जब 24 मार्च को लॉकडाउन की घोषणा हुई तो पूरा देश उपलब्ध संसाधनों के साथ वायरस को नियंत्रित करने का प्रयास कर रहा था। लेकिन AAP के लोग क्या कर रहे थे? वो #ShameOnNitishKumar को ट्रेंड करवा रहे थे। वो प्रवासी मजदूरों के पलायन का लाइव स्ट्रीमिंग कर रहे थे।
बिहार के मंत्री संजय कुमार झा ने बताया कि दूसरे राज्यों से पहुँचने वाले सभी प्रवासी मजदूरों को 14 दिन तक बॉर्डर पर राहत केंद्रों में क्वारंटाइन किया जाएगा। क्वारंटाइन सेंटर में सभी को खाने-पीने के साथ जरूरी सुविधाएँ दी जाएँगी।
"आपको होने वाली असुविधा और कठिनाई के लिए मैं क्षमा माँगता हूँ। बीमारी और उसके प्रकोप से शुरुआत में ही निपटना पड़ता है, नहीं तो बाद में यह असाध्य हो जाता है। भारत आज यही कर रहा है।"
चड्ढा ने ट्वीट किया था कि उन्हें सूत्रों से पता चला है कि यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दिल्ली से जाने वाले मजदूरों को दौड़ा-दौड़ा कर पिटवा रहे हैं। बकौल चड्ढा, सीएम योगी ने मजदूरों से पूछा कि वो दिल्ली क्यों गए थे और साथ ही धमकाया कि उन्हें आगे से दिल्ली नहीं जाने दिया जाएगा।
कई लोगों ने पूछा कि दिल्ली में तो राजस्थान और हरियाणा के भी लोग रहते हैं, उन्हें अपने घरों में क्यों नहीं भेजा गया? कई लोगों ने पूछा कि दिल्ली से सिर्फ बिहारी और यूपी के मजदूर ही क्यों पलायन कर रहे हैं, जबकि रोहिंग्या और अन्य घुसपैठिए सुरक्षित हैं?
राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में 15 मंत्रियों की एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया गया है। लॉकडाउन के दौरान आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित करना इस समिति की जिम्मेदारी होगी। देश के सभी जनपदों को कवर करते हुए प्रत्येक कैबिनेट मंत्री को न्यूनतम 15 जनपदों की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
घर पहुॅंचे यूपी-बिहार के लोगों का कहना है कि दिल्ली सरकार ने उनके घरों का बिजली-पानी कनेक्शन काट दिया। उन्हें गुमराह किया। अब आप विधायक राघव चड्ढा पर फर्जी खबर फैलाने का आरोप लगा है और उन पर कार्रवाई की बात कही गई है।
किसी भी कॉर्पोरेट समूह की ओर से कोरोना के ख़िलाफ़ लड़ाई में ये सबसे बड़ी आर्थिक मदद है। रतन टाटा ने कहा है कि प्राथमिकता इमरजेंसी सेवाओं में तेजी और संसाधन जुटाने पर होनी चाहिए। इससे पहले रिलायंस ने मुंबई में देश का पहला 'कोरोना वायरस डेडिकेटेड अस्पताल' कुछ ही दिनों में बना दिया था।
"देशवासियों से मेरी अपील है कि वह कोरोना वायरस के खिलाफ युद्ध में PM-CARES फंड में अंशदान के लिए आगे आएँ। इस फंड का उपयोग आगे भी आपदा की स्थिति में किया जा सकता है।"
मोदी सरकार को बदनाम करने के लिए क्विंट ने गिरधर ज्ञानी को डॉक्टर बताया। टास्क फ़ोर्स का संयोजक तक बता डाला। जबकि वे ना मेडिकल प्रैक्टिस करते हैं और ना कोई महामारी विशेषज्ञ हैं। यहॉं तक कि ऐसा कोई टास्क फोर्स भी नहीं है जिसका वामपंथी वेबसाइट ने दावा किया।