धर्म और संस्कृति

अहमदाबाद का नाम कर्णावती करने की माँग फिर हुई तेज: आशावल से कर्णदेव सोलंकी की कर्णावती फिर अहमद शाह पर नामकरण, जानें- इस शहर...

अहमदाबाद से कर्णावती नाम बदलने की माँग के साथ शहर का इतिहास, पहचान और पुराने नामों की कहानी फिर चर्चा में है।

इस्लामिक देश ईरान में नहीं मिटी हिंदू आस्था, पढ़ें- बंदर अब्बास के 134 साल पुराने भगवान विष्णु के मंदिर की दास्ताँ

ईरान के बंदर अब्बास में एक अनोखा हिंदू मंदिर भी स्थित है। इस मंदिर का निर्माण 19वीं सदी के अंतिम वर्षों में, लगभग 1892 के आसपास हुआ था।

पवनपुत्र का नाम आते ही क्यों होती है संवाद, संयम और साहस की बात? वाल्मीकि रामायण के प्रसंग से जानिए कैसे हैं रामदूत हनुमान...

हनुमान जयंती उस अद्वितीय व्यक्तित्व को समझने का अवसर है, जिसमें बल, बुद्धि, विनम्रता और संवाद की असाधारण क्षमता एक साथ समाहित है।

साधना से मर्यादा तक: चैत्र नवरात्र और रामनवमी की शक्ति संस्कृति

जिस सभ्यता की कालगणना शक्ति साधना से आरंभ होती है, विडंबना है कि उसी समाज को वैचारिक आक्रांताओं ने अहिंसा की विवशता का पाठ पढ़ा दिया।

सदियों पुरानी परंपरा जब मंदिरों से निकल गाँव में जुटते हैं ‘भगवान’, लगती है देव सभा: जानें- ओडिशा के ‘पंचू डोला मेला’ का इतिहास

ओडिशा की मशहूर पंचू डोला मेला भुवनेश्वर से 15 किलोमीटर दूर हरिराजपुर गाँव की महान परंपरा है। इसमें सभी गाँव के देवता एकत्रित होते हैं और होली की तरह का त्यौहार मनाया जाता है।

5000 साल पुराना इतिहास, जमीन में धँसती जा रही प्रतिमा: जानें- राजस्थान में स्थित दुनिया के इकलौते ‘विभीषण मंदिर’ की कहानी, जिसे वक्फ संपत्ति...

राजस्थान के कोटा में स्थित विभीषण मंदिर को दुनिया का इकलौता मंदिर माना जाता है। यह मंदिर लगभग पाँच हजार वर्ष पुराना बताया जाता है।

होली स्पेशल में हिरण्यकश्यप, रावण और शिशुपाल की कथा: वैकुंठ लोक के द्वारपाल जय-विजय को क्यों 3 जन्म बनना पड़ा असुर? भगवान ने दिलाई...

यह कहानी वैकुंठ लोक की है, जो भगवान विष्णु का निवास स्थान है। वहाँ ब्रह्मा के मानस पुत्र सनकादिक ऋषि, भगवान विष्णु से मिलने बैकुंठ लोक गए।

होली: भारतीय सभ्यता की आत्मा और आधुनिक जीवन में प्रासंगिकता

भारत ने दुनिया को एक विचार दिया है: जीवन उत्सव है। होली उस विचार की सबसे रंगीन, सबसे खुली, सबसे निर्भीक अभिव्यक्ति है।

गिरनार की गोद में शिवत्व का साक्षात्कार: भावनाथ मेले में भीड़ के बीच आत्मिक शांति की अनोखी यात्रा, जानिए मेरा अनुभव

गुजरात के जूनागढ़ के गिरनार पर्वत की तलहटी में महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर भावनाथ महादेव मंदिर में प्रतिवर्ष एक अनूठा मेला लगता है।

अलौकिक प्रकाश, अदृश्य साधकों का वास और दिव्य अनुभव: जानिए गुजरात का गिरनार पर्वत क्यों है हिंदुओं के लिए खास, महाशिवरात्रि पर महादेव करने...

गिरनार का रहस्य चमत्कारों की कहानी नहीं, बल्कि आत्म-साक्षात्कार की यात्रा है। यहाँ सिद्धि का अर्थ किसी अलौकिक शक्ति से नहीं, बल्कि अपने भीतर की पहचान से है।

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