पाठक को बर्खास्त कर दिया गया था।
न्यायमूर्ति एएस चंदूरकर और न्यायमूर्ति जितेंद्र जैन ने पाठक की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि अदालतों से उन न्यायिक अधिकारियों की सहायता की उम्मीद नहीं की जाती है, जो अशोभनीय या दोषपूर्ण आचरण में संलग्न हैं। इसके बाद खंडपीठ ने पाठ की याचिका खारिज कर दी। पाठक ने सेवा में बहाली के लिए हाई कोर्ट में याचिका दी थी।
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, “यह एक सार्वभौमिक रूप से स्वीकृत मानदंड है कि न्यायाधीशों और न्यायिक अधिकारियों को सम्मान के साथ काम करना चाहिए और ऐसे आचरण या व्यवहार में शामिल नहीं होना चाहिए, जिससे न्यायपालिका की छवि प्रभावित होने की आशंका हो या जो न्यायिक अधिकारी के लिए अशोभनीय हो।”
बारएंडबेंच के मुताबिक, बुधवार (24 अप्रैल 2024) को दिए अपने फैसले में कोर्ट ने आगे कहा, “यदि न्यायपालिका के सदस्य ऐसे व्यवहार में लिप्त होते हैं, जो निंदनीय है या जो न्यायिक अधिकारी के लिए अशोभनीय है तो रिट अदालतों से ऐसे न्यायिक अधिकारी को हस्तक्षेप करने और राहत देने की उम्मीद नहीं की जाती है।”
दरअसल, अनिरुद्ध पाठक को मार्च 2010 में सिविल जज जूनियर डिवीजन के रूप में नियुक्त किया गया था। उस दौरान से उनके आचरण के बारे में कई शिकायतें मिलने लगीं। शिकायतें मिलने के बाद महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले के मुख्य न्यायाधीश ने फरवरी 2017 में उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल के समक्ष एक रिपोर्ट दायर की।
उस रिपोर्ट में कहा गया है कि अनिरुद्ध पाठक शराब के नशे में अदालत आए थे। कई वकीलों ने यह भी शिकायत की कि अदालत में उनका व्यवहार और अदालती कामकाज करने का तरीका उचित नहीं था।मई 2017 में महाराष्ट्र के जलगाँव के एक जिला न्यायाधीश ने पाठक के खिलाफ शिकायतों के संबंध में एक विवेकपूर्ण जाँच रिपोर्ट दायर की।
इसके बाद महाराष्ट्र न्यायिक अकादमी के अधिकारियों ने भी साल 2018 में पाठक के अनुचित व्यवहार को लेकर एक रिपोर्ट दर्ज की। इसके बाद कानून और न्यायपालिका विभाग ने साल 2022 में एक आदेश पारित करके अनिरुद्ध पाठक को महाराष्ट्र सिविल सेवा (अनुशासन और अपील) नियमों के तहत सेवा से बर्खास्त कर दिया।
इसने पाठक को अपनी बर्खास्तगी को चुनौती देने के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। उच्च न्यायालय के समक्ष पाठक ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया और कहा कि उन्हें दी गई सज़ा अधिक है। हाई कोर्ट ने कहा कि पाठक एक ऐसे पद पर थे जिसे उच्च सम्मान के साथ देखा जाता है। उन्होंने साथ काम करने वाले कर्मचारियों का विश्वास खो दिया है।
खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह खडूर साहिब से एक निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ेगा। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह जानकारी उसके वकील राजदेव सिंह खालसा ने दी है। इस समय अमृतपाल डिब्रूगढ़ जेल में बंद है। उसके ऊपर एनएसए के तहत मामला दर्ज है।
Breaking : Khalistani Amritpal Singh, founder of Waris Punjab De, who attacked Ajnala Police Station while using Sri Guru Granth Sahib Palki as "Shield", and who is lodged in Dibrugarh jail under the NSA, has agreed to contest the election from Khadoor Sahib as an independent… pic.twitter.com/vB0XPuteQt
बता दें कि अमृतपाल सिंह पिछले दिनों अपनी माँ बलविंदर कौर की गिरफ्तारी के कारण चर्चा में आया था। पुलिस ने उसके चाचा सुखचैन सिंह समेत 4 को गिरफ्तार किया था। इन लोगों का प्लान 8 अप्रैल 2024 को खालसा चेतना मार्च का आयोजन करने का था।
Amritpal Singh' mother Balwinder Kaur has been arrested by the police before taking out the "Chetna March" at Damdama Sahib.
