धर्म और संस्कृति

धर्म-संस्कृति से जुड़ी ख़बरें और विचार

ध्वनि प्रदूषण के बहाने सबरीमाला की तीर्थयात्रा खत्म करने की साज़िश

असली दिक्कत ‘ध्वनि प्रदूषण’ नहीं, हिन्दू भक्त हैं: मंदिर ‘इकोसिस्टम’ ध्वस्त करने की साज़िश

'ज़िंदा कौमें पाँच साल इंतज़ार नहीं करतीं" अगर हिन्दू आत्मसात कर लें, अपना उद्धार खुद, और आज से ही, अपने जीते-जी करने की कमर कस लें तो बड़ी कृपा होगी।
लेख का मकसद हिंसा को न्यायपूर्ण ठहराने की कोशिश करना नहीं, उसकी जड़ का अन्वेषण है। प्रतीकात्मक चित्र

बौद्ध, जैन, सिख, यहूदी, पारसी: इन्हें कभी ‘इनटॉलेरेंस’ की पीड़ा क्यों नहीं होती?

मुसलमानों और ईसाईयों को आत्म-विवेचन की जरूरत है- 'इनटॉलेरेंस' के लिए जिम्मेदार 'भगवाकरण' है, या हिन्दुओं को आक्रामकता अख्तियार करने के लिए मजबूर करने वाले उनके आचरण।
केदारनाथ

हिमालये तु केदारं: एक नजर बाबा केदार तक के आध्यात्मिक सफर पर

शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक केदारनाथ ज्योतिर्लिंग पर्वतराज हिमालय की केदार नामक शिखा पर दुर्गम रूप में स्थित है। समुद्र की सतह से करीब साढ़े 12 हजार फीट की ऊँचाई पर केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है। बारह ज्योतिर्लिंगों में केदारनाथ धाम का सर्वोच्य स्थान है। साथ ही यह पंच केदार में से एक है।
तमिलनाडु में द्रविड़ आँदोलन है ईसाईयत को लाने और हिंदुत्व को भगाने का दरवाज़ा

हिन्दू धर्म को लील रहे मिशनरी: तमिलनाडु में मतांतरण का ‘धंधा’, स्वराज्य की रिपोर्ट

तमिलनाडु में हिन्दू धर्म के खिलाफ बन रहे इस चक्रव्यूह के बारे में तो कम-से-कम एक सांस्कृतिक वार्तालाप शुरू किए जाने की तत्काल आवश्यकता है।
हिन्दू धर्म और प्रतीकों का अपमान फैशन है क्योंकि कोई कुछ कहता नहीं

Netflix पर आई है ‘लैला’, निशाने पर हैं हिन्दू जिन्हें दिखाया गया है तालिबान की तरह

वो पीढ़ी जिसने जब से होश संभाला है, या राजनैतिक रूप से जागरुक हुए हैं, उन्होंने भारत का इतिहास भी ढंग से नहीं पढ़ा, उनके लिए ऐसे सीरिज़ ही अंतिम सत्य हो जाते हैं। उनके लिए यह विश्वास करना आसान हो जाता है कि अगर इस्लामी आतंक है तो हिन्दू टेरर क्यों नहीं हो सकता।
अमरनाथ यात्रा, भारतीय रेलवे

अमरनाथ यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं को रेलवे का बड़ा तोहफ़ा, सुरक्षा के भी कड़े इंतज़ाम

"अमरनाथ यात्रियों को रेलवे का तोहफ़ा: विश्व प्रसिद्ध तीर्थ बाबा अमरनाथ के दर्शन हेतु जाने वाले श्रद्धालुओं के लिये रेलवे विशेष ट्रेन चलाने जा रहा है। यह ट्रेन 1 जुलाई से शुरु होगी तथा सप्ताह में दो बार आनंद विहार, दिल्ली से उधमपुर तक चलेगी।"

हर केंद्रीय संस्थान के समीप 2 संस्कृत बोलने वाले गाँव बनाए जाने चाहिए: निशंक

केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थानों के प्रमुखों की बैठक में निशंक ने संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए और भी कई महत्वपूर्ण बातें कही। उन्होंने कहा कि भारतीय भाषाओं के विकास के लिए नए तरीके खोजने की ज़रूरत है।
प्रिय असुरों, जब श्री कृष्ण सारथी थे तब तुम्हारी खटिया खड़ी कर दी थी- इस रथ में वह योद्धा हैं। रास्ते से हट जाओ...

‘द हिन्दू’ वालो, पुरी में रथ बनेगा भी, चलेगा भी, और तुम्हारी एंटी हिन्दू छाती पर मूंग भी दलेगा

काले दिल वाले इन असुरों की दृष्टि श्री कृष्ण के रथ पर है। यह हिन्दुओं पर है कि वह असुरों को रथ का पहिया तोड़ देने देते हैं, या आसुरिक इरादों को ही रथयात्रा के नीचे कुचल देते हैं...

द वायर वालो, जनेऊ के लिए इतना जहर उगलने से पहले पता किया था जनेऊ क्या है?

जिसे धार्मिक कर्मकांडों को ढकोसला मानना है, वह काहे का हिन्दू, काहे का ब्राह्मण? उसके विचारों का बोझ हिन्दू क्यों उठाए? उसके विचारों के आधार पर ब्राह्मणों को क्यों निशाना बनाया जा रहा है, जो हिन्दू ही नहीं है?

आदियोगी की प्रतिमा के सामने ईसाई मिशनरी की बेहूदगी हिन्दुओं के धैर्य की परीक्षा ही है

कहाँ से आता है इतना दुस्साहस कि किसी के धार्मिक स्थल पर घुस कर उनके धर्म को नकली कहा जाए, उसका मजाक उड़ाया जाए? और कहीं से नहीं, हमारी तथाकथित ‘सेक्युलर’ व्यवस्था से ही...
कमल हासन को हिन्दुओं के बारे में पता क्या है जो हम पर हम ही को ज्ञान बाँट रहे हैं?

‘हिन्दू’ शब्द पर इतिहास ज्ञान खराब है कमल हासन का, बस 2200 सालों से चूके हैं

फारसी साम्राज्य के राजा डैरियस-प्रथम के अभिलेखों में हिन्दू शब्द का ज़िक्र ईसा से 6 शताब्दी पूर्व का है, जबकि इस्लाम ईसा से 600 साल बाद का। और मुगलों का हिंदुस्तान में आगमन तो 16वीं शताब्दी में हुआ। यानि विशुद्ध तकनीकी रूप से भी कमल हासन 22 शताब्दियों की ‘मामूली’ सी चूक कर गए हैं।
भगवान बुद्ध

बुद्ध पूर्णिमा: आसान नहीं होता है सिद्धार्थ का गौतम बुद्ध हो जाना

गौतम बुद्ध के साथ जो घटित हुआ, वो इस संसार के हर इंसान के साथ घट सकता है। बस इसके लिए हमें अपने जीवन में गहराई लानी होगी। आज बुद्ध पूर्णिमा पर बुद्ध के मानवता को दिए गए महत्वपूर्ण योगदान के न सिर्फ स्मरण बल्कि उसे आत्मसात कर खुद भी उसी जागरण की दिशा में अग्रसर करने की चेतना जागृत करने का दिन है।

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