जहाँ ब्रजधाम में राधा और कृष्ण के होली खेलने के वर्णन मिलते हैं वहीं अवध में राम और सीता के जैसे होली खेलें रघुवीरा अवध में। राजस्थान के अजमेर शहर में ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर गाई जाने वाली होली का विशेष रंग है।
बनारस की होली भी बनारस के मिजाज के अनुसार ही अड़भंगी और निराली है। यह दुनिया का इकलौता शहर जहाँ अबीर, गुलाल के अलावा धधकती चिताओं के बीच चिता-भस्म से होली खेली जाती है।
"कभी ये मंदिर था, भक्ति का, समर्पण का! अब ऐसा खंडहर है कि शराबियों और गंदगी फैलाने वालों के लिए भी सुरक्षित नहीं है। समय आ गया है कि तमिलनाडु के मंदिर मुक्त हों।"
रंगभरी एकादशी वैसे तो पूरे देश में मनाई जाती है, पर काशी जैसा उत्साह शायद ही कहीं दिखता है। रंग-गुलाल से सराबोर काशी की यह परंपरा 357 साल पुरानी है। आज से बुढ़वा मंगल तक अब हर तरफ बनारस में एक ही रंग दिखेगा और वह रंग है होली का।
अयोध्या के राम मंदिर में सीता एलिया के पत्थर का भी इस्तेमाल होगा। सीता एलिया श्रीलंका में है। मान्यता है कि माता सीता को रावण ने यहीं बंदी बनाकर रखा था।
12000 मंदिर अस्तित्व खो रहे हैं। 25 वर्षों में 1200 प्राचीन प्रतिमाएँ चोरी हो गईं। मंदिरों की 50000 एकड़ भूमि अवैध कब्जे में चली गई। सरकार खुद को सेक्युलर कहती है तो मंदिरों पर कब्जे किए क्यों बैठी है?