पश्चिम बंगाल में हिंसा का आरोप सत्ताधारी दल पर ही है, अर्धसैनिक बल भी 4 जून के बाद उनके ही हाथ में रहेंगे - ऐसे में क्या गारंटी है कि हिंसा के मामलों में निष्पक्ष कार्रवाई होगी?
साल 2022 और साल 2024 की टीम के बीच 6 खिलाड़ियों का अंतर है, जो बाकी टीमों के लिए सिरदर्दी साबित हो सकते हैं। वहीं, पुराने खिलाड़ियों का भी खेल बदला-बदला सा नजर आ रहा है, इसमें विराट कोहली, शिवम दुबे को ही देख लीजिए।
चूँकि ममता बनर्जी ने कहा कि संदेशखाली बीजेपी की साजिश थी और इसे गोदी मीडिया ने ही कवर किया, ऐसे में रवीश कुमार ने एकदम पालतू वाली स्टाइल में उन्हीं बातों को दोहरा दिया।
'केरोसिन तेल छिड़का जा चुका है, एक चिंगारी से पूरे देश में आग लग जाएगी' - राहुल गाँधी का ये 2 साल पुराना बयान याद कीजिए, और आज नीलू व्यास थॉमस को सुनिए। मतगणना के बाद हिंसा भड़काने की पूरी प्लानिंग तैयार है। शाहीन बाग़ और किसान आंदोलन शायद इसका ही एक्सपेरिमेंट था।
सेलिब्रिटियों के तलाकों पर होती चर्चा बताती है कि हमारे समाज पर ऐसी खबरों का असर हो रहा है और लोग इन फैसलों से इन्फ्लुएंस होकर अपनी जिंदगी भी उनसे जोड़ने लगे हैं।