ये सभी लोग दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में छुपे हुए थे। लॉकडाउन के दौरान भारत में फँसे अन्य मलेशियाई नागरिकों को स्वदेश पहुँचाने के लिए मलेशियाई उच्चायोग द्वारा विशेष विमान की व्यवस्था की गई थी। इन 8 जमातियों ने इस विशेष उड़ान का अनुचित लाभ उठाने की कोशिश की।
आँध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले में स्थित रयावरम गाँव से एक पादरी हिरासत में लिया गया। पादरी पर आरोप है कि उसने लॉकडाउन के बीच 100 से अधिक लोगों को एक जगह इकट्ठा कर प्रार्थना करवाई। ये कार्यक्रम इसाइयों के पवित्र सप्ताह शुरू होने से पहले आयोजित किया गया।
मेडिकल टीम के सदस्यों को स्थानीय लोगों ने दौड़ा दिया। गिरते-पड़ते किसी तरह टीम वहाँ से जान बचाकर भागी। भीड़ इतनी उग्र थी कि उनके पास भागने के अवाला कोई और विकल्प नहीं था। पहले तो स्थानीय लोगों ने गाली-गलौज की और फिर इन पर हमला कर दिया।
कल से आज तक 472 नए मामले सामने आए हैं, जिससे देश में कोरोना संक्रमित कुल मामलों की संख्या अब 3374 तक पहुँच चुकी है। अग्रवाल ने यह भी बताया कि अब तक देश के 274 जिलों से कोरोना संक्रमण के केसेस आ चुके हैं। जबकि भारत में अब तक कोरोना के कारण मरने वालों की संख्या 79 हो चुकी है, जिसमें से 11 शनिवार और रविवार को मिलाकर हुई हैं।
26 तबलीगी जमात के सदस्यों को दरियापुर से लाकर सोला के सिविल अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती करवाया गया था। जब मेडिकल टीम ने उनकी जाँच करने की कोशिश की, तो उन्होंने जाँच करवाने से मना करते हुए हँगामा खड़ा कर दिया। इनका आरोप था कि सरकार इन्हें जान से मारने की कोशिश कर रही है।
जहाँ मरकज बना हुआ है, वहाँ पहले एक छोटा सा मदरसा होता था। मदरसा भी नाममात्र जगह में ही था। यहाँ क्षेत्र के ही कुछ लोग नमाज पढ़ने आते थे। लेकिन 1992 में मदरसे को तोड़कर बिल्डिंग बना दी गई।
10 इंडोनेशियाई नागरिकों के खिलाफ गाजियाबाद पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है। इनके खिलाफ टूरिस्ट वीजा नियमों के उल्लंघन करने के आधार पर FIR दर्ज हुई। गाजियाबाद के एसएसपी कलानिधि मारन ने बताया कि एक लोकल गाइड और उन चार लोगों के खिलाफ भी केस दर्ज कर लिया गया है, जिन्होंने इन सभी को छुपाए रखने की कोशिश की थी।
अबरार ने जो फर्जी न्यूज शेयर की थी, उसमें कहा गया था कि वैष्णो देवी के मंदिर में फँसे 400 लोगों में से 145 लोगों का कोरोना टेस्ट पॉजिटिव पाया गया है। बाकियों का टेस्ट जारी है और नए मामले भी सामने आ सकते हैं।
“जब मेरी पत्नी को प्रसव पीड़ा हुई तो मैंने 108,102,1031 आदि कई हेल्पलाइन नंबर पर कॉल किया। मगर संपर्क नहीं हो सका। इसके बाद मैंने दिल्ली पुलिस को कॉल किया, जो 20 मिनट में हमारे पास पहुँची और हमें अस्पताल ले गई।"
एक अप्रैल को शहर के जिस इलाके में डॉक्टरों पर पथराव किया गया था वहॉं से 10 संक्रमित मिले हैं। मरने वालों में 42 वर्षीय व्यक्ति से लेकर 80 साल की बुजुर्ग महिला तक शामिल हैं। इस बीच एक संक्रमित लड़की के लिफ्ट लेकर अस्पताल से घर पहुॅंच जाने का मामला भी सामने आया है।