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कहीं च्यूइंगम पर रोक तो कहीं बच्चों के नामों पर बंदिशें, कई शहरों में तो मरना भी गैरकानूनी: जानिए कुछ ऐसे देशों के बारे में जिनके अजब गजब हैं कानून

कई देशों में स्थानीय चुनौतियों और सांस्कृतिक हकीकतों के आधार पर अजीब कानून बनाए गए हैं। सिंगापुर में च्यूइंगम पर रोक और ऑस्ट्रेलिया में वोटिंग को जरूरी बनाने वाले कानून से लेकर कबूतरों को खाना खिलाने तक पर प्रतिबंध है, ग्रीस में हेरिटेज साइट्स पर हाई हील्स पहनने पर प्रतिबंध लगा हुआ है। नॉर्वे के लॉन्गईयरब्येन में तो मरने पर प्रतिबंध लगा हुआ है।

दुनिया भर में कानून उस समाज की जरूरतों के हिसाब से बनाए जाते हैं जहाँ वे लागू होते हैं। जहाँ कुछ कानून, जैसे चोरी या हत्या जैसे अपराधों से जुड़े कानून, आम तौर पर हर जगह एक जैसे होते हैं, वहीं कुछ कानून या स्थानीय नियम किसी खास समस्या से निपटने के लिए भी हो सकते हैं। ऐसे नियम या कानून स्थानीय लोगों को तो बिल्कुल सही लग सकते हैं, लेकिन बाहरी लोग, जिन्हें इन कानूनों के पीछे के सामाजिक, ऐतिहासिक या सांस्कृतिक संदर्भ की जानकारी नहीं होती, उन्हें ये अजीब लग सकते हैं।

दुनिया भर के सात ऐसे नियम- कानून काफी अजीबोगरीब माने जाते हैं और ये समझ से परे हैं। ये अलग अलग देशों में लागू हैं।

सिंगापुर में च्यूइंगम पर प्रतिबंध

च्यूइंग गम एक समय सिंगापुर में बड़ी समस्या बन गई थी। इस चिपचिपी चीज को शरारती तत्वों ने सबवे दरवाजों के सेंसर, लॉक सिलेंडर के अंदर, मेलबॉक्स, चाबी के छेदों, लिफ्ट के बटन और एलिवेटर के बटन जैसी जगहों पर चिपकाना शुरू कर दिया था। इससे रखरखाव और सफाई का खर्चा बढ़ गया। सिंगापुर में 1987 में मास रैपिड ट्रांजिट (MRT) लोकल रेलवे सिस्टम शुरू हुआ। ये उस वक्त का सबसे बड़ा सार्वजनिक प्रोजेक्ट था, लेकिन च्यूइंगम की समस्या MRT तक भी पहुँच गई। शरारती तत्वों ने MRT ट्रेनों के दरवाजों के सेंसर पर च्यूइंगम चिपकाना शुरू कर दिया, जिससे दरवाजे ठीक से काम नहीं कर पाते थे और ट्रेन सेवाओं में रुकावट आती थी।

उस समय सिंगापुर सरकार सिंगापुर को एक ग्लोबल ट्रेडिंग हब बनाने के लिए प्रतिबद्ध थी। सफाई और सार्वजनिक स्वच्छता पर खास ध्यान दे रही थी। सरकार ने 1992 में च्यूइंग गम के आयात, बिक्री और वितरण पर प्रतिबंध लगाने वाला कानून पास किया। कानून के अनुसार, देश में च्यूइंग गम रखना गैर-कानूनी नहीं है, लेकिन च्यूइंगम बेचना, आयात करना या वितरित करना गैर-कानूनी है।

इसलिए, सिंगापुर जाने वाला कोई व्यक्ति अपने निजी इस्तेमाल के लिए थोड़ी मात्रा में च्यूइंगम देश में ला सकता है, लेकिन गलत जगह पर गम थूकना गैर-कानूनी है। सिंगापुर सरकार ने 2004 में कुछ खास वजहों जैसे दांतों की देखभाल और निकोटीन वाली च्यूइंगम के लिए कानून में छूट दी। इन्हें डॉक्टर या रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट से खरीदा जा सकता है।

दुनिया के कुछ देशों में मरना गैर-कानूनी है, मौत को रोकने के लिए नियम तक बना दिेए गए हैं

सुनने में भले ही अजीब लगे, लेकिन दुनिया में ऐसी जगहें हैं, जहाँ मरना मना है। मौत आम तौर पर हर जगह एक डरावनी और अनचाही घटना मानी जाती है, लेकिन कुछ इलाकों में तो मौत को रोकने के लिए नियम तक बना दिए गए हैं। ऐसे दुनिया के छह देश हैं, जहाँ कुछ खास शहरों में मरने के खिलाफ नियम हैं।