This march was organized for the release of khalistanis locked up in Dibrugarh Jail as per the call of Akal Takht Sahib Jathedar Giani Raghbir Singh. pic.twitter.com/m7eSE975NJ
उससे पहले ‘वारिस पंजाब दे’ का मुखिया खालिस्तानी अमृतपाल सिंह अजानला पुलिस थाने पर हमला करने के बाद मीडिया की सुर्खियाँ बना था। जब पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए निकली तो पता चला कि वो फरार हो गया है। काफी मशक्कत के बाद पुलिस करीबन एक महीने बाद उसे पकड़ने में सफल हुई थी। इसके बाद उसे असम के डिब्रूगढ़ जेल में भेज दिया गया था। उस पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) भी लगाया गया था।
गौरतलब है कि अमृतपाल सिंह का जन्म जल्लूपुर खेड़ा गाँव में 1993 में हुआ था। 12 क्लास पास करने के बाद वो दुबई गया। वहाँ उसे ट्रांसपोर्ट का बिजनेस किया और 2022 में दीप सिद्धू की मौत के बाद वो ‘वारिस पंजाब दे’ का नया प्रमुख बन गया। इसी के बाद से वो प्रशासन को चुनौती देने लगा था और 2023 में थाने पर हमला किया था।
आम आदमी पार्टी से बीजेपी में गए विधायक भूपत भयानी ने राहुल गाँधी पर टिप्पणी की थी, जिसके जवाब में कॉन्ग्रेस नेता प्रताप दुधात ने कुछ ऐसा बोल दिया है कि उनका वीडियो अब वायरल हो रहा है। उन्होंने कहा कि राहुल गाँधी की मर्दांगनी चेक करने के लिए अपनी माँ-बहनों को भेज दो, तब तुम्हें पता चल जाएगा कि वो ‘नपुंसक’ हैं या नहीं। प्रताप दुधात वैसे तो भूपत भयानी के ‘आपत्तिजनक’ बयान पर जवाब दे रहे थे, लेकिन जवाब देने की जगह उन्होंने माँ-बहनों को ही बीच में ला दिया।
प्रताप दुधात इस वीडियो में गुजराती में बोलते दिख रहे हैं, “दो दिन पहले विसावदर में एक घटना हुई थी। विसावदर में आप के पूर्व विधायक ने राहुल गाँधी के बारे में ऐसा बयान दिया, जो नहीं दिया जाना चाहिए। मैं बीजेपी वालों से कहना चाहता हूँ कि आपने राहुल जी के बारे में जो बयान दिया, जो भाषा आपने राहुल जी के बारे में इस्तेमाल की। मैं आपसे पूछना चाहता हूँ कि आपके घर वहाँ कौन गया था ये चेक करने के, कि राहुल गाँधी ‘नपुंसक’ हैं।”
— Zubin Ashara (Modi ka Parivar) (@zubinashara) April 24, 2024
प्रताप दुधात के इस बयान पर बीजेपी ने उनकी तीखी निंदा की है। बीजेपी के गुजरात प्रदेश मीडिया विभाग के सह-संयोजक जुबिन अत्रा ने प्रताप का वीडियो एक्स पर पोस्ट किया और लिखा, “दूसरों की बहन-बेटियों पर कॉन्ग्रेस के विचार सुनें। कॉन्ग्रेस नेता प्रताप दुधात ने साफ कहा है कि अपने बेटे-बेटियों को राहुल गाँधी के पास भेजकर उनकी मर्दानगी माप लें। ये कितना घटिया बयान है। यह प्रताप दुधात नहीं बल्कि कॉन्ग्रेस का डीएनए बोल रहा है।”
बता दें कि प्रताप दुधात पूर्व विधायक हैं, जो 2017 में कॉन्ग्रेस के टिकट पर सावरकुंडला विधानसभा सीट से चुने गए थे। उन्होंने 2022 में भी इसी सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन बीजेपी उम्मीदवार से हार गए। फिलहाल वह अमरेली जिला कॉन्ग्रेस अध्यक्ष के तौर पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
भूपत भयानी ने क्या कहा था?
वहीं, बीजेपी नेता भूपत भयानी के बयान की बात करें तो उन्होंने विसावदर में पार्टी के एक चुनाव कार्यालय के उद्घाटन के मौके पर राहुल गाँधी को लेकर टिप्पणी की थी। उन्होंने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, “देश को राहुल गाँधी जैसे नपुंसक के हाथ में नहीं सौंपा जा सकता। हर कोई ये बात समझ सकता है। आलिया, मालिया, जमालिया सभी एक घड़े से पानी पी रहे हैं, क्योंकि दूसरे छोर पर हमारा शेर नरेंद्र मोदी है।”
