धर्म और संस्कृति

साधना से मर्यादा तक: चैत्र नवरात्र और रामनवमी की शक्ति संस्कृति

जिस सभ्यता की कालगणना शक्ति साधना से आरंभ होती है, विडंबना है कि उसी समाज को वैचारिक आक्रांताओं ने अहिंसा की विवशता का पाठ पढ़ा दिया।

सदियों पुरानी परंपरा जब मंदिरों से निकल गाँव में जुटते हैं ‘भगवान’, लगती है देव सभा: जानें- ओडिशा के ‘पंचू डोला मेला’ का इतिहास

ओडिशा की मशहूर पंचू डोला मेला भुवनेश्वर से 15 किलोमीटर दूर हरिराजपुर गाँव की महान परंपरा है। इसमें सभी गाँव के देवता एकत्रित होते हैं और होली की तरह का त्यौहार मनाया जाता है।

5000 साल पुराना इतिहास, जमीन में धँसती जा रही प्रतिमा: जानें- राजस्थान में स्थित दुनिया के इकलौते ‘विभीषण मंदिर’ की कहानी, जिसे वक्फ संपत्ति...

राजस्थान के कोटा में स्थित विभीषण मंदिर को दुनिया का इकलौता मंदिर माना जाता है। यह मंदिर लगभग पाँच हजार वर्ष पुराना बताया जाता है।

होली स्पेशल में हिरण्यकश्यप, रावण और शिशुपाल की कथा: वैकुंठ लोक के द्वारपाल जय-विजय को क्यों 3 जन्म बनना पड़ा असुर? भगवान ने दिलाई...

यह कहानी वैकुंठ लोक की है, जो भगवान विष्णु का निवास स्थान है। वहाँ ब्रह्मा के मानस पुत्र सनकादिक ऋषि, भगवान विष्णु से मिलने बैकुंठ लोक गए।

होली: भारतीय सभ्यता की आत्मा और आधुनिक जीवन में प्रासंगिकता

भारत ने दुनिया को एक विचार दिया है: जीवन उत्सव है। होली उस विचार की सबसे रंगीन, सबसे खुली, सबसे निर्भीक अभिव्यक्ति है।

गिरनार की गोद में शिवत्व का साक्षात्कार: भावनाथ मेले में भीड़ के बीच आत्मिक शांति की अनोखी यात्रा, जानिए मेरा अनुभव

गुजरात के जूनागढ़ के गिरनार पर्वत की तलहटी में महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर भावनाथ महादेव मंदिर में प्रतिवर्ष एक अनूठा मेला लगता है।

अलौकिक प्रकाश, अदृश्य साधकों का वास और दिव्य अनुभव: जानिए गुजरात का गिरनार पर्वत क्यों है हिंदुओं के लिए खास, महाशिवरात्रि पर महादेव करने...

गिरनार का रहस्य चमत्कारों की कहानी नहीं, बल्कि आत्म-साक्षात्कार की यात्रा है। यहाँ सिद्धि का अर्थ किसी अलौकिक शक्ति से नहीं, बल्कि अपने भीतर की पहचान से है।

भक्ति, तप, सेवा और सत्संग… ‘हर-हर महादेव’ के साथ हुई भावनाथ मेले की शुरुआत: जानिए क्यों कहा जाता है इसे गुजरात का ‘मिनी कुंभ’

गुजरात में भावनाथ का मेला बुधवार (11 फरवरी 2026) से शुरू हुआ। इसकी तैयारियों और विशालता को देखते हुए इसे ‘मिनी कुंभ’ भी कहा जा रहा है।

बंगाल में 700 साल बाद ‘बोंगो त्रिवेणी कुंभ’ का आयोजन, इस्लामी आक्रमणों से बंद था महोत्सव: जानें- कैसे फीनिक्स की तरह जगी सनातनी परंपरा,...

बोंगो त्रिवेणी कुंभ महोत्सव 2026 का आयोजन 11 से 14 फरवरी तक आयोजित होगा। पीएम मोदी ने 'मन की बात' में और पत्र के जरिए इसकी सराहना की है।

वीणा की नाद, माँ सरस्वती का आशीर्वाद और ज्ञान का प्रकाश: क्यों बसंत पंचमी केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भारतीय चेतना का उत्सव है

बसंत पंचमी देश भर में मनाया जाने वाला एक ऐसा पर्व है जो मनुष्य के भीतर नई ऊर्जा, नई संवेदनशीलता और नई दृष्टि का संचार करता है।

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