अस्पताल का एक कर्मचारी मरीज को एक्स-रे रूम तक ले जाने के लिए स्ट्रेचर या व्हीलचेयर की बजाय चादर पर लिटाकर घसीट रहा है। मामला नेताजी सुभाष चंद्र बोस (एनएससीबी) मेडिकल कॉलेज, जबलपुर का है।
जैनब को शौहर साबिर से सब्जी के लिए ₹30 माँगना महंगा पड़ गया। बीबी द्वारा सब्जी के लिए पैसे माँगना शौहर को इतना नागवार गुजरा कि उसने इसके लिए बीबी के साथ मारपीट की और फिर तीन बार तलाक बोलकर घर से निकाल दिया।
प्यारे खान की कहानी से प्रभावित होकर IIM-अहमदाबाद ने उन्हें बुला तो जरूर लिया लेकिन लैपटॉप, अंग्रेजी और पावरपॉइंट प्रेज़ेंटेशनों की बात तो दूर, खान को IIM क्या होता है, यह भी पता नहीं था। तो उन्होंने स्टेज पर जाकर अपनी कम्पनी की कहानी सुना दी, वह भी हिंदी में - और प्रथम पुरस्कार जीत लिया।
"सिद्धू का विभाग बदले जाने के अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का मेरा कोई इरादा नहीं है। ऐसे में अब सिद्धू के लिए दो ही रास्ते बचे हैं- या तो वो नए विभाग का कार्यभार संभाल लें या फिर मंत्री पद छोड़ दें।"
गाँव के बाहर निकलते ही जब किशोरी सुनसान रास्ते से गुजर रही थी, तभी राशिद, नदीम, वाहिद एवं तसुव्वर ने उसका रास्ता रोका। किशोरी के शोर मचाने पर बदमाशों ने उसे तमंचा दिखाया और फिर तमंचे के बल पर उसे मदरसे में ले जाकर बारी-बारी से बलात्कार किया।
प्रोपेगेंडा-पर-प्रोपेगेंडा फैलाते रहना, बार-बार पकड़े जाते रहना, शर्मिंदा होना- अगर यही बिज़नेस मॉडल है तो बात दूसरी है, वरना वायर वालों को बाज आ जाना चाहिए।
गुप्त सूत्रों ने बताया है कि अब से विमल गुटखा अपने विज्ञापनों में 'जुबाँ हरी हरी' कहेंगे। साथ ही, राजस्थानियों का 'केसरिया बालम' अब 'हरिया बालम' या 'करिया बालम' के नाम से पधारने को कहा जाएगा। नारंगी के फलों को पकने से पहले ही तोड़ लिया जाएगा ताकि वो बाहर से हरे और भीतर से सफेद ही दिखें और देश की सेकुलर फैब्रिक टाइट बनी रहे।
"अगर कोई मुस्लिम महिला हिंदू से शादी करती है और बिंदी, बिछिया, मंगलसूत्र पहनती है, तो मुस्लिम मौलवी उसे हराम कहते हैं। लेकिन कई मुस्लिम पुरुष हमारी हिंदू बेटियों को लव जिहाद के नाम पर फँसाते हैं और उनसे बुर्का पहनने को कहते हैं, तो यह हराम नहीं है। यह उनके लिए उचित है।”
"संसद का सत्र चल रहा है। सरकार को यह जानने के लिए मतदान कराना चाहिए कि संविधान के अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35-A को कौन-कौन रद्द कराना चाहते हैं। इससे राष्ट्र को राष्ट्रवादियों और गद्दारों के बारे में जानकारी मिलेगी।"
यूपी में अनुसूचित जातियों के लिए 17 लोकसभा और 403 विधानसभाओं में से 86 सीटें रिजर्व हैं। इनमें इन जातियों को चुनाव लड़ने का अवसर मिलेगा। जबकि, ओबीसी के लिए सीटें रिजर्व नहीं हैं। इसका दुष्परिणाम जातिगत राजनीति करने वाली सपा-बसपा जैसी पार्टियों को भुगतना पड़ेगा।