हालाँकि बाद में उन्होंने इस मामले पर सफाई भी दी। उन्होंने कहा, ”मेरी मंशा थी कि नरेंद्र मोदी और राहुल गाँधी की तुलना नहीं की जा सकती। देश की बागडोर नरेंद्र भाई जैसे योग्य नेतृत्व के हाथों में सौंपी जा सकती है। यह चुनाव से संबंधित था और मुझे बोलने की आजादी है। मैं अपनी बात जनता के सामने रख सकता हूँ। मेरा कोई और इरादा नहीं था। पीएम मोदी के लिए सोनिया गाँधी “मौत का सौदागर” जैसे शब्दों का भी इस्तेमाल चुकी हैं।” इसके साथ ही उन्होंने कहा कि ये उनका निजी बयान था, इसका पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है।
यह खबर मूल रूप से गुजराती भाषा में लिखी गई है। मूल खबर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
उत्तर प्रदेश के लखनऊ में 34वीं राज्य स्तरीय बेसिक बाल खेल प्रतियोगिता 15 फरवरी, 2024 से शुरू हो कर 17 फरवरी को समाप्त हुई थी। इस प्रतियोगिता में पूरे प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए प्राइमरी और अपर प्राइमरी स्तर के अधिकतम 14 वर्ष की उम्र के हजारों छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। खेलों में योगा, कबड्डी, बास्केटबॉल, जिमनास्टिक, क्रिकेट, खो-खो और दौड़ आदि के साथ लोकगीत जैसी प्रतियोगिताओं का आयोजन हुआ। मार्च 2024 में इन छात्रों को गौतम बुद्ध नगर के समाज कल्याण विभाग ने सम्मानित किया।
ऑपइंडिया ने इस प्रतियोगिता में जीत कर आए कुछ विजेता छात्रों से नोएडा में बात। सभी जातियों के अधिकतर छात्र बेहद गरीब घरों से थे जिन्होंने सरकार से मिली मदद और विभाग से मिले सहयोग को अपनी जीत का आधार बताया। हमने जिले के समाज कल्याण अधिकारी और छात्रों के अलावा शिक्षकों एवं ट्रेनरों ने भी बात की। उन्होंने बताया कि सभी ने मिल कर शासन के निर्देशों का शत-प्रतिशत अनुपालन किया। इस अनुपालन के रिजल्ट के तौर पर बेहद गरीब घरों से भी तमाम ऐसी प्रतिभाएँ निकल कर सामने आईं जो भविष्य में खेल क्षेत्र में भारत का नाम रोशन कर सकती हैं।
दिहाड़ी मजदूर की बेटी नेहा खेलना चाहती हैं ओलम्पिक
सरकारी स्कूल के कक्षा 6 में पढ़ने वाली नेहा के पिता दिहाड़ी मजदूर हैं। नेहा ने जिम्नास्टिक में गोल्ड मेडल जीता है। नेहा ने बताया कि उनके सर (टीचर) लोग उनका बहुत सपोर्ट करते हैं। उन्होंने अपनी जीत का श्रेय भी अपने टीचरों और ट्रेनर को दिया। नेहा ओलम्पिक में खेल कर भारत के लिए जिम्नास्टिक का स्वर्ण पदक लाना चाहती हैं। उनकी आदर्श दीपा कर्माकर हैं।
माली के बेटे को बास्केटबॉल का गोल्ड मेडल
जूनियर हाईस्कूल में कक्षा 6 के छात्र विपिन कुमार के पिता बागवानी करने वाले माली हैं। विपिन को बास्केटबॉल में गोल्ड मेडल मिला है। कक्षा 6 में पढ़ने वाले विपिन पारिवारिक हालातों को देख कर हर दिन 1 से ढाई घंटे के बीच प्रैक्टिस करते हैं। विपिन को पढ़ाई और खेल दोनों में बराबर रूचि है। उन्होंने कहा कि उनके खेल ट्रेनर ने उनकी बहुत मदद की। मेडल को विपिन ने अपने टीचरों और ट्रेनर के मार्गदर्शन का फल बताया।
माइकल जॉर्डन बनना है टाइल्स ठेकेदार के बेटे को
बास्केटबॉल में स्वर्ण पदक जीतने वाले आदित्य सोनी हमसे बात करते हुए भावुक हो गए। उन्होंने बताया कि उनके पिता टाइल्स का काम करते हैं। आदित्य के मुताबिक, उनको नोएडा से लखनऊ लाने और ले जाने के साथ रहने, खाने-पीने का बहुत अच्छा इंतजाम उनके स्कूल के टीचरों ने किया था। आदित्य को खेलने के लिए सभी सामान भी स्कूल में उपलब्ध हो रहे हैं। बड़े हो कर आदित्य बास्केटबॉल में माइकल जॉर्डन से अच्छा खिलाड़ी बनने की चाहत रखते हैं।
पदक विजेता टीम
खेल पर एक पैसा नहीं ख़र्च होता रौनक के पापा का
बास्केटबॉल में गोल्ड जीत का आए रौनक कन्नौजिया के पापा प्राइवेट कम्पनी में काम कर कर परिवार पालते हैं। रौनक हमें बताते हैं कि उनके टीचरों और कोच ने उनकी बहुत मदद की। खेलने के लिए सभी सामान भी रौनक के मुताबिक उनके कोच उपलब्ध करवाते हैं जिसकी वजह से उनके पापा की जेब पर भार नहीं पड़ता। यहाँ तक कि रौनक का के कोच उनकी डाइट का भी पूरा ध्यान रखते हैं। रौनक के अनुसार, उनके खेल से पढ़ाई में कोई बाधा नहीं आती। रौनक की टीम के पियूष गुप्ता के गले में भी गोल्ड मेडल लटक रहा था। पियूष ने हमें बताया कि उनकी जीत से उनके घर में ख़ुशी का माहौल है।
