Sunday, July 5, 2020
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हथिनी की मौत के बाद ऑल्टन्यूज ने मुस्लिम आरोपितों को बचाने की कोशिश में किए खबर में कई बदलाव

ऑल्टन्यूज़ दावा करता है कि वह फैक्ट चेकर यानी, तथ्यों की जाँच करने वाली वेबसाइट हैं, जबकि उनके कारनामों से यही सन्देश मिलता है कि वह सिर्फ और सिर्फ इस्लामिक अपराधियों को बचाने के लिए तथ्यों को जरूरत के अनुसार ढालने और उन्हें तोड़-मरोड़कर पेश करने वाली वेबसाइट से ज्यादा और कुछ भी नहीं हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

केरल में गर्भवती हथिनी की मौत के मामले की जाँच तेज हो गई है। पुलिस ने जानकारी दी है कि मामले के दो आरोपित अभी भी फरार हैं। पलक्कड़ पुलिस अधीक्षक जी शिवा विक्रम ने फरार होने वाले लोगों के नाम अब्दुल करीम और उसका बेटा रियासुद्दीन बताया है। दोनों ही अंबालाप्पारा के निवासी हैं।

दरअसल, दोनों के उस संपत्ति के मालिक होने का संदेह है, जहाँ से आरोपित पी विल्सन को गिरफ्तार किया गया है। इस मामले में दो प्राथमिकी दर्ज की गई है। एक पुलिस ने जबकि दूसरी प्राथमिकी वन विभाग द्वारा दर्ज कराई गई है।

आरोपितों के नाम सामने आने पर ऑल्टन्यूज़ की बदलती ‘डेवलपिंग स्टोरी’

गर्भवती हथिनी की मौत की खबरों से एक ओर देशभर में आक्रोश का माहौल था, तो दूसरी तरफ ऑल्ट न्यूज़ जैसे कुछ फैक्ट चेकर बस एक ऐसे मौके के इन्तजार में थे, जिसके जरिए किसी ना किसी तरह से इस घटना का सम्बन्ध हिन्दू आस्था से जोड़कर उन्हें बदनाम किया जा सके। ये वही ऑल्टन्यूज़ हैं, जिन्होंने 7 दिन तक अरबीना खातून की मौत पर प्रपंच गढ़ते हुए यह साबित करने का हर प्रयास किया कि उनकी मौत का कारण भारतीय रेलवे है। ऑल्टन्यूज़ ही नहीं बल्कि बॉलीवुड के प्रगतिशीलों ने भी फ़ौरन इस हथिनी की मौत के लिए ‘गणेश को पूजने वाले हिन्दुओं’ की आस्था से जोड़ने का काम किया।

हालाँकि, हुआ यह कि जल्द ही, खबरें सामने आईं कि अपराधियों का संबंध मुस्लिम समुदाय से था और यह बात तब सामने आई जब इस्लामिक प्रचार वेबसाइट ऑल्टन्यूज़ ने कहानी को तोड़ने और अपराधियों को अपनी विचारधारा के स्वरूप में ढालने के लिए हमेशा की ही तरह एक ‘डिबंक’ करता ‘फैक्ट चेक’ प्रकाशित किया।

इस मामले में ऑल्टन्यूज़ द्वारा किए गए दो ‘फैक्ट-चेक’ सामने आए। एक केरल जिले के बारे में था, जहाँ यह घटना हुई थी, और दूसरा, सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाले मुस्लिम अपराधियों के नामों का फैक्ट चेक करने वाला! दोनों फैक्ट चेक बेहद भ्रामक और फर्जी थे, जिन्हें एक-एक कर विस्तार से यहाँ बताया जा रहा है –

ऑल्टन्यूज़ के 2 सनसनीखेज फैक्ट चेक, जो अभी भी ‘डेवलपिंग स्टोरी’ हैं

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ये दोनों फर्जी और भ्रामक फैक्ट चेक अभी भी ऑल्टन्यूज वेबसाइट पर हैं और अपने ‘होम पेज’ पर प्रमुखता से प्रदर्शित किए जा रहे हैं, और ये रिपोर्ट लिखे जाने तक भी ‘फ़ीचर पोस्ट’ के तौर पर बरकरार है।

