Tuesday, January 18, 2022
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बाबर नहीं था विध्वंसक, मीर बाकी ने बनाई मस्जिद: मुस्लिम पक्ष, अब सिर्फ चार दिन और होगी बहस

सुनवाई के दौरान जब जस्टिस चंद्रचूड़ ने पूछा कि क्या इस बात का कोई सबूत है कि बाबर ने बाबरी मस्जिद को कोई इमदाद दी हो? इस पर राजीव धवन ने कहा कि उस दौर में इसका कोई सबूत हमारे पास नहीं है।

विवादित राम जन्मभूमि पर सुनवाई के दौरान 37वें दिन शुक्रवार (अक्टूबर 4, 2019) को मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने कहा कि वह अपनी जिरह सोमवार 14 अक्टूबर तक खत्म कर लेंगे। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि शनिवार (अक्टूबर 5, 2019) को सुनवाई नहीं होगी और उसके बाद से 13 तक कोर्ट बंद रहेगी। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने अयोध्या के इस मामले से संबंधित ने सभी पक्षों से कहा कि 17 अक्टूबर तक बहस पूरी करें।

पहले सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी पक्षों को 18 अक्टूबर तक बहस पूरी करने के लिए कहा था। इस केस में 14 अक्टूबर को मुस्लिम पक्ष की ओर से राजीव धवन बहस जारी रखेंगे। बाकी सब पक्षकार 15-16 को दलीलें देंगे और 17 अक्टूबर को सुनवाई पूरी होगी। यानी अब सिर्फ चार दिन ही सुनवाई होनी बाकी रह गई है।

राजीव धवन ने कोर्ट में अपनी दलील देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट अनुच्छेद 142 के तहत मिली अपरिहार्य शक्तियों के तहत दोनों ही पक्षों की गतिविधियों को ध्यान में रखकर इस मामले का निपटारा करे। इस मामले में मस्जिद पर जबरन कब्जा किया गया। लोगों को धर्म के नाम पर उकसाया गया। रथयात्रा निकाली गई। लंबित मामले में दबाव बनाया गया। मस्जिद ध्वस्त की गई और उस समय मुख्यमंत्री रहे कल्याण सिंह ने एक दिन की जेल अवमानना के चलते काटी। अदालत से गुजारिश है कि तमाम घटनाओं को ध्यान में रखे।

सुनवाई के दौरान जब जस्टिस चंद्रचूड़ ने पूछा कि क्या इस बात का कोई सबूत है कि बाबर ने बाबरी मस्जिद को कोई इमदाद दी हो? इस पर राजीव धवन ने कहा कि उस दौर में इसका कोई सबूत हमारे पास नहीं है।

धवन ने कहा कि 1934 में दंगों के दौरान इमारत को नुकसान पहुँचा और धारा 144 लगाई गई। साथ ही धवन ने इतिहास की बातों का जिक्र करते हुए कहा कि बाबर पर मन्दिर तोड़कर मस्जिद बनाने का इल्जाम लगाया जाता है। बाबर कोई विध्वंसक नहीं था। मस्जिद तो मीर बाकी ने बनाई थी, वो भी एक सूफी के कहने पर। इसके आगे धवन ने एक लाइन कही, ‘है राम के वजूद पर हिन्दोस्तां को नाज़ अहले नज़र समझते हैं उसको इमाम ए हिन्द!’

धवन ने कहा कि क्या न्यायिक व्यक्ति होने के लिए धार्मिक विश्वास होना काफी है? कोर्ट को तय करना है कि न्यायिक व्यक्ति क्या होगा? अगर सिर्फ विश्वास पर मामला आधारित है तो सभी मुस्लिम का विश्वास है वहाँ पर मस्जिद थी। धवन ने कहा कि हिंदुओं को पहले यह साबित करना होगा कि वहाँ मंदिर था और उसके बाद यह साबित करना होगा कि मुस्लिम ने उस पर कब्ज़ा किया। उन्होंने कहा कि वो जानना चाहते हैं कि 1885 से पहले वहाँ पर क्या हुआ था?

 

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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