एक तरफ योगेंद्र यादव 'बाबासाहब के सपनों' की बात करते हुए जाति मिटाने की भी बात करते हैं, दूसरी तरफ ये भी चाहते हैं कि हर कोई अपनी जातिगत पहचान आगे करे। दोनों चीजें एक साथ कैसे हो सकती हैं?
RA&W और सेना के पूर्व अधिकारी कह चुके हैं कि कॉन्ग्रेस ने पंजाब में खिसकती जमीन वापस पाने के लिए भिंडराँवाले को पैदा किया। अब वही फॉर्मूला पार्टी अमृतपाल सिंह के साथ आजमा रही। कॉन्ग्रेस के बड़े नेता जरनैल सिंह के सामने फर्श पर बैठते थे। संजय गाँधी ने उसे 'संत' बनाया था।
ये लोग जो भी हमसे कमाते हैं उससे ही तो इनकी आर्थिक व्यवस्था और स्थिति मजबूत होती है, उसी का इस्तेमाल ये हमारे खिलाफ करते हैं तो फिर हिंदू क्यों मजबूर हो कि वह उनके हाथ का खाए।