मिठाई बेचने वाले के बेटे को भी स्वर्ण
बास्केटबॉल की स्वर्ण पदक विजेता टीम में प्रियांशु भी शामिल हैं। प्रियांशु के पिता हलवाई (मिठाई बनाने के कारीगर) हैं। प्रियांशु ने बताया कि उनको उनके कोच और टीचरों ने पॉजिटिव सोच दी। साथ ही खेल के सभी संसाधन भी उपलब्ध करवाए गए। प्रियांशु अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खेल पर भारत के लिए पदक जीतना चाहते हैं।
अभय के पिता दुनिया में नहीं, माँ का सपना करेंगे पूरा
गले में बास्केटबॉल मैच का स्वर्ण पदक डाले अभय के पिता काफी समय पहले ही चल बसे थे। पिता के देहांत के बाद माँ ने छोटे-मोटे घरेलू काम करके उनकी परवरिश की। सरकारी स्कूल के छात्र अभय का कहना है कि अगर उनके टीचर और कोच इतना सहयोग न करते तो शायद वो इस मुकाम पर न होते। अभय के खेल के सामानों आदि का पूरा खर्च उनके कोच और स्कूल से मिलता है। अभय को अभी विश्वस्तरीय खेलों में हिस्सा ले कर भारत का नाम रोशन करना है।
नाई का बेटा गोल्ड मेडल विजेता
बास्केटबॉल की स्वर्ण पदक विजेता टीम में अनुकूल भी शामिल दिखे। अनुकूल के पिता सैलून चलाते हैं। अनुकूल मेडल जीत का खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर वो हार भी जाते तो और कड़ी प्रैक्टिस कर के दुबारा मेडल जीतते।
राजमिस्त्री और किराने की दुकान वालों की बेटियों के गले में भी स्वर्ण
जिम्नास्टिक में स्वर्ण पदक जीतने वाली नोएडा की 11 वर्षीया कोमल के पिता राजमिस्त्री हैं। वो दिहाड़ी पर लोगों के मकानों में चिनाई का काम करते हैं। कोमल अपनी पढ़ाई और खेल दोनों को एक साथ आगे ले जाना चाहती हैं। वहीं जिम्नास्टिक में उनके साथ स्वर्ण जीतने वाली एक अन्य बच्ची के पिता भी राजमिस्त्री हैं। 10 साल से छोटी एक गोल्ड-मेडलिस्ट बच्ची के पिता परचून की दुकान चलते हैं। वहीं एक अन्य जिम्नास्ट बच्ची के पिता प्राइवेट कम्पनी में काम करते हैं। इन सभी ने बताया कि उनको टीचरों और कोच द्वारा खेलों में पैसे से ले कर खाने-पीने तक की पूरी मदद की गई।
घर से भले ही गरीब लेकिन प्रतिभा कूट-कूट कर
ऑपइंडिया ने जिम्नास्टिक और बास्केटबॉल में गोल्ड मेडल जीत कर आए बच्चों की PTI (फिजिकल ट्रेनिंग इंस्ट्रक्टर) गीता भाटी से बात की। उन्होंने बताया कि भले ही विजेता बच्चे आर्थिक रूप से उतने सक्षम नहीं है लेकिन इन सभी में खेल की प्रतिभाएँ कूट-कूट कर भरी हुई हैं। गीता ने कहा कि उन्होंने शासन के निर्देश के अनुसार बच्चों को न सिर्फ शारीरिक बल्कि मानसिक तौर पर भी मजबूत किया है। PTI ने उम्मीद जताई है कि भविष्य में ये बच्चे वैश्विक स्तर पर खेलों में भारत का नाम रोशन करेंगे।
बच्चों का भविष्य निखारने में शासन का पूरा सहयोग
बास्केटबॉल में मेडल विजेता बच्चों के कोच कपिल शर्मा और संजय ने ऑपइंडिया से बात की। दोनों ने हमें बताया कि शासन के निर्देशों के मुताबिक उन्होंने काम किया और उसका रिजल्ट सामने है। दोनों ने बताया कि वो हर तबके से आने वाले बच्चों के अंदर छिपी प्रतिभाओं को परख कर के उन्हें तैयार करते हैं। इस तैयारी में न सिर्फ उनके खेल बल्कि खान-पान का भी विशेष ध्यान रखना होता है।
छात्रों के कोच और ट्रेनर
जिम्नास्टिक का भविष्य अभी और उज्जवल
जिम्नास्टिक कोच आरती कुलश्रेष्ठ ने ऑपइंडिया से बताया कि जो बच्चे मेडल जीत कर आए उन्होंने कई चरणों को पार किया है। आरती ने बताया कि इन बच्चों को ब्लॉक और मंडल स्तर पर पहले जीत हासिल करनी पड़ी जो बाद में राज्यस्तरीय प्रतियोगिता में विजेता बने हैं। आरती ने बताया कि उन्हें पहले के मुकाबले अब वरिष्ठ अधिकारियों से अधिक सहयोग और समर्थन मिलता है। उन्होंने यह भी आशा जताई कि निकट भविष्य में तमाम और छिपी प्रतिभाएँ सामने आएँगी जो दुनिया भर में भारत का नाम रोशन करेंगी।
