आखिर अस्सी-नब्बे के दशक में जो लोगों को अपने उपनाम छुपाने पड़े थे, वो किसे याद नहीं? एक कथित सेक्युलर चैनल के ईनामी पत्रकार भी तो अपना नाम 'कुमार' तक ही बताते हैं, पूरा नाम नहीं बताते ना? क्यों छुपाना पड़ा था, ये याद तो आता है!
मृतक के पिता ने बताया कि कुछ लोगों ने उन्हें फोन पर धमकी देते हुए कहा कि उनका बेटा पटाखे फोड़ रहा है, यह ठीक नहीं है। अगली सुबह उनके बेटे का शव एक पेड़ से लटका हुआ मिला।
अर्णब गोस्वामी को जमानत मिलते ही लिबरल्स में खलबली का माहौल है। कुणाल कमरा, ध्रुव राठी से लेकर शेहला रशीद तक अपनी मानसिक दशा छुपाने में नाकामयाब रहे हैं।
अर्णब गोस्वामी ने अपनी अंतरिम जमानत याचिका खारिज करने के बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। सुप्रीम कोर्ट कल अर्णब गोस्वामी की अंतरिम जमानत याचिका पर सुनवाई करेगा।