जब पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस बाल ठाकरे की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि दने पहुँचे तो शिवसेना कार्यकर्ताओं ने फडणवीस के सामने 'सरकार किसकी, शिवसेना की' जैसे नारे लगाए। एनसीपी नेता नवाब मलिक ने फडणवीस को हारा हुआ जनरल करार दिया।
महबूबा ने पूछा कि सिविल सर्विस की परीक्षा में शीर्ष स्थान पाने के बाद जिस शाह फैसल को राज्य का रोल मॉडल बताया गया था, आज उन्हें इस तरह अपमानित क्यों किया जा रहा है? उनके साथ दुर्वव्यवहार क्यों हो रहा है?
मैंने अमित भाई (भाजपा अध्यक्ष अमित शाह) से कहा कि अगर वह मध्यस्थता करते हैं तो एक रास्ता निकाला जा सकता है, जिस पर उन्होंने जवाब दिया कि चिंता मत करो, सब ठीक हो जाएगा। भाजपा और शिवसेना मिलकर सरकार बनाएँगे।"
बोर्ड ने मस्जिद के लिए 5 एकड़ जमीन लेने से इनकार किया है। कहा है कि इस्लमिक व्यवस्था में एक बार जहाँ मस्जिद बन गई, वहाँ मस्जिद ही रहती है। साथ ही रामलला को 'ज्यूरिस्टिक पर्सन' मानने पर भी सवाल उठाए हैं।
श्रीलंका में मुस्लिम संगठनों के आरोपों के बीच बौद्ध राष्ट्र्वादी गोटाभाया की जीत अहम है। इससे पता चलता है कि द्वीपीय देश अभी ईस्टर बम ब्लास्ट को भूला नहीं है और राइट विंग की तरफ़ उनका झुकाव पहले से काफ़ी ज्यादा बढ़ा है।
शी जिनपिंग का मानना है कि इस्लामिक कट्टरता के आगोश में आते ही व्यक्ति होश खो बैठता है। चाहे वह स्त्री हो या पुरुष। ऐसे लोग पलक झपकते किसी की हत्या कर सकते हैं। शी के अनुसार विकास इस समस्या का समाधान नहीं है।
जिसकी परवरिश एक तय तरीके से हुई है, वो अचानक से उस संकाय में प्रोफेसर बना दिया जाए जो पूरे विश्व में हिन्दू धर्म और आस्था पर उठते सवालों या शंकाओं का निवारण करता है? आप मुझे एक उदाहरण दिखा दीजिए कि किसी इस्लामी संस्थान में हिन्दू प्रोफेसर शरीयत पढ़ाकर मौलवी तैयार कर रहा हो!
बाल ठाकरे की पुण्यतिथि पर सरकार बनाने का उद्धव का सपना नहीं हुआ पूरा। सोनिया गॉंधी के रुख ने बढ़ाई परेशानी। पुणे में पार्टी नेताओं से चर्चा कर आगे की रणनीति बनाएँगे शरद पवार।
विधायक राजा सिंह ने 'ओवैसी, भारत छोड़ो' का नारा देते हुए कहा कि उनकी तरह मानसिकता रखने वाले सभी लोगों को देश से बाहर जाना चाहिए। कई अन्य लोगों ने भी उनका समर्थन किया। इसके बाद ट्विटर पर 'ओवैसी भारत छोड़ो' का ट्रेंड भी चलने लगा।
दिल्ली का जामा मस्जिद, जिसे शाहजहाँ ने बनवाया था। औरंगज़ेब के आदेश से मंदिरों से लूटी गईं हिन्दू देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को जामा मस्जिद की सीढ़ियों के नीचे दफ़न कर दिया गया था। इसका सबूत है 'मसीर-ई-आलमगीरी', जो औरंगज़ेब की जीवनी है। पढ़िए क्या लिखा है इसमें?