शासन के निर्देश का किया पालन, रिजल्ट सुखद रहे
समाज कल्याण अधिकारी शैलेन्द्र सिंह
ऑपइंडिया ने गौतमबुद्ध नगर के समाज कल्याण अधिकारी शैलेन्द्र सिंह से बात की। शैलेन्द्र ने हमें बताया कि उन्होंने शासन के निर्देश के अनुरूप प्रक्रियाओं का अक्षरशः पालन किया। इन निर्देशों में सभी को समान दृष्टि से देखते हुए हर किसी को आगे बढ़ने के अवसर देना प्रमुख बात है। उन्होंने कहा कि शासन से जारी होने वाले धन का भी शत-प्रतिशत सही सदुपयोग किया गया। सभी कोच और अध्यापकों को भी उन्होंने सक्रिय बताया।
बकौल शैलेन्द्र सिंह, ऊपर से मिले दिशा निदेशों का पालन करने का सुखद परिणाम सामने है। उन्होंने भविष्य में अभी और प्रतिभाओं के निखर कर सामने आने की उम्मीद जताई है।
हरियाणा के गुरुग्राम से सटे मानेसर में निर्माण के लिए एक प्लॉट की खुदाई के दौरान तीन प्राचीन प्रतिमाएँ मिली हैं। इनमें से एक प्रतिमा भगवान विष्णु की और दूसरी माता लक्ष्मी की है। वहीं, तीसरी प्रतिमा भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी बैठे हुए अवस्था में हैं। ये सभी प्रतिमाएँ लगभग 400 साल पुरानी बताई जा रही हैं।
यह घटना मानेसर के गाँव बाघनकी की है। यहाँ के रहने वाले प्रभु दयाल ने एक प्लॉट खरीदा था। इस प्लॉट पर घर बनवाने के लिए वे बुलडोजर से खोदाई करवा रहे थे। खोदाई के दौरान वहाँ काम कर रहे श्रमिकों को ये मूर्तियाँ मिलीं। तीनों मूर्तियाँ जमीन में 15 फीट की गहराई में मिलीं हैं। ये कांस्य धातु की बनी हैं, जो बेहद कीमत बताई जा रही हैं।
बताया जा रहा है कि शुरुआत में प्लॉट के मालिक ने बुलडोजर के चालक को लालच दिया और इन मूर्तियों के बारे में किसी को बताने से मना किया। यह भी कहा जा रहा है कि वह इन मूर्तियों को अपने घर में स्थापित करना चाहता था। प्लॉट से मूर्ति निकलने की बात दो-तीन दिन तक दबी रही। जब चालक को पैसे नहीं मिले तो उसने इसकी जानकारी बिलासपुर थाने को दी।
इसके बाद पुलिस मौके पर पहुँची और मूर्तियों को अपने कब्जे में ले लिया। इसके बाद इन मूर्तियों के बारे में गाँव वालों को पता चला। पुलिस ने इन मूर्तियों के बारे चंडीगढ़ स्थित पुरातत्व विभाग को जानकारी दी। इसके बाद सोमवार (22 अप्रैल 2024) को पुरातत्व विभाग की उपनिदेशक बनानी भट्टाचार्य और डॉक्टर कुश ढेबर बिलासपुर थाना पहुँचे।
यहाँ उन्हें तीनों मूर्तियों को आधिकारिक रूप से सौंप दिया गया। पुरातत्व विभाग के अधिकारियों के अनुसार, देखने पर ये मूर्तियाँ करीब 400 साल पुरानी लग रही हैं। हालाँकि, जाँच के बाद ही इनकी वास्तविक उम्र का पता चलेगा। इन मूर्तियों में भगवान विष्णु की लंबाई 1.5 फीट और माता लक्ष्मी की प्रतिमा की लंबाई लगभग 1 फीट है।
वहीं, ग्रामीणों ने इन मूर्तियों को गाँव वालों को सौंपने का आग्रह किया था। ग्रामीणों का मानना है कि ये मूर्तियाँ उनके गाँव की धरोहर हैं। जिस जगह से मूर्तियाँ मिली हैं, उस जगह पर वे मंदिर का निर्माण करना चाहते हैं, ताकि वहाँ उन्हें स्थापित किया जा सके। हालाँकि, पुलिस ने ग्रामीणों को मूर्तियाँ देने से इनकार कर दिया।
पुलिस का कहना है कि भूमि की खोदाई में निकलने वाली वस्तु भारत सरकार की संपत्ति होती है। ऐसे में इन मूर्तियों पर पुरातत्व विभाग का अधिकार है। वहीं, ग्रामीणों ने प्लॉट में और खोदाई कराने की माँग की है। इस पर पुरातत्व विभाग की उपनिदेशक भट्टाचार्य ने प्रशासन की निगरानी में खोदाई करने के लिए कहा है।
संग्रहालय विभाग के उपनिदेशक डॉक्टर बनानी भट्टाचार्य ने कहा कि इन मूर्तियों को पुरातत्व विभाग के संग्रहालय में रखा जाएगा और वहाँ उन्हें प्रदर्शित किया जाएगा। बनानी ने कहा कि उन्होंने उस स्थान की भी जाँच की है, जहाँ वे पाए गए थे। ऐसा लगता है कि उन्हें लगभग 400 साल पहले गाँव में लाया गया था।
