"अपनी इस बात का प्रमाण दो या फिर वैधानिक कार्यवाही के लिए तैयार रहो गौरव पांधी। एक स्त्री के 48 वर्षों के परिश्रम को दुर्भावना से देखने वाले, तुम्हारी घिनौनी राजनीति के तरकश में तीर कम पड़ गए तो इस नीचता पर उतर आए?"
"हमने आम तौर पर देखा, जब हम मिलते हैं तो सलाम, अस्सलाम वालेकुम, सब कुछ कहते हैं, लेकिन क्या आप लोग राम-राम कहते हैं? आप "दो हाथों से ताली बजाइए न, मिलकर भी रहना है, गंगा-जमुनी तहजीब भी दिखानी है, आप नहीं बोलेंगे। ताली दो हाथों से बजती है..."
असम के सिलचर में राज्य की सरकारी भाषा के रूप में असमिया के अलावा बांग्ला को भी शामिल करने की माँग को लेकर आज ही के दिन वर्ष 1961 में आंदोलन हुआ था। सिलचर रेलवे स्टेशन पर मई 19, 1961 को आंदोलनकारियों पर पुलिस ने गोली चलाई थी, जिसमें 11 लोग मारे गए थे।