ऑल्टन्यूज़ का होम पेज

ऑल्टन्यूज़ का पहला फैक्ट चेक – मल्लापुरम नहीं पलक्कड़, मुस्लिमों को बदनाम करने का प्रयास

ऑल्टन्यूज़ का पहला फैक्ट चेक तब सामने आया जब मेनका गाँधी द्वारा केरल के मुस्लिम बहुल जिले मल्लापुरम को लेकर एक नोट जारी किया, जिसमें कहा गया था कि केरल के मुस्लिम बहुल जिले मल्लापुरम में पशु क्रूरता के मामले देखे गए हैं और बार-बार अनुरोध करने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

इस पर ऑल्टन्यूज़ ने इस जानकारी का फैक्ट चेक करते हुए कहा कि यह घटना वास्तव में पपलक्कड़ में हुई थी और मल्लापुरम का नाम केवल मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाने के लिए सामने लाया जा रहा है।

इस तथाकथित फैक्ट चेक में ऑल्टन्यूज़ ने लिखा कि भारत में अधिकांश मामलों की तरह ही इस घटना में भी मुस्लिमों के खिलाफ माहौल बनाने का प्रयास किया गया है।

इस रिपोर्ट में, ऑल्टन्यूज़ ने केरल के वन मंत्री और मुख्यमंत्री के हवाले से कहा कि यह घटना पलक्कड़ में हुई है। हालाँकि, यह जानकारी सही है, ऑल्टन्यूज़ ने बेशर्मी के साथ यह दावा किया कि मल्लापुरम जिले का नाम लाने की वजह से मुस्लिमों की छवि को नुकसान पहुँचा है।

ऑल्टन्यूज़ द्वारा यह ‘फैक्ट चेक’ जून 04, 2020 को प्रकाशित किया गया था और कल तक भी इसमें किसी को कुछ भी गलत नजर नहीं आता, सिवाए इसके कि ऑल्टन्यूज़ ने इसके जरिए भरपूर कोशिश की कि हिन्दू मुस्लिमों से नफरत करते हैं। हालाँकि बाद में पता चला कि आरोपित मूल रूप से मल्लापुरम जिले का निवासी था और रबर की खेती का काम करता था। यहाँ पर समस्या यह है कि इस रिपोर्ट की वास्तविकता सामने आने के बाद भी यह रिपोर्ट लिखे जाने तक अपडेट नहीं किया गया है।

5 जून को जिसे गिरफ्तार किया गया, वह अपराधी एक पी विल्सन था और अन्य दो, जो फरार हो गए थे, उनकी पुष्टि दो मुस्लिम व्यक्तियों – अब्दुल करीम और बेटे रियासुद्दीन के रूप में की गई थी।

अब चूँकि, ऑल्टन्यूज़ द्वारा पहले यह माहौल तैयार करने का प्रयास किया गया कि इस खबर में मुस्लिमों का नाम लेकर मुस्लिमों को निशाना बनाया जा रहा है, तो उसी तर्क के साथ अब ऑल्टन्यूज़ को यह माफ़ी माँगते हुए अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से इस बात का भी जिक्र करना चाहिए कि उनका पहला फैक्ट चेक एकदम बेबुनियाद और कल्पना पर आधारित था, जिसमें उन्होंने कहा कि मुस्लिमों को निशाना बनाने के लिए यह खबर चलाई जा रही है, क्योंकि अब जो आरोपित सामने आए हैं, दुर्भाग्य से वह मुस्लिम ही हैं।

