बीजेपी अल्पमत की सरकार बना सकती है, जैसा उसने 2014 के विधानसभा चुनावों के बाद किया था। पिछले दिनों जिस तरह कर्नाटक और गोवा में कॉन्ग्रेस विधायक दल में टूट हुई थी, वैसा ही कुछ महाराष्ट्र में होने के भी कयास लगाए जा रहे हैं।
1 नवंबर को जम्मू-कश्मीर रीआर्गेनाईजेशन बिल के लागू होते ही इन कश्मीरी नेताओं को मिल रही सारी सरकारी सुख-सुविधाएँ अपने-आप हट जाएँगी। उमर अब्दुल्ला के बंगले में तो अत्याधुनिक जिम सहित कई अन्य सुविधाओं पर करोड़ों ख़र्च किए गए हैं।
"आज मैंने खबर पढ़ी कि कोर्ट ने संघीय और प्रांतीय सरकारों से पूछा है कि क्या वे कल नवाज शरीफ की जिंदगी की गारंटी ले सकते हैं। मैं तो कल तक के लिए अपनी ही जिंदगी की गारंटी नहीं ले सकता, तो मैं किसी अन्य की जिंदगी की गारंटी कैसे दे सकता हूॅं?"
'बगदादी फुटबॉल के स्टार थे' से लेकर 'बगदादी अंतर्मुखी थे' तक, बीबीसी ने ISIS के सरगना को ऐसे सम्मान दिया, जैसे उसने उसकी रूह की शांति के लिए तर्पण की जिम्मेदारी ली हो। आतंकी बगदादी की मौत से शोकग्रस्त बीबीसी के प्रोपेगेंडा का काला चिट्ठा पढ़ें उसके ही शब्दों में।
जब दीपावली के दिन हिन्दू पटाखे फोड़ रहे थे, तभी अचानक से लगभग 60 की संख्या में मुस्लिम भीड़ पहुँची और उन्होंने हिन्दुओं पर हमला कर दिया। भारी पथराव के कारण कई लोग घायल हो गए। जब मुस्लिमों ने पत्थरबाजी की तो कई लोगों ने इसका वीडियो भी बना लिया।
पाकिस्तान ने एक बार फिर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सऊदी अरब की यात्रा के लिए विमान को अपने हवाई क्षेत्र उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया है। इस बार भारत ने अंतरराष्ट्रीय सिविल एविएशन ऑर्गनाइजेशन (ICAO) के समक्ष यह मुद्दा उठाया है।
रवीश कुमार ने एक रिपोर्टर के रिपोर्ट का मजाक सिर्फ इसलिए उड़ाया क्योंकि वो रिपोर्टर उनके इतना बड़ा पत्रकार नहीं है और उसने रिपोर्ट अयोध्या के दीपोत्सव पर लिखी। आखिर रवीश से उम्मीद भी तो यही बची है।
कालकेय एक विलुप्त हुई भाषा का जानकार था। साउंड साइंटिस्ट डॉक्टर डैंग 'गूँज की गूँज' पर एक्सपेरिमेंट कर रहा था। थानोस जनसंख्या नियंत्रण विशेषज्ञ था। मोगैम्बो स्टाइलिश ड्रेस वाला केमिकल इंजीनियर था। गब्बर माँओं को उनके बच्चों को सुलाने में मदद करता था। बुल्ला एक कवि था। शाकाल पशुपालन का पितामह था।
शुभकामना संदेश को लेकर समुदाय विशेष के लोगों ने जहीर को किया ट्रोल। ट्रोल करने वाले उमर को राणा अय्यूब, निखिल वागले और सबा नकवी जैसे लिबरल पत्रकारों के साथ ही संजय निरुपम जैसे कॉन्ग्रेसी भी फॉलो करते हैं।
भीड़ में क़रीब 20 संदिग्ध लोग शामिल थे, जिन्होंने पटाखे उड़ाने से मना किया। जवाब में अमरेश व उनके दोस्तों के साथ उनकी कहासुनी हो गई। इसके बाद एक ने अमरेश के दोस्त की कनपट्टी पर बन्दूक रखा और अन्य ने धारदार हथियारों से हमला कर दिया।