अगर भारतीय टीम, वेस्टइंडीज़ को हराने के बाद इंग्लैंड को भी हरा देती है तो वो 124 अंक पर पहुँच जाएगी, जबकि इंग्लैंड की टीम खिसक कर 121 अंकों पर पहुँच जाएगी।
कोर्ट ने महाराष्ट्र में सरकारी नौकरियों और शिक्षा में मराठा समुदाय के लिए आरक्षण की वैधता को बरकरार रखते हुए कहा कि मराठा आरक्षण को 16% से घटाकर 12 या 13% करना चाहिए।
कंपनी ने सरकार से तत्काल फंड की सुविधा माँगी है। बीएसएनएल ने सरकार से ऑपरेशन जारी रखने में अक्षमता जताते हुए कहा कि कंपनी के पास कामकाज जारी रखने के लिए पैसे नहीं हैं। कंपनी के पास लगभग ₹13,000 करोड़ की आउटस्टैंडिंग लायबिलिटी है जिसने कारोबार चलाना मुश्किल बना दिया है।
साउथ अफ्रीका को हराने के बाद हुई इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में मिकी से एक पत्रकार ने पूछा कि क्या आखिरी ओवर तक हारिस सोहेल थक गए थे, क्योंकि वे शतक नहीं लगा पाए? पत्रकार के इस सवाल पर मिकी काफ़ी भड़क गए।
दक्षिण अफ्रीका के पास ऑस्ट्रेलिया जैसी बेंच स्ट्रेंथ भी नहीं है, और जब टीम की ख़राब हालत का पूर्वानुमान कर रिटायर हो चुके एबी ने विश्व कप के लिए लौटने का प्रस्ताव दिया तो उसे भी प्रबंधन ने ठुकरा दिया।
इनमें से कई हिंदू एक दशक से अधिक समय से भारत में रह रहे हैं। इनमें बाड़मेर के 19, पाली के 10 और राजस्थान के जालोर ज़िले के 5 लोग शामिल हैं। पाकिस्तान से आए प्रवासी हिंदुओं को भारतीय नागरिकता प्राप्त करने के लिए एक व्यापक और लंबी प्रक्रिया से गुज़रना पड़ता है।
त्यागपत्र देने के बाद विरल आचार्य वापस न्यू यॉर्क विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के प्राध्यापक के रूप में कार्य करेंगे ऐसी संभावना प्रबल है। आचार्य को मौद्रिक नीति के विशेज्ञ के रूप में जाना जाता है।
त्रिपुरा में फ़िलहाल 4,389 सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल हैं। नाथ ने कहा कि राज्य सरकार के अधीन आने वाले 147 स्कूलों ऐसे हैं जिनमें अधिकतम 10 बच्चे पढ़ते हैं। बाकी 13 बंद पड़े हैं क्योंकि उनमें एक भी बच्चा नहीं पढ़ता।
गढ़वालियों में यह बहुत कॉमन है - फिर चाहे आप किसी अजनबी से ही क्यों न मिल रहे हों, यह पूछना तो बनता ही है कि "और आपका स्वास्थ्य-पानी सब ठीक है?" और ठीक इसी तर्ज पर डोवाल ने भी गाँव में मौजूद नाते-रिश्तेदारों का हाल-चाल जाना, सबको हाथ जोड़ शुभकामनाएँ दीं।
जब डॉक्टर मुखर्जी का पार्थिव शरीर कश्मीर से कोलकाता लाया जा रहा था, उससे पहले शेख अब्दुल्ला ने उनके पार्थिव शरीर पर कश्मीरी शॉल डाला था। शेख अब्दुल्ला सहित उनकी कैबिनेट के अनेक मंत्रियों ने पार्थिव शरीर पर माल्यार्पण किया था। अब्दुल्ला ने एक माला बेगम अब्दुल्ला की तरफ़ से भी पेश किया था।