पुलिस को संदेह है कि उनके सिर पर किसी भारी चीज से वार किया गया, जिससे उनकी मौत हो गई। फ़िलहाल डेड बॉडी को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है। कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुँच कर सबूत जुटाए।
पराशरण ने कहा कि अगर लोगों को विश्वास है कि किसी जगह पर दिव्य शक्ति है तो इसे न्यायिक व्यक्ति माना जा सकता है। उन्होंने कुड्डालोर मंदिर का उदाहरण देते हुए कहा कि वहाँ मंदिर में कोई मूर्ति नहीं है और केवल एक दीया जलता है जिसकी पूजा की जाती है।
"बड़े-बड़े रेस्तरां या होटलों में आने वाले ग्राहक बहुसंख्या में हिन्दू या गैर-मुस्लिम ही होते हैं लेकिन वे किसी ख़ास प्रकार (झटका या हलाल) पर जोर नहीं देते, जबकि मुस्लिम ग्राहक केवल हलाल पर ही जोर देते हैं। अतः इसे आर्थिक रूप से लाभकारी बनाने के लिए हिन्दुओं को ही जोर लगाना होगा।"
अगस्त में मैक्डॉनल्ड्स ने कबूल किया था कि गैर-मुस्लिमों के साथ भेदभाव भारत में उसके बिज़नेस मॉडल का हिस्सा है। उसने अपने सभी रेस्तरां में केवल हलाल मांस बेचने और उनके हलाल प्रमाणित होने की बात कही थी। हलाल पशु वध का एक इस्लामी तरीका है, जो बेहद क्रूर होता है।
कानून के दुरुपयोग और झूठे मुकदमों से बेहाल लोगों के बारे में सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने बताया कि यह "मानवीय असफलता" ("human failure") के चलते होता है न कि जातिवाद या जाति व्यवस्था के चलते।
"चिन्मयानंद ने उसका बलात्कार किया और जब उसने खुद को बचाने का प्रयास किया तो चिन्मयानंद द्वारा उसके कपड़े फाड़ दिए गए। चिन्मयानंद के आश्रम के सुरक्षा गार्ड सहित 4 लोगों ने इस बात की पुष्टि की है कि..."
सियानी ने इस्लाम अपनाने के बाद अपना नाम बदल कर आयशा रख लिया है। वह जल्द ही अपने प्रेमी से निकाह करने वाली है। उसके माता-पिता ने बेटी का ब्रेनवाश कर आतंकी संगठन में शामिल किए जाने की आशंका जताई थी।
छात्र संघ ने निदेशक को चेतावनी दी थी कि एनआईटी मेघालय में भगवान गणेश की मूर्ति को मुख्य रूप से परिसर में स्थापित करने के फैसले से ईसाई बहुमत वाले राज्य में ‘सांप्रदायिक तनाव’ पैदा हो सकता है।
अर्जुन के पिता की आर्तिक हालत बेहद ही खराब है। परिवार को सरकारी योजना का लाभ भी नहीं मिलता है और राशन कार्ड न होने की वजह से राशन भी उचित दाम पर नहीं मिलता है।
वह बंगलौर के आर्मी हॉस्पिटल में बतौर पैरामेडिक कार्यरत था। रिटायर होने के बाद उसने 2 नर्सिंग होम खोले और स्वास्थ्य केंद्र में नौकरी करने लगा। वह आयुष्मान भारत योजना के तहत सरकार से ₹14 लाख प्राप्त कर चुका है। जानिए कैसे रंगदारी के एक मामले ने खोली फ़र्ज़ी डॉक्टर की पोल!