Wednesday, May 25, 2022
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AltNews की नई करतूत: अलीगढ़ मामले में SSP के नाम से छापे झूठे बयान

AltNews ने शायद अपने प्रोपेगेंडा और अपनी धूर्तता से विवश होकर सोशल मीडिया फैक्ट चेक के नाम पर इस पूरे मामले की गंभीरता को कम करके दिखाने की कोशिश की, क्योंकि यहाँ आरोपित दूसरे मजहब से थे और यह घटना रमजान के पाक महीने में हुई थी।

स्वघोषित फैक्ट चेकिंग पोर्टल AltNews ने अलीगढ़ में ढाई साल की मासूम बच्ची के जघन्य मर्डर केस में न सिर्फ मुख्य आरोपित ज़ाहिद, असलम के पापों को धुलने की कोशिश की, बल्कि अपने इस मुहीम को आगे बढ़ाने के लिए अलीगढ़ के एसएसपी आकाश कुल्हारी के स्टेटमेंट को भी गलत तरीके से ट्विस्ट देकर प्रस्तुत किया।

स्वघोषित फैक्ट-चेकर AltNews ने, जो कि खालीपन में चुटकुलों और मीम्स का भी फैक्ट चेक कर डालता है, ज़ाहिद और असलम के अपराधों को धोने-सुखाने के कुछ ज़्यादा तेजी से प्रयास किए और क्लेम कर दिया कि कोई रेप नहीं हुआ है। इसे साबित करने का आधार इन्होनें यह निकाला कि ऐसा उत्तर-प्रदेश पुलिस के कुछ अधिकारियों का वैसा कहना है।

6 जून को प्रकाशित अपने रिपोर्ट में AltNews ने SSP आकाश कुल्हारी को कोट करते हुए लिखा-

“एसएसपी अलीगढ़ के मुताबिक पीड़िता का रेप नहीं हुआ है, पोस्ट मार्टम रिपोर्ट के अनुसार गला घोंटने से उसकी हत्या हुई है। सोशल मीडिया पर जो दावा किया जा रहा है कि उसकी आँखें बाहर आ गई थी और उसकी बाँह उखड़ी हुई थी, भी गलत है। उसके शरीर पर एसिड डाला गया था यह भी गलत है, ऐसा कुछ नहीं हुआ था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट पीड़िता के परिवार से भी साझा किया गया है।”

ऑपइंडिया ने घटना के बाद से ही एसएसपी से बात करने की कोशिश की और आज जब उनसे संपर्क हुआ तो AltNews के झूठ की कई और परतें खुल गई। हालाँकि, ऑपइंडिया ने पहले भी कई बार AltNews को बेनकाब किया है और AltNews के अलीगढ़ वाली रिपोर्ट और फैक्ट चेक का भी हमने फैक्ट चेक कर उनके अजेंडे का खुलासा किया था। इसी घटना के सम्बन्ध में जब ऑपइंडिया ने एसएसपी आकाश कुल्हारी से बात की तो उन्होंने साफ कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में रेप हुआ या नहीं ऐसा कोई दावा नहीं किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस ने अभी दो हॉस्पिटल को पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट भेजी है, इस रिपोर्ट पर अपनी विस्तृत रिपोर्ट देने के लिए।

ऑपइंडिया ने एसएसपी आकाश कुल्हारी से यह भी पूछा कि क्या उन्होंने AltNews को कोई ऐसा स्टेटमेंट दिया था जिसमें यह दावा हो कि पीड़िता बच्ची की आँख बाहर नहीं निकली थी या उसकी बाँह उखड़ी हुई नहीं थी? एसएसपी कुल्हारी ने ऐसे किसी भी बयान से इनकार किया जो उनके नाम से AltNews ने ऊपर कोट किया है।

(नीचे दिए गए यूट्यूब लिंक पर आप एसएसपी आकाश कुल्हारी से हमारी बातचीत सुन सकते हैं)

ऑपइंडिया: सर, There is a website called AltNews where they have quoted you… कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में लिखा है कि रेप नहीं हुआ है ?

SSP कुल्हारी : नहीं, ऐसा मैंने कुछ नहीं कहा

ऑपइंडिया: विक्टिम की जो आँखे gouged की थी, amputation of right arm क्या ऐसा नहीं है कुछ पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में ?

SSP कुल्हारी: रिपोर्ट में ऐसा लिखा हुआ है

ऑपइंडिया : तो क्या उन्होंने आपको गलत कोट किया ?

SSP कुल्हारी : Yes, obviously. I think so.

