Sunday, September 27, 2020
Home देश-समाज निज़ामुद्दीन मरकज का मकसद क्या था? जानिए किस राज्य में कितने पहुँचे, विदेशी मौलवी...

निज़ामुद्दीन मरकज का मकसद क्या था? जानिए किस राज्य में कितने पहुँचे, विदेशी मौलवी कहाँ-कहाँ छिपे थे

एक तरफ व्यक्ति को लक्षण आते ही वह तुरंत अस्पताल या फिर डॉक्टर के पास जा रहा है और दूसरी ओर ऐसे जमाती मुस्लिम जानबूझकर पूरे देश के कोने-कोने में फैल रहे हैं और अधिक से अधिक लोगों से मिलने की कोशिश भी कर रहे हैं।

कोरोना का पहला केस चीन के वुहान शहर से पिछले साल नवंबर माह में ही सामने आ गया था, इसके बाद यह वायरस अधिक तेजी से चीन से निकलकर दूसरे देशों तक पहुँच गया और इस वायरस को भारत में आने में भी देर नहीं लगी। हालाँकि, इस वायरस के भारत में आने से पहले ही सरकार ने कई तरह की तैयारियाँ और बहुत सी गाइडलाईन देश वासियों के लिए जारी कर दी थीं।

इसका परिणाम मार्च के माह तब दिखाई दिया कि जब देश के सभी बड़े नेताओं ने होली के त्यौहार से दूरी बना ली थी। इन सब के बाद भी दिल्ली के निजामुद्दीन में मजहबी सम्मेलन का आयोजन किया जाता है। गौर करने वाली बात यह कि दिल्ली में 50 से अधिक लोगों के एकत्र होने की पाबंदी के बाद भी मजहबी सम्मेलन में 2000 से अधिक मुस्लिम देश-विदेश से एकत्र हो जाते हैं।

अब आपको बताते हैं देश भर में फैले जमातियों के खुलासे की शुरूआत कब और कहाँ से होती है। सबसे पहली खबर बिहार के पटना से आती है, जहाँ लोगों ने पटना के कुर्जी इलाके की दीघा मस्जिद में 12 विदेशी मुल्लों (मुल्ला शब्द का प्रयोग मजहबी शिक्षकों को लिए होता है) के होने की सूचना दी। सूचना पर पहुँची पुलिस ने 23 मार्च को हिरासत में लेकर सभी को क्वारंटाइन कर दिया। ये सभी तजाकिस्तान से भारत में इस्लाम का प्रचार करने के लिए आए थे। जानकारी के मुताबिक, ये सभी विदेशी पहले दिल्ली, फिर मुंबई में थे। इसके बाद 4 मार्च को पटना पहुँचे थे। 

इसके बाद झारखंड की राजधानी राँची के एक जिले में स्थित मस्जिद से 11 विदेशी मौलवियों को पुलिस प्रशासन ने हिरासत में लिया था। तमाड़ जिले स्थित राड़गाँव मस्जिद में छिपे इन 11 विदेशी मौलवियों में से 3 मौलवी चीन से, जबकि 4-4 किर्गिस्तान और कजाकिस्तान से थे। दरअसल, कोरोना वायरस के लगातार बढ़ते कहर के बाद कुछ स्थानीय लोगों ने इन्हें एक मस्जिद में देखा और शक होने पर पुलिस प्रशासन को जानकारी दी, जिसके बाद पुलिस ने सभी विदेशी मौलवियों के पासपोर्ट को जब्त कर लिया। अब तक राँची के अलग-अलग भाग से 28 विदेशी मुस्लिम पकड़े जा चुके हैं।

- विज्ञापन -

इसके बाद मेरठ जिले की कई मस्जिदों से दूसरे प्रदेश या फिर दूसरे देशों के जमातियों को छापेमारी के दौरान हिरासत में लिया, साथ ही सभी को क्वारंटाइन किया। इसके तहत मेरठ के काशी में एक मौलाना के घर से पकड़े गए 14 जमातियों को पुलिस ने हिरासत में लिया, जोकि एक एक मस्जिद से निकलने के बाद एक मौलाना के घर में छिपे हुए थे, जिसमें नेपाल, बिहार, दिल्ली और महाराष्ट्र के निवासी बताए जा रहे हैं।

