ये भीड़ इतनी जल्दी कैसे आती है, कहाँ हमला करती है और किधर गायब हो जाती है? क्या पुलिस ने नहीं देखा इन्हें? क्या हॉस्पिटल में सुरक्षा के लिए पुलिस आदि नहीं होती या फिर इस पहचानहीन भीड़ का सामूहिक चेहरा ममता की पुलिस ने पहचान लिया और उन्हें वो करने दिया जो वो कर गए?
अब तो AltNews को कायदे से मेमे और अकबर-बीरबल के चुटकुलों के फैक्ट चेक करने के व्यवसाय में आ जाना चाहिए क्योंकि गंभीर और अतिसंवेदनशील मसले में अजेंडे के हिसाब से SSP स्तर के अफसरों के बयान को ट्विस्ट करके, फैक्ट चेक के नाम पर परोसना सर्वथा गलत है।
पथराव शुरू हुआ, डॉक्टरों पर जानलेवा हमले हुए तो पुलिस ने क्यों नहीं रोका? क्यों डॉक्टरों की जान बचाने के लिए दंगाईयों पर नियंत्रण के लिए कड़ी कार्रवाई नहीं की गई? जवाब हम सब को पता है।
मीडिया संस्थानों को स्पष्ट करना चाहिए कि उनके नए नियम के मुताबिक़ अगर कोई पत्रकार सड़क किनारे मजदूरी कर रहे किसी मजदूर से इंटरव्यू लेने जाता है तो वह क्या करेगा और क्या नहीं - हथौड़ा उठाएगा या फावड़ा? सीमा पर गोलीबारी कवर करने जाने वाले पत्रकार भी लगे हाथ दो-चार गोलियाँ दागेंगे क्या?
वायुसेना ने वीरगति को प्राप्त सभी यात्रियों को श्रद्धांजलि दी है। इस विमान में जीएम चार्ल्स, एच विनोद, आर थापा, ए तंवर, एस मोहंती, एमके गर्ग, केके मिश्रा, अनूप कुमार, शेरिन, एसके सिंह, पंकज, पुताली और राजेश कुमार सवार थे। ऑपइंडिया की ओर से सभी जवानों को श्रद्धांजलि!
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने कोलकाता के राजकीय SSKM अस्पताल का दौरा किया, जहाँ उन्होंने आंदोलनरत जूनियर डॉक्टरों को 4 घंटे के भीतर काम पर लौटने के लिए कहा। लेकिन, डॉक्टरों ने उनके समक्ष ही ‘हम न्याय चाहते हैं’ के नारे लगा दिए।
फैक्ट-चेक के बाद यह पता चला कि इस वीडियो में लोग किसी भोजपुरी गाने पर नहीं झूम रहे हैं बल्कि ओरिजिनल साउंड हटा कर भोजपुरी गाने को इसमें अलग से एडिट कर के डाला गया है। और हाँ, यह वीडियो लन्दन का है भी नहीं।
"चर्च के पादरियों ने हमें बहलाया-फुसलाया और धर्म परिवर्तन कराने को कहा। पादरियों ने कई अन्य प्रकार के प्रलोभन देते हुए हमारी बीमारी ठीक कर देने का भी आश्वासन दिया था। पादरियों ने हमें बताया कि ईसाई चंगाई सभा में जाने से बीमारियाँ ठीक हो जाती हैं।"
नीना व्यास जी के विचार में अगर कुछ गौरक्षक अगर कानून अपने हाथ में लेते हैं तो उससे किसी दुकानदार की लस्सी के पैसे माँगने पर "योगी-मोदी से हम नहीं डरते" दहाड़ कर हत्या कर देना, किसी मासूम बच्ची को मार डालना या ऐसी ही किसी भी घटना को अंजाम देने का औचित्य बन सकता है?