इस अवधि में जिन लोगों ने चीनी सामान खरीदे भी, उनमें से भी 60% का कहना है कि उन्होंने चीन में बने 1-2 से ज्यादा उत्पाद नहीं खरीदे। गलवान संघर्ष के बाद ये बदलाव आया।
अंसारी को जमीन का मालिकाना मिलने के बाद मंदिर ट्रस्ट और अंसारी के बीच बिक्री समझौता हुआ। अंसारी ने जमीन को 18.5 करोड़ रुपए में ट्रस्ट को बेचने की सहमति जताई।
पारदर्शिता के विषय में चंपत राय ने कहा कि तीर्थ क्षेत्र का प्रथम दिवस से ही निर्णय रहा है कि सभी भुगतान बैंक से सीधे खाते में ही किए जाएँगे, सम्बन्धित भूमि की क्रय प्रक्रिया में भी इसी निर्णय का पालन हुआ है।