राज्यसभा में अगर नागरिकता संशोधन विधेयक (CAB, कैब) पास हो जाता है, तो बांग्लादेश से आए 5 लाख से ज्यादा बंगाली हिंदू, जिन्हें एनआरसी की अंतिम सूची में जगह नहीं मिल पाई थी, उन्हें नागरिकता मिल जाएगी।
नागरिकता संशोधन विधेयक का अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में विरोध शुरू। खुद को 'छात्र' कहने वाले उन्मादियों के समूह ने कैंपस में सभा की, जिसमें CAB को मुस्लिम विरोधी करार दिया गया। इसके बाद छात्रों ने नागरिकता संशोधन विधेयक की प्रतियाँ जलाईं और ‘हिंदुत्व मुर्दाबाद’ के नारे भी लगाए।
हुमा 8वीं कक्षा में पढ़ती है। पहले हुमा को किडनैप किया गया फिर जबरन धर्म परिवर्तन कराने के बाद अपहरण करने वाले अब्दुल जब्बार से उसका निकाह करा दिया गया। इसके बाद बड़े 'शान' से और 'हिम्मत' के साथ निकाह के कागज हुमा के माता-पिता के पास भेज दिया गया - यह इसलिए क्योंकि समझ जाओ कि बेटी अब दूसरे की हो गई, लापता-मिसिंग-कोर्ट-कचहरी जाने का कोई फायदा नहीं!
नागरिकता संशोधन विधेयक पर कॉन्ग्रेस के दबाव और कर्नाटक विधानसभा उपचुनाव के नतीजों से दुविधा में शिवसेना। उप मुख्यमंत्री और महकमों को लेकर जारी खींचतान से पिंड छुड़ाने के लिए क्या फिर भाजपा के पास लौटेंगे उद्धव ठाकरे?
याचिका में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को एक आस्था को तरजीह देना वाला बताया गया है। कहा गया है कि हिन्दू पक्ष को जन्मभूमि की ज़मीन देने का आधार केवल आस्था को माना गया है। मस्जिद के पक्ष में पुरातात्विक साक्ष्यों को नज़रंदाज़ कर दिया गया।
CAB पर अमेरिकी कमीशन वही सारे झूठ गढ़ रहा है, जो भारत में वामपंथी और विपक्षी नेता प्रलाप रहे हैं। इस कमीशन ने गुजरात के सीएम रहते मोदी पर बैन की पैरवी की थी। अब अमित शाह पर बैन चाहता है।
1. प्रवासियों को सुरक्षा प्रदान की जाएगी। 2. जिन औरतों का अपहरण किया गया, उन्हें वापस परिवार के पास भेजा जाएगा। 3. अल्पसंख्यकों की कब्जाई गई संपत्ति लौटाई जाएगी। 4. जबरदस्ती धर्म परिवर्तन अवैध होगा। 5. अल्पसंख्यकों के खिलाफ कुप्रचार नहीं।
शिवसेना का एक नेता राज्यसभा में भी नागरिकता संशोधन विधेयक पर मोदी सरकार के साथ होने की बात करता है। 10 मिनट के बाद कॉन्ग्रेस के 'वरिष्ठ नेता' राहुल गाँधी इस बिल के हर समर्थक को देश तोड़ने वाला बताते हैं। इसके 10 मिनट के बाद शिवसेना का सबसे बड़ा नेता मतलब उद्धव ठाकरे पलटी मारते हुए कहते हैं कि चीज़ें स्पष्ट नहीं, इसलिए...
नागरिकता संशोधन विधेयक पेश किए जाने से पहले, उस दौरान और अब आधी रात को वहाँ से पास होने के बाद से लेकर अब तक आम जनता के मन में इस विधेयक को लेकर जबरन भ्रम फैलाया जा रहा है। यह काम कर रहे हैं कुछ वामपंथी पत्रकार, कुछ मीडिया गिरोह और उनके चेले-चपाड़े।
तिहाड़ जेल प्रशासन कोई रिस्क नहीं लेना चाहता, क्योंकि संसद हमले के दोषी आतंकी अफजल को फाँसी पर लटकाने से पहले भी उसके वजन की डमी को फाँसी देकर ट्रायल किया गया था। उस ट्रायल में रस्सी टूट गई थी। चूँकि इस बार मामला चार कैदियों का है, इसी वजह से...