न्यूज18 के अनुसार, पुलिस का कहना है कि प्रभु दयाल को एक सोने का बर्तन और सिक्कों का भंडार भी मिला, लेकिन इन्हें बरामद नहीं किया गया है। पुलिस ने कहा कि मूर्तियों की खोज के बाद ग्रामीण उस स्थान पर एक मंदिर बनाना चाहते थे, लेकिन उनके और जमीन मालिक के बीच अनबन के कारण अभी कुछ नहीं हो सका।
हरियाणा के पलवल में एक 19 वर्षीय युवती को तीन युवक बंधक बना ले गए और चंडीगढ़ ले जाकर गैंगरेप किया। युवती को इसके बाद जान से मारने की धमकी दी गई। मामले में आर्पोइत अभी फरार हैं और पुलिस उनकी तलाश कर रही है।
जानकारी के अनुसार, हसनपुर थाना क्षेत्र की रहने वाली एक युवती को नूंह के तीन मुस्लिम युवक बंधक बना ले गए। तीनों युवक नूंह जिले के पढ़ानी गाँव के निवासी हैं। इनके नाम शाहिद, जाहिद और मजलिश हैं। युवती को बंधक बनाने के बाद उसे चंडीगढ़ ले जाया गया।
इसके बाद तीनों ने चंडीगढ़ में युवती से बारी बारी गैंगरेप किया। यहाँ लड़की को लगातार धमकी दी गई। उससे कहा गया कि अगर वह किसी को गैंगरेप और अपहरण के बारे में बताएगी तो उसे जान से मार दिया जाएगा। युवती किसी तरह इन युवकों के चंगुल बच कर वापस पलवल अपने घरवालों के पास पहुँची।
युवती ने यहाँ वापस आकर सारी घटना अपने पिता को बताई जो कि पुलिस के पास पहुँचे। युवती के पिता ने पुलिस के पास इस मामले में तीनों युवकों के विरुद्ध नामजद FIR करवाई है। पुलिस तीनों की तलाश में दबिश दे रही है। अभी तीनों में से कोई भी युवक गिरफ्त में नहीं आ सका है।
इस मामले में हसनपुर थाने के SHO अजीत नागर ने बताया कि उन्होंने इस विषय में मामला दर्ज कर लिया है। तीनों युवकों के खिलाफ अपहरण, बलात्कार समेत सुसंगत धाराओं में FIR दर्ज किया गया है। उन्होंने बताया कि संभवतः युवक और युवती की पहले से जान-पहचान थी। आरोपित और पीड़िता बालिका एक ही धर्म के हैं। युवती को चंडीगढ़ ले जाकर इन तीनों ने बारी बारी रेप किया और वहाँ इसके साथ गलत काम किया। पुलिस लगातार युवकों की तलाश में दबिश दे रही है और जल्द ही उनकी गिरफ्तारी की जाएगी।
उत्तर प्रदेश के अमरोहा में एक अजीबोगरीब नजारा देखने को मिला। वहाँ इंडी गठबंधन द्वारा उतारे गए प्रत्याशी दानिश अली के समर्थन में चल रही पार्टी बैठक में समाजवादी पार्टी, कॉन्ग्रेस और आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता आपस में ही भिड़ गए।
दिलचस्प बात ये है कि ये सारे दल इंडी गठबंधन का ही हिस्सा है जिन्होंने एक दूसरे को लात-घूँसों से मारा पीटा। घटना की वीडियो अब सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है।
वायरल वीडियो में इंडी गठबंधन के प्रत्याशी दानिश अली के साथ आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद सिंह भी मौजूद थे। कार्यकर्ताओं ने इन नेताओं के सामने होने की भी शर्म नहीं की। कुछ लोग बीच में इन्हें छुड़ाने के आए मगर कार्यकर्ता इतने गुस्से में थे कि उन्होंने किसी की नहीं सुनी।
घटना मंगलवार (23 अप्रैल 2024) की है। दानिश अली कॉन्ग्रेस टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। उन्हीं के समर्थन में जनसभा को बुलाया गया था। इस बीच अन्य पार्टियों के कार्यकर्ताओं ने मंच से कॉन्ग्रेस के नेशनल कॉर्डिनेटर को उतारने के लिए हंगामा किया।
इस पर वहाँ मौजूद साजिद खान ने कॉन्ग्रेस नेता के साथ बदसलूकी पर आपत्ति जताई। इसके बाद कॉन्ग्रेस और दूसरी पार्टी के नेताओं से उनकी झड़प हो गई और धक्का-मुक्की होने लगी। इसके बाद सबने एक दूसरे को पीटा।
वीडियो वायरल होने के बाद लोग हैरानी जता रहे हैं कि कॉन्ग्रेस नेता और AAP के सांसद संजय सिंह ने एक भी बार कार्यकर्ताओं को ये सब रोकने के लिए समझाने का प्रयास नहीं किया।
Uttar Pradesh, Amroha: Fight breaks out during a meeting in support of INDI alliance candidate Danish Ali.
