ऋचा दुबे पर अपने पति के साथ आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने का भी आरोप है। इसके साथ ही वह विकास दुबे के सभी कारनामों में बढ़-चढ़कर साथ देती थी। कानपुर में हुए वारदात की जानकारी भी ऋचा को पहले से ही थी।
गाड़ी पलटने के बाद विकास दुबे ने घायल यूपी एसटीएफ के पुलिसकर्मियों की पिस्टल छीन कर भागने की कोशिश की। जवाबी फायरिंग में गोली लगने से बुरी तरह घायल विकास दुबे की मौत हो गई।
1979 में तत्कालीन ज्योति बसु सरकार की पुलिस व सीपीएम काडरों ने बांग्लादेशी हिंदू शरणार्थियों के ऊपर जिस निर्ममता से गोलियाँ बरसाईं उसकी दूसरी कोई मिसाल नहीं मिलती।
विकास दुबे को भगाने के पीछे विनय तिवारी और केके शर्मा का हाथ बताया जा रहा है। इन लोगों ने ही दबिश के दौरान पुलिस की जान खतरे में डाली थी। और उन्हें मरता हुआ छोड़ कर भाग गए थे।