वहीं पुलिस ने मेरठ के मवाना स्थित बिलाल मस्जिद से 30 मार्च को 10 और सरधना में आजाद नगर स्थित मस्जिद में 9 विदेशी मौलवियों को पकड़ा, जो इंडोनेशिया के रहने वाले थे। इन सभी के कागजात और पासपोर्ट कब्जे में ले लिए गए। ये सभी 17 मार्च से यहाँ रह रहे हैं। पुलिस ने इनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है। बिलाल मस्जिद में यह जमात 17 मार्च को सूडान और केन्या से आई थी। किसी को पता न चले, इसलिए मस्जिद के बाहर ताला लगा रखा था।

वजीराबाद की जामा मस्जिद में 12 विदेशी नागरिक मौजूद थे। इसको लेकर मस्जिद के मौलवी के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। इसी तरह भरत नगर की मस्जिद से आठ विदेशी मिले हैं। उत्तर-पूर्वी दिल्ली के 5 मस्जिदों से 48 विदेशी मुस्लिम मिले हैं। बताया जा रहा है कि इन विदेशी नागरिकों ने भी निजामुद्दीन में तबलीगी मरकज के कार्यक्रम में हिस्सा लिया था। छत्तीसगढ़ से भी 100 से ज्यादा लोग जमात के कार्यक्रम में शामिल हुए थे। राज्य सरकार ने इनकी पहचान कर लिए जाने का दावा किया है। इनमें 32 को क्वारंटाइन और 69 को होम आइसोलेशन में रखा गया है।

बिहार मधुबनी जिले के अंधराठाढ़ी ब्लॉक के गीदड़गंज गाँव की एक मस्जिद में मंगलवार (31 मार्च 2020) को सामूहिक नमाज रुकवाने पहुॅंची पुलिस टीम पर स्थानीय लोगों ने हमला कर दिया। दरअसल, पुलिस को सूचना मिली थी कि 100 से अधिक जमाती मस्जिद में ठहरे हुए हैं। पुलिस कार्रवाई पर स्थानीय लोगों ने पत्थरबाजी और फायरिंग शुरू कर दी, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। इस दौरान मस्जिद में ठहरे जमाती भाग निकलने में कामयाब हो गए। घटना के बाद से इलाके में तनाव बना हुआ है।

उधर निजामुद्दीन में कानून को ताक पर रख हुए मजहबी सम्मेलन के बाद वहाँ छिपे जमातियों को पुलिस प्रशासन ने 36 घंटे चलाए गए अभियान के बाद पूरी तरह से खाली करा लिया, दिल्ली सरकार के मुताबिक 6 मंजिला इमारत से 2361 लोगों को बाहर निकाला गया है, जिनमें से 617 जमातियों को संदिग्ध अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि शेष सभी को क्वारंटाइन किया गया है।

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने द हिंदू को बताया कि दक्षिण दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में तबलीगी जमात के मुख्यालय अलमी मरकज बंग्लेवाली मस्जिद में इस महीने की शुरुआत में देश भर से लगभग 8,000 लोग शामिल हुए थे, जिसमें 16 देशों के इस्लामी प्रचारकों ने हिस्सा लिया था। इनमें से 800 इंडोनेशियाई प्रचारकों को भारत ब्लैकलिस्ट करने जा रहा है, ताकि भविष्य में वे देश में प्रवेश न कर सकें।

वहीं एबीपी की रिपोर्ट के मुताबिक अब तक इनमें से 10 जमातियों की मौत हो चुकी है, जिनमें 6 तेलंगाना, 1 जम्मू-कश्मीर के भी जमाती शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक मरकज में शामिल होने वाले 55 मुस्लिम हैदराबाद, 45 कर्नाटक, 15 केरल, 109 महाराष्ट्र, 5 मेघालय, 107 मध्यप्रदेश, 15 ओडिशा, 9 पंजाब, 19 राजस्थान, 46 राँची, 501 तमिलनाडु, 34 उत्तराखंड, 156 उत्तर प्रदेश, 73 पश्चिम बंगाल, 456 असम से थे। इसके साथ ही कार्यक्रम मे 281 विदेशी शामिल हुए थे, जिनमें से 1 जिबूती, 1 किर्गिस्तान, 72 इंडोनेशिया, 71 थाईलैंड और 34 श्रीलंका, 19 बांग्लादेश, 3 इग्लैंड, 1 सिंगापुर, 4 फिजी, 1 फ्रांस, 2 कुवैत के विदेशी मुसलमान थे। (हालाँकि, राज्यवार आँकड़े थोड़े अलग भी हो सकते हैं, क्योंकि अलग-अलग जगहों पर राज्यों से जाने वाले लोगों, और जिनकी पहचान हो गई है, उनकी संख्या में अंतर है। अतः इसे ही अंतिम और सही संख्या न माना जाए।)

अब सवाल खड़ा होता है कि दिल्ली मजहबी सम्मेलन में हिस्सा लेने के बाद ये जो जमाती पूरे देश में फैले इन्होंने जागरूकता के नाते पहले अपनी जाँच क्यों नहीं कराई और जब ये लोग दूर क्षेत्रों की मस्जिदों में पहुँचे या वहाँ रुके भी तो इस दौरान वहाँ के स्थानीय मुसलमानों ने इसके संबंध में पुलिस प्रशासन को क्यों अवगत नहीं कराया?