दूसरा फैक्ट चेक – मुस्लिम आरोपितों के नाम सामने आने पर ऑल्टन्यूज़ की धूर्तता

जैसे ही उस मामले ने तूल पकड़ा और यह प्रकरण आगे बढ़ा, 5 जून को, कई व्यक्तियों ने ट्वीट कर जानकारी दी कि हथिनी की मौत के जघन्य अपराध के लिए जिन दो अपराधियों को गिरफ्तार किया गया था, वे दो व्यक्ति अमजथ अली (Amzath Ali) और थामीम शेख (Thamim Shaikh) थे। इस सूचना के बारे में सबसे पहले ट्वीट करने वालों में से एक केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री के मीडिया सलाहकार अमर प्रसाद रेड्डी थे।

यह खबर सामने आते ही ऑल्टन्यूज़ ने फ़ौरन नया ‘फैक्ट चेक’ जारी किया, जिसका शीर्षक था – “केरल हथिनी की मौत के बारे में अमजथ अली और थामिम शेख की गिरफ्तारी को लेकर झूठा दावा।” इस फैक्ट चेक की शुरुआत में लिखा गया कि भारतीय मुस्लिमों को निशाना बनाने के लिए यह खबर अब अलग मुद्दा बन गई है जो कि ‘भारतीय मुस्लिमों को निशाना बनाने’ को लेकर है।

ऑल्टन्यूज़ का फैक्ट चेक

दिलचस्प बात यह है कि अपराधियों में से 2 के मुस्लिम होने के बाद, इस लाइन को उनके ‘फैक्ट चेक’ में से चुपके से हटा दिया गया है। पूरे फैक्ट चेक के बाद अंत में दावा किया गया कि इस अपराध में कोई ‘मुस्लिम एंगल’ नहीं था, और ऑल्टन्यूज़ ने चुपचाप अपनी रिपोर्ट को ‘अपडेट’ कर दिया।

ऑल्टन्यूज़ ने अब ये लाइन चुपचाप डिलीट कर दी है

और जैसा कि आप यहाँ पर संलग्न स्क्रीनशॉट में देख सकते हैं – ऑल्टन्यूज़ ने रिपोर्ट के आखिर में लिखा है कि रबर का कारोबार करने वाले अब्दुल करीम और उसके बेटे रियासुद्दीन, जो कि इस आरोप में ‘संदिग्ध’ हैं, की जानकारी के साथ यह अपडेट कर दी गई है, जैसा कि पुलिस का भी बयान है।

ऑल्टन्यूज़ अभी भी अपने इस दावे पर खड़ा है कि इसमें मुस्लिम नजरिए जैसी कोई बात नहीं थी और यह मुस्लिमों को निशाना बनाने के लिए गढ़ी गई, साथ ही यह भी रिपोर्ट को ‘डेवलपिंग स्टोरी’ बताते हुए खत्म किया है।

ऑल्टन्यूज़ की 5 दिन से रोजाना डेवलप होती स्टोरी

इस अपराध में मुस्लिम आरोपितों के नाम सामने आने के बावजूद भी ऑल्टन्यूज की हेडलाइन अभी पूर्ववत और भ्रामक ही हैं, जो कि यही सन्देश देती नजर आती हैं कि मुस्लिमों का इस केस से कोई सम्बन्ध नहीं है।

ऑल्टन्यूज़ के साथ समस्या कहाँ पर है

ऑल्टन्यूज़ अपने चुनिन्दा मुद्दों पर यह कहने से पीछे नहीं हटता है कि उन्होंने पुलिस से बात की। यहाँ भी उन्होंने कुछ ऐसा ही काम कर चतुराई दिखाने की कोशिश करते हुए लिखा कि उन्होंने पलक्कड़ के पुलिस अधीक्षक जी शिवा विक्रम से बात की। ऑल्टन्यूज़ ने कहा कि अपराधियों के मुस्लिम होने का दावा फर्जी है और इस मामले में एक पी विल्सन को गिरफ्तार किया गया था।

