वामपंथी वेबसाइट द स्क्रॉल ने एक बार फिर से इसी ट्रैक पर चलते हुए जनवरी से मई 2020 तक 65 लाख टन अनाज बर्बाद होने का झूठ फैलाया। प्रोपेगेंडा पोर्टल की रिपोर्ट में परोसे गए झूठ की पोल खुद पीआईबी ने फैक्टचेक कर खोली है।
पीआईबी ने CNN न्यूज 18 के पत्रकार रुनझुन शर्मा के दावे को खारिज करते हुए कहा कि एम्स के डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को दिए गए उपकरणों की गुणवत्ता स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा निर्धारित मानकों को पूरा करती है। जिनका मूल्यांकन स्वयं एम्स समिति द्वारा प्रमाणित किया गया है।
रवीश कुमार ने अपने फेसबुक पेज पर ‘दैनिक भास्कर’ अखबार की एक ऐसी ही भावुक किन्तु फ़ेक तस्वीर शेयर की है जिसे कि भारतीय रेलवे एकदम बेबुनियाद बताते हुए पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि ये पूरी की पूरी रिपोर्ट अर्धसत्य और गलत सूचनाओं से भरी हुई है।