दरअसल, इसके पीछे की एक बड़ी वजह यह भी है कि जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटने के बाद से भारत की पाकिस्तान से बातचीत बंद है और इसके चलते पाकिस्तान के जमातियों को भारत आने के लिए वीजा भी नहीं मिल पा रहा है। इसके बाद से भारत में अपना काम करने के लिए पाकिस्तान इन देशों के जमातियों को भारत में भेज रहा है, जिन देशों के जमाती पर्यटन वीजा पर भारत में पकड़े गए हैं।

अब गौर करने वाली बात यह है कि भले ही ये जमाती इस्लाम का प्रचार करने का दावा करते हों, लेकिन हकीकत तो यह है कि ये लोग धर्मांतरण और मजहब के नाम पर कट्टरता पैदा करने के लिए मस्जिदों में शरण लेते हुए घूमते हैं। जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान की जमात सबसे ज्यादा कट्टर और मजबूत है, बताया तो यह भी जाता है कि भले ही पाकिस्तान भुखमरी के कगार पर हो, लेकिन यहाँ के जमातियों के पास भरपूर पैसा है।

सवाल यह भी है कि यह लोग आखिर चाहते क्या हैं? क्योंकि देश के कोने-कोने में स्थित मस्जिदों या मौलानाओं के घर में छिपे इन जमातियों के बारे में स्थानीय मुसलमान आखिर चेतावनी के बाद भी पुलिस प्रशासन को क्यों नहीं बता रहा और यहाँ तक कि उत्तर प्रदेश की मस्जिदों में हो रही लगातार छापेमारी के बाद से तो मुसलमानों ने जमातियों को घरों में छिपाना शुरू कर दिया है।

गौर करने वाली बात यह कि ये लोग वाकई में कोरोना जैसी बीमारी से अनजान हैं या फिर कि इनके अंदर भरी गई कट्टरता का ही यह परिणाम है कि अल्लाह के घर में (मस्जिद) कोरोना कुछ नहीं बिगाड़ सकता, क्योंकि मुसलमानों में जमाती मजहब के प्रति सबसे कट्टर मुसलमान माना जाता है। मरकज़ के मौलवी साद की बात मानें तो उसने तो साफ कह दिया कि बीमारी में मस्जिद आना चाहिए, कोरोना से अगर अल्लाह के फरिश्ते नहीं बचा सकते तो डॉक्टर कैसे बचा लेगा, ये इस्लाम और मुसलमानों के खिलाफ एक साजिश है, ये प्रोग्राम बनाया गया है।

एक तरफ व्यक्ति को लक्षण आते ही वह तुरंत अस्पताल या फिर डॉक्टर के पास जा रहा है और दूसरी ओर ऐसे जमाती मुस्लिम जानबूझकर पूरे देश के कोने-कोने में फैल रहे हैं और अधिक से अधिक लोगों से मिलने की कोशिश भी कर रहे हैं। इसका जवाब शायद आपको यहाँ मिल जाए कि हाल ही में फ्रांस ने अपने देश में विदेशी इमामों के प्रवेश को प्रतिबंधित कर दिया था। साथ ही फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा था कि इस निर्णय के बाद देश में आतंकी घटनाओं में कमी आएगी।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

छत्तीसगढ़ में कॉन्ग्रेसी सरकार: भ्रष्टाचार पर लिखेंगे तो सड़क पर भी मार खाएँगे और थाने में भी, देखती रहेगी पुलिस

"वह अपने गुंडे पार्षदों के साथ हमारे पत्रकार साथी को थाने तक पीटते हुए ले आए, इसकी वजह थी कि वह नगरपालिका के विरुद्ध RTI लगा कर..."

राजद ने नकारा, नीतीश ने दुत्कारा: कुशवाहा के चावल, यादवों के दूध से जो बनाते थे ‘खीर’ और करते थे खून बहाने की बात

किसी से भी भाव न मिलने के कारण बिहार में रालोसपा और उपेंद्र कुशवाहा की हालत 'धोबी के कुत्ते' की तरह हो गई है, जो न घर का रहता है और न घाट का।

बॉलीवुड ‘सुपरस्टार’ के सामने ‘अपराधी’ शब्द बौना, ड्रग्स से लेकर हत्या/आत्महत्या और दंगों तक… कहाँ खड़ा होता है बॉलीवुड?

