CAA के विरोध-प्रदर्शन के दौरान इस तरह के पोस्टर्स को देखकर हँसी आती है। ऐसे प्रदर्शनकारियों के बारे में यही कहा जा सकता है कि उन्हें CAA के बारे में पहले पढ़ लेना चाहिए, ताकि उन्हें सच्चाई का पता चल सके। अगर उन्होंने CAA से जुड़ी जानकारी को पढ़ा होता तो वे इस तरह के बचकाने सवाल ही न पूछते।
सीबीआई की चार्जशीट में बताया गया है कि रिश्वत की बात पेड़, गमला, समान और प्रसाद जैसे कोड वर्ड के जरिए की गई। हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट का कोड वर्ड 'मंदिर' था। हवाला लेन-देन के लिए 'दस रुपए का नोट' कोड वर्ड का इस्तेमाल किया गया।
1981 का एक ऐसा समय था, जब जेएनयू को 46 दिनों के लिए बंद किया गया था। आज फ़र्ज़ी 'स्टिंग ऑपरेशन' कर के वामपंथियों को बचाने वाले 'इंडिया टुडे' ने तब JNU को वामपंथी अराजकता का गढ़ बताया था, जहाँ छात्र फालतू वाद-विवाद में लगे रहते हैं। पत्रिका ने कहा था कि जेएनयू केवल रुपए डकारता है।
स्वामी विवेकानंद का जीवन बहुत लंबा न होने के बावजूद, सौभाग्य से विभिन्न समय पर लिखे गए पत्रों, संस्मरणों, लेखों और हँसी-ठिठोली से हम वंचित नहीं हुए हैं। खास बात ये है कि उनके लिखे कई पत्र, संस्मरण आज उनके न रहने के लगभग एक शताब्दी के बाद भी कई नए रहस्य उद्घाटित कर रहे हैं।
'लिबरल' शिवसेना शायद भूल गई कि यह इंटरनेट का युग है। जो कभी कुछ नहीं भूलता और न लोगों को भूलने देता है। दीपिका पादुकोण के समर्थन पर सोशल मीडिया में यूज़र्स ने शिवसेना को तुरंत आड़े हाथों लिया और ठग करार दिया।
साल पूरा होते-होते, अब हर वामपंथी हमें गाली दे कर खारिज करने की कोशिश करता रहता है। जब इस तरह के आक्रमण होने लगते हैं, इसका मतलब है कि किसी को दर्द हो रहा है। हमारी कोशिश है कि इस दर्द की तीव्रता बढ़ाते रहें।
10वीं के बच्चों को सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में आरएसएस को लेकर आपत्तिजनक बातें पढ़ाई जा रही थी। मद्रास हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से तमिल और अंग्रेजी में प्रकाशित किताब से आपत्तिजनक हिस्सा हटाने का निर्देश दिया है।
"सीएए और एनआरसी को अलग-अलग देखने की जरूरत है। पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान के दुखी लोगों को यदि भारत में सुविधाएँ मिलती हैं तो इसमें बुराई क्या है।"
एनआरसी और सीएए पर विपक्ष खासकर कॉन्ग्रेस का दोहरा चरित्र जगजाहिर है। बॉलीवुडिया गैंग के विरोध की भी वजहें निजी हैं। अनुराग कश्यप भी सरकारी खैरात बंद होने की वजह से ट्रोलबाज बने हैं। पढ़िए, वो पत्र जो उनकी पोल खोलता है।
मामला शोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर से जुड़ा है। राजदीप ने एक IPS पर सनसनीखेज आरोप लगाए थे। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट तक गुहार लगाई। प्रेस की स्वतंत्रता की दुहाई दी। राहत नहीं मिली तो माफी माँग जान बचाई।