एसएसपी कुल्हारी ने इस घटना के सम्बन्ध में यह भी कहा कि अगले 3-4 दिन में नए अपडेट्स आएँगे।

यहाँ यह साफ देखा जा सकता है कि कैसे AltNews ने ज़ाहिद और असलम के अपराध को कम करके दिखाने के लिए, स्वघोषित फैक्ट चेकर होते हुए भी तथ्यों से छेड़छाड़ की। झूठ का पर्दाफाश करने का झूठा दावा करने वाली AltNews जैसी वेबसाइट खुद ही एसएसपी के नाम से भी झूठ परोसती नज़र आ रही है।

AltNews ने यहाँ तक दावा कर दिया था कि Opindia की इस घटना पर पहली रिपोर्ट जिसमें बच्ची के शरीर के क्षत होने और बर्बरता की बात कही गई थी ‘फेक’ है। यहाँ उनका पूरा दावा इस आधार पर था कि आँख बाहर नहीं आई थी। जिसके बारे में हमनें डॉक्टर से बात की जिन्हे हमने पोस्टमार्टम रिपोर्ट दिखाया था। उन्होंने साफ कहा और यहाँ तक कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी यही कह रही है कि आँखे भी क्षतिग्रस्त थी।


अलीगढ़ मामले में AltNews की रिपोर्ट से


AltNews के रिपोर्ट जिसका टाइटल था, “Murder of a child in Aligarh: Fact-checking social media claims”, जिसमें AltNews ने दावा किया था कि OpIndia ने ‘झूठा दावा’ किया है कि पीड़िता की आँख बाहर आ गई थी। जिसके लिए झूठ इम्प्लान्ट करने का ठेका लेने वाले फैक्ट चेकर ने एसएसपी आकाश कुल्हारी के नाम से कुछ दावे भी किए जबकि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में साफ मेंशन है कि ‘eye tissue absent, orbital socket intact’.


अलीगढ़ मामले की पोस्ट मार्टम रिपोर्ट (image courtesy: journalist @anjanaomkashyap on Twitter)

ऑपइंडिया ने इस पोस्टमार्टम रिपोर्ट को कई डॉक्टरों को दिखाया। उन्होंने बताया कि बच्ची की मौत उसे लगने वाली कई गंभीर चोटों की वजह से हुई है। एक डॉक्टर ने यह भी स्पष्ट किया, “जख्म इतने गहरे और घातक हैं कि उससे शॉक और मौत निश्चित है। शॉक की पुष्टि वेसल्स के कोलैप्स होने से हो जाती है (ऐंटेमार्टम साइन) मृत्यु से पहले बहुत ज़्यादा ब्लड लॉस भी हुआ था।”

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर डॉक्टर्स का कहना है, “सबसे महत्पूर्ण बात यहाँ यह है कि उस बच्ची के गर्भाशय और जेनिटल सहित एब्डॉमिनल ऑर्गन भी गायब हैं। जो इस बात का सबूत है कि उसे वीभत्स तरीके से टार्चर किया गया था जिससे उसकी शरीर से अत्यधिक रक्तस्राव हुआ हो और जो उसके ब्लड वेसेल्स के कोलैप्स होने की वजह भी हो। बाकी दूसरे घातक जख्म, जैसे पाँव का घुटने के नीचे से फैक्चर होना और हाथ की एक हड्डी ह्यूमरस का उखड़ जाना, का वर्णन ही बर्बरता की पूरी कहानी कह रहा है। रेप की पुष्टि के लिए हालाँकि वेजाइनल स्वैब जाँच के लिए भेजा गया है लेकिन बॉडी डिकम्पोज होने की वजह से शायद ही इस जाँच के लिए उपयोगी हो। वैसे यहाँ यह जानना ज़रूरी है कि स्वैब का परिणाम नेगेटिव आना सेक्सुअल एक्ट के न होने का सबूत होता है।”

डॉक्टर ने आगे कहा, “उसकी दाहिने भुजा की हड्डी का उखड़ना और बाएँ पाँव का फ्रैक्चर निश्चित रूप से उसके मौत के पहले की घटना है। उसके एब्डॉमिनल अंगों का गायब होना भी उसके साथ हुई बर्बरता का सबूत है।”

यहाँ गौरतलब है कि ऐसे स्वघोषित एक्टिविस्ट के लिए पुलिस का स्टेटमेंट ही अंतिम सत्य की तरह है क्योंकि यह इनके एजेंडे और नैरेटिव को आगे बढ़ा रहा है। यदि इनके एजेंडे को शूट नहीं कर रहा है तो यह गिरोह कोर्ट के निर्णय को भी मानने से इनकार कर देगा। AltNews के इसी तर्क से सवाल यहाँ यह भी है कि क्या AltNews के संस्थापक इशरत जहाँ के मामले में यह स्वीकार सकते हैं कि वह एक आतंकी थी क्योंकि कई पुलिस वालों ने ऐसा कहा है। हम सब को उनका जवाब पता है।