ड्रग्स मामला हो या सुपरस्टार्स के गलत कामों पर पर्दा डालने की कोशिश... बॉलीवुड ‘बॉलीवुड’ का बचाव करने से पीछे नहीं हटता है। ऐसा करने...

पूर्व केंद्रीय मंत्री जसवंत सिंह का निधन, PM मोदी ने कहा- उन्होंने एक सैन्य अधिकारी और नेता के रूप में देशसेवा की

भारत के पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा के वयोवृद्ध नेता रहे जसवंत सिंह का रविवार (सितम्बर 27, 2020) की सुबह निधन हो गया।

‘रोओ मत, इमोशनल कार्ड मत खेलो’ – दीपिका पादुकोण 3 बार रोने लगीं, NCB अधिकारियों ने मोबाइल भी कर लिया जब्त

ड्रग्स मामले की जाँच कर रही NCB ने दीपिका पादुकोण, सारा अली खान और श्रद्धा कपूर के मोबाइल फोन्स को भी आगे की जाँच के लिए जब्त कर लिया।

द वायर ने एडिटेड वीडियो से कृषि बिल विरोधी प्रदर्शनकारियों पर बीजेपी कार्यकर्ताओं के हमले के बारे में फैलाई फर्जी खबरें, यहाँ जाने सच

वायर के सिद्धार्थ वरदराजन और आरफा शेरवानी जैसे तथाकथित 'निष्पक्ष' पत्रकारों ने जानबूझकर भाजपा कार्यकर्ताओं पर प्रारंभिक हमले को नजरअंदाज कर दिया और इस घटना के बारे में आधे सच को आगे फैलाया कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने कृषि बिल विरोधी प्रदर्शनकारियों पर हमला किया था।

प्रचलित ख़बरें

‘मुझे सोफे पर धकेला, पैंट खोली और… ‘: पुलिस को बताई अनुराग कश्यप की सारी करतूत

अनुराग कश्यप ने कब, क्या और कैसे किया, यह सब कुछ पायल घोष ने पुलिस को दी शिकायत में विस्तार से बताया है।

पूना पैक्ट: समझौते के बावजूद अंबेडकर ने गाँधी जी के लिए कहा था- मैं उन्हें महात्मा कहने से इंकार करता हूँ

अंबेडकर ने गाँधी जी से कहा, “मैं अपने समुदाय के लिए राजनीतिक शक्ति चाहता हूँ। हमारे जीवित रहने के लिए यह बेहद आवश्यक है।"

‘दीपिका के भीतर घुसे रणवीर’: गालियों पर हँसने वाले, यौन अपराध का मजाक बनाने वाले आज ऑफेंड क्यों हो रहे?

दीपिका पादुकोण महिलाओं को पड़ रही गालियों पर ठहाके लगा रही थीं। अनुष्का शर्मा के लिए यह 'गुड ह्यूमर' था। करण जौहर खुलेआम गालियाँ बक रहे थे। तब ऑफेंड नहीं हुए, तो अब क्यों?

बेच चुका हूँ सारे गहने, पत्नी और बेटे चला रहे हैं खर्चा-पानी: अनिल अंबानी ने लंदन हाईकोर्ट को बताया

मामला 2012 में रिलायंस कम्युनिकेशन को दिए गए 90 करोड़ डॉलर के ऋण से जुड़ा हुआ है, जिसके लिए अनिल अंबानी ने व्यक्तिगत गारंटी दी थी।

‘मारो, काटो’: हिंदू परिवार पर हमला, 3 घंटे इस्लामी भीड़ ने चौथी के बच्चे के पोस्ट पर काटा बवाल

कानपुर के मकनपुर गाँव में मुस्लिम भीड़ ने एक हिंदू घर को निशाना बनाया। बुजुर्गों और महिलाओं को भी नहीं छोड़ा।

नूर हसन ने कत्ल के बाद बीवी, साली और सास के शव से किया रेप, चेहरा जला अलग-अलग जगह फेंका

पानीपत के ट्रिपल मर्डर का पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने नूर हसन को गिरफ्तार कर लिया है। उसने बीवी, साली और सास की हत्या का जुर्म कबूल कर लिया है।

बेहोश कर पति शादाब के गुप्तांग पर डालती थी Harpic, वसीम के साथ मनाती थी रंगरेलियाँ: आरोपित चाँदनी हिरासत में

महिला ने अपने प्रेमी के साथ रंगरेलियाँ मनाने के लिए अपने पति और तीनों बच्चों को बेहोश कर के एक कमरे में डाल दिया था। पति का गुप्तांग जलाया।

छत्तीसगढ़ में कॉन्ग्रेसी सरकार: भ्रष्टाचार पर लिखेंगे तो सड़क पर भी मार खाएँगे और थाने में भी, देखती रहेगी पुलिस

"वह अपने गुंडे पार्षदों के साथ हमारे पत्रकार साथी को थाने तक पीटते हुए ले आए, इसकी वजह थी कि वह नगरपालिका के विरुद्ध RTI लगा कर..."

