श्रीवास्तव ने कार्ति चिदंबरम पर चुनावी धोखाधड़ी का भी आरोप लगाया और कहा कि उनका शपथपत्र झूठा है। उन्होंने वह संपत्ति तो घोषित ही नहीं की है जो आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय ने छापा मारकर सामने लाई थी।
फ़िल्म को समीक्षकों के एक गिरोह ने रिव्यु करने से या तो मना कर दिया या नेगेटिव रिव्यु दिया। मीडिया गिरोह ने इसे प्रोपेगंडा बताया। बस 250 स्क्रीन्स में रिलीज होने वाली एक छोटी सी फ़िल्म से इतना ज्यादा भय? इसका अर्थ है कि इसके निर्माण के पीछे का मोटिव सफ़ल रहा।
बहनो! यह सही वक्त है चोट करने का। मस्जिद में पल रही मर्दवादी सोच पर प्रहार करने का। एक साथ उठ खड़ी हो, हजारों किलोमीटर लंबी ह्यूमन चेन बनाओ। अल्लाह ने चाहा तो सुप्रीम कोर्ट भी आपके हक में फैसला सुनाएगा!
प्रकाश राज ने नवंबर 2017 में अभिनेताओं के राजनीति में आने को देश का दुर्भाग्य बताते हुए कहा था कि वो अभिनेताओं के राजनीति में आने को सही नहीं मानते। आज वो ख़ुद यू-टर्न लेकर चुनाव लड़ रहे हैं। उन्होंने अपने फ़िल्मी किरदारों से शायद बहुत कुछ सीखा है!
CM योगी ने अपने जवाब में स्पष्ट किया है कि उन्होंने अपने भाषण (जिसके कारण उन पर साम्प्रदायिक होने का आरोप लगा) में केवल छद्म धर्मनिरपेक्षता को उजागर किया था, धर्म के नाम पर वोट नहीं माँगा था। अपने जवाब में उन्होंने यह भी लिखा कि हर नागरिक को अपने धर्म व आस्था की स्वतंत्रता है।
हर आतंकी और उसका संगठन एक ही नारा लेकर निकलता है, काले झंडे पर सफ़ेद रंग से लिखा वाक्य क्या है, सबको पता है। बोल नहीं सकते, वरना 'बिगट' और 'कम्यूनल' होने का ठप्पा तुरंत लग जाएगा। हमने पीढ़ियाँ निकाल दीं कहते हुए कि आतंक का कोई मज़हब नहीं होता।
आज़म ख़ान ने यह विवादित बयान विदिशा में दिया। मध्य प्रदेश के विदिशा में दिवंगत सांसद मुनव्वर सलीम के अंतिम क्रिया-कर्म से लौटते वक़्त आज़म ने ऐसा कहा। जया प्रदा के बारे में सवाल पूछने पर आज़म ख़ान भड़क गए। जया प्रदा ने भी आज़म ख़ान पर पलटवार किया है।
मुख्यधारा की मीडिया ने हमेशा की तरह मौन व्रत ले रखा है। किसी-किसी मामले में बोलना पड़ भी रहा है तो एक-एक शब्द इतनी कंजूसी से निकल रहा है कि मानों शोक जताने पर भी आचार संहिता लगी हुई है। न अब कहीं असहिष्णुता फ़ैल रही है, न ही प्राइम-टाइम डिबेट चल रहा है।
डीएम से जूता साफ़ करवाने वाले 'बेशरम' आज़म ख़ान को अपना तब का बयान याद करना चाहिए जब एक डीएसपी ने मायावती की जूती साफ़ की थी। वैसे, शून्य लोकसभा सीटों वाली माया की जूती साफ़ करने में तो आजकल पूरी समाजवादी पार्टी ही लगी हुई है। शायद अल्लाह की अब यही मर्जी है।