नॉर्वे का लॉन्गईयरब्येन शहर: स्वालबार्ड द्वीप समूह में बहुत सर्द और पर्माफ्रॉस्ट (हमेशा जमी रहने वाली जमीन) वाली जगह लॉन्गईयरब्येन है। ठंड की वजह से यहाँ लाशें सड़ती नहीं हैं। बीमारियों या संक्रमण के फैलने के खतरे को रोकने के लिए, स्वालबार्ड के गवर्नर ने अजीब नियम बना दिए हैं। नियम के अनुसार, जो लोग मर चुके हैं या लाइलाज बीमारी से जूझ रहे हैं, उन्हें दफनाने या इलाज के लिए नॉर्वे के दूसरे शहरों में जाना पड़ेगा। हालाँकि, अगर किसी की मौत शहर में हो जाती है, तो उसका अंतिम संस्कार वहीं किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए लाइसेंस और बहुत सारे कागजी काम की जरूरत होती है जिसमें महीनों लग सकते हैं।

1998 में यह साबित हो गया कि लाशों से संक्रमण फैल सकता है। दरअसल वैज्ञानिकों ने 80 साल पहले बर्फ में दफनाए गए सात लोगों के शव निकाले। ये सातों लोग 1918 की बड़ी महामारी के दौरान स्पेनिश फ्लू से मरे थे। हैरानी की बात यह है कि वैज्ञानिक सातों शवों से वायरस के जीवित नमूने निकालने में कामयाब रहे। इससे यह पुष्टि हुई कि जानलेवा बीमारियाँ पर्माफ्रॉस्ट में दफनाई गई लाशों में जीवित रह सकती हैं।

स्पेन का लानजारोन शहर लानजारोन के मेयर जोस रुबियो ने 1999 में शहर में मरने पर रोक लगा दी थी। इस रोक की वजह यह थी कि स्थानीय कब्रिस्तान अपनी क्षमता की सीमा तक भर चुका था।

फ्रांस के तीन शहरों में रोक दक्षिणी फ्रांस के तीन शहरों – ले लावांडू, सारपुरेंक्स और कुग्नॉक्स, में भी ऐसी ही रोक लगाई गई थी। 2000 में ले लावांडू के मेयर ने स्थानीय कब्रिस्तान में दफनाने के लिए जगह की कमी के कारण मरने पर रोक लगा दी। सारपुरेंक्स और कुग्नॉक्स शहरों ने भी 2007 और 2008 में ऐसे ही वजहों को देखते हुए मौत पर रोक लगा दी।

इटली का सेलिया शहर इटली के मध्ययुगीन गाँव सेलिया के मेयर ने 2015 में एक आदेश पारित किया, जिसके तहत गाँव में बीमार पड़ना या मरना आधिकारिक तौर पर गैर-कानूनी हो गया। यह कदम गाँव की बूढ़ी होती आबादी को बचाने के लिए उठाया गया था। मेयर डेविड जिकिनेला ने एक आदेश पर हस्ताक्षर किए, जिसमें कहा गया था कि निवासियों को बीमार पड़ने की मनाही है, और उन्हें अपनी सेहत को प्राथमिकता देनी चाहिए। यह सख्त कदम तब उठाया गया जब गाँव की आबादी 1960 में 1300 से घटकर 2015 में 537 रह गई थी। इसके अलावा बची हुई आबादी में से 60% लोग 65 साल से ज्यादा उम्र के थे।

ब्राजील का बिरिटिबा मिरिम: ब्राजील के बिरिटिबा मिरिम शहर के मेयर ने 2005 में एक सार्वजनिक बिल पेश किया, जिसमें निवासियों के लिए शहर में मरना गैर-कानूनी बना दिया गया, क्योंकि स्थानीय कब्रिस्तान भर चुका था। बिल में किसी सजा का प्रावधान नहीं था, लेकिन मेयर का मकसद मरने वाले लोगों के रिश्तेदारों पर जुर्माना लगाना और जरूरत पड़ने पर जेल भेजना था, ताकि कब्र के पत्थरों के लिए और जगह मिल सके।

जापान का इट्सुकुशिमा शहर: जापान का इट्सुकुशिमा शहर को मियाजिमा के नाम से भी जाना जाता है। शहर को काफी पवित्र माना जाता है, क्योंकि यहाँ कई धार्मिक स्थल और मंदिर हैं। इस जगह की पवित्रता बनाए रखने के लिए 19वीं सदी के आखिर में यहाँ बच्चे के जन्म और मृत्यु पर रोक लगा दी गई थी। इस द्वीप पर कोई कब्रिस्तान या अस्पताल नहीं है।