इस वीडियो को देखने के बाद अब आम जनता इंडी गठबंधन का मजाक उड़ा रही है। कहा जा रहा है कि ये लोग खुद एक दूसरे के साथ नहीं काम कर पा रहे और ये चाहते हैं कि हम इनके साथ में काम करें।
Clashes broke out between SP-Congress-AAP workers, during a party worker meeting organised in support of alliance candidate Danish Ali in Amroha, UP ?♂️
गौरतलब है कि अमरोहा लोकसभा सीट से इंडी गठबंधन की ओर से दानिश अली चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं भारतीय जनता पार्टी ने कंवर सिंह तंवर को मैदान में उतारा है। कंवर सिंह ने 2014 में इस सीट पर जीत हासिल की थी। वहीं दानिश अली ने 2019 में।
अमेरिकी की मल्टीनेशनल कंपनी जेपी मॉर्गन चेज के सीईओ जेमी डिमन ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीख की है। जेमी डिमन ने कहा कि भारतीय प्रधानमंत्री ने अविश्वसनीय काम किया है। उन्होंने 400 मिलियन (40 करोड़) लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है। जेपी मॉर्गन चीफ जेमी डिमन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए आगे कहा कि वह तमाम चुनौतियों का डटकर सामना कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने इशारों में कहा कि अमेरिका में भी ऐसे नेता की जरूरत है, जो सभी चुनौतियों का डटकर सामना कर सके।
इकोनॉमिक क्लब ऑफ न्यूयॉर्क द्वारा आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए जेमी डिमन ने पीएम मोदी की जमकर तारीफ की। उन्होंने मोदी शासन द्वारा किए गए सुधारों की तारीफ करते हुए कहा कि अब भारत में हर नागरिक को हाथ से, आँख से या उंगली से पहचाना जाता है। उनके पास 700 मिलियन (70 करोड़) लोगों का बैंक अकाउंट है, उनका पेमेंट ट्रांसफर हो रहा है। जेमी डिमन ने कहा कि भारत में अविश्वसनीय एजुकेशन सिस्टम और अविश्वसनीय इंफ्रास्ट्रक्चर है। इसके साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई है कि पीएम मोदी तीसरी बार सत्ता में लौटने वाले हैं। उन्होंने कहा कि इससे भारत के बाजार को बहुत फायदा होने वाला है। उन्होंने उम्मीद जताई कि निफ्टी जल्द ही 25 हजार अंक के आँकड़े को पार कर जाएगा।
जेपी मॉर्गन चेज के सीईओ जेमी डिमन ने अमेरिकी ‘लिबरल मीडिया‘ पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी ने उस देश में ये काम किया है, जहाँ लोगों के पास शौचालय जैसी मूलभूत सुविधा तक नहीं थी और हम उन्हें सिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि उन्हें कैसे देश चलाना चाहिए। अपनी बात आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा, “हम भारत को क्लाइमेट, लेबर और अन्य मुद्दों पर ‘ज्ञान’ देते रहते हैं और बताते हैं कि उन्हें देश कैसे चलाना चाहिए। लेकिन उन्होंने 40 करोड़ लोगों को गरीबी से ऊपर उठा दिया और हमें उन्हें ज्ञान देने चले हैं।” डिमन ने कहा कि उनका (भारत का) एजुकेशन सिस्टम शानदार हो गया है। वो पूरे देश का विकास कर रहे हैं। वो ‘टफ’ आदमी ब्यूरोक्रेसी को भी लाइन पर ला रहा है, जो बेहद मुश्किल काम होता है।
Modi has done an unbelievable job in India: Jamie Dimon, CEO of JPMorgan Chase & Co. pic.twitter.com/hGFsDL7m0C
— Piyush Goyal (मोदी का परिवार) (@PiyushGoyal) April 24, 2024
डिमन ने कहा, “उनके (भारत में) पास 29 या ऐसे ही कई सारे राज्य हैं। वो सभी अलग हैं। ये यूरोप की तरह है, जहाँ अलग-अलग टैक्स सिस्टम हैं, जिसकी वजह से करप्शन को बढ़ावा मिलता है, लेकिन उन्होंने सारे नियमों को तोड़ा है और नए नियम बनाए हैं, जिसका फायदा अब देश को मिल रहा है। भ्रष्टाचार पर अंकुश लगा है।” वो जीएसटी की वजह से खत्म हुए भ्रष्टाचार पर बोल रहे थे।
बता दें कि पीएम नरेंद्र मोदी की अगुवाई में देश की अर्थव्यवस्था ने आश्चर्यजनक रूप से तेजी पाई है। आज भारत दुनिया की शीर्ष 5 अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लक्ष्य रखा है कि एनडीए के तीसरे शासनकाल में भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश होगा। तमाम वैश्विक एजेंसियाँ भी ये बात कह चुकी हैं कि अगर भारत इसी तेजी से आगे बढ़ता रहा, तो वो जल्द ही अमेरिका और चीन के बाद तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश होगा।
भारत का सबसे बड़ा डेटा ऑपरेटर रिलायंस Jio अब दुनिया में शीर्ष स्थान पर पहुँच गया है। डेटा ट्रैफिक खर्च के मामले में कंपनी के ये उपलब्धि हासिल की है। इसने ‘China Mobile’ को पीछे छोड़ दिया है। Jio के नेटवर्क पर कुल ट्रैफिक 40.9 एक्साबाइट तक पहुँच गया है, जबकि ‘China Mobile’ के मामले में ये आँकड़ा 38 एक्साबाइट है। ये आँकड़े जनवरी से लेकर मार्च 2024 तक के हैं। ग्लोबल एनालिटिक्स फर्म Tefficient ने ये आँकड़े जारी किए हैं।
इतना ही नहीं, 5G उपभोक्ताओं के मामले में भी रिलायंस Jio दुनिया में दूसरे नंबर पर स्थित है। दुनिया भर में इसका दूसरा सबसे बड़ा 5G सब्स्क्राइब्स बेस है, इसके 10.80 करोड़ उपभोक्ता हैं। Jio का 28% से भी अधिक डेटा ट्रैफिक इसके 5G उपभोक्ताओं से ही आ रहा है। एक एनालिस्ट प्रेजेंटेशन के दौरान Tefficient ने ये आँकड़े जारी किए हैं। Jio का एवरेज रेवेन्यू पर ईयर (ARPY) से पता चलता है कि JioBharat फोन का इस्तेमाल करने वालों की भी संख्या बढ़ी है।
साथ ही इसने प्रमोशनल प्लान्स के तहत अनलिमिटेड 5G डेटा भी अपने उपभोक्ताओं को ऑफर किया है। नए यूजरों को जोड़ने में Jio की गति तेज़ है। अगले कुछ वर्षों में इसका मार्केट शेयर के साथ-साथ राजस्व भी बढ़ने की भविष्यवाणी की गई है। उम्मीद जताई जा रही है कि जून में लोकसभा चुनाव 2024 खत्म होने के तुरंत बाद Jio का डेटा ट्रैफिक 20-25% बढ़ने की उम्मीद जताई गई है। 5900 शहरों में जियो का वायरलेस ब्रॉडबैंड सर्विस AirFibre पहुँच गया है।
#RelianceJio has surpassed #ChinaMobile to become the world's largest consumer of mobile data traffic.
