मुजीब ने दावा किया है कि वो लाइब्रेरी में बैठ कर पढ़ाई कर रहा था, तभी पुलिस ने उसकी पिटाई की। उसकी दोनों टाँगें टूट गई। इलाज पर 2.5 लाख रुपए खर्च हुए हैं। उसकी याचिका पर कोर्ट ने केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया है।
जिस प्रकार टेडी बियर, गुलाबों की चकाचौंध के पीछे प्रियतमा के द्वारा पकाया हुआ आलू का पराठा, और जानूँ के द्वारा कराया गया मुफ़्त फ़ोन रिचार्ज ही वो शक्ति है जो प्रेमसंबंधो में माधुर्य बनाए रखता है, बड़े-बड़े नारों के पीछे मुफ़्त संसाधनों का वचन और अपने वालों को जात-धर्म के झंडे के नीचे बाँधकर भीड़ जमा करने का माद्दा ही नेता और मतदाता के मध्य प्रेम को बनाए रखता है।
एकजुट जम्मू नामक संगठन ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। इसके मुताबिक जम्मू में सुनियोजित तरीके से लैंड जिहाद को अंजाम दिया गया और अपने ही इलाकों में हिंदू अल्पसंख्यक हो गए। फारूक अब्दुल्ला और गुलाम नबी आजाद की छत्रछाया में इसे अंजाम दिया गया।
महाकाल एक्सप्रेस की शुरुआत 20 फरवरी से होनी है। ट्रेन की एक सीट भगवान महाकाल के लिए आरक्षित है, जिस पर शिव मंदिर बनाया गया है। ट्रेन के बी5 कोच की सीट नंबर 64 पर इस मंदिर को स्थापित किया गया है।
जामिया हिंसा के विडियो में से एक चेहरा पहचान (सूत्रों के अनुसार) लिया गया है। जिस शख्स का चेहरा वायरल हुआ है, उसका नाम मो. अशरफ भट है। यह जामिया में PhD का स्टूटेंड है। लेकिन फिलहाल गायब है। ऑनलाइन-ऑफलाइन, कहीं भी इसकी कोई जानकारी नहीं है।
अजय माकन के ट्वीट पर पलटवार करते हुए मिलिंद देवड़ा ने उनके राजनीतिक मंशे पर ही सवाल खड़े कर दिए। मिलिंद ने कहा, "अगर आपने AAP के संग गंठबंधन की वकालत के बजाय शीला दीक्षित (जिनके कामों पर आपने हमेशा निशाना साधा) के कामों को जनता के बीच ले जाते तो आज हम सत्ता में होते।"
"अगर औरंगजेब की जगह वह शहंशाह होता, तो क्या अलग भारत होता? ये धारणाएँ मुगल इतिहास की मिसप्लेस्ड अंडरस्टैंडिंग की वजह से आ रही हैं। उन्हें एक अच्छा मुस्लिम बनाया गया है लेकिन उनकी कब्र की खोज क्यों हो रही है?”
भाजपा के नेता ही दिल्ली के चुनाव में पार्टी की दुर्गति चाहते थे। उन्हीं के नेता चाहते थे कि भाजपा को अच्छे नतीजे न मिलें। मुख्यमंत्री गहलोत के मुताबिक भाजपा के नेता मन ही मन कह रहे थे कि इन्हें कोई सबक मिलना चाहिए।
हाथ में पत्थर लेकर और चेहरे पर नकाब बाँध कर लाइब्रेरी में कौन सी पढ़ाई की जाती है, ये जामिया के उपद्रवी ही बता पाएँगे। वीडियो में कुछ उपद्रवियों को पत्थर लेकर लाइब्रेरी में घुसते हुए देखा जा सकता है। ये वो दंगाई हैं, जो 15 दिसंबर को पुलिस से बचने के लिए यहाँ छिपे थे।
नए वीडियो में देखा जा सकता है कि लाइब्रेरी के दरवाजे पर एक व्यक्ति खड़ा है, जो भाग कर आ रहे नकाबपोशों को अंदर घुसा रहा है। जाहिर है पुलिस ने यूँ ही किसी पर कार्रवाई नहीं की। उसने उपद्रवियों को चिह्नित कर एक्शन लिया।