इस ख़बर के सामने आने के बाद जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी ने इसे नकार दिया। अमेरिका के मेरीलैंड में स्थित यूनिवर्सिटी ने स्पष्टीकरण जारी करते हुए बताया कि उसने ऐसा कोई रिसर्च प्रकाशित नहीं किया है। यूनिवर्सिटी ने लिखा कि इस कथित 'रिसर्च' में उसके लोगो और नाम का भी ग़लत इस्तेमाल किया गया है।
सीएम योगी आदित्यनाथ ने रात में मीटिंग कर मजदूर हित में यह बड़ा फैसला लिया है। बस का इंतजाम नोएडा, गाजियाबाद, अलीगढ़ समेत कई अन्य जिलों में किया गया, जहाँ से मजदूर अपने घरों को जा सकेंगे। मुख्यमंत्री के इस बड़े फैसले से उत्तर प्रदेश और बिहार के लोग अपने-अपने घर तक पहुँच सकेंगे।
रहमानिया मस्जिद से एक किलोमीटर के दायरे में कर्फ्यू। क्योंकि 12 मार्च को ओमान से आया कोरोना पॉजिटिव व्यक्ति 24 मार्च तक इसी मस्जिद में नमाज पढ़ने आता रहा जबकि उसे खाँसी बुखार के लक्षण थे। यह खुद 200 से ज्यादा लोगों से मिला है। और इसके परिवार के 32 लोग हजारों लोगों से!
प्रेस कॉन्फ्रेन्स में धार्मिक स्थलों पर भीड़ न लगाने के लिए जारी दिशा-निर्देश, कम्युनिटी किचन शुरू करना, फूड पैकेट्स का वितरण आदि सरकारी पहलों की विस्तार से जानकारी दी गई।
टेनिस खिलाड़ी रोजर फेडरर और उनकी पत्नी मिर्का ने कोरोना वायरस महामारी से लड़ने के लिए करीब 8 करोड़ रुपए की धनराशि दान की है। जबकि पुर्तगाल के मशहूर फुटबॉल खिलाड़ी क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने 8.28 करोड़ दान दिए और लियोनल मेसी ने भी 8 करोड़ रुपए दान दिए हैं।
भारत में कोरोना संक्रमितों के आँकड़ों का विश्लेषण करने पर एक चौंकाने वाले बात सामने आती है। 300+ संक्रमण के मामले उन लोगों के हैं जिनका प्रत्यक्ष रूप से विदेश यात्रा का इतिहास रहा है। इनमें से भी 142 पॉजिटिव मामले उन लोगों के हैं, जो मध्य-पूर्व के इस्लामी मुल्कों से लौटे हैं।
खुफिया सूत्रों ने बताया है कि आतंकियों के निशाने पर काबुल स्थित भारतीय दूतावास था। लेकिन, वहॉं सुरक्षा बेहद सख्त होने के कारण वे अपने मकसद में कामयाब नहीं हो पाए और गुरुद्वारे पर हमला कर दिया।
राहत पैकेज की तुलना से पहले यह ध्यान रखना जरूरी है कि अन्य देशों ने व्यापक स्तर पर नुकसान देख ऐसी घोषणा की है। वहीं भारत ने स्थिति हाथ से निकलने से पहले एक कल्याणकारी पैकेज की घोषणा की है। आगे मुमकिन है कि सरकार अर्थव्यवस्था को हुए नुकसान की भरपाई के लिए किसी पैकेज की घोषणा करे।
एक बच्ची जो 10 दिन बाद अपना चौथा जन्मदिन मनाने वाली थी, उसे भी आतंकियों ने मौत के घाट उतार दिया। उस पिता पर क्या गुजरी होगी जिसके ऊपर उसकी नन्ही बेटी का शव आकर गिरा होगा।
चीन ने यह कदम ऐसे वक्त में उठाया है जब कहा जा रहा है कि उसने इस महामारी पर नियंत्रण पा लिया है। वुहान से कोरोना का संक्रमण शुरू हुआ था और चीन पर शुरुआत में दुनिया से जानकारी छिपाने के गंभीर आरोप हैं।