हालाँकि, संदिग्धों के नाम अब्दुल करीम और उसके बेटे रियासुद्दीन के नाम सामने आने के बाद, ऑल्टन्यूज़ ने इस पैराग्राफ को बरकरार रखते हुए एक और जोड़ा – “मलयालम न्यूज़ स्रोत मातृभूमि और जन्मभूमि का कहना है कि रबर प्लान्टेशन के मालिक, जहाँ विल्सन काम करता है, भी इस मामले में संदिग्ध हैं। अब्दुल करीम और रियासुद्दीन अभी फरार हैं और यह जानकारी भी हमें पुलिस अधीक्षक जी शिवा विक्रम ने दी है।”

यह भाग ऑल्टन्यूज़ ने बाद में जोड़ा है

पुलिस के बयानों पर चुनिन्दा सहमति

अब यहाँ पर यह पूरी तरह से संभव है कि जब ऑल्टन्यूज़ ने पहले पुलिस अधिकारी से बात की, तो पुलिस अधिकारी ने कहा होगा कि या तो वह इन नामों की पुष्टि नहीं कर सकते हैं या फिर अभी तक ‘अमजथ अली’ और ‘थामिम शेख’ नाम सामने नहीं आए हैं।

या फिर यह भी हो सकता है कि पुलिस अधिकारी ने उनसे कहा हो कि वो अभी इन खबरों के बारे में कुछ भी स्पष्ट नहीं कह सकते और जो नाम सामने आ रहे हैं, वह फेक भी हो सकते हैं। हालाँकि, इस्लामिक विचारधारा के समर्थक ऑल्टन्यूज़ के पुराने रिकॉर्ड को देखकर यह कहा जा सकता है कि उन्होंने मुस्लिम समुदाय के नाम सामने आने की वजह से पुलिस के बयान से ही छेड़छाड़ कर दी हो।

अब यह कहा जा सकता है कि ऑल्ट न्यूज़ द्वारा किए गए दोनों फैक्ट चेक कम से कम मूल आधार पर सही पाए गए हैं। पहले में, यह घटना पलक्कड़ में हुई थी, न कि मल्लापुरम में और दूसरी में, कि अपराधी के नाम वास्तव में अमजथ अली और थामीम शेख नहीं थे (लेकिन वास्तव में अब्दुल करीम और उसका बेटा रियासुद्दीन थे)।

हालाँकि, ऑल्टन्यूज़ का यह दावा कि यह घटना सिर्फ मुस्लिमों को निशाना बनाने के लिए सामने लाई जा रही है, अभी भी झूठ है और ऑल्टन्यूज़ द्वारा सिर्फ मुस्लिम अपराधियों को सुरक्षा कवच और विक्टिम कार्ड देने के उद्देश्य से ही कही गई। यही बात उनके फैक्ट चेक के हेडलाइन और एक्सर्पट से भी जाहिर होती है।

इस सबके बीच एक महत्वपूर्ण बात यह है कि ऑल्टन्यूज़ दावा करता है कि वह फैक्ट चेकर यानी, तथ्यों की जाँच करने वाली वेबसाइट हैं, जबकि उनके कारनामों से यही सन्देश मिलता है कि वह सिर्फ और सिर्फ इस्लामिक अपराधियों को बचाने के लिए तथ्यों को जरूरत के अनुसार ढालने और उन्हें तोड़-मरोड़कर पेश करने वाली वेबसाइट से ज्यादा और कुछ भी नहीं हैं और यह साबित करने के लिए ऑल्टन्यूज़ की रोजाना अपडेट हो रही यह ‘डेवलपिंग स्टोरी’ ही काफी है कि वह वास्तविकता के साथ कितना बैर रखते हैं।

NDTV भी ‘डेवलपिंग स्टोरी’ की तर्ज पर ही बदल रहा है हेडलाइन

ऐसा ही कुछ कारनामा NDTV की हेडलाइन भी करती देखी जा सकती हैं, जिन्होंने इस पूरी स्टोरी को रोजाना नई जानकारियों के सामने आने पर बेहद धूर्तता से पहले ‘हथिनी को पटाखों से भरा अनानास खिलाया’ गया से लेकर ‘हथिनी ने पठाखों से भरा अनानास खाया’ तक में तब्दील कर दिया।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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