दूसरे आरोपित असलम को भी AltNews ने बचाने की कोशिश की थी, जिस पर पहले से अपनी बेटी और एक और बच्ची के साथ रेप का आरोप है। उसे पहले भी पॉक्सो के तहत गिरफ्तार किया जा चुका है।

हालाँकि, AltNews ने सोशल मीडिया पर लम्बी फजीयत के बाद और पोस्ट मॉर्टम रिपोर्ट से उसके हर झूठ की कलई खुलने के बाद, AltNews ने अपनी ऑरिजिनल रिपोर्ट को अपडेट किया, यह कहते हुए कि हमने एक बार फिर एसएसपी आकाश कुल्हारी से संपर्क किया, जिन्होंने कन्फर्म किया कि हाँ, बच्ची की बाँह उखड़ी हुई थी। सिर्फ इतना जिक्र कर भी AltNews ने उस क्रूरता से इनकार ही किया जिसका जिक्र पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में है।

अब यहाँ आश्चर्य की बात यह है कि जब एसएसपी खुद ही इनकार कर रहे हैं तो फैक्ट चेकर ने जब जज बनकर पूरी घटना की गंभीरता को कम करना चाहा और सारे निष्कर्ष बिना किसी परिणाम के थोप दिए तो आखिर वह अपने उस निर्णय तक पहुँचे कैसे? ना सही स्टेटमेंट और न ही पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट? क्या महज अजेंडा सेटिंग ही नहीं था वह फैक्ट चेक क्योंकि यहाँ आरोपित दूसरे मजहब है और पीड़िता एक हिन्दू?

इस पूरे प्रकरण से कई और सवाल उभर कर सामने आते हैं–

  1. AltNews ने सोशल मीडिया पर अफवाहों के फैक्टचेक के लिए पुलिस के बयान पर ज़्यादा यकीन किया बनिस्बत पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के।
  2. AltNews अपने एक पॉइंट को सिद्ध करने के लिए पुलिस अधिकारी का ट्विस्टेड बयान का प्रयोग किया न कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का।
  3. AltNews ने यहाँ मात्र अपने अजेंडा सेटिंग के लिए तथ्यों की जगह अपनी कल्पनाओं और झूठ का प्रयोग कर आरोपितों के अपराध को कम कर दिखाना चाहा।
  4. AltNews को यह भी नहीं पता कि प्राइमरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट क्या होती है। जिसमे इस बात का जिक्र नहीं होता कि रेप हुआ है या नहीं। वास्तव में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट या ऑटोप्सी केवल यह पता करने के लिए होता है कि मौत का कारण क्या था और जख्मों की विस्तृत जाँच पड़ताल की जाती है जो मृत्यु की वजह बने। ऑपइंडिया ने जब इस सम्बन्ध में डॉक्टर से बात की तो उन्होंने बताया कि रेप की पुष्टि वजाइनल स्वैब की रिपोर्ट आने के बाद ही होती है। अलीगढ़ मामले में भी अभी तक रिपोर्ट का इंतज़ार है जिसमें आमतौर पर 1 सप्ताह से 1 महीने तक का भी समय लग सकता है। प्राइमरी रिपोर्ट वास्तव में अंतिम निष्कर्ष नहीं होती।
  5. AltNews ने शायद अपने प्रोपेगेंडा और अपनी धूर्तता से विवश होकर सोशल मीडिया फैक्ट चेक के नाम पर इस पूरे मामले की गंभीरता को कम करके दिखाने की कोशिश की, क्योंकि यहाँ आरोपित दूसरे विशेष मजहब से थे और यह घटना रमजान के पाक महीने में हुई थी।

इतनी सारी विसंगतियों को देखते हुए अब तो AltNews को कायदे से मेमे चेक करने के व्यवसाय में आ जाना चाहिए क्योंकि गंभीर और अतिसंवेदनशील मसले में फैक्ट चेक के नाम पर टाँग घुसा कर पाठकों को गुमराह करना भी गुनाह है। लेकिन, क्या करें AltNews! अजेंडा और प्रोपेगेंडा भी तो कोई चीज होती है और उसके बल जब फैक्ट चेक एक धंधा बन जाए तो सत्य के प्रति जिम्मेदारी हमारी-आपकी और बढ़ जाती है। ऑपइंडिया अपनी सत्य के प्रति प्रतिबद्धता हर बार ऐसे छद्म स्वघोषित फैक्ट चेकरों को बेनकाब कर करेगी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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