ऑस्ट्रेलिया में वोट न देना अपराध है

लोकतांत्रिक देशों में वोट देना नागरिकों का अधिकार माना जाता है, लेकिन ऑस्ट्रेलिया ने एक कदम आगे बढ़कर वोट न देने को दंडनीय अपराध बना दिया। दूसरे शब्दों में, ऑस्ट्रेलिया में वोट देना सिर्फ़ एक अधिकार नहीं बल्कि एक कानूनी जिम्मेदारी है, जिसका उल्लंघन करने पर A$20 ($13, £10) तक का जुर्माना लग सकता है और कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है। यह 1924 में कानून में संशोधन के जरिए किया गया था।

इस कानून के पास होने के बाद ऑस्ट्रेलिया सबसे ज्यादा वोटिंग प्रतिशत वाले देशों में से एक बन गया। भले ही यह सजा जैसा लगे, लेकिन इस कानून को लोगों का समर्थन मिला हुआ है। लोगों को वोट देने में आसानी हो, इसके लिए अधिकारियों ने कई उपाय अपनाए हैं। जैसे- देश में चुनाव शनिवार को होते हैं। इस दिन ज्यादातर लोगों की छुट्टियाँ होती है। इसके अलावा कंपनियों के लिए यह जरूरी है कि वे चुनाव के दिन कर्मचारियों को सवेतन छुट्टी दें ताकि लोगों के पास वोट देने के लिए पर्याप्त समय हो।

बच्चों के नामों को मंजूरी देती है सरकार

दुनिया भर के कई देशों में बच्चों के नाम रखने से जुड़े कुछ नियम और कानून हैं। जहाँ कुछ देशों में बच्चों के नामों के लिए सरकारी मंजूरी जरूरी माना जाता है, वहीं कुछ देश ऐसे हैं जहाँ सरकार चाहे तो बच्चों के नाम को अस्वीकार कर दे। कुछ देशों में खास नामों पर रोक है।

आइसलैंड: इस यूरोपीय देश में ‘नेशनल नेम एक्ट’ (1971, 2019 में संशोधित) के तहत लोगों का एक नेशनल रजिस्टर बना हुआ है। कानून के मुताबिक, बच्चों के नाम आइसलैंड की व्याकरण संबंधी परंपराओं के अनुसार होने चाहिए।

न्यूजीलैंड: इस देश में, ‘बर्थ्स, डेथ्स, मैरिजेज़ एंड रिलेशनशिप्स रजिस्ट्रेशन एक्ट 1995’ के तहत कुछ ऐसे नामों पर साफ तौर पर रोक है, जो अपमानजनक, शर्मनाक या बेवजह लंबे हों।

डेनमार्क: डेनमार्क में ‘पर्सनल नेम्स एक्ट’ (नेवनेलोवेन, 2003) के तहत नाम चुनने पर पाबंदियाँ लगी हुई हैं और करीब 7000 नामों को मंजूरी दी गई है, जिसमें से ही नाम रखा जा सकता है।

जर्मनी: जर्मनी का ‘सिविल स्टेटस एक्ट’ (पर्सनेंस्टैंड्सगेसेट्ज़) और ‘स्टैंडेसाम्ट’ (रजिस्ट्रार ऑफिस) के तहत नाम मंजूर करने के नियम कानूनी रूप से ज रूरी हैं। जर्मनी में बच्चों के नाम उस इलाके के ‘वाइटल स्टैटिस्टिक्स’ ऑफिस (स्टैंडेसाम्ट) से मंज़ूर होने चाहिए जहाँ बच्चे का जन्म हुआ हो। नाम से बच्चे के लिंग का पता चलना चाहिए, और नाम ऐसा नहीं होना चाहिए जो पारंपरिक रूप से सरनेम (उपनाम) के तौर पर इस्तेमाल होता हो।

फिनलैंड: ‘नेम्स एक्ट 1985’ के मुताबिक, फिनलैंड के सभी नागरिकों के फर्स्ट नाम ज्यादा से ज्यादा चार अक्षर वाले होने चाहिए। जिन लोगों का कोई ‘फर्स्ट नेम’ नहीं है, उन्हें फिनलैंड के नेशनल पॉपुलेशन डेटाबेस में नाम दर्ज कराते समय एक नाम रखना जरूरी है। इसके अलावा कानून के तहत नवजात बच्चों के माता-पिता के लिए जरूरी है कि वे अपने बच्चों का नाम रखें और जन्म के दो महीने के भीतर पॉपुलेशन रजिस्ट्री को इसकी जानकारी दें।

