कौन नहीं जानता है कि गायों को हरावल दस्ते में आगे रखकर हिंदुओं को जीतने वाले कायर रेगिस्तानी बर्बरों ने हिंदुओं की चेतना को खत्म करने के लिए मंदिरों को अपवित्र किया, मूर्तियाँ तोड़ीं और बलात्कार किए।
वीडियो वायरल होने के बाद सदगुरु द्वारा संचालित ईशा फाउंडेशन ने पूरे मामले पर अपनी सफाई पेश की है। फाउंडेशन ने मामले पर संज्ञान लेते हुए कहा कि सदगुरु द्वारा यशोदा और कृष्ण की बातचीत को बड़ी चालाकी से एडिट किया गया है।
मध्यकालीन भारतीय मंदिरों के भित्तिचित्रों और आकृतियों में होली के सजीव चित्र देखे जा सकते हैं। उदाहरण के लिए इसमें 17वीं शताब्दी की मेवाड़ की एक कलाकृति में महाराणा को अपने दरबारियों के साथ चित्रित किया गया है।