जो मीडिया और क्रांतिजीव 5 साल तक मोदी की विदेश यात्राओं का लेखा-जोखा करते रहे, उन्हें नेहरू से लेकर राजीव गाँधी के भ्रमणों से रूबरू होना चाहिए, ताकि वो उसकी समीक्षा कर के बता सकें कि मिस्ट्रेसीकरण और ससुरालीकरण उनकी किसी विदेश नीति का हिस्सा थे?
पूरा लेख रेटरिक यानी गाल बजाने जैसा है जिसमें वही पाँच साल पुरानी बातें हैं जिन्हें लिख कर भारत का छद्म-बुद्धिजीवी गिरोह भी बोर हो चुका है: मोदी नफरत फैलाता है, समाज को बाँट रहा है, सरकार पूर्णतः विफल रही है... ब्ला, ब्ला ब्ला...
दिल्ली सरकार के मुखिया को ध्यान रखना चाहिए कि कागज़ी आंकड़ों की बाजीगरी करके भले आप वाहवाही लुट ले, करोड़ों लुटाकर मीडिया का ध्यान भटका दें, जिन गरीब के बच्चों को स्कूली व्यवस्था से दूर कर रहे है, उन बच्चों के साथ खिलवाड़ कर राष्ट्र-अपराध कर रहे है।
निजी कारणों के लिए नौसेना की संपत्ति का उपयोग करने की परंपरा राजीव गाँधी द्वारा शुरू नहीं की गई थी। जवाहरलाल नेहरू ने इस पुश्तैनी परंपरा की शुरुआत की थी वो भी "आदमखोर" महिला मित्र एडविना माउंटबेटन के लिए।
हाल ही में मतदाताओं से अपनी ऊँगली का इस्तेमाल स्वरा भास्कर की तरह नहीं, बल्कि समझदारी से मतदान के लिए करने की अपील करने वाले ‘प्लाकार्ड गाय’ ने नई पहल शुरू की है। इस बार प्लाकार्ड की मदद से मधुर सिंह ने केजरीवाल द्वारा उनके राज्य दिल्ली में ही फैलाए गए उनके ‘रायतों’ और धरनों के बीच भुला दिए गए उनके वायदों की याद दिलाई है।
...वो अलग बात है कि कॉन्ग्रेस को अपदस्थ करने के लिए दुष्यंत द्वारा लिखी गई कविता का प्रयोग आज जावेद अख़्तर उसी कॉन्ग्रेस को (प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से) सत्ता दिलाने के लिए कर रहे हैं। विडम्बना इसे देख कर हज़ार मौतें मरेंगी।
कॉन्ग्रेस के समर्थन से चंद्रशेखर के पीएम बनने के 6 महीने बाद राजीव गाँधी की हत्या हुई। अगर उनकी सुरक्षा कभी कम भी कर दी गई थी, तो क्या कॉन्ग्रेस समर्थित सरकार ने भी कॉन्ग्रेस अध्यक्ष को उचित सुरक्षा नहीं दी? उनको मिलने वाले पीएसओ की संख्या नहीं बढ़ाई?
अभी हाल ही में केरल में एक आतंकी की गिरफ़्तारी भी हुई है, जो ज़ाकिर नाइक के वीडियो देख-देख कर आत्मघाती हमलावर बनने की योजना बना रहा था। प्रवर्तन निदेशालय ने कहा है कि ज़ाकिर नाइक के पास कारोबार, रोज़गार या फिर व्यापार से आय का कोई स्रोत नहीं है।
सीपीएम कार्यकर्ताओं के इस कार्य के पीछे ममता बनर्जी और तृणमूल कॉन्ग्रेस के प्रति उनकी कट्टर विरोधी सोच है। जहाँ कॉन्ग्रेस बंगाल से लगभग साफ़ हो चुकी है और सीपीएम को लगातार आज़माने के बाद लोगों ने उसे उखाड़ फेंका, ममता विरोधी सीपीएम कैडर को भाजपा की मदद करने में फायदा दिख रहा है।
ये मेरा ही तो रूप है जो बसों में उस पर गिर जाता है, जो गर्ल्स हॉस्टल की खिड़कियों की सीध में अपने लिंग पर हाथ फेरता है। वो मैं ही तो होता हूँ जो अपनी किसी जान-पहचान की बच्ची को चॉकलेट देकर कहीं ले जाता हूँ, और उसके साथ हैवानियत दिखाने के बाद उसकी हत्या भी कर देता हूँ।