राजद ने नकारा, नीतीश ने दुत्कारा: कुशवाहा के चावल, यादवों के दूध से जो बनाते थे ‘खीर’ और करते थे खून बहाने की बात

किसी से भी भाव न मिलने के कारण बिहार में रालोसपा और उपेंद्र कुशवाहा की हालत 'धोबी के कुत्ते' की तरह हो गई है, जो न घर का रहता है और न घाट का।

बॉलीवुड ‘सुपरस्टार’ के सामने ‘अपराधी’ शब्द बौना, ड्रग्स से लेकर हत्या/आत्महत्या और दंगों तक… कहाँ खड़ा होता है बॉलीवुड?

ड्रग्स मामला हो या सुपरस्टार्स के गलत कामों पर पर्दा डालने की कोशिश... बॉलीवुड ‘बॉलीवुड’ का बचाव करने से पीछे नहीं हटता है। ऐसा करने...

पूर्व केंद्रीय मंत्री जसवंत सिंह का निधन, PM मोदी ने कहा- उन्होंने एक सैन्य अधिकारी और नेता के रूप में देशसेवा की

भारत के पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा के वयोवृद्ध नेता रहे जसवंत सिंह का रविवार (सितम्बर 27, 2020) की सुबह निधन हो गया।

‘रोओ मत, इमोशनल कार्ड मत खेलो’ – दीपिका पादुकोण 3 बार रोने लगीं, NCB अधिकारियों ने मोबाइल भी कर लिया जब्त

ड्रग्स मामले की जाँच कर रही NCB ने दीपिका पादुकोण, सारा अली खान और श्रद्धा कपूर के मोबाइल फोन्स को भी आगे की जाँच के लिए जब्त कर लिया।

MP रवि किशन को ड्रग्स पर बोलने के कारण मिल रही धमकियाँ, कहा- बच्चों के भविष्य के लिए 2-5 गोली भी मार दी...

रवि किशन को ड्रग्स का मामला उठाने की वजह से कथित तौर पर धमकी मिल रही है। धमकियों पर उन्होंने कहा कि देश के भविष्य के लिए 2-5 गोली खा लेंगे तो कोई चिंता नहीं है।

छत्तीसगढ़: वन भूमि अतिक्रमण को लेकर आदिवासी और ईसाई समुदायों में झड़प, मामले को जबरन दिया गया साम्प्रदयिक रंग

इस मामले को लेकर जिला पुलिस ने कहा कि मुद्दा काकडाबेड़ा, सिंगनपुर और सिलाती गाँवों के दो समूहों के बीच वन भूमि अतिक्रमण का है, न कि समुदायों के बीच झगड़े का।

द वायर ने एडिटेड वीडियो से कृषि बिल विरोधी प्रदर्शनकारियों पर बीजेपी कार्यकर्ताओं के हमले के बारे में फैलाई फर्जी खबरें, यहाँ जाने सच

वायर के सिद्धार्थ वरदराजन और आरफा शेरवानी जैसे तथाकथित 'निष्पक्ष' पत्रकारों ने जानबूझकर भाजपा कार्यकर्ताओं पर प्रारंभिक हमले को नजरअंदाज कर दिया और इस घटना के बारे में आधे सच को आगे फैलाया कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने कृषि बिल विरोधी प्रदर्शनकारियों पर हमला किया था।

ड्रग्स में संलिप्त कलाकारों को निर्माता नहीं दें काम, सुशांत के मामले को भी जल्द सुलझाए CBI: रामदास अठावले

"ड्रग्स में संलिप्त कलाकारों को निर्माता काम नहीं दें। ड्रग्स में संलिप्त कलाकारों को फिल्में देना बंद नहीं हुआ तो आरपीआई कार्यकर्ता विरोध दर्ज कराते हुए शूटिंग बंद करने भी पहुँचेंगे।"

हमसे जुड़ें

264,935FansLike
78,058FollowersFollow
325,000SubscribersSubscribe
Advertisements