इस मामले में भारत माता-पिता को अपने बच्चों का नाम अपनी पसंद के अनुसार रखने की पूरी आजादी देता है। बच्चों के नाम पर पाबंदी लगाने वाला कानून भारतीयों के लिए तो कल्पना से परे है।

कबूतरों को दाना खिलाने पर रोक

किसी भी इलाके में कबूतरों की बढ़ती आबादी एक बड़ी समस्या हो सकती है, और वेनिस ने इसका समाधान ढूंढ लिया है। इटली के इस तैरते हुए शहर की सिटी काउंसिल ने कबूतरों की आबादी को तेजी से बढ़ने से रोकने के लिए उन्हें दाना खिलाने पर रोक लगाने वाला एक म्युनिसिपल नियम पास किया। शुरू में यह रोक ऐतिहासिक स्मारकों वाले इलाकों में लागू थी, लेकिन 2008 में इसे पूरे शहर में लागू कर दिया गया।

इस रोक से पहले सेंट मार्क्स स्क्वायर पर कबूतरों को दाना खिलाना पर्यटकों की एक आम गतिविधि हुआ करती थी। इस प्रतिबंध के पीछे कारण यह था कि कबूतरों की बीट से स्मारकों के संगमरमर को नुकसान पहुँचता था और इससे सफाई व सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएँ पैदा होती थीं। स्थानीय प्रशासन इस नियम को लागू करता है और इसका उल्लंघन करने पर भारी जुर्माना लगाया जाता है।

महाराष्ट्र के मुंबई में भी हाई कोर्ट के आदेश के बाद बीएमसी ने ऐसा ही प्रतिबंध लगाया था। इस फैसले के कारण दादर कबूतरखाना बंद हो गया। यह करीब 100 साल पुराना था और मुंबई में कबूतरों को दाना खिलाने की एक प्रमुख जगह माना जाता था। बॉम्बे हाई कोर्ट ने अपने आदेश में सार्वजनिक स्वास्थ्य और स्वच्छता के लिए गंभीर खतरा बताया था।

ग्रीस में हाई हील्स नहीं

जो यात्री आकर्षक स्मारकों या प्राचीन पुरातात्विक स्थलों के सामने हाई हील्स पहनकर पोज देना पसंद करते हैं, उनके लिए अपनी शानदार वास्तुकला के बावजूद ग्रीस सही जगह नहीं है। दरअसल यहाँ एक नियम है, जो ऐतिहासिक स्थलों पर हाई हील्स पहनने पर प्रतिबंध लगाता है।

2009 में ग्रीक सरकार ने एक सार्वजनिक निर्देश जारी किया, जिसमें पर्यटकों को ऐसे जूते पहनकर ऐतिहासिक स्थलों पर जाने से रोका गया, जिनसे प्राचीन संगमरमर को नुकसान पहुँच सकता है। यह प्रतिबंध तब लगाया गया जब विशेषज्ञों ने कहा कि नुकीली और पतली हील्स वाले जूते ऐतिहासिक स्थलों के फर्श को नुकसान पहुँचा सकते हैं। इन्हें आसानी से ठीक नहीं किया जा सकता। नियम तोड़ने वाले पर्यटकों के लिए €900 तक के भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया था।

कई देशों में खास कपड़े पहनने पर प्रतिबंध

हालाँकि दुनिया के ज्यादातर हिस्सों में कैमोफ्लाज प्रिंट यानी सेना की तरह के कपड़े पहनना बिल्कुल सामान्य बात है, लेकिन कैरिबियन क्षेत्र यानी अफ्रीका, एशिया और मध्य पूर्व के कुछ देशों में आम नागरिकों के लिए कैमोफ्लाज प्रिंट वाले कपड़े पहनने पर प्रतिबंध है। दुनिया भर में दो दर्जन से ज्यादा ऐसे देश हैं, जहाँ इस तरह के प्रतिबंध लगे हुए हैं। एंटीगुआ और बारबुडा, बारबाडोस, बहामास, डोमिनिका, ग्रेनाडा, सऊदी अरब, घाना, नाइजीरिया और फिलीपींस में इससे जुड़ा कानून हैं, जो आम नागरिकों के लिए कैमोफ्लाज कपड़ों पर प्रतिबंध लगाते हैं।

इन कानूनों का उल्लंघन करने पर सामान जब्त किया जा सकता है, भारी जुर्माना लगाया जा सकता है या गिरफ्तारी भी हो सकती है।

(यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी में लिखा गया है। इसे पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।)

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