Jio's network handled a massive 40.9 exabytes of data in the first quarter of 2024, compared to China Mobile's 38 exabytes, according to report.
AirFibre में प्रतिदिन का औसत डेटा खर्च 13 गीगाबाइट है। ये JioFibre से 30% अधिक है। एक तरह से Jio का 30% डेटा ट्रैफिक का लोग मुफ्त में फायदा उठा रहे हैं, ऑफर के तहत। Jio के उपभोक्ता 28.70 GB हर महीने उपयोग में ला रहे हैं। वहीं भारती Airtel के मामले में ये आँकड़ा 22.5 GB है। सर्वे करने वाली संस्था का मानना है कि टेलीकॉम कंपनियाँ फ़िलहाल डेटा के बदले ज्यादा कमाई नहीं कर रही हैं, ऐसे में वित्तीय वर्ष 2025 में इसमें बढ़ोतरी होने की संभावना है।
सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) और वोटिंग पर्ची दिखाने वाली मशीन (VVPAT) के 100% मिलान को लेकर दायर की गई याचिकाओं पर अपना निर्णय बुधवार (24 अप्रैल, 2024) को सुरक्षित रख लिया। सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान चुनाव आयोग से कुछ तकनीकी जानकारी माँगी। उसने कहा कि केवल किसी के शक के आधार पर हम EVM के विरुद्ध निर्देश जारी नहीं कर सकते।
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की सदस्यता वाली बेंच ने EVM-VVPAT मामले की सुनवाई की। उसने चुनाव आयोग से पूछा कि क्या EVM और VVPAT में लगी माइक्रोकंट्रोलर यूनिट अलग-अलग हैं और केवल एक बार ही उनमें प्रोग्रामिंग की जा सकती है।
इस चुनाव आयोग ने कोर्ट को बताया कि वोटिंग मशीन, VVPAT और, स्टोरेज यूनिट तीनों में ही अलग माइक्रोकंट्रोलर लगे हैं जिनको केवल एक ही बार प्रोग्राम किया जा सकता है। उनसे कोई छेड़छाड़ नहीं हो सकती। इस दौरान एक याचिकाकर्ता के लिए पेश हो रहे वकील प्रशांत भूषण जोर डालते रहे कि इसके माइक्रोकंट्रोलर को दोबारा प्रोग्राम किया जा सकता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि VVPAT में डाला गया प्रोग्राम ही गड़बड़ हो सकता है।
इसको लेकर कोर्ट ने उन्हें झिड़क दिया। कोर्ट ने कहा कि आप अगर पहले ही किसी चीज को बुरा मान चुके हैं तो हम आपकी सोच नहीं बदल सकते। कोर्ट ने भूषण से कहा कि वह चुनावों को नियंत्रित नहीं कर सकता और ना ही एक अन्य संवैधानिक संस्था (चुनाव आयोग) को नियंत्रित कर सकता है।
कोर्ट में एक वकील ने दावा किया कि देश में ऐसे सॉफ्टवेयर मौजूद हैं जिसने चुनाव गड़बड़ किए जा सकते हैं। हालाँकि, कोर्ट ने इसको खारिज करते हुए कहा हम इस शंका के आधार पर तो कोई आदेश जारी नहीं कर सकते। कोर्ट ने कहा कि इस प्रक्रिया में कोई सुधार की कोई बात है तो हम जरूर वह करेंगे। कोर्ट ने उदाहरण दिया कि वह पहले VVPAT को अनिवार्य बना कर और पर्चियों को गिनती को 1% से बढ़ा कर 5% कर यह कर चुके हैं।
कोर्ट ने कहा EVM-VVPAT के मामले में कहा कि जिन लोगों ने याचिकाएँ लगाई हैं वह खुद गडबडियों को लेकर एकदम पुष्ट नहीं हैं बल्कि उन्हें शंका है। कोर्ट ने कहा कि जब उसने इस मामले में समाधान पूछा तो एक व्यक्ति ने कहा कि वापस बैलट पेपर लगा दो। कोर्ट ने यह सारी दलीलें सुनने के बाद मामले में अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया।
गौरलतब है कि सुप्रीम कोर्ट में EVM और VVPAT के मिलान को लेकर याचिकाएँ डाली गई हैं। इन याचिकाओं में माँग की गई है कि EVM में डाले गए वोट का VVPAT से निकलने वाली पर्चियों से 100% मिलान किया जाए। चुनाव आयोग ने कहा है कि इससे चुनाव प्रक्रिया धीमी हो जाएगी और नतीजे घोषित करने में 7 